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 महिलाएं सोती हैं अधिक गहरी नींद, फिर भी पुरुषों से ज्यादा महसूस करती हैं थकान

आजकल के समय में खराब स्लीप साइकिल काफी बड़ी समस्या बन चुका है. अक्सर माना जाता है कि जो जितनी लंबी और गहरी नींद सोएगा वह सुबह उतना ही फ्रेश महसूस करेगा. लेकिन हाल ही में नींद को लेकर वैज्ञानिकों ने एक बेहद हैरान करने वाला खुलासा किया है. रिसर्च में कहा गया है कि महिलाएं पुरुषों से अधिक बेहतर और लंबी नींद लेती हैं फिर भी वे सुबह उठकर अनरेस्टेड यानी थकी हुई महसूस करती हैं. वहीं दूसरी तरफ पुरुष कम सोने के बावजूद अपनी नींद से अधिक संतुष्ट रहते हैं. ऐसा क्यों होता है, इसका कारण जान लीजिए.
क्या कहती है जर्नल न्यूरोसाइंस की रिसर्च?
स्लीप साइकिल को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने नींद की क्वालिटी और उसके समय का गहराई से एनालिसिस किया. जर्नल न्यूरोसाइंस में पब्लिश रिसर्च का कहना है, नींद की क्वालिटी सिर्फ इस बात पर डिपेंड नहीं करती कि आपने कितने घंटे की नींद ली या आपकी नींद कितनी गहरी थी. बल्कि इस बात पर तय होती है कि आपकी 'परसीव्ड क्वालिटी ऑफ स्लीप' यानी नींद को लेकर आपकी खुद की सोच कैसी है.
स्लीप फाउंडेशन की रिपोर्ट बताती है कि क्लिनिकल इंसोम्निया (अनिद्रा) के दो-तिहाई मामलों में लोग भरपूर सोने के बाद भी यही शिकायत करते हैं कि उनकी नींद पूरी नहीं हुई. वैज्ञानिकों का कहना है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं रात में भले ही कम बार जागती हैं लेकिन जब भी उनकी आंख खुलती है वे पुरुषों से ज्यादा देर तक जागती रहती हैं.
रात की यादें और पुरुषों का ओवरएस्टीमेशन
इंटरनेशनल पब्लिकेशन द कन्वर्सेशन के डेटा के मुताबिक, अगर रात में किसी महिला की नींद टूटती है तो वह औसतन 9 मिनट तक जागती रहती है जबकि पुरुष सिर्फ 6 से 7 मिनट में दोबारा सो जाते हैं.
मेडिकल साइंस कहता है कि यदि कोई व्यक्ति रात में 5 मिनट से ज्यादा समय तक जागता है तो उसके ब्रेन को वह घटना पूरी तरह याद रह जाती है. महिलाओं को रात में बार-बार जागने और देर तक जागने की यह बात सुबह तक याद रहती है जिससे उन्हें लगता है कि वे रातभर ठीक से सो नहीं पाईं.
वहीं दूसरी ओर पुरुष अपनी रात की छोटी-मोटी जागने की आदतों को भूल जाते हैं और सुबह उठकर अपनी नींद को ओवरएस्टीमेट करते हैं यानी सोचते हैं कि वे बहुत अच्छी नींद सोए.
हॉर्मोन्स और फिजिकल प्रॉब्लम्स भी वजह
नींद के इस जेंडर गैप के पीछे सिर्फ मेंटल परसेप्शन ही नहीं बल्कि कई फिजिकल और बायोलॉजिकल कारण भी जिम्मेदार हैं. महिलाओं के शरीर में मेन्स्ट्रुअल साइकिल (पीरियड्स) के दौरान होने वाले हॉर्मोनल बदलाव, प्रेग्नेंसी के समय बैक पेन या यूरिन की समस्या और मेनोपॉज के दौरान हॉट फ्लैशेस जैसी दिक्कतें उनकी स्लीप क्वालिटी को बुरी तरह प्रभावित करती हैं.
इन वजहों से उनकी स्लीप एफिशिएंसी कम हो जाती है. यही कारण है कि स्लीप ट्रैकर या गैजेट्स में भले ही महिलाओं का स्लीप टाइमिंग पुरुषों से ज्यादा दिखाई दे, लेकिन इंटरनल थकावट के चलते वे खुद को रीफ्रेश महसूस नहीं कर पाती हैं.
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