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बजट से पहले रेलवे शेयरों में उछाल, मार्केट कैप 66,500 करोड़ रुपए बढ़ा

  नई दिल्ली। काफी समय बाद भारतीय रेलवे से जुड़े शेयरों में एक बार फिर मजबूती देखने को मिली है। पिछले पांच कारोबारी सत्रों के दौरान रेलवे सेक्टर के शेयरों में तेज बढ़त दर्ज की गई, जिससे इस सेक्टर से जुड़ी  आगामी केंद्रीय बजट से पहले निवेशक रेलवे सेक्टर में दोबारा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसके साथ ही कंपनियों की कमाई को लेकर संकेत भी बेहतर नजर आ रहे हैं, जिससे शेयरों में खरीदारी बढ़ी है। गौरतलब है कि वर्ष 2025 के दौरान रेलवे शेयर लंबे समय तक दबाव में रहे। जुलाई 2024 में सेक्टर के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद शेयरों में गिरावट आई थी। उस समय ऊंचे वैल्यूएशन और सरकारी समर्थन को लेकर कमजोर उम्मीदों के चलते कई शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी।
 हालिया तेजी से यह संकेत मिलता है कि निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे लौट रहा है। इसके पीछे यात्री किराए में बढ़ोतरी, बजट से जुड़ी सकारात्मक उम्मीदें और कुछ कंपनियों से संबंधित बेहतर खबरें प्रमुख वजह मानी जा रही हैं। इस तेजी में ज्यूपिटर वैगन्स के शेयर सबसे आगे रहे, जिनमें महज पांच कारोबारी सत्रों में करीब 37% की बढ़त दर्ज की गई। रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के शेयरों में लगभग 27% और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (आईआरएफसी) के शेयरों में 20% से अधिक की तेजी देखने को मिली।
 इसके अलावा इरकॉन इंटरनेशनल, टीटागढ़ रेल सिस्टम्स, रेलटेल कॉर्पोरेशन, टेक्समैको रेल एंड इंजीनियरिंग, राइट्स और बीईएमएल जैसी रेलवे से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, इस उछाल के बावजूद अधिकांश रेलवे स्टॉक अपने पुराने उच्च स्तर से अब भी नीचे बने हुए हैं।
 रेलवे शेयरों में आई इस तेजी के पीछे एक अहम कारण भारतीय रेलवे द्वारा 26 दिसंबर से यात्री किराए में की गई बढ़ोतरी भी है। वित्त वर्ष 2026 के दौरान यह दूसरी बार है, जब यात्री किराए में संशोधन किया गया है। लंबी दूरी की यात्रा में सामान्य, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के किराए में प्रति किलोमीटर 1 से 2 पैसे की वृद्धि की गई है, जबकि लोकल और उपनगरीय ट्रेनों के किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
 इस किराया वृद्धि से भारतीय रेलवे को चालू वित्त वर्ष में करीब 600 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आमदनी होने की उम्मीद है। वर्तमान में यात्री ट्रेन सेवाएं घाटे में चल रही हैं, क्योंकि किराया लागत से करीब 45% कम है। इस घाटे की भरपाई माल ढुलाई से होने वाली आय से की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि किराए में यह बदलाव रेलवे की आय बढ़ाने, घाटे को कम करने और वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में सहायक साबित होगा। 

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