गोड़ आदिवासी समुदाय ने मनाया नवाखाई पर्व, साजा पेड़ की पूजा के साथ सम्पन्न हुआ आयोजन
बालोद। नवरात्र की नवमीं को भीमदों गाँव के गोड़ आदिवासी समुदाय ने गोड़ रीति रिवाज अनुसार नवाखाई पर्व मनाया। ग्राम भीमदों में गोड़ जाती के लोगों ने साजा पेड़ की पूजा कर नवाखाई का पर्व मनाया। गोड़ आदिवासी समुदाय के लिए साजा पेड़ कुलदेवता के रूप में पूजनीय है।
ग्राम भीमदों के सुरेश कोरेटी ने बताया कि आदिकाल से ही गोड़ समुदाय के पूर्वजों ने साजा पेड़ का आश्रय लिया और इसके नीचे अपने निवास बनाकर रहने लगे। यह पेड़ समुदाय को प्राकृतिक आपदाओं से बचाता है और उनकी रक्षा करता है। नवाखाई परंपरा में गोड़ जाती के लोग साजा पेड़ की पूजा करते हैं और नई फसल के अनाज को कच्चा दूध में भिगोकर पूजा में अर्पित करते हैं। इसके बाद घरों में स्थापित देवताओं का पूजा अर्चना किया जाता है। इस अवसर पर दूध में भीगा हुआ चावल का प्रसाद वितरित करते हैं और परिवार के बड़े बुजुर्गों से आशीर्वाद लेते हैं। गोड़ आदिवासी समुदाय की संस्कृति और परंपरा में नवाखाई एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह परंपरा समुदाय की एकता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देती है।


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