करोड़ों की लागत से बना कोंडागांव बस स्टैंड उपेक्षित, हाई कोर्ट ने शासन से मांगा जवाब
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए अंतरराज्यीय बस स्टैंड की बदहाली को लेकर दायर जनहित याचिका पर बिलासपुर हाई कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ में इस मामले की सुनवाई हुई, जिसमें बस स्टैंड की दुर्दशा पर नाराजगी जाहिर करते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 6.51 करोड़ रुपये की लागत से इस बस स्टैंड का निर्माण कराया गया था, लेकिन यह दो वर्षों से बिना उपयोग के बंद पड़ा है। रखरखाव और सुरक्षा के अभाव में यह स्थान असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है। शराबखोरी, स्टंटबाजी और अवैध गतिविधियां यहां आम हो गई हैं। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी न होने से अपराधिक घटनाओं को भी बढ़ावा मिल रहा है।
कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव और कोंडागांव नगर निगम आयुक्त को व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने पूछा है कि जब सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर इस बस स्टैंड का निर्माण कराया था, तो उसे संचालित करने की दिशा में कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया? खंडपीठ ने इस जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए 16 अप्रैल की तारीख तय की है। सुनवाई के दौरान, शासन द्वारा अब तक उठाए गए कदमों की समीक्षा की जाएगी और यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए जा सकते हैं कि बस स्टैंड को जल्द से जल्द चालू किया जाए।


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