- Home
- छत्तीसगढ़
- -प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना कीरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज रायगढ़ प्रवास के दौरान राजापारा स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री श्री साय उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति, रायगढ़ द्वारा आयोजित ‘उत्कल दिवस एवं वार्षिकोत्सव स्नेह सम्मेलन’ में शामिल होने के क्रम में मंदिर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने उत्कल समाज द्वारा निर्मित प्रभु जगन्नाथ मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर झारसुगुड़ा विधायक श्री टंकाधर त्रिपाठी, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, महापौर श्री जीवर्धन चौहान सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं उत्कल समाज के प्रमुखजन उपस्थित थे।
- रायपुर। पिछले साल 29 दिसंबर को शिलांग के साई के स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर में बेथलीन ग्रेस माकरी के कोच ने अचानक इस युवा एथलीट में एक रेस-वॉक एथलीट बनने की काबिलियत देखी। मजे की बात यह है कि बेथलीन खुद इस इवेंट के बारे में लगभग कुछ भी नहीं जानती थी और इसकी तकनीकी बारीकियों की तो बात ही छोड़ दें।पिछले साल तक, मेघालय की यह युवा एथलीट एक मिडिल और लॉन्ग-डिस्टेंस रनर के तौर पर मुकाबला कर रही थीं। लेकिन 2026 की शुरुआत में, उसे अपना खेल बदलने के लिए कहा गया जिसने उसकी शारीरिक और मानसिक, दोनों तरह की ताकत की परीक्षा ली।खासी ट्राइब से आने वाली बेथलीन के लिए यह बदलाव बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। उनके लिए शुरुआती कुछ सप्ताह बहुत कठिन थे, जब वह रेस-वॉक की अनजान तकनीक के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रही थीं और शरीर में तेज दर्द से जूझ रही थीं। इसके चलते कई रातें बिना नींद के बीतीं और मन में आत्म-संदेह भी पैदा होने लगा।हालांकि, उनके कोच और परिवार के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी और इकलौती बेटी होने के नाते, बेथलीन ने इस चुनौती को स्वीकार किया और खेल की तकनीकी बारीकियों को सीखने में खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया। इसके बाद उन्होंने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के पहले एडिशन में भाग लेने के लिए जगदलपुर का रुख किया।उन्होंने साई मीडिया से कहा, '' पहले दो हफ्ते वाकई बहुत मुश्किल थे, खासकर मेरे शरीर के लिए। रेस-वॉक की तकनीकी बारीकियां मध्यम या लंबी दूरी की दौड़ से बिल्कुल अलग होती हैं, इसलिए मुझे इसे समझने में समय लगा। इसके बाद कई रातों तक नींद नहीं आई, घबराहट के पल आए और आखिरकार मुझे खुद पर शक होने लगा कि क्या मेरा फैसला सही था।'' लेकिन बुधवार को उन संघर्षों का भरपूर फल मिला। बेथलीन ने महिलाओं की रेस-वॉक स्पर्धा में 1:05:18 का समय निकालकर कांस्य पदक जीता। वह झारखंड की नेहा ज़ालक्सो (1:04:02) और ओडिशा की एलीश एक्का (1:04:59) के बाद तीसरे स्थान पर रहीं।पदक जीतने के कुछ ही पलों बाद इस एथलीट ने इसका श्रेय अपने कोच और परिवार को दिया। उन्होंने कहा, ''मेरे कोच और मेरे परिवार ने मेरा पूरा साथ दिया, और मुझे इसे जारी रखने के लिए लगातार प्रेरित करते रहे। मैंने भी इसे आज़माने का सोचा, और आज मैं यहां हूं। मेरे पास अभी भी सुधार की गुंजाइश है, लेकिन यह ठीक वैसी ही शुरुआत थी जिसकी मुझे ज़रूरत थी।'' उन्होंने आगे कहा, '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में मिला कांस्य पदक मेरी कड़ी मेहनत, मेरे विश्वास और मेरे कोचों व परिवार के समर्थन का प्रमाण है और यह इस खेल में आगे बढ़ने के लिए मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम करता है।“शिलांग कॉलेज में बीए की दूसरे वर्ष की छात्रा बेथलीन को इस बात पर बेहद गर्व है कि वह मेघालय की एकमात्र ऐसी 'रेस वॉकर' हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीता है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, '' मेघालय से कोई रेस वॉकर नहीं है और मेरा मानना है कि मेरा 'खेलो इंडिया' पदक युवाओं को इस खेल को पेशेवर तौर पर अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। मुझे भी अब यह खेल पसंद आने लगा है।''
- -संघर्ष और अलगाव वाले क्षेत्र से उभर रहे युवा फुटबॉलर; आश्रम में विभिन्न आयु वर्गों के 2,700 से अधिक बच्चे रहते हैं-आरके मिशन अब ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेता हैरायपुर ।छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के दूरस्थ अबूझमाड़ क्षेत्र में आदिवासी समुदायों के उत्थान के उद्देश्य से 1986 में स्थापित रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम आज चुपचाप फुटबॉल प्रतिभाओं की एक अनोखी नर्सरी बनकर उभरा है। यह आश्रम छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में स्थित है और राज्य की राजधानी रायपुर से लगभग 250 किलोमीटर दूर है। इसका प्रभाव मौजूदा खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) में साफ दिखाई दे रहा है, जहां पुरुष और महिला फुटबॉल टीमों में एक दर्जन से अधिक खिलाड़ी आश्रम में प्रशिक्षण पाकर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। जहां महिला टीम फाइनल में पहुंच चुकी है, वहीं पुरुष टीम ने भी सेमीफाइनल में जगह बना ली है।छत्तीसगढ़ फुटबॉल संघ (CFA) के सहायक महासचिव और एआईएफएफ कार्यकारी समिति के सदस्य मोहन लाल ने कहा, “केआईटीजी 2026 में प्रतिस्पर्धा कर रही पुरुष और महिला फुटबॉल टीमों में प्रत्येक में लगभग 12-13 खिलाड़ी इसी अकादमी से हैं।”कभी अलगाव और संघर्ष के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर क्षेत्र में स्थित आरके मिशन दशकों से बेहद दूरदराज के आदिवासी गांवों के बच्चों तक शिक्षा और अवसर पहुंचाने का काम कर रहा है। इनमें से कई गांव घने जंगलों के भीतर हैं, जहां औपचारिक शिक्षा तक पहुंच बहुत सीमित या लगभग नहीं के बराबर है।आश्रम इन बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करता है, साथ ही संगीत और खेलों में उनकी रुचि को भी विकसित करता है। पढ़ाई के साथ-साथ खेल आश्रम के विकास कार्यक्रम का एक अहम स्तंभ बन चुका है। बच्चों को कम उम्र में ही विभिन्न खेलों से परिचित कराया जाता है और शिक्षा के साथ-साथ उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे वे अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए खेलों में करियर बना सकें। हर साल संस्थान के लगभग 50 से 60 छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका मिलता है, जो इस आवासीय परिसर से लगातार उभर रही प्रतिभाओं को दर्शाता है।मोहन लाल के अनुसार, आश्रम ने अपने छात्रों को समर्थन देने के लिए मजबूत खेल ढांचा विकसित किया है। परिसर में तीन फुटबॉल मैदान हैं, जिनमें एक एस्ट्रो-टर्फ सुविधा भी शामिल है, साथ ही बैडमिंटन, टेबल टेनिस, खो-खो और मल्लखंभ के लिए इनडोर एरेना भी मौजूद हैं।मोहन लाल का मानना है कि नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले कई बच्चों के जीवन में खेल ने परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। आज यह आश्रम विभिन्न आयु वर्गों के 2,700 से अधिक बच्चों का घर है, जहां उन्हें न केवल शिक्षा मिलती है, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, खिलाड़ी या शिक्षाविद बनने के सपने देखने का अवसर भी मिलता है।मोहनलाल ने कहा, “कई मायनों में यह देश के सर्वश्रेष्ठ आवासीय स्कूलों में से एक है, जो शिक्षा और खेल के माध्यम से जीवन संवारने में आश्रम की अनूठी भूमिका को दर्शाता है।”उन्होंने आगे कहा, “यहां लगभग 2700 छात्र हैं, जो सभी आयु वर्गों और कक्षा 1 से 12 तक के हैं। इस स्कूल से निकले कई छात्र देश की शीर्ष कंपनियों में कार्यरत हैं और कई प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं।” लाल ने बताया कि अकादमी की खेल सुविधाओं को तब और पहचान मिली, जब रामकृष्ण मिशन फुटबॉल अकादमी (RKM FA) राज्य का पहला फुटबॉल क्लब बना जिसने ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन द्वारा आयोजित अंडर-17 यूथ कप और आई-लीग 2 में भाग लिया।
- -ऑनलाइन आवेदन 17 अप्रैल तक किया जा सकेगारायपुर। संचालनालय तकनीकी शिक्षा, छत्तीसगढ़ के सम्बन्धित पालीटेक्निक कालेजों में प्रवेश के लिए प्री-पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा (PPT) 2026 हेतु ऑनलाइन आवेदन एवं परीक्षा कार्यक्रम घोषित किया गया है। यह परीक्षा राज्य के विभिन्न पॉलीटेक्निक संस्थानों में प्रवेश हेतु आयोजित की जाएगी, जिसमें इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित तिथियों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।संचालनालय तकनीकी शिक्षा, छत्तीसगढ़ से प्राप्त जानकारी के अनुसार पालीटेक्निक कालेजों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 25 मार्च 2026 से प्रारंभ होकर 17 अप्रैल 2026 को सायं 5 बजे तक चलेगी।आवेदन पत्र में त्रुटि सुधार हेतु 18 अप्रैल से 20 अप्रैल 2026 तक का समय निर्धारित किया गया है।अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र 27 अप्रैल 2026 को व्यापम की वेबसाइट पर जारी किए जाने की संभावना है। परीक्षा का आयोजन 07 मई 2026 (गुरुवार) को पूर्वान्ह 10:00 बजे से दोपहर 1:15 बजे तक किया जाएगा।यह परीक्षा राज्य के 33 जिला मुख्यालयों में आयोजित की जाएगी, जिससे अभ्यर्थियों को अपने नजदीकी परीक्षा केन्द्र का चयन करने की सुविधा मिलेगी। आवेदन करने के लिए अभ्यर्थियों को आधिकारिक वेबसाइटvyapamcg.cgstate.gov.inपर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा।आवेदन करते समय परीक्षा शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना अनिवार्य है। छत्तीसगढ़ शासन के नियमानुसार राज्य के स्थानीय निवासी अभ्यर्थी, जो परीक्षा में सम्मिलित होंगे, उनका परीक्षा शुल्क व्यापम द्वारा वापस कर दिया जाएगा। यह राशि उसी बैंक खाते में वापस की जाएगी, जिससे अभ्यर्थी ने शुल्क का भुगतान किया है।व्यापम के अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा से संबंधित विस्तृत जानकारी, पात्रता, पाठ्यक्रम एवं दिशा-निर्देश के लिए व्यापम की आधिकारिक वेबसाइट का नियमित रूप से अवलोकन करते रहें।
- -मैनपाट में ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ का सांस्कृतिक संगम, मेहमानों ने सराहा छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता और आतिथ्यरायपुर। ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा की गई व्यवस्थाएं राष्ट्रीय स्तर पर सराहना बटोर रही हैं। विभिन्न राज्यों से आए खेल अधिकारियों एवं कोचों ने सरगुजा जिले के मैनपाट में स्थित प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर यहां की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और आत्मीय आतिथ्य का अनुभव किया।अतिथियों ने मैनपाट के प्रसिद्ध तिब्बती मोनेस्ट्री, रहस्यमयी उल्टा पानी तथा अद्वितीय प्राकृतिक स्थल जलजली का भ्रमण किया। इन स्थलों की विशिष्टता और प्राकृतिक आकर्षण ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। अधिकारियों और कोचों ने कहा कि मैनपाट न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक अनूठा पर्यटन गंतव्य है, जहां प्रकृति और शांति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।भ्रमण के दौरान सभी मेहमानों ने छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के सैला रिसॉर्ट में दोपहर भोजन का आनंद लिया। यहां पर परोसे गए पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों जैसे चीला, फरा, ठेठरी-खुरमी और देशी स्वाद से भरपूर भोजन की मेहमानों ने खुले दिल से सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि “छत्तीसगढ़ का भोजन जितना सरल है, उतना ही स्वादिष्ट और पौष्टिक भी है।”अतिथियों ने विशेष रूप से मैनपाट के स्थानीय निवासियों के सहज, सरल और आत्मीय व्यवहार की भी प्रशंसा की। उनका कहना था कि यहां का आतिथ्य उन्हें अपने घर जैसा अपनापन महसूस कराता है, जो छत्तीसगढ़ की पहचान को और मजबूत बनाता है।छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के सौजन्य से ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ में शामिल खिलाड़ियों, अधिकारियों और कोचों को राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से उन्हें छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और खानपान से परिचित कराया जा रहा है, जिससे राज्य की सकारात्मक छवि राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो रही है। खेल और पर्यटन के इस समन्वित मॉडल से छत्तीसगढ़ ने एक नई दिशा दिखाई है, जहां खेल आयोजन केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित न रहकर सांस्कृतिक आदान-प्रदान का माध्यम भी बन रहे हैं। इससे न केवल राज्य के पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि देशभर में छत्तीसगढ़ की एक सकारात्मक और समृद्ध पहचान भी बन रही है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास राज्य को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक मजबूत स्थान दिलाने में सफल हो रहा है।
- रायपुर । विश्वविद्यालय द्वारा सत्र 2026–27 हेतु द्विवर्षीय बी.एड. एवं डी.एल.एड. (दूरवर्ती) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए प्री. बी.एड. एवं प्री. डी.एल.एड. प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस हेतु इच्छुक अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 25 मार्च 2026 से प्रारंभ हो चुकी है और 12 जून 2026 (रात्रि 12 बजे तक) जारी रहेगी।प्री बी.एड. एवं प्री. डी.एल.एड. प्रवेश के अभ्यर्थी 13 जून से 15 जून 2026 के बीच 100 रुपए शुल्क के साथ आवेदन में आवश्यक संशोधन कर सकेंगे। प्रवेश पत्र 23 जून 2026 से डाउनलोड किए जा सकेंगे तथा प्रवेश परीक्षा 28 जून 2026 (संभावित) को आयोजित की जाएगी।परीक्षा के पश्चात 29 जून 2026 को मॉडल उत्तर जारी किए जाएंगे, जिन पर अभ्यर्थी 29 जून से 03 जुलाई 2026 तक आपत्ति दर्ज कर सकेंगे। परीक्षा परिणाम (अनंतिम सूची) 10 जुलाई 2026 (संभावित) को घोषित किया जाएगा, जिस पर 10 से 12 जुलाई 2026 तक आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। सभी प्राप्त आपत्तियों के निराकरण के बाद अंतिम प्रावीण्यता सूची 21 जुलाई 2026 (संभावित) को प्रकाशित की जाएगी।अभ्यर्थियों को निर्देशित किया जाता है कि वे आवेदन करने से पूर्व संबंधित नियमों एवं दिशा-निर्देशों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करें तथा ऑनलाइन आवेदन पत्र में सभी जानकारी सही एवं स्पष्ट रूप से भरें। यह आवेदन पत्र काउंसलिंग पंजीयन हेतु भी मान्य होगा, अतः अलग से काउंसलिंग फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होगी। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया (ऑनलाइन/ऑफलाइन) की जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।दावा-आपत्ति केवल निर्धारित तिथि एवं समय के भीतर ईमेल [email protected] के माध्यम से ही स्वीकार की जाएगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे नवीनतम जानकारी एवं संभावित तिथियों में किसी भी परिवर्तन के लिए नियमित रूप से विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइटwww.pssou.ac.in एव www.pssou.net/portal का अवलोकन करते रहें।
- -200 पदों पर होगी भर्तीधमतरी । जिले के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए अब 15 अप्रैल को लाईवलीहुड कॉलेज धमतरी में रोजगार मेला का आयोजन किया जाएगा। सहायक परियोजना अधिकारी, जिला परियोजना लाईवलीहुड कॉलेज धमतरी ने बताया कि पूर्व में यह रोजगार मेला 10 अप्रैल को आयोजित होना था, जिसमें संशोधन किया गया है। अब यह रोजगार मेला 15 अप्रैल को आयोजित होगा। रोजगार मेला में शामिल होने के इच्छुक युवा निर्धारित पॉम्पलेट में दिए गए लिंक पर ऑनलाईन पंजीयन करा सकते हैं।रोजगार मेला में निजी संस्था के नियोक्ताओं द्वारा क्लाईंट डिलाईट एक्जीक्यूटिव और डाटा एंट्री ऑपरेटर के 50-50 तथा सपोर्ट एक्जीक्यूटिव के 100 पदों, इस तरह कुल 200 पदों पर भर्ती की जाएगी। कलेक्टर सह अध्यक्ष जिला परियोजना लाईवलीहुड कॉलेज श्री अबिनाश मिश्रा ने जिले के विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि वे अपनी संस्थान से शिक्षा प्राप्त कर चुके या अध्ययनरत युवाओं का समुचित परामर्श कर इच्छुक युवओं को प्रस्तावित रोजगार मेला में सम्मिलित करना सुनिश्चित करें। साथ ही इच्छुक युवाओं की सूची 06 अप्रैल तक लाईवलीहुड कॉलेज धमतरी में उपलब्ध कराना कराएं।
- -गरियाबंद जिले में 1 लाख 65 हजार हितग्राहियों का होगा सत्यापन-जिले के सभी जनपद पंचायतों में होगा प्रशिक्षणगरियाबंद ।महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित महतारी वंदन योजना के अंतर्गत हितग्राहियों की पहचान सत्यापन के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया जिले में 03 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होगी। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री अशोक पाण्डेय ने बताया कि यह कार्य ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राम पंचायत भवनों में तथा शहरी क्षेत्रों के वार्ड कार्यालयों में किया जाएगा। ई-केवाईसी अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसके पूरा होने पर ही लाभार्थियों को आगामी किश्तों का भुगतान नियमित रूप से मिल सकेगा।उन्होंने बताया कि ई-केवाईसी के लिए महतारी वंदन योजना में दर्ज नाम और आधार कार्ड में लिखा नाम पूरी तरह मेल होना चाहिए। कई बार वर्तनी की छोटी-छोटी त्रुटियों के कारण सत्यापन प्रक्रिया बाधित हो जाती है। इसलिए सभी हितग्राहियों को पहले अपने निकटतम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से संपर्क कर योजना में दर्ज नाम का आधार कार्ड से मिलान करने को कहा है। यदि नाम में किसी प्रकार की गलती मिलती है, तो लाभार्थियों को शीघ्र ही महिला एवं बाल विकास विभाग में नाम संशोधन के लिए आवेदन जमा करना होगा, ताकि समय रहते सुधार किया जा सके और ई-केवाईसी में कोई समस्या न आए।ई-केवाईसी 03 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक चलेगा। हितग्राही निर्धारित समय के भीतर सत्यापन अवश्य कराएं, ताकि योजना का लाभ नियमित रूप से प्राप्त हो सके। जिले में लगभग 1 लाख 65 हजार हितग्राहियों का ई-केवाईसी किया जाएगा। जिनमें वीएलई, सीएससी ऑपरेटरों और महिला एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षकों को ई-केवाईसी संबंधी सम्पूर्ण प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण उपरांत ऑपरेटर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ई-केवाईसी कार्य को तेज गति से पूरा कर सकेंगे।गरियाबंद ब्लॉक में प्रशिक्षण 6 अप्रैल को जनपद पंचायत के सभाकक्ष में आयोजित होगा, जिसमें लगभग 62 प्रतिभागी उपस्थित रहेंगे। इसी प्रकार 7 अप्रैल को जनपद पंचायत छुरा में 72 प्रतिभागियों का प्रशिक्षण होगा। जनपद पंचायत फिंगेश्वर में 8 अप्रैल को जिसमें 71 प्रतिभागी प्रशिक्षण लेंगे। मैनपुर में यह प्रशिक्षण 9 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा, जिसमें लगभग 72 प्रतिभागी शामिल होंगे। इसी तरह देवभोग जनपद में 10 अप्रैल को प्रशिक्षण शिविर रखा गया है, जिसमें 54 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- -28 वर्षीय पहलवान परिवार का गुजारा चलाने के लिए घर-घर दूध पहुंचाते हुए भी कुश्ती का अभ्यास करते रहे-मिट्टी के अखाड़े में अभ्यास के लिए 20 किमी और मैट ट्रेनिंग के लिए जम्मू तक 40 किमी का सफर तय करते हैंअम्बिकापुर । जब जम्मू-कश्मीर के हमाम हुसैन कुश्ती का अभ्यास नहीं कर रहे होते, तो वे अपने बड़े भाई के साथ घर-घर जाकर दूध पहुंचाने का काम करते हैं। जम्मू के जोरावर गांव के रहने वाले 28 वर्षीय हमाम के लिए जिंदगी और खेल हमेशा साथ-साथ चले हैं। पांच साल पहले पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके और उनके बड़े भाई के कंधों पर आ गई। दोनों ने मिलकर दूध बेचकर घर चलाया और इसी के साथ हमाम ने अपने कुश्ती के सपने को जिंदा रखा।यह संघर्ष आखिरकार खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में रंग लाया, जहां हमाम ने पुरुषों के 79 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में हिमाचल प्रदेश के मोहित कुमार को हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह उनके 14 साल के कुश्ती करियर का पहला राष्ट्रीय स्तर का स्वर्ण पदक है।हमाम ने साई मीडिया से कहा, “मेरे बड़े भाई भी पहलवान थे और राज्य स्तर पर खेल चुके हैं। पिता के निधन के बाद सारी जिम्मेदारी हम पर आ गई। मेरे भाई को कुश्ती छोड़नी पड़ी और उन्होंने दूध बेचना शुरू कर दिया। मैं भी उनके साथ दूध देने जाता था क्योंकि परिवार चलाना जरूरी था।लेकिन मेरे भाई ने मुझे हमेशा कुश्ती जारी रखने के लिए प्रेरित किया और मुझे दंगलों में लेकर जाते थे।”हमाम ने बताया कि उनके पिता की छोड़ी हुई भैंसें ही परिवार की आजीविका का साधन बनीं। एक बच्चे के पिता हमाम ने कहा, “मेरे भाई ने दूध बेचकर घर चलाया और मैं उनकी मदद करता था। लेकिन जब मैंने मिट्टी के अखाड़े में कदम रखा, तो इस खेल से मुझे लगाव हो गया।”सीमित संसाधनों के बावजूद हमाम ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। वे अपने गांव से करीब 20 किलोमीटर दूर मिट्टी के अखाड़े में अभ्यास करते हैं और मैट पर ट्रेनिंग के लिए लगभग 40 किलोमीटर दूर जम्मू तक का सफर तय करते हैं। वह भी अपने काम की जिम्मेदारियों के साथ।उन्होंने कहा, “साई सेंटर जम्मू में है और हम निचले इलाके में रहते हैं, इसलिए वहां नियमित रूप से जाना मुश्किल होता है। हम आमतौर पर प्रतियोगिताओं के दौरान ही वहां जाते हैं, वरना गांव के अखाड़ों में ही अभ्यास करते हैं।”वह आगे कहते हैं, “मेरे पास कोई व्यक्तिगत कोच नहीं है। अखाड़े में सीनियर पहलवान हमें मार्गदर्शन देते हैं। जब हम मैट पर अभ्यास करते हैं, तब वहां कोच होते हैं। गांवों में हमें शहरों जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं। अगर बेहतर सुविधाएं मिलें, तो हमारे क्षेत्र के पहलवान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पदक जीत सकते हैं।”हमाम के लिए यह स्वर्ण पदक सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने अंत में कहा, “यहां आकर बहुत अच्छा लगा। यहां की सुविधाएं बहुत अच्छी थीं। हम एक पिछड़े इलाके से आते हैं, जहां कुश्ती के लिए ज्यादा समर्थन नहीं है, इसलिए हमें दूर-दूर तक जाना पड़ता है। यह पहली बार है जब हमारे लिए इस तरह की प्रतियोगिता आयोजित की गई है। अगर ऐसे और आयोजन होते रहें, तो हम और पदक जीत सकते हैं।”
- -9 नवीन ‘108 संजीवनी एक्सप्रेस’ एम्बुलेंस को दिखाई हरी झंडीरायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आज सूरजपुर ज़िले में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए 9 अत्याधुनिक ‘108 संजीवनी एक्सप्रेस’ एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।जिला चिकित्सालय सूरजपुर से शुरू की गई यह सेवा अब दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक त्वरित आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएगी।इस अवसर पर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण एवं शीघ्र स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सूरजपुर की बेटी होने के नाते यह मेरे लिए गौरव का क्षण है कि मैं अपने ज़िलेवासियों को यह जीवनरक्षक सुविधा समर्पित कर रही हूँ।9 नवीन ‘108 संजीवनी एक्सप्रेस’ एम्बुलेंस को दिखाई हरी झंडीउन्होंने कहा कि ये एम्बुलेंस केवल वाहन नहीं, बल्कि जीवन बचाने वाली महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सरकार का उद्देश्य है कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली माताएँ, बहनें और बच्चों को आपातकालीन स्थिति में समय पर उपचार मिल सके और ‘गोल्डन ऑवर’ में चिकित्सा सहायता सुनिश्चित हो।मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने यह भी कहा कि एम्बुलेंस संचालन एजेंसी के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर सेवाओं की गुणवत्ता एवं प्रतिक्रिया समय (Response Time) में निरंतर सुधार किया जाएगा। उन्होंने स्वयं इन सेवाओं की नियमित निगरानी करने की बात कही, ताकि पारदर्शिता और प्रभावशीलता बनी रहे।ज़िले में आवंटित 9 एम्बुलेंसों में से 2 को जिला चिकित्सालय सूरजपुर में स्थायी रूप से तैनात किया गया है, जबकि शेष एम्बुलेंसों को विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है, जिससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित हो सके।
- कोरिया। छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा राजस्व संबंधी समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए “राजस्व पखवाड़ा 2026” आयोजित की जा रही है। इस अभियान के तहत कोरिया जिले के ग्रामों में क्लस्टरवाइस शिविर लगाकर लंबित प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण किया जाएगा।आज पोड़ी-बचरा तहसील के ग्राम चिरमी में आयोजित राजस्व पखवाड़ा में अपर कलेक्टर श्री सुरेन्द्र वैद्य ने ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं सुना ही नहीं बल्कि त्वरित निराकरण करने के लिए सम्बंधित तहसीलदार को निर्देश भी दिए।राजस्व पखवाड़ा का आयोजन 1 अप्रैल से 15 अप्रैल, 4 मई से 18 मई तथा 1 जून से 15 जून 2026 तक तीन चरणों में किया जाएगा। इस दौरान अविवादित नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन, व्यपवर्तन और वृक्ष कटाई जैसे लंबित मामलों का शत-प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।अभियान के तहत नक्शा बंटाकन की प्रगति, भूमिस्वामियों के खातों में आधार, मोबाइल नंबर, किसान किताब एवं जेंडर प्रविष्टि को पूर्ण किया जाएगा। शिविरों में प्राप्त आवेदनों जैसे फौती नामांतरण, बंटवारा, अभिलेख त्रुटि सुधार आदि का मौके पर ही ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से निराकरण किया जाएगा।इसके अलावा जनहानि, फसल क्षति एवं पशु हानि से संबंधित मामलों का आरबीसी 6-4 के तहत त्वरित समाधान, भू-अर्जन प्रकरणों का समय-सीमा में निपटारा तथा स्वामित्व योजना अंतर्गत अधिकार अभिलेखों का वितरण भी किया जाएगा।शिविरों में आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र के आवेदन भी लोक सेवा केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज कर निर्धारित समय-सीमा में निपटाए जाएंगे। साथ ही ग्राम पंचायतों में व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए कोटवारों के माध्यम से मुनादी कराई जा रही है। कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी ने सम्बंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राजस्व पखवाड़ा में प्राप्त आवेदनों का तत्काल निराकरण करें।
- कोरिया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में कुछ एैसी योजनाएं हैं जिन्होंने हितग्राहियों तक मदद पहुंचाकर उनके जीवन में बदलाव ला दिया है। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वंचित तबके के लिए लागू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण से ग्राम्य परिवेश में बड़ा सकारात्मक बदलाव आ रहा है। आम नागरिकों के जीवन की सहूलियतें बढ़ रही हैं और कुछ सकारात्मक विचारधारा के हितग्राहियों ने ग्रामीण जनजीवन में अपनी मेहनत से नई उर्जा जगाने का काम किया है।प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत हितग्राही बनने के पहले अपने कच्चे मकान में रहने वाली बिफइया बाई पति धरमसाय का जीवन ठीक उसी तरह संकट और अभाव से ग्रस्त हुआ करता था जैसे आम आदिवासी परिवार हुआ करता है। जिसके पास कहने को मात्र कुछ भूमि और एक कच्चा जर्जर मकान हो जिसे अपने आज से ज्यादा कल की चिंता परेशान करती हो। मात्र दो सदस्यों का यह परिवार पूरी तरह से अकुशल मजदूरी पर आश्रित होकर अपना जीवन यापन कर रहा है ऐसे में पक्के मकान का सपना इनके जीवन में एक सपना ही था। इस परिवार को भी हर मौसम में संकट और परेशानियों से जूझना होता था। जिसमें बारिश और ठंड का मौसम बेहद संकट भरा होता था।कोरिया जिले के जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत गढ़तर में गत वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान एक हितग्राही के तौर पर बिफईया बाई को प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना का लाभ मिला। पति पत्नी ने पूरे उत्साह से जल्द अपने पक्के आवास का निर्माण कार्य पूरा किया। अब उस आवास में चैन की रोटी खाते हुए बिफईया बाई अपने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद देकर खुशहाल जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत दो लाख रूपए की मदद से बने इस सुरक्षित और स्वच्छ आवास में रहने से इस परिवार को खुशहाली और सुकून दोनों साथ मिल रहा है। वहीं वंचित वर्ग के इस परिवार में आत्मसंतोष के साथ एक बेहतर वातावरण बनकर तैयार हुआ है। मौसम की मार से दूर होकर इस परिवार में सामाजिक संतोष का उत्साह मिल रहा है। यह आवास केवल ईंट गारे की एक संरचना ना होकर इस परिवार के लिए एक जीवंत सपना है।
- -वित्तीय प्रबंधन होगा और अधिक पारदर्शी व आसानरायपुर / संचालनालय कोष एवं लेखा ने राज्य में वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कई नई डिजिटल सेवाओं की शुरुआत की है। इन पहलों का लक्ष्य आम नागरिकों, शासकीय विभागों एवं अन्य हितधारकों को सरल, सुलभ और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।इसी क्रम में, ई-चालान के तहत OTC प्रणाली को 01 अप्रैल 2026 से लागू किया गया है। अब सभी प्रकार की शासकीय प्राप्तियों का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकेगा। नागरिक और संस्थाएं आसानी से चालान तैयार कर राजस्व जमा कर सकेंगे, जिससे भुगतान प्रक्रिया अधिक सहज, समयबद्ध और पारदर्शी होगी।इसके साथ ही कोषालयों में ऑनलाइन बीटीआर सुविधा भी शुरू कर दी गई है, जिससे लेखांकन कार्यों में गति और सटीकता आएगी। राज्य में एक केंद्रीय कोषालय का भी शुभारंभ किया गया है। इस व्यवस्था के तहत भारत सरकार से प्राप्त राशि के भुगतान SNA SPARSH प्रणाली के माध्यम से अब अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और केंद्रीकृत तरीके से किए जाएंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया में दक्षता सुनिश्चित होगी।संचालनालय कोष एवं लेखा की नई वेबसाइट (dta.cg.gov.in) भी लॉन्च की गई है, जहां उपयोगकर्ताओं को विभाग से संबंधित नवीनतम जानकारी, विभिन्न ऑनलाइन सेवाएं और जरूरी सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध होंगी। यह पहल राज्य में वित्तीय प्रशासन को आधुनिक स्वरूप देने और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- -नवविवाहित जोड़ों को प्रदान किया आशीर्वादरायपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज कोरबा जिले के प्रवास पर रहे। इस दौरान वे कटघोरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम ढपढप-बांकीमोंगरा में आयोजित दिव्य श्री हनुमंत कथा एवं 108 दिव्यांग एवं निर्धन कन्याओं के सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने नवविवाहित जोड़ों से भेंट की और उनके सुखमय जीवन के लिए आशीर्वाद दिया। उन्होंने सभी नवविवाहित जोड़ों को सम्मान स्वरूप पाँच हजार रुपये की राशि प्रदान करने की घोषणा भी की।कोरबा प्रवास के दौरान राज्यपाल श्री डेका से कथावाचक श्री धीरेंद्र शास्त्री ने भी सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर कोरबा कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत सहित अन्य अधिकारी एवं आयोजन समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
- रायपुर। प्रदेश में आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सूरजपुर जिले के भटगांव विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जयनगर-कासापारा में 3.80 करोड़ रूपए की लागत से बनने वाली सड़क के निर्माण कार्य का विधिवत कार्यप्रारंभ पूजन किया।लोक निर्माण विभाग के माध्यम से स्वीकृत इस परियोजना के तहत 3.60 किलोमीटर लंबी सड़क का उन्नयन एवं नवीनीकरण किया जाएगा। इस कार्य के लिए शासन द्वारा 380.15 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। सड़क निर्माण पूर्ण होने के पश्चात क्षेत्र के ग्रामीणों को बेहतर आवागमन सुविधा और सुगम संपर्क का लाभ मिलेगा।मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने अपने संबोधन में कहा कि विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सुशासन और विकास को प्राथमिकता देते हुए योजनाओं को तेजी से धरातल पर उतार रही है। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़कें केवल आवागमन को सुगम नहीं बनातीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी सृजित करती हैं। जयनगर से कासापारा तक बनने वाला यह मार्ग क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्रदान करेगा।कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों की सक्रिय सहभागिता रही। इस अवसर पर श्री हरीश राजवाड़े, श्री देवधन बिंझिया, श्री अशोक अग्रवाल, श्री रितेश जायसवाल, जनपद सदस्य श्रीमती धनेश्वरी सिरदार, सरपंच श्रीमती राधा सिंह सहित विभागीय अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।
- -मुख्यमंत्री से केंद्रीय राज्य मंत्री सुश्री रक्षा खडसे की सौजन्य मुलाकात, खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच देने पर जोर-बस्तर और सरगुजा ओलंपिक तथा बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों को मिल रही है देश भर में सराहनारायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज उनके निवास कार्यालय में केंद्रीय खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री सुश्री रक्षा निखिल खडसे ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा, भारतीय खेल प्राधिकरण के उप महानिदेशक श्री मयंक श्रीवास्तव एवं खेल विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने सुश्री खडसे का शॉल, बस्तर आर्ट से निर्मित आकर्षक प्रतिकृति तथा बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक भेंट कर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उन्हें उचित अवसर, संसाधन और सशक्त मंच उपलब्ध कराने की है। राज्य सरकार खेल एवं सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि हाल ही में आयोजित बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक ने प्रदेश को नई पहचान दिलाई है। इन आयोजनों के जरिए अनेक छिपी हुई प्रतिभाएं सामने आई हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। सरकार द्वारा उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनके कौशल को और निखारने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी करना प्रदेश के लिए गर्व की बात है और हमारे आदिवासी अंचल के युवाओं में यह नई ऊर्जा का संचार करेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर आज जब मुख्यधारा से जुड़ रहा है और वहां शांति स्थापित हुई है तो निश्चित ही आने वाले समय में खेलों में युवाओं की भागीदारी और बढ़ेगी।मुख्यमंत्री ने ‘बस्तर पंडुम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आयोजन में पारंपरिक खेल, गायन, वादन, वेशभूषा एवं व्यंजन सहित 12 विधाओं में लगभग 54 हजार प्रतिभागियों की भागीदारी प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और खेल विरासत का सशक्त उदाहरण है।उल्लेखनीय है कि केंद्रीय राज्य मंत्री सुश्री खडसे ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ प्रवास पर हैं। जगदलपुर में आयोजित इस आयोजन को उन्होंने आदिवासी सशक्तिकरण, जमीनी स्तर पर प्रतिभा खोज और खेलों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।
- रायपुर। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में आज रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में पुरुषों की हॉकी में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच तीसरे और चौथे स्थान के लिए मैच खेला गया। इसमें छत्तीसगढ़ ने मध्यप्रदेश को 14-6 से हरा कर कांस्य पदक जीता।
-
- महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूह और बस्तर के पारंपरिक आदिवासी शिल्प समावेशी विकास और संस्कृति के संरक्षण के प्रमुख वाहक हैं
जगदलपुर। केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खडसे ने आज जगदलपुर में 'छत्तीस कला' के तहत प्रगति महिला स्वयं सहायता समूह के विकास केंद्र और स्टालों का दौरा किया। उन्होंने स्थानीय उत्पादों की एक श्रृंखला की समीक्षा की और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिला उद्यमियों के साथ बातचीत भी की।श्रीमती खडसे ने कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामुदायिक नेतृत्व वाले विकास की दिशा में हो रही महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाया गया है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक परिवर्तन के वाहक के रूप में उभर रहे हैं।श्रीमती खडसे ने राज्य की महिला-केंद्रित पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान कर रही हैं, जबकि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों की बिक्री, तैयार खाद्य उत्पाद और लखपति दीदी योजना जैसे पूरक प्रयास स्थायी आजीविका के अवसरों और बाजार तक पहुंच का विस्तार कर रहे हैं।श्रीमती खडसे ने कहा कि ये पहल न केवल आय सृजन में योगदान दे रही हैं, बल्कि पोषण सुरक्षा, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायक हैं। उन्होंने चल रहे प्रयासों को नारी शक्ति के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।श्रीमती खडसे ने बस्तर जिले के चिलकुटी गांव की अपनी यात्रा के दौरान, समृद्ध कलात्मक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का भी जायजा लिया। धोकरा कला में उपयोग की जाने वाली पारंपरिक लॉस्ट-वैक्स तकनीक इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण रही। यह तकनीक आदिवासी धातु कला का एक प्रतिष्ठित रूप है और बस्तर के कारीगर समुदायों की अनूठी पहचान और शिल्प कौशल को दर्शाती है।श्रीमती खडसे ने इन परंपराओं के संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह शिल्प कला मात्र एक कलात्मक अभ्यास से कहीं अधिक है; यह एक जीवंत सांस्कृति और स्थानीय आदिवासी कारीगरों की स्थायी विरासत का प्रतीक है। इस यात्रा ने सांस्कृतिक संरक्षण और आजीविका सृजन के बीच घनिष्ठ संबंध को भी रेखांकित किया। जो पारंपरिक स्थानीय शिल्प समुदायों को आजीविका के स्थायी आर्थिक अवसर प्रदान करते हैं।श्रीमती खड़से ने कार्यक्रम के दौरान महिला उद्यमियों और कारीगरों से बातचीत की और उन्हें अपनी पहलों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।इस अवसर पर जिला कलेक्टर आईएएस श्री आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक आईपीएस श्री शलभ सिन्हा, जिला पंचायत मुख्य कार्यकारी अधिकारी आईएएस श्री प्रतीक जैन और बस्तर के एसडीएम श्री गगन शर्मा उपस्थित थे।छत्तीसगढ़ में महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों और पारंपरिक आदिवासी शिल्पों के माध्यम से हो रहा परिवर्तन महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और समावेशी आर्थिक विकास के आकर्षक मॉडल के रूप में उभर रहा है। - - जगत कल्याण विकास संस्थान के बैनर तले सम्मान समारोह आयोजितटी सहदेवभिलाई नगर। जगत कल्याण विकास संस्थान (जेके फाउंडेशन) के बैनर तले मंगलवार को आयोजित एवार्ड फंक्शन में महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी सौ महिलाओं को नारी शक्ति एवार्ड से सम्मानित किया गया। ओए बिल्डिंग में हुए इस सम्मान समारोह में समाज सेवा, सौंदर्य, उद्यमिता, चिकित्सा, कला, संगीत, ज्योतिष, साहित्य, खेल, तकनीक, योग और महिला एवं बाल विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट और असाधारण योगदान देने वाली हस्तियों को जेके फाउंडेशन की संस्थापक टी जयारेड्डी की अगुवाई में सम्मान पत्र एवं रिटर्न गिफ्ट दिया गया। समारोह में राजयोगिनी आशा दीदी, सांसद पत्नी रजनी बघेल तथा समाजसेवी इंद्रजीत सिंह छोटू विशेष रूप से उपस्थित थे। समारोह का संचालन रेखा कृपा शंकर यादव ने किया।भरतनाट्यम की मनमोहक प्रस्तुतिसमारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद वेदश्री कला संघम की शास्त्रीय नृत्यांगनाओं सुमन महतो, स्नेहा सोनी, दिव्यांशी बोस, अक्षिता जैन, गिरीशा जैन तथा डिंपल राव ने भरतनाट्यम के माध्यम से गणेश वंदना तथा शिव स्तुति प्रस्तुत की। इस मौके पर आशा दीदी ने नारी शक्ति का अभिनंदन करते हुए कहा कि वैसे तो पुरुष के पास भी शक्ति होती है, फिर भी नारी शक्ति क्यों कहते हैं, इसके जवाब में वह स्वयं कहती हैं कि महिलाओं के पास वह शक्ति है, जिससे वे विश्व का नवनिर्माण कर सकती हैं। इसलिए मैं हमेशा कहती हूं कि हम महिलाएं विश्व की निर्माता हैं। समाजसेवी इंद्रजीत सिंह ने नारी शक्तियों को जोड़कर रखने के लिए संस्थापक जयारेड्डी की सराहना करते हुए कहा कि नारी शक्ति किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं है, बल्कि उनसे आगे ही है।सौ महिलाओं को नारी शक्ति एवार्डसम्मान समारोह में सीनियर नर्सिंग ऑफिसर मंजू कुर्रे, मेकअप आर्टिस्ट आयशा फातिमा, सैनिक स्कूल की उप निदेशक अंकिता भारद्वाज, प्रदेश डिफेंस एकेडमी की एमडी हर्षा साहू, समाजसेविका डॉ परी, पंजाबी फोक डान्स की नृत्य निर्देशिका रूबी नागरा, पारस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन की सीईओ डॉ कविता कुंभज तथा हाउस गार्डन विनर शीला हर्वे ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। नारी शक्ति एवार्ड पाने वाली महिलाओं में रीता परिहार, निकिता शर्मा, प्रियंका गुप्ता, डॉ नीना महतो, हिना, डॉ उत्तरा रामटेके, ज्योति शांडिल्य, सुषमा मिंज, पूजा महेश, नीतू मंडल, ललिता चोपड़ा, भारती साहू, अर्चना वर्मा, बिंदु सोनी, नंदिनी भुजेल, यशोदा सोनकर, रमा गोर्ती, द्रौपदी रेड्डी, विजय लक्ष्मी, मायादास, वंदना सिंह, पूनम साहू, रानी परवीन, रुचि जैन, एस दिव्या सहित लगभग सौ हस्तियां शामिल हैं।
- - सेवा भवन में प्रबंध निदेशकों ने किया सम्मानितरायपुर ।छ्त्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ से कार्यपालक निदेशक (वित्त) श्री आलोक सिंह एवं अतिरिक्त महाप्रबंधक (जनसंपर्क) श्री उमेश कुमार मिश्रा सहित कुल 8 अधिकारी-कर्मचारियों को अधिवार्षिकी पूर्ण होने पर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई।पॉवर कंपनीज़ के मुख्यालय सेवा भवन में आयेजित समारोह में प्रबंध निदेशक (जनरेशन) श्री एस. के. कटियार, प्रबंध निदेशक (ट्रांसमिशन) श्री राजेश कुमार शुक्ला, प्रबंध निदेशक (डिस्ट्रीब्यूशन) श्री भीम सिंह कंवर तथा निदेशक श्री आरए पाठक ने सेवानिवृत्त ईडी श्री सिंह एवं एजीएम श्री मिश्र को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों के समर्पण, उत्कृष्ट कार्यशैली एवं अनुभव ने पॉवर कंपनी के विकास कार्यों को नई दिशा और गति प्रदान की है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दोनों अधिकारियों ने तीनों कंपनियों में सेवाएं देते हुए महत्वपूर्ण योगदान दिया है।श्री आलोक सिंह अपने सेवाकाल के अनुभव साझा करते हुए कहा कि पावर कंपनी निरंतर प्रगति कर रही है। पिछले कुछ वर्षों से कंपनी में किये गए नवाचार और उपायों से काफी सुधार हुआ है। भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय की 14 वीं रिपोर्ट में डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को ए ग्रेड मिला है।श्री मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता से लेकर अविभाजित मध्यप्रदेश विद्युत मंडल से लेकर छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनीज और मुख्यमंत्री सचिवालय में 24 वर्षों तक की यात्रा चुनौतियों से भरी रही, किन्तु सबके सहयोग से सभी कार्य सफलतापूर्वक एवं समयबद्ध रूप से पूर्ण किए जा सके। दोनों अधिकारियों ने प्रबंधन, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।सेवा भवन में आयोजित कार्यक्रम में कार्यपालक निदेशकगण सर्वश्री वी.के. साय, सी.एल. नेताम, एम.एस. चौहान, आर.पी. नामदेव, संदीप मोदी, एम.आर. बागड़े, मनीष गुप्ता उपस्थित रहे।साथ ही मुख्य अभियंता श्री ए.एम. परियल, श्री गिरीश गुप्ता, श्री के.बी. पात्रे, श्रीमती शारदा सोनवानी, श्रीमती चंद्रकला गिडवानी, श्रीमती नंदनी भट्टाचार्य, श्री अब्राहम वर्गीस, श्री संजीव सिंह, श्री संजय शुक्ला, श्री सुभाष शर्मा, श्री डी. नाथ , श्री पी गोसावी तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एच.एल. पंचारी सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।इसके अलावा छत्तीसगढ़ स्टेट पावर में ट्रांसमिशन कंपनी में आयोजित समारोह में अतिरिक्त महाप्रबंधक (जनसंपर्क) श्री उमेश कुमार मिश्रा, लेखा अधिकारी श्री ऋषि कुमार ठाकुर, श्री इम्मानुएल दास, सहायक प्रबंधक श्री राधेश्याम केशरवानी, वरिष्ठ पर्यवेक्षक श्री बिशेश्वर प्रसाद कांत, कनिष्ठ पर्यवेक्षक श्री रामचरण वर्मा तथा लाइन सहायक श्रेणी-1 श्री महेश कुमार वर्मा को भी सम्मानित कर भावभीनी विदाई दी गई। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ प्रकाशन अधिकारी श्री गोविंद पटेल एवं आभार प्रदर्शन अधीक्षण अभियंता श्री पंकज चौधरी ने किया।साथ ही ट्रांसमिशन कंपनी के मान संसाधन विभाग ने एजीएम (पीआर) श्री उमेश कुमार मिश्र एवं सहायक प्रबंधक श्री राधेश्याम केसरवानी को सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्य अभियंता श्री एएम परियल, उप महाप्रबंधक श्रीमती अल्पना शरत तिवारी, श्री पंकज सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्रकाशन अधिकारी श्रीमती अनामिका मंडावी ने किया।सभी सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारियों के स्वस्थ, सुखमय एवं मंगलमय जीवन की कामना की।
- रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने हाटकेश्वर जयंती के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संदेश में कहा है कि हाटकेश्वर जयंती आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक पर्व है, जो हमें धर्म, संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ता है। यह दिवस समाज में सद्भाव, समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। उन्होंने भगवान हाटकेश्वर से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में शांति और प्रगति लेकर आए।
- रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला परंपरा के संवाहक और ‘नाचा’ के जनक माने जाने वाले स्वर्गीय दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दाऊ मंदराजी ने ‘नाचा’ जैसी लोकविधा को न केवल पुनर्जीवित किया, बल्कि उसे जन-जन तक पहुँचाकर सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बनाया। उन्होंने गांवों के लोक कलाकारों को संगठित कर ‘नाचा’ को नई पहचान और गरिमा प्रदान की। उनके प्रयासों से यह लोककला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का प्रभावी मंच बनी।उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी ने अपने समर्पण और साधना से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखा और उसके संरक्षण के लिए जीवनपर्यंत कार्य किया। उनका योगदान प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लोक कला और शिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को ‘दाऊ दुलार सिंह मंदराजी सम्मान’ प्रदान किया जाता है, जो उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी का व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और लोकसंस्कृति को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।
- -लक्षद्वीप के अब्दुल फताह 7 मीटर की दूरी पार कर स्वर्ण जीतने वाले पहले लंबी कूद खिलाड़ी बने-छत्तीसगढ़ के तिलक बारसेट ने पुरुष 100 मीटर में रजत जीता, महिला फुटबॉल टीम फाइनल में पहुंची-कर्नाटक 19 स्वर्ण, 7 रजत और 7 कांस्य के साथ पदक तालिका में शीर्ष पर बरकराररायपुर /झारखंड के शिव कुमार सोरेन और पृथ्वी उरांव ने मंगलवार को जगदलपुर के क्रीड़ा परिसर मैदान में आयोजित किए जा रहे पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में क्रमशः पुरुष और महिला वर्ग में सबसे तेज धावक बनने का गौरव हासिल किया। वहीं, मेजबान छत्तीसगढ़ के सिद्धार्थ नागेश ने शॉट पुट में स्वर्ण और डिस्कस थ्रो में रजत पदक जीता, जबकि तिलक बारसेट ने पुरुष 100 मीटर में रजत पदक अपने नाम किया।शिव कुमार और पृथ्वी ने अपनी-अपनी 100 मीटर दौड़ की शुरुआत से अंत तक बढ़त बनाए रखते हुए अपने राज्य के लिए स्वर्ण पदक जीते। शिव कुमार ने 10.58 सेकंड का समय लिया, जबकि बारसेट ने 10.87 सेकंड के साथ रजत पदक हासिल किया। ओडिशा के अतिश किंडो (10.91 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता।महिला 100 मीटर फाइनल में 16 वर्षीय पृथ्वी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 12.73 सेकंड में दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक जीता। नागालैंड की रुडुओल्हौनुओ बेल्हो (12.90 सेकंड) और झारखंड की पुतुल बक्शी (13.03 सेकंड) ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक हासिल किए।पृथ्वी ने दौड़ के बाद कहा, मैं पदक जीतने को लेकर आश्वस्त थी क्योंकि मैंने चयन ट्रायल्स में अच्छा प्रदर्शन किया था। आज मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ देने पर ध्यान दिया और खुशी है कि मैंने अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय बनाया।मेजबान छत्तीसगढ़ के लिए सिद्धार्थ नागेश ने दिन की शुरुआत पुरुष डिस्कस थ्रो में 35.56 मीटर के साथ रजत पदक जीतकर की। गुजरात के दानिश मकवाना (44.83 मीटर) ने स्वर्ण, जबकि ओडिशा के चंद्राय मुर्मू (33.97 मीटर) ने कांस्य पदक जीता।शाम के सत्र में सिद्धार्थ ने एक कदम आगे बढ़ते हुए 13.52 मीटर के थ्रो के साथ शॉट पुट में स्वर्ण पदक हासिल किया। दानिश मकवाना (13.04 मीटर) को रजत मिला।मेजबान छत्तीसगढ़ ने महिला फुटबॉल के सेमीफाइनल में अरुणाचल प्रदेश को पेनल्टी शूटआउट में हराकर फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में उसका सामना झारखंड से होगा जिसने गुजरात को 9-0 हराया। छत्तीसगढ़ अब पदक तालिका में 2 स्वर्ण, 7 रजत और 4 कांस्य के साथ 10वें स्थान पर है।कर्नाटक 19 स्वर्ण, 7 रजत और 7 कांस्य के साथ पदक तालिका में शीर्ष पर बना हुआ है, जबकि ओडिशा 13 स्वर्ण, 8 रजत और 15 कांस्य के साथ दूसरे स्थान पर है। झारखंड ने महिला 4x100 मीटर और पुरुष 77 किग्रा ग्रीको रोमन में स्वर्ण जोड़कर 7 स्वर्ण, 2 रजत और 5 कांस्य के साथ तीसरे स्थान पर छलांग लगाई। अंबिकापुर में अभिषेक मुंडा ने हिमाचल प्रदेश के अरफान को हराकर स्वर्ण जीता।पिछली शाम जगदलपुर में असामयिक बारिश के कारण एथलेटिक्स सत्र रद्द होने के बाद सुबह का सत्र बेहद व्यस्त रहा, जिसमें सात फाइनल हुए और लंबी कूद का फाइनल दर्शकों के लिए रोमांचक साबित हुआ।लक्षद्वीप के 26 वर्षीय अब्दुल फताह ने अंतिम प्रयास में 7.03 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता और 7 मीटर पार करने वाले अपने क्षेत्र के पहले खिलाड़ी बने। ओडिशा के भीमा सरदार (6.96 मीटर) ने रजत और जीवन बिलुंग (6.95 मीटर) ने कांस्य पदक हासिल किया।पुरुष 400 मीटर फाइनल में कांटे की टक्कर देखने को मिली, जहां ओडिशा के नोबल कुमार किसन की आखिरी क्षणों की डाइव भी उन्हें जीत नहीं दिला सकी। गुजरात के संतोषभाई गणवित ने 49.332 सेकंड में स्वर्ण जीता, जबकि नोबल 49.335 सेकंड के साथ रजत पर रहे। कर्नाटक के रामू (49.60 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता।गोवा की मानसी कुंकलका ने 9.72 मीटर के थ्रो के साथ महिला शॉट पुट में स्वर्ण जीतकर अपने राज्य का खाता खोला। बिहार की अनामिका गोंड (9.50 मीटर) और मेघालय की मेलिबाडक्रो (9.43 मीटर) ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक जीते।100 मीटर: स्वर्ण – पृथ्वी उरांव (झारखंड) 12.73 सेकंड; रजत – रुडुओल्हौनुओ बेल्हो (नागालैंड) 12.90 सेकंड; कांस्य – पुतुल बक्शी (झारखंड) 13.03 सेकंड100 मीटर दौड़: स्वर्ण – बसंती माझी (ओडिशा) 16.20 सेकंड; रजत – कविता टाडिंगी (ओडिशा) 16.81 सेकंड; कांस्य – राठवा सोमसिंह (गुजरात) 16.94 सेकंड400 मीटर: स्वर्ण – रीथुश्री (कर्नाटक) 58.63 सेकंड; रजत – आदित्य केएम (केरल) 1:00.07; कांस्य – चिंतामणि टुटी (झारखंड) 1:00.764x100 मीटर: स्वर्ण – झारखंड 50.31 सेकंड; रजत – ओडिशा 51.11 सेकंड; कांस्य – 54.00 सेकंडडिस्कस थ्रो: स्वर्ण – मुस्कान लोबी (गुजरात) 32.29 मीटर; रजत – अपिक्षा गामित (गुजरात) 31.52 मीटर; कांस्य – कृष्णामोनी पेगु (असम) 29.95 मीटरशॉट पुट: स्वर्ण – मानसी कुंकलका (गोवा) 9.72 मीटर; रजत – अनामिका गोंड (बिहार) 9.50 मीटर; कांस्य – मेलिबाडक्रो (मेघालय) 9.43 मीटरपुरुष100 मीटर: स्वर्ण – शिव कुमार सोरेन (झारखंड) 10.58 सेकंड; रजत – तिलक बारसेट (छत्तीसगढ़) 10.87 सेकंड; कांस्य – अतिश किंडो (ओडिशा) 10.91 सेकंड110 मीटर बाधा दौड़: स्वर्ण – ट्रोइलुक्या मोसरोन्ग (असम) 15.85 सेकंड; रजत – सापावत दत्तू (तेलंगाना) 16.65 सेकंड; कांस्य – हरि मोहन त्रिपुरा (त्रिपुरा) 16.82 सेकंड400 मीटर: स्वर्ण – संतोषभाई गणवित (गुजरात) 49.332 सेकंड; रजत – नोबल कुमार किसन (ओडिशा) 49.335 सेकंड; कांस्य – रामू (कर्नाटक) 49.60 सेकंड4x100 मीटर: स्वर्ण – ओडिशा 41.97 सेकंड; रजत – झारखंड 42.29 सेकंड; कांस्य – गुजरात 43.44 सेकंडलंबी कूद: स्वर्ण – अब्दुल फताह (लक्षद्वीप) 7.03 मीटर; रजत – भीमा सरदार (ओडिशा) 6.96 मीटर; कांस्य – जीवन बिलुंग (ओडिशा) 6.95 मीटरहाई जंप: स्वर्ण – सागर एक्का (ओडिशा) 1.94 मीटर; रजत – वैभव गांवकर (गोवा) 1.91 मीटर; कांस्य – हेमंत खड़िया (ओडिशा) 1.80 मीटरडिस्कस थ्रो: स्वर्ण – दानिश मकवाना (गुजरात) 44.83 मीटर; रजत – सिद्धार्थ नागेश (छत्तीसगढ़) 35.56 मीटर; कांस्य – चंद्राय मुर्मू (ओडिशा) 33.97 मीटरशॉट पुट: स्वर्ण – सिद्धार्थ नागेश (छत्तीसगढ़) 13.52 मीटर; रजत – दानिश मकवाना (गुजरात) 13.04 मीटर; कांस्य – मानस प्रतिम राभा (असम) 12.20 मीटरफुटबॉल (सेमीफाइनल)महिला: छत्तीसगढ़ ने अरुणाचल प्रदेश को 2-2 (पेनल्टी में 4-3) से हराया; झारखंड ने गुजरात को 9-0 से हरायाकुश्ती महिला57 किग्रा: स्वर्ण – नागालक्ष्मी (तेलंगाना); रजत – शालिना सिद्धी (कर्नाटक); कांस्य – अमूल्या कुंडार्गी (कर्नाटक)68 किग्रा: स्वर्ण – प्रिंसिता सिद्धी (कर्नाटक); रजत – एलिजाबेथ रोहलुपुई (मिजोरम); कांस्य – लीलाबेन चावड़ा (गुजरात), बलकेश कुमारी मीणा (राजस्थान)पुरुष57 किग्रा फ्रीस्टाइल: स्वर्ण – अजीत भुयान (ओडिशा); रजत – परस बिडकर (महाराष्ट्र); कांस्य – विक्की उइके (महाराष्ट्र), अब्दुल खान (हिमाचल प्रदेश)86 किग्रा फ्रीस्टाइल: स्वर्ण – सुमित ठाकुर (हिमाचल प्रदेश); रजत – बहादुर खान (जम्मू-कश्मीर); कांस्य – शब्बीर खान (हिमाचल प्रदेश)77 किग्रा ग्रीको रोमन: स्वर्ण – अभिषेक मुंडा (झारखंड); रजत – अरफान (हिमाचल प्रदेश); कांस्य – चरण जाधव (तेलंगाना), इनजामाम (जम्मू-कश्मीर)130 किग्रा ग्रीको रोमन: स्वर्ण – शिवा भालावी (मध्य प्रदेश); रजत – दिलेर खान (जम्मू-कश्मीर); कांस्य – तारा राजू (तेलंगाना)
- -लोक-आस्था, परंपरा और विकास का संगम बना कुँवरगढ़ महोत्सवरायपुर /छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विकास के संगम का सशक्त प्रतीक ‘कुँवरगढ़ महोत्सव’ का आज धरसींवा में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा भव्य शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने 136 करोड़ रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करते हुए क्षेत्र को बड़ी सौगात दी। उन्होंने ग्राम कूंरा का नाम उसके ऐतिहासिक गौरव के अनुरूप ‘कुँवरगढ़’ करने की महत्वपूर्ण घोषणा की, जिससे क्षेत्रवासियों में उत्साह का वातावरण देखने को मिला।मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि कुँवरगढ़ महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक-आस्था, परंपरा और गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और उसे नई पहचान देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है और बस्तर, सरगुजा, कोरिया तथा सिरपुर महोत्सव की श्रृंखला में अब कुँवरगढ़ महोत्सव भी एक विशिष्ट पहचान बनाएगा। इस दौरान उन्होंने नवनिर्मित तहसील कार्यालय का लोकार्पण करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र के नागरिकों को राजस्व संबंधी कार्यों में त्वरित और बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी।मुख्यमंत्री श्री साय ने क्षेत्र के विकास को नई गति देने के उद्देश्य से गौरवपथ निर्माण, रानीसागर तालाब के सौंदर्यीकरण, पुलिस चौकी की स्थापना, खारून नदी में एनीकट निर्माण, खेल मैदान के उन्नयन तथा रायपुर के टेकारी-नयापारा से बड़े नाला मार्ग के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा, आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और आमजन के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आएगा।उल्लेखनीय है कि धरसींवा क्षेत्र का प्राचीन ग्राम कूंरा, जिसे अब ‘कुँवरगढ़’ के रूप में पुनर्स्थापित किया जा रहा है, अपने भीतर गौरवशाली इतिहास समेटे हुए है। यह क्षेत्र आदिवासी शासक राजा कुँवर सिंह गोंड के साम्राज्य का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, जिनकी वीरता और विरासत आज भी यहां के जनजीवन में जीवंत है। उत्तर में माता कंकालिन, दक्षिण में माता चंडी, पश्चिम में माता महामाया और पूर्व में भगवान चतुर्भुजी की उपस्थिति इस क्षेत्र को धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। लगभग 12 हजार की आबादी वाला यह क्षेत्र अपनी परंपरा और विकास के संतुलन के साथ आगे बढ़ रहा है।महोत्सव में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए हैं तथा स्थानीय लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बनी हुई हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि अनेक क्रांतियों और परंपराओं की साक्षी रही है। उन्होंने लोगों को नवा रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय संग्रहालय के अवलोकन के लिए भी प्रेरित किया।मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की पावन धरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रभु श्री राम का ननिहाल है और वनवास काल का अधिकांश समय उन्होंने यहीं व्यतीत किया।दंडकारण्य, माता शबरी का आश्रम, माता कौशल्या की नगरी तथा गुरु घासीदास जी और गहिरा गुरु जैसे संतों की तपोभूमि होने के कारण यह प्रदेश आध्यात्मिक रूप से अत्यंत समृद्ध है। उन्होंने आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास का स्मरण करते हुए कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ अनेक क्रांतियां इस धरती पर हुई हैं।मुख्यमंत्री ने धरसींवा विधायक श्री अनुज शर्मा की इस पहल की सराहना करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने दो वर्षों के कार्यकाल में किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है और विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।कार्यक्रम में धरसींवा विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री मोतीलाल साहू, सुश्री मोना सेन, श्री देवजीभाई पटेल, श्री अंजय शुक्ला, संभागायुक्त श्री महादेव कावरे, कलेक्टर श्री गौरव सिंह सहित जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।
- - मुख्यमंत्री भगवान महावीर जनकल्याणक महोत्सव 2026 में हुए शामिलरायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के एमजी रोड स्थित दादाबाड़ी तीर्थ में आयोजित भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव 2026 में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने दादाबाड़ी परिसर स्थित जिनमंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। उन्होंने समाज सेवा, पत्रकारिता, शिक्षा और उच्च शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को “जैन रत्न अलंकरण” से सम्मानित किया और कहा कि ऐसे सम्मान समाज में सकारात्मक परिवर्तन और प्रेरणा का स्रोत बनते हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर स्वामी का सत्य और अहिंसा का संदेश समस्त मानवता के लिए पथ प्रदर्शक है, जो हमें त्याग, तपस्या, करुणा और आत्मसंयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आज एक सुखद संयोग है कि भगवान महावीर जयंती के पावन अवसर पर देश नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक उपलब्धि की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास में नक्सलवाद सबसे बड़ी बाधा रहा है और बस्तर जैसे प्राकृतिक संपदा से समृद्ध क्षेत्र को लंबे समय तक विकास से वंचित रहना पड़ा।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प और प्रभावी रणनीति के कारण आज नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता प्राप्त हुई है। उन्होंने भगवान महावीर से प्रार्थना की कि छत्तीसगढ़ में शांति और विकास का यह वातावरण निरंतर बना रहे और भविष्य में कभी भी हिंसा का यह दौर वापस न आए।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने सुशासन के संकल्प के साथ तेज गति से कार्य करते हुए विकास के अनेक आयाम स्थापित किए हैं। प्रधानमंत्री की गारंटियों को पूरा करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जरूरतमंदों को पक्के आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं, किसानों के हित में किए गए वादों को निभाया जा रहा है, महतारी वंदन योजना के तहत लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ा गया है तथा रामलला दर्शन योजना के माध्यम से श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम के दर्शन का अवसर प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को विकसित और समृद्ध राज्य के रूप में स्थापित करना है।मुख्यमंत्री ने जैन समाज की सराहना करते हुए कहा कि समाज सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य और परमार्थ के क्षेत्र में जैन समाज का योगदान अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने, प्रेरित करने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कार्यक्रम में विधायक श्री राजेश मूणत, श्री लोकेश कावड़िया, भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव समिति के अध्यक्ष श्री चंद्रेश शाह, श्री विकास सेठिया, श्री आनंद जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के सदस्य एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।







.jpg)



















