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 कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों के साथ उपसंचालक कृषि, बिलासपुर ने किया संयुक्त नैदानिक भ्रमण

बिलासपुर/ जिले के विभिन्न ग्रामों में धान की फसल गभोट से लेकर दूधिया अवस्था में है। कुछ शीघ्र पकने वाली किस्में परिपक्वन अवस्था में है। इस अवस्था में दिन का तापमान ज्यादा होने एवं रात का तापमान तुलनात्मक रूप से कम होने तथा सतत् वर्षा होने के कारण कीड़े एवं बिमारियों के लिए अनुकूल परिस्थिति है। किसानों के खेतों में फसल की निगरानी हेतु दिनांक 07.10.2024 को कृषि विज्ञान केन्द्र एवं उपसंचालक कृषि बिलासपुर के संयुक्त निरीक्षण दल ने मस्तूरी विकासखण्ड के ग्राम जयरामनगर-खैरा में किसानों के खेतों में भ्रमण कर कीट-व्याधि प्रकोप का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान लगभग 100 एकड़ में लगी धान की किस्म सम्पदा एवं राधे स्वर्णा में तना छेदक कीट का अत्यधिक प्रकोप पाया गया। अनुमानतः 25-30% तक क्षति होने की आशंका है। इस वर्ष तनाछेदक कीट का प्रकोप बढ़ने का मुख्य कारण कीट के अनुकूल जलवायु, दवाओं के प्रयोग के उपरांत वर्षा हो जाने से दवाओं का असर न होना तथा कीट में दवाओं के प्रति प्रतिरोधिता का विकसित होना है। चंूकि धान की फसल अब मिल्किंग तथा परिपक्वन अवस्था में है, विभिन्न दवाओं का प्रयोग करने के कारण अब अनुशंसित दवाएं क्लोरानट्रेनिलिप्रोल 18.5% SC60 मि.ली. प्रति एकड़ या कार्टाफ हाइड्रोक्लोराइड 50% SP 400 ग्राम प्रति एकड़ कारगर नहीं होंगी एवं काफी नुकसान की आशंका है। 
नैदानिक भमण में यह पाया गया कि धान की बालियों में दाने भरने की अवस्था में लगभग 25% से अधिक बालियां तनाछेदक के आक्रमण से सूख चुकी है तथा वयस्क कीटों की संख्या भी आर्थिक क्षति स्तर से अधिक पायी गयी। 
           उपसंचालक कृषि, श्री पी.डी. हथेस्वर ने उन किसानों को जिनके खेत में धान गभोट अवस्था में है सलाह दीकि नत्रजन युक्त रासायनिक उर्वरकों का अनुशंसित मात्रा अनुरूप ही उपयोग करें,खेतों का लगातार निरीक्षण करते रहें तथा कीड़े बिमारियों का प्रकोप दिखने पर कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों तथा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी व वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी को सूचित कर सिफारिश की गई दवाओं का ही उपयोग करें। कृषि विज्ञान केन्द्र, बिलासपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. अरूण कुमार त्रिपाठी ने किसानों को समझाइस दी कि किसी भी कीड़े बिमारी का प्रकोप दिखने के बाद भारत सरकार द्वारा जारी किसान काल सेंटर के निःशुल्क दूरभाष नंबर 18001801551 पर डायल कर विशेषज्ञ से परामर्श के उपरांत ही दवा का छिड़काव करें या कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों से परामर्श उपरांत कीड़े बिमारियों का प्रबंधन करें। प्रायः देखने में आ रहा है कि किसान भाई दवा की ज्यादा मात्रा का प्रयोग गलत समय पर कर देते हैं। जिसके कारण कीट व्याधियों का नियंत्रण नहीं होता तथा उनमें प्रतिरोधिता विकसित होती है। उन्होंने किसानों से अनुरोध किया कि कीड़े बिमारी से ग्रसित फोटो खींच कर वाट्सएप के माध्यम से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित क्रॉप डॉक्टर एप में अपलोड कर वैज्ञानिक परामर्श के अनुसार दवाओं का प्रयोग करें। पौध रोग विशेषज्ञ श्री जयंत साहू ने सलाह दी कि जिन खेतों में धान गभोट अवस्था में है वहां भी तना छेदक का प्रकोप होने की आशंका है, इसके प्रबंधन के लिए किसान प्रकाश प्रपंच एक प्रति हेक्टेयर की दर से या 5 फेरोमॉन ट्रेप प्रति एकड़ की दर से धान के खेतों में लगाएं एवं पीले स्टिकी ट्रेप का प्रयोग करें। डॉ. साहू ने किसानों को सलाह दी कि आर्थिक क्षति स्तर को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों से परामर्श के उपरांत ही अनुशंसित दवाओं का प्रयोग करें। धान की फसल मे विगत वर्षों में शीथ ब्लाइट नामक बिमारी का प्रकोप ज्यादा उत्पादन देने वाली धान की किस्मों में देखा जा रहा है, इससे बचाव के लिए किसानों को गभोट अवस्था में ही थायोफ्लूजामाइड 24% SC का 150 मिली/एकड़ की दर से छिड़काव करने की सलाह दी। कीट वैज्ञानिक, डॉ. एकता ताम्रकार ने किसानों को सलाह दी कि दो या दो से अधिक रासायनिक कीटनाशक, कवकनाशक दवाओं का प्रयोग करने के पहले कम्पैटिबिलिटी के बारे में जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर व्हाइट इयर हेड (पोचे दाने वाली बाली) 1-2 प्रति वर्गमीटर से ज्यादा पाए जाने पर कीटनाशक दवाओं क्लोरानट्रेनिलिप्रोल 18.5% SC 60मि.ली. प्रति एकड़ या कार्टाफ हाइड्रोक्लोराइड 50% SP 400 ग्राम प्रति एकड़ की दर से शाम के समय वर्षा न होने की दशा में होलोकॉन नोजल से छिड़काव करें।
 

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