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आर्थिक सर्वेक्षण में जीडीपी वृद्धि दर 6.5 से 7 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान

नई दिल्ली। आर्थिक समीक्षा 2023-24 में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए सकल घरेलू उत्‍पाद की वृद्धि दर 6.5 से 7 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान व्‍यक्‍त किया गया है। केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज बजट सत्र के पहले दिन लोकसभा में आर्थिक समीक्षा प्रस्तुत की। समीक्षा के अनुसार वित्त वर्ष 2023-24 में अनिश्चित वैश्विक आर्थिक स्थिति के बावजूद घरेलू वित्तीय गतिविधियों में वृद्धि ने आर्थिक विकास में मदद की है। समीक्षा में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में सेवा क्षेत्र का उल्लेखनीय योगदान जारी है और वित्त वर्ष 2024 में देश की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का योगदान 55 प्रतिशत रहा। अंतरिम आंकड़ों के अनुसार सेवा क्षेत्र में सात दशमलव छह प्रतिशत की वृद्धि  दर्ज की गई। आर्थिक समीक्षा बताती है कि 2024 के लिए वैश्विक व्यापार का सकारात्मक माहौल बना रहेगा। समीक्षा के अनुसार वैश्विक वित्तीय बाजारों ने नई ऊंचाई हासिल की है और निवेशक वैश्विक आर्थिक विस्तार का जोखिम उठा रहे हैं। समीक्षा में व्यापार और सेवा निर्यात में बढोतरी का अनुमान लगाया गया है।
   भारत सरकार के मुख्‍य आर्थिक सलाहकार डॉ० वी० अनंत नागेश्‍वरन ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि अर्थव्यवस्था में वृद्धि की रफ्तार बनी हुई है। उन्‍होंने बताया कि कृषि क्षेत्र का आने वाले वर्षों में अच्‍छा कामकाज रहेगा। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा सामान्य वर्षा के पूर्वानुमान और दक्षिण पश्चिम मानसून के संतोषजनक प्रसार से कृषि क्षेत्र के प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बहाल करने में मदद मिलेगी।
  कृषि क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों में औसतन चार दशमलव एक-आठ प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गयी है। आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि छोटे किसान बड़े मूल्‍य वाली कृषि गतिविधि की ओर बढ़ेंगे। समीक्षा के अनुसार छोटे किसानों की आय बढ़ने से विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादों की मांग बढेगी और यह इस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। भारत का कृषि क्षेत्र देश की लगभग 42 दशमलव तीन प्रतिशत जनसंख्‍या को आजीविका प्रदान करता है और मौजूदा दरों पर देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 6.2 % है।
  मुख्‍य आर्थिक सलाहकार डॉ० नागेश्‍वरन ने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था को 2030 तक कृषि से इत्तर क्षेत्रों में हर वर्ष लगभग अठहत्तर लाख से अधिक रोजगार पैदा करने होंगे। उन्‍होंने कहा कि हाल के वर्षों में भारत में बुनियादी क्षेत्रों के विस्तार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। डॉ० नागेश्‍वन ने बताया कि 2014 में जहां 11 दशमलव 7 किलोमीटर प्रति दिन सडक का निर्माण होता था वह 2024 में तीन गुणा बढकर 34 किलोमीटर प्रति दिन हो गया है।
  आर्थिक समीक्षा के अनुसार भारत की सेवाओं के निर्यात में चार दशमलव नौ प्रतिशत की वृद्धि हुई और 2024 में यह तीन सौ 41 अरब अमरीकी डॉलर रहा। सेवाओं के निर्यात में सूचना प्रौद्योगिकी सॉफ्टवेयर सेवाओं और अन्‍य व्‍यापार सेवाओं का प्रमुख योगदान रहा।
  आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था जन कल्‍याण, सशक्‍तिकरण, कार्यदक्षता के दृष्टिकोण के साथ आगे बढ रही है और इसमें निजी क्षेत्र तथा समाज के सभी वर्गों की भागीदारी बढी है।
  महंगाई के बारे में आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि रिजर्व बैंक ने वित्‍त वर्ष 2025 में मुद्रास्‍फीति की मुख्‍य दर साढ़े चार प्रतिशत और वित्‍त वर्ष 2026 में चार दशमलव एक प्रतिशत रहने का अनुमान व्‍यक्‍त किया है। अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत के लिए 2024 में मुद्रास्‍फीति चार दशमलव छह प्रतिशत और 2025 में चार दशमलव दो प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।
 आर्थिक समीक्षा 2023 – 2024 के अनुसार जहां वैश्विक स्‍तर पर राजकोषीय घाटा और ऋण का बोझ बढ़ता जा रहा है वहीं भारत में राजकोषीय स्थिरता की प्रक्रिया बनी हुई है। समीक्षा में बताया गया है कि केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2023 के राजकोषीय घाटे को 6.4 प्रतिशत से घटाकर 2025 में सकल घरेलू उत्‍पाद के 5.6 प्रतिशत तक ले आई। समीक्षा में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 तक भारत का राजकोषीय घाटा कम होकर सकल घरेलू उत्‍पाद का साढ़े चार प्रतिशत या इससे कम रहने का अनुमान है। 

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