बजट प्रस्ताव दीर्घकालिक सुधारों के लिए आधार तैयार करते हैं: नीति आयोग उपाध्यक्ष
नयी दिल्ली. नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने बुधवार को कहा कि बजट में घोषित प्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क दरों की समीक्षा से दीर्घकालिक सुधारों के लिए आधार तैयार होगा। बेरी ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 का बजट एक संरचनात्मक बजट है, जो कार्यबल तथा निजी क्षेत्र के बीच संबंध बनाकर श्रम उत्पादकता में सुधार करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘ बजट (2024-25) प्रस्तावों में प्रत्यक्ष कर, सीमा शुल्क दरों की समीक्षा के लिए एक रूपरेखा प्रदान की गई है जिसे छह महीने में किया जाना है... यह दीर्घकालिक सुधारों के लिए जमीन तैयार करेगा।'' सरकार ने मंगलवार को पेश केंद्रीय बजट में आयकर अधिनियम की व्यापक समीक्षा करने की घोषणा की थी, ताकि इसे पढ़ना आसान हो सके। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024-25 के लिए केंद्रीय बजट पेश करते हुए कहा था कि सरकार टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) चूक के लिए एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) लेकर आएगी और ऐसे अपराधों के लिए समझौता प्रक्रिया को सरल और युक्तिसंगत बनाएगी। उन्होंने कहा था, ‘‘ मैं आयकर अधिनियम 1961 की व्यापक समीक्षा की घोषणा करती हूं। इसका मकाद अधिनियम को संक्षिप्त, सुस्पष्ट, पढ़ने और समझने में आसान बनाना है..'' बेरी ने कहा कि इस वर्ष के बजट में राजकोषीय समेकन को बनाए रखा गया है तथा इसमें सुधार किया गया है जो महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बजट प्रस्ताव दीर्घकालिक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं और यह ‘विकसित भारत' की दिशा में पहला कदम है। आर्थिक वृद्धि पर एक सवाल के जवाब में बेरी ने कहा कि भारत के लिए श्रम उत्पादकता तथा कार्यबल में बढ़ोतरी करने से वृद्धि दर बढ़ाना आसान होगा। उन्होंने कहा, ‘‘ भारत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन वह और बेहतर कर सकता है। उसे और बेहतर करना चाहिए....उसे और बेहतर करने की जरूरत है।'' बजट प्रस्तावों से निजी उपभोग तथा निजी निवेश को बढ़ावा मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि निजी खपत मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावित हुई है। बेरी ने कहा, ‘‘इसलिए मुझे लगता है कि इस साल के मानसून पर बहुत कुछ निर्भर करता है।''
उन्होंने साथ ही कहा कि कर स्लैब को समायोजित करने और आयकर पर कटौती बढ़ाने का मकसद उपभोग के लिए थोड़ा अधिक धन उपलब्ध कराना है।







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