जुआ खिलाने वाली वेबसाइटों को लेकर अदालत ने सरकार से जवाब तलब किया
प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ऑनलाइन जुआ खिलाने वाली वेबसाइटों पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध करने वाली एक जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए इस संबंध में केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने कथित तौर पर चीनी नागरिकों के स्वामित्व वाली इन वेबसाइटों के अधिकारियों और ऑनलाइन जुआ के जरिए भोले-भाले लोगों से ठगी करने वाले लोगों को भी नोटिस जारी किया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मुनीश्वर नाथ भंडारी और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता शिमला श्री त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता के मुताबिक, "भारत में बड़ी संख्या में ऐसी वेबसाइटें चल रही हैं जो रंग का अनुमान लगाने जैसे खेलों की पेशकश करती हैं जिसमें खिलाड़ी को कुछ पैसे दांव पर लगाने होते हैं और वेबसाइट की घोषणा से पूर्व परिणाम का अनुमान लगाना होता है।" याचिका में बताया गया है कि इस तरह की वेबसाइटें पहले तो खिलाडिय़ों को आसानी से जीतने देती हैं, लेकिन जब बड़ी संख्या में खिलाड़ी बड़े दांव लगाने लगते हैं तब वेबसाइट के मालिक परिणामों से छेड़छाड़ करते हैं जिससे अंतत: ज्यादातर खिलाड़ी खेल में हार जाते हैं, जबकि वेबसाइट के मालिक अवैध रूप इसका फायदा लाभ उठा लेते हैं।
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि ये वेबसाइटें कर के नाम पर बड़ी राशि विजेताओं से खाते से काट लेती हैं और इसका भुगतान सरकार को करने का दावा करती हैं। याचिकाकर्ता के मुताबिक, जुआ खिलाने वाली इन वेबसाइटों के मालिक चीनी नागरिक हैं और ये वेबसाइटें आमतौर पर चीन में लगे सर्वर से नियंत्रित होती हैं और ये धोखाधड़ी की एक नियोजित योजना है। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 15 सितंबर तय की है।


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