मप्र रास चुनाव : निर्वाचन अधिकारी ने भाजपा के तीनों उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया
भोपाल. मध्यप्रदेश में राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीनों उम्मीदवारों तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को निर्वाचन अधिकारी ने बृहस्पतिवार को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया। राज्यसभा के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा ने चुनाव परिणाम की घोषणा करते हुए कहा कि तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्वाचित हो गए हैं। भाजपा के तीनों उम्मीदवार यहां मध्यप्रदेश विधानसभा पहुंचे और निर्वाचन अधिकारी से जीत का प्रमाण पत्र हासिल किया। बाद में तीनों नेताओं ने मीडिया के समक्ष निर्वाचन प्रमाण पत्र प्रदर्शित किए। तीन विजयी उम्मीदवारों के साथ भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी और राज्य के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल भी थे। जीत के बाद भाजपा के तीनों नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात की। खंडेलवाल ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''मध्यप्रदेश से राज्यसभा हेतु निर्विरोध निर्वाचित हुए तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट से भोपाल स्थित निवास पर आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर उन्हें विजयश्री की आत्मीय बधाई दी।'' खंडेलवाल ने कहा, ''आप तीनों का संगठन के प्रति समर्पण, अथक परिश्रम तथा जनसेवा का व्यापक अनुभव निश्चित रूप से संसद के उच्च सदन में मध्यप्रदेश एवं राष्ट्रहित के विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगा। पूर्ण विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आप सभी विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तथा जनआकांक्षाओं को नयी ऊर्जा प्रदान करेंगे।'' उन्होंने तीनों नेताओं को सफल, प्रभावी एवं जनकल्याणकारी संसदीय कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं।
कांग्रेस ने राज्यसभा के इस चुनाव में मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन शपथपत्र में जानकारी छिपाने के आरोप में उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया था। कांग्रेस ने इस फैसले को अवैध बताते हुए आरोप लगाया था कि भाजपा ने पर्याप्त संख्या न होने के बावजूद तीसरी राज्यसभा सीट हासिल करने के लिए साजिश रची है। निर्वाचन अधिकारी शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया था कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद पाया गया कि नटराजन ने नामांकन के साथ जमा किए गए फॉर्म 26 में अदालत में की गई शिकायत का जिक्र नहीं करते हुए अधूरा हलफनामा दाखिल किया था। मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, भाजपा के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नटराजन ने अपने हलफनामे में तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज मामले का उल्लेख नहीं किया है। नटराजन ने निर्वाचन अधिकारी के इस फैसले को लेकर उच्चतम न्यायालय का रुख किया है, जहां शीर्ष अदालत ने कहा कि वह याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की एक अंशकालिक कार्यदिवस पीठ ने हालांकि यह भी सवाल उठाया कि चुनावी प्रक्रिया जारी रहने के बीच यह याचिका कैसे सुनवाई योग्य है। नटराजन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने पीठ से आग्रह किया कि उनके गैर सूचीबद्ध उल्लेख के अनुरोध पर इस आधार पर विचार किया जाए कि निर्वाचन अधिकारी ने एक कथित आपराधिक मामले के खुलासे में चूक का हवाला देकर उनके नामांकन पत्र को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत गलत तरीके से खारिज कर दिया है। सिंघवी ने दलील दी कि किसी उम्मीदवार को केवल उन्हीं आपराधिक मामलों का खुलासा करना होता है जिनमें कम से कम दो वर्ष की न्यूनतम सजा का प्रावधान हो, जबकि वर्तमान मामले में केवल समन जारी किए गए हैं। मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना था। ये तीनों सीटें भाजपा के जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त होने से खाली हुई हैं। इन तीनों का कार्यकाल 21 जून 2026 को खत्म हो रहा है। मध्यप्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 164 विधायक हैं, जिससे वह दो सीटें आराम से जीत रही थी जबकि संख्या बल के हिसाब से तीसरी सीट पर कांग्रेस की दावेदारी मजबूत थी। राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत के लिए 58 वोटों की जरूरत थी। ऐसे में भाजपा के तीसरे उम्मीदवार की जीत अतिरिक्त वोटों, क्रॉस-वोटिंग या विपक्षी सदस्यों के मतदान से दूर रहने पर निर्भर थी। हालांकि नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मतदान की नौबत ही नहीं आई।









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