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सोच नहीं बदलने के कारण जारी है छद्म युद्ध : सीडीएस जनरल चौहान

नयी दिल्ली. प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने बृहस्पतिवार को 25 साल पहले हुए करगिल युद्ध में भारतीय जांबाजों की वीरता की सराहना करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि 1999 के संघर्ष के दौरान पाकिस्तान के सभी प्रयास स्पष्ट रूप से “उद्देश्यों को पूरा करने से चूक गए।” उन्होंने कहा, “आज हम जो छद्म युद्ध देख रहे हैं, वह उसी विचारधारा और सोच का परिणाम है, जो नहीं बदली है।” करगिल युद्ध की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर ‘टीवी9 नेटवर्क' द्वारा आयोजित ‘करगिल दिवस सम्मान' में सीडीएस ने यह भी कहा कि युद्ध की यादों को संजो कर रखने के अलावा, इसके बाद की स्थिति को देखना और भविष्य के लिए “सही सबक” लेना भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “हमें वही गलतियां नहीं दोहरानी चाहिए।” इस कार्यक्रम में सीडीएस ने करगिल के कई नायकों और 1999 के युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों के परिवार के सदस्यों को पुरस्कार भी प्रदान किए। भारत द्वारा 26 जुलाई 1999 को युद्ध की समाप्ति की घोषणा की गई- जिसे ‘करगिल विजय दिवस' के रूप में मनाया जाता है, जब भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को सफलतापूर्वक पीछे धकेल दिया। पाकिस्तान की सेना ने लद्दाख में महत्वपूर्ण ऊंचाइयों पर चुपके से कब्जा कर लिया था। जनरल ने कहा, “1971 (युद्ध) में हार के बाद पाकिस्तान हमेशा हमसे बदला लेना चाहता था। 1984 में सियाचिन ग्लेशियर पर हमारे द्वारा किया गया कब्जा एक और अपमान था, जो पाकिस्तान को सहना पड़ा। करगिल में इसकी कार्रवाई अपने सम्मान को पुनः प्राप्त करने के लिए थी, लेकिन स्पष्ट रूप से उसके सभी प्रयास अपने उद्देश्य में असफल रहे।” सीडीएस ने कहा कि “आज हम जो छद्म युद्ध देख रहे हैं, वह उसी विचारधारा और सोच का परिणाम है जो नहीं बदली है। इसलिए हमें, जैसा कि ओलिवर क्रॉमवेल ने कहा था ‘....ईश्वर पर भरोसा रखना चाहिए..., लेकिन...अपना बारूद सूखा रखना चाहिए।” उन्होंने कहा कि हमारे सशस्त्र बलों की दृढ़ता, अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का पर्याय बन गया करगिल युद्ध “हम सभी को भविष्य के खतरों और चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित और सामूहिक रूप से प्रोत्साहित करता है।” उन्होंने कहा, “हमें इस प्रकार की चुनौतियों का सामना करने के लिए उच्च स्तर की तैयारी बनाए रखनी होगी।” सीडीएस ने संघर्ष में लड़ने वाली विभिन्न इकाइयों के योगदान की सराहना की और साथ ही उन वीर नारियों की भी सराहना की, जिनके बेटों या पतियों ने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। जनरल चौहान ने कहा, “हमारे सैनिकों द्वारा दिए गए बलिदान की यादें हमारी राष्ट्रीय लोककथा का हिस्सा बननी चाहिए, जैसा कि करगिल युद्ध के साथ हुआ है।” सीडीएस ने कहा कि वीरता, साहस और धैर्य की गाथा से भावी पीढ़ी के युवाओं के साथ-साथ भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने वाले सैनिकों को भी प्रेरणा मिलती रहेगी। उन्होंने कहा कि युद्ध की स्मृतियों को संजोने के अलावा, इसके परिणामों पर गौर करना और भविष्य के लिए उपयोगी सबक लेना भी महत्वपूर्ण है।

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