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बिजली मांग पूरा करने को 2047 तक 2,100 मेगावाट उत्पादन क्षमता की जरूरत: मनोहर लाल

नयी दिल्ली. केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल ने सोमवार को कहा कि देश में बिजली की मांग 2047 तक बढ़कर 708 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है और इस बढ़ती मांग पूरा करने के लिए विद्युत उत्पादन क्षमता उस समय तक चार गुना बढ़ाकर 2,100 मेगावाट करने की जरूरत है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 30 सितंबर तक भारत की कुल बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 453 गीगावाट (एक गीगावाट बराबर 1,000 मेगावाट) थी, जबकि इस वर्ष अधिकतम बिजली मांग को लेकर सरकार का अनुमान 260 गीगावाट था। हालांकि, बारिश के कारण कम तापमान की वजह से मांग इस स्तर पर नहीं पहुंची और अधिकतम बिजली की मांग 250 गीगावाट के आसपास रही। मंत्री ने ‘2047 तक भारतीय विद्युत क्षेत्र परिदृश्य पर विचार-मंथन सम्मेलन' को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि 2047 तक बिजली की मांग 708 गीगावाट तक पहुंच जाएगी। इसे पूरा करने के लिए, हमें अपनी क्षमता को चार गुना यानी 2,100 गीगावाट तक बढ़ाने की जरूरत है।'' इस दो दिन के सम्मेलन का आयोजन केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने उद्योग मंडल फिक्की के सहयोग से किया। सम्मेलन में फिक्की के पूर्व अध्यक्ष शुभ्रकांत पांडा ने कहा कि देश का बिजली क्षेत्र 2070 तक स्वच्छ ऊर्जा में बदलाव के लिए व्यापक अवसर प्रस्तुत करता है। इस क्षेत्र में वृद्धि की काफी संभावनाएं हैं। इंडियन मेटल्स एंड फेरो अलॉयज के प्रबंध निदेशक पांडा ने कहा, ‘‘स्थानीय विनिर्माण और अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने से नवोन्मेष के लिए नये रास्ते खुलेंगे। आईएसटीएस (अंतरराज्यीय पारेषण प्रणाली) छूट को बढ़ाये जाने और बिजली पारेषण प्रणाली को मजबूत करने से क्षेत्र के विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे निवेशकों और कंपनियों के लिए कई अवसर बनेंगे।'' मनोहर लाल ने संबंधित पक्षों के परामर्श से तैयार राष्ट्रीय विद्युत योजना (ट्रांसमिशन) भी पेश की।
 
इसमें 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लिए आवश्यक पारेषण संबंधित बुनियादी ढांचे का विवरण दिया गया है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के 2032 तक 600 गीगावाट से अधिक हो जाने का अनुमान है। अगले दशक में 1,90,000 सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइन को जोड़ने की योजना है। इससे पारेषण क्षेत्र में नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के अवसर हैं।

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