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 धान खरीदी का ढाई महीने तक चला अभियान सफलतापूर्वक सम्पन्न

-सवा लाख किसानों से 6.90 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी
-कोचियों और दलालों के विरुद्ध 77 कार्रवाई,1 करोड़ रुपए का 2906 क्विंटल धान जब्त
-85 फीसदी धान का हो चुका उठाव, उठाव में राज्य में अव्वल 
 बिलासपुर /छत्तीसगढ़ शासन, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नया रायपुर द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन दिनांक 14 नवंबर 2024 से 31 जनवरी 2025 तक किये जाने के निर्देश दिये गये थे। शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों के संबंध में जिले में निम्नानुसार कार्यवाही की गई।
     शासन के निर्देशानुसार जिले में कुल पंजीकृत कृषकों के 05 प्रतिशत कृषकों के रकबे का जिला कलेक्टर से लेकर तहसील स्तर तक के अधिकारियों द्वारा धान के रकबे का भौतिक सत्यापन कराया गया एवं बिलासपुर जिले को तहसील स्तर पर सत्यापन हेतु कुल 13608 खसरे प्रदाय किये गये, जिले में खसरा सत्यापन का प्रतिशत 98.48 है। सत्यापित खसरों में से कुल 93.33 प्रतिशत खसरे में फसल का प्रकार धान पाया गया एवं शेष 6.67 प्रतिशत खसरे जिनमें धान नहीं पाया गया। उन खसरों को तहसीलदारों के माध्यम से संबंधित कृषक के पंजीकृत खाते में फसल का प्रकार संशोधित कराया गया एवं त्रुटिपूर्ण रकबे की एण्ट्री करने वाले जिले के 74 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
      वर्तमान खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में जिले में पंजीकृत कृषकों की संख्या 137672 एवं पंजीकृत रकबा 144981 हेक्टेयर है। विगत वर्ष की तुलना में धान की खरीदी 2.04 प्रतिशत कम है। जिले में कुल खरीदी मात्रा 689812 मीट्रिक टन रही। वर्तमान वर्ष में धान विक्रय करने वाले किसानों की संख्या 125670 है। जिले के समस्त 140 केन्द्रों में नोडल अधिकारी की उपस्थिति में धान की खरीदी हुई। कृषि विभाग से नियुक्त किये गये नोडल अधिकारी उपार्जन केन्द्रों में पूरे समय बैठकर खरीदी कराने के निर्देश दिये गये थे।
        जिले में धान उपार्जन के दौरान उपार्जन केन्द्रों में अवैध धान के आवक एवं परिवहन के रोक हेतु प्रत्येक विकासखण्ड स्तर पर राजस्व, खाद्य एवं मण्डी विभाग का जॉच दल गठित किया गया है। दल द्वारा जिले में मण्डी अधिनियम के तहत् कोचियों/व्यापारियों के विरूद्ध किये गये कार्यवाही की संख्या 77 एवं जप्त धान की मात्रा 2906 क्विंटल है। जप्तशुदा धान की अनुमानित मूल्य 1 करोड़ है, जिसमें मण्डी अधिनियम के तहत् 05 गुना टैक्स वसूली की कार्यवाही की गई।
         शासन के निर्देशानुसार ऐसे कृषक जिनके द्वारा उत्पादित समस्त धान विक्रय किया जा चुका था किन्तु उनके खाते हुए धान की मात्रा विक्रय हेतु शेष थी। ऐसे किसानों से उनकी सहमति से धान विकय हेतु शेष रकबे का समर्पण कराया गया। जिले में रकबा समर्पित करने वाले किसानों की संख्या 53741 एवं समर्पित रकबा 3027.41 हैक्टेयर है।
          जिले में समुचित रूप से धान खरीदी, पर्यवेक्षण एवं अनियमितताओं पर निगरानी हेतु अनुविभागीय अधिकारी (रा०) को अनुविभाग स्तर पर नोडल नियुक्त करते हुए संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार को केन्द्र हेतु निरीक्षण अधिकारी नियुक्त किया गया। संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमित अंतराल में उपार्जन केन्द्र में उपस्थित होकर केन्द्र का भौतिक सत्यापन किया गया। शासन के निर्देशानुसार जिले के समस्त केन्द्रों का 03 चरणों में ऑनलाईन भौतिक सत्यापन संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार/ नायब तहसीलदार की उपस्थिति में कराया गया।
        दिनांक 31 जनवरी 2025 की स्थिति में जिले में उपार्जित धान की मात्रा 689812 मे०टन में रो 588459 मे० टन धान का उठाव मिलर्स एवं परिवहनकर्ता द्वारा किया जा चुका है एवं उपार्जन केन्द्र में शेष धान की मात्रा 101366 मे०टन हैं। इस प्रकार जिले के केन्द्रों से 85 प्रतिशत धान का उठाव किया जा चुका है। वर्तमान में जिला बिलासपुर उपार्जन केन्द्रों में भण्डारित धान के उठाव में सर्वप्रथम स्थान पर है।
         वर्तमान खरीफ विपणन में शासन द्वारा जिला बिलासपुर में धान के निराकरण के दृष्टिकोण से 04 संग्रहण केन्द्रों को भण्डारण हेतु तैयार किया गया है। जिले के 02 राईस मिल लक्ष्मी एग्रोटेक बिल्हा एवं हनुमान राईस मिल द्वारा शासकीय धान के परिवहन में अनियमितता पाये जाने पर छ०म० कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन आदेश 2016 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत् प्रकरण निर्मित किया गया।
        धान उपार्जन केन्द्रों के निरीक्षण में अनियमितता पाये जाने पर धान उपार्जन केन्द्र केन्द्रा, गनियारी व सोन में समिति के समस्त स्टॉक को हटाया गया। उपार्जन केन्द्र रिसदा में खरीदी प्रभारी एवं मस्तूरी में प्रबंधक व खरीदी प्रभारी को हटाया गया। उपार्जन केन्द्र बिस्कोना में धान खरीदी प्रभारी, ऑपरेटर व प्रबंधक को बर्खास्त करते हुए अशासकीय प्राधिकृत को हटाया गया है। इसके अतिरिक्त कई केन्द्रों में अव्यवस्था के संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया जाकर व्यवस्था दुरूस्त कराया गया।
        जिले में धान उपार्जन की प्रक्रिया के प्रारंभ से ही प्रत्येक सप्ताह शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जिला सहकारी बैंक, सहकारिता विभाग, खाद्य विभाग, छ०ग० राज्य विपणन संघ, कृषि विभाग एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों की बैठक लेते हुए धान उपार्जन की स्थिति की समीक्षा किया जाकर शासन के निर्देशों के सुचारू रूप से क्रियान्वयन के लगातार निर्देश दिये गए। कलेक्टर महोदय के मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण में उपार्जन का कार्य 14 नवंबर 2024 से प्रारंभ होकर दिनांक 31 जनवरी 2025 तक जिले में सुचारू रूप से सम्पादित हुआ।

 

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