पिछले 74 वर्षों में 1783 रिपोर्ट प्रस्तुत कर चुकी है संसद की लोक लेखा समिति
नयी दिल्ली. सरकारी खर्च की जांच करने वाली संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) पिछले 74 वर्षों में 1783 रिपोर्ट प्रस्तुत कर चुकी है। लोकसभा सचिवालय की एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है।
गत सप्ताहांत नयी पीएसी का गठन किया गया जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सदस्य केसी वेणुगोपाल करेंगे। संसदीय परिपाटी के अनुसार, पीएसी की अध्यक्षता मुख्य विपक्षी दल के किसी नेता को सौंपी जाती है। पिछली लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी पीएसी के अध्यक्ष थे। पीएसी में लोकसभा के जिन 15 सदस्यों को जगह दी गई है उनमें द्रमुक के टी आर बालू, भाजपा के रविशंकर प्रसाद, निशिकांत दुबे और जगदंबिका पाल, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव तथा कई अन्य सांसद शामिल हैं। नयी लोक लेखा समिति का कार्यकाल 30 अप्रैल, 2025 तक होगा। लोक लेखा समिति संसद की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण समिति है। इसका गठन हर साल किया जाता है। इसमें 22 सदस्य (लोकसभा अध्यक्ष द्वारा चुने गए 15 सदस्य और राज्यसभा के सभापति द्वारा चयनित किए गए सात सदस्य) शामिल होते हैं। लोकसभा सचिवालय के अनुसार, 26 जनवरी, 1950 को एक संसदीय समिति बनने के बाद से लोक लेखा समिति ने अब तक 1783 रिपोर्ट प्रस्तुत कर चुकी है। सचिवालय की विज्ञप्ति में कहा गया है कि 17वीं लोकसभा के दौरान लोक लेखा समिति ने कुल 87 रिपोर्टों को अंतिम रूप दिया जिनमें 65 मूल रिपोर्ट और 22 की कार्रवाई रिपोर्ट थीं। इनमें से दोनों सदनों में 58 रिपोर्ट पेश की गईं। पीएसी के ये प्रतिवेदन आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम, नमामि गंगे, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, भारतीय ट्रेनों के पटरी से उतरना, भारतमाला परियोजना तथा कई अन्य विषयों से संबंधित थे। लोक लेखा समिति' तीन वित्तीय संसदीय समितियों में से एक है। संसद की दो अन्य वित्तीय समितियां प्राक्कलन समिति और सार्वजनिक उपक्रम संबंधी समिति हैं। पीएसी सरकार के वार्षिक वित्त लेखों और व्यय को पूरा करने के लिये सदन द्वारा दी गई राशि के विनियोग को दर्शाने वाले लेखों की जांच करती है। यह समिति सरकार के विनियोग लेखों पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) के प्रतिवेदनों के अलावा राजस्व प्राप्तियों, सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों द्वारा व्यय और स्वायत्त निकायों के लेखों पर नियंत्रक-महा लेखापरीक्षक के विभिन्न लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों की भी जांच करती है। सरकार द्वारा अत्यधिक खर्च के साथ-साथ गलत आकलन या प्रक्रिया में अन्य दोषों के कारण हुई बचत की भी जांच करती है।

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