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 ग्रीष्‍मकाल में ‘सात्विक’ की स्‍वस्‍थ जीवनशैली का सूत्र

0- सुप्रसिद्ध डायटिशन डॉ. अभया जोगलेकर ने बताया कई हफ्ते रहने वाले भीषण गर्मी में अपने आपको कैसे रखें सेहतमंद
रायपुर। सुप्रसिद्ध डायटि‍शियन डॉ. अभया जोगलेकर ने जोर देकर कहा कि इस गर्मी केवल भोजन ही न करें, बल्कि 'सात्विक’ आहार अपनाएं, जो न केवल आपके शरीर को पोषण दे, बल्कि मन को भी शांत भी रखे। भीषण गर्मी और बढ़ता तापमान हमारी ऊर्जा सोख लेता है। इसके साथ ही हमारी पाचन क्रिया और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डालता है। आयुर्वेद और आधुनिक पोषण विज्ञान दोनों ही इस बात पर जोर देते हैं कि 'जैसा अन्न, वैसा मन और तन'। जब सूर्य का ताप अपने चरम पर हो, तब सही आहार ही हमारा सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बनता है। 
समाज कल्‍याण विभाग की ओर से अनुदानित और महाराष्‍ट्र मंडल द्वारा संचालित सियान गुड़ी में वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में डॉ. जोगलेकर ने कहा कि भीषण गर्मी को देखते हुए आहार की ‘सात्विक’ (SATVIK) मार्गदर्शिका उन बुनियादी सिद्धांतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जो हर उम्र के व्यक्ति, चाहे वे बच्चे हों, बुजुर्ग हों या गर्भवती महिलाएं… को हाइड्रेटेड, ऊर्जावान और स्वस्थ रखने में मदद करती है। 
बद्री प्रसाद लोधी स्‍नातकोत्‍तर शासकीय महाविद्यालय की प्राचार्य और वरिष्‍ठ डायटिशियन डॉ. अभया जोगलेकर ने सात्विक शब्‍द की अंग्रेजी में स्‍पेलिंग लिखकर प्रत्‍येक अल्‍फाबेट का अर्थ समझाया। उन्‍होंने बताया कि एस का आशय सीजनल (मौसमी) से है। तेज गर्मी के दौरान स्थानीय और मौसमी फलों व सब्जियों का चुनाव करना चाहिए। हमारे यहां अभी लाल भाजी, चौलाई, चेच, अमाड़ी, पालक, मेथी, गोल, खेड़ा, प्याज, कांदा भाजी बाजार में आ रहे हैं। अतः इन सब्जियों का पर्याप्त सेवन करें। इस मौसम में पाई जाने वाली गंगा इमली, ताजी इमली का भी सेवन करें।   
डॉ. जोगलेकर के अनुसार ए अर्थात एक्विअस (जलयुक्त) होता है। मतलब ग्रीष्‍मकाल में ऐसे खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें, जिनमें पानी की मात्रा अधिक हो जैसे खीरा, तरबूज, ककड़ी, खीरा, तरोई, लौकी। साथ ही दिनभर पर्याप्त पानी पीयें। प्यास लगने का इंतज़ार न करें, क्योंकि गर्मी के दिनों में पसीने की अधिकता से शरीर में पानी और मिनरल्स की कमी को पूरा करने के लिए सादे पानी के अलावा एल्कलाइन वाटर (खीरे, पुदीना नींबू, धनिया पत्ती से बना), नारियल पानी, नींबू पानी, शिकंजी, छाछ, लस्सी और ताजे फलों का रस, गन्ने का रस (हायजि‍निक) बेहतरीन विकल्प हैं। स्थानीय फल, बेल से निर्मित शरबत पीयें, जो पेट को ठंडा रखता है। दोपहर के समय बुजुर्गों को चने का सत्तू, जौ का सत्तू या गोंद कतीरा का शरबत देना फायदेमंद होता है। यह लू से बचाने में मदद भी करता है।
प्राचार्य डॉ. जोगलेकर ने टी का आशय टेंपर्ट यानी संतुलित तासीर का खाद्य बताया। उन्‍होंने कहा कि गर्मियों में पाचन शक्ति थोड़ी धीमी हो जाती है, इसलिए मसालेदार भारी और तैलीय भोजन के बजाय हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करें। अत्यधिक गर्म तासीर वाले मसालों और कैफीन (चाय, काफी) से बचें। इनके स्थान पर पुदीना, सौंफ और हरा धनिया जैसे ठंडे तासीर वाले मसालों का उपयोग करें।
उनके मुताबिक वी का अर्थ वाइटिलाइजितंग (ऊर्जादायक) से है। इसके तहत उन्‍होंने हल्का और ताज़ा भोजन लेकर शरीर को सक्रिय बनाए रखने का सुझाव दिया। डॉ. जोगलेकर ने आई से इम्‍यून बूस्‍टर अर्थात रोग प्रतिरोधक को जोड़ा। इसमें विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार लेने का सुझाव दिया गया। इसके अंतर्गत नींबू की शिकंजी, बीटरुट की कांजी, बासी, बोरे, अंबलि, वेज स्मूदी,  नारियल पानी को उन्‍होंने श्रेष्‍ठ कहा। 
वरिष्‍ठ नागरिकों को उन्‍होंने के का आशय काइंड टू गट (पाचन अनुकूल) बताया। डॉ. अभया जोगलेकर ने दैनिक आहार में प्रोबायोटिक्स (दही, छाछ) को शामिल करने कहा, इससे शरीर ठंडा रहता है। साथ ही पेट के स्वास्थ (गट हेल्‍थ) के लिए भी लाभकारी है। उन्‍होंने उपस्थित बुजुर्गों से एक बार में बहुत अधिक खाने के बजाय थोड़े-थोड़े अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा खाने (स्‍माल मील्‍स) कहा।
सियान गुड़ी में डॉ. जोगलेकर का पूरा संबोधन वरिष्‍ठ नागरिकों पर केंद्रीत था। उन्‍होंने बुजुर्गों से कहा कि ग्रीष्म ऋतु में आप लोगों को विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है। उम्र के साथ आपको प्यास का अनुभव कम हो सकता है, इसलिए थोड़ी-थोड़ी देर में पानी, ग्लूकोज या ओआरएस लेते रहें, ताकि शरीर इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बना रहे। गर्म मौसम के अनुरूप ही आपको आहार में दलिया, खिचड़ी या सूप जैसी नरम चीजों को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि इन्हें चबाने और पचाने में आसानी हो। गेंहू की रोटी के स्थान पर ज्वार की रोटी का सेवन जरूर करें। 
महाराष्‍ट्र मंडल की वरिष्‍ठ सभासद डॉ. अभया ने बुजुर्गों की मांसपेशियों की मजबूती के लिए दालें, पनीर या सोयाबीन का सेवन कराने का सुझाव तो दिया, लेकिन जोर देकर कहा कि ये सब कम तेल-मसाले में बने हों। इसी तरह यदि वे उच्च रक्तचाप या मधुमेह से जूझ रहे हैं, तो पेय पदार्थों में नमक और चीनी की मात्रा का विशेष ध्यान रखें। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए जामुन, आम (सीमित मात्रा में) और हरी पत्तेदार सब्जियों को जरूर शामिल करना चाहिए।
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