महिला पारिवारिक पेंशन के लिए अब बेटे, बेटी को कर सकेगी नामित
केंद्र ने नामित करने की अनुमति दी
नयी दिल्ली. केंद्र ने दूरगामी सामाजिक-आर्थिक प्रभाव वाले एक अहम निर्णय में महिला कर्मचारियों को अपने पति के बजाय अपने बेटे या बेटी को पारिवारिक पेंशन के लिए नामित करने की अनुमति दी है। एक आधिकारिक बयान में सोमवार को यह जानकारी दी गई। बयान में कहा गया है कि पहले, पारिवारिक पेंशन मृत सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी के पति या पत्नी को दी जाती थी, जबकि परिवार के अन्य सदस्य पति या पत्नी की अपात्रता या मृत्यु के बाद ही पात्र बनते थे। केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) ने केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 2021 में एक संशोधन पेश किया है, जिससे महिला सरकारी कर्मचारियों या पेंशनभोगियों को उनके निधन के बाद उनके जीवनसाथी के स्थान पर अपने पात्र बच्चे/बच्चों को पारिवारिक पेंशन देने की अनुमति मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि संशोधन उन स्थितियों से निपटने में मददगार होगा, जहां वैवाहिक कलह के कारण तलाक की कार्यवाही होती है या घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम, दहेज निषेध अधिनियम या भारतीय दंड संहिता जैसे कानूनों के तहत मामले दर्ज किए जाते हैं। कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है, ‘‘दूरगामी सामाजिक-आर्थिक प्रभाव वाले एक अहम निर्णय के तहत, और महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीति को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने लंबे समय से स्थापित नियम में संशोधन किया है, जिससे महिला कर्मचारी को पारिवारिक पेंशन के लिए उनके पति के बजाय उनके बेटे या बेटी को नामित करने का अधिकार मिल गया है।'' डीओपीपीडब्ल्यू ने कहा कि महिला सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी को संबंधित कार्यालय प्रमुख को एक लिखित अनुरोध करना होगा, जिसमें कहा जाएगा कि कानूनी कार्यवाही की जारी अवधि के दौरान उसकी मृत्यु की स्थिति में पति से पहले पात्र बच्चे/बच्चों को पारिवारिक पेंशन दी जानी चाहिए। बयान में कहा गया है, ‘‘अगर कार्यवाही के दौरान महिला सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी की मृत्यु हो जाती है, तो पारिवारिक पेंशन तदनुसार वितरित की जाएगी।








.jpg)

Leave A Comment