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केंद्र ने अधिकारियों के अध्ययन अवकाश के लिए संशोधित दिशा निर्देश जारी किये

  नयी दिल्ली  ।  केंद्र ने अध्ययन अवकाश पर जाने वाले आईएएस, आईपीएस और आईएफओएस अधिकारियों के लिए दिशानिर्देशों में संशोधन किया है, जिससे उनके लिए सेवा नियमों का पालन करना अनिवार्य हो गया है और ऐसा करने में विफल होने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक और परिणामी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम अखिल भारतीय सेवा के कुछ अधिकारियों के अध्ययन अवकाश के दौरान एआईएस (आचरण) नियमावली, 1968 की भावना के अनुरूप आचरण नहीं करने के उदाहरणों के बाद आया है। तीन अखिल भारतीय सेवाएं (एआईएस) हैं - भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय वन सेवा (आईएफओएस)। कार्मिक मंत्रालय के एक आदेश के अनुसार, अब ऐसे अधिकारियों को एक संशोधित बॉन्ड के तहत एक वचन पत्र देना होगा कि वे अध्ययन अवकाश के दौरान आचरण को लेकर अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमावली, 1968 और दिशानिर्देशों का पालन करेंगे तथा ऐसा करने में विफल होने पर वे अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करने के लिए उत्तरदायी होंगे। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को जारी आदेश में कहा गया है कि अध्ययन अवकाश पर जाने से पहले निष्पादित किए जाने वाले बांड को तदनुसार संशोधित किया गया है, जिसके तहत सेवा का सदस्य अध्ययन अवकाश के दौरान अन्य बातों के साथ-साथ अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 और आचरण संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करने का वचन देगा। दिशानिर्देश में कहा गया कि अधिकारियों से ‘‘सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुरूप परिपक्वता और संवेदनशीलता प्रदर्शित करने की अपेक्षा की जाती है।'' दिशानिर्देशों में कहा गया है, ‘‘सेवा के सदस्य से अपेक्षा की जाती है कि वह विदेशी नागरिकों और/या मिशन के साथ अपनी बातचीत और सोशल मीडिया पर अपने संवाद में विवेक का प्रयोग करें।'' इसमें कहा गया है कि ऐसे अधिकारी स्वीकृत अवकाश से अधिक अवधि तक छुट्टी पर नहीं रहेंगे।

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