राजिम कुंभ संत कवि पवन दीवान की ही परिकल्पना : अग्रवाल
संत कवि पवन दीवान के बारे में कुछ भी बोलना भास्कर को दीपक दिखाने के समान : चौबे
यहां मेरा सम्मान नहीं हुआ है, बल्कि मेरे साथ खड़े होने वाले प्रत्येक बहनों का सम्मान हुआ : मीनल चौबे
डॉ. आदित्य शुक्ला एवं डा. चितरंजन कर को संत कवि पवन दीवान स्मृति अस्मिता सम्मान
संत कवि पवन दीवान श्रद्धांजलि सभा एवं सम्मान समारोह विप्र भवन में आयोजित
रायपुर। राजिम कुंभ संत कवि पवन दीवान जी की ही परिकल्पना है। पवन दीवान छत्तीसगढ़ की गरिमा और अस्मिता की पहचान थे। वे संत, कवि हृदय, लेखक , साहित्यकार हम सबके मार्गदर्शक थे। आज जब फिर से एक बार सनातन की ज्वाला प्रज्वलित हुई है। ऐसे में विप्र समाज का गौरवशाली परंपरा, संस्कार, संस्कृति और सनातन धर्म को आगे बढ़कर युवा पीढ़ी को बचाने के लिए किया गया कार्य ही पवन दीवान जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उक्त विचार संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सौजन्य से छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण समाज के तत्वावधान में विप्र सांस्कृतिक भवन प्रबंध समिति द्वारा आयोजित संत कवि पवन दीवान श्रद्धांजलि सभा एवं सम्मान समारोह, विप्र भवन समता कॉलोनी में मुख्य अतिथि सांसद एवं पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने व्यक्त किए।
इस अवसर पर रविंद्र चौबे ने बताया कि पवन दीवान जी की स्मृति को छत्तीसगढ़ की पहचान को बनाए रखने के लिए ही संत कवि पवन दीवान श्रद्धांजलि सभा और सम्मान समारोह का आयोजन विगत 8 वर्षों से विप्र समाज कर रहा है। संत कवि पवन दीवान के बारे में कुछ भी बोलना भास्कर को दीपक दिखाने के समान है, क्योंकि पवन दीवान जी छत्तीसगढ़ के आन-वान शान थे। छत्तीसगढ़ के अस्मिता और विकास के लिए हमेशा बेचैन रहे। आज छत्तीसगढ़ के विकास के लिए समर्पित होकर कार्य कर हम सब संत कवि पवन दीवान के सपनों को साकार करें।
इस अवसर पर नवनिर्वाचित महापौर मीनल चौबे ने संत कवि पवन दीवान को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि संत पवन दीवान के सपनों को साकार करने का अवसर विप्र समाज के प्रेम और आशीर्वाद से उनके प्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष सहयोग से मुझे प्राप्त हुआ है। उन्होंने अपनी जीत पर कहा कि सबसे बड़ी जीत बड़ी चुनौती भी लाती है। जिस विश्वास के साथ रायपुर के जनता ने मेरा साथ दिया उस विश्वास पर खरे उतरने के लिए पूरा प्रयास करूंगी। आज यहां मेरा सम्मान नहीं हुआ है, बल्कि मेरे साथ खड़े होने वाले प्रत्येक बहनों का सम्मान हुआ है। इसके पहले सर्वप्रथम विप्र सांस्कृतिक भवन प्रबंध समिति के अध्यक्ष नरेंद्र तिवारी ने समाज के कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। इसके उपरांत संत कवि पवन दीवान स्मृति अस्मिता सम्मान कवि एवं आध्यात्मिक लेखक डॉ. आदित्य शुक्ला एवं साहित्य व भाषा के प्रोफेसर डा. चितरंजन कर को प्रदान किया गया। मुख्य अतिथि एवं विप्र समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने उन्हें 21000 नगद, सम्मान पत्र, स्मृति चिन्ह, शाल व श्रीफल से सम्मानित किया। इसके उपरांत विप्र समाज ने नवनिर्वाचित महापौर मीनल चौबे के साथ विप्र समाज के नवनिर्वाचित पार्षद सरिता आकाश दुबे, सुमन अशोक पांडेय, आकाश तिवारी, मुरली शर्मा, देवदत्त द्विवेदी, स्वप्निल मिश्रा एवं ममता सोनू तिवारी का पूरे उत्साह के साथ सम्मान एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मेघेश तिवारी ने किया। अंत में आभार प्रदर्शन समारोह की परिकल्पना को साकार रूप देने में महती भूमिका निभाने वाले डॉ. सुधीर शर्मा ने किया।
उपरोक्त जानकारी देते हुए छत्तीसगढ़ युवा विकास संगठन के अध्यक्ष ज्ञानेश शर्मा ने बताया कि संत कवि पवन दीवान के स्मृति में संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से यह कार्यक्रम विगत 8 वर्षों से विप्र सांस्कृतिक भवन प्रबंध समिति द्वारा आयोजित किया जा रहा है। जिसमें छत्तीसगढ़ के संस्कृति और परंपरा को साहित्य के माध्यम से जन-जन तक पहुंचने वाले साहित्यकारों का सम्मान किया जाता है। इस अवसर पर सुभाष तिवारी, मृत्युंजय दुबे, प्रदीप नारायण तिवारी, विनय तिवारी, संजय शर्मा, नटराज शर्मा, सुरेंद्र शुक्ला, के.के. शुक्ला, अविनाश शुक्ला, दिनेश शर्मा, अशोक दीवान, प्रमोद मिश्रा, संजय शर्मा, प्रशांत शर्मा, डा. ध्रुव पांडेय, उमाकांत शर्मा, कमल नारायण शर्मा, प्रदीप पांडे कमलेश तिवारी, वीर अजीत शर्मा, के.के. मिश्रा, राजेंद्र दुबे, विप्र शक्ति महिला मंडल के सदस्य कुसुम शर्मा, विभा तिवारी, प्रीति शुक्ला, भारती किरण शर्मा, आभा मिश्रा, रत्ना मिश्रा, सुनीता दुबे ,सरिता तरुण शर्मा ,कुसुम तिवारी , ममता शर्मा एवं संजीता शुक्ला सहित छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण समाज के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे।




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