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- रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पेंशनर्स समाज की धरोहर हैं, जिन्होंने अपने सेवाकाल में शासन-प्रशासन की नींव को सुदृढ़ किया और आज राज्य के विकास में अपना योगदान दे रहे है। प्रशासनिक व्यवस्था के सुचारू संचालन में पेंशनरों का अनुभव बहुत महत्वपूर्ण है। उनकी कर्तव्यनिष्ठ सेवा के कारण ही प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू रूप से जारी है। मुख्यमंत्री रविवार को पमशाला में आयोजित सरगुजा संभागीय पेंशनर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के वक्त जिन शासकीय सेवकों ने कठिन परिस्थितियों में कार्य करते हुए राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, वे आज भले ही सेवानिवृत हो चुके है लेकिन उनका अनुभव और मार्गदर्शन नए अधिकारियों के लिए हमेशा काम आएगा। सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री साय ने 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ पेंशनरों को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने पूर्व सरगुजा कमिश्नर रिटायर्ड आईएएस श्री महेश्वर साय पैंकरा द्वारा लिखित किताब करमडार एवं अन्य कथनी तथा महुवा के फूल का विमोचन किया। उन्होंने पेंशनर संघ की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राधा-कृष्ण मंदिर में दर्शन व पूजा अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।इस अवसर पर प्रांताध्यक्ष डॉ डीपी मनहर ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय पेंशनर संघ सम्मलेन में शामिल होने वाले पहले मुख्यमंत्री है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, पूर्व विधायक श्री भरत साय, पेंशनर संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ डीपी मनहर, बड़ी संख्या में पेंशनर्स उपस्थित रहे।
- -166 करोड़ रूपए के कार्यो का लोकार्पण-भूमिपूजन-पीएम आवास के 950 हितग्राहियों को गृह प्रवेश के लिए घर की चाबी भेंट की-सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार के लिए 40 करोड़ रुपये की घोषणा-पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा अनावरण तथा अटल परिसर का लोकार्पणरायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास का “मनखे-मनखे एक समान” का संदेश संपूर्ण मानव समाज, देश और दुनिया के लिए आज भी प्रासंगिक है, जो सामाजिक समरसता, समानता और भाईचारे का मार्ग दिखाता है। मुख्यमंत्री रविवार को बेमेतरा जिले में आयोजित गुरु घासीदास लोक कला महोत्सव एवं राज्य स्तरीय ओपन पंथी नृत्य प्रतियोगिता को संबोधित कर रहे थे।मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में नवागढ़ क्षेत्र के विकास के लिए 165 करोड़ 54 लाख रूपए की लागत वाले 44 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इस मौके पर उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत नवनिर्मित लगभग 950 पूर्ण आवासों का गृह प्रवेश के लिए हितग्राहियों को घर की चाबी भेंट की। उन्होंने बेमेतरा जिले में सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार के लिए 40 करोड़ रुपये, नवागढ़ की 10 ग्राम पंचायतों को सीसी रोड निर्माण के लिए 5-5 लाख रुपये की घोषणा की। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में बनाएं गए नवनिर्मित अटल परिसर का लोकार्पण तथा उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने नवागढ़ के जैतखाम में विधिवत श्वेत ध्वज चढ़ाया और वहां 12 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले सतनाम मंदिर के निर्माण हेतु भूमिपूजन भी किया।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु घासीदास ने समाज में व्याप्त जाति-पाति, ऊँच-नीच, छुआछूत और सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने का कार्य किया। उन्होंने सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाते हुए मानवता को एक सूत्र में बाँधने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उनके संदेशों के अनुरूप जनता के हित में अनेक क्रांतिकारी और जनकल्याणकारी योजनाएँ संचालित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में धान खरीदी, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महतारी वंदन योजना तथा आवासहीन परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना प्रदेश के विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माता पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण करते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, सुशासन, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनकल्याण को समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि अटल जी केवल एक महान नेता ही नहीं, बल्कि विचार, संवेदना और समर्पण के प्रतीक थे।विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि गिरौदपुरी में निर्मित दुनिया का सबसे ऊँचा जैतखाम आज वैश्विक आकर्षण का केंद्र बन चुका है, जहाँ देश-विदेश से पर्यटक बाबा के जीवन दर्शन के लिए आते हैं। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री दयालदास बघेल ने कहा कि गुरु घासीदास लोक कला महोत्सव सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस अवसर पर गुरु घासीदास लोक कला महोत्सव एवं राज्य स्तरीय ओपन पंथी नृत्य प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। विभिन्न विभागों द्वारा जन कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित लगाई गई प्रदर्शनी में उन्होंने लाभार्थी हितग्राहियों को सामग्री एवं राशि का वितरण किया। कार्यक्रम में विधायक सर्वश्री दीपेश साहू, ईश्वर साहू, अनुज शर्मा, पुन्नूलाल मोहले सहित अनेक जन प्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या ग्रामीणजन उपस्थित थे।
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बीजापुर . जिले में सुरक्षा की कमी को दूर करने और विकास कार्यों को सुगम बनाने के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण एक स्थान पर पुलिस शिविर स्थापित किया गया है। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि फरसेगढ़ पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत डोडीमार्का गांव में शुक्रवार को 'सुरक्षा एवं जन सुविधा शिविर' की स्थापना की गई। उन्होंने बताया कि यह शिविर छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ) की सातवीं बटालियन के लिए एक 'फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस' (एफओबी) के रूप में कार्य करेगा। अधिकारी ने बताया कि दुर्गम भूभाग, भौगोलिक परिस्थितियों और भीषण ठंड के बावजूद, जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), सीएएफ और जिला पुलिस की एक संयुक्त टीम ने क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ गहन अभियानों के तहत शिविर स्थापित करने में अनुकरणीय साहस और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि यह शिविर छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर माओवादियों की अंतरराज्यीय आवाजाही और गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद करेगा। अधिकारी ने बताया कि इससे भोपालपटनम (बीजापुर) को फरसेगढ़ और सेंद्रा होते हुए गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) से जोड़ने वाली सड़क के निर्माण में भी सुविधा होगी और इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के दूरस्थ गांवों में विकास कार्यों में तेजी आएगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 से बीजापुर जिले में कुल 29 नए सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं, जबकि निरंतर नक्सल विरोधी अभियानों के परिणामस्वरूप 923 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, 221 मुठभेड़ों में मारे गए हैं और 1,100 को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि इन शिविरों की स्थापना का उद्देश्य राज्य सरकार की "नियद नेल्ला नार" योजना के तहत ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि ये शिविर सुनिश्चित करते हैं कि ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पीने का पानी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की दुकानें, मोबाइल नेटवर्क, सड़कें और पुल उपलब्ध हों।
- -साहित्यकारों से साहित्य उत्सवों की प्रासंगिकता पर भी संवाद-रायपुर में साहित्य उत्सव 2026 का आयोजन 23 से 25 जनवरी तकनई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में आयोजित साहित्यिक परिचर्चा में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के रचना-कर्म और साहित्यिक अवदान को याद किया गया। इस अवसर पर साहित्य उत्सवों की प्रासंगिकता पर भी गहन संवाद स्थापित किया गया।रायपुर में 23- 25 जनवरी को आयोजित होने वाले साहित्य उत्सव 2026 के परिप्रेक्ष्य में राजधानी दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में साहित्यिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रायपुर साहित्य उत्सव की वैचारिक दिशा को विस्तार देने के साथ साथ साहित्य से जुड़े ज्वलंत प्रश्नों पर सार्थक चर्चा की।कार्यक्रम में डॉ सच्चिदानंद जोशी ने विनोद कुमार शुक्ल से अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए कहा कि इतने बड़े साहित्यिक व्यक्तित्व से मिलने की अपेक्षा कुछ और थी, लेकिन जब वे उनसे मिले तो अत्यंत आश्चर्य हुआ कि वे कितने सरल और सहज हैं।उन्होंने कहा कि उनकी बातचीत आत्मीयता से भरी होती थी, जिसमें कहीं भी कोई अतिरेक नहीं होता। बिना लाग-लपेट के वे सीधे और स्पष्ट शब्दों में अपनी बात कहते यही उनकी व्यक्तित्व और लेखन की सबसे बड़ी विशेषता थी।छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने विनोद कुमार शुक्ल को याद करते हुए कहा कि युवा उनसे गहराई से आकर्षित रहते थे और उनके यहाँ हमेशा युवाओं की भीड़ लगी रहती थी।श्री शर्मा ने कहा कि अपनी एक मुलाकात के दौरान उन्होंने उनसे पूछा कि आपने युवावस्था में अत्यंत गंभीर लेखन किया और अब बाल साहित्य की ओर क्यों आए। इस पर विनोद कुमार शुक्ल ने उत्तर दिया कि उन्हें लगता है वे बहुत गंभीर लेखन कर चुके हैं, लेकिन नई पीढ़ी के साथ शायद न्याय नहीं कर पाए। अब उन्हें लगता है कि नई पीढ़ी के साथ न्याय करने का अवसर उन्हें बाल साहित्य के माध्यम से मिला है।साहित्यकार अलका जोशी ने विनोद कुमार शुक्ल के रचना-कर्म पर बात करते हुए कहा कि उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि वे मामूली और साधारण स्थितियों में भी सौंदर्य खोज लेते थे।उन्होंने कहा कि नौकर की कमीज में विनोद कुमार शुक्ल ने अत्यंत सहजता के साथ सत्ता के प्रति रोष को व्यक्त किया है, बिना किसी आडंबर के। उनकी रचनाओं में वह अदृश्य व्यक्ति दिखाई देता है, जो अपने गुम हो जाने से बचने की कोशिश करता है।अलका जोशी ने कहा कि चाहे नौकर की कमीज हो या एक दीवार में खिड़की रहती है, उनकी रचनाओं में ऐसे दृश्य आते हैं जहाँ पात्र अपनी सीमित परिस्थितियों के भीतर भी हाथी पर सवारी करने जैसा सपना देखता है। उनकी लेखन-खूबसूरती यह थी कि रचनाओं में दृश्य और परिस्थितियाँ इतनी जीवंत होती थीं कि पाठक धीरे-धीरे उनसे जुड़ता चला जाता था। पाठक की यह इन्वॉल्वमेंट ही उनकी रचनात्मक सफलता का मूल आधार रही।इसके पहले के सत्र में साहित्य उत्सवों में कितना साहित्य विषय पर अपनी बात रखते हुए लेखकअनंत विजय ने कहा कि साहित्य में गहराई अनिवार्य है। गहराई होगी तभी साहित्य को उसके पाठक मिलेंगे और वही साहित्य समय के साथ अपनी स्थायी छाप छोड़ पाएगा।उन्होंने साहित्य उत्सवों की संरचना पर जोर देते हुए कहा कि सत्रों की संरचना में ठोस कंटेंट होना चाहिए, तभी श्रोता और पाठक उनसे जुड़ पाएंगे।अनंत विजय ने यह भी स्पष्ट किया कि रायपुर साहित्य उत्सव पूरी तरह व्यावसायिकता से दूर रहेगा। यदि किसी सत्र में फिल्म जगत से कोई व्यक्ति आमंत्रित किया जाता है, तो उसके साथ मंच पर एक साहित्यकार की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि साहित्य केंद्र में बना रहे।उन्होंने कहा कि सेल्फी संस्कृति साहित्य की दुश्मन है। कई बार साहित्य उत्सवों में फिल्मी हस्तियों को केवल इसलिए बुलाया जाता है ताकि लोग उनके साथ सेल्फी लेने आएं, जबकि इससे साहित्य का मूल उद्देश्य पीछे छूट जाता है।वहीं, साहित्यकार अनिल जोशी ने भी इस विषय पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी एक बार फिर किताबों और साहित्य से जुड़ रही है, जो एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि साहित्य उत्सवों की उपयोगिता अत्यधिक हो सकती है, बशर्ते उनके उद्देश्य स्पष्ट हों।अनिल जोशी ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी साहित्य सम्मेलन की शुरुआत से पहले उसकी प्रासंगिकता पर गंभीर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही आयोजन के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि साहित्य केंद्र में रहे और आवश्यक सावधानियों व मूल्यों का पालन हो, ताकि ऐसे उत्सव वास्तव में साहित्य-संवाद को समृद्ध कर सकें।विनोद कुमार शुक्ल पर बोलते हुए अनिल जोशी ने कहा उनकी लेखनी एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग की तरह है, जिसे समझने के लिए पाठक को ठहरकर देखना और महसूस करना पड़ता है।कार्यक्रम में नई शैली के लेखन पर टिप्पणी करते हुए पूर्व संपादक एवं लेखक प्रताप सोमवंशी ने कहा कि समय के साथ लेखन के स्वरूप में बदलाव आया है और आज नई शैली में साहित्य रचा जा रहा है। लेकिन इसके साथ ही पारंपरिक शैली में लेखन भी निरंतर हो रहा है, जिसे पाठक आज भी पसंद कर रहे हैं और वह समान रूप से पढ़ा जा रहा है।इस अवसर पर रायपुर साहित्य उत्सव समिति के सदस्य एवं मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, रायपुर साहित्य उत्सव समिति के सदस्य संजीव सिन्हा सहित देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकार और विचारक शामिल हुए।
- दुर्ग / जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत 102 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से कुल 2,57,972 मीट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया है। वर्तमान में जिले की 120 राइस मिलों का पंजीयन किया गया है, जिनके माध्यम से डिलीवरी ऑर्डर के जरिए धान का उठाव किया जा रहा है।समितियों से उपार्जित धान के सुरक्षित भंडारण हेतु जिले में धान संग्रहण केंद्रों की कार्ययोजना तैयार की गई है। शासन की योजना के अनुसार दुर्ग जिले के धान संग्रहण केंद्रों में अन्य जिलों से उपार्जित धान का भी भंडारण किया जाएगा।इसी क्रम में कलेक्टर श्री सिंह द्वारा जिले के सभी प्रमुख धान संग्रहण केंद्रों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कोड़ियां, जेवरा-सिरसा, अरसनारा एवं सेलूद स्थित धान संग्रहण केंद्रों में सड़क मरम्मत और समतलीकरण कार्य हेतु मलबा एवं आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।कलेक्टर ने केंद्रों में वाहनों की सुचारू आवाजाही, धान के सुरक्षित भंडारण एवं उचित रख-रखाव को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के समय जिला विपणन अधिकारी एवं संबंधित केंद्र प्रभारी उपस्थित रहे।
- -गायन, नाटक, फाइन आर्ट्स की रंगबिरंगी छटा बिखेरीरायपुर । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में सांस्कृतिक युवा महोत्सव मड़ई 2025 के आज तीसरे दिन प्रदेश के 31 महाविद्यालयों के कृषि छात्रों द्वारा अपनी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया गया। आज की प्रस्तुति में माइम (26 टीम), स्किट (15 टीम), भाषण (26 टीम) वाद-विवाद (27 टीम), पोस्टर मेकिंग (26 टीम), मिट्टी कला (26 टीम), रंगोली (30 टीम), डिजिटल फोटोग्राफी (21 टीम), देश भक्ति गीत गायन (20 टीम), एकल गीत गायन (28 टीम), आदि प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों द्वारा अपनी कला का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया गया। विद्यार्थियों द्वारा विविध लोक नृत्यों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन किया गया। विभिन्न लोक नृत्यों पर विद्यार्थी एवं अन्य दर्शकों ने कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया। इस तरह मड़ई 2025 का तीसरा दिन उत्साह और उमंग से भरपूर रहा। विद्यार्थियों ने कला की रंगबिरंगी छटा बिखेरी और अपने प्रदर्शन से दर्शकों का मन मोह लिया एवं खुब वाहवाही और तालियां बटोरी।चतुर्थ दिवस 29 दिसम्बर को प्रातः 09 बजे से लघु नाटिका, तात्कालिक भाषण, लोक एवं आदिवासी नृत्य तथा पाश्चात्य समूह गीत प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। ‘‘मड़ई-2025’’ का पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह 29 दिसम्बर को अपरान्ह 04 बजे सम्पन्न होगा। समापन समारोह की मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा, कुलपति इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छ.ग.) होंगी तथा समारोह के अध्यक्षता डॉ. गिरीश चंदेल, कुलपति इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय करेंगे। इस अवसर पर डॉ. संजय शर्मा, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, आयोजन सचिव डॉ. सुनिल नाग, प्रतियोगिताओं के प्रभारी, निर्णायकगण तथा टीम मैनेजर्स भी गरिमामयी रूप से उपस्थित रहेंगे।
- रायपुर / उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा के निर्देश एवं मार्गदर्शन में भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना मर्यादित, कवर्धा द्वारा पेराई सत्र 2025-26 के अंतर्गत गन्ना किसानों को अब तक कुल 24.85 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान किया जा चुका है। कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा के सतत मार्गदर्शन में कारखाना प्रबंधन द्वारा गन्ना किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना मर्यादित, कवर्धा द्वारा पेराई सत्र 2025-26 में आज दिनांक तक भारत सरकार द्वारा निर्धारित एफ.आर.पी. दर 329.05 रुपये के अनुसार गन्ना मूल्य का भुगतान किसानों के बैंक खातों में सीधे किया गया है। समय पर भुगतान होने से क्षेत्र के गन्ना किसानों में हर्ष एवं संतोष का वातावरण है।भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना मर्यादित, कवर्धा के प्रबंध संचालक श्री जी.एस. शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान पेराई सत्र 2025-26 के अंतर्गत अब तक 1,05,975 मीट्रिक टन गन्ने की पेराई कर 1,09,565 क्विंटल शक्कर का उत्पादन किया जा चुका है। यह उपलब्धि शेयरधारक गन्ना उत्पादक किसानों के सहयोग एवं कारखाना प्रबंधन के कुशल संचालन का परिणाम है। भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना क्षेत्र के गन्ना किसानों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राज्य शासन की गन्ना नीति के अनुरूप कारखाने द्वारा गन्ना उत्पादकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित कर उनकी आर्थिक स्थिरता को मजबूत किया जा रहा है।किसानों से अपीलकारखाना प्रबंधन द्वारा गन्ना उत्पादक किसानों से अपील की गई है कि वे कारखाने में परिपक्व, साफ-सुथरा, बिना अगवा एवं बिना जड़ वाला गन्ना आपूर्ति करें। इससे शक्कर रिकवरी प्रतिशत में वृद्धि होगी, जिसका सीधा लाभ किसानों को प्राप्त होगा।
- रायपुर / जयंती स्टेडियम में आयोजित पांच दिवसीय हनुमंत कथा के चौथे दिवस रविवार को बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र शास्त्री की कथा में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा शामिल हुए।उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा व्यासपीठ की आरती में भाग लेकर पं. धीरेंद्र शास्त्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल, राजनांदगांव सांसद श्री संतोष पाण्डेय तथा पूर्व सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय भी उपस्थित रहे।इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन धरती की ओर से एवं राज्य सरकार की तरफ से वे पं. धीरेंद्र शास्त्री महाराज के चरणों में नमन और अभिनंदन करते हैं। उन्होंने कहा कि महाराज के छत्तीसगढ़ आगमन से समाज में सकारात्मक चर्चा होती है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे जब भी महाराज के कार्यक्रमों में शामिल हुए हैं, उन्होंने समाज में व्याप्त ऊंच-नीच के भेदभाव को दूर करने के लिए उनके सतत प्रयास देखे हैं।उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि पं. धीरेंद्र शास्त्री समाज में समरसता, एकता और देश को एक साथ आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं। सनातन संस्कृति की प्रतिष्ठा और जन-जागरूकता के लिए उनके प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की भावना है कि महाराज का छत्तीसगढ़ में बार-बार आगमन हो और उनका मार्गदर्शन मिलता रहे।उप मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के मुद्दे पर भी बात करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के समापन के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है और इस दिशा में महाराज की चिंता रहती है और मार्गदर्शन भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने भविष्य में पुनः महाराज के छत्तीसगढ़ आगमन की कामना की।
- -सौर सुजला योजना से जशपुर के 755 किसानों के जीवन में आई नई रोशनी......रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों के हित में निरंतर लिए जा रहे फैसलों का सकारात्मक असर अब गांव–गांव तक दिखाई देने लगा है। सौर सुजला योजना मुख्यमंत्री की ऐसी ही एक दूरदर्शी सौगात है, जिसने जशपुर जिले के किसानों की खेती और किस्मत—दोनों बदलने का काम किया है।दो वर्षो में जिले के 755 किसानों को मिली बड़ी राहतमुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जशपुर जिले में सौर सुजला योजना के तहत 755 किसानों को सोलर सिंचाई पंप की स्वीकृति मिली है। यह सौगात उन किसानों के लिए संजीवनी साबित हो रही है, जो अब तक बारिश और पारंपरिक साधनों पर निर्भर थे। सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों ने सिंचाई को आसान, सुलभ और किफायती बना दिया है।बगीचा के बंधु यादव की सौर सुजला योजना से बदली तकदीर, मुख्यमंत्री का जताया आभारजशपुर जिले के बगीचा तहसील क्षेत्र निवासी बंधु यादव ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की इस सौगात से लाभान्वित किसानों में शामिल हैं। सोलर पंप मिलने के बाद अब वे समय पर सिंचाई कर पा रहे हैं। इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर हुई है और उत्पादन भी बढ़ा है।बंधु यादव कहते हैं कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की यह योजना उनके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आई है।इसी तरह फरसाबहार तहसील के खुटशेरा निवासी दुलार साय भी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। सोलर पंप लगने से उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाया है और अतिरिक्त फसलों की खेती शुरू की है। इससे उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हुई है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।कम लागत, अधिक उत्पादन — किसानों को मिला आत्मविश्वासमुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सोच के अनुरूप सौर सुजला योजना ने किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन का रास्ता दिखाया है। डीज़ल और बिजली पर होने वाला खर्च कम हुआ है, वहीं पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। यह योजना खेती को आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।दो साल में दिखा सुशासन का असरबीते दो वर्षों में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन में किसानों को केंद्र में रखकर कई योजनाएं धरातल पर उतरी हैं। सौर सुजला योजना उनमें से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसने जशपुर जिले के सैकड़ों किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की यह सौगात आज जशपुर के किसानों के चेहरे पर मुस्कान और खेतों में हरियाली का प्रतीक बन चुकी है।
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रायपुर।, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में प्रख्यात जननायक कुशाभाऊ ठाकरे जी की पुण्यतिथि पर उनके छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर सांसद श्री संतोष पाण्डेय, विधायक श्री प्रबोध मिंज, विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कुशाभाऊ ठाकरे जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रहितऔर समाज-सेवा के लिए समर्पित रहा। वे सत्ता-प्राप्ति को उद्देश्य नहीं, बल्कि जनसेवा को राजनीति का परम लक्ष्य मानते थे।मूल्य-आधारित राजनीति, चरित्र, अनुशासन और कर्मठता उनके सार्वजनिक जीवन की पहचान रही।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कुशाभाऊ ठाकरे जी ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। लोकतांत्रिक संस्कारों के प्रसार में उनकी भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी। वे सरलता और आत्मीयता के माध्यम से लोगों के हृदय से जुड़ने वाले विरले नेता थे।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के साथ कुशाभाऊ ठाकरे जी का गहरा और आत्मीय संबंध रहा है। उनके जीवन से यह प्रेरणा मिलती है कि राजनीति का मूल उद्देश्य सेवा, राष्ट्रहित एवं समाज कल्याण ही होना चाहिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि कुशाभाऊ ठाकरे जी की पावन स्मृतियाँ हम सबके लिए प्रेरणास्रोत हैं और हमें जनकल्याण के कार्यों में सदैव सक्रिय रहने की प्रेरणा देती रहेंगी।
- -वीबी-जी राम जी अधिनियम से पारदर्शी व्यवस्था एवं समयबद्ध मजदूरी भुगतान होंगे सुनिश्चित - उप मुख्यमंत्री श्री शर्मारायपुर। उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने शनिवार को अपने निवास कार्यालय में जिला पंचायत अध्यक्षों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्षों ने अपने क्षेत्रों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और अपेक्षाओं को उपमुख्यमंत्री के समक्ष रखा तथा मानदेय, भ्रमण-यात्रा, आवास एवं अन्य भत्तों में वृद्धि, उचित सुरक्षा व्यवस्था और वाहन किराए में संशोधन जैसी मांगों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने सभी मांगों को गंभीरतापूर्वक सुना और उन पर विस्तृत चर्चा की।इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) वीबी जी राम जी अधिनियम 2025 सहित जिला पंचायतों से जुड़े प्रमुख विकासात्मक विषयों पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में जिला पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। योजनाओं का वैज्ञानिक नियोजन, आधुनिक तकनीक का उपयोग और जनप्रतिनिधियों का सतत क्षमता विकास ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस और सकारात्मक बदलाव लाएगा।उप मुख्यमंत्री ने बताया कि नए अधिनियम के तहत अब ग्रामीण परिवारों को 125 दिवस तक रोजगार की गारंटी मिलेगी। जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना, सौर ऊर्जा और आजीविका संवर्धन पर विशेष जोर दिया गया है, साथ ही कमजोर वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से समयबद्ध मजदूरी भुगतान भी सुनिश्चित किया जाएगा।उन्होंने आगे बताया कि इस अधिनियम में आवास, पेयजल, स्वच्छता एवं विद्युतीकरण जैसे कार्यों को भी शामिल किया गया है, जिससे गांवों में अधोसंरचना निर्माण को नई गति मिलेगी। ग्राम सभा द्वारा समग्र योजना निर्माण के प्रावधान से कार्यों के दोहराव पर रोक लगेगी और संतुलित विकास सुनिश्चित होगा।नवीन अधिनियम में पंचायतों को भविष्य के लिए तैयार करते हुए जल सुरक्षा, आजीविका से जुड़ी अधोसंरचनाओं के विकास तथा मौसमी आपदाओं से बचाव पर विशेष फोकस किया गया है। किसानों के हित में राज्य सरकारों को फसल बुवाई और कटाई के चरम समय में प्रतिवर्ष 60 दिवस तक कार्य स्थगन की अधिसूचना जारी करने का प्रावधान भी रखा गया है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित राहत पहुंचाने हेतु विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। बैठक में जिला पंचायत विकास निधि, जनपद पंचायत विकास निधि, मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना, महतारी सदन निर्माण, श्रद्धांजलि योजना, अटल डिजिटल सुविधा केंद्र और क्षमता विकास योजना पर भी अधिकारियों द्वारा विस्तृत जानकारी दी गई। जिला पंचायत अध्यक्षों ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपने सुझाव साझा किए।इसके साथ ही समर्थ पंचायत पोर्टल के माध्यम से स्थानीय निकायों के करों की यूपीआई आधारित संग्रहण व्यवस्था, प्रदर्शन आधारित अनुदान प्रणाली तथा ग्राम संपदा मोबाइल एप द्वारा परिसंपत्तियों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों के लिए आयोजित एक्सपोजर विजिट कार्यक्रमों की रूपरेखा से भी अवगत कराया।
- रायपुर। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी स्वर्गीय प्रखर पांडेय को आज उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने उनके भिलाई स्थित निवास पहुँचकर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शोक संतप्त परिवार से भेंट कर उन्हें ढांढस बंधाया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय प्रखर पांडेय छत्तीसगढ़ पुलिस के एक कर्तव्यनिष्ठ, अनुशासित और संवेदनशील अधिकारी थे। उनका सम्पूर्ण जीवन जनसेवा और कर्तव्यपालन को समर्पित रहा। उन्होंने परिजनों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार और पुलिस विभाग इस दुःख की घड़ी में परिवार के साथ खड़ा है। उल्लेखनीय है कि स्वर्गीय श्री प्रखर पांडेय 2009 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी थे और अपने सेवाकाल में छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में एक बेहतरीन अधिकारी के रूप में उनकी पहचान थी। उप मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।
- -बोरी बंधान निर्माण से बढ़ी वर्षा जल संचयन क्षमता-"मोर गाँव–मोर पानी” अभियान से मुंगेली जिले में दिख रहा सकारात्मक बदलावमुंगेली । जिले में कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार के मार्गदर्शन में “मोर गाँव–मोर पानी” महाअभियान के अंतर्गत जल संरक्षण एवं भू-जल स्तर सुधार की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। जनसहभागिता को केंद्र में रखकर ग्रामीण क्षेत्रों में सामूहिक श्रमदान से बोरी बंधान निर्माण किया जा रहा है, जिससे वर्षा जल को नालों में बहने से रोककर स्थानीय स्तर पर संरक्षित किया जा सके। बरसात से पूर्व जिले की तीनों जनपद पंचायतों लोरमी, मुंगेली एवं पथरिया में कुल 121 चिन्हित स्थलों पर श्रमदान के माध्यम से बोरी बंधान बनाए गए हैं। इन संरचनाओं से न केवल वर्षा जल संचयन में वृद्धि हुई है, बल्कि भू-जल रिचार्ज, मृदा संरक्षण एवं खेतों में नमी बनाए रखने में भी मदद मिल रही है। प्रशासन द्वारा अन्य उपयुक्त स्थलों की पहचान कर ग्रामीणों को आगे आकर श्रमदान हेतु प्रेरित किया जा रहा है।जिले के 168 गांवों में भू-जल स्तर 200 फीट तक नीचे चले जाने से पेयजल संकट की स्थिति बन रही है। इसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार एवं जिला सी.ई.ओ. श्री प्रभाकर पांडेय के मार्गदर्शन में “मोर गाँव–मोर पानी” महाअभियान की शुरुआत की गई है, ताकि वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण गांवों में ही किया जा सके।महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत सैंड फिल्टर, आजीविका डबरी, सोखता गड्ढा, वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप गड्ढा, वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं एवं भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग जैसे कार्यों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन कार्यों के प्रति ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रचार-प्रसार अभियान भी चलाया गया।प्रत्येक ग्राम पंचायत में गठित जल पंचायत समिति, महिला स्व-सहायता समूहों, ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई है। संगोष्ठियों के माध्यम से गिरते जल स्तर के कारणों—अत्यधिक दोहन, जल निकासी की कमी, वर्षा जल संचयन का अभाव एवं वनों की कटाई—पर चर्चा की गई।ग्रामीणों को खेत-तालाब निर्माण, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन एवं घरों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं बनाने के लिए प्रेरित किया गया। GIS टूल्स के माध्यम से भू-जल स्थिति की जानकारी देकर वॉटर बजटिंग की अवधारणा से भी अवगत कराया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को भी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।अभियान के अंतर्गत 600 इच्छुक लाभार्थियों का चयन आजीविका डबरी निर्माण हेतु किया गया है। इन डबरियों से सब्जी उत्पादन, मछली पालन, मुर्गी पालन एवं दलहन-तिलहन खेती के माध्यम से प्रति परिवार लगभग एक लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय सृजित होने की संभावना है, जिससे ग्रामीण परिवार आत्मनिर्भर बन सकेंगे।कलेक्टर ने कहा कि “वर्तमान समय में जल संरक्षण सबसे बड़ी आवश्यकता है। ‘मोर गाँव–मोर पानी’ अभियान के माध्यम से जनसहभागिता के साथ भू-जल स्तर सुदृढ़ करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।” जिला पंचायत सीईओ ने कहा कि “जब समुदाय स्वयं जल संरक्षण की जिम्मेदारी निभाता है, तब उसके परिणाम दीर्घकालिक और प्रभावी होते हैं।”समग्र रूप से “मोर गाँव–मोर पानी” अभियान प्रशासन, समुदाय और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से जल संरक्षण का एक अनुकरणीय मॉडल बनकर उभर रहा है, जो भविष्य में जिले को जल-सुरक्षा की दिशा में मजबूती प्रदान करेगा।
- रायपुर। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने आज सूरजपुर जिले में दो सड़क विकास कार्यों को नई गति दी। उन्होंने भटगांव विधानसभा अंतर्गत ग्राम शिवसागरपुर में कासलगिरी से शिवसागरपुर तक 1.4 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण कार्य का भूमिपूजन कर कार्य का शुभारंभ किया। इस सड़क निर्माण के लिए शासन द्वारा 119 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।इसके पश्चात मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने ग्राम महेशपुर में 5.80 किलोमीटर लंबी सड़क के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य के प्रारंभ अवसर पर पूजा-अर्चना कर निर्माण कार्य की शुरुआत की। यह सड़क सिलफीली राष्ट्रीय राजमार्ग-43 से महेशपुर होते हुए लटोरी तक जाती है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए शासन ने 1269 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी है।इस अवसर पर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि सुदृढ़ सड़क नेटवर्क से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण एवं दूरस्थ अंचलों में आधारभूत संरचना के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, जिला एवं स्थानीय प्रशासन के अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
- -उन्नत तकनीक अपनाकर प्राप्त कर रहे दोगुना उत्पादनमुंगेली ।विकासखंड पथरिया अंतर्गत ग्राम टिकैतपेण्ड्री निवासी किसान श्री भूखनलाल सोंचे जिले के उन प्रगतिशील किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने परंपरागत खेती से आगे बढ़कर वैज्ञानिक एवं उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाया और सीमित संसाधनों में भी उत्कृष्ट परिणाम हासिल किए। लगभग 0.806 हेक्टेयर कृषि भूमि पर खेती करने वाले श्री सांचे की कहानी आज अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।श्री भूखनलाल सोंचे ने बताया कि पहले वे परंपरागत तरीकों से खेती करते थे, जिससे धान का उत्पादन अपेक्षाकृत कम होता था और मेहनत के अनुरूप लाभ नहीं मिल पाता था। उत्पादन बढ़ाने की चाह में उन्होंने कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री गेंदलाल पात्रे एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री एल. के. कौशले से संपर्क किया। अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती की दिशा में कदम बढ़ाया। अधिकारियों के मार्गदर्शन में किसान श्री सांचे ने खेत की ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई कराई, जिससे भूमि की उर्वरता में सुधार हुआ। बोनी से पूर्व बीज को ट्राइकोडर्मा से उपचारित किया गया तथा प्रमाणित बीजों का उपयोग किया गया। इसके साथ ही फसल की विभिन्न अवस्थाओं में कल्चर प्रयोग, नैनो यूरिया एवं डी.ए.पी. का छिड़काव किया गया, जिससे पौधों की बढ़वार बेहतर हुई और रोग-कीट का प्रकोप कम हुआ।इन सभी वैज्ञानिक तरीकों का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि श्री सोंचे को प्रति एकड़ 24 से 25 क्विंटल धान का उत्पादन प्राप्त हुआ, जो परंपरागत खेती की तुलना में लगभग दोगुना है। अधिक उत्पादन से न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई, बल्कि खेती के प्रति उनका आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ। आज श्री भूखनलाल सोंचे की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। उन्होने बताया कि यदि किसान कृषि विभाग की सलाह लेकर वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाएं, तो कम भूमि में भी बेहतर उत्पादन और अच्छा मुनाफा संभव है।
- दंतेवाड़ा। कार्यालय तहसीलदार गीदम द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार गीदम विकासखंड अंतर्गत ग्राम हाउरनार में स्लरी पाइप लाइन निर्माण कार्य के दौरान दिनांक 28 जुलाई 2025 को निर्मित गड्ढे में गिरने से एक बालक की आकस्मिक एवं दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु की घटना घटित हुई थी। उक्त प्रकरण वर्तमान में न्यायालय अनुविभागीय दंडाधिकारी (राजस्व), गीदम में विचाराधीन है। घटना पर जिला प्रशासन द्वारा तत्काल संज्ञान लेते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की गई।राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) के खंड-6, क्रमांक-4 के प्रावधानों के अंतर्गत पीड़ित परिवार को रुपये 4,00,000 (चार लाख मात्र) की अनुग्रह सहायता राशि स्वीकृत कर आरटीजीएस के माध्यम से विधिवत प्रदान की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त संबंधित कंपनी एनएमडीसी एलएंडटी द्वारा पीड़ित परिवार को रुपये 5,00,000 (पांच लाख मात्र) की आर्थिक सहायता चेक के माध्यम से दी गई है।27 दिसंबर को तहसीलदार श्री किशन मिश्रा, एनएमडीसी के वरिष्ठ प्रबंधक श्री अनिमेश झा एवं एलएंडटी कंपनी के अधिकारी श्री विनय सिंह द्वारा पीड़िता के निवास पर जाकर उनसे मुलाकात की गई। इस दौरान स्थायी नौकरी एवं बच्चों के पालन-पोषण से संबंधित मांगों पर चर्चा की गई। पीड़िता द्वारा अवगत कराया गया कि उनके परिजन बचेली में निवासरत हैं, जो सोमवार को पहुंचकर जिला प्रशासन, एनएमडीसी एवं स्लरी परियोजना के अधिकारियों के साथ संयुक्त चर्चा करेंगे। कलेक्टर के निर्देशानुसार अपर कलेक्टर, एनएमडीसी के अधिकारी, पीडि़त पक्ष एवं उनके परिजनों के साथ बैठक निर्धारित की गई है, जिसकी जानकारी पीडि़ता को दे दी गई है। एनएमडीसी के अधिकारियों द्वारा संविदा अथवा अस्थायी नौकरी प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की गई है। इस संबंध में अंतिम निर्णय आगामी बैठक में पीडि़ता एवं संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा उपरांत लिया जाएगा।
- -महिला किसान मीना साहू ने सुगमता से बेचा धानबलौदाबाजार-भाटापारा /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की किसान-हितैषी नीतियों का सकारात्मक प्रभाव अब प्रदेश के गांव-गांव में दिखने लगा है। राज्य सरकार द्वारा धान खरीदी की सुव्यवस्थित व्यवस्था और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किए जाने के फैसले ने किसानों के जीवन में आर्थिक खुशहाली का नया संचार किया है।सकरी धान उपार्जन केंद्र पहुँची महिला किसान मीना साहू ने धान विक्रय के सम्बन्ध में बताया कि उनके पास कुल 1.5 एकड़ कृषि भूमि है जिससे उन्होंने 70 कट्टा धान का विक्रय बेहद सुगमतापूर्वक और बिना किसी परेशानी के पूरा किया है। मीना साहू ने उपार्जन केंद्र में की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि बारदाने की पर्याप्त उपलब्धता और तौल प्रक्रिया में पारदर्शिता की वजह से उन्हें अपनी उपज बेचने में काफी मदद मिली। इसके साथ ही सरकार द्वारा केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए पेयजल और छाया के जो पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, वह भी सराहनीय हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सरकार द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदना छोटे और सीमांत किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस उचित मूल्य से न केवल किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम मिल रहा है, बल्कि इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी पहले से अधिक मजबूत और सुदृढ़ हो रही है। राज्य सरकार की इन नीतियों को पूरी तरह से किसान-हितैषी बताते हुए मीना साहू ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का हृदय से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री के संकल्प से आज राज्य का किसान आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। सुशासन की इस नई व्यवस्था ने किसानों के मन में विश्वास जगाया है कि सरकार उनके हक और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह समर्पित है। यह प्रगतिशील कदम राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने और किसानों के भविष्य को सुरक्षित बनाने में मील का पत्थर साबित हो रहा है।
- बलौदाबाजार, / जिले में धान खरीदी कार्य को बेहतर और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर दीपक सोनी के निर्देश पर एसडीएम एवं तहसीलदार द्वारा उपार्जन केंद्रों एवं संग्रहण केंद्रों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान किसानों की शिकायतों का निराकरण, व्यवस्थाएं दुरुस्त एवं कमियों को दूर करने के निर्देश दिये जा रहे हैं।एसडीएम सिमगा अतुल शेट्टे एवं तहसीलदार ने समिति हथबंद एवं संग्रहण केन्द्र उड़ेला व रिंगनी का निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया गया कि संग्रहण केंद्रों में साफ सफाई का कार्य जारी है, विद्युत कनेक्शन उपलब्ध है एवं फेंसिंग मरम्मत की आवश्यकता है।एसडीएम भाटापारा श्यामा पटेल ने संग्रहण केंद्र देवरी का निरीक्षण किया। संग्रहण केन्द्र में पानी टंकी रिपेयर, एंट्री गेट वाली सड़क में समतलीकरण,स्टैक ठीक करने तथा सीसीटीवी कैमरे को रिपेयर कराने की आवश्यकता है। इसीतरह एसडीएम कसडोल रामरतन दुबे ने संग्रहण केंद्र कसडोल का निरिक्षण मंडी और संग्रहण प्रभारी की उपस्थिति मे किया। केन्द्र धान संग्रहण क़े लिए तैयार है। सीसीटीवी कैमरा को ठीक किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा की जा रही इस सतत कार्रवाई से खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी हुई है और बिचौलियों पर लगाम कसने के साथ-साथ वास्तविक किसानों को सुगमता से लाभ मिल रहा है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि पूरी खरीदी प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक टीम मुस्तैद रहेगी। किसी भी केन्द्र में कोई गडबड़ी पाए जाने पर सम्बधित के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
- रायपुर,। रायपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत मतदाता सूची में गड़बड़ी की प्राप्त शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन द्वारा जांच समिति का गठन किया गया है। यह मामला भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिले में संचालित विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) 2025 के अंतर्गत सामने आया है।धरसीवां तहसील के बिरगांव क्षेत्र स्थित गाजी नगर की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की शिकायत प्राप्त होने के पश्चात अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-48 रायपुर ग्रामीण द्वारा तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया है।जांच दल में तहसीलदार रायपुर श्री राममूर्ति दीवान, नगर निगम बीरगांव के राजस्व उप निरीक्षक श्री शैलेन्द्र निर्मलकर तथा ग्राम बीरगांव के श्री महेश कुमार सोनवानी को शामिल किया गया है।जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार जांच दल द्वारा भाग संख्या 63 एवं 64 में मतदाता सूची में त्रुटि होने संबंध में मौके पर मतदाताओं का फील्ड वेरिफिशिएशन किया गया जिसमें मतदाता इसी क्षेत्र में निवासरत पाएं गए जिनके मकान संख्या में परिवर्तन के लिए सभी से फार्म 8 भरवा कर मकान संख्या ठीक किया जा रहा है।
- -नृत्य, गायन, और अभिनय की मनमोहक प्रस्तुतिरायपुर । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में आयोजित सांस्कृतिक युवा महोत्सव मड़ई 2025 के दूसरे दिन शनिवार को यहां कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में एकल अभिनय, (25 टीम) मिमिक्री, (15 टीम) क्विज (31 टीम) तात्कालिक भाषण, (31 टीम) भाशण, (27 टीम) ऑन दी स्पॉट पेंटिंग, (28 टीम) कोलाज मेकिंग, (25 टीम) कार्टूनिंग (24 टीम) एकांकी नाटक, (12 टीम) समूह गायन, (27 टीम) लोक एवं आदिवासी नृत्य (14 टीम) आदि प्रतियोगिताओं में विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा उत्साहपूर्वक भाग लिया गया। विद्यार्थियों ने मनमोहक, आकर्षक एवं विशिश्ट प्रस्तुतियां दी।युवा कलाकारों ने एकांकी नाटक के तहत विभिन्न समसामयिक मुद्दों यथा पर्यावरण संरक्षण, प्रौद्योगिकी विकास, नारी सशक्तिकरण, स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक असमानता एवं पौराणिक विशयों पर प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी कला एवं प्रतिभा का प्रदर्शन किया और दर्शकों की वाहवाही बटोरीं। मड़ई 2025 के अंतर्गत आयोजित समूह नृत्यों की रंगा-रंग प्रस्तुतियों ने लोगों का मन मोह लिया। विभिन्न प्रतिभागियों ने मिमिक्री, क्विज तात्कालिक भाषण, भाशण, पेंटिंग, कोलाज मेकिंग, कार्टूनिंग मेकिंग आदि के माध्यम से अपने भावों को प्रस्तुत किया।मड़ई 2025 में 28 दिसम्बर को प्रातः 09 बजे से मूक अभिनय, भाषण, लघु नाटिका, वाद-विवाद, रंगोली, पोस्टर मेकिंग, क्ले मॉडलिंग, डिजिटल फोटोग्राफी, एकांकी, देश भक्ति गीत गायन, पश्चिमी एकल गीत गायन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। दोपहर 03 बजे से लघु नाटिका, वाद-विवाद, मेहंदी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। 29 दिसम्बर को प्रातः 09 बजे से लघु नाटिका, तात्कालिक भाषण, लोक एवं आदिवासी नृत्य तथा पाश्चात्य समूह गीत प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। 29 दिसम्बर को अपरान्ह 04 बजे अंतर महाविद्यालयीन युवा महोत्सव ‘‘मड़ई-2025’’ का समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर डॉ. संजय शर्मा, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, आयोजन सचिव डॉ. सुनिल नाग, प्रतियोगिताओं के प्रभारी, निर्णायकगण तथा टीम मैनेजर्स उपस्थित थे।
- बिलासपुर। खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने तथा कृषकों की आय में दीर्घकालीन वृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केन्द्र एवं राज्य शासन द्वारा संयुक्त रूप से संचालित नेशनल मिशन ऑन एडीबल ऑयल–ऑयल पाम योजना अंतर्गत ऑयल पाम रोपण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के तहत ऑयल पाम रोपण करने वाले कृषकों को केन्द्र सरकार द्वारा देय अनुदान के अतिरिक्त राज्य शासन द्वारा विभिन्न घटकों में अतिरिक्त (टॉप-अप) अनुदान प्रदान किया जा रहा है।ऑयल पाम एक दीर्घकालीन, कम श्रम एवं अधिक उत्पादकता वाली फसल है, जिसमें रोग प्रकोप की संभावना न्यूनतम रहती है। एक बार रोपण के पश्चात चौथे वर्ष से उत्पादन प्रारंभ होकर 25 से 30 वर्षों तक निरंतर उपज प्राप्त होती है। यह फसल पारंपरिक तिलहन फसलों की तुलना में प्रति हेक्टेयर 4 से 6 गुना अधिक तेल उत्पादन क्षमता रखती है, जिससे कृषकों को स्थायी आर्थिक लाभ प्राप्त होता है।उपसंचालक उद्यान डॉ. कमलेश दीवान ने जानकारी दी कि ऑयल पाम की अधिक प्रारंभिक लागत एवं 3 से 4 वर्ष की गेस्टेशन अवधि को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन द्वारा केन्द्र सरकार के न्यूनतम 1.30 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान के अतिरिक्त टॉप-अप अनुदान का प्रावधान किया गया है, जिससे कृषकों को ऑयल पाम रोपण हेतु प्रोत्साहन मिल सके।राज्य शासन द्वारा रखरखाव मद में पूर्व निर्धारित 5,250 रुपये प्रति हेक्टेयर के अनुदान में 1,500 रुपये की वृद्धि करते हुए कुल 6,750 रुपये का अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इसी प्रकार अंतरवर्तीय फसलों हेतु अतिरिक्त वृद्धि के साथ कुल 10,250 रुपये, ड्रिप सिंचाई अपनाने वाले कृषकों को 8,835 रुपये की अतिरिक्त राशि सहित कुल 22,765 रुपये तथा पौधों एवं अंतरवर्तीय फसलों को जानवरों से सुरक्षा हेतु फेंसिंग के लिए प्रति हेक्टेयर 54,485 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है।इस प्रकार राज्य शासन द्वारा रखरखाव, फेंसिंग, अंतरवर्तीय फसल एवं ड्रिप मद में कुल 69,620 रुपये तक का अतिरिक्त अनुदान ऑयल पाम रोपण करने वाले कृषकों को उपलब्ध कराया जा रहा है।योजना से संबंधित अधिक जानकारी एवं मार्गदर्शन के लिए कृषक भाई-बहन उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों एवं अधिकृत प्रतिनिधि कंपनी से संपर्क कर सकते हैं, जिनमें श्री राकेश सेन्ड्रे, प्रभारी उद्यान अधीक्षक बिल्हा (मोबाइल 7000181970), श्री जैनेन्द्र कुमार पैकरा, उद्यान विकास अधिकारी तखतपुर (मोबाइल 6265981957), श्री साधूराम नाग, वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी कोटा (मोबाइल 9165490297), श्रीमती निशा चंदेल, प्रभारी उद्यान अधीक्षक मस्तूरी (मोबाइल 7000441324), श्री संजीव गाईन, प्रबंधक प्रीयूनिक एशिया प्रा. लि. (मोबाइल 9630053999) तथा श्री शिव भास्कर, क्षेत्रीय प्रतिनिधि प्रीयूनिक एशिया प्रा. लि. (मोबाइल9131004397) शामिल हैं।
- दुर्ग / परूशी एनर्जी, सेक्टर-07, भिलाई में अडानी टोटल गैस लिमिटेड द्वारा 27 दिसम्बर को सीएनजी मॉकड्रिल का सफल आयोजन किया गया। इस मॉकड्रिल का उद्देश्य गैस आपूर्ति के दौरान उत्पन्न होने वाली आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी का आकलन करना तथा कर्मचारियों को सुरक्षा एवं सतर्कता के प्रति जागरूक करना था। मॉकड्रिल में जिला प्रशासन, जिला फायर टीम एवं अडानी टोटल गैस लिमिटेड के अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। अभ्यास के दौरान वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप आपात स्थिति का प्रदर्शन किया गया, जिसमें संबंधित टीमों द्वारा त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की गई।अडानी टोटल गैस लिमिटेड के अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार की मॉकड्रिल्स समय-समय पर आयोजित की जाती हैं, जिससे किसी भी आकस्मिक स्थिति में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। इस अवसर पर यह भी जानकारी दी गई कि शीघ्र ही जिले में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। वर्तमान में जिले के प्रमुख नगर क्षेत्रों में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है तथा आगामी चरण में यह सुविधा पाइपलाइन के माध्यम से घर-घर तक पहुँचाई जाएगी।
- -वार्षिक आमसभा में आय-व्यय का लेखजोखा पेशटी सहदेवभिलाई नगर। छत्तीसगढ़ के तिरुमला कहे जाने वाले सेक्टर 05 स्थित बालाजी मंदिर में आंध्र साहित्य समिति ने तिरुपति की तरह एक सुव्यवस्थित कल्याण कट्टा (केश कर्तन केंद्र) बनाया है। इसका निर्माण होने से आर्थिक रूप से कमजोर तबके के भक्तों के साथ-साथ आम लोगों को भी काफी सुविधा हो जाएगी, जो तिरुपति जाकर केश समर्पण करने नहीं जा पाते। इसके अलावा मुंडन कराने वाले श्रद्धालुओं के लिए साफ-सुथरे स्नानगृह का भी निर्माण किया गया है। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग- अलग बने इस केंद्र में फिलहाल हर दिन दो से पांच भक्तगण केश समर्पित करते हैं। स्मरणीय है कि तिरुपति मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों में प्रचीन समय से श्रद्धालु पूरे भक्ति भाव से मन्नतें पूर्ण होने पर अथवा मन्नतें मांगने अपने केश समर्पित करते हैं।मंदिर की सुरक्षा की कड़ी व्यवस्थाआंध्र भवन में रविवार को हुई वार्षिक आम-सभा में समिति के अध्यक्ष पीवी राव ने बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए यह बात कही। हाल ही में मंदिर में चोरी के प्रयास को लेकर लोगों के सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में 25 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और दो गार्ड तैनात किए गए हैं। इनकी सतर्कता के कारण ही चोरी की वारदात अंजाम नहीं पाई। चोरी की कोशिश के फुटेज भी पुलिस को सौप दिए गए हैं, जिनके आधार पर पुलिस ने तफ्तीश की। आजीवन सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग पर राव ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में 10 किलोमीटर मीटर दायरे में रहने वाले ही समिति के सदस्य हैं, इसका दायरा बढ़ाने से बायलाॅज में परिवर्तन करना पड़ सकता है, जो कि आसान नहीं है।मंगलवार को वैकुंठ एकादशीसचिव पीएस राव ने समिति के कार्यों को साझा करते हुए बताया कि गत महीने पहली बार बालाजी मंदिर में भव्यता के साथ डोलोत्सव मनाया गया, जिसमें पीतल से बने पालने में भगवान बालाजी और श्रीदेवी-भूदेवी की उंजल सेवा की गई। उसी भव्यता के साथ इसी मंगलवार को वैकुंठ एकादशी मनाई जाएगी, जिसमें उन्होंने सभीसे शामिल होने की अपील भी की। समिति की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हर साल मंदिर में उगादि, संक्रांति तथा विजयादशमी पर बड़े-बड़े धार्मिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न होते हैं, जिनके आप सभी प्रत्यक्षदर्शी हैं। धार्मिक आयोजनों के अलावा पिछली बार युवक-युवती परिचय सम्मेलन भी हुआ, जिसमें तीन सौ लोगों ने पंजीयन कराया। इससे पहले कोषाध्यक्ष टीवीएन शंकर ने पिछले वित्त वर्ष के आय- व्यय का लेखाजोखा भी पेश किया।
- रायपुर। प्रशिक्षु भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा से उनके निवास पर सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने प्रशिक्षु अधिकारियों से राज्य की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक दक्षता और आधुनिक पुलिसिंग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने प्रशिक्षु अधिकारियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ईमानदारी, संवेदनशीलता और सेवा-भाव के साथ कार्य करना ही एक सफल पुलिस अधिकारी की पहचान है। उन्होंने कहा कि जनविश्वास आधारित पुलिसिंग से ही कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जा सकता है।प्रतिनिधि दल के साथ आईजी श्री अजय यादव, एसपी श्री अभिषेक पल्लव एवं एसएसपी श्री पंकज शुक्ला, प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी श्री आदित्य कुमार, सुश्री अंशिका जैन, श्री प्रतीक दादा साहेब एवं सुश्री मानसी शामिल थे। प्रशिक्षु अधिकारियों ने उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा के साथ अपने प्रशिक्षण के अनुभव भी साझा किए।उप मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षु अधिकारियों से अपेक्षा व्यक्त की कि वे फील्ड पोस्टिंग के दौरान जनसमस्याओं के त्वरित समाधान, कानून के निष्पक्ष पालन और मानवाधिकारों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पुलिस बल को आधुनिक, सक्षम और जनोन्मुखी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
- रायपुर ।प्रदेश में सरकार की किसान हितैषी नीतियों से और कृषि विभाग के उचित मार्गदर्शन से किसानों को नई दिशा मिल रही है। ऐसे ही जिला बेमेतरा के ग्राम अकलवारा के प्रगतिशील कृषक श्री संतोष साहू ने इस वर्ष खेती के क्षेत्र में एक सराहनीय, दूरदर्शी और अनुकरणीय निर्णय लेकर यह सिद्ध कर दिया है कि सही फसल चयन और वैज्ञानिक खेती पद्धतियों को अपनाकर कम संसाधनों में भी अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है। परंपरागत रूप से ग्रीष्मकाल में धान की खेती करने वाले श्री साहू ने इस बार ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर 5 एकड़ क्षेत्र में चने (दलहन) की फसल लेकर जल संरक्षण, लागत नियंत्रण और आय वृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है।ग्रीष्मकालीन धान की खेती में अत्यधिक मात्रा में पानी, बिजली, डीज़ल तथा श्रम की आवश्यकता होती है। लगातार गिरते भू-जल स्तर, बढ़ती उत्पादन लागत और सीमित संसाधनों को ध्यान में रखते हुए श्री संतोष साहू ने फसल परिवर्तन का निर्णय लिया। कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कृषि वैज्ञानिकों की सलाह, साथ ही शासन द्वारा संचालित फसल विविधीकरण एवं दलहन प्रोत्साहन योजनाओं से प्रेरित होकर उन्होंने कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली चना फसल को अपनाया।किसान श्री साहू बताते है कि चना फसल की खेती में आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों का समुचित उपयोग किया, जिसमें प्रमुख रूप से लगभग 5 एकड़ क्षेत्र में समय पर बुवाई, उन्नत एवं प्रमाणित चना बीज का चयन, संतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरक एवं जैविक खाद का प्रयोग, आवश्यकता अनुसार सीमित सिंचाई, जिससे जल की बचत हुई, कीट एवं रोगों की रोकथाम हेतु नियमित निगरानी एवं समय पर उपचार। इन वैज्ञानिक उपायों के परिणामस्वरूप खेत में चने की फसल की बढ़वार अत्यंत संतोषजनक है और वर्तमान स्थिति को देखते हुए उच्च गुणवत्ता की अच्छी उपज मिलने की पूरी संभावना है।चना फसल अपनाने से जहां एक ओर ग्रीष्मकालीन धान की तुलना में पानी की खपत में भारी कमी आई है, वहीं दूसरी ओर सिंचाई, बिजली और श्रम लागत भी काफी घट गई है। चना एक दलहनी फसल होने के कारण यह मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर भूमि की उर्वरता बढ़ाने में भी सहायक है। बाजार में चने की मांग और अच्छे भाव को देखते हुए श्री संतोष साहू को इस वर्ष अधिक शुद्ध लाभ प्राप्त होने की पूरी उम्मीद है।श्री संतोष साहू का यह प्रयास क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का उदाहरण बन रहा है। यह पहल यह स्पष्ट संदेश देती है कि यदि किसान परंपरागत फसलों के स्थान पर परिस्थितियों के अनुरूप दलहन एवं कम पानी वाली फसलों को अपनाएं, तो वे न केवल जल संरक्षण में योगदान दे सकते हैं बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ कर सकते हैं।श्री संतोष साहू ने अपनी इस सफलता के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ शासन की किसान हितैषी नीतियों, कृषि विभाग के मार्गदर्शन तथा जिला प्रशासन के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा समय-समय पर दी जा रही तकनीकी सलाह, प्रशिक्षण, बीज उपलब्धता एवं योजनाओं की जानकारी से किसानों को नई दिशा मिल रही है और वे आधुनिक व टिकाऊ खेती की ओर आगे बढ़ रहे हैं। ग्राम अकलवारा के कृषक श्री संतोष साहू की यह सफलता की कहानी यह सिद्ध करती है कि सही फसल चयन, वैज्ञानिक प्रबंधन और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग से खेती को लाभकारी एवं टिकाऊ बनाया जा सकता है। ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर चना जैसी दलहनी फसल अपनाकर उन्होंने जल संरक्षण, लागत में कमी और बेहतर आय का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह प्रयास न केवल जिले बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणादायक है और टिकाऊ कृषि की दिशा में एक मजबूत कदम है।



























