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  जगन्नाथ मंदिर के बहुमूल्य सामान को रत्न भंडार से अस्थायी भंडार कक्ष में स्थानांतरित किया गया

पुरी। पुरी स्थित 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर के प्रतिष्ठित खजाने ‘रत्न भंडार' (कोषागार) में रखी गयी मूल्यवान सामग्री और आभूषणों को एक अस्थायी भंडार कक्ष में स्थानांतरित करने का कार्य बृहस्पतिवार को सात घंटों के भीतर पूरा हो गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रत्न भंडार को इस सप्ताह दूसरी बार खोला गया ताकि बहुमूल्य चीजों को मंदिर परिसर के भीतर एक अस्थायी ‘स्ट्रॉन्ग रूम' में रखा जा सके। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के प्रमुख अरविंद पाढ़ी ने संवाददाताओं को बताया, “रत्न भंडार के आंतरिक कक्ष से सभी कीमती सामान को सफलतापूर्वक मंदिर परिसर के भीतर एक अस्थायी ‘स्ट्रांग रूम' में स्थानांतरित कर दिया गया है। लकड़ी और स्टील की अलमारियों और संदूकों सहित सात कंटेनरों को स्थानांतरित करने की पूरी प्रक्रिया में सात घंटे लगे।” पाढ़ी ने कहा कि प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो गई है और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के दिशा-निर्देशों के अनुसार आंतरिक कक्ष और अस्थायी ‘स्ट्रांग रूम' दोनों को बंद कर सील कर दिया गया है। पर्यवेक्षण समिति के अध्यक्ष एवं उड़ीसा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति विश्वनाथ रथ ने कहा कि आंतरिक कक्ष के अंदर आभूषण और कीमती सामान सात कंटेनरों में रखे गए, जिनमें तीन लकड़ी की अलमारियां, दो लकड़ी की पेटियां, एक स्टील की अलमारी और एक लोहे की पेटी शामिल है। उन्होंने कहा कि सभी कीमती सामान को नये कंटेनरों में सावधानी से रखा गया और बाद में मंदिर परिसर के अंदर अस्थायी ‘स्ट्रांग रूम' में स्थानांतरित कर दिया गया। रथ ने कहा कि ‘स्ट्रांग रूम' को सील कर चाबियां पुरी जिलाधिकारी को दे दी गई।
 
चाबियां खजाने में रखी जाएंगी
न्यायमूर्ति रथ ने खजाने के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा, “आंतरिक कक्ष के अंदर हमने जो कुछ देखा उसका विवरण गोपनीय है। जिस तरह कोई अपने घर में कीमती सामान का खुलासा नहीं करता, उसी तरह भगवान के खजाने को सार्वजनिक रूप से उजागर करना अनुचित होगा।” इसके पहले रत्न भंडार से मूल्यवान सामग्री को स्थानांतरित करने के लिए ओडिशा सरकार द्वारा गठित पर्यवेक्षण समिति के सदस्यों ने सुबह करीब नौ बजकर 51 मिनट पर मंदिर में प्रवेश किया। मंदिर में प्रवेश करने से पहले संवाददाताओं से पर्यवेक्षण समिति के अध्यक्ष एवं उड़ीसा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति विश्वनाथ रथ ने कहा, ‘‘हमने भगवान जगन्नाथ से कोषागार के आंतरिक कक्ष में रखी मूल्यवान सामग्री को स्थानांतरित करने के लिए आशीर्वाद मांगा।'' इससे पहले, 46 वर्ष बाद 14 जुलाई को ‘रत्न भंडार' खोला गया था। उस दिन कोषागार के बाहरी कक्ष से आभूषण और मूल्यवान सामान को ‘स्ट्रांग रूम' में स्थानांतरित किया गया था। न्यायमूर्ति रथ ने पुरी के राजा एवं गजपति महाराजा दिव्य सिंह देव से भी अनुरोध किया कि वह ‘रत्न भंडार' में उपस्थित रहें और वहां से मूल्यवान सामग्री को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया की निगरानी करें। मंदिर परिसर में अस्थायी ‘स्ट्रांग रूम' में मूल्यवान सामग्री को स्थानांतरित करने के कार्य की निगरानी करने वाले देव ने कहा, ‘‘खाताशेजा (भंडार कक्ष) का अस्थायी ‘स्ट्रांग रूम' के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। रत्न भंडार के आंतरिक कक्ष से मूल्यवान सामग्री को कड़ी सुरक्षा के बीच ‘खाताशेजा' में स्थानांतरित किया जाएगा।'' उन्होंने कहा, ‘‘आंतरिक कक्ष से मूल्यवान सामग्री को बाहर निकालने का काम शाम तक पूरा होने की उम्मीद है। अस्थायी ‘स्ट्रांग रूम' को सील कर दिया जाएगा और रत्न भंडार की मरम्मत का काम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किया जाएगा। मरम्मत का काम पूरा होने के बाद ही आभूषणों और अन्य मूल्यवान सामग्री की सूची तैयार की जाएगी।'' देव ने कहा, ‘‘रत्न भंडार के बाहरी कक्ष को साफ कर दिया गया है और वहां से मूल्यवान सामग्री हटा दी गयी है। आंतरिक कक्ष की मरम्मत की जरूरत है, क्योंकि इसे 46 वर्षों के बाद खोला जा रहा है।'' यह पूछे जाने पर कि क्या आंतरिक कक्ष में कोई सुरंग थी जैसा कि कई लोग दावा कर रहे हैं, देव ने कहा कि एएसआई कक्ष की स्थिति का आकलन करने के लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग करेगा और सर्वेक्षक ही इसकी संरचना के बारे में विवरण दे सकते हैं।'' पुरी के जिलाधिकारी सिद्धार्थ शंकर स्वैन ने कहा, ‘‘केवल अधिकृत लोगों को पारंपरिक पोशाक के साथ कोषागार में प्रवेश करने की अनुमति है। यदि मूल्यवान सामग्री को स्थानांतरित करने का काम आज पूरा नहीं होता है तो मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार यह आगे जारी रहेगा। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जा रही है।'' पुरी के पुलिस अधीक्षक पिनाक मिश्रा ने बताया कि ‘एसओपी' के अनुसार मंदिर के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और पर्याप्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सांप पकड़ने वालों, ओडिशा त्वरित कार्रवाई बल के कर्मियों तथा अग्निशमन सेवा के अधिकारियों को तैयार रहने के लिए कहा गया है।'' मंदिर प्रशासन ने बृहस्पतिवार को सुबह आठ बजे से मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘मूल्यवान सामग्री को स्थानांतरित करने के दौरान केवल अधिकृत लोगों और कुछ सेवकों को ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई।''

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