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बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत संभाग स्तरीय कार्यशाला का हुआ सफल आयोजन

 *-आगामी 3 वर्षों में बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने हेतु अभियान चलाकर किया जाएगा कार्य*

*-बाल विवाह की रोकथाम हेतु प्रशासन जन सामान्य से समन्वय बनाकर करे कार्य -संभाग आयुक्त

*-कलेक्टर सुश्री ऋचा प्रकाश चौधरी ने महिलाओं को शिक्षित एवं सक्षम बनाने की अपील की*

दुर्ग/ मिशन वातसल्य योजना अंतर्गत ’’बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’’ के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आज लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह के सेमीनार कक्ष में एक दिवसीय संभाग स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में दुर्ग संभाग आयुक्त श्री एस.एन. राठौर, कलेक्टर सुश्री ऋचा प्रकाश चौधरी तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक श्री नंदलाल चौधरी उपस्थित थे।
संभाग आयुक्त श्री एस.एन. राठौर ने उपस्थित सभी अधिकारियों एवं नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति है। बाल विवाह का दुष्प्रभाव स्वयं के जीवन के साथ-साथ समाज को भी दूषित करता है। संभाग आयुक्त ने अवगत कराया वर्तमान में राज्य में बाल विवाह की दर 12 प्रतिशत है। इस आंकड़े को कम करने के लिए संभाग में हम सबको प्रयास करना है। प्रशासन के समस्त विभाग जैसे स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग एवं जन सामान्य को भी समन्वय बनाकर बाल विवाह की रोकथाम हेतु निरंतर प्रयास करना है।
कलेक्टर सुश्री ऋचा प्रकाश चौधरी ने कहा बाल विवाह अर्थात कम उम्र में शादी समाज की प्रगति में बाधा डालती है। बाल विवाह प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से देश की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करती है। उन्होंने बाल विवाह के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए विशेषरूप से महिलाओं को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा बालिकाएं जल्द विवाह न करे। सबसे पहले सक्षम बनना आवश्यक है। बेटियां पहले सक्षम बने फिर विवाह करे। अभिभावक बेटियों, बहनों एवं महिलाओं को पढ़ाएं, उन्हे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करे और समाज की प्रगति में सहयोग करे।
कार्याशाला में महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक श्री नंदलाल चौधरी ने प्रमुख रूप से प्रशिक्षण दिया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा शासन प्रशासन बाल विवाह रोकथाम के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है। इसके तहत चरणबद्ध रूप से संभाग स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की जा रही है। जिसकी शुरुआत दुर्ग संभाग से की गई है। छत्तीसगढ़ प्रदेश को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए शासन प्रशासन समाज की सहभागिता से अभियान चला कर कार्य कर रही है। हमें लोगों को बाल विवाह एवं उससे होने वाले दुष्परिणाम के बारे में जागरूक करना है। समाज के प्रमुख अपने अपने सामाजिक संगठनों में चर्चा कर जागरूकता लाने का कार्य करे। स्थानीय निकाय विशेष कर ग्राम पंचायत को बाल विवाह मुक्त बनाने का प्रयास करे। कार्याशाला में बाल विवाह से संबंधित अनेक पहलुओं पर चर्चा की गई। युवोदय दुर्ग के दूत स्वयं सेवी टीम द्वारा बाल विवाह जागरूकता के लिए किए गए प्रयासों के बारे में बताया गया।

*बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ अभियान-*

प्रदेश में बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ की अवधारणा को साकार करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन दृढ़ संकल्पित है। इस अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देते हुए बाल विवाह से प्रदेश को मुक्त करने हेतु पंचायत राज संस्थाओं व नगरीय निकाय के जन प्रतिनिधियों, समाज प्रमुखों, स्वयंसेवी संगठनों, महिला समूहों, युवा संगठनों, शासकीय विभागों, गैर-शासकीय संस्थानों एवं आमजनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जायेगी। शासन और समाज की सहभागिता से बाल विवाह के विरुद्ध व्यापक जन समर्थन से आगामी 3 वर्षों में बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने हेतु इस अभियान को संचालित किया जाना है। सामाजिक जागरूकता एवं गतिशीलता (सोशल मोबीलाइज़ेशन), किशोर सशक्तिकरण (एडोलोसेंट इम्पावरमेंट), मीडिया संवेदीकरण (मीडिया सेंसिटाइज़ेशन), बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों के विषय में जागरूकता बढ़ाने जैसी रणनीतियों के अनुसार राज्य, जिला, विकासखंड एवं ग्राम स्तर तक विभिन्न गतिविधियां आयोजित कर व्यापक जन जागरूकता लाने के प्रयास किए जाएंगे। इस़ अभियान के माध्यम से व्यापक जन सहयोग से बच्चों में व्याप्त कुपोषण, शिशु मृत्यु दर एवं मातृ मृत्यु दर को शून्य स्तर तक लाकर कुपोषण के चक्र को तोड़ा जा सकता है। बाल विवाह की सूचना अनुविभागीय दंडाधिकारी, पुलिस थाने में, महिला एवं बाल विकास विभाग के क्षेलीय अधिकारी/कर्मचारी/आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सरपंच, कोटवार, चाइल्ड हेल्पलाईन 1098 एवं महिला हेल्पलाईन 181 आदि को दी जा सकती है।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बाल विवाह रोकथाम अधिनियम 2006 के प्रावधानों के अनुरूप बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान को प्रभावी बनाना है। बाल विवाह के कुप्रभावों जैसे शिक्षा में बाधा, मानसिक एवं शारीरिक विकास में रुकावट, समयपूर्व गर्भावस्था, शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में वृद्धि एवं कुपोषण जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई। अंत में बाल विवाह रोकथाम संकल्प की शपथ दिलायी गई। शपथ में कहा गया ’’मैं ..संकल्प लेता/लेती हूँ, कि मैं अपने परिवार में कभी भी बाल विवाह नहीं कराऊंगा/कराऊंगी। समाज में बाल विवाह के रूप में व्याप्त बुराई का सदैव विरोध करूँगा करूँगी। मैं बाल विवाह रोकने के लिए आमजनों को जागरूक करने के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहूंगा/रहूंगी।’’ प्रशासन का यह प्रयास बाल विवाह रोकने और एक स्वस्थ एवं शिक्षित समाज के निर्माण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। अभियान को सफल बनाने के लिए समाज के हर वर्ग से सहयोग की अपील की गई है। कार्यक्रम का संचालन महिला एवं बाल विकास विभाग दुर्ग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री आर.के. जाम्बुलकर के नेतृत्व में किया गया। संभाग स्तरीय कार्यशाला में दुर्ग संभाग अंतर्गत सभी जिलों के पुलिस विभाग, जिला पंचायत, स्वास्थ्य विभाग, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, श्रम और समस्त परियोजना अधिकारी तथा युवोदय-दुर्ग के दूत स्वयं सेवक भी सम्मिलित हुए।

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