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बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए 80 गीगावाट क्षमता जोड़ने की जरूरत : आर के सिंह

नयी दिल्ली.  केंद्रीय बिजली मंत्री आर के सिंह ने मंगलवार को कहा कि देश में अधिकतम बिजली की मांग वर्तमान में 241 गीगावाट से बढ़कर 2030 तक 335 गीगावाट हो जाएगी और इसे पूरा करने के लिए कोयला आधारित बिजली उत्पादन क्षमता में 80 गीगावाट जोड़ने की जरूरत है। वर्तमान में 27 गीगावाट की कोयला आधारित क्षमता निर्माणाधीन है। उन्होंने मंगलवार को देश में तापीय बिजली क्षमता वृद्धि पर एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इसमें स्वतंत्र बिजली उत्पादकों और सार्वजनिक क्षेत्र के बिजली उत्पादक एनटीपीसी, एसजेवीएन, एनएचपीसी, डीवीसी, टीएचडीसीआईएल और एनएलसीआईएल ने भाग लिया। इसके अलावा 13 प्रमुख राज्यों के ऊर्जा सचिवों को भी विचार-विमर्श के लिए आमंत्रित किया गया था।
 समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि भारत की अधिकतम बिजली मांग 2029-30 में 241 गीगावाट (एक गीगावाट बराबर 1,000 मेगावाट) के वर्तमान स्तर से बढ़कर 335 गीगावाट तक पहुंच जाएगी। सितंबर में बिजली की अधिकतम मांग 241 गीगावॉट के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई थी, जो आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के साथ-साथ प्रति व्यक्ति उपयोग के साथ देश में बिजली की खपत में वृद्धि को दर्शाता है। मंत्री ने कहा कि भारत को वर्तमान में निर्माणाधीन 27 गीगावाट की तुलना में 80 गीगावाट कोयला आधारित ताप विद्युत उत्पादन क्षमता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने में सिर्फ नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि मदद नहीं कर सकती है। देश में बिजली की मांग पहले से ही 241 गीगावाट के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है। भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

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