आप रिटायर हुए हैं, टायर्ड नहीं, समाज को दें समयः काले
- भारतीय पेंशनर्स मंच के पहले राज्य स्तरीय अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि मंडल अध्यक्ष ने किया मार्गदर्शन
रायपुर। आप सभी अपनी नौकरी से रिटायर हुए हैं, टायर्ड नहीं हुए, इसलिए अब आप खुद को और समाज को अपना समय दें। नौकरी के चक्कर में अब तक जिस काम के लिए आपस समय नहीं निकाल पाए, वो सारे काम करिए। मन में अगर थोड़ा भी यह विचार आया कि काम बहुत हो गया, अब आराम करना है तो जीवन कठिन हो जाएगा। आप सभी अपना रुटीन उसी तरह रखिए, जैसा कि आप नौकरी के दिनों में रखते थे। सुबह 9.30 बजे खाना खाया और काम पर निकल गए। उक्ताशय के विचार महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने भारतीय पेंशनर्स मंच के पहले राज्य स्तरीय अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए।

काले ने कहा कि भारतीय पेंशनर्स मंच वर्ष 2018 में जब गठित हुआ, तो गिनती के सदस्य थे। राज्य समन्वयक संजय किरवई के माध्यम से इस मंच की लगातार बैठकें यहां हो रही हैं। हर बैठक के साथ संगठन मजबूत होता दिखाई दिया। आज पहले राज्य स्तरीय सम्मेलन में आपकी उपस्थिति यह बता रही है कि संगठन बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि मैं आपको बताना चाहता हूं कि हर संगठन पहले छोटा ही होता है। महाराष्ट्र मंडल रायपुर भी वर्ष 1935 में कुछ सदस्यों के साथ शुरू हुआ। आज 90 वर्षों के सफर में मंडल कई प्रकल्पों को 4500 से अधिक आजीवन सभासदों और 200 से अधिक सक्रिय सदस्यों के साथ संचालित करते हुए समाजसेवा में जुटा है। निःसंदेह भारतीय पेंशनर्स मंच भी समय के साथ विशाल वटवृक्ष का रूप लेगा। काले ने कहा कि संगठन बनाना आसान हैं, लेकिन उसे गति प्रदान करना कठिन काम है।
कार्यक्रम के विशेष अतिथि भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र नामदेव ने कहा कि पेंशन का इतिहास 150 साल पुराना है। 1871 में इंडियन पेंशन एक्ट के तहत इसे लागू किया गया। अंग्रेजों के शासन काल में पेंशन अंग्रेजों द्वारा अपने अच्छे मुलाजिमों को पुरस्कार स्वरूप दी जाती थी। समय के साथ इसमें बदलाव आया। पेंशन एक रिटारमेंट प्लान है, ताकि पूरी उम्र सरकार की सेवा करने वाले का जीवन रिटायरमेंट के बाद अच्छे से व्यतीत हो सके।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भारतीय पेंशनर्स संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीएस यादव ने कहा कि संगठन की शक्ति से आप भली- भांति परिचित हैं। लंबे समय से समाज और संघ को दिए समय के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि मेरे जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब मैंने इन चीजों से दूरी बना ली और आध्यात्म की ओर चला गया। एक बार फिर मैं इस मंच से माध्यम से देश के लाखों पेंशनरों की सेवा में जुट गया हूं।




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