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नगरीय निकाय/त्रिस्तरीय पंचायत आम निर्वाचन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाये रखने दिशा-निर्देश जारी

दुर्ग/ कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी सुश्री ऋचा प्रकाश चौधरी ने नगरीय निकाय/त्रिस्तरीय पंचायत आम निर्वाचन 2025 की संपूर्ण प्रक्रिया को पारदर्शी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष बनाने तथा निर्वाचन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाये रखने के उद्देश्य से दिशा-निर्देश प्रसारित किए गए हैं।
 निर्वाचन प्रक्रिया संपन्न होने तक दुर्ग जिले के निर्वाचन होने वाले नगरीय निकायों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत प्रदत्त अधिकारों के तहत अस्त्र शस्त्र, लाठी, बल्लम, धारदार हथियार, ज्वलनशील पदार्थ एवं अन्य विस्फोटक सामग्री लेकर चलने, रखने एवं उन्हें प्रदर्शित करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। उक्त आदेश का प्रसारण अपने अपने थाना क्षेत्र एवं संबंधित नगरीय निकाय के संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से व्यापक प्रचार प्रसार करें। लायसेंसशुदा अस्त्र शस्त्र को लेकर चलने, अपने पास रखने एवं प्रदर्शित करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। किसी अन्य प्रदेश या अन्य जिले का व्यक्ति भी उपरोक्त अवधि में अपना लायसेंस शुदा शस्त्र लेकर चुनाव होने वाले नगरीय निकाय के संबंधित क्षेत्र में नहीं चल सकता। यह आदेश केवल वर्दीधारी पुलिस तथा सेना के जवानों पर लागू नहीं होगा।
 *लायसेंस शुदा अस्त्र शस्त्रों को थाने में सुरक्षित जमा कराना होगा*
 चुनाव होने वाले नगरीय निकाय के क्षेत्र के लायसेंस धारकों के अस्त्र शस्त्र माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के परिप्रेक्ष्य में तत्काल थाने में जमा कराएं, प्रत्येक लायसेंसधारी को निर्धारित फार्म में पावती दी जाएगी। चुनाव संपन्न होने तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत प्रदत्त अधिकारों के तहत जारी प्रतिबंधात्मक अवधि की समाप्ति के बाद जमा अस्त्र शस्त्र संबंधित लायसेंस धारकों को वापस किए जा सकते हैं।
 *आपराधिक तत्वों की धरपकड़*
 गड़बड़ी फैलाने वाले आपराधिक तत्वों की धरपकड़ प्रारंभ कर दी जाए, ताकि निर्वाचन कार्य शांतिपूर्वक एवं निर्विघ्न संपन्न हो सके। आदतन अपराधी गुण्डा एवं सांप्रदायिक दंगा फैलाने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्यवाही तत्काल प्रभाव से अमल में लाया जाये। विभिन्न न्यायालयों से प्राप्त वारंट्स की तामिली अभियान चलाकर पूर्ण की जाए एवं अपराधियों को हिरासत में लिया जाए, चूंकि इस प्रकार गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की जानकारी छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग रायपुर को प्रतिदिन दी जानी होगी। जिन व्यक्तियों की धरपकड की जाती है तो उनकी जानकारी जिला निर्वाचन कार्यालय को अनिवार्य रूप से देना होगा ताकि उसकी सूचना छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग, रायपुर को दी जा सके।
 *शराब बिक्री पर प्रतिबंध*
 मतदान की तिथि से दो दिन पूर्व से लेकर मतदान के दिन तक मदिरा के विक्रय पर प्रतिबंध रहेगा। आपको यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिबंध अवधि में किसी भी दशा में मदिरा का विक्रय न हो। यदि मदिरा विक्रय होता हुआ पाया जाता है तो मदिरा को तत्काल जब्त कर संबंधित के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की जाए।
 *शराब दुकान*
 चुनाव अवधि के दौरान यह सुनिश्चित करें कि जिले के निर्वाचन क्षेत्र के भीतर शराब दुकान, बीयर बार तथा एफ.एल.-2 एवं एफ. एल-3 दुकाने एवं होटल रात्रि में निर्धारित समय पर बंद हो जाए। इस कार्य हेतु स्थानीय आबकारी अधिकारी/कर्मचारी आवश्यक कार्यवाही करेंगे।
 *कानून व्यवस्था का दैनिक प्रतिवेदन*
 निर्वाचन प्रकिया प्रारंभ होने से लेकर मतगणना की समाप्ति तक प्रतिदिन कानून व्यवस्था संबंधित प्रतिवेदन जिला कार्यालय से छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग रायपुर को नियमित रूप से भेजना होगा। इस हेतु अपराधिक तत्वों के विरूद्ध की गई प्रतिबंधात्मक कार्यवाही का विवरण, वाहनों की जांच, अवैध शराब बिकी को रोकने के लिए की गई कार्यवाही, अवैधानिक हथियार एवं अन्य आग्नेय शस्त्रों की जब्ती, कार्यवाही का विवरण, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत प्रदत्त अधिकारों के उल्लंघन प्रकरणों का विवरण, सीमावर्ती चौकी पर हुई जांचों में जब्त किए गए हथियार, शराब, विस्फोटक पदार्थों का विवरण तथा वाहनों में जा रहे असामाजिक तत्वों के विरूद्ध की गई कार्यवाही का विवरण, संपत्ति विरूपण की घटनाओं का विवरण, चुनाव से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण या हिंसक घटनाएं, अन्य महत्वपूर्ण विश्लेषण जिससे कि यह पता चल सके कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए कानून व्यवस्था की स्थिति अनुकूल है, बिन्दुओं पर दैनिक रिपोर्ट जिला दण्डाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को अनुविभागीय दण्डाधिकारी एवं उप पुलिस अधीक्षक को भेजी जाए तथा उनकी अनुपस्थिति में तहसीलदार एवं थाना प्रभारी के संयुक्त हस्ताक्षर से भेजा जाना होगा। कई स्थानों के कार्यपालन दण्डाधिकारियों एवं थाना प्रभारियों की ओर से जो दैनिक प्रतिवेदन भेजे जाते हैं, उसमें केवल (क्षेत्र में शांति) का उल्लेख रहता है। यह सर्वथा अनुचित है। उपरोक्त सभी बिन्दुओं पर स्पष्ट जानकारी देकर रोज शाम 6 बजे के पूर्व वायरलेस मैसेज जिला दण्डाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को भेजना होगा। 
 *संवेदनशील मतदान केन्द्रों पर सतर्कता*
 जिले के संवेदनशील केन्द्रों की सूची बनाई जा चुकी है। चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची अंतिम होने के बाद इस बात का पुनः परीक्षण कर लिया जाए कि किसी क्षेत्र में चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों की स्थिति को देखते हुए कोई नया मतदान केन्द्र पहले की अपेक्षा ज्यादा संवेदनशील तो नहीं बन गया हो, यदि ऐसा पाया जाता है तो ऐसे केन्द्रों का विवरण भी आप तत्काल जिला दण्डाधिकारी, उपजिला निर्वाचन अधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक को लिखित में दें ताकि उन केन्द्रों पर समय रहते उचित सुरक्षा का प्रबंध किया जा सके।
जिन संवेदनशील मतदान केन्द्रों पर आपको गडबडी की आशंका हो वहां पर मतदान केन्द्रों के चारों तरफ बेरीकेटिंग आवश्यक रूप से की जाए ताकि मतदाताओं की भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। बेरीकेटिंग करने के लिए आप स्थानीय लोक निर्माण एवं वन विभाग के अधिकारी/कर्मचारियों की सहायता ले। ऐसे मतदान केन्द्र जिनके भवन बहुत ही छोटे हैं, पर भी मतदान के लिए बेरीकेटिंग की जा सकती है। आपको ऐसे मतदान केन्द्रों पर बेरीकेटिंग लोक निर्माण विभाग एवं वनविभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय करके करनी होगी।
 *जुलूस तथा आम सभा का विनिमयन तथा नियंत्रण*
 निर्वाचन अवधि में विभिन्न प्रत्याशियों अथवा राजनैतिक दलों द्वारा कई स्थानों पर राजनैतिक दलों द्वारा जुलूसों और आम सभा का आयोजन किया जाता है। आदर्शआचरण सहिंता का पालन करते हुए आयोजकों को ऐसे जुलूस तथा आमसभा के आयोजन के पूर्व सक्षम प्राधिकारी जो कि अनुविभागीय दण्डाधिकारी/उप पुलिस अधीक्षक है से पूर्व अनुमति लेनी होगी। जूलूस तथा आम सभा के लिए अनुमति देते समय इस बात का ध्यान रखा जाये कि उसे अनुमति देने से उस क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति में बाधा तो उत्पन्न नहीं होगी। अनुमति देने हेतु प्राप्त आवेदन पत्रों के लिए निर्धारित फार्म में एक पंजी का संधारण किया जावें। यदि एक दिन, एक ही समय एक तथा एक ही स्थान पर एक से अधिक प्रत्याशी या राजनैतिक दलो के द्वारा सभा करने या जुलूस निकालने की अनुमति चाही जाती है ऐसे आवेदन एक ही समय प्रस्तुत होते हैं तो प्राधिकृत प्राधिकारी को चाहिए कि संबंधित आवेदकों को समक्ष में बुलाकर समझाईश देकर समय एवं स्थान को पृथक कराएं। किसी भी स्थिति में ऐसे प्रत्याशी /पार्टी आवेदक को अनुमति दी जाए जिसने आम सभा या जुलूस के लिए पहले आवेदन पत्र प्रस्तुत किया हो, किसी का आवेदन पत्र पहले प्राप्त हुआ है उसका निराकरण करने के लिए प्राधिकृत अधिकारी को कोई शंका नहीं रह जायेगी। ऐसे हर अनुमति पत्र की प्रतिलिपि क्षेत्र के तहसीलदारों एवं अनुविभागीय अधिकारी पुलिस एवं थाना प्रभारी को भेजनी होगी। धार्मिक संस्थानों सरकारी मुलाजिमों के निवास एवं दफतरों के खुले स्थान में चुनाव सभा के लिए अनुमति देना वर्जित है। सभा का समय सामान्यतः सुबह 6.00 बजे से रात्रि 10.00 बजे तक रहेगा।
 *निर्वाचन अभियान के लिए लाउडस्पीकर के उपयोग पर नियंत्रण*
 छ.ग. कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 के अनुसार सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति प्राप्त किए बिना कोई भी राजनैतिक दल का व्यक्ति अभ्यर्थी/निर्वाचन अभिकर्ता या कार्यकर्ता लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं कर सकता है। लाउडस्पीकर के उपयोग के अनुमति देने हेतु संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकरी/उप पुलिस अधीक्षक को उनके क्षेत्र के लिए प्राधिकृत किया जा रहा है। लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति वाहनों के चुनाव प्रचार हेतु एवं चुनाव सभाओं हेतु दी जायेगी। वाहनों पर लाउडस्पीकर उपयोग करने की अनुमति देते समय प्राधिकृत अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि जिस वाहन द्वारा निर्वाचन प्रचार प्रसार के लिए अनुमति दी गई है उस वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर और वाहन का स्वरूप (जैसे जीप, टैम्पो, कार 704) की जानकारी अनुज्ञा पत्र में भरा जाए। अनुज्ञा पत्र की एक प्रतिलिपि संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार/थाना प्रभारी को भी दी जाए। लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति केवल प्रातः 6.00 बजे से रात्रि 10.00 बजे तक की ही दी जायेगी। यदि किसी राजनैतिक दल द्वारा बिना अनुमति प्राप्त किए या निर्धारित समय से बाहर लाउडस्पीकर का उपयोग किया जाता है तो उस लाउडस्पीकर को तत्काल जब्त किया जाएगा।
 *चुनाव प्रचार में सरकारी वाहनों के प्रयोग पर प्रतिबंध*
 इस संबंध मे राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश चुनाव के प्रत्येक चरण के लिए स्पष्ट है। चुनाव घोषणा से लेकर चुनाव समाप्ति होने तक केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार के वाहन, केन्द्र और राज्य सरकार के सार्वजनिक उपक्रम के वाहन, केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के संयुक्त क्षेत्र के उपक्रम के वाहन, स्थानीय निकायों के वाहन, नगर निगम, नगर पालिकाओं तथा नगर पंचायतों के वाहन, विपणन बोर्ड (चाहे किसी भी नाम से) के वाहन, सहकारी समितियों के वाहन, जिला परिषद्, जनपरिषद्, या अन्य किसी निकायों जिसमें सार्वजनिक दलों का विनियोग किया गया हो, के शासकीय/अर्द्धशासकीय वाहनों के माध्यम से चुनाव प्रचार करना पूर्णतः प्रतिबंधित होगा।
वाहनों का तात्पर्य परिवहन के प्रयोजन के लिए आने वाले कोई भी वाहन चाहे वे यांत्रिक शक्ति से चलित हो या किसी अन्य शक्ति से, और इसमें जीप, कार, ट्रक, लारी, टेम्पो, आटोरिक्शा एवं बस आदि शामिल है। राज्य निर्वाचन आयोग ने यह निर्देश भी दिये हैं कि चुनाव प्रचार के लिए ऊपर लिखित शासन और संगठनों के स्वामित्व के किसी भी प्रकार के वाहनों यथा हेलीकाप्टर, वायुयान, कार, जीप, आटोवाहन, नाव और एयरक्राफ्ट आदि के प्रयोग पूर्णतः निषेध हैं, यदि इन श्रेणी के वाहनों के दुरूपयोग का कोई भी प्रकरण आपके सामने आता हैं, तो तत्काल संबंधित वाहनों को जप्त करें और इसकी सूचना जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिला दण्डाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को दें।
राज्य निर्वाचन आयोग ने यह निर्णय भी लिया है कि ऊँचे दर्जे की सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों की सुरक्षा के लिये एजेन्सी के द्वारा बताये गए अनुसार शासकीय वाहनों का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन जब तक सुरक्षा एजेन्सी या पुलिस अधीक्षक लिखित में इसे न बताएं तब तक कोई अतिरिक्त वाहन सिक्यूरिटी के लिये नहीं लगाया जायेगा।
 *अभ्यर्थियों या उनसे संबंधित राजनैतिक दल के कार्यकर्ताओं के द्वारा निर्वाचन प्रचार में लगाये गये वाहनों की सूची*
 अभ्यर्थी को चुनाव प्रचार के लिये उनके स्वयं के द्वारा, पार्टी के द्वारा तथा उनके सहयोगी एवं शुभचिन्तकों के द्वारा लगाये गये समस्त वाहनों का विवरण रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। विवरण में वाहन का पंजीयन क्रमांक वाहन का स्वरूप जिन नगरीय निकाय में प्रचार के लिये उपयोग किया जा रहा है, उसका नाम तथा ड्रायवर का नाम तथा वाहन के मालिक के नाम का ब्यौरा रहेगा। यदि एक बार वाहनों की सूची प्रस्तुत कर देने के बाद अभ्यर्थी या राजनैतिक दल को अतिरिक्त वाहनों के इस्तेमाल करने की आवश्यकता महसूस होती है तो वे अतिरिक्त वाहनों को वास्तविक रूप से उपयोग करने के 24 घंटे पहले रिटर्निंग अधिकारी को कार्यालयीन समय में सूची प्रस्तुत कर सकते है। ऐसे समस्त वाहनों का विवरण संदेश के द्वारा अनुविभागीय दंडाधिकारी/अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) /थाना प्रभारी/तहसीलदारों को जिला कार्यालय से भेज दी जायेगी। इस सूची में सम्मिलित वाहनों के अलावा प्रचार-प्रसार करता हुआ अन्य समस्त वाहनों को तत्काल ही चुनाव के उपयोग के लिये अधिग्रहण किया जा सकता है नियम के विपरीत’ वाहनों का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध वाहन को जप्त करते हुए भारतीय दंड संहिता के अध्याय 9 ए के तहत दंडात्मक कार्यवाही भी की जा सकती है एवं उनके विरूद्ध मोटर यान अधिनियम 1988 तथा छ.ग. स्थानीय प्राधिकरण (निर्वाचन अपराध) अधिनियम 1964 के अंतर्गत कार्यवाही की जायेगी।
 *वाहनों की सघन जांच*
 निर्वाचन प्रक्रिया के प्रारंभ होने से लेकर के समाप्ति तक वाहनों की सघन जांच की जाएगी। वाहनों की जांच के समय विशेष ध्यान दिया जाए- वाहन के अन्दर अवैध रूप से शराब तो नहीं ले जाई जा रही हैं, विशेष रूप से मतदान के दो दिन पूर्व शराब के विक्रय पर प्रतिबंध लग जाता है और मतदाताओं के प्रलोभन देने के लिये राजनैतिक दलों द्वारा शराब लाने का प्रयास किया जाता है। अवैध रूप से जा रही शराब को जप्त कर आवश्यक कानूनी कार्यवाही किया जाए। इसके साथ-साथ यह भी देखना होगा कि वाहनों में आग्नेय अशस्त्र-शस्त्र, लाठी, ज्वलनशील पदार्थ, धारधार शस्त्र, बल्लम, फटाका आदि का तो परिवहन नहीं किया जा रहा है। यदि ऐसा है तो उसे तत्काल जप्त किया जाकर संबंधितों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही की जाए। 
 *मतदान के दिन मतदाताओं को वाहन पर लाने ले जाने पर प्रतिबंध*
 मतदान के दिन निर्वाचन कार्य के अतिरिक्त अन्य प्रयोजनों के लिये निजी वाहनों जो मालिक स्वयं के लिये या अपने परिवार के लिये मतदान केन्द्र में वोट डालने के लिये मतदान केन्द्र से 200 मीटर घेरे के बाहर केवल एक बार प्रयोग करता है। आवश्यक सेवाओं के लिये प्रयुक्त वाहन जैसे हास्पिटल वैन, टेलीफोन, एम्बुलेन्स, चुनाव वाहन, पानी के टेंकरों, विद्युत सेवा की वाहन। निर्धारित टर्मिनल से और नियत समय पर चलने वाली बसें जैसे सार्वजनिक परिवहन, हवाई अड्डों, रेल्वे स्टेशनों, अन्तर्राष्ट्रीय बस/अड्डों, अस्पतालों के लिये टैक्सी, तिपहिया स्कूटर, रिक्शे आदि। बीमार या अपंग व्यक्तियों के लिये प्रयोग किया गया प्रायवेट वाहनों को चलाने की अनुमति दी जा सकती है। मतदाताओं को मतदान के दिन ढोने के लिये वाहनों का उपयोग न हो, इसके लिये आपकों मतदान के दिन मतदान क्षेत्रों का नियमित रूप से भ्रमण करते रहना होगा और सभी चलने वाले वाहनों पर नियंत्रण रखना होगा। यदि किसी वाहन को मतदाता को लाने ले जाने के कार्य से लिप्त देखा जाये तो उसे तत्काल जप्त किया जाये। मतदान के दिन अभ्यर्थी, उनके निर्वाचक एजेन्ट तथा उनके कार्यकर्ताओं के उपयोग के लिये दिये जाने वाले वाहनों के लिये एक निर्धारित परमिट संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के अनुविभागीय दण्डाधिकारी /उप पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रदाय किया जायेगा, जो कि वाहन के सामने के शीशा पर लगाना होगा। यदि कोई अभ्यर्थी या उसका निर्वाचक अभिकर्ता बिना परमिट के वाहन का उपयोग करता है तो उसको जप्त किया जाये। जिन वाहनों को निर्वाचन परमिट दिया जायेगा उनका रजिस्ट्रेशन नंबर आपको मतदान के एक दिन पूर्व अवगत करा दिया जायेगा।
 *पोस्टर/पाम्पलेट्स आदि के मुद्रण पर नियंत्रण*
 कोई भी व्यक्ति किसी ऐसे निर्वाचन पाम्पलेट्स या पोस्टरों को प्रकाशित एवं मुद्रित नहीं करेगा या प्रकाशित नहीं करायेगा जिसके मुख पर उसके मुद्रक और प्रकाशक का नाम पता न दिया हो।
 *विशाल कट आउट-पट्टा, विज्ञापन, बैनर इत्यादि के प्रदर्शन पर नियंत्रण*
 राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश हैं कि कोई राजनैतिक दल या अन्य संघ निकाय या व्यक्ति प्रत्याशी से लिखित रूप से सामान्य या विशेष अधिकार प्राप्त किये बिना कोई कट आउट, विज्ञापन दीवार पेंटिंग, झंडों, बैनरों समाचार पत्रों में विज्ञापन इत्यादि नहीं लगाना है। आयोग के निर्देशानुसार कोई राजनैतिक दल संगठन या व्यक्ति कोई कट आउट, पोस्टर, बैनर, झंडा, आदि किसी राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात के चौराहे, सरकारी/अर्द्ध सरकारी, स्थानीय निकाय के भवनों, संपत्ति बिजली या टेलीफोन के खंभों पर नहीं लगाना और यदि बिना प्राधिकार के लगाया गया है तो उसे लगाने वाले दल/संघ निकाय की कीमत पर उसे तत्काल हटा दिया जायेगा। इसके पालन में कोई त्रुटि नहीं होना चाहिये।
 *संपत्ति विरूपण के निराकरण के संबंध में*
 राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार बिना भवन स्वामी/भूमि स्वामी का विधिवत अनुमति के किसी भी राजनैतिक दल या अभ्यर्थी या उनके निर्वाचन अभिकर्ता/कार्यकर्ता भूमियों आदि में प्रचार सामग्री चिपकाने, नारे लिखने, प्रतीक इत्यादि के चिन्ह बनाकर विकृत करने का कोई अधिकार नहीं है। यदि शासकीय/अर्द्धशासकीय स्थानीय निकायों की संपत्ति पर कोई नारे आदि लिखे है तो इसका जांच करें एवं इन नारों को तत्काल संबंधित व्यक्तियों के खर्चे पर मिटाने की कार्यवाही करें ।
 *विश्राम गृहों का आरक्षण*
 जिले में स्थित विश्राम गृह के आरक्षण हेतु अनुविभागीय दंडाधिकारी को अधिकृत किया गया है। विश्राम गृह को आबंटन प्रथम आगमन प्रथम आबंटन के आधार पर बिना किसी द्वेषभाव से किया जाएगा।
संबंधित अनुविभागीय दंडाधिकारी यह ध्यान रखेंगे कि जिला मुख्यालय के सर्किट हाउस में तथा तहसील मुख्यालय पर एवं अन्य जगह स्थित रेस्ट हाउस में आवश्यकतानुसार चुनाव पर्यवेक्षकों एवं चुनाव कार्य से जुड़े हुये अधिकारियों के लिये कमरा आरक्षित रखा जाए। शेष कमरों को पहले आये पहले पावे नियम के तहत आबंटित किया जाएगा।
 *निर्वाचन में कार्यस्त शासकीय सेवकों की निष्पक्षता*
 निर्वाचन के दौरान ऐसे अधिकारी/कर्मचारी जिनकी ड्यूटी निर्वाचन कार्य हेतु लगाई गई है ये निष्पक्ष एवं निडर होकर अपना निर्वाचन संबंधी कर्तव्यों का पालन करें तथा यह सुनिश्चित करें कि उनकी निष्पक्षता उनके कार्यकलापों से भी परिलक्षित हो। अपने क्षेत्र में इस बात पर भी निगरानी रखें कि कोई भी शासकीय कर्मचारी द्वारा किसी राजनैतिक दल या प्रत्याशी के चुनाव प्रचार-प्रसार में भाग तो नहीं लिया जा रहा है। यदि कोई कर्मचारी राजनैतिक गतिविधियों में लिप्त है तो तत्काल उसकी जानकारी इस कार्यालय को दी जाये।
 *कार्यपालिक अधिकारियों के मध्य आपसी सामंजस्य*
 निर्वाचन शांतिपूर्वक और निष्पक्ष ढंग से सम्पन्न हो इसके लिये यह अत्यंत आवश्यक है कि कार्यपालिक अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के मध्य आपस में संपर्क तथा सामंजस्य बना रहे ताकि निर्वाचन प्रक्रिया को सुचारू एवं शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न किया जा सके। उपरोक्त निर्देशों का तत्परतापूर्वक तथा कड़ाई से पालन करना सुनिश्चित करें। इन निर्देशों के पालन में लापरवाही या अनियमितता बरती जाती हैं तो आपके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।    

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