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- -दो भूमि स्वामियों पर 5 लाख रुपये का अर्थदंडरायपुर । छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (CGRERA) ने रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के उल्लंघन पर कठोर कदम उठाते हुए रायपुर के दो भूमि स्वामियों श्री गोवर्धन और श्री रामानुज पर 5 लाख रुपये का आर्थिक दंड अधिरोपित किया है। प्राधिकरण के संज्ञान में यह मामला आया कि दोनों भूमि स्वामी ओम फार्म, लखोली रेलवे स्टेशन नाम से प्लॉट विकसित कर बिना वैध RERA पंजीकरण के विज्ञापन, प्रचार-प्रसार और विक्रय का कार्य कर रहे थे। यह गतिविधि अधिनियम की धारा 3 का स्पष्ट उल्लंघन है। धारा 3 के अनुसार, किसी भी रियल एस्टेट परियोजना का रेरा पंजीकरण कराए बिना उसके प्रचार, बुकिंग अथवा विक्रय का आमंत्रण देना पूर्णतः प्रतिबंधित है। रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के उल्लंघन पर कठोर कदम उठाते हुए प्राधिकरण ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि बिना पंजीकरण किसी भी प्रकार की प्लॉटिंग, विज्ञापन या विक्रय को गंभीर कानूनी अपराध माना जाएगा। साथ ही, भविष्य में ऐसे मामलों पर और अधिक कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।मामले की जांच, दस्तावेजों की पड़ताल एवं सुनवाई के बाद प्राधिकरण ने निष्कर्ष निकाला कि संबंधित व्यक्तियों द्वारा कानून का उल्लंघन किया गया है। परिणामस्वरूप CGRERA ने दोनों भूमि स्वामियों पर कुल 5 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है।
- रायपुर ।छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग में शासकीय खरीदी नियमों के उल्लंघन से जुड़े गंभीर प्रकरणों पर शासन द्वारा त्वरित और कठोर कार्रवाई लगातार की जा रही है। विश्वविद्यालयों एवं शासकीय महाविद्यालयों में बिना निविदा प्रक्रिया अपनाए करोड़ों रुपये की खरीदी किए जाने की शिकायत विभिन्न माध्यम से प्राप्त हुई थी।विभागीय जांच में यह उजागर हुआ कि कुछ विश्वविद्यालयों और शासकीय महाविद्यालयों द्वारा बिना निविदा प्रक्रिया अपनाए बड़े पैमाने पर क्रय आदेश जारी किए गए।प्राप्त जानकारी के अनुसार, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर द्वारा 15 अप्रैल 2025 को एक ही दिन में लगभग 1 करोड़ रुपये के 26 क्रय आदेश बिना निविदा के जारी किए गए। इसी तरह शासकीय बोरणा सनातन संस्कृत आदर्श महाविद्यालय, नारायणपुर द्वारा 14 अक्टूबर 2025 को एक ही दिन में 35 लाख रुपये के 22 क्रय आदेश तथा शासकीय आदर्श महाविद्यालय, लोहारकोट महासमुंद द्वारा 22 अक्टूबर 2025 को 1 करोड़ रुपये मूल्य के 36 क्रय आदेश बिना निविदा प्रक्रिया के जारी किए गए।मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 28 नवंबर 2025 को अपर संचालक की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया गया। समिति की रिपोर्ट के आधार पर शासकीय आदर्श महाविद्यालय लोहारकोट महासमुंद के प्राचार्य एवं क्रय समिति के सदस्यों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर तथा बोरणा सनातन संस्कृत आदर्श महाविद्यालय, नारायणपुर के प्रकरणों में भी कार्रवाई के तहत प्राचार्य सहित 4 सहायक प्राध्यापकों को निलंबित किया गया है।उच्च शिक्षा आयुक्तालय ने स्पष्ट किया है कि शासकीय खरीदी नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। यह मामला प्रदेश में उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
- -एआई टेक्नालॉजी के उपयोग से कम एफर्ट में होगा ज्यादा काम-जनसम्पर्क की नई चुनौतियाँ: जनसंपर्क अधिकारियों की दो दिवसीय राज्य स्तरीय कौशल संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभरायपुर, / मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव एवं जनसंपर्क विभाग के आयुक्त डॉ. रवि मित्तल ने कहा कि जनसंपर्क अधिकारी एक्सक्लूजिव स्टोरी तैयार करें और इसके व्यापक प्रचार के लिए मीडिया के सभी माध्यमों का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों की स्टोरी नेशनल और स्टेट लेवल पर प्रकाशित होगी, उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप सम्मानित किया जाएगा। आयुक्त डॉ. मित्तल नवा रायपुर स्थित संवाद के ऑडिटोरियम में जनसम्पर्क की नई चुनौतियां विषय पर जनसम्पर्क अधिकारियों की व्यावसायिक दक्षताओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कौशल संवर्धन कार्यशाला में उक्त बाते कहीं।आयुक्त डॉ. मित्तल ने कहा कि वर्तमान दौरे में जनसंपर्क में सूचना एवं जनसंपर्क का माध्यम बदल रहे हैं। नए-नए तकनीक आ रहे हैं, जनसंपर्क अधिकारियों को भी उन तकनीकों का उपयोग कर अपने कार्य को प्रमाणिक, बेहतर और समय सीमा में पूरा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया का बखूबी उपयोग करना है, ताकि शासन की फैसलों को जनता तक पहुंचाया जा सके। इसके लिए अधिकारियों को नए टेक्नोलॉजी से अपडेट रहना होगा। उन्होंने इस मौके पर पत्रकारिता स्कूल-कॉलेजों के बच्चों को भी जनसंपर्क विभाग में इंटरशीप का अवसर देने पर बल दिया।उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ अधिकारियों में अपर संचालक श्री जवाहरलाल दरियो, श्री संजीव तिवारी, श्री उमेश मिश्रा, श्री आलोक देव ने जनसेवा में स्पष्ट, सरल और समयबद्ध संवाद की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जनसंपर्क के लिए प्रभावी संवाद सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रतिभागियों को दो दिनों तक चलने वाले सत्रों की रूपरेखा और अपेक्षाओं से अवगत कराया गया। अधिकारियों ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य समाचार लेखन, टेलीविजन सहभागिता और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग के माध्यम से जनसंपर्क को अधिक सशक्त, आधुनिक, संवेदनशील और उन्मुखी बनाना है।कार्यशाला के प्रथम दिवस की शुरुआत पाठक-अनुकूल लेखन सरकारी समाचार को आकर्षक बनाना विषयक सत्र से हुई, जिसमें दैनिक भास्कर के संपादक श्री शिव दुबे ने मार्गदर्शन दिया। उन्होंने सरकारी आदेशों और सूचनाओं से जनता से जुड़ी मुख्य बात को पहचानने, सरल और सुबोध भाषा के प्रयोग, प्रभावी हेडलाइन एवं लीड पैराग्राफ लिखने की जानकारी दी। साथ ही, प्रेस विज्ञप्ति की संरचना, उपयुक्त उद्धरणों के प्रयोग तथा संकट के समय मीडिया से संतुलित और समयबद्ध संवाद की आवश्यकता पर भी विस्तार से चर्चा की।द्वितीय सत्र में आकाशवाणी के समाचार संपादक श्री विकल्प शुक्ला ने टेलीविजन मीडिया की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। उन्होंने शासकीय योजनाओं और कार्यक्रमों को विजुअल स्टोरी के रूप में प्रस्तुत करने, टीवी कवरेज के लिए आवश्यक तत्वों, कैमरे पर संक्षिप्त बाइट लेने और फैक्ट शीट के महत्व की जानकारी दी।तीसरे सत्र में सोशल मीडिया और एआई टूल्स के उपयोग पर चर्चा हुई। सोशल मीडिया, डिजिटल मार्केटिंग और एआई विशेषज्ञ श्री राकेश साहू ने एआई डिजिटल टूल्स का उपयुक्त उपयोग कर फोटो, वीडियो एडिटिंग के बारे में मार्गदर्शन दिया।आज के अंतिम सत्र में जनसंपर्क संचालनालय, भोपाल के सेवानिवृत्त संचालक श्री लाजपत आहूजा ने पीआर टूल बॉक्स, स्टेकहोल्डर प्रबंधन तथा आपातकालीन संचार (क्राइसिस कम्युनिकेशन) से जुड़े तुरंत उपयोग योग्य उपकरणों की जानकारी दी। कार्यशाला में राज्यभर से आए जनसंपर्क अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
- रायपुर ।स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी एवं अनुसंधान केंद्र, कृषि अभियांत्रिकी संकाय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में आज 12 जनवरी 2026 को स्वामी विवेकानंद जयंती (राष्ट्रीय युवा दिवस) का गरिमामय एवं प्रेरणादायी आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय परिसर में स्थित स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।कार्यक्रम में प्रो. टोपलाल वर्मा, सेवानिवृत्त प्राध्यापक, शासकीय छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कुलपति, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर डॉ. गिरीश चंदेल की विशिष्ट उपस्थिति ने समारोह को और अधिक गरिमामय बनाया। मुख्य अतिथि प्रो. टोपलाल वर्मा ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में स्वामी विवेकानंद जी के जीवन दर्शन, उनकी शिक्षाओं, राष्ट्र निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान तथा उच्च नैतिक मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्व के अनेक देशों की तुलना में भारत में युवा जनसंख्या अत्यधिक है, जो राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। यदि भारतीय युवा स्वामी विवेकानंद जी के विचारों और दृष्टि को आत्मसात कर उन्हें व्यवहार में उतारें, तो वे राष्ट्र निर्माण में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सशक्त, अनुशासित एवं आदर्शवादी युवाओं की सक्रिय भागीदारी से विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप वर्ष 2047 तक भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित हो सकता है।कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अजय वर्मा, अधिष्ठाता, कृषि अभियांत्रिकी संकाय के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। डॉ. अजय वर्मा द्वारा स्वागत भाषण प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर डॉ. विवेक त्रिपाठी, संचालक अनुसंधान, पूर्व अधिष्ठाता प्रो. विनय कुमार पांडे, डॉ. धनंजय शर्मा, सहायक संचालक अनुसंधान, प्रो. एम. एल. वर्मा, प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय, तिल्दा सहित विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, अधिकारीगण, कर्मचारीगण तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान शोधार्थी एवं छात्र प्रतिनिधि निहाल पांडेय ने कुशलतापूर्वक मंच संचालन किया तथा विद्यार्थियों से नशा, मादक पदार्थों एवं अन्य सामाजिक कुरीतियों से दूर रहकर सकारात्मक, अनुशासित एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन अपनाने की अपील की। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. एस. वी. जोगदंड द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। संपूर्ण कार्यक्रम का समापन युवाओं में चरित्र निर्माण, आत्मविश्वास एवं राष्ट्र निर्माण के प्रेरक संदेश के साथ हुआ।
- -राष्ट्रीय युवा दिवस पर युवाओं में देशभक्ति और नेतृत्व का संचार-बलौदाबाजार–भाटापारा में युवा संवाद कार्यक्रम, 900 से अधिक युवाओं की सहभागितारायपुर । छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के माध्यम से राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर बलौदाबाजार–भाटापारा जिले में जिला स्तरीय युवा संवाद एवं नेतृत्व विकास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्र निर्माण की भावना, सामाजिक दायित्व और नेतृत्व क्षमता का विकास करना रहा।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा उपस्थित रहे। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उनके विचार, ऊर्जा और संकल्प से ही विकसित भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने युवाओं से आत्मनिर्भरता, नवाचार और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया।कार्यक्रम में एनएसएस स्वयंसेवकों, कॉलेज विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विभिन्न सत्रों में युवाओं से सीधा संवाद, प्रेरक व्याख्यान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और अनुभव साझा किए गए। युवाओं ने शिक्षा, रोजगार, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे।जिला प्रशासन एवं उच्च शिक्षा विभाग के समन्वय से आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न महाविद्यालयों से आए 900 से अधिक छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए तथा राष्ट्र सेवा और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प दिलाया गया। यह आयोजन जिले में युवाओं के सर्वांगीण विकास और राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भूमिका को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
- रायपुर,। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रायपुर में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के क्षेत्रीय कार्यालय का शुभारंभ छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था को वैश्विक मंच से जोड़ने वाला ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रदेश के किसानों, एफपीओ (Farmer Producer Organisations) और निर्यातकों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से जोड़कर राज्य की कृषि को नई ऊँचाई देगी।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के मंच से शुरू हुई यह पहल छत्तीसगढ़ को उच्च-मूल्य कृषि निर्यात के नक्शे पर मजबूती से स्थापित करेगी। जीआई टैग प्राप्त विशिष्ट चावल किस्में जैसे जीराफूल और नागरी दुबराज, साथ हीa राज्य के अन्य कृषि एवं प्रोसेस्ड फूड उत्पाद अब वैश्विक बाजारों में नई पहचान बनाएंगे। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ कृषि आधारित उद्यमों को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और हर खेत तक नए अवसर पहुँचाने के लिए निरंतर काम कर रही है। APEDA का क्षेत्रीय कार्यालय इस दिशा में एक मजबूत संस्थागत आधार प्रदान करेगा, जिससे निर्यात प्रक्रियाएं सरल होंगी, गुणवत्ता मानक सुधरेंगे और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधा संपर्क स्थापित होगा।उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल छत्तीसगढ़ को उच्च-मूल्य, सतत और प्रतिस्पर्धी कृषि निर्यात के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में ले जाएगी और राज्य के किसानों की समृद्धि को स्थायी आधार प्रदान करेगी।
- -तहसीलदार हरदीबाजार को कारण बताओ नोटिस-कलेक्टर कोरबा के निर्देश पर हुई कार्रवाईरायपुर / कृषकों के रकबा सुधार एवं ऑनलाइन मैपिंग में लापरवाही बरतने के मामले में कोरबा जिले के पटवारी हल्का क्रमांक 3 की पटवारी श्रीमती कामिनी कारे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्य की मॉनिटरिंग में उदासीनता बरतने के कारण तहसीलदार हरदीबाजार को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। यह कार्रवाई कोरबा कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत के निर्देश पर की गई है।गौरतलब है कि जिला प्रशासन कोरबा को यह शिकायत मिली कि जिले के पटवारी हल्का क्रमांक 03, राजस्व निरीक्षक मंडल तिवरता, तहसील हरदीबाजार अंतर्गत ग्राम नोनबिर्रा, उड़ता एवं पूटा के कृषक उपार्जन केन्द्र में समर्थन मूल्य पर अपना धान विक्रय नहीं कर पा रहे हैं। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने मामले की जांच के निर्देश दिए थे।अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, पाली द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में यह पाया गया कि संबंधित हल्का पटवारी द्वारा अनेक कृषकों का क्षेत्र निरीक्षण एवं सत्यापन नहीं किया गया है। इस लापरवाही के कारण प्रभावित कृषक अपना धान विक्रय नहीं कर पा रहे हैं। पटवारी श्रीमती कारे के इस कृत्य को शासन के निर्देशों की अवहेलना एवं कर्तव्य के प्रति उदासीनता व स्वेच्छाचारिता मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय पाली निर्धारित किया गया है। यहां यह उल्लेखनीय है कि शासन के निर्देशानुसार कोरबा जिले में गिरदावरी में छूटे किसानों, त्रुटिपूर्ण दर्ज रकबा सुधार और ऑनलाइन मैपिंग का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
- रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित सांसद संकुल विकास परियोजना की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि जनजातीय विकास को सांसद संकुल विकास परियोजना से गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि योजना के तहत लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने महत्वपूर्ण पहल की जा रही है, इससे जनजातीय क्षेत्रों से पलायन पर रोक लगेगी।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने लगातार प्रयास किया जा रहा है। सांसद संकुल विकास परियोजना के तहत गांवों के क्लस्टर बना कर विकास का मॉडल विकसित किया जा रहा है, जिसका सीधा लाभ लोगों को मिल रहा है। स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग द्वारा लोगों का कौशल विकास कर उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाना ही योजना का उद्देश्य है।मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य को धान का कटोरा कहा जाता है। हमारे यहां धान की कई किस्में हैं जिनके निर्यात की बड़ी संभावना है। कृषि के साथ ही मत्स्य पालन, बकरी पालन, गौ पालन, शूकर पालन से ग्रामीणों को जोड़ कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है। हमारे जनजातीय लोग महुआ, इमली, चिरौंजी आदि वनोपज का पुश्तैनी रूप से उत्पादन करते आ रहे हैं, इनका वैल्यू एडिशन कर मार्केट से जोड़ा जा रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य की नई उद्योग नीति में भी अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। सांसद संकुल विकास परियोजना से जुड़े जनप्रतिनिधि और विकास सहयोगी सुनिश्चित करें कि जनजातीय क्षेत्रों में नई उद्योग नीति के लाभ भी मिलें। सांसद संकुल विकास परियोजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए नोडल अधिकारियों की भी नियुक्ति की जाएगी।बैठक में श्री वी सतीश ने सांसद संकुल विकास परियोजना की परिकल्पना और लक्ष्य से जुड़े बिंदुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जनजातीय क्षेत्रों में लोगों को स्वरोजगार से जोड़कर पलायन रोकने की दिशा में योजना के तहत महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। इस योजना के तहत गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे जनजातीय बहुल राज्यों में आमजन, एनजीओ, जनप्रतिनिधि और सरकार के समन्वित प्रयास से समग्र विकास किया जा रहा है।कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि विभिन्न विभागों से जुड़े शासकीय अधिकारी भी संकुल से जुड़े गांवों के विकास में अपनी भूमिका का पूरी निष्ठा से निर्वहन करें। स्थानीय जरूरतों की बेहतर समझ से कौशल विकास कर लोगों को स्थाई रोजगार के अवसर प्रदान किए जा सकते हैं।बैठक में रायगढ़ के लैलूंगा संकुल, सरगुजा के परशुरामपुर संकुल, बस्तर के बकावंड संकुल, बलरामपुर के माता राजमोहिनी देवी संकुल और केशकाल के धनोरा संकुल में योजना के तहत किए गए कार्यों की विस्तार से जानकारी दी गई।इस अवसर पर सांसद श्री भोजराज नाग, श्री चिंतामणि महाराज, श्री राधेश्याम राठिया, श्री देवेंद्र प्रताप सिंह, विधायक श्रीमती रेणुका सिंह, श्रीमती गोमती साय, श्री प्रसाद इंडेप, श्री कपिल सहस्त्रबुद्धे सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी व गणमान्यजन उपस्थित थे।
- -चीनी मांझा प्रतिबंधित, उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाईरायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर प्रदेशवासियों से पतंगों के इस उल्लासपूर्ण पर्व को सुरक्षित, जिम्मेदार और पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि त्योहार के आसपास चीनी मांझा से होने वाली दुर्घटनाओं की खबरें अत्यंत चिंताजनक हैं, इसलिए इसका प्रयोग पूरी तरह से वर्जित है।मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट किया कि चीनी मांझा प्रतिबंधित है और इसका उपयोग न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह आमजन, पक्षियों और राहगीरों के लिए भी गंभीर खतरा बनता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रतिबंध का कड़ाई से पालन कराया जाए।मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी निर्देशित किया है कि चीनी मांझा के खिलाफ व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि नागरिकों को इसके खतरों और कानूनी प्रावधानों की पूरी जानकारी मिल सके।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि मकर संक्रांति के इस पावन अवसर पर परंपरा, आनंद और सुरक्षा—तीनों का संतुलन बनाए रखें। उन्होंने सभी को मिलकर इस पर्व को हर्ष, सौहार्द और जिम्मेदारी के साथ मनाने की अपील की।
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रायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में स्वामी विवेकानंद के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के मौके पर प्रदेश के युवाओं को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन और विचार आज भी भारत की युवाशक्ति के लिए ऊर्जा, दिशा और आत्मविश्वास का सबसे बड़ा स्रोत हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को यह विश्वास दिया कि वे स्वयं अपने भविष्य के निर्माता हैं। उनके विचारों ने सेवा, आत्मबल और राष्ट्रप्रेम को जीवन का उद्देश्य बनाने की प्रेरणा दी। आज जब भारत अमृतकाल की ओर अग्रसर है, तब विवेकानंद जी की शिक्षाएँ युवाओं को जिम्मेदार, आत्मनिर्भर और राष्ट्रहित के प्रति सजग नागरिक बनने का मार्ग दिखाती हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह गौरव का विषय है कि स्वामी विवेकानंद का जीवन रायपुर से भी जुड़ा रहा है। यहां की धरती पर बिताया गया उनका समय प्रदेश की सांस्कृतिक चेतना और वैचारिक परंपरा को विशेष पहचान देता है।मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि स्वामी विवेकानंद के विचार आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते रहेंगे और छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के युवा उनके आदर्शों को अपनाकर समाज, राष्ट्र और मानवता की सेवा में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में स्वामी विवेकानंद के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के मौके पर प्रदेश के युवाओं को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन और विचार आज भी भारत की युवाशक्ति के लिए ऊर्जा, दिशा और आत्मविश्वास का सबसे बड़ा स्रोत हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को यह विश्वास दिया कि वे स्वयं अपने भविष्य के निर्माता हैं। उनके विचारों ने सेवा, आत्मबल और राष्ट्रप्रेम को जीवन का उद्देश्य बनाने की प्रेरणा दी। आज जब भारत अमृतकाल की ओर अग्रसर है, तब विवेकानंद जी की शिक्षाएँ युवाओं को जिम्मेदार, आत्मनिर्भर और राष्ट्रहित के प्रति सजग नागरिक बनने का मार्ग दिखाती हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह गौरव का विषय है कि स्वामी विवेकानंद का जीवन रायपुर से भी जुड़ा रहा है। यहां की धरती पर बिताया गया उनका समय प्रदेश की सांस्कृतिक चेतना और वैचारिक परंपरा को विशेष पहचान देता है।मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि स्वामी विवेकानंद के विचार आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते रहेंगे और छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के युवा उनके आदर्शों को अपनाकर समाज, राष्ट्र और मानवता की सेवा में अग्रणी भूमिका निभाएंगे। -
-1500 से अधिक बच्चे स्वामी विवेकानंद जी की वेशभूषा में करेंगे राष्ट्रगान : डिप्टी सीएम अरुण साव
-डिप्टी सीएम साव फिर बनवा रहे हैं विश्व रिकॉर्ड, स्वामी विवेकानंद की वेशभूषा में 1500 बच्चों के साथ करेंगे वंदे मातरम् गानबिलासपुर। उप मुख्यमंत्री सह खेल मंत्री श्री अरुण साव ने बताया कि, 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जी की जयंती को पूरा देश राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाता है। छत्तीसगढ़ में अलग अलग प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। कई स्थानों में स्वदेशी दौड़ का आयोजन होगा। उन्होंने कहा कि, खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा युवा रत्न अवार्ड भी प्रदान किया जाएगा।डिप्टी सीएम अरुण साव ने बताया कल 12 जनवरी को उनके नेतृत्व में खेल एवं युवा कल्याण विभाग बिलासपुर में विश्व रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। पुलिस ग्राउंड बिलासपुर में 1500 से अधिक बच्चे विश्व रिकॉर्ड बनाने स्वामी विवेकानंद की वेशभूषा में इकट्ठे होंगे और वंदे मातरम् का गान करेंगे। एक साथ 1500 स्कूली बच्चे नशा ना करने की शपथ लेंगे। साथ ही कंपनी गार्डन, बिलासपुर में विवेकानंद जी की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने जानकारी दी कि पुलिस ग्राउंड बिलासपुर में 5500 स्क्वायर फीट से बड़ी आकर्षक और विशाल रंगोली से भी स्वामी विवेकानंद का चित्र बनाया जा रहा है।राष्ट्रीय युवा दिवस पर इस बार बिलासपुर देश भर में आकर्षण का केंद्र रहने वाला है, ये बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। -
-रविवार को ड्राइंग कंपिटिशन हुआ, जिसमें तीन आयु वर्गों के बालक-बालिकाओं ने कूंचे से अपनी कल्पनाओं में रंग भरे टी सहदेवभिलाई नगर। सेक्टर 05 स्थित बालाजी मंदिर में आंध्र साहित्य समिति के तत्वावधान में हर साल की तरह इस मकर संक्रांति पर भी विविध आयोजन होंगे। चार दिनों तक मनाए जाने वाले तेलुगु भाषियों के सबसे बड़े उत्सव में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कई प्रतियोगिताएं रखी गई हैं। इस कड़ी में रविवार को ड्राइंग कंपिटिशन हुआ, जिसमें तीन आयु वर्गों के बालक-बालिकाओं ने कूंचे से अपनी कल्पनाओं में रंग भरे। सब जूनियर, जूनियर और सीनियर ग्रुप में हुई इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने पोंगल, प्रकृति, भगवान बालाजी, बजरंग बली, पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण के दुष्प्रभाव पर आकर्षक चित्रकारी की।मंगलवार को रंगोली व व्यंजन प्रतियोगितामंगलवार को रंगोली प्रतियोगिता रखी गई है। इसी दिन व्यंजन प्रतियोगिता भी होगी, जिसमें प्रतिभागियों को अपने घरों से मैदा या बेसन से बने व्यंजन लाने होंगे। इसके अलावा पुष्पगुच्छ प्रतियोगिता भी रखी गई है, ये पुष्पगुच्छ घरों से तैयार करके ही लाने होंगे। इससे पहले सुबह छह बजे मंदिर में भगवान बालाजी और श्रीदेवी-भूदेवी का अभिषेक कर अलंकरण किया जाएगा।बुधवार को भोगी पर्वअगले दिन यानी बुधवार को भोगी पर्व मनाया जाएगा। जिसमें भगवान बालाजी और भूदेवी की अवतार माता गोदा देवी का सभी रस्मों के साथ कल्याणोत्सव (विवाहोत्सव) भी होगा। दक्षिण भारतीयों में भोगी पर्व का विशेष महत्व है। भोगी पर्व अलाव जलाकर मनाया जाता है, जिसमें प्रतीकात्मक रूप से पुरानी और अवांछित वस्तुओं के साथ बुरी आदतों को आग में झोंक दिया जाता है, ताकि नए एवं सकारात्मक विचारों का मार्ग प्रशस्त हो सके। इस दिन विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे और प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।मकर संक्रांति गुरुवार कोगुरुवार को मकर संक्रांति मनाई जाएगी, इस दिन सुबह छह बजे तिरुप्पावै अनुष्ठान रखा गया है। इसके बाद सहस्रनामार्चना की जाएगी। तत्पश्चात नित्य पूजा होगी, फिर भगवान को नैवेद्य अर्पित किया जाएगा। शाम छह बजे पूजा-अर्चना की जाएगी और उसके बाद सभी भक्तों के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे। रात नौ बजे सनातन विधिविधान से शुद्ध भाव से भगवान की एकांत सेवा की जाएगी। एकांत सेवा से पहले विजयनगर के म्यूजिकल ग्रुप सिने संगीत लहरी द्वारा संगीत संध्या आयोजित की जाएगी। - रायपुर - भारत गणराज्य के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लालबहादुर शास्त्री को 60वीं पुण्यतिथि पर सादर नमन करने रायपुर नगर पालिक निगम के संस्कृति विभाग के तत्वावधान में नगर निगम जोन क्रमांक 4 के सहयोग से राजधानी शहर रायपुर के जी ई मार्ग में शास्त्री चौक के किनारे स्थित उनके प्रतिमा स्थल के समक्ष पुष्पांजलि आयोजन रखा गया.नगर निगम रायपुर के तत्वावधान में रखे गए संक्षिप्त पुष्पांजलि आयोजन में पहुंचकर राजधानी शहर की प्रथम नागरिक नगर पालिक निगम रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने समस्त नगरवासियों की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री को पुण्यतिथि पर सादर नमन किया.रायपुर नगर निगम संस्कृति विभाग के नगर नगर निगम जोन क्रमांक 4 के सहयोग से रखे गए संक्षिप्त पुष्पांजलि आयोजन में प्रमुख रूप से रायपुर दक्षिण विधायक श्री सुनील सोनी, नगर निगम रायपुर के संस्कृति विभाग अध्यक्ष श्री अमर गिदवानी, एमआईसी सदस्य सर्वश्री अवतार भारती बागल, संतोष सीमा साहू, खेम कुमार सेन , जोन 4 जोन कमिश्नर श्री अरुण ध्रुव सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजनों, सामाजिक कार्यकर्त्ताओं नवयुवकों, आमजनों ने प्रतिमा स्थल पर भारत गणराज्य के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लालबहादुर शास्त्री का 60वीं पुण्यतिथि पर सादर नमन किया.
- रायपुर - नगर पालिक निगम रायपुर क्षेत्र अंतर्गत जोन क्रमांक 4 अंतर्गत होलीक्रॉस स्कूल बैरन बाजार के पास सड़क मार्ग पर बनाये गए बड़े स्पीड ब्रेकर को तोड़कर उसके स्थान पर वहाँ छोटा स्पीड ब्रेकर बना दिया या है. इससे सड़क मार्ग में नागरिकों को यातायात सुगम हो जाने से त्वरित राहत मिली है, वहाँ छोटी उम्र के अनेक बच्चे सड़क किनारे खेलते रहते हैँ, बड़े स्पीड ब्रेकर को तोड़कर छोटा स्पीड ब्रेकर बनाये जाने से उन्हें और नागरिकों को सड़क मार्ग पर आवागमन में सुरक्षा प्राप्त हुई है और इससे वहाँ आकस्मिक सड़क दुर्घटनाओं पर कारगर अंकुश लगा है, जिससे सड़क मार्ग यातायात सुरक्षित हुआ है.
- -देशभर की संस्कृति एक मंच पर देखने का मिला अवसरबालोद । दुधली में आयोजित प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी 2026 में देश के विभिन्न राज्यों से आए रोवर रेंजर्स उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। इसी क्रम में हरियाणा से जंबूरी में शामिल होने आईं नीतू रानी, अंशिका एवं मंदीप ने इस आयोजन को एक बेहतरीन और यादगार अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी के माध्यम से देशभर की विविध संस्कृति, कला और परंपराओं को एक ही मंच पर देखने व समझने का अवसर मिला है। यहां विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों से मिलने, संवाद करने और एक-दूसरे की संस्कृति को जानने का अनुभव काफी महत्वपूर्ण हैं। प्रतिभागियों ने बताया कि जंबूरी में कल्चरल एक्टिविटी, एडवेंचर गेम्स एवं विविध रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं, जिनमें भाग लेना उनके लिए नया और रोमांचक अनुभव रहा।सभी गतिविधियां अनुशासन और समन्वय के साथ संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जंबूरी स्थल पर सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो रही है। भोजन, आवास, कैंपिंग एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं बहुत अच्छी हैं। नीतू रानी एवं अंशिका ने बताया कि वे अपनी टीम के साथ हरियाणा की संस्कृति एवं लोककला को प्रस्तुत कर रही हैं, वहीं अन्य राज्यों की ऐसी प्रस्तुतियां भी देखने को मिल रही हैं, जो सुखद अनुभव हैं। उन्होंने कहा कि दुधली में आयोजित यह जंबूरी न केवल सीखने का अवसर प्रदान कर रही है, बल्कि आपसी भाईचारे, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता की भावना को भी मजबूत कर रही है।
- -मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन, लोगों ने चखे देशभर के व्यंजनबालोद । राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी के तीसरे दिन दुधली में देशभर की संस्कृति, परंपरा और पारंपरिक व्यंजनों का अद्भुत संगम देखने को मिला। जंबूरी परिसर में विभिन्न राज्यों के खान-पान की खुशबू ने सभी को आकर्षित किया और प्रतिभागियों व दर्शकों को जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक के जायकों से रूबरू कराया। प्रतिभागियों ने बताया कि जंबूरी उनके राज्य की संस्कृति एवं पारंपरिक खान-पान को पहचान दिलाने का प्रभावी मंच बना है। साथ ही यह आयोजन एक-दूसरे की सांस्कृतिक विविधता को समझने और आत्मसात करने का भी बेहतर माध्यम सिद्ध हो रहा है। इस दौरान उत्तराखंड की लाल चावल की खीर, भटकी चूड़कानी एवं बाल मिठास, उत्तर प्रदेश की बाटी-चोखा, तमिलनाडु की स्वीट पोंगल, कर्नाटक की चुरमुरे, गन पाउडर एवं हुलीगुथी, मध्यप्रदेश की मालिदा, हरियाणा की पारंपरिक सब्जी, जम्मू-कश्मीर की कश्मीरी कहवा एवं कांगड़ी, पश्चिम बंगाल की नारियल-कद्दू व खजूर-गुड़, ओडिशा की चना साग, तथा केरल की विभिन्न चावल आधारित पारंपरिक व्यंजन लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। इन व्यंजनों के स्वाद ने दर्शकों को अपनी ओर खींच लिया और हर स्टॉल पर उत्साह देखने को मिला।पारंपरिक लोकवेश और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बनीं आकर्षण का केंद्रबालोद के दुधली में आयोजित राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी में पारंपरिक लोकवेश एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देखते ही बन रही थीं। उत्तराखंड, ओडिशा, साउथ ईस्ट रेलवे, बिहार, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी पारंपरिक वेशभूषा में लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया। इस अवसर पर साउथ ईस्ट रेलवे द्वारा प्रस्तुत नाल्लामला फॉरेस्ट ट्राइबल डांस, उत्तराखंड का पारंपरिक पहाड़ी नृत्य, राजस्थान की रंग-बिरंगी वेशभूषा में लोकनृत्य, तथा हिमाचल प्रदेश की देवता झलक के साथ सामूहिक नृत्य ने जंबूरी मंच को जीवंत कर दिया। इन मनमोहक प्रस्तुतियों से पूरा जंबूरी परिसर सांस्कृतिक रंगों से सराबोर नजर आया। प्रतिभागियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी अत्यंत बेहतर, यादगार अनुभव प्रदान कर रही है।
- -12 जनवरी को किया जाएगा इस भव्य एवं विशाल कार्यक्रम का समापन, 13 जनवरी को किया जाएगा बिदाई समारोह का आयोजन-युवा, संवाद एवं कैरियर कांउसलिंग कार्यक्रम में नव युवकों से मुखातिब होंगे वित्त मंत्री ओपी चैधरी और डाॅ. केके खण्डेलवालबालोद। जिला मुख्यालय बालोद के समीपस्थ ग्राम दुधली में 09 से 13 जनवरी तक आयोजित प्रथम नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी का समापन समारोह सोमवार 12 जनवरी को आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मुख्य आतिथ्य में इस भव्य एवं विशाल नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी का रंगारंग समापन किया जाएगा। समापन समारोह की अध्यक्षता पूर्व राज्य सभा सांसद एवं भारत स्काउट गाडड के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ. अनिल जैन करेंगे। कार्यक्रम में अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में प्रदेश के स्कूली शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, कांकेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री भोजराज नाग भारत स्काउट गाइड के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त डाॅ. केके खण्डेलवाल, संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती संगीता सिन्हा, डौण्डीलोहारा विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती अनिला भेड़िया, गुण्डदेही विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्री कंुवर सिंह निषाद के अलावा कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर, भारत स्काउट गाइड के राज्य मुख्य आयुक्त श्री इन्द्रजीत सिंह खालसा, राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य श्री यशवंत जैन, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्री चेमन देशमुख, नगर पालिका परिषद बालोद की अध्यक्ष श्रीमती प्रतिभा चैधरी, नगर पालिका परिषद दल्लीराजहरा के अध्यक्ष श्री तोरण लाल साहू, भारत स्काउट गाइड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डाॅ. केके मिश्रा, सेकेटरी जनरल प्रेसिडेंट इन काउंसिल श्री पीआर सिंघानिया, कार्यकारी निदेशक श्री अमर वी छेत्री, कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक श्री योगेश कुमार पटेल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी एवं वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ. प्रदीप जैन उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम के चतुर्थ दिवस पर सोमवार 12 जनवरी को सुबह 09 बजे युवा संवाद एवं कैरियर काउंसलिंग कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं वित्त मंत्री श्री ओपी चैधरी तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भारत स्काउट गाइड के राष्ट्रीय आयुक्त डाॅ. केके खण्डेलवाल जंबूरी में उपस्थित रोवर रेंजरों से मुखातिब होकर उनके कैरियर निर्माण के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। चतुर्थ दिवस 12 जनवरी को सांध्यकालीन बेला पर शाम 08 बजे महाशिविर ज्वाल का भी आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर राज्य मुख्य आयुक्त श्री इंदरजीत सिंह खालसा, भारत स्काउट गाइड के जिला मुख्य आयुक्त श्री राकेश यादव एवं कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगी। यह प्रेरणादायी कार्यक्रम युवाओं में अनुशासन, सेवा, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक दायित्वों की भावना को सुदृढ़ करते हुए जंबूरी को स्मरणीय बनाएगा।
- -गुण्डरदेही में विभिन्न विकास कार्यों की देंगे सौगात-प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर्स दुधली होंगे शामिलबालोद । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 12 जनवरी 2026 को बालोद जिले के प्रवास पर रहेंगे। दौरे के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री श्री साय 12 जनवरी को दोपहर 12.30 बजे पुलिस ग्राण्उड रायपुर से हेलीकाॅप्टर द्वारा प्रस्थान कर दोपहर 12.55 बजे जिले के गुण्डरदेही स्थित हेलीपेड पहुॅचेंगे। वहाॅ वे दोपहर 01 बजे से 02 बजे तक विभिन्न विकास कार्यों के भूमिपूजन एवं लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होंगे। दोपहर 02.05 बजे गुण्डरदेही से प्रस्थान कर दोपहर 02.20 बजे दुधली स्थित हेलीपेड पहुॅचेंगे। दोपहर 02.20 से 02.55 बजे तक आरक्षित। दोपहर 03 बजे से 04 बजे तक प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जम्बूरी कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री श्री साय कार्यक्रम पश्चात शाम 04.05 बजे हेलीकाॅप्टर द्वारा रायपुर के लिए प्रस्थान करेंगे।
- -सांस्कृतिक विविधता का उत्सव, लोक- नृत्यों ने बंधा समा, दर्शक हुए मंत्रमुग्धबालोद। बालोद जिले के ग्राम दुधली के प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर्स जंबूरी में हर प्रांत की लोक-संस्कृति, वेशभूषा, संगीत और नृत्य ने ऐसा समां बांधा कि “विविधता में एकता” का संदेश हर पल जीवंत दिखाई दिया। जिसमें खास कर राजस्थान की प्रस्तुतियों में पारंपरिक परिधान, लोकधुनें और गीतों की उमंग-ऊर्जा से भरे कार्यक्रमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकनृत्यों और गीतों के माध्यम से मरुधरा की सांस्कृतिक शान झलकी। वहीं पंजाब की प्रस्तुति में जोश, फुर्ती और आत्मविश्वास साफ नजर आया। “सारी दुनिया तों अन्नदाता होन्दा” जैसे संदेशों के साथ भांगड़ादृगिद्दा ने कृषि संस्कृति और श्रम की महत्ता को रेखांकित किया। इसी प्रकार दिल्ली को “शहरों का शहर नहीं, बल्कि देश की धड़कन” के रूप में प्रस्तुत किया गया। फिल्मी गीतों, आधुनिक रैंप प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक कोलाज ने राजधानी की बहुरंगी पहचान को उभारा।तेलंगाना राज्य की प्रस्तुतियों में लोकनृत्य, वाद्य और समकालीन रंगमंच का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिसने दक्षिण भारतीय सांस्कृतिक धारा को प्रभावी ढंग से सामने रखा। छत्तीसगढ़ लोकनृत्यों की मिठास भरी प्रस्तुति में सुआ, मदार और ददरिया जैसे लोकनृत्यों का समावेश रहा। सादगी, सामूहिकता और लोकजीवन की खुशबू से भरे इन नृत्यों ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। मध्य प्रदेश की लोककलाओं ने अपनी विशिष्टता से मंच को समृद्ध किया, जहाँ पारंपरिक नृत्य-गीतों के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक गहराई दिखाई दी। उड़ीसा की प्रस्तुति में पारंपरिक ओडिसी नृत्य की मोहक मुद्राओं और भाव-भंगिमाओं ने शास्त्रीय कला की गरिमा और सौंदर्य को उजागर किया। हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक नृत्य ने पहाड़ों की सरलता, उत्सवधर्मिता और सामूहिक आनंद का संदेश दिया। इसी प्रकार उत्तराखंड की प्रस्तुतियों में पहाड़ी लोकसंस्कृति, गीत-संगीत और परंपराओं की सजीव झलक देखने को मिली।उत्तर प्रदेश की प्रस्तुति में फागुन माह की होली का उल्लास छाया रहा। “फागुन माह में होली खेले सांवरा, राधा संग” जैसे होली गीतों ने पूरे कार्यक्रम को रंगों से सराबोर कर दिया। वहीं साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। इसी प्रकार अन्य राज्यों ने भी राज्यों से जुड़े सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत कर लोगो का मन मोह लिया। “भारत मां आजाद रहे, यही हमारा नारा हैय सभी धर्मों के लोग कहें, भारत देश हमारा हैं के नारे के एकता, समरसता और राष्ट्रप्रेम को और सुदृढ़ परिलक्षित किया। लोकनृत्य, गीत, परंपराएं और समकालीन प्रस्तुतियाँ मिलकर इस जंबूरी को सांस्कृतिक महाकुंभ बना दी। जहाँ हर प्रतिभागी ने भारत की बहुरंगी आत्मा को करीब से महसूस किया।एथनिक फैशन शो में विभिन्न राज्यों के पारंपरिक परिधान को दिखाया आकर्षकलोक नृत्य के पश्चात एथनिक फैशन शो में विभिन्न राज्यों से आए रोवर रेंजर्स ने आकर्षक ढंग से अपने पारम्परिक पहनावे का प्रदर्शन रैंप वॉक के माध्यम से किया। जिसमें दर्शकों ने इस अद्भुत रैम्प वॉक को खूब सराहा।
- - सकल जैन समाज की ओर से दो भाषाओं में पुस्तक प्रकाशन की पहल को पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सराहारायपुर। जैन धर्म की महान विभूतियों पर आधारित अनुसंधान जनित प्रस्तावित पुस्तक 'भारत के दिव्य चरित्र : जैनत्व से प्रेरणा' के संदर्भ में सकल जैन समाज के समन्वयक मंडल ने सुप्रसिद्ध अधिवक्ता व पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी से मुलाकात कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया।भेंट के दौरान प्रतिनिधि मंडल ने पुस्तक की अवधारणा, उद्देश्य, सामाजिक व राष्ट्रीय उपयोगिता से उन्हें अवगत कराया। यह कृति सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य से लेकर डॉ. विक्रम साराभाई तक जैन परंपरा से प्रेरित 13 महान विभूतियों के जीवन, त्याग व राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को शोधपरक रूप में प्रस्तुत करेगी।संयोजक प्रवीण सिंगी ने इस अवसर पर पुस्तक की विस्तृत विषय-सूची का संपूर्ण विवरण प्रस्तुत करते हुए प्रत्येक अध्याय की वैचारिक रूपरेखा से उन्हें अवगत कराया।मीनाक्षी लेखी ने इस अवसर पर कहा कि प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव द्वारा प्रतिपादित 'असि-मसि-कृषि' आधारित इकोलॉजिकल जीवन प्रणाली व जैन दर्शन के सिद्धांत आज के ग्लोबल वार्मिंग और युद्ध के लिए आतुर युग में सर्वाधिक प्रासंगिक हो चुके हैं। उनके अनुसार यह अनुसंधान जनित पुस्तक समय की आवश्यकता है। यह कृति वैश्विक स्तर पर विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिये प्रेरक संसाधन सिद्ध होगी। उन्होंने पुस्तक को दो भाषाओं (हिंदी और अंग्रेज़ी) में प्रकाशित करने की योजना की सराहना करते हुए इसके व्यापक सामाजिक प्रचार-प्रसार के लिए भी उपयोगी सुझाव दिये।प्रतिनिधि मंडल ने उनके मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि यह पुस्तक जैन दर्शन को आधुनिक भारत और विश्व की चुनौतियों से जोड़ने वाली एक सशक्त वैचारिक सेतु बनेगी। प्रतिनिधि मंडल में विकास दुग्गड़ (सीए), चंद्रकांत लुंकड़, प्रवीण कुमार जैन, उत्तम संखलेचा, हर्ष बैद व गगन बरड़िया शामिल थे।
- -डिजिटल टोकन, त्वरित प्रक्रिया और बेहतर सुविधाओं से आसान व धान विक्रयरायपुर ।जिले के धान उपार्जन केन्द्रों में पारदर्शी एवं किसान-हितैषी व्यवस्था से धान विक्रय की प्रक्रिया सुगम, सरल और आसान हो गई है। डिजिटल सुविधाओं, सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं और त्वरित सेवाओं के कारण किसानों को राहत मिल रही है। इसका प्रत्यक्ष अनुभव बतौली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कुनिया कला के निवासी श्री अजय राजवाड़े ने साझा किया।श्री अजय राजवाड़े ने बताया कि उनके पिता श्री शिवधारी राजवाड़े, लघु वर्ग के किसान हैं, जिनके पास कुल 95 क्विंटल धान का रकबा है। उन्होंने बताया कि किसान तुहंर टोकन ऐप के माध्यम से घर बैठे उन्होंने 92.50 क्विंटल धान का टोकन आसानी से काट लिया था। डिजिटल प्रणाली के चलते टोकन कटाने में किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई और पूरी प्रक्रिया सरल एवं पारदर्शी रही।उन्होंने बताया कि नवानगर धान उपार्जन केन्द्र पहुंचते ही किसानों को तत्काल गेट पास, नमी परीक्षण तथा बारदाना उपलब्ध करा दिया गया, जिससे धान विक्रय में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आई। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। समिति केन्द्र में पेयजल एवं छाया में बैठने की व्यवस्था उपलब्ध है, वहीं समिति के कर्मचारियों द्वारा किसानों को हर स्तर पर सहयोग प्रदान किया जा रहा है।श्री अजय राजवाड़े ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन में प्रदेश में धान का सर्वाधिक मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल दिया जा रहा है तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। इससे किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है और जिससे आर्थिक स्थिति में सुधार हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले वर्ष धान विक्रय से प्राप्त आय से उन्होंने गेहूं, तिलहन, सब्जी सहित अन्य फसलों की खेती की, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी हुई। उन्होंने कहा कि वर्तमान धान खरीदी व्यवस्था अत्यंत सराहनीय है और इससे किसान बहुत संतुष्ट एवं खुश हैं।श्री राजवाड़े ने धान उपार्जन व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि धान का सर्वाधिक मूल्य मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और किसानों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है।
- -मुख्यमंत्री के नेतृत्व में धान खरीदी की प्रक्रिया सुव्यवस्थित : किसान मोहम्मद अजीज ने पारदर्शी व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री का जताया आभाररायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में पारदर्शिता के साथ धान खरीदी सुव्यवस्थित तरीके से चल रही है। इसी कड़ी में जशपुर जिले में भी धान खरीदी पारदर्शी एवं सुचारू रूप से संचालित की जा रही है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन हेतु जिले के विभिन्न खरीदी केंद्रों में निरंतर धान की आवक हो रही है।जिले के धान उपार्जन केंद्र महुआ टोली, कुनकुरी में अपनी उपज विक्रय करने पहुंचे ग्राम लोधमा के कृषक श्री मोहम्मद अजीज ने बताया कि केंद्र में धान विक्रय की प्रक्रिया अत्यंत सरल एवं सुविधाजनक रही। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन टोकन प्रणाली के माध्यम से उन्हें बिना किसी परेशानी के समय पर टोकन प्राप्त हुआ। पर्ची कटने से लेकर तौल प्रक्रिया तक सभी कार्य सुचारू एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुए। केंद्र पर स्वच्छ एवं पर्याप्त बारदाना उपलब्ध कराया गया तथा वजन कार्य पूर्णतः पारदर्शी तरीके से किया गया।कृषक श्री अजीज ने बताया कि ऑनलाइन टोकन व्यवस्था से किसानों को अब काफी सहूलियत मिल रही है, जिससे समय की बचत हो रही है और अनावश्यक प्रतीक्षा से भी राहत मिली है। उन्होंने शासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी से किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि उन्हें सम्मान और सुरक्षा भी मिला है।
- -रीवा उत्खनन के परिणाम उत्साहजनक : संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल-रीवांगढ़ पुरातात्विक उत्खनन स्थल में मिले उत्तर वैदिक काल से पूर्व मानव सभ्यता के अवशेष-छत्तीसगढ़ में 800 ईसा पूर्व से भी पहले विकसित हो चुकी थी मानव सभ्यता-छत्तीसगढ़ में उत्तर वैदिक काल में ही लौह युगीन संस्कृति हो चुकी थी विकसित-उत्खनन में मौर्य, शुंग, सातवाहन, शक-क्षत्रप, कुषाण और स्थानीय शासकों के सिक्के मिलेरायपुर ।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आज रायपुर से लगभग 25 किलोमीटर पूर्व स्थित ग्राम रीवां (रीवांगढ़) में चल रहे पुरातात्विक उत्खनन स्थल का दौरा किया। यहां आयोजित “छत्तीसगढ़ के प्राचीन सिक्के एवं मुद्रा प्रणाली” विषयक द्वि-दिवसीय संगोष्ठी के समापन समारोह के मुख्य अतिथि संस्कृति मंत्री छत्तीसगढ़ शासन श्री राजेश अग्रवाल ने देशभर से पधारे विद्वानों, विषय विशेषज्ञों, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा की रीवां उत्खनन के परिणाम अत्यंत उत्साहजनक हैं। उन्होंने कहा कि यहां आहत सिक्कों से लेकर कल्चुरी कालीन सिक्कों तक की एक अविच्छिन्न श्रृंखला प्राप्त हुई है, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक निरंतरता को प्रमाणित करती है। श्री अग्रवाल ने बताया कि हालिया उत्खनन में प्राप्त लौह प्रगलन केंद्र तथा रेडियोकार्बन तिथि निर्धारण के आधार पर रीवां की प्राचीनता 9 वीं सदी ईसा पूर्व (उत्तर वैदिक काल) तक निर्धारित की गई है, जो छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास और तकनीकी परंपरा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि है। छत्तीसगढ़ की धरती एक अत्यंत प्राचीन, समृद्ध और गौरवशाली सभ्यता की साक्षी रही है। हमारी संस्कृति और इतिहास की जड़ें अत्यंत गहरी हैं, जिन्हें वैज्ञानिक दृष्टि से उजागर करना हम सभी का दायित्व है। यह खोज छत्तीसगढ़ की प्राचीन तकनीकी दक्षता, आर्थिक व्यवस्था और सांस्कृतिक निरंतरता को सशक्त रूप से प्रमाणित करती है।छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 25 किलोमीटर पूर्व स्थित ग्राम रीवां (रीवांगढ़) में चल रहे पुरातात्विक उत्खनन ने प्रदेश के प्राचीन इतिहास को लेकर नई और महत्वपूर्ण जानकारी सामने रखी है। संस्कृति विभाग के पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय द्वारा कराए जा रहे इस उत्खनन में वैज्ञानिक ए.एम.एस. रेडियोकार्बन (कार्बन-14) डेटिंग के माध्यम से यह प्रमाणित हुआ है कि इस क्षेत्र में मानव सभ्यता उत्तर वैदिक काल यानी 800 ईसा पूर्व से भी पहले विकसित हो चुकी थीरीवां का यह प्राचीन स्थल कोलहान नाला और बंधवा तालाब के बीच स्थित है। स्थानीय जनमानस में यहां लोरिक-चंदा की लोककथा पीढ़ियों से प्रचलित रही है। क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक बनावट के कारण इसे मृत्तिकागढ़ या मडफोर्ट भी कहा जाता है। चंडी मंदिर के समीप लगभग 75 एकड़ में फैले मृत्तिकागढ़, उसके चारों ओर खाई और परकोटे के अवशेष आज भी इसकी प्राचीनता के साक्ष्य देते हैंइस क्षेत्र से पहले भी ऐतिहासिक सामग्री मिलने के संकेत मिले थे। वर्ष 1975 में 35 स्वर्ण सिक्के प्राप्त हुए थे, जबकि नेशनल हाईवे के किनारे स्थित एक बड़े टीले को इतिहासकारों ने स्तूप होने की संभावना से जोड़ा था। इन्हीं तथ्यों के आधार पर वर्ष 2019 में व्यवस्थित उत्खनन शुरू किया गया। वर्तमान में यह कार्य संचालनालय के उप संचालक डॉ. पी.सी. पारख के निर्देशन और डॉ. वृषोत्तम साहू के सह-निर्देशन में किया जा रहा है। दो प्रमुख टीलों पर लगभग 7 मीटर गहराई तक खुदाई में विभिन्न कालों के सांस्कृतिक स्तर सामने आए हैं।काल निर्धारण की जटिलता को सुलझाने के लिए उत्खननकर्ताओं ने अलग-अलग सांस्कृतिक स्तरों से चारकोल के तीन सैंपल लेकर अमेरिका की फ्लोरिडा स्थित विश्व प्रसिद्ध और आएसओ प्रमाणित प्रयोगशाला बीटा एनालिटिक्स भेजे। रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।पहला सैंपल: 650 - 543 ईसा पूर्व, बुद्ध के समकालीन महाजनपद कालदूसरा सैंपल: 806 - 748 ईसा पूर्व, बुद्ध के जन्म से लगभग 200 वर्ष पूर्व (उत्तर वैदिक/लौह युग)तीसरा सैंपल: 541 - 392 ईसा पूर्व, महाजनपद से मौर्य काल तकइन निष्कर्षों से यह स्पष्ट हुआ कि छत्तीसगढ़ में उत्तर वैदिक काल में ही लौह युगीन संस्कृति विकसित हो चुकी थी और यहां मानव बसावट की निरंतरता सदियों तक बनी रहीउत्खनन में मौर्य, शुंग, सातवाहन, शक-क्षत्रप, कुषाण और स्थानीय शासकों के सिक्के मिले हैं, जो प्राचीन व्यापारिक गतिविधियों की पुष्टि करते हैं। हाल ही में यहां से 2606 ताम्र सिक्कों की एक विशाल मुद्रा निधि प्राप्त हुई है, जिससे रीवां भारत के उन चुनिंदा स्थलों में शामिल हो गया है, जहां सर्वाधिक सिक्का निधि मिली है। ये सिक्के पहली-दूसरी शताब्दी ईस्वी के बीच प्रचलित गज-देवी प्रकार के स्थानीय ताम्र सिक्के हैंइसके साथ ही, उत्खनन में लोहे के उपकरण बनाने की कार्यशाला के भी साक्ष्य मिले हैं, जो छत्तीसगढ़ के पुरातात्विक इतिहास में पहली बार दर्ज किए गए हैं। पुरातत्वविदों के अनुसार, 800 से 400 ईसा पूर्व के बीच रीवां में सुदृढ़ मानव बस्ती थी, जिसकी निरंतरता लगभग 700 ईस्वी तक रही। इस आधार पर रीवां की तुलना देश के प्राचीन नगरों जैसे कौशांबी और अहिछत्र से की जा सकती है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह उत्खनन न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि मध्य भारत के लौह युगीन सांस्कृतिक इतिहास को समझने में एक मील का पत्थर साबित होगा। रेडियोकार्बन परीक्षण से तैयार होने वाली यह कालक्रमिक रूपरेखा भविष्य में होने वाले अन्य उत्खननों के लिए भी मार्गदर्शक बनेगी। रीवांगढ़ क्षेत्र में और विस्तृत खुदाई कराई जाएगी। छत्तीसगढ़ पुरातत्व विभाग द्वारा रींवागढ़ के अलावा अब तक गढ़धनौरा, पचराही, ताला, भोंगापाल, सिरपुर महेशपुर, पचराही, तरीघाट, डमरू, मदकूद्धीप, राजिम, देवरी, जमराव आदि स्थलो पर खुदाई कराई जा चुकी है।इस अवसर पर विषय विशेषज्ञों में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ इतिहासकार आचार्य रमेंद्र नाथ मिश्र, श्री जी. एल. रायकवार, मुद्राशास्त्री डॉ. जी. एस. ख्वाजा (नागपुर), प्रो. सुष्मिता बसु मजूमदार (कोलकाता), प्रो. आलोक श्रोतरीय (अमरकंटक), डॉ. देवेन्द्र कुमार सिंह (अमरकंटक), डॉ. विशि उपाध्याय (पटना) तथा डॉ. राजीव मिंज की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में पुरातत्त्व संचालनालय के अधिकारी एवं कर्मचारी, न्यूमिस्मेटिक एंड फिलेटली सोसाइटी ऑफ छत्तीसगढ़ के पदाधिकारी श्री कमल बैद, रीवा के सरपंच श्री घसिया राम साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत डॉ. पी. सी. पारख, उप संचालक द्वारा किया गया तथा संचालन प्रभात कुमार सिंह, पुरातत्ववेत्ता द्वारा किया गया। इस अवसर पर संगोष्ठी की स्मारिका पुस्तिका का भी विमोचन किया गया। उल्लेखनीय है कि संगोष्ठी के अंतर्गत अध्येताओं ने रीवा उत्खनन स्थल एवं वहां प्राप्त पुरावशेषों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं। शोध परिभ्रमण कार्य में डॉ. वृषोत्तम साहू, श्री प्रवीण तिर्की एवं अमर भरतद्वाज ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। संगोष्ठी का समापन शैक्षणिक विमर्श, शोध निष्कर्षों और भावी अनुसंधान की संभावनाओं पर सार्थक संवाद के साथ हुआ।
- -ग्राम पंचायत चकेरी में 1.99 लाख रुपये की लागत से हुआ डबरी निर्माणरायपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के साधनों को सुदृढ़ करने तथा किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी जी राम जी) के अंतर्गत सरगुजा जिले में विभिन्न हितग्राही मूलक कार्य कराए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जनपद पंचायत उदयपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत चकेरी में हितग्राही श्री ननकू के खेत में आजीविका डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया है।इस कार्य के लिए शासन द्वारा 1.99 लाख रुपये की स्वीकृत राशि प्रदान की गई है, जिसमें से अब तक 1.82568 लाख रुपये की राशि व्यय की जा चुकी है। आजीविका डबरी निर्माण कार्य का प्रारंभ दिनांक 17 दिसंबर 2025 प्रारंभ हुआ था जिसका कार्य प्रगति पर है और निर्धारित मानकों के अनुरूप कराया जा रहा है।आजीविका डबरी के निर्माण से हितग्राही को वर्षा जल संचयन की सुविधा मिलेगी, जिससे सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहेगा। इससे फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी तथा मछली पालन, सब्जी उत्पादन एवं अन्य आयवर्धक गतिविधियों के अवसर भी सृजित होंगे। साथ ही, वीबी जी राम जी के तहत स्थानीय श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध होने से ग्रामीण परिवारों की आय में भी वृद्धि हो रही है।हितग्राही श्री ननकू ने बताया कि डबरी निर्माण से खेत में पानी की समस्या का स्थायी समाधान होगा और इससे कृषि के साथ-साथ अन्य आजीविका गतिविधियां भी संभव हो सकेंगी। उन्होंने शासन की इस योजना को ग्रामीणों के लिए उपयोगी बताते हुए इसके लिए आभार व्यक्त किया।उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन एवं जनपद पंचायत उदयपुर द्वारा वीबी जी राम जी के माध्यम से जल संरक्षण एवं आजीविका संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और गांवों में सतत विकास को बढ़ावा मिल रहा है।
- -प्राचीन संस्कृति और परंपराओं के संवर्धन में जनजातीय समाज की ऐतिहासिक भूमिका-‘जनजातीय गौरव पथ’ के निर्माण और महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित करने की घोषणा-गौरा पूजा एवं बैगा पुजेरी सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री साय की सहभागितारायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज कोरबा जिले के महर्षि वाल्मीकि आश्रम, आईटीआई रामपुर में आयोजित गौरा पूजा महोत्सव एवं बैगा पुजेरी सम्मेलन में शामिल हुए। उन्होंने गौरा-गौरी पूजन तथा बैगा पुजारी सम्मेलन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आदिवासी समाज का अपना गौरवशाली इतिहास, विशिष्ट संस्कृति और समृद्ध परंपराएं हैं। बैगा और पुजेरी समाज आज भी इन परंपराओं के संरक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर आईटीआई चौक से बालको रोड का नाम ‘जनजातीय गौरव पथ’ रखने तथा इस मार्ग के प्रारंभिक बिंदु पर जनजातीय महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित करने की घोषणा की।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण इसलिए किया था ताकि यहां की सर्वाधिक जनसंख्या वाले आदिवासी समाज को विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ाया जा सके। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय समाज का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए 15 नवंबर शहीद बिरसा मुंडा जयंती को जनजातीय गौरव दिवस घोषित करते हुए धरती आबा उत्कर्ष योजना प्रारंभ की। इसके साथ ही पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों को विकास के दायरे में लाने का कार्य किया जा रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आदिवासी समाज की बेटी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आसीन हैं और छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री भी एक साधारण किसान परिवार से आने वाला आदिवासी समाज का बेटा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के लिए 80 हजार करोड़ रुपये तथा पीएम जनमन योजना के लिए 24 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे छत्तीसगढ़ के 6,691 गांव लाभान्वित हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि पहाड़ी कोरवा, बिरहोर सहित अन्य पीवीटीजी समुदायों के उत्थान के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। आदिवासी अंचलों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके लिए राज्य में प्राधिकरण का गठन कर आदिवासी एवं पिछड़े क्षेत्रों में विकास कार्यों को और अधिक गति दी जा रही है।मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने स्वयं भी वनवासी कल्याण आश्रम में कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज आदिकाल से भगवान गौरागौरी के रूप में शिव-पार्वती के उपासक रहे हैं।उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के महापुरुषों के योगदान को स्मरणीय बनाने, उनकी स्मृतियों को सहेजने और नई पीढ़ी को उनके बारे में जानकारी देने के उद्देश्य से नवा रायपुर में विशाल डिजिटल जनजातीय संग्रहालय स्थापित किया गया है, जिसमें महापुरुषों की जीवन-गाथाओं का सचित्र वर्णन किया गया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को प्रोत्साहित करने हेतु बैगा, गुनिया और सिरहा को प्रतिवर्ष 5,000 रुपये की सम्मान निधि प्रदान की जा रही है। साथ ही सरना स्थलों का संरक्षण किया जाएगा, जो न केवल सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा करेगा बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।सम्मेलन को संबोधित करते हुए उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी विकसित भारत का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं, उसी प्रकार मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है।उन्होंने कहा कि जिले में अनेक प्राचीन देवी-देवताओं के स्थल हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री श्री साय के मार्गदर्शन में विकसित कर पर्यटन के रूप में नई पहचान दी जा रही है।कार्यक्रम में कटघोरा विधायक श्री प्रेमचंद पटेल, वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी श्री पनतराम भगत एवं श्री बीरबल सिंह ने भी संबोधन दिया। इस अवसर पर महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत, पूर्व मंत्री श्री ननकी राम कंवर, वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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