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 अगले साल एक अप्रैल से गैर-भारतीय उपग्रहों के इस्तेमाल के लिए अंतरिक्ष नियामक की मंजूरी जरूरी

नयी दिल्ली. सरकार ने उपग्रह टेलीविजन प्रसारणकर्ताओं के लिए एक परामर्श जारी कर कहा है कि वे अगले साल एक अप्रैल से गैर-भारतीय उपग्रहों के उपयोग के लिए भारत के अंतरिक्ष नियामक भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) से अनुमति लें। ‘इन-स्पेस' ने मई में भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 के कार्यान्वयन के लिए मानदंड, दिशानिर्देश और प्रक्रियाएं (एनजीपी) जारी की थीं, जिनमें कहा गया था कि केवल ‘इन-स्पेस' अधिकृत गैर-भारतीय उपग्रहों को ही देश में सेवाएं प्रदान करने की अनुमति दी जाएगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी परामर्श में एनजीपी दस्तावेज के प्रासंगिक खंड का हवाला देते हुए कहा गया है कि एक अप्रैल, 2025 से हर ‘फ्रीक्वेंसी बैंड' में केवल ‘इन-स्पेस' अधिकृत गैर-भारतीय उपग्रहों को भारत में सेवाएं देने की अनुमति दी जाएगी। गैर-भारतीय उपग्रह संचालकों से किसी भी ‘फ्रीक्वेंसी बैंड' (सी, कू या का) में क्षमता के प्रावधान के लिए मौजूदा व्यवस्था/तंत्र/प्रक्रिया को 31 मार्च, 2025 तक बढ़ाया जा सकता है। इसमें कहा गया है कि एक अप्रैल, 2025 से केवल ‘इन-स्पेस' अधिकृत गैर-भारतीय जीएसओ (भूसमकालिक कक्षा) उपग्रहों और/या एनजीएसओ (गैर-भूसमकालिक कक्षा) उपग्रह समूहों को भारत में अंतरिक्ष-आधारित संचार/प्रसारण सेवाएं प्रदान की अनुमति होगी। सरकारी परामर्श सभी निजी टेलीविजन चैनल प्रसारणकर्ताओं/टेलीपोर्ट संचालकों के लिए जारी किया गया है।

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