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 बालाजी मंदिर में त्रिपुरा सुंदरी देवी ललिता के सहस्रनाम पारायण में उमड़ी भक्तों की भीड़

  -गणेश की आराधना से हुआ अनुष्ठानारंभ 
 
-एक करोड़ बार माता के सहस्रनामों का पाठ 
टी सहदेव
भिलाई नगर। बालाजी मंदिर में रविवार को आंध्र महिला मंडली के तत्वावधान में भक्तों की भारी भीड़ के बीच त्रिपुरा सुंदरी एवं स्त्री ऊर्जा का प्रतीक देवी ललिता के सहस्रनाम का पारायण (पाठ) किया गया। शहर में पहली बार हुए भव्य धार्मिक अनुष्ठान में पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं ने एक करोड़ बार माता के सहस्रनामों का एक स्वर में पाठ किया। ऐसी मान्यता है कि इससे परिवार के सदस्य अकाल मृत्यु एवं अनिष्ट से बच सकते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने के साथ-साथ मन को शांति भी मिलती है। इस दौरान महिलाओं ने कुमकुम पूजा भी की। ललितासहस्रनाम एक हिंदू धार्मिक ग्रंथ है, जिसमें देवी ललिता के हजार नामों का वर्णन है।
गणेश की आराधना से हुआ अनुष्ठानारंभ 
आंध्र साहित्य समिति के सहयोग से आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान का आरंभ भगवान गणेश की आराधना से हुआ। ललिता पारायण से पहले पूजा स्थल के मध्य में विभिन्न आभूषणों एवं नूतन वस्रों से सुसज्जित देवी ललिता समेत दुर्गा माता के नौ रूपों की प्रतिमाएं स्थापित की गईं। उसके बाद अभिमंत्रित गंगाजल, हल्दी-कुमकुम, अक्षत और चंदन से भरे मुख्य कलश को प्रतिमाओं के समक्ष प्रतिष्ठित किया गया। तत्पश्चात वैदिक विधि-विधान से संकल्प पूजा की गई, जिसके अंतर्गत भगवान विष्णु के सेनापति विष्वक्सेन पूजा, पुण्याहवचनम, रक्षासूत्र बंधन, अष्टलक्ष्मी पूजा, नव दुर्गा पूजा एवं देवी ललितांबिका की पूजा-अर्चना की गई।
पूजा स्थल पर उमड़ी भक्तों की भीड़ 
पंडित गोपालाचारी के सान्निध्य में हुए अनुष्ठान में ट्विनसिटी के आसपास के क्षेत्रों दुर्ग, चरोदा तथा रायपुर से डेढ़ हजार से ज्यादा श्रद्धालु शामिल हुए, जिनमें बच्चों से लेकर वयोवृद्ध व्यक्ति भी थे। इस धार्मिक अनुष्ठान में पुरुषों की तादाद भी अच्छी खासी थी। जिन श्रद्धालुओं को पूजा स्थल में जगह नहीं मिली, वे अपने स्थान पर ही खड़े-खड़े ललिता सहस्त्रनाम का पाठ करने लगे। पारायण में शामिल हर महिला को ललितासहस्रनाम की एक पुस्तक तथा एक थैली भी भेंट की गई, जिसमें हल्दी- कुमकुम, चूड़ियां, मेहंदी, ब्लाउज पीस सहित सुहाग की निशानियां थीं।
एक करोड़ बार माता के सहस्रनामों का पाठ 
पूजा स्थल पर उन्हीं महिलाओं को प्रवेश की अनुमति थी, जिन्होंने टोकन लिया हुआ हो। जिन महिलाओं का पाठ पूर्ण हो जाता था, वे अपने टोकन काउंटर में जमा कर देती थीं, ताकि अन्य महिलाएं टोकन लेकर प्रवेश कर सकें। रायपुर स्थित ललिता मंदिर के पुजारी डी अनंत राव ने बताया कि हर चक्र में पांच-पांच सौ महिलाओं ने देवी ललिता के हजार नामों का पाठ किया। इस तरह ललिता पारायण बीस चक्रों में पूरा हुआ। इन बीस चक्रों में एक करोड़ बार माता के सहस्रनामों का पाठ किया गया, जिसका सीधा प्रसारण बड़ी स्क्रीन के माध्यम से किया गया। भक्तों के लिए भंडारा भी रखा गया था।
ये थे सफल आयोजन के सूत्रधार 
इस अभूतपूर्व अनुष्ठान के सफल आयोजन में महिला मंडली की अध्यक्ष पेरी पद्मा, उपाध्यक्ष पावनी मोहन, सचिव अनंत लक्ष्मी, कोषाध्यक्ष वर लक्ष्मी, सहसचिव विजय निर्मला एवं नाग कुमारी, प्रबंधकारिणी सदस्यों एम पद्मजा, ज्योति महेश, पदाधिकारियों राज्यलक्ष्मी, पद्मा, विमला, आदि लक्ष्मी, मंजूश्री एवं बी सुशीला तथा आंध्र साहित्य समिति के अध्यक्ष पीवी राव, सचिव पीएस राव, उपाध्यक्ष के सुब्बाराव, कोषाध्यक्ष टीवीएन शंकर की अहम भूमिका रही। इस अवसर पर रायपुर के सत्य सांई वैदिक स्कूल के अस्सी बच्चे, तेलुगु सेना के प्रदेशाध्यक्ष नीलम चन्ना केशवलु, विष्णु केमिकल के उपाध्यक्ष एमवी राव एवं समाजसेवी एनएन राव विशेष रूप से उपस्थित थे।
 

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