शिक्षा क्षेत्र में बड़ी छलांग, स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक बढ़ा नामांकन: वित्त मंत्री सीतारमण
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश की। इस दौरान उन्होंने बताया कि स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों ही क्षेत्रों में बीते वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे बड़ी स्कूली शिक्षा प्रणालियों में से एक का संचालन कर रहा है।
आर्थिक समीक्षा के अनुसार देश में 14.71 लाख विद्यालयों के माध्यम से 24.69 करोड़ विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की जा रही है। इस विशाल शिक्षा व्यवस्था को 1.01 करोड़ से अधिक शिक्षक सहयोग प्रदान कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत 2030 तक प्री-प्राइमरी से माध्यमिक स्तर तक शत प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) हासिल करने के लक्ष्य के अनुरूप सभी स्कूल स्तरों पर स्थिर प्रगति देखने को मिली है। वित्त मंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) की संख्या 2014-15 में 51,534 थी, जो जून 2025 तक बढ़कर 70,018 हो गई है। यह वृद्धि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय इजाफे के कारण संभव हुई है। प्रीमियर उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या में भी 2014-15 से 2024-25 के बीच महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विद्यार्थियों का नामांकन 2021-22 में 4 करोड़ 33 लाख से बढ़कर 2022-23 में 4 करोड़ 46 लाख हो गया है। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि शिक्षा क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियों में साक्षरता दर में वृद्धि, स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों में नामांकन बढ़ना तथा व्यावसायिक शिक्षा के प्रावधानों का विस्तार शामिल है। पोषण शक्ति निर्माण और समग्र शिक्षा अभियान जैसी योजनाओं ने शिक्षा तक पहुंच और समानता को बढ़ावा दिया है। सकल नामांकन अनुपात प्राथमिक स्तर पर 90.9%, उच्च प्राथमिक स्तर पर 90.3%, माध्यमिक स्तर पर 78.7% और उच्च माध्यमिक स्तर पर 58.4% दर्ज किया गया है।
आर्थिक समीक्षा के अनुसार देश में अब 23 आईआईटी, 21 आईआईएम और 20 एम्स संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा जंजीबार और अबूधाबी में आईआईटी के दो अंतरराष्ट्रीय परिसर भी शुरू किए गए हैं। एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट के तहत 2,660 संस्थानों को जोड़ा गया है और 4 करोड़ 60 लाख से अधिक पहचान पत्र जारी किए जा चुके हैं।
वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2035 तक 50% जीईआर के एनईपी लक्ष्य को हासिल करने के लिए 153 विश्वविद्यालयों में प्रवेश और निकास की लचीली व्यवस्था तथा साल में दो बार प्रवेश की सुविधा लागू की गई है। भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ ट्विनिंग कर संयुक्त और ड्यूअल डिग्री कार्यक्रम शुरू कर रहे हैं। इसके साथ ही 15 विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों के भारत में परिसर स्थापित करने की संभावना जताई गई है।
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि रोजगार दक्षता को जल्दी उपलब्ध कराने के लिए माध्यमिक स्कूलों में व्यवस्थित कौशल निर्माण की व्यवस्था की जा रही है। समीक्षा के अनुसार विशाल मानव संसाधन को उच्च गुणवत्ता वाली मानव पूंजी में बदलने के लिए स्कूली शिक्षा की अनुमानित अवधि बढ़ाने की आवश्यकता है। एनईपी के 5+3+3+4 ढांचे के तहत 3 से 18 वर्ष की आयु के लिए 15 वर्ष की स्कूली संरचना पर जोर दिया गया है।
सरकार की विभिन्न योजनाओं से जीईआर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इनमें 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13,076 पीएमश्री स्कूलों की स्थापना, 2 लाख 99 हजार 544 स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए ईसीसीई प्रणाली को मजबूत करना शामिल है। जादुई पिटारा, ई-जादुई पिटारा, किताब एक पढ़े अनेक और भारतीय भाषा पुस्तक योजना जैसी पहलों से बच्चों को स्थानीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
पीएलएफएस 2023-24 के अनुसार 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के केवल 0.97% युवाओं को ही संस्थागत प्रशिक्षण मिला है, जबकि लगभग 92% युवाओं को कोई प्रशिक्षण प्राप्त नहीं हुआ है। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारत के जनसांख्यिकी लाभांश का पूरा लाभ उठाने के लिए इस अंतर को पाटना बेहद जरूरी है। स्कूलों में कौशल शिक्षा युवाओं को बाजार-उन्मुख कौशल से लैस करेगी और ड्रॉपआउट दर को कम करने में मददगार होगी।
वित्त मंत्री ने बताया कि यूजीसी और एआईसीटीई ने उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ श्रेणी की शुरुआत की है। इससे उद्योग और व्यावहारिक अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों को शिक्षण से जोड़ने और संकाय संसाधनों को मजबूत करने में मदद मिलेगी।








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