सिंहस्थ महाकुंभ भारत की प्राचीन विरासत को आधुनिक आयामों से जोड़ेगा: मुर्मू
नासिक. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को कहा कि नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ भारत की प्राचीन विरासत को आधुनिक आयामों से जोड़ेगा और युवा पीढ़ी को देश के समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों से परिचित कराने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करेगा। इस धार्मिक आयोजन के लिए ध्वजारोहण और तैयारियों की शुरुआत के मौके पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुर्मू ने कहा कि सदियों पुरानी कुंभ परंपरा भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक एकता और निरंतरता का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा, ''नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ 2027 हमारी प्राचीन विरासत को आधुनिक आयामों से जोड़ेगा। यह आयोजन युवा पीढ़ी को भारत की महान विरासत और मूल्यों से जोड़ने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करेगा।'' राष्ट्रपति ने कहा कि गोदावरी नदी के तट पर नासिक, गंगा के तट पर प्रयागराज और क्षिप्रा नदी के तट पर उज्जैन में आयोजित होने वाले कुंभ मेले दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने कहा कि सदियों से ऐसे आयोजनों का होना भारत की प्राचीन, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक परंपराओं की मजबूती का प्रमाण है। मुर्मू ने कहा कि असंख्य श्रद्धालुओं के इन समागमों में शामिल होने से देश की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक एकता और निरंतरता का जीवंत उदाहरण देखने को मिलता है और ये आयोजन आस्था और सामाजिक सद्भाव को भी दर्शाते हैं। राष्ट्रपति ने महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों और सूखे जैसी स्थिति को लेकर भी चिंता जताई, जिससे किसानों को नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें इन समस्याओं के समाधान और विशेष रूप से किसानों को सहायता प्रदान करने के प्रयास कर रही हैं। पर्यावरण संरक्षण की अपील करते हुए मुर्मू ने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''मैं सभी नागरिकों से अपील करती हूं कि वे पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर निरंतर प्रयास करें।'' उन्होंने उम्मीद जताई कि महाकुंभ प्रभावी प्रशासन और जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में एक मिसाल कायम करेगा। इससे पहले दिन में राष्ट्रपति ने कुंभ मेले की शुरुआत के अवसर पर 'ध्वजारोहण' समारोह में हिस्सा लिया। उन्होंने गोदावरी नदी के तट पर स्थित रामकुंड में पूजा-अर्चना के बाद धार्मिक ध्वज फहराया। सिंहस्थ कुंभ मेला त्र्यंबकेश्वर में 27 फरवरी, 2028 को और रामकुंड में 24 जुलाई, 2028 को संपन्न होगा।

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