एबीपीएस से न जुड़ने पर मनरेगा के श्रमिकों को नहीं, राज्यों को दंडित करेंगे: मंत्री
नयी दिल्ली. ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने मनरेगा के तहत भुगतान के वास्ते आधार को अनिवार्य बनाने की आलोचना करने पर मंगलवार को कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि यदि श्रमिक अबतक आधार आधारित भुगतान प्रणाली (एबीपीएस) से नहीं जुड़े हैं तो ‘ हम श्रमिकों को नहीं, बल्कि राज्यों को दंडित करेंगे।' ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लिए एबीपीएस को अनिवार्य किये जाने के एक दिन बाद सिंह ने कहा कि आधार संख्या को जोड़ने के लिए कई समय सीमाएं दी गयीं। उन्होंने पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि केंद्र सरकार गरीबों के खिलाफ ‘‘प्रौद्योगिकी खासकर आधार का दुरूपयोग'' कर रही है। मंत्री ने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एबीपीएस को अनिवार्य बनाया गया है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा दो जनवरी को उपलब्ध कराये गये आंकड़े के अनुसार मनरेगा के तहत लगभग 14.32 करोड़ कार्यरत श्रमिक हैं जिनमें अबतक 14.08 करोड़ श्रमिकों के आधार जोड़े जा चुके हैं। (कुल श्रमिकों में) 12.54 करोड़ श्रमिकों ने अन्य चरण पूरे कर लिये हैं तथा वे फिलहाल आधार आधारित भुगतान प्रणाली के लिए पात्र हैं। जब सिंह से उन श्रमिकों के बारे में पूछा गया जो अबतक एबीपीएस से नहीं जुड़े हैं तो उन्होंने कहा, ‘‘ हम राज्यों से बातचीत करेंगे। यदि वे कोई चिंता सामने रखते हैं तो हम देखेंगे कि आगे क्या उपाय हो सकता है।'' मंत्री ने कहा, ‘‘ हमने पिछले एक साल में समयसीमा कई बार बढ़ायी है और अब हम राज्यों से बाचतीत करेंगे और जानने का प्रयास करेंगे कि क्या मुद्दा है, वे इसे कैसे हल करेंगे ... हम श्रमिकों को नहीं, राज्यों को दंडित करेंगे।'' उन्होंने कहा कि जिन मजदूरों ने आधार पंजीकरण नहीं कराया है, उनके लिए ‘रास्ता बंद नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘ किसी को भी काम से रोका नहीं जा सकता, लेकिन हमें पारदर्शिता लाने की जरूरत है।'' जिन लोगों की आधार संख्या नहीं जोड़ी गई है, उनको शामिल करने से जुड़े तौर-तरीकों के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा कि राज्य सरकारों के साथ बातचीत के बाद निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारियों को निर्णय लेने का हक होगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सोमवार को कहा था कि यदि कुछ खास ग्राम पंचायतों के सामने ‘तकनीकी समस्याएं' हैं तो सरकार उन्हें एबीपीएस के तहत अनिवार्य भुगतान से छूट देने पर विचार कर सकती है। सिंह ने जयराम रमेश की आलोचना को खारिज करते हुए कहा, ‘‘ यह राजीव गांधी की सरकार नहीं है कि एक रुपये में 15 पैसे ही लोगों तक पहुंचेंगे। नरेन्द्र मोदी सरकार पारदर्शिता लाने पर ध्यान केंद्रित की हुई है।'' उन्होंने कहा, ‘‘जयराम रमेश इस विभाग में मंत्री रहे हैं। मनरेगा धनराशि खाते में जाती थी और यह लाभार्थियों तक पहुंचने से पहले कई हाथों से गुजरती थी। आधार से जोड़ने के कई फायदे हैं। पैसा श्रमिकों के खातों में जा रहा है। वे दुष्प्रचार कर रहे हैं क्योंकि वे चाहते हैं कि लूट होती रहे।








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