राममंदिर में हुआ आचार्य अय्यर का नारदीय कीर्तन
0- पुणे के सुप्रसिद्ध कथावाचक- कीर्तनकार से कीर्तन सुनकर मंत्रमग्ध हुए भक्तगण
रायपुर। पुणे के कथावाचक- कीर्तनकार रामनाथ रामचंद्र अय्यर ने हनुमान जयंती के अवसर पर चौबे कालोनी स्थित राम मंदिर में नारदीय कीर्तन किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले, सचिव चेतन दंडवते, आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले, अजय देशपांडे, सृष्टि दंडवते, अतुल गद्रे, निखिल मुकादम, श्यामल जोशी, अवंती अग्निहोत्री, अपर्णा कालेले, परितोष डोनगांवकर, अंजलि मुकादम, सौ. बल्की, सौ. आप्टे, कल्पना बड़वाइक, अरविंद देशपांडे, आकांक्षा गद्रे, अर्चना मुकादम, अभिषेक बक्षी, राजश्री वैद्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे। इस अवसर पर भक्तजनों ने नारदीय कीर्तन का लाभ लिया।
कथावाचक अय्यर ने कहा कि वाल्मीकि रामायण में वर्णित हनुमानजी बल, बुद्धि, विद्या और निस्वार्थ सेवा के सर्वोच्च प्रतीक हैं, जो रामकाज के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। वे न केवल परम भक्त हैं, बल्कि वेदों के ज्ञाता, चतुर कूटनीतिज्ञ और संकटमोचक भी हैं, जिन्होंने सीता माता की खोज और लक्ष्मण के प्राण बचाकर महा शक्तिशाली की भूमिका निभाई। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हनुमान जी का चरित्र प्रबंधन, अटूट समर्पण और विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य व साहस के साथ समाधान खोजने की प्रेरणा देता है, जो वर्तमान युग में बेहद जरूरी है।
आचार्य रामनाथ रामचंद्र ने कहा कि वाल्मिकी रामायण के अनुसार हनुमान जी का जन्म वानर राज केसरी और माता अंजनी के पुत्र के रूप में हुआ था। मान्यता है कि माता अंजनी ने शिव के अंशावतार पुत्र की प्राप्ति के लिए 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें वरदान दिया, जिसके फलस्वरूप पवनदेव के माध्यम से यज्ञ का प्रसाद मिलने पर अंजनी ने हनुमानजी को जन्म दिया। यह तपस्या उन्हें एक श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए भी महत्वपूर्ण थी।


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