गैस चूल्हे की लौ से उत्सर्जित बेंजीन का घर में स्तर परोक्ष धूम्रपान के स्तर से हो सकता है अधिक
नयी दिल्ली. अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की अगुवाई में हुए एक नये अध्ययन में सामने आया है कि गैस चूल्हे की लौ से घरेलू स्तर पर अत्यधिक ज्वलनशील और ‘कार्सिनोजेनिक' (कैंसर पैदा करने की संभावना वाला) बेंजीन का उत्सर्जन होता है, जिसका स्तर परोक्ष धूम्रपान की तुलना में कहीं अधिक हो सकता है। ‘इनवायरमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी' पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में शामिल वैज्ञानिकों ने कहा कि बेंजीन पूरे घर में फैल जाती है और यह हवा में घंटों तक बरकरार रहती है। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं अध्ययन के वरिष्ठ लेखक रॉब जैकसन ने कहा, ‘‘बेंजीन आग की लौ और अन्य उच्च तापमान वाले वातावरण में बनती है। अब हम जानते हैं कि बेंजीन हमारे घरों में गैस चूल्हे की लौ में भी बनती है।'' जैकसन ने कहा, ‘‘अच्छी हवादार परिस्थितियां प्रदूषक सांद्रता को कम करने में मदद करती है। हालांकि, हमने पाया कि ‘एक्जॉस्ट फैन' अक्सर बेंजीन के असर को खत्म करने में अप्रभावी होते हैं।'' शोधकर्ताओं ने पाया कि गैस चूल्हे की लौ से उत्सर्जित होने वाली बेंजीन की सांद्रता परोक्ष धूम्रपान से उत्पन्न औसत सांद्रता से भी बदतर हो सकती है। अध्ययन में पाया गया कि बेंजीन रसोई से दूर अन्य कमरों में फैल सकती है और शयनकक्ष में मापी गयी इसकी सांद्रता का स्तर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों को पार कर सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि गैस, प्रोपेन बर्नर और ओवन, इलेक्ट्रिक स्टोव की तुलना में 10 से 50 गुना अधिक बेंजीन उत्सर्जित करते हैं। शोधकर्ताओं ने यह भी परीक्षण किया कि क्या पकाए जा रहे खाद्य पदार्थ बेंजीन उत्सर्जित करते हैं। हालांकि, ऐसा नहीं पाया गया।


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