यूपीएल का नेटवर्क किसानों को पराली जलाने से रोकने में मदद करेगा
मुंबई।' प्रमुख कृषि-रसायन कंपनी, यूपीएल के कृषि क्षेत्र के नेटवर्क- नर्चर डॉट फार्म ने बुधवार को कहा कि उसने पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की प्रथा को समाप्त करने के लिए 25,000 से अधिक किसानों को अपने साथ जोड़ा है। नर्चर डॉट फार्म, इस उद्देश्य के लिए आईएआरआई द्वारा विकसित एक बायोएंजाइम, पूसा डीकंपोजर की मुफ्त छिड़काव सेवाएं प्रदान करेगी जो 20-25 दिनों के भीतर पराली को खाद में बदल देती है। नर्चर डॉट फार्म ने एक बयान में कहा कि कंपनी ने इस कार्यक्रम के लिए 5,00,000 एकड़ से अधिक रकबे को शामिल करते हुए 25,000 से अधिक किसानों को अपने साथ किया है, जो इस नई कृषि पद्धति का मुफ्त में लाभ उठाएंगे। पराली जलाने से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है जबकि पोषक तत्व और जीवाणु मर जाते हैं।
यूपीएल के वैश्विक सीईओ जय श्रॉफ ने कहा, ‘‘हम पहल के बारे में उत्साहित हैं, और हमें विश्वास है कि यह पहल किसानों और समाज दोनों को लाभान्वित करने में एक लंबा सफर तय करेगी। स्थिरता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अद्वितीय है।'' उन्होंने कहा, ‘‘ओपन-एजी (ओपन एग्रीकल्चर इनिशिएटिव) के माध्यम से, यूपीएल एक ऐसा नेटवर्क बना रहा है जो पूरे उद्योग के सोचने और काम करने के तरीके को बदल देगा और खेती को और अधिक टिकाऊ बनाने में मदद करेगा।'' नर्चर.फार्म की योजना अगले तीन वर्षों में पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की प्रथा को समाप्त करने के लिए अपने अभियान को बढ़ाने की है। उन्होंने कहा, ‘‘आईआईएम रोहतक के साथ साझेदारी करके, हमने एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है जहां किसान हमारे ऐप के माध्यम से सेवा के लिए अपना पंजीकरण करा सकते हैं और अपने पराली को विघटित करने के लिए हमारी बड़ी छिड़काव मशीनों का लाभ उठा सकते हैं।'


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