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 खाद्यान्न सुरक्षा सुनिश्चित करने में खरपतवार प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका: डाॅ. चंदेल

कृषि वैज्ञानिकों तथा कृषि विभाग के मैदानी कार्यकर्ताओं ने सीखे खरपतवार प्रबंधन के गुर
रायपुर । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल ने कहा है कि विश्व की संम्पूर्ण आबाद हेतु खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये पर्याप्त फसल उत्पादन करने में खरपतवार प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका है। खेतों में खरपतवारों का समुचित प्रबंधन न होने पर फसल उत्पादन में काफी कमी आ जाती है और कई बार तो खरपतवारों की वजह से तीन चैथाई फसल तक नष्ट हो जाती है। डाॅ. चंदेल ने कृषि वैज्ञानिकों तथा कृषि विभाग के मैदानी अमले से खेतों में खरपतवार प्रबंधन पर समुचित ध्यान देने का आव्हान किया। डाॅ. चंदेल आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में संचालित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (खरपतवार प्रबंधन) तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के निदेशालय खरपतवार अनुसंधान, जबलपुर के संयुक्त तत्वावधान में खरपतवार प्रबंधन पर आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में कृषि विश्वविद्यालय के अंर्तगत कार्यरत कृषि वैज्ञानिकों, विषय वस्तु विशेषज्ञों, प्रक्षेत्र प्रबंधकों तथा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर निदेशालय खरपतवार प्रबंधन जबलपुर के संचालक डाॅ. जे.एस. मिश्रा तथा संचालक अनुसंधान सेवाएं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय डाॅ. वी.के. त्रिपाठी ने भी संबोधित किया। 
निदेशक खरपतवार अनुसंधान, जबलपुर डाॅ. जे.एस. मिश्रा ने इस अवसर पर कहा कि आज कृषि के क्षेत्र में मजदूरों की कमी के वजह से खरपतवारों के प्रबंधन में काफी कठिनाई हो रही है और किसानों की यांत्रिक विधियों के बजाय रासायनिक नींदानाशकों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि आज विभिन्न प्रकार के खरपतवार नियंत्रण हेतु काफी अच्छे नींदानाशक बाजार में उपलब्ध हंै जिनका समुचित प्रयोग कर खरपतवारों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है तथा किसानों की आय में वृद्धि की जा सकती है। कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में निदेशालय खरपतवार अनुसंधान, जबलपुर के प्रमुख वैज्ञानिक डाॅ. वी.के. सिंह तथा डाॅ. वी.के. चैधरी, कृषि महाविद्यालय, रायपुर के प्राध्यापक डाॅ एम.सी. भाम्बरी और सेवानिवृत्त प्राध्यापक डाॅ. एस.एस.कोल्हे ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को छत्तीसगढ़ में पाये जाने वाले प्रमुख खरपतवारों की पहचान करायी गई तथा उनके नियंत्रण हेतु प्रयुक्त नींदानाशकों के बारे में जानकारी प्रदान की गई। प्रमुख वैज्ञानिक डाॅ. श्रीकांत चितले ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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