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- -मुखबिर की सूचना पर रात्रि गश्त के दौरान सागौन लट्ठों से लदा पिकअप वाहन जब्त-वन कर्मियों की टीम ने दी दबिश, वाहन एवं वनोपज सुरक्षित अभिरक्षा मेंरायपुर । राज्य सरकार प्रदेश के वन परिक्षेत्रों में अवैध काष्ठ परिवहन पर सख्त कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में सूरजपुर जिले के रामानुजनगर वन परिक्षेत्र में अवैध वनोपज परिवहन पर अंकुश लगाते हुए वन अमले ने सागौन काष्ठ से लदे एक पिकअप वाहन को जब्त करने की उल्लेखनीय कार्रवाई की है। वन विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि परिक्षेत्र में अवैध कटाई एवं वनोपज परिवहन की रोकथाम हेतु रात्रिकालीन गश्त सतत जारी रहेगी तथा वन संपदा को क्षति पहुँचाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 02 अगस्त 2026 को रात्रि में अवैध रूप से वनोपज परिवहन किए जाने की सूचना मुखबिर से प्राप्त होने पर वन परिक्षेत्र अधिकारी रामानुजनगर श्रीमती पूजा यादव के निर्देशन में तत्काल वन कर्मियों की एक टीम गठित की गई और उसे परिक्षेत्र अंतर्गत सघन गश्त हेतु रवाना किया गया।रात्रिकालीन गश्त के दौरान 03 अगस्त 2026 को प्रातः लगभग 3ः00 बजे परिसर छिंदिया अंतर्गत वन अमले ने एक पिकअप वाहन को जंगल की ओर जाते हुए देखा, जिस पर तत्परता दिखाते हुए वनकर्मियों ने घेराबंदी कर मौके पर दबिश दी। मौका स्थल वाहन क्रमांक सीजी.-15 ए.सी. 1294 पर सागौन प्रजाति के 04 नग लट्ठे लोड किए जा चुके थे। वाहन में काष्ठ लोड कर रहे व्यक्ति वन कर्मियों को देखते ही मौके से फरार हो गए।वाहन चालक से की गई पूछताछ में उसके द्वारा किसी भी प्रकार का परिवहन अनुज्ञप्ति अथवा पास न होना बताया गया। तदुपरांत वाहन मय वनोपज को जब्त करते हुए भारतीय वन अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया। जब्तशुदा वाहन एवं वनोपज को वन परिक्षेत्र कैम्पस रामानुजनगर लाकर सुरक्षित अभिरक्षा में रखवाया गया है। उक्त कार्रवाई में वनरक्षक श्री राहुल साहू, वनरक्षक श्री सुनील कुमार एवं वन रक्षक श्री बिजेश्वर सिंह ठाकुर सम्मिलित रहे।
- -प्रवेश पत्र डाउनलोड करने की सूचना SMS के माध्यम से भेजी गईरायपुर। शीघ्रलेखन एवं मुद्रलेखन कम्प्यूटर कौशल परीक्षा परिषद, लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़, रायपुर द्वारा अंग्रेजी एवं हिन्दी कम्प्यूटर मुद्रलेखन कौशल परीक्षाओं का आयोजन निर्धारित तिथियों पर किया जाएगा। परिषद के अनुसार 08 अगस्त 2026 को अंग्रेजी कम्प्यूटर मुद्रलेखन (गति 8000 डिप्रेशन प्रति घंटा) की परीक्षा प्रदेश के 08 परीक्षा केन्द्रों पर, 09 अगस्त 2026 को हिन्दी कम्प्यूटर मुद्रलेखन (गति 8000 डिप्रेशन प्रति घंटा) की परीक्षा 09 परीक्षा केन्द्रों पर तथा 16 अगस्त 2026 को बिलासपुर एवं सरगुजा संभाग में एक-एक परीक्षा केन्द्र पर आयोजित की जाएगी। सभी परीक्षार्थियों के लिए परिषद द्वारा आबंटित परीक्षा केन्द्र, निर्धारित बैच एवं समय पर परीक्षा में उपस्थित होना अनिवार्य होगा। परीक्षा कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी परिषद की वेबसाइटhttps://ctsp.cg.nic.in पर उपलब्ध है। प्रवेश पत्र डाउनलोड करने संबंधी सूचना परीक्षार्थियों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से प्रेषित कर दी गई है। परीक्षार्थियों को परीक्षा केन्द्र में प्रवेश के समय पहचान के लिए आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड अथवा मतदाता परिचय पत्र में से कोई एक मूल पहचान पत्र साथ लाना अनिवार्य होगा। साथ ही प्रवेश पत्र में दिए गए सभी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है।
- -15 अक्टूबर तक जनता से मांगे गए सुझावरायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में 'समान नागरिक संहिता' (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर सभी नागरिकों को संविधान के एक समान दायरे में लाने के उद्देश्य से एक विशेष 5-सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति ने अब आम जनता, विभिन्न संगठनों और हितधारकों से सुझाव एवं अभिमत आमंत्रित किए हैं, ताकि यह तय किया जा सके कि राज्य में आने वाला नया कानून कैसा होना चाहिए।उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित यह समिति छत्तीसगढ़ में UCC की आवश्यकता, उसकी रूपरेखा तथा व्यक्तिगत सिविल मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनों का व्यापक अध्ययन और समीक्षा कर रही है। इस समिति में सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के श्री शत्रुघ्न सिंह और श्री एम. के. राऊत,वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्या श्रीमती ज्योति रानी सिंह सदस्य के रूप में शामिल हैं। यह समिति राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) के कार्यान्वयन से जुड़े सभी विधिक, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का गहन अध्ययन कर रही है। इसके प्रमुख दायित्वों में छत्तीसगढ़ की वर्तमान विधिक स्थिति का विश्लेषण करने के साथ-साथ विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और गोद लेने (दत्तक ग्रहण) जैसे संवेदनशील विषयों पर व्यावहारिक सुझाव तैयार करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, समिति अन्य राज्यों में लागू UCC व्यवस्थाओं का विस्तृत अध्ययन करेगी तथा आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों व अभिमतों को भी ड्राफ्ट में शामिल करेगी। इन समस्त अध्ययनों और सुझावों के आधार पर एक समग्र ड्राफ्ट तैयार कर राज्य सरकार को प्रस्तुत करना और आवश्यक विधायी व प्रशासनिक अनुशंसाएं देना समिति का मुख्य उद्देश्य है। UCC लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना था। इसके अलावा गोवा, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी इसे लागू किया जा चुका है। इस क्रम में छत्तीसगढ़ UCC को अपनाने वाला देश का 5वां राज्य बनने जा रहा है। समिति ने शासकीय व गैर-शासकीय संगठनों, सामाजिक समूहों, धार्मिक संस्थाओं, समुदायों और राजनीतिक दलों सहित सभी नागरिकों से 15 अक्टूबर 2026 तक अपने विचार और राय अनिवार्य रूप से जमा करने की अपील की है। नागरिक निम्नलिखित माध्यमों से अपने सुझाव भेज सकते हैं: ई-मेल: *[email protected]वेब पोर्टल:https://ucc.cgstate.gov.in/डाक पता: कार्यालय समान नागरिक संहिता समिति, न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन, कमरा नंबर-202, रायपुर, छत्तीसगढ़ - 492001
- -ट्राइफेड (TRIFED) और जिला प्रशासन की पहल: वोकल फॉर लोकल के तहत स्थानीय हस्तशिल्प और जैविक उत्पादों को मिलेगा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजाररायपुर। जनजातीय कारीगरों, हस्तशिल्पियों और वनोपज संग्राहकों की किस्मत बदलने और उनकी पारंपरिक कला को वैश्विक मंच देने के उद्देश्य से धमतरी जिले में आगामी 21 अगस्त 2026 को विशाल ‘जनजातीय कारीगर सूचीबद्ध (एम्पैनलमेंट) मेला’ आयोजित होने जा रहा है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन संचालित ट्राइफेड (TRIFED) और जिला प्रशासन धमतरी के संयुक्त तत्वावधान में यह विशेष आयोजन किया जा रहा है। इस मेले का मुख्य उद्देश्य जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में छुपी जनजातीय प्रतिभाओं, स्वयं सहायता समूहों (SHGs), वन धन विकास केंद्रों (VDVKs) तथा किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सीधे ट्राइफेड नेटवर्क से जोड़कर उनके उत्पादों के लिए बड़े बाजार उपलब्ध कराना है।ट्राइफेड से जुड़ने पर पंजीकृत कारीगरों के उत्पाद देशभर में फैले ट्राइफेड के विशाल 'Tribes India' आउटलेट्स पर बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। इसी तरह कारीगरों को देश के बड़े व्यापार मेलों और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में अपने हुनर का प्रदर्शन करने का सीधा मौका मिलेगा। ट्राइफेड के विशेषज्ञ कारीगरों को उत्पादों की गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग का विशेष प्रशिक्षण देंगे, जिससे उन्हें अपने सामान का सही और बेहतर मूल्य मिल सके। मेले में विभिन्न प्रकार के पारंपरिक एवं प्राकृतिक उत्पादों के कारीगर हिस्सा ले सकते हैं। जिसमें हाथ से बने पारंपरिक परिधान व कलाकृतियां,ढोकरा आर्ट, धातु शिल्प, बांस व बेंत के उत्पाद, प्राकृतिक जड़ी-बूटियां, जैविक खाद्य पदार्थ एवं शहद, पारंपरिक जनजातीय पेंटिंग्स एवं मण्मूर्ति कला,पारंपरिक जनजातीय गहने एवं हस्तनिर्मित सजावटी सामान शामिल है।जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जिले के सभी जनजातीय उद्यमियों और कारीगरों से इस मेले में बढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को धरातल पर उतारने का एक सशक्त माध्यम है। हमारा लक्ष्य केवल स्थानीय कला को सहेजना ही नहीं, बल्कि जनजातीय समुदायों की आय में सतत वृद्धि कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
- -20 करोड़ से दिव्य बनेगा रुद्रेश्वर धामरायपुर । सावन के पहले सोमवार की संध्या धमतरी की चित्रोत्पला महानदी का तट केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि भक्ति, संस्कृति और अध्यात्म का सजीव संगम बन गया। काशी की तर्ज पर जब 108 दीपों की स्वर्णिम आभा के बीच पहली बार भव्य ‘महानदी गंगा आरती’ का शुभारंभ हुआ, तो शंखनाद, वैदिक मंत्रों और घंटियों की गूंज से पूरा रुद्री घाट अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। धमतरी युवा ब्रिगेड और श्री रुद्रेश्वर महादेव परिवार के इस ऐतिहासिक प्रयास ने नगर की सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दी है। अब जनआस्था का यह पावन पर्व सावन के प्रत्येक सोमवार को महानदी के तट पर सजने जा रहा है।भक्ति के इस आध्यात्मिक वातावरण के बीच धमतरी के लिए एक और बड़ी खुशखबरी की शुरुआत हुई है। प्रदेश सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग ने प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर परिसर के कायाकल्प के लिए 20 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने का संकल्प लिया है। इस परियोजना के माध्यम से रुद्रेश्वर धाम को एक ऐसे आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जो छत्तीसगढ़ की धरोहर को राष्ट्रीय पहचान दिलाएगा।यह मास्टर प्लान प्राचीन स्थापत्य कला और आधुनिक जनसुविधाओं का बेहतरीन संतुलन प्रस्तुत करता है। मंदिर की पारंपरिक भारतीय स्थापत्य शैली को संरक्षित रखते हुए भव्य मुख्य प्रवेश द्वार, आकर्षक शिखर, तोरण, दीप स्तंभ और विशाल नंदी प्रतिमा का निर्माण किया जाएगा।श्रद्धालुओं के लिए चौड़े पैदल मार्ग, विश्राम गृह, प्रसाद व स्मृति केंद्र, फूड कोर्ट, सुरक्षित घाट और डिजिटल सूचना प्रणाली की व्यवस्था होगी। परिसर में स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ एआई (AI) आधारित हेल्थ कियोस्क भी स्थापित किए जाएंगे। इसी तरह परिसर में उद्यान, सांस्कृतिक मंडप, रिवर फ्रंट कॉटेज, ओपन एयर स्टेज और भविष्य की 'मैरीन ड्राइव' की तर्ज पर एक सुरम्य तट विकसित किया जाएगा।पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सौर ऊर्जा पार्किंग, ईवी (EV) चार्जिंग स्टेशन, वर्षा जल संचयन और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन लागू किया जाएगा।विधायक श्री ओंकार साहू, महापौर श्री जगदीश रामू रोहरा, कलेक्टर और पूर्व विधायक श्रीमती रंजना साहू सहित कई गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति में शुरू हुआ यह आयोजन धमतरी के सामाजिक और आर्थिक विकास के नए युग का प्रतीक है। महानदी गंगा आरती की अविरल धारा और रुद्रेश्वर धाम का समग्र विकास मिलकर न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देंगे, बल्कि स्थानीय व्यापार, रोजगार और जनसहभागिता को भी एक नया आयाम देंगे।
- -एसआईआरडी निमोरा में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम, पंचायत प्रतिनिधियों को दिया जा रहा प्रशिक्षणरायपुर / विकसित भारत–रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी जीरामजी) अधिनियम, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान (एसआईआरडी), निमोरा, रायपुर में राज्य के सभी निर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों के लिए 3 से 5 अगस्त तक तीन दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यशाला का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों, उनकी जिम्मेदारियों तथा प्रभावी क्रियान्वयन की प्रक्रियाओं से अवगत कराते हुए उनकी क्षमता का विकास करना है।कार्यशाला में जिला पंचायतों के विभिन्न स्थायी समितियों के सभापतियों भी उपस्थित थे। इस अवसर पर विकसित भारत–जीरामजी योजना के आयुक्त श्री तारन प्रकाश सिन्हा ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विजन@2047 के अनुरूप ग्रामीण भारत को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से वीबी जीरामजी अधिनियम, 2025 लागू किया गया है, जिसमें ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार, आजीविका और समग्र विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।श्री सिन्हा ने बताया कि अधिनियम के तहत प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को प्रतिवर्ष 125 दिनों के रोजगार की गारंटी प्रदान की गई है। साथ ही मजदूरी दर बढ़ाकर 300 रुपए प्रतिदिन निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत किए जाने वाले सभी विकास कार्यों का चयन एवं अनुमोदन ग्राम सभा के माध्यम से किया जाएगा, जिससे विकास प्रक्रिया में जनभागीदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। कार्यशाला के दूसरे दिन सरगुजा, रायपुर एवं बस्तर संभाग के जिला पंचायत सदस्यों ने उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण में भाग लिया। इस दौरान संयुक्त आयुक्त श्री रामधन श्रीवास, एसआईआरडी के संकाय सदस्य श्री आनंद रघुवंशी तथा अन्य मास्टर ट्रेनर्स ने प्रतिभागियों को अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों और उनके व्यवहारिक क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी प्रदान की।प्रशिक्षण सत्रों में वीबी-जीरामजी अधिनियम, 2025 की अवधारणा एवं उद्देश्य, पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका एवं जिम्मेदारियां, विकसित ग्राम पंचायत योजना का निर्माण, योजना के अंतर्गत स्वीकृत किए जाने वाले कार्य, पात्र परिवारों का पंजीयन, ग्रामीण रोजगार कार्ड, निगरानी एवं पर्यवेक्षण व्यवस्था, शिकायत निवारण प्रणाली, ग्रामीण विकास की अन्य योजनाओं के साथ अभिसरण, वित्तीय प्रबंधन, पारदर्शिता, जवाबदेही, सामाजिक अंकेक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा आजीविका संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।कार्यशाला का उद्देश्य जिला पंचायत प्रतिनिधियों को आवश्यक ज्ञान, कौशल और व्यवहारिक समझ से सशक्त बनाना है, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर सकें। इससे ग्राम सभाओं की भूमिका और अधिक मजबूत होगी तथा सहभागी, पारदर्शी, जवाबदेह और सतत ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी।
- -जन्म के पहले घंटे में स्तनपान और पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने पर विशेष जोर, स्वास्थ्य संस्थानों में जागरूकता गतिविधियां जारीरायपुर। हर नवजात को जीवन की स्वस्थ और सुरक्षित शुरुआत मिले, इसी उद्देश्य के साथ प्रदेशभर में विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सप्ताहभर अस्पतालों, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों तथा समुदाय स्तर पर विविध जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से माताओं, गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को स्तनपान के महत्व तथा उसके वैज्ञानिक लाभों की जानकारी दी जा रही है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शिशु के जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना उसके स्वस्थ विकास की सबसे मजबूत नींव है। मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। यह संक्रमण से बचाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा कुपोषण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। छह माह तक केवल स्तनपान कराने के बाद शिशु को उम्र के अनुरूप ऊपरी आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने की सलाह दी जाती है। स्तनपान केवल शिशु के लिए ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद मां के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार होता है, कुछ गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है तथा मां और शिशु के बीच भावनात्मक संबंध भी अधिक मजबूत बनता है।विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती एवं धात्री माताओं की काउंसलिंग, समूह चर्चा, स्वास्थ्य शिक्षा सत्र, प्रश्नोत्तर कार्यक्रम तथा स्तनपान संबंधी व्यवहारिक मार्गदर्शन दिया जा रहा है। चिकित्सक, स्टाफ नर्स, एएनएम, मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और अन्य स्वास्थ्यकर्मी माताओं को सही स्तनपान तकनीक, नवजात की देखभाल तथा स्तनपान से जुड़े सामान्य भ्रमों के वैज्ञानिक समाधान भी बता रहे हैं।स्तनपान को केवल मां की जिम्मेदारी न मानकर पूरे परिवार की साझा जिम्मेदारी समझें। परिवार का सहयोग, सकारात्मक वातावरण और सही जानकारी ही प्रत्येक नवजात को स्वस्थ जीवन की बेहतर शुरुआत दे सकती है। जनभागीदारी और जागरूकता के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में और अधिक सुधार लाया जा सकता है तथा कुपोषण मुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया जा सकता है।
- -36 ग्राम पंचायतों के 1300 ग्रामीणों को मिले आधार कार्डरायपुर ।छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन की संकल्पना अब राज्य के सबसे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में आकार ले रही है। नारायणपुर जिला प्रशासन द्वारा संचालित ‘सुशासन एक्सप्रेस’ के माध्यम से अबूझमाड़ के पहुंचविहीन अंचलों में शासकीय सुविधाओं की सीधी पहुँच सुनिश्चित की जा रही है। इसी कड़ी में जुलाई माह के दौरान अबूझमाड़ क्षेत्र की 36 ग्राम पंचायतों में अभियान चलाकर लगभग 1,300 हितग्राहियों को उनके आधार कार्ड वितरित किए गए।सुशासन एक्सप्रेस की मोबाइल टीमें अत्यंत दुर्गम गांवों तक पहुँचकर नागरिकों का आधार पंजीयन एवं कार्ड वितरण का कार्य तत्परता से कर रही हैं। स्थानीय स्तर पर ही ये सुविधाएं मिलने से ग्रामीणों को अब छोटी-छोटी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए शहर या दूर-दराज के केंद्रों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिली है।आधार बन जाने से अबूझमाड़ के निवासियों के लिए शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ना आसान हो जाएगा। अब हितग्राही बिना किसी बाधा के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (राशन), सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आयुष्मान भारत योजना, छात्रवृत्ति तथा बैंकिंग सुविधाओं का सीधा लाभ उठा सकेंगे।प्रशासन का उद्देश्य अंतिम छोर पर खड़े अंतिम व्यक्ति तक मूलभूत सेवाएं पहुँचाना है। ‘सुशासन एक्सप्रेस’ न केवल प्रशासनिक दूरियों को मिटा रही है, बल्कि अबूझमाड़ के नागरिकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में एक मजबूत सेतु का कार्य कर रही है।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से पुनर्वास को मिल रही गतिरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और वन एवं जलवायु मंत्री तथा बीजापुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति 2025 के तहत बीजापुर जिले के 95 आत्मसमर्पित नक्सलियों को 1 करोड़ 40 लाख 86 हजार 700 रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है।बीजापुर कलेक्टर श्री विश्वदीप ने नीति के प्रावधानों के अनुसार शस्त्रों के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान करने के लिए राशि के आहरण और वितरण की स्वीकृति दी है।यह प्रोत्साहन राशि आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने, उन्हें नया जीवन शुरू करने और सम्मानजनक आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दी जा रही है। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और सामाजिक पुनर्वास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रभावी पहल है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। पुनर्वास नीति के माध्यम से आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज में सम्मानजनक पुनर्स्थापना का अवसर मिल रहा है, जिससे बस्तर अंचल में शांति और विकास को नई गति मिल रही है।
- -वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत तीन आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजे गएरायपुर / वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशन में संगठित वन अपराध और वन्यजीव तस्करी पर रोक लगाने के लिए वन विभाग लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। इसी अभियान के तहत बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में हाथीदांत तस्करी के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।वन मंडलाधिकारी श्री आलोक वाजपेयी के मार्गदर्शन में 3 अगस्त 2026 को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (मध्य क्षेत्र, भोपाल), राज्य उड़न दस्ता रायपुर और वनमंडल बलरामपुर की संयुक्त टीम ने रामानुजगंज स्थित एक धर्मशाला में छापेमारी की।संयुक्त टीम ने आमंत्रण धर्मशाला के कमरा नंबर 205 की तलाशी ली। जांच के दौरान एक बैग से हाथी के जबड़े के तीन हाथीदांत बरामद किए गए। मौके पर तीन संदिग्ध व्यक्ति भी मौजूद थे, जिन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया गया।गिरफ्तार आरोपियों में झारखंड के पलामू जिले के संतोष कुमार विश्वकर्मा (42 वर्ष) तथा बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के अजय कुमार गुप्ता (49 वर्ष) और सतेन्द्र कुमार (50 वर्ष) शामिल हैं।आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। भारतीय जंगली हाथी अनुसूची-1 के तहत संरक्षित वन्य प्राणी है, इसलिए इस मामले को गंभीर वन अपराध माना गया है।वन विभाग ने जब्त किए गए हाथीदांत को अपने कब्जे में लेकर सभी आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रामानुजगंज की अदालत में प्रस्तुत किया। अदालत ने तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। वन परिक्षेत्राधिकारी, रामानुजगंज ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- रायपुर / छत्तीसगढ़ शासन का सेवा सेतु पोर्टल ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय सेवाओं को आसान, पारदर्शी और सुलभ बना रहा है। दंतेवाड़ा विकासखंड की ग्राम पंचायत बड़े बचेली में विवाह पंजीयन की सुविधा से कई परिवारों को बड़ी राहत मिली है।पहले विवाह प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण ग्रामीणों को विभिन्न शासकीय योजनाओं और आवश्यक दस्तावेजी कार्यों में परेशानी होती थी। प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दूर स्थित कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे समय और धन दोनों खर्च होते थे।ग्राम पंचायत स्तर पर चलाए गए जागरूकता अभियान के माध्यम से लोगों को सेवा सेतु पोर्टल पर विवाह पंजीयन की ऑनलाइन प्रक्रिया की जानकारी दी गई। ग्राम पंचायत सचिव प्रियंका दीवान और सरपंच गोविंद कुंजाम के मार्गदर्शन में पात्र दंपतियों ने आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन किया। सत्यापन के बाद उन्हें विवाह प्रमाण पत्र जारी किए गए।ग्राम पंचायत बड़े बचेली के निवासी श्री जोगाराम और श्रीमती अमवती नाग ने बताया कि विवाह प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण उन्हें कई शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई होती थी। सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने के बाद उन्हें आसानी से विवाह प्रमाण पत्र मिल गया। अब विभिन्न शासकीय कार्यों में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती।इसी तरह श्रीमती सुषमा तामो और श्री संतोष ने बताया कि पहले उन्हें विवाह पंजीयन की प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी। ग्राम पंचायत के सहयोग से उन्होंने सेवा सेतु पोर्टल पर आवेदन किया और निर्धारित समय में विवाह प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया। अब उन्हें दस्तावेज बनवाने के लिए बार-बार कार्यालय नहीं जाना पड़ता, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत हुई है।सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन की सुविधा से पूरी प्रक्रिया सरल, त्वरित और पारदर्शी बनी है। बड़े बचेली के ग्रामीणों का डिजिटल सेवाओं के प्रति विश्वास भी बढ़ा है और वे अन्य शासकीय सेवाओं के लिए भी ऑनलाइन माध्यम का उपयोग करने लगे हैं। ग्राम पंचायत बड़े बचेली में विवाह पंजीयन की यह पहल डिजिटल सुशासन का सफल उदाहरण बन गई है। सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से ग्रामीणों को घर के पास ही आवश्यक शासकीय सेवाएँ मिल रही हैं, जिससे जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुँच रहा है।
- -वैज्ञानिक गतिविधियों और विद्यार्थियों के लिए चल रही नवाचार पहल की सराहनारायपुर / भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर आनंद और उनकी विशेषज्ञ टीम ने जिला विज्ञान केंद्र, दंतेवाड़ा का भ्रमण कर यहां संचालित वैज्ञानिक और शैक्षणिक गतिविधियों का अवलोकन किया।टीम ने विज्ञान केंद्र की स्पेस गैलरी, फिजिक्स गैलरी, माइनिंग गैलरी, विभिन्न विज्ञान प्रदर्शनों, वर्किंग मॉडल्स और विद्यार्थियों के लिए आयोजित ‘करके सीखें’ गतिविधियों का निरीक्षण किया। वैज्ञानिकों ने सुदूर जनजातीय क्षेत्र के बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए जिला प्रशासन और विज्ञान केंद्र की पहल की सराहना की।उन्होंने कहा कि विज्ञान केंद्र बच्चों को प्रयोगों और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। इसरो की टीम ने केंद्र प्रमुख उपेंद्र गौतम और उनकी टीम द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी प्रशंसा की।वैज्ञानिकों ने केंद्र में नियमित रूप से आयोजित शैक्षणिक भ्रमण, ‘कबाड़ से जुगाड़’ विज्ञान गतिविधियां और खगोल विज्ञान पर आधारित डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन को विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा बढ़ाने की दिशा में प्रभावी पहल बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां बच्चों को विज्ञान, अंतरिक्ष अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। भ्रमण के अंत में विज्ञान केंद्र प्रबंधन ने इसरो के वैज्ञानिकों का आभार व्यक्त किया। इसरो की टीम के आगमन से विज्ञान केंद्र के विद्यार्थियों, शिक्षकों और विज्ञान में रुचि रखने वाले युवाओं में उत्साह का वातावरण देखने को मिला।
- -जल, जंगल, जमीन का होगा बेहतर प्रबंधनरायपुर /छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजातिय क्षेत्र में पंचायत अनुसूचित क्षेत्र विस्तार अधिनियम (पेसा) और वन अधिकार अधिनियम के तहत समन्वय से वनवासियों के हित में साझा जल-जंगल के बेहतर प्रबंधन से कार्य किया जाएगा। इस संबंध में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में पेसा और एफआरए टास्क फोर्स समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में जल, जंगल, जमीन के संसाधनों का बेहतर प्रबंधन छत्तीसगढ़ राज्य हो तथा वनवासियों के लिए योजनाओं का क्रियान्वयन हो इस संबंध में मुख्य सचिव ने विभागाीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि सभी पात्र व्यक्तियों को वन अधिकार अधिनियमों के अनुसार वन संसाधन अधिकार पत्र दिए जायें। बैठक में वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून के क्रियान्वयन के संबंध में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए।टास्क फोर्स की बैठक में छत्तीसगढ़ पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम, प्रावधान एवं क्रियान्वन की स्थिति की जानकारी प्रस्तुत की गई। इसी तरह से वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत राज्य में प्राप्त निराकृत एवं लंबित दावों, आवेदनों की स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण एवं प्रबंधन के अधिकारों की मान्यता में हुई प्रगति तथा वन ग्रामों के राजस्व ग्रामों में संपरिवर्तन की प्रगति की जानकारी विभागीय अधिकारियों ने दी।बैठक में अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियमों के क्रियान्वयन की जानकारी का प्रस्तुतीकरण किया गया। इसी तरह से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ पेसा नियम के क्रियान्वयन के संबंध में भी प्रस्तुतिकरण दिया गया।बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, पीसीसीएफ श्री अरूण पाण्डेय, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी सहित वन विभाग के अन्य अधिकारी शामिल हुए। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंस से विभिन्न जिलों के कलेक्टर एवं अन्य अधिकारी शामिल हुए।
- -भारी बारिश के बीच गाँव पहुँचकर बच्चों का सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कियारायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने का अभियान लगातार प्रभावी परिणाम दे रहा है। सुकमा जिले में जिला प्रशासन की तत्परता और संवेदनशील पहल से दो बाल विवाह समय रहते रोक दिए गए। यह कार्रवाई कवासीपारा, फूलबगड़ी गाँव में मूसलाधार बारिश के बीच की गई।चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 से बाल विवाह की सूचना मिलते ही जिला महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम तुरंत गाँव के लिए रवाना हुई। कठिन मौसम और बारिश के बावजूद टीम समय पर मौके पर पहुँची और दोनों बाल विवाह रुकवाने में सफल रही।गाँव में विवाह की तैयारियाँ चल रही थीं। अधिकारियों ने स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हुए परिवारों से शांतिपूर्ण और संवेदनशील तरीके से बातचीत की। टीम ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की जानकारी दी और बताया कि कम उम्र में विवाह से बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर असर पड़ता है।प्रशासन की समझाइश का सकारात्मक परिणाम सामने आया। दोनों परिवारों ने बाल विवाह स्थगित करने का निर्णय लिया। बालिकाओं ने भी अपनी पढ़ाई जारी रखने और सुरक्षित भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने की इच्छा जताई। पूरी कार्रवाई को पारदर्शी और वैधानिक बनाने के लिए मौके पर पंचनामा और घोषणा-पत्र तैयार कराया गया। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि भविष्य में बच्चों के अधिकारों का संरक्षण हो सके।यह अभियान कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन तथा जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री शिवदास नेताम और जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री जितेंद्र सिंह बघेल के मार्गदर्शन में चलाया गया। इस कार्रवाई में संरक्षण अधिकारी (गैर संस्थागत देखरेख) सुश्री मनीषा शर्मा, सेक्टर सुपरवाइजर सुश्री रश्मि चन्द्रवंशी और सामाजिक कार्यकर्ता श्री जोगेंद्र दिर्दो की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सुकमा की यह सफलता बताती है कि समय पर मिली सूचना, प्रशासन की तत्परता और संवेदनशील संवाद से बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को रोका जा सकता है। यह पहल बच्चों के सुरक्षित, शिक्षित और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण है।
- -अतिक्रमण मुक्त भूमि पर हुआ वृहत पौधरोपण, बढ़ेगा हरित आवरण और पर्यावरण संरक्षणरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चल रहे ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस अभियान के तहत अतिक्रमण मुक्त कराई गई वन भूमि पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया गया, जिससे क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने और वन संरक्षण को नई दिशा मिली है।जगदलपुर के परियोजना क्षेत्र फरसगांव अंतर्गत बड़े डोंगर पंचायत से लगे वन क्षेत्र में वृहत पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अभियान में जनप्रतिनिधियों, वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर बड़ी संख्या में पौधे लगाए।कार्यक्रम के दौरान लोगों को अपनी माँ के नाम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प दिलाया गया। इस पहल ने पर्यावरण संरक्षण के साथ मातृ सम्मान का संदेश भी समाज तक पहुँचाया।अतिक्रमण मुक्त भूमि पर हुए इस पौधरोपण से क्षेत्र में पुनर्वनीकरण को बढ़ावा मिलेगा, हरित आवरण में वृद्धि होगी और आने वाले वर्षों में पर्यावरण संतुलन मजबूत होगा। इससे स्थानीय लोगों को स्वच्छ वातावरण, बेहतर जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन का लाभ मिलेगा। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों को प्रकृति से जोड़ने और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करने वाला जन आंदोलन बनता जा रहा है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और हरित भविष्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
- -ग्रामीणों को उप मुख्यमंत्री ने दिलाई स्वच्छता की शपथरायपुर / पवित्र श्रावण माह में कबीरधाम जिले में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध भोरमदेव सरस मेला एवं सावन में इस वर्ष लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। मेले की स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के पालन की अपील सभी दुकानदारों एवं श्रद्धालुओं से की है।उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि भोरमदेव धाम हमारी आस्था, संस्कृति और प्रकृति की अमूल्य धरोहर है। सरस मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, ऐसे में हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस पवित्र स्थल को स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त रखने में अपना सहयोग दे। सभी के सहयोग से इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता बनी रहेगी तथा हमारा भविष्य भी प्रदूषण मुक्त होगा।उप मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि हमारा प्रयास हो कि यह संभागीय सरस मेला तथा पूरा भोरमदेव परिसर प्लास्टिक मुक्त हो। प्लास्टिक के स्थान पर वैकल्पिक रूप से कपड़े की अथवा जूट के बैक का इस्तेमाल किया जाए जो प्रकृति के अनुकूल हो। सभी दुकानदार एवं शिविर संचालक गीला एवं सूखा कचरा अलग-अलग रखने का प्रयास करें। कचरा केवल निर्धारित कचरा गाड़ी एवं कचरा पात्र में ही डालें। सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया की वे घर से कपड़े का थैला, पानी की बोतल साथ लेकर आएं और खुले में कचरा न फेंकें।कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने उपस्थित ग्रामीणों, स्व-सहायता समूह की दीदियों, मितानिन बहनों एवं स्वच्छाग्रहियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के पालन हेतु स्वच्छता की शपथ भी दिलाई। शपथ में सभी ने कचरा अलग-अलग करने, प्लास्टिक का उपयोग न करने एवं अपने गांव तथा भोरमदेव धाम को स्वच्छ बनाये रखने का संकल्प लिया। इस दौरान उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने कबीरधाम जिला को प्लास्टिक मुक्त बनाने की शपथ लेकर अपने जान पहचान वालों पड़ोस के लोगों एवं गांव के अन्य लोगों को इस कार्य के लिए जागरूक करने की बात कही।
- -स्वास्थ्य एवं लोक निर्माण विभाग सचिव की उपस्थिति में मंत्रालय में हुई अहम बैठकरायपुर/ स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में स्वास्थ्य अधोसंरचना को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य सचिव एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव के साथ विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे।बैठक के दौरान रायपुर स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। इनमें ट्रॉमा सेंटर, क्रिटिकल केयर यूनिट, नवीन सिकल सेल इंस्टीट्यूट, बॉयज एवं गर्ल्स हॉस्टल तथा स्टाफ रेजिडेंशियल बिल्डिंग जैसे महत्वपूर्ण निर्माण शामिल हैं। ये सभी परियोजनाएं प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।बैठक में आगामी कार्ययोजना पर भी विस्तार से चर्चा की गई, ताकि परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए, जिससे आमजन को स्वास्थ्य सुविधाओं का बेहतर लाभ शीघ्र मिल सके।
- -कार्टून और कैरिकेचर के माध्यम से बस्तर की सकारात्मक पहचान को मिलेगी नई दिशारायपुर। बस्तर की समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और सकारात्मक पहचान को कला के माध्यम से नई पहचान देने के उद्देश्य से जगदलपुर में आयोजित ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कैनवास कार्यशाला में स्कूली बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उतारकर रचनात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ कार्टूनिस्टों और कला विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को कार्टून और कैरिकेचर बनाने की बुनियादी तकनीकें सिखाईं। उन्होंने बताया कि किसी भी चित्र की अच्छी शुरुआत सही सर्किल बनाने से होती है। इसके साथ ही रफ स्केच, आउटलाइन, रंगों के चयन और चेहरे के भावों को प्रभावी ढंग से चित्रित करने के तरीके भी बच्चों को सरल भाषा में समझाए गए। स्वामी आत्मानंद स्कूल के छात्र वंश साहू ने बताया कि इस प्रशिक्षण से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और कला के प्रति उनकी रुचि और मजबूत हुई है। सेजेस शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 की छात्राएं भारती पांडे और पूनम ध्रुव ने कहा कि पहले उन्हें चित्र बनाने की सही शुरुआत की जानकारी नहीं थी, लेकिन विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से अब वे आसानी से कार्टून और कैरिकेचर बना पा रही हैं।सेजेस नानगुर की छात्राएं अंजलि नाग और नैना मरकाम तथा सेजेस जगदलपुर की छात्रा अक्षिता बाजपेई ने बताया कि वरिष्ठ कलाकारों का मार्गदर्शन उनकी कल्पनाशीलता को नई दिशा देगा और कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा। यह कार्यशाला बच्चों की प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ कला के माध्यम से बस्तर की शांतिपूर्ण, रचनात्मक और मुस्कुराती हुई पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। इससे बस्तर की सकारात्मक छवि को व्यापक मंच मिलने की उम्मीद है।
- -छत्तीसगढ़ में हॉकी लीग के आयोजन की तैयारी, छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के लिए 57 करोड़ का बजट-उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों की दी जानकारीरायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने आज प्रेस-कॉन्फ्रेंस में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों, गतिविधियों, उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस-कॉन्फ्रेंस में बताया कि छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने, खेल अधोसंरचना की मजबूती, महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने तथा खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के तहत 57 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान रखा गया है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार और उप संचालक श्रीमती रश्मि ठाकुर भी प्रेस-कॉन्फ्रेंस में मौजूद थीं।उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में बताया कि राज्य में हॉकी लीग के आयोजन की तैयारी चल रही है। राज्य के खेल अकादमियों में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण मुहैया कराने 14 प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए पटियाला भेजा गया है। उन्होंने बताया कि खेल गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिए राज्य शासन ने 6 नए जिलों गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़-चौकी, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सक्ती में खेल अधिकारी के पदों का सृजन किया गया है। विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 44 प्रशिक्षकों, 4 जिला खेल अधिकारियों, 23 सहायक ग्रेड-3 और 8 वार्डन्स की भर्ती प्रक्रियाधीन है। श्री साव ने बताया कि राज्य में ज्यादा से ज्यादा बच्चे एवं युवा खेल के मैदानों में पहुंचे, इसके लिए सरकार सक्रियता और गंभीरता से काम कर रही है। छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के समय केवल 4 करोड़ रुपए के बजट वाले खेल एवं युवा कल्याण विभाग का बजट चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 304 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। दूरस्थ आदिवासी वनांचलों को खेल की मुख्य धारा से जोड़ने की अभिनव पहल करते हुए पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक के आयोजन के साथ ही इस साल से सरगुजा ओलंपिक भी राज्य में शुरु किया गया है। देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शानदार मेजबानी ने छत्तीसगढ़ को देश के खेल मानचित्र में प्रतिष्ठित किया है।
- रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक 05 अगस्त 2026 को पूर्वान्ह 11.30 बजे से मंत्रालय महानदी भवन में स्थित मंत्रिपरिषद कक्ष में आयोजित की गई है।
- -प्रत्येक पंचायतों में रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश-होटल, ढाबों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का नियमित जांच करें-विशेष प्रकरणों में एग्रीस्टेक पंजीयन को अभियान चलाकर पूर्ण करें - कलेक्टरमहासमुंद / कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने आज सुबह 10ः00 बजे आयोजित समय-सीमा की बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं एवं कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुश्री अनुपमा आनंद, अपर कलेक्टर श्री सचिन भूतड़ा, श्री रवि साहू सहित सभी एसडीएम, तहसीलदार, जनपद पंचायत सीईओ, सीएमओ एवं जिला स्तरीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।बैठक में कलेक्टर ने आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियां समयबद्ध एवं सुव्यवस्थित ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को सौंपे गए दायित्वों का समय पर निर्वहन सुनिश्चित करने तथा समारोह को गरिमामय ढंग से आयोजित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करने को कहा।बैठक में वीबी राम जी योजना की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने सभी जनपद पंचायतों को निर्देश दिए कि जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में योजना के अंतर्गत कम से कम एक कार्य शीघ्र प्रारंभ कराया जाए एवं अधिक से अधिक संख्या में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जाए। कलेक्टर ने प्रधानमंत्री आवास योजना की भी समीक्षा की और अप्रारंभ आवास निर्माण कार्यों को प्रारम्भ कराते हुए तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही अस्वीकृत आवासों को स्वीकृत करने के निर्देश दिए। वर्तमान में बारिश को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पीडब्ल्यूडी विभाग को जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी करते हुए सड़कों पर बने गड्ढों की तत्काल मरम्मत के निर्देश दिए। साथ ही नगरीय निकायों को कचरा प्रबंधन एवं नालियों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। कलेक्टर ने खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए संबंधित अधिकारियों को जिले के होटल, ढाबों एवं खाद्य प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए तथा अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।कलेक्टर श्री लंगेह ने सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों की समीक्षा करते हुए कहा कि सीएम हेल्पलाइन के अंतर्गत प्राप्त शिकायतों का समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण निराकरण किया जाए। सभी विभागीय अधिकारियों को नियमित रूप से पोर्टल में लॉगिन कर लंबित शिकायतों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में 636 प्रकरणों का फीडबैक सहित निराकरण किया गया है। जिले में सीएम हेल्पलाइन अंतर्गत 4498 शिकायत प्राप्त हुए हैं।कलेक्टर ने माय भारत पोर्टल पर जिले के 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ने हेतु पंजीयन कराने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए ताकि युवाओं को शासन की विभिन्न गतिविधियों एवं अवसरों से जोड़ा जा सके। उन्होंने मुख्य नगर पालिका अधिकारियों एवं जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देशित किया कि युवाओं को माय भारत पोर्टल से जोड़ने प्रोत्साहित करें। स्कूल शिक्षा विभाग, महाविद्यालय एवं अन्य संस्थानों को भी निर्देशित किया गया है।कलेक्टर ने विशेष प्रकरणो का एग्रीस्टैक पंजीयन शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि एग्रीस्टेक पंजीयन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, संस्थागत पंजीयन के मामले को भी प्राथमिकता से समाधान किया जाए। उन्होंने सभी एसडीएम, तहसीलदार, राजस्व एवं कृषि, सहकारिता, उप पंजीयक को विशेष ध्यान देते हुए शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने कहा।कलेक्टर श्री लंगेह ने किसानों को खाद की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए कहा कि शासन के निर्देशानुसार किसानों को नियमित रूप से खाद उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कृषि विभाग को नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। कृषि विभाग के अधिकारी ने बताया कि जिले में खाद के कुल लक्ष्य का 83 प्रतिशत भण्डारण किया गया है। वहीं 79 प्रतिशत वितरण कर लिया गया है। कलेक्टर ने खाद के वितरण में तेजी लाने के निर्देश दिए। सभी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को खाद वितरण पाॅस मशीन से करवाने एवं सतत मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए।कलेक्टर ने शासन के निर्देशानुसार सभी विभागों को ई-ऑफिस एवं ई-फाइल प्रणाली का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने कहा है। उन्होंने कहा कि ई-फाईल 1 अगस्त से अनिवार्य है। इसी तरह आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने सभी विभाग प्रमुखों की इसकी नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं तथा अनिवार्य रूप से आधार आधारित उपस्थिति दर्ज करने कहा है।इसके अलावा कलेक्टर ने विभिन्न प्राधिकरणों के लंबित निर्माण कार्यों को पूर्ण करने, राजस्व प्रकरणों, न्यायालय के प्रकरणों का जवाबदावा समय पर प्रस्तुत करने, सुशासन तिहार, कलेक्टर जनदर्शन, पीजी पोर्टल, लोक सेवा गारंटी अधिनियम तथा जन शिकायतों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को लंबित प्रकरणों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
- -संस्था स्तरीय काउंसलिंग 13 अगस्त कोमहासमुन्द / शासकीय पॉलीटेक्निक महासमुन्द में डिप्लोमा पाठ्यक्रम के अंतर्गत सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल एवं कम्प्यूटर साइंस इंजीनियरिंग शाखाओं में प्रवेश के लिए चतुर्थ चरण की संस्था स्तरीय काउंसिलिंग हेतु पंजीयन की प्रक्रिया जारी है।प्राचार्य शासकीय पॉलीटेक्निक ने बताया कि जिन विद्यार्थियों ने प्री-पॉलिटेक्निक टेस्ट परीक्षा उत्तीर्ण की है अथवा डिप्लोमा इंजीनियरिंग (लेटरल एंट्री) के माध्यम से द्वितीय वर्ष में प्रवेश लेना चाहते हैं, वे 08 अगस्त 2026 तक संचालनालय तकनीकी शिक्षा, रायपुर की वेबसाइट www.cgdte.admissions.nic.in ऑनलाइन पंजीयन कर काउंसलिंग हेतु अपना विकल्प भर सकते हैं।संचालनालय तकनीकी शिक्षा, रायपुर द्वारा जारी मेरिट सूची के अनुसार संस्था स्तर पर सीट आबंटन का अवसर प्राप्त करने के लिए अभ्यर्थियों को 13 अगस्त 2026 को प्रातः 10ः00 बजे संबंधित संस्था में सभी मूल दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य होगा। प्रवेश संबंधी अधिक जानकारी के लिए प्रवेश अधिकारी श्री हेमन्त कुमार वर्मा, व्याख्याता (भौतिकी) के मोबाइल नंबर 91310-02858 पर संपर्क किया जा सकता है।
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-समारोह में पार्थिव शिवलिंग सजावट, तीज क्वीन, व्यंजन तथा सोलह श्रृंगार प्रतियोगिता आयोजित की गई- नीतू चंद्राकर को मिला तीज क्वीन का ताज , नीलू शर्मा प्रथम रनरअप तथा गौरी देवांगन द्वितीय रनरअप रहींटी सहदेवभिलाई नगर। तालपुरी बी-ब्लॉक क्लब हाउस में रविवार को हमर संगवारी ग्रुप के बैनर तले पूर्व एल्डरमैन कीर्तिलता वर्मा के नेतृत्व में तीज मिलन समारोह का भव्य एवं रंगारंग आयोजन किया गया। पारंपरिक संस्कृति, लोकगीतों और विभिन्न प्रतियोगिताओं से सजे इस आयोजन में महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। समारोह में पार्थिव शिवलिंग सजावट, तीज क्वीन, व्यंजन तथा सोलह श्रृंगार प्रतियोगिता आयोजित की गई। तीज क्वीन प्रतियोगिता में नीतू चंद्राकर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीज क्वीन का ताज अपने नाम किया। नीलू शर्मा प्रथम रनरअप तथा गौरी देवांगन द्वितीय रनरअप रहीं।अन्य प्रतियोगिताओं के नतीजेपार्थिव शिवलिंग सजावट प्रतियोगिता में प्रीति सिन्हा ने प्रथम, चंपा वर्मा ने द्वितीय और वृंदा चंद्रा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। व्यंजन प्रतियोगिता में मोहनी साहू प्रथम, देव प्रभा साहू द्वितीय तथा वृंदा चंद्रा तृतीय स्थान पर रहीं। वहीं सोलह श्रृंगार प्रतियोगिता में सरिता देशमुख ने प्रथम, गौरी देवांगन ने द्वितीय और सरस्वती सिंह ने तृतीय स्थान हासिल किया। प्रतियोगिताओं का मूल्यांकन राष्ट्रपति द्वारा नारी शक्ति सम्मान से सम्मानित छत्तीसगढ़ी लोक गायिका रजनी रजक, समाजसेविका अंजू साहू तथा दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किरण रात्रे ने निर्णायक की भूमिका निभाते हुए किया।मनमोहक नृत्य ने समां बांधाकार्यक्रम में महिलाओं ने छत्तीसगढ़ी लोकगीतों और हिंदी फिल्मी गीतों पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर समां बांध दिया। प्रस्तुति देने वालों में गायत्री देवांगन, कविता सिन्हा, सुनीता चंद्राकर, मीनाक्षी वर्मा, हिमानी, रूपा, रंजना, सारिका साहू, दीप सिन्हा, पम्मी साहू, योगिता देवांगन, देव प्रभा साहू, आशा वर्मा, मंजू देवांगन, सत्यभामा साहू, चेतना वर्मा, ममता, सुषमा रथ, नीलू बेलचंदन, शकुंतला साहू एवं नाशी वर्मा प्रमुख रूप से शामिल रहीं।महिलाओं को एक मंच पर लाया जाएगाकार्यक्रम का संचालन ममता वर्मा ने किया। आयोजन को सफल बनाने में योगिता देवांगन, परमेश्वरी साहू तथा सुनीता चंद्राकर का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर कार्यक्रम की मुख्य आयोजक कीर्तिलता वर्मा ने सेवानिवृत्त प्राचार्या संगीता साहू का शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया। उन्होंने कहा कि हमर संगवारी ग्रुप आगे भी समाज की सेवानिवृत्त महिलाओं का सम्मान करता रहेगा तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से महिलाओं को एक मंच पर जोड़ने का कार्य निरंतर जारी रखेगा। - -357 जल स्रोतों पर 185.64 लाख से बनेंगे सैंड फिल्टररायपुर। जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन को जनभागीदारी से जोड़ते हुए धमतरी जिला प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिले के 357 जल स्रोतों पर सैंड फिल्टर निर्माण कार्यों के लिए 185.64 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। वर्षा जल के वैज्ञानिक प्रबंधन, जल स्रोतों की गुणवत्ता बनाए रखने तथा भू-जल पुनर्भरण को सुदृढ़ करने की दिशा में इस कदम को बेहद प्रभावी माना जा रहा है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वीकृत 357 सैंड फिल्टरों में से कुरूद विकासखंड में 124, नगरी में 107, धमतरी में 78 और मगरलोड विकासखंड में 48 सैंड फिल्टर निर्मित किए जाएंगे। इन सभी कार्यों का क्रियान्वयन संबंधित ग्राम पंचायतों के माध्यम से समय-सीमा के भीतर किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों को इसका शीघ्र लाभ मिल सके। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि सैंड फिल्टर जल स्रोतों के संरक्षण की एक बेहद प्रभावी और वैज्ञानिक तकनीक है। तालाब, कुएं और जलाशयों के समीप इनके निर्माण से वर्षा जल के साथ बहकर आने वाली मिट्टी, गाद, प्लास्टिक और कचरा प्राकृतिक रूप से छन जाएगा। इससे जल स्रोतों में गाद का जमाव रुकेगा, पानी की स्वच्छता बनी रहेगी और भू-जल पुनर्भरण की प्रक्रिया मजबूत होगी।वर्तमान में जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा और अत्यधिक जल दोहन के कारण गिरते भू-जल स्तर के बीच यह प्रणाली वर्षा जल को प्राकृतिक रूप से भूमि में समाहित करने में मदद करेगी। इससे भविष्य में संभावित पेयजल संकट को टालने में बड़ी राहत मिलेगी। यह पहल पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बेहद लाभदायक सिद्ध होगी। स्वच्छ जल स्रोत जहां पशु-पक्षियों के लिए उपयोगी होंगे, वहीं जल की उपलब्धता और गुणवत्ता सुधरने से कृषि, मत्स्य पालन तथा अन्य आजीविका आधारित गतिविधियों को भी अप्रत्यक्ष रूप से मजबूती मिलेगी। जिला प्रशासन ने ग्राम पंचायतों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जल एवं स्वच्छता समितियों से इन संरचनाओं के नियमित रखरखाव और स्वच्छता में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया है। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (ैक्ळ-6रू स्वच्छ जल एवं स्वच्छता) के अनुरूप है। जल संरक्षण को केवल एक निर्माण कार्य तक सीमित न रखकर इसे जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है, जिससे धमतरी जिला जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभर रहा है।
- -सहयोग केंद्र में लगभग 300 कार्यकर्ता पहुँचेरायपुर। भारतीय जनता पार्टी के कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित प्रदेश कार्यालय में सोमवार को 'सहयोग केंद्र' का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने उपस्थित रहकर कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर आवेदनों पर सार्थक व समाधानकारी पहल की।सहयोग केंद्र में प्रदेशभर से लगभग 300 कार्यकर्ता पहुंचे। इस दौरान 100 के करीब आवेदन प्राप्त हुए। मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने संबंधित अधिकारियों को इन आवेदनों के त्वरित व पारदर्शी निराकरण के निर्देश दिए।इस दौरान भाजपा प्रदेश मंत्री जितेंद्र कुमार वर्मा एवं सहयोग केंद्र प्रभारी सच्चिदानंद उपासने विशेष रूप से मौजूद रहे। इस मौके पर मंत्री खुशवन्त साहब ने कहा कि सहयोग केंद्र का मुख्य उद्देश्य शासन और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है, ताकि अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं और राहत का लाभ पहुँच सके।


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