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नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वर्ष 2025 के पहलगाम हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में आतंकवादियों के खिलाफ अभियान चला रहे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों के लिए सर्दियों के कपड़ों और उपकरणों के लिए एक खास कोष मंजूर किया है। आधिकारिक सूत्रों ने एक न्यूज़ एजेंसी' को बताया कि कुछ सप्ताह पहले अर्द्धसैन्य बल को 4.54 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की गई है। इस धनराशि से करीब 600 जवानों के लिए ठंड से बचाव वाले विशेष कपड़े और उपकरण खरीदे जाएंगे। इनमें पैर को ढकने वाले सुरक्षा आवरण, स्लीपिंग बैग, बर्फीले मौसम के लिए चश्मे, जूते, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित अत्यधिक ठंड वाले मौसम के कपड़े (हिमसुरक्षा ब्रांड), गर्मी रोकने वाली चटाइयां, बैग, दस्ताने, तंबू, थर्मल इनसोल, कंबल और बचाव बैग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से अधिकतर सामान पिछले साल से ही अस्थायी अभियान ठिकानों (टीओबी) पर तैनात जवानों को उपलब्ध कराए जा रहे थे। हालांकि, गृह मंत्रालय ने जुलाई में सीआरपीएफ के उस प्रस्ताव को ''पूर्ण मंजूरी'' दे दी, जिसमें इन वस्तुओं की खरीद का अनुरोध किया गया था। सूत्रों के अनुसार, इन उपकरणों की खरीद का उद्देश्य ऊंचाई वाले इलाकों में लंबे समय तक चलने वाली गश्त, कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने और आतंकवादियों के खिलाफ अभियानों के दौरान जवानों को बेहतर तरीके से तैयार करना है। सूत्रों ने बताया कि इन वस्तुओं की उपयोग अवधि लगभग दो साल होती है और नयी खरीद के लिए जरूरत पड़ने पर धनराशि को बढ़ाया भी जा सकता है। उन्होंने कहा कि 6,000 फुट से अधिक ऊंचाई पर बनाए गए अस्थायी अभियान ठिकानों में सीआरपीएफ के कमांडो तैनात रहते हैं। इन ठिकानों से उन इलाकों में तलाशी और हमले की कार्रवाई शुरू की जाती है, जहां आतंकवादी 'ढोक' (मिट्टी और पत्थर से बनी झोपड़ियों) में छिपे होते हैं। यह पाया गया है कि आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके और दुर्गम पर्वतीय इलाकों का इस्तेमाल मैदानी क्षेत्रों में हिंसा करने से पहले या बाद में छिपने के लिए किया। इसी को देखते हुए अब इन ऊंचाई वाले इलाकों में सीआरपीएफ और सेना के जवानों को तैनात किया गया है। सीआरपीएफ ने जुलाई 2025 में इस तरह का पहला अस्थायी अभियान ठिकाना बनाया था। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, सीआरपीएफ ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के दोनों क्षेत्रों में अब तक 55 टीओबी स्थापित किए हैं। इन टीओबी में करीब 15 से 25 हथियारबंद जवानों की एक टीम तैनात रहती है। यहां जवानों के आराम और पुनः तैयार होने के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। सीआरपीएफ के ऐसे ही एक टीओबी का इस्तेमाल सुरक्षा बलों ने जुलाई 2025 में पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार तीन आतंकवादियों को मार गिराने के अभियान के दौरान आधार के रूप में किया था। इस अभियान को 'ऑपरेशन महादेव' नाम दिया गया था। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सेना की तर्ज पर सीआरपीएफ कमांडो के लिए अस्थायी अभियान ठिकाने बनाने का प्रस्ताव वर्ष 2022-23 से ही विचाराधीन था, लेकिन इन्हें अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद सक्रिय रूप से संचालित किया गया।
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नयी दिल्ली. स्वतंत्रता दिवस के 'एट होम' कार्यक्रम के लिए इस वर्ष हस्तनिर्मित निमंत्रण किट तैयार करने वाले 130 शिल्पकारों की टीम में कभी नक्सल प्रभावित रहे छत्तीसगढ़ के करीब 50 कलाकार शामिल हैं। इस कार्यक्रम की मेजबानी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा की जाएगी।
इस निमंत्रण किट में छत्तीसगढ़, गोवा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की समृद्ध शिल्पकला, परंपराओं व सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया है। राष्ट्रपति भवन के अधिकारियों और अहमदाबाद स्थित राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) की एक टीम ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप इसकी परिकल्पना की है। यह किट स्थिरता, समावेशिता और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
एनआईडी के निदेशक अशोक मंडल ने बताया, ''निमंत्रण किट करीब 130 लोगों ने तैयार की है, जिनमें छत्तीसगढ़ के कभी वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे बस्तर क्षेत्र के करीब 50 शिल्पकार शामिल हैं। यह समावेशी विकास और आजीविका के अवसरों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है।'' उन्होंने बताया कि तीन महीने से अधिक समय तक इन शिल्पकारों ने एनआईडी के शिक्षकों, डिजाइनर और विद्यार्थियों के साथ मिलकर अपनी पारंपरिक व पर्यावरण-अनुकूल शिल्प तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए भारत के राष्ट्रपति की ओर से भेजी जाने वाली इस अनूठी निमंत्रण किट को तैयार किया। मंडल ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ''पूरी तरह हस्तनिर्मित और पर्यावरण-अनुकूल यह किट भारत की कलात्मक उत्कृष्टता, सतत प्रथाओं और पारंपरिक शिल्पकार समुदायों के सशक्तीकरण का प्रतीक है।'' निमंत्रण किट में छत्तीसगढ़, गोवा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में पर्यावरण संरक्षण व सतत पर्यावरणीय तौर-तरीकों के प्रेरणादायक उदाहरणों को दर्शाया गया है। ये क्षेत्र पहाड़ियों, घुमावदार नदी प्रवाह और भरपूर हरियाली वाले समृद्ध प्राकृतिक परिदृश्य के लिए जाने जाते हैं। इन राज्यों की जीवंत लोक कला परंपराओं का इस्तेमाल करते हुए तैयार की गई यह निमंत्रण किट समुदायों, रचनात्मकता और संरक्षण के बीच गहरे परस्पर संबंध की झलक प्रस्तुत करती है। मंडल ने बताया कि निमंत्रण किट में छत्तीसगढ़ की ढोकरा ढलाई कला को शामिल किया गया है, जो भारत की सबसे पुरानी धातु शिल्प की परंपराओं में से एक है। उन्होंने बताया कि इसमें समुदाय की पवित्र उपवनों के संरक्षण की परंपरा को भी दर्शाया गया है, इसके अलावा लोहे से तैयार की जाने वाली 'पिटवा' शिल्पकला का इस्तेमाल किट के डिस्प्ले फ्रेम और घंटी बनाने में किया गया है। अधिकारी ने बताया, ''यह निमंत्रण किट उन कुशल शिल्पकारों और कारीगरों को समर्पित है, जो क्षेत्र की सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा व विविध सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुए हैं।' - नयी दिल्ली। भारतीय बायोगैस संघ (आईबीए) का मानना है कि सरकार की 23,731 करोड़ रुपये की 'गोबरधन' योजना आने वाले वर्षों में देश के प्राकृतिक गैस आयात बिल को करीब पांच अरब डॉलर तक कम करने में मदद कर सकती है। यह योजना कृषि अवशेष, गोबर और अन्य जैविक कचरे को स्वच्छ ऊर्जा में बदलने पर केंद्रित है। आईबीए के अनुसार, हाल में मंजूर की गई गोबरधन (गैल्वानाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन) योजना को केवल सरकारी खर्च के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राष्ट्रीय निवेश के तौर पर देखा जाना चाहिए। इससे ऊर्जा क्षेत्र के अलावा ग्रामीण विकास, कृषि उत्पादकता, रोजगार और पर्यावरण के क्षेत्र में भी व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है। संघ ने कहा कि इस योजना से सबसे बड़ा आर्थिक लाभ प्राकृतिक गैस के आयात में कमी के रूप में सामने आ सकता है। भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरत का करीब 50 प्रतिशत आयात करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। आईबीए के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में एलएनजी का आयात बिल करीब 15.2 अरब डॉलर रहा था। संघ का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यदि करीब 1,500 कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) संयंत्र पूरी क्षमता के साथ संचालित होते हैं, तो प्राकृतिक गैस आयात से जुड़े व्यापार घाटे में करीब एक-तिहाई की कमी लाई जा सकती है। इससे लगभग पांच अरब डॉलर (लगभग 40 लाख करोड़ रुपये) की बचत संभव है। आईबीए ने कहा कि योजना से उर्वरक आयात और सरकार पर सब्सिडी के बोझ को कम करने में भी मदद मिल सकती है। वित्त वर्ष 2024-25 में उर्वरक आयात का बिल करीब 18 अरब डॉलर रहा था। आईबीए का अनुमान है कि 1,500 सीबीजी संयंत्रों के संचालन और बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाने से उर्वरक आयात में कम से कम पांच प्रतिशत की कमी लाई जा सकती है। इससे चालू खाते के घाटे में करीब एक अरब डॉलर की कमी आ सकती है। संघ ने कहा कि गोबरधन योजना से खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे कुशल और अर्द्ध-कुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
- श्री विजय पुरम। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने रविवार को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह से 'हर घर तिरंगा अभियान' की शुरुआत करते हुए कहा कि 'भारत एक है और हमेशा एक रहेगा।' उन्होंने इस ऐतिहासिक द्वीप समूह से जुड़ी राष्ट्रीय एकता, देशभक्ति और बलिदान की भावना पर जोर दिया।यहां डीबीआरएआईटी सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राधाकृष्णन ने तमिल राष्ट्रवादी कवि सुब्रमण्यम भारती के शब्दों को याद करते हुए कहा, ''मेरा सिर कभी नहीं झुकेगा, मेरा सिर केवल भारत माता के राष्ट्रीय ध्वज के सामने झुकेगा।'' उन्होंने कहा कि 'हर घर तिरंगा' अभियान इसी भावना को आगे बढ़ाता है और हर नागरिक को राष्ट्रीय ध्वज, एक मातृभूमि और एक साझा भविष्य के संकल्प के साथ जोड़ता है। कार्यक्रम में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल एडमिरल (सेवानिवृत्त) डी. के. जोशी , मुख्य सचिव चंचल यादव, श्री विजयपुरम नगर परिषद की अध्यक्ष एम. वसंता और दक्षिण अंडमान जिला परिषद के अध्यक्ष पी. उमर समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे। राधाकृष्णन ने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से यह शुरुआत बहुत महत्वपूर्ण है।उपराष्ट्रपति ने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह से इस अभियान की शुरुआत बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आठ अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के 'करो या मरो' के आह्वान की याद में मनाए जाने वाले भारत छोड़ो आंदोलन दिवस के साथ हो रही है। उपराष्ट्रपति ने 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत श्री विजयपुरम के फ्लैग प्वाइंट पर राष्ट्रीय ध्वज भी फहराया। उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह की विशेष पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह "लघु भारत" है, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से आए लोग आबादी वाले 31 द्वीपों में मिल-जुलकर रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह केंद्र शासित प्रदेश "विविधता में एकता" और "एक भारत, श्रेष्ठ भारत" की भावना का उदाहरण है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर इसमें हिस्सा लेने वाले राष्ट्रनायकों और अमर सेनानियों को याद किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में भाग लेने वालों का साहस हर भारतीय के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “ऐतिहासिक ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में भाग लेने वाले सभी लोगों को याद करते हैं। उनका साहस हर भारतीय के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा। महात्मा गांधी के नेतृत्व से प्रेरित होकर ‘भारत छोड़ो’ के आह्वान ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम में नई ऊर्जा का संचार किया और औपनिवेशिक शासन से मुक्त होने के हमारे लोगों के अटूट संकल्प को दर्शाया।”लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने पोस्ट किया, “‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की वर्षगांठ पर उन सभी राष्ट्रनायकों और अमर सेनानियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि, जिन्होंने स्वतंत्र भारत के स्वप्न को साकार करने के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। महात्मा गांधी का ‘करो या मरो’ का आह्वान उस दौर में करोड़ों भारतीयों के लिए साहस और संकल्प की आवाज बना।”उन्होंने लिखा, “इस आंदोलन में असंख्य ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों ने जेल यातनाएं सहीं, संघर्ष किया और अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनका संघर्ष केवल राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए नहीं था, बल्कि एक ऐसे भारत के निर्माण के लिए था, जिसकी नींव सत्य, अहिंसा, लोकतंत्र, समानता और राष्ट्रभक्ति जैसे मूल्यों पर हो। स्वतंत्रता के अमृतकाल में उन महान सेनानियों का स्मरण हमें यह प्रेरणा देता है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि रखते हुए हम अपने लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक आदर्शों को निरंतर मजबूत करते रहें।”केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लिखा, “राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में आज ही के दिन अगस्त 1942 में प्रारंभ हुआ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ देश के स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक अध्याय बना। इस ‘अगस्त क्रांति’ ने देशभर में नई चेतना का संचार किया और असंख्य भारतीयों को स्वाधीनता के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने की प्रेरणा दी।”उन्होंने आगे लिखा, “‘अगस्त क्रांति’ का इतिहास असंख्य गुमनाम योद्धाओं के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान की अमर गाथाओं से समृद्ध है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव राष्ट्रसेवा और देशभक्ति के लिए प्रेरित करती रहेंगी। ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की वर्षगांठ पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी और उन सभी महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि व सादर नमन, जिनके त्याग, साहस और संघर्ष से स्वतंत्र भारत की नींव सुदृढ़ हुई।” -
नई दिल्ली । भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी। 9 अगस्त 1942 को शुरू हुआ यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे बड़ी जनक्रांतियों में से एक था। महात्मा गांधी ने इसी आंदोलन में “करो या मरो” का नारा दिया था, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी।
गृहमंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, “महात्मा गांधी के आह्वान पर प्रारंभ हुआ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ हमारे स्वाधीनता संग्राम का वह ऐतिहासिक अध्याय है, जिसने देशवासियों को एकजुट कर अंग्रेजी शासन से मुक्ति के लिए ‘करो या मरो’ का संकल्प और अदम्य साहस प्रदान किया। देश को आजाद कराने के इस महान संघर्ष में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सभी अमर स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करता हूं। अगस्त क्रांति का यह दिन हमें राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए स्वदेशी को अपनाने, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की प्रेरणा देता है।”नितिन गडकरी ने एक्स पर लिखा, “सन 1942 में आज ही के दिन महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारतवासियों ने अंग्रेजों के विरुद्ध ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की शुरुआत की थी। स्वतंत्रता संग्राम के प्रसिद्ध इस अगस्त क्रांति दिवस के स्मरण में आजादी के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले अमर बलिदानियों को शत-शत नमन।”केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर पोस्ट किया, “अगस्त क्रांति स्वतंत्रता संग्राम का वह ऐतिहासिक अध्याय है, जिसने देशवासियों में आजादी की लौ और संघर्ष का संकल्प जगाया। 1942 में आज ही के दिन महात्मा गांधी ने करो या मरो का नारा देकर भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की, जो विदेशी शासन के विरुद्ध एक बड़ा जनआंदोलन बना। मां भारती की स्वतंत्रता के इस महायज्ञ में अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले सभी अमर वीर सेनानियों को कोटि-कोटि नमन। उनके त्याग, संघर्ष और बलिदान को राष्ट्र सदैव स्मरण करता रहेगा।”उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा, “मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने हेतु अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले सभी स्वतंत्रता सेनानियों को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (अगस्त क्रांति) की वर्षगांठ पर विनम्र श्रद्धांजलि। ‘करो या मरो’ के उद्घोष से राष्ट्र चेतना का जागरण करने वाले स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान ने स्वाधीनता आंदोलन को निर्णायक दिशा प्रदान की, उनका राष्ट्र के प्रति समर्पण और स्वाभिमान का संदेश प्रत्येक भारतवासी के लिए सदैव प्रेरणापुंज बना रहेगा।”राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल यादव ने एक्स पोस्ट में कहा, “अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले सभी अमर क्रांतिकारियों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को कोटिशः नमन! उनका संघर्ष, राष्ट्रभक्ति और अटूट संकल्प हमें राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव की रक्षा के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।”दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा, “अगस्त क्रांति मां भारती की स्वाधीनता के लिए धधकते राष्ट्र संकल्प की वह हुंकार थी, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी। ‘करो या मरो’ के मंत्र और ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ के उद्घोष ने जन-जन में स्वाधीनता की ज्वाला प्रज्वलित कर दी। मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले असंख्य राष्ट्रनायकों को अगस्त क्रांति दिवस पर कोटिशः नमन।”हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने एक्स पोस्ट में कहा, “भारत छोड़ो आंदोलन की गौरव गाथा को स्मरण करते हुए ‘अगस्त क्रांति दिवस’ पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। 1942 में आज ही के दिन महात्मा गांधी ने ‘करो या मरो’ का मंत्र देकर देशवासियों में स्वतंत्रता का अदम्य संकल्प जगाया। यह आंदोलन भारत की आजादी के संघर्ष में जनशक्ति और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय प्रतीक बना। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सभी अमर स्वतंत्रता सेनानियों को कोटिशः नमन।”बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर पोस्ट किया, “अगस्त क्रांति दिवस पर मां भारती की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सभी अमर वीर स्वतंत्रता सेनानियों को कोटि-कोटि नमन। उनका अदम्य साहस, त्याग और बलिदान सदैव देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता रहेगा।”उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर लिखा, “भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ पर देश की स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर शहीदों एवं महान स्वतंत्रता सेनानियों को कोटिशः नमन। स्वतंत्रता संग्राम में भारत छोड़ो आंदोलन ने देशवासियों में आजादी की लौ प्रज्वलित करने के साथ ही स्वतंत्रता के अंतिम संघर्ष को निर्णायक दिशा दी। इस ऐतिहासिक आंदोलन के वीर सेनानियों का त्याग और साहस हमें सदैव राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।”( -
नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को पुडुचेरी पुलिस को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ प्रदान किए जाने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि कम संसाधनों के बावजूद पुडुचेरी पुलिस ने मेहनत, वीरता, सेवा और समर्पण से यह सम्मान अर्जित किया है।पुडुचेरी में आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने पुलिस को राष्ट्रपति का चिह्न भेंट किया। इस दौरान, अमित शाह ने कहा कि 5,000 से कम कर्मियों वाली पुडुचेरी पुलिस ने कड़ी मेहनत, वीरता, सेवा भाव और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। इसी वजह से उसे यह सम्मान मिला। साथ ही पुलिस ने पुडुचेरी की आध्यात्मिक विरासत की रक्षा भी की है।केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा, “आज आप सभी को ‘राष्ट्रपति कलर’ का बड़ा सम्मान मिलने पर बहुत-बहुत बधाई। हमारा पुडुचेरी दक्षिण भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है।”
गृह मंत्री ने कहा कि यह सम्मान सिर्फ किसी फाइल या सरकारी आदेश से नहीं मिला है। यह पुलिस के कठिन परिश्रम, वीरता, सेवा और समर्पण से मिला है। उन्होंने कहा कि पुडुचेरी पुलिस की बहादुरी और समर्पण पुलिस के इतिहास में ‘स्वर्णिम अध्याय’ के रूप में याद रखा जाएगा। अमित शाह ने कहा कि पुडुचेरी की आध्यात्मिक चेतना को श्री अरबिंदो और श्री मां के आश्रम से ताकत मिली है। इसी ने देश को आध्यात्मिक दिशा दी है।उन्होंने कहा, “230 साल तक फ्रांसीसी शासन के अधीन रहने के बावजूद पुडुचेरी ने अपनी भारतीयता और आध्यात्मिक ऊर्जा को बचाकर रखा है।”अमित शाह ने कोरोना महामारी के दौरान पुडुचेरी पुलिस के काम की भी सराहना की। उन्होंने कहा, “जब कोरोना पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बन गया था, तब मैं गृह मंत्रालय से सभी राज्यों और खासकर केंद्र शासित प्रदेशों की स्थिति की नियमित समीक्षा करता था। उन मुश्किल दिनों में पुडुचेरी पुलिस सबसे आगे खड़ी रही। बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं की सेवा में उसने बड़ी बहादुरी दिखाई। मैं हमेशा आपकी निष्ठा और समर्पण को याद रखूंगा।”गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने ब्रिटिश कालीन कानूनों को बदलकर तीन नए भारतीय आपराधिक कानून लागू किए हैं। इन कानूनों का उद्देश्य सजा देना नहीं, बल्कि नागरिकों को न्याय देना है। उन्होंने कहा, “नए कानून तीन स्तंभों पर आधारित हैं, जिनमें टेक्नोलॉजी, टाइमलाइन और ट्रस्ट शामिल हैं। अब न्याय प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी।” बता दें कि ‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ भारत में किसी पुलिस बल या सैन्य इकाई को मिलने वाला सर्वोच्च सम्मान है। इसे ‘निशान’ भी कहा जाता हैं। यह पुरस्कार बेहतरीन काम, बहादुरी, अनुशासन और अच्छी सेवा के लिए दिया जाता है। -
नई दिल्ली । उच्च शिक्षा युवाओं को सार्थक करियर बनाने और एक स्थिर एवं आत्मनिर्भर भविष्य की ओर अग्रसर होने के अवसर प्रदान करती है। हालांकि, आर्थिक तंगी के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों के लिए शिक्षण शुल्क, पुस्तकों, यात्रा और अन्य शैक्षिक आवश्यकताओं से जुड़े खर्चों को वहन करना कठिन हो सकता है।
ग्रामीण क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली अनु प्रिया को उच्च शिक्षा से जुड़े खर्चों को वहन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनके परिवार की वार्षिक आय पहले 99,000 रुपये थी, जिससे ट्यूशन फीस, किताबें, यात्रा और अन्य अध्ययन संबंधी आवश्यकताओं के लिए नियमित रूप से धन जुटाना चुनौतीपूर्ण हो जाता था। ग्रामीण परिवेश में गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक संसाधनों और उचित मार्गदर्शन की सीमित उपलब्धता ने उनकी चुनौतियों को और बढ़ा दिया।इन कठिनाइयों के बावजूद, अनु प्रिया अपनी पढ़ाई और करियर के लक्ष्यों पर केंद्रित रहीं। उनकी आकांक्षा थी कि वे अपनी शिक्षा सफलतापूर्वक पूरी करें, एक स्थिर करियर बनाएं, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें, अपने परिवार का सहारा बनें और अपने पेशे के माध्यम से समाज में सकारात्मक योगदान दें।ओबीसी श्रेणी की 20 वर्षीय बी.टेक द्वितीय वर्ष की छात्रा अनु प्रिया, 2024-2026 के दौरान प्रदान की गई 7,50,000 रुपये की छात्रवृत्ति सहायता से अधिक आत्मविश्वास और एकाग्रता के साथ अपनी शिक्षा जारी रखने में सक्षम रही हैं। एनएसपी छात्रवृत्ति के माध्यम से प्राप्त 7,50,00 रुपये की छात्रवृत्ति सहायता ने अनु प्रिया को शैक्षणिक शुल्क, किताबें, अध्ययन सामग्री और अन्य अध्ययन संबंधी आवश्यकताओं सहित महत्वपूर्ण शैक्षिक खर्चों को पूरा करने में मदद की। इस सहायता से उनके परिवार पर वित्तीय बोझ काफी कम हो गया और उन्हें बिना किसी रुकावट के अपनी शिक्षा जारी रखने में सहायता मिली।वित्तीय सहायता ने अनु प्रिया को शैक्षिक खर्चों के प्रबंधन की चिंता करने के बजाय अपनी पढ़ाई और करियर के लक्ष्यों पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाया। इस सहायता ने उन्हें बी.टेक की पढ़ाई जारी रखने के दौरान अधिक आर्थिक स्थिरता और आत्मविश्वास प्रदान किया।वर्तमान में अनु प्रिया बी.टेक द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं और पूरे आत्मविश्वास और प्रेरणा के साथ अपनी शैक्षणिक यात्रा जारी रखे हुए हैं। उनके परिवार की वार्षिक आय लगभग 1,20,000 रुपये है, जो उच्च शिक्षा के खर्चों को वहन करने के लिए सीमित है। इसलिए छात्रवृत्ति सहायता ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उनकी शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।वहीं, जनरल-ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 21 वर्षीय बी.टेक द्वितीय वर्ष के छात्र यारा महेश ने 2025 में प्रदान की गई 52,540 रुपये की छात्रवृत्ति सहायता से अधिक आत्मविश्वास और एकाग्रता के साथ अपनी शिक्षा जारी रखने में सफलता प्राप्त की है। छात्रवृत्ति से प्राप्त सहायता ने कॉलेज शुल्क, छात्रावास खर्च, भोजन खर्च, यात्रा खर्च, अध्ययन सामग्री, इंटरनेट और शैक्षणिक संसाधन, पंजीकरण शुल्क और अन्य विविध शैक्षिक आवश्यकताओं सहित कई शैक्षिक और रहने के खर्चों को पूरा करने में मदद की। इस सहायता से उनके परिवार पर वित्तीय बोझ कम हुआ और महेश को अपनी पढ़ाई और कौशल विकास पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली।उच्च शिक्षा प्राप्त करने से जुड़ी वित्तीय चुनौतियों के बावजूद, महेश ने अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक सफल करियर बनाने का दृढ़ संकल्प बनाए रखा। उनकी शैक्षणिक यात्रा ने उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने और प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों का पता लगाने के अवसर भी प्रदान किए हैं।यारा महेश को मिली छात्रवृत्ति सहायता से उन्हें महत्वपूर्ण शैक्षिक और जीवन निर्वाह संबंधी खर्चों को पूरा करने में मदद मिली और उनकी पढ़ाई से जुड़े वित्तीय दबाव में काफी कमी आई। इस छात्रवृत्ति की बदौलत महेश लैपटॉप खरीद सके, जो उनकी पढ़ाई, प्रोग्रामिंग, प्रोजेक्ट वर्क, कौशल विकास और ऑनलाइन लर्निंग के लिए एक महत्वपूर्ण साधन बन गया। इस साधन की उपलब्धता ने उसे डिजिटल लर्निंग के अवसरों का बेहतर उपयोग करने और अपने तकनीकी कौशल को विकसित करते रहने में मदद की।अपनी द्वितीय वर्ष की इंटर्नशिप के दौरान, महेश ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता/मशीन लर्निंग तकनीकों का उपयोग करके त्वचा कैंसर के वर्गीकरण पर एक शोध पत्र पर कार्य किया। शोध कार्य पूरा हो चुका है और वर्तमान में प्रकाशन प्रक्रिया में है। इस अनुभव ने स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग के अनुप्रयोग में उनके शोध ज्ञान और व्यावहारिक कौशल को बढ़ाया है।मिली सहायता के कारण महेश अपनी पढ़ाई पर बेहतर ध्यान केंद्रित कर पा रहा है और साथ ही प्रोग्रामिंग, सॉफ्टवेयर विकास और उभरती प्रौद्योगिकियों में अपने कौशल को लगातार बेहतर बना रहा है। इस सहायता ने उसे आत्मविश्वास के साथ उच्च लक्ष्यों को प्राप्त करने और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक सफल करियर बनाने की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया है।यारा महेश और अनु प्रिया की कहानी यह दर्शाती है कि समय पर मिलने वाली शैक्षिक सहायता किस प्रकार छात्रों को वित्तीय बाधाओं को दूर करने और अपने शैक्षणिक एवं करियर संबंधी लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकती है। -
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में उत्साहपूर्वक भाग लेने और ‘विकसित भारत’ के निर्माण में योगदान देने के अपने सामूहिक संकल्प को दोहराने का आग्रह किया है।
संस्कृति मंत्रालय की एक्स की पोस्ट को साझा करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “हमारा तिरंगा हमारा गौरव है और देश के लिए हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देने की निरंतर प्रेरणा है। आइए, हम ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में उत्साहपूर्वक भाग लें और ‘विकसित भारत’ के निर्माण में योगदान देने के अपने सामूहिक संकल्प को दोहराएं। खुशी है कि इस वर्ष के प्रयास ‘वंदे मातरम’ को समर्पित हैं, और वह भी ऐसे समय में जब हम इसकी 150वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।”संस्कृति मंत्रालय ने अभियान के वेबसाइट ‘हर घर तिरंगा डॉट कॉम’ लॉंच करते हुए कहा कि पिछले 150 सालों से ‘वंदे मातरम’ के उद्घोष ने देश की आत्मा को झकझोरा है। इस स्वतंत्रता दिवस पर, जब भारत ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत तिरंगा यात्राओं, रैलियों, संगीत कार्यक्रमों और सामूहिक गायन के लिए एकजुट हो रहा है, तो आइए वही भावना हर गली और हर घर तक पहुंचाएं।आज से शुरू हुआ ‘हर घर तिरंगा अभियान’ इस महीने की 17 तारीख तक चलेगा। अभियान का उद्देश्य लोगों को अपने घरों पर तिरंगा फहराने और देशभक्ति तथा राष्ट्रीय एकता से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह अभियान 2022 में शुरू हुआ था और अब एक बड़े जनभागीदारी अभियान का रूप ले चुका है। इस वर्ष अभियान का विशेष महत्व है, क्योंकि यह राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के साथ मनाया जा रहा है। देशभर में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन भी होगा। 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाएगा। दुनिया भर में 200 से अधिक भारतीय दूतावास, उच्चायोग और वाणिज्य दूतावास भी अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इस वर्ष ‘सूर्य पथ तिरंगा’ डिजिटल रिले भी आयोजित होगी। इसमें 54 भारतीय राजनयिक मिशन और केंद्र हिस्सा लेंगे। यह रिले 15 अगस्त को फिजी से शुरू होकर सैन फ्रांसिस्को में समाप्त होगा। - नयी दिल्ली. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को फोन किया और प्रमुख क्षेत्रों में भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। मोदी ने वेंस और उनकी पत्नी उषा को उनके बेटे के जन्म पर बधाई दी।प्रधानमंत्री मोदी को वेंस का यह फोन तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद आया है। इस समझौते को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच एक नए क्षेत्रीय गठबंधन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से फोन पर बात हुई। हमने प्रमुख क्षेत्रों में भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।'' मोदी ने कहा, ''मैंने वेंस और उनकी पत्नी को उनके बेटे के जन्म पर बधाई दी तथा पूरे परिवार को शुभकामनाएं दीं।'' अमेरिकी पक्ष ने अभी तक बातचीत के बारे में कोई विवरण नहीं दिया है।
- नयी दिल्ली. स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रधानमंत्री संग्रहालय एक प्रदर्शनी आयोजित कर रहा है, जिसमें कई तरह की वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया है। इनमें वंदे मातरम् पर जारी स्मृति डाक टिकट, वर्ष 1976 में इसके रचयिता के सम्मान में जारी विशेष प्रथम दिवस आवरण और चंदन की लकड़ी पर नक्काशी करके बनाई गई भारत माता की मूर्ति शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार से शुरू हुई पांच दिवसीय प्रदर्शनी में एक पुराने तिरंगे को भी प्रदर्शित किया गया है, जिसके बीच में देवनागरी लिपि में वंदे मातरम् लिखा हुआ है। यह आयोजन 15 अगस्त को मनाए जाने वाले 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोहों के तहत तीन मूर्ति भवन परिसर स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय के नए खंड में आयोजित किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रदर्शनी आठ से 12 अगस्त तक आयोजित की जा रही है।प्रदर्शनी वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में इसके योगदान का भी उत्सव मना रही है। इसमें प्रदर्शित अन्य वस्तुओं में सजावटी बटन का एक सेट भी शामिल है, जिन पर पृष्ठभूमि में पुराने तिरंगे के साथ देवनागरी लिपि में वंदे मातरम् अंकित है। प्रदर्शनी में वंदे मातरम् पर जारी स्मृति डाक टिकट और इसके रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी के सम्मान में वर्ष 1976 में जारी विशेष प्रथम दिवस आवरण के साथ-साथ भारतीय डाक द्वारा नवंबर 2025 में जारी स्मृति डाक टिकट भी प्रदर्शित किए गए हैं। इसके अलावा, प्रदर्शनी में 'आनंदमठ' की प्रतियां भी प्रदर्शित की गई हैं, जिसमें वर्ष 1882 में पहली बार वंदे मातरम् को पूरी तरह बांग्ला भाषा में प्रकाशित किया गया था। इसके साथ ही वर्ष 1909 में अरविंद घोष द्वारा किए गए इसके अंग्रेजी अनुवाद की एक प्रति भी प्रदर्शनी का हिस्सा है। इस संबंध में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शनी में शामिल कुछ वस्तुएं प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल) के तोशाखाना संग्रह से ली गई हैं। बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा वर्ष 1875 में रचित वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एक प्रमुख नारे के रूप में उभरा और इसने आंदोलन को नयी ऊर्जा दी।
- चेन्नई । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को प्रसिद्ध मंदिर नगरी तिरुवन्नामलाई का दौरा किया और श्री अरुणाचलेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की। मंत्री ने तिरुवन्नामलाई स्थित भगवान शिव के मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके अलावा, उन्होंने वहां स्थित श्री रमणाश्रम का भी दौरा किया और पूजा की। भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने वरिष्ठ नेता का स्वागत किया।अमित शाह मुंबई से विमान द्वारा यहां पहुंचे और फिर चेन्नई से करीब 200 किलोमीटर दूर स्थित तिरुवन्नामलाई हेलीकॉप्टर से गए। शाह नौ अगस्त को पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में एक सरकारी कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे और पुडुचेरी पुलिस को राष्ट्रपति का रंग निशान प्रदान करेंगे। यह कार्यक्रम पुडुचेरी के गोरिमेडु स्थित पुलिस मैदान में आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री पुडुचेरी में "हर घर तिरंगा यात्रा" का उद्घाटन भी करेंगे। पुडुचेरी और तिरुवन्नामलाई के बीच की दूरी लगभग 110 किलोमीटर है।
- नयी दिल्ली ।देश के कई हिस्सों में शनिवार को बारिश का प्रकोप कम हुआ, लेकिन इससे हुई तबाही का असर बरकरार रहा। असम में बारिश और बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 99 हो गई, जबकि हिमाचल प्रदेश में 153 सड़कें बंद होने से आवागमन प्रभावित रहा। केरल में मकानों और सड़कों को हुए नुकसान के कारण सैकड़ों लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। असम आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बुलेटिन के अनुसार, शनिवार को भी राज्य में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी रही तथा एक और मौत की खबर के साथ मरने वालों की संख्या 99 हो गई। इसमें कहा गया कि असम में 1.47 लाख से अधिक लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। मौत का नया मामला गोलाघाट ज़िले से सामने आया है। इसके साथ ही, असम में इस साल बाढ़ से मरने वालों की संख्या 99 हो गई है। बुलेटिन में कहा गया कि बाढ़ से असम में 12 जिले-सोनितपुर, नागांव, गोलाघाट, शिवसागर, होजई, दरांग, जोरहाट, धेमाजी, चराइदेव, कार्बी आंगलोंग, लखीमपुर और विश्वनाथ प्रभावित हैं। चार दिन से लगातार हो रही बारिश के बीच, राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार का दिन दो वर्षों में अगस्त का सबसे अधिक बारिश वाला दिन दर्ज किया गया। महीने के पहले आठ दिनों में ही अगस्त में होने वाली औसत मासिक बारिश लगभग पूरी हो गई है। शनिवार को सुबह 8:30 बजे तक दिल्ली में 98.7 मिलीमीटर (मिमी) बारिश दर्ज की गई, जो अगस्त में 2024 के बाद की सबसे अधिक बारिश है। वर्ष 2024 में अगस्त के पहले दिन 107.6 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। लगातार बारिश के बीच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में यातायात जाम की स्थिति देखने को मिली। कालिंदी कुंज बॉर्डर, आईटीओ, प्रेस एन्क्लेव मार्ग, गीतांजलि मार्ग और महरौली-बदरपुर रोड पर भारी जाम रहा। पूर्वी दिल्ली के कुछ हिस्सों में भी यातायात प्रभावित हुआ, जिसमें जीटी रोड के कुछ हिस्से शामिल हैं। अगस्त के पहले सात दिनों के दौरान दिल्ली में 127 मिमी बारिश दर्ज की गई। शुक्रवार तक लगातार जारी बारिश ने राष्ट्रीय राजधानी को प्रभावित किया। शुक्रवार को हुई भारी बारिश के कारण दिल्ली के कई इलाकों में जलभराव हो गया, नालों में पानी का बहाव बढ़ गया और कई जगहों पर दीवारों तथा मकानों के ढहने की घटनाएं सामने आईं। हिमाचल प्रदेश में मूसलाधार बारिश के कारण 153 सड़कें बंद हो गई हैं। वहीं, शिमला मौसम विज्ञान केंद्र ने सोमवार और मंगलवार को राज्य में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी देते हुए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। राज्य आपातकालीन अभियान केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, शनिवार सुबह तक 77 जलापूर्ति योजनाएं और 92 ट्रांसफॉर्मर भी प्रभावित हुए थे। अधिकारियों ने बताया कि 30 जून को मानसून शुरू होने के बाद से अब तक बारिश से जुड़ी घटनाओं में 66 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 14 लोगों की जान भूस्खलन और एक व्यक्ति की मौत अचानक आई बाढ़ में हुई। उन्होंने बताया कि राज्य को कुल 835 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मौसम विभाग ने राज्य में 14 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है।केरल में शनिवार को बारिश जारी रही। हालांकि, कई इलाकों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन कई सड़कें और मकान अब भी जलमग्न होने के कारण सैकड़ों लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। अधिकारियों ने बताया कि अलप्पुझा के अपर कुट्टनाड और कुट्टनाड इलाकों तथा कोट्टायम जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में बाढ़ का सबसे अधिक असर रहा, हालांकि कई स्थानों पर पानी का स्तर अब धीरे-धीरे कम होने लगा है। कुछ इलाकों में बाढ़ का पानी केवल मामूली रूप से कम हुआ है, जबकि कई लोग अब भी फंसे हुए या प्रभावित हैं, क्योंकि उनके मकान और सड़कें अभी भी पानी में डूबी हुई हैं। अलप्पुझा-चंगनास्सेरी सड़क समेत कई प्रमुख सड़कें अब भी जलमग्न हैं, जिससे क्षेत्र में यातायात बाधित है। जलभराव वाले इलाकों से लोगों को निकालने और जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए छोटी नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लगातार हो रही बारिश को देखते हुए एहतियाती कदम के तौर पर शनिवार को आठ जिलों-कासरगोड, कन्नूर, वायनाड, कोझिकोड, त्रिशूर, कोट्टायम, पथनमथिट्टा और अलप्पुझा के सभी शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश घोषित किया गया। स्थानीय स्वशासन संस्थाओं, राजस्व अधिकारियों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से कहा गया कि जरूरत पड़ने पर कमजोर और जोखिम वाले लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले 24 घंटों के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई स्थानों और राज्य के पूर्वी हिस्सों में कुछ स्थानों पर बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान जताया है। अधिकारियों ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की है।पंजाब और हरियाणा के कुछ इलाकों में दिन के दौरान बारिश हुई, जिनमें लुधियाना, पटियाला, पठानकोट, बठिंडा, हिसार, रोहतक, भिवानी, सिरसा और गुरुग्राम शामिल हैं। हरियाणा के फरीदाबाद में शनिवार को 50 से अधिक स्थानों पर जलभराव हो गया। पिछले 24 घंटों से लगातार हो रही बारिश के कारण भारी यातायात जाम लगा और जनजीवन व्यापक रूप से प्रभावित हुआ। वहीं, सूरजकुंड रोड पर एक पुलिया का बड़ा हिस्सा धंस गया, जिससे पैदल यात्रियों और वाहन चालकों के लिए खतरा पैदा हो गया। जिला प्रशासन के अनुसार, फरीदाबाद में शुक्रवार सुबह आठ बजे से शनिवार सुबह आठ बजे तक 120 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो शुरुआती अनुमान से अधिक है। दक्षिण-पश्चिमी मानसून के सक्रिय रहने के कारण राजस्थान के कई इलाकों में भी भारी बारिश दर्ज की गई।मौसम विज्ञान केंद्र ने बताया कि अगले एक सप्ताह के दौरान पूर्वी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मानसून के सक्रिय रहने की संभावना है। भारी बारिश के बाद कोटपूतली-बहरोड़ जिले से गुजरने वाले जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई। शहरी इलाकों में पानी बाजारों और घरों में भी घुस गया। भरतपुर में बारिश के कारण स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद कर दिया गया। वहीं, अलवर के गोविंदगढ़ में एक मकान की छत ढह गई। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। जम्मू-कश्मीर में आने वाले दिनों में व्यापक बारिश और गरज-चमक होने की संभावना है। मौसम विभाग ने नौ से 11 अगस्त के बीच जम्मू संभाग के कुछ जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है। अधिकारियों ने बताया कि खराब मौसम, अगले कुछ दिनों में भारी बारिश के पूर्वानुमान और श्रद्धालुओं की संख्या में कमी को देखते हुए शनिवार को जम्मू से अमरनाथ यात्रा स्थगित कर दी गई। राजौरी जिले में एक दुखद घटना सामने आई है। हाल में हुई भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन से क्षतिग्रस्त सड़क पर कीचड़ में कई घंटे तक फंसे रहने के बाद अस्पताल ले जा रहे वाहन में सवार 17 वर्षीय लड़की की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण शनिवार को नगालैंड के दीमापुर जिले के कई निचले इलाकों में बाढ़ आ गई, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। वहीं, घर में पानी घुसने के बाद करंट लगने से अंतिम वर्ष के एक कॉलेज छात्र की मौत हो गई। शनिवार सुबह से दीमापुर जिले में भारी बारिश हो रही है। अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा स्थिति मुख्य रूप से लगातार हो रही बारिश और ऊपरी इलाकों तथा पहाड़ी जलग्रहण क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में सतही जल बहाव के कारण बनी है। इससे दीमापुर के निचले हिस्सों में जल निकासी तंत्र में पानी का प्रवाह बढ़ गया है। एसडीआरएफ ने बाढ़ में फंसे एक घर से दो बच्चों और एक बुजुर्ग सहित नौ लोगों को सुरक्षित बचाकर बाहर निकाला। रिवर बेल्ट कॉलोनी स्थित एक छात्रावास से चार छात्रों को बचाया गया, जबकि होली क्रॉस स्कूल क्षेत्र में फंसे पांच अन्य लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शनिवार को बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से अगले पांच दिनों में ओडिशा में भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। आईएमडी ने कहा कि इसके प्रभाव से उत्तरी और पश्चिमी ओडिशा के कुछ हिस्सों में अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है।
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नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को छात्रों से कहा कि वे उन बातों पर सवाल उठाएं, जिन्हें बिना सोचे-समझे मान लिया जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें सिर्फ सवाल पूछने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके समाधान खोजने का साहस भी दिखाना चाहिए। आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि चुनौतियों का सामना करने के लिए नए समाधान खोजने का साहस रखने वालों के लिए चुनौतियां ही अवसर बन जाएंगी। मोदी ने छात्रों को सलाह दी कि वे जीवन में अपनी जिज्ञासा और सीखने की प्रवृत्ति को बनाए रखें। उन्होंने कहा, "बिना सोचे-समझे स्वीकार की गई बातों पर सवाल उठाएं, लेकिन सिर्फ सवाल उठाने तक ही सीमित न रहें; उनके समाधान खोजने का साहस भी दिखाएं।" उन्होंने कहा कि देश के युवा जितने ज्यादा सशक्त होंगे, पूरा देश उतना ही सशक्त होगा।
मोदी ने कहा कि भारत अब हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहा है; चाहे वह आर्थिक आत्मनिर्भरता हो, तकनीकी आत्मनिर्भरता हो या औद्योगिक आत्मनिर्भरता; यही 'विकसित भारत' की मजबूत नींव है। समारोह से जुड़े गहरे भावनात्मक जुड़ाव को रेखांकित करते हुए, उन्होंने परिसर के जीवंत और सपनों से भरे माहौल का उल्लेख किया। छात्रों और उनके परिवारों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए बधाई देते हुए, मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी डिग्रियां केवल शैक्षणिक सफलता से कहीं ज्यादा हैं; वे देश के प्रति योगदान करने की जिम्मेदारी का प्रतीक हैं। उन्होंने मेडल पाने वालों की खास तौर पर तारीफ की और संस्थान में नई एआई पहल की शुरुआत का जश्न मनाया। उन्होंने कहा, "आप यहां से देश के लिए बहुत कुछ करने का सपना लेकर निकल रहे हैं।"
छात्रों की इस तेज-तर्रार यात्रा पर बात करते हुए, मोदी ने प्रबोधन दिवस से लेकर दीक्षांत समारोह तक के उनके सफर को विस्तार से याद किया। उन्होंने छात्रों के मन में मौजूद अलग-अलग तरह की उम्मीदों का भी जिक्र किया- जैसे पहली सैलरी पाना, स्टार्टअप शुरू करना या आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना। उन्होंने कहा, "आपको निश्चित रूप से इस शानदार सफर और जिंदगी में एक बिल्कुल नया अध्याय शुरू करने के उत्साह से बहुत संतुष्टि मिल रही होगी।" तेजी से बदलते भू-राजनीतिक और रणनीतिक वैश्विक परिदृश्य का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने इन बड़े वैश्विक बदलावों के मुख्य कारण के तौर पर तकनीकी प्रगति की तेज रफ्तार को रेखांकित किया। उन्होंने तेजी से बदलते इस दौर को अभूतपूर्व चुनौतियों और नए बड़े अवसरों के मिले-जुले परिदृश्य के तौर पर पेश किया। उन्होंने कहा, "इस तेजी से हो रहे बदलाव के बीच, मेरी बात याद रखना: जो लगातार सीखता रहता है, वही जीतता है।" आईआईटी डिग्री की असली अहमियत को नए सिरे से परिभाषित करते हुए, मोदी ने जोर दिया कि यह योग्यता सिर्फ अच्छे सीजीपीए (क्युमुलेटिव ग्रेड पॉइंट एवरेज) या मोटी सैलरी वाले नियुक्ति प्रस्तावों से कहीं बढ़कर है; बल्कि यह मुश्किल समस्याओं को सुलझाने की बेहतरीन काबिलियत का एक पक्का वैश्विक प्रमाण-पत्र है। उन्होंने कहा, "आपकी डिग्री दुनिया को ये बताती है कि आप कठिन समस्याओं का समाधान करना जानते हैं।"
शैक्षणिक मेहनत और जीवन की चुनौतियों के बीच समानता बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने युवाओं से कहा कि बड़ी समस्याओं को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर उनका समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह जटिल प्रयोगशाला अभ्यासों को चरणों में हल किया जाता है, उसी तरह जीवन की बड़ी चुनौतियों का भी सामना किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "अगर जिंदगी में मुश्किलें आती ही हैं, तो बिल्कुल नए मौके भी सामने आएंगे; बस आपको पूरी तरह सतर्क रहना होगा।" प्रधानमंत्री ने कहा कि परिसर का जीवन और परिसर के बाहर का जीवन, इन दोनों में बहुत बड़ा अंतर होता है। आईआईटी की परीक्षा में पाठ्यक्रम होता है, लेकिन जिंदगी की परीक्षा में सबकुछ पाठ्यक्रम से बारह होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि असली सफलता सिर्फ पहले से तय सवालों के जवाब देने में नहीं, बल्कि उन समस्याओं की पहचान करने और उन्हें हल करने में है, जिन्हें समाज ने बिना किसी सवाल-जवाब के स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा, "कई पूर्व छात्रों की सफलता का मूल कारण यह था कि उन्होंने निडर होकर उन अहम सवालों की पहचान की, जिन्हें दुनिया ने सवाल मानना ही छोड़ दिया था।" पिछली पीढ़ियों पर रहे ऐतिहासिक बोझ पर बात करते हुए, मोदी ने याद किया कि कैसे आज़ादी पाने के एकमात्र लक्ष्य ने एक पूरे दौर को परिभाषित किया, जो भारी त्याग और तपस्या से भरा था। उन्होंने मौजूदा पीढ़ी से कहा कि वे अगले तीन दशकों में अपने करियर के रास्ते को सीधे देश के विकास के लक्ष्यों से जोड़कर अपनी एक अलग पहचान बनाएं। उन्होंने कहा, "आपके हर फैसले का आधार यही होना चाहिए कि उससे देश को क्या फायदा होगा और देश की कौन-सी जरूरत पूरी होगी।" आर्थिक, तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनने की सरकार की जबरदस्त कोशिशों का जिक्र करते हुए, मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं का सशक्तीकरण ही विकसित भारत की नींव है। उन्होंने प्रशासन के उन रणनीतिक नीतिगत फैसलों की सराहना की, जिनके जरिए पारंपरिक रूप से सीमित क्षेत्रों को लोकतांत्रिक बनाया गया और युवा नवोन्मेषकों के लिए खोला गया। प्रधानमंत्री ने भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र की तेज रफ्तार और सेमीकंडक्टर निर्माण में घरेलू स्तर पर तेजी से हो रही तरक्की का जिक्र करते हुए कहा कि आज कोई युवा पूरे आत्मविश्वास के साथ गर्व से कह रहा है- "मैं अपने परिवार की पहली पीढ़ी हूं, जिसने भारत में चिप बनाई है"। भारत में स्टार्टअप क्रांति को आगे बढ़ाने का श्रेय मौजूदा पीढ़ी को देते हुए, उन्होंने यूनिकॉर्न, डिजिटल पेमेंट और फिनटेक के तेजी से बढ़ते दौर से पैदा हुई जबरदस्त आर्थिक रफ्तार की तारीफ करते हुए कहा कि इसने लाखों लोगों को कारोबार शुरू करने के लिए अभूतपूर्व मंच उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने कहा, "इन सभी क्रांतियों ने देश के लाखों युवाओं को पहली बार कुछ बिल्कुल नया करने का एक अद्भुत अवसर दिया है।" भविष्य में तकनीकी दबदबे की सीमाओं को रेखांकित करते हुए, मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा सेंटर, महत्वपूर्ण खनिज, गहरे समुद्र की खोज, क्वांटम कंप्यूटिंग और ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण उभरते क्षेत्रों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "ऐसे कई अत्याधुनिक क्षेत्र आपके जबरदस्त हुनर, आपके साहसी नवोन्मेष और आपके मजबूत नेतृत्व का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।" शैक्षणिक संसाधनों को सभी के लिए सुलभ बनाने की पहलों का जिक्र करते हुए, उन्होंने 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' कार्यक्रम पर प्रकाश डाला। यह कार्यक्रम यह सुनिश्चित करता है कि प्रतिष्ठित वैश्विक शोध पत्रिका बिना किसी अतिरिक्त लागत के सबसे छोटे शहरों में भी उपलब्ध हों। -
शिमला. हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में शनिवार सुबह करीब सवा सात बजे एक निजी बस पलटकर नीचे की सड़क पर जा गिरी, जिससे सात यात्रियों की मौत हो गई और 11 अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। यह हादसा उस समय हुआ जब बस बैरागढ़ से चंबा जा रही थी। बैरागढ़-तीसा मार्ग पर चालुज मोड़ के पास बस पलट गई। चुराह घाटी का 27 किलोमीटर लंबा यह पहाड़ी मार्ग बेहद संकरा है और कई जगह गहरी खाइयां हैं। यह मार्ग ऊंचाई पर स्थित साच दर्रे की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों में से एक है। राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस हादसे में लोगों के हताहत होने पर दुख व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने 'फेसबुक' एवं 'एक्स' पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि चंबा जिले के तीसा-बैरागढ़ मार्ग पर चालुज मोड़ के पास हुए बस हादसे में सात लोगों के निधन तथा 11 अन्य लोगों के घायल होने का समाचार अत्यंत दुखद है। मुख्यमंत्री ने कहा, ''इस दुःखद हादसे में अपनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर दिवंगत जन की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजन को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।'' उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को सभी घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराकर उनके उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा, ''मैं सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से प्रार्थना करता हूं।''
चंबा के पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी ने बताया कि हादसे में सात लोगों की मौत हुई है और 11 लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बस में कुल कितने लोग सवार थे। सकलानी ने बताया कि यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचे और पुलिस को दुर्घटना की सूचना दी। पुलिस ने बताया कि घटनास्थल पर बचाव अभियान जारी है तथा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), पुलिस, होमगार्ड, अग्निशमन सेवा और राजस्व विभाग के कर्मियों का दल बचाव कार्य में जुटा है। पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान जगदेव (50), देश राज (35), जहदेही (24), हरदेही (43), नीलम (34), बस चालक रूप सिंह (35) और परिचालक तेज सिंह (39) के रूप में हुई है। सभी चंबा जिले के चुराह क्षेत्र के रहने वाले थे। घायलों में करण सिंह, सुष्मिता, पानो देवी, धानी, धर्मो देवी और विजय कुमार के अलावा पांच नाबालिग-प्रियंका, हर्षा, काव्या, अप्रित और नेहा शामिल हैं। घायल 11 लोगों में से छह को गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें चंबा के पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल रेफर किया गया है। पुलिस ने बताया कि हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।
स्थानीय प्रधान मंधी राणा ने भी बताया कि बचाव अभियान जारी है।
सड़क के बीचोंबीच उलटी पड़ी बस के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं, जिनमें स्थानीय लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में मौजूदा मानसून के दौरान 30 जून से सात अगस्त तक सड़क हादसों में 78 लोगों की मौत हो चुकी है। -
बुलढाणा (महाराष्ट्र). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि देश को असल मायने में 'विश्वगुरु' बनाने के लिए वंचित और हाशिए पर रहने वाले लोगों को मुख्यधारा में लाना जरूरी है। महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के खामगांव में पारधी समुदाय के आवासीय विद्यालय में तीन खेल मैदानों का उद्घाटन करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस समुदाय को आज हम गैर अधिसूचित या 'भटके-विमुक्त' समुदाय कहते हैं, वह कभी ज्ञान देने वाला समुदाय हुआ करता था। उन्होंने कहा कि वे निस्वार्थ भाव से अपना ज्ञान बांटने के लिए बाहर जाते थे, लेकिन समय के साथ वे हाशिए पर चले गए। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण पूरे पारधी समुदाय को ''अपराधी जनजाति'' घोषित कर दिया गया, जिससे वे विकास की दौड़ में काफी पीछे रह गए। भागवत ने कहा कि भारतीय समाज कभी पूरी तरह संगठित था, लेकिन विदेशी आक्रमणकारियों की गुलामी के कारण उसमें बिखराव आ गया। आरएसएस प्रमुख ने कहा, ''इसके परिणामस्वरूप समाज में वंचित समूहों की संख्या बढ़ गई। इसके बावजूद इन समुदायों ने कभी अधीनता स्वीकार नहीं की और वे लगातार स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे।'' उन्होंने कहा कि संघ कई वर्षों से पारधी समुदाय के विकास के लिए काम कर रहा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता अंबादास दानवे भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था ''विद्यार्थी-केंद्रित, अनुसंधान आधारित और भविष्य के लिए तैयार'' है तथा देश के युवा अब दुनिया से केवल प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहे बल्कि उसका नेतृत्व भी कर रहे हैं। जोशी ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ''शिक्षा मंत्री का अतिरिक्त प्रभार संभालने के बाद किसी शिक्षण संस्थान में यह मेरा पहला सार्वजनिक कार्यक्रम है और वह भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ। मैं आप सभी के बीच आकर बहुत खुश हूं और खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं।'' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ''भारत के युवाओं की क्षमता पर हमेशा अपार विश्वास जताया है'' और वह उन्हें ''विकसित भारत 2047 का प्रमुख शिल्पकार'' मानते हैं। जोशी ने कहा, ''आज उच्च शिक्षा में 4.5 करोड़ से अधिक विद्यार्थी पंजीकृत हैं। विश्वविद्यालयों की संख्या में 2014 से करीब 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।'' उन्होंने कहा, ''650 से अधिक नए विश्वविद्यालय, 14,000 नए महाविद्यालय, 4,000 से अधिक नए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), नौ नए भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), सात नए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और 13 नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्थापित किए गए हैं।'' जोशी ने कहा कि मेडिकल कॉलेज की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है और मेडिकल की सीटें लगभग तीन गुनी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि ''देश के 823 मेडिकल कॉलेज में करीब 1.4 लाख सीट उपलब्ध'' हैं। उन्होंने कहा कि 14,000 से अधिक 'पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया' (पीएम श्री) विद्यालयों और 10,000 'अटल टिंकरिंग' प्रयोगशालाओं के माध्यम से बच्चों को ''नवोन्मेष, प्रौद्योगिकी और नए विचारों की ताकत'' से अवगत कराया जा रहा है। जोशी ने खेलों के क्षेत्र में सरकार की पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया, विश्वविद्यालय खेल और युवा खेलों जैसे कार्यक्रमों ने गांवों, कस्बों और उभरते शहरों की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा, ''इससे आप समझ सकते हैं कि युवाओं और खेलों दोनों को कितना महत्व दिया गया है।''
जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से पहले और बाद में खिलाड़ियों से मुलाकात करते हैं, ''जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।'' उन्होंने कहा, ''नए भारत का यह आत्मविश्वास हाल में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में एक बार फिर दिखाई दिया।'' जोशी ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य समेत कुल 39 पदक जीते और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। उन्होंने कहा, ''एक समय सवाल यह था कि भारत के युवा दुनिया से कैसे प्रतिस्पर्धा करेंगे। आज दुनिया देख रही है कि भारत के युवा उसका नेतृत्व कैसे कर रहे हैं और नारी शक्ति भी निश्चित रूप से पीछे नहीं है।'' जोशी ने शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) विषयों में पंजीकरण कराने वालों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 44 प्रतिशत है, जो दुनिया में सबसे अधिक अनुपातों में से एक है। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण ने हमारी शिक्षा व्यवस्था को विद्यार्थी-केंद्रित, अनुसंधान आधारित और भविष्य के लिए तैयार बनाया है।'' जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 तथा 'एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स' और 'मल्टीपल एंट्री, मल्टीपल एग्जिट' जैसी पहल विद्यार्थियों को ''काफी लचीलापन'' दे रही हैं और उच्च शिक्षा को वास्तव में विद्यार्थी-केंद्रित बना रही हैं। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री ने भारत के संस्थानों में नया आत्मविश्वास पैदा किया है कि हमारे परिसर केवल स्नातक ही नहीं, बल्कि नवप्रवर्तक, शोधकर्ता और राष्ट्र निर्माता भी तैयार कर सकते हैं।'' जोशी ने आईआईटी दिल्ली को ''इस बदलाव का जीवंत उदाहरण'' बताते हुए कहा कि संस्थान को वैश्विक स्तर पर मिल रही पहचान न केवल उसकी उत्कृष्टता बल्कि ''दुनिया भर में भारतीय उच्च शिक्षा के बढ़ते कद'' को भी दर्शाती है। उन्होंने कहा, ''भारत की युवा शक्ति की उल्लेखनीय झलक आज यहां प्रधानमंत्री के सामने बैठी है।''
जोशी ने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से कहा, ''आज आप आईआईटी से केवल डिग्री लेकर नहीं जा रहे हैं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी लेकर जा रहे हैं-उद्देश्यपूर्ण नवोन्मेष करने, ईमानदारी के साथ नेतृत्व करने और भारत को विकसित भारत बनाने में योगदान देने की जिम्मेदारी।'' उन्होंने विद्यार्थियों और उनके माता-पिता को बधाई देते हुए कहा, ''उत्कृष्टता के साथ-साथ नैतिकता और मूल्य भी महत्वपूर्ण हैं।'' -
मेरठ/ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कांवड़ यात्रा में शामिल शिवभक्तों का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया और देवाधिदेव महादेव से प्रदेश और देश में सुख, शांति, समृद्धि एवं सौहार्द की कामना की। मेरठ के मोदीपुरम क्षेत्र में दुल्हेड़ा पुलिस चौकी के निकट बनाए गए मंच से योगी आदित्यनाथ ने 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयकारों के बीच कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा की। इस अवसर पर उनके साथ रामानंद सागर के धारावाहिक 'रामायण' में भगवान राम की भूमिका निभाने वाले अरुण गोविल, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री सोमेंद्र तोमर समेत कई प्रमुख लोग मौजूद थे। गोविल, मेरठ से भारतीय जनता पार्टी के सांसद भी हैं। योगी ने अपने संबोधन में कहा, "सभी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक और धार्मिक संगठनों का हृदय से धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ कांवड़ियों की सुविधाओं का ध्यान रखा है। सावन में कांवड़ यात्रा का हिस्सा बन रहे सभी शिवभक्तों का अभिनंदन करता हूं और उनकी इस यात्रा के लिए देवाधिदेव महादेव से प्रार्थना करता हूं कि वे उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें।" मुख्यमंत्री ने कहा, "प्रदेश और देश में सुख, शांति, समृद्धि और सौहार्द का माहौल बनाने के लिए देवाधिदेव महादेव की कृपा बनी रहे, इसी भावना के साथ आज मुझे भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने का अवसर मिला है।" उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा अपने समापन की ओर बढ़ रही है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर शिवभक्त अपने गंतव्य की ओर बढ़ते हुए विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल हैं। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि सावन की शिवरात्रि तक गाजियाबाद से लेकर हरिद्वार के बीच चार से साढ़े चार करोड़ श्रद्धालु और शिवभक्त इस कांवड़ यात्रा में गंगाजल लेकर शिवालयों में जलाभिषेक करेंगे।" मुख्यमंत्री ने कहा, "आज मुजफ्फरनगर के शिव चौक पर भारी भीड़ है। अभी मेरठ में मुझे शिवभक्त कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा करने का अवसर मिला है। मेरठ के हमारे सभी जनप्रतिनिधि इस अवसर पर मेरे साथ यहां मौजूद हैं।" योगी ने कहा कि मेरठ के प्रसिद्ध बाबा औघड़नाथ मंदिर, गाजियाबाद के बाबा दूधेश्वरनाथ मंदिर और बागपत के पुरा महादेव मंदिर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और हिमाचल प्रदेश से आने वाले शिवभक्त इस यात्रा का हिस्सा बने हुए हैं। उन्होंने कहा, "पूरी श्रद्धा, उत्साह और उमंग के साथ यात्रा में शामिल होने आए कांवड़ियों का प्रदेश सरकार की ओर से स्वागत और अभिनंदन करता हूं।" मुख्यमंत्री ने कांवड़ियों के राष्ट्र के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि जात-पात, प्रांत और क्षेत्रीयता की सीमाओं से ऊपर उठकर शिवत्व की भावना से एकाकार होने के लिए यह यात्रा उत्साह और उमंग का वातावरण पैदा कर रही है। प्रशासनिक तैयारियों और व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, "प्रशासन ने उच्च स्तर की व्यवस्था की है और समाजसेवी संगठनों ने शिविर लगाए हैं तथा कांवड़ियों को सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। वास्तव में यह भक्ति की पराकाष्ठा है। मैं सभी कांवड़ यात्रियों का स्वागत करता हूं। आज, कल और परसों यानी शिवरात्रि के दिन यहां पुष्प वर्षा होगी और हमने हेलीकॉप्टर की भी व्यवस्था की है.
- श्री विजय पुरम । उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के दो दिवसीय दौरे पर शनिवार को श्री विजय पुरम पहुंचे, जहां वह 'हर घर तिरंगा' अभियान और 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। अधिकारियों ने बताया कि राधाकृष्णन शनिवार सुबह एक विशेष विमान से वीर सावरकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित नौसैनिक वायु अड्डे 'आईएनएस उत्क्रोश' पर उतरे, जहां वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। उन्होंने बताया कि 'आईएनएस उत्क्रोश' से राधाकृष्णन लोक निवास गए, जहां उन्होंने उपराज्यपाल डीके जोशी के साथ बैठक की। अधिकारियों के मुताबिक, उपराष्ट्रपति शनिवार शाम सेलुलर जेल राष्ट्रीय स्मारक का दौरा देंगे, जहां वह शहीद स्तंभ पर श्रद्धांजलि देंगे। उन्होंने बताया कि सेलुलर जेल राष्ट्रीय स्मारक में राधाकृष्णन स्वतंत्रता ज्योति पर श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे और उस कोठरी में भी जाएंगे, जहां ब्रिटिश शासन के दौरान वीडी सावरकर को कैद रखा गया था। अधिकारियों के अनुसार, सेलुलर जेल राष्ट्रीय स्मारक में उपराष्ट्रपति आजादी के आंदोलन और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान पर आधारित 'लाइट एंड साउंड शो' भी देखेंगे। उन्होंने बताया कि नौ अगस्त की सुबह उपराष्ट्रपति श्री विजय पुरम में 'हर घर तिरंगा अभियान' के तहत फ्लैग पॉइंट पर राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद राधाकृष्णन एक सभागार में राज्य स्तरीय 'वंदे मातरम तिरंगा संगीत कार्यक्रम' में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि रविवार दोपहर उपराष्ट्रपति ऐतिहासिक नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप का दौरा करेंगे और शाम को नयी दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
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नयी दिल्ली. सरकार ने मई में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन में अल नीनो की संभावित स्थिति के प्रभाव सहित खरीफ मौसम की तैयारियों की समीक्षा की थी। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में शुक्रवार को यह जानकारी दी। राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन का आयोजन 28 और 29 मई को किया गया था। ठाकुर ने कांग्रेस के प्रमोद तिवारी के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि सम्मेलन में फसल योजना, बीज और उर्वरक की उपलब्धता, जल प्रबंधन और क्षेत्र विशिष्ट चुनौतियों की समीक्षा की गई। उन्होंने बताया कि राज्यों को महत्वपूर्ण सूचनाओं की समय पर उपलब्धता, कुशल जल प्रबंधन, मौसम की स्थिति की सूक्ष्म निगरानी, किसानों को परामर्श और भारत मौसम विज्ञान विभाग, आईसीएआर तथा राज्य सरकारों के समन्वय से आकस्मिक उपायों के कार्यान्वयन के माध्यम से तैयारियों को सुदृढ़ करने की सलाह दी गई। उनके अनुसार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के लिए अल नीनो से संबंधित जोखिमों को कम करने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं भी जारी की हैं।
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नयी दिल्ली. शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद अगले वर्ष होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले शिअद और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के फिर से साथ आने की अटकलें तेज हो गई हैं। शिअद ने कृषि कानूनों के मुद्दे पर छह वर्ष पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का साथ छोड़ दिया था। इस बैठक से परिचित सूत्रों के अनुसार, सुखबीर सिंह बादल ने संसद भवन परिसर स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। हालांकि, बैठक में क्या चर्चा हुई, इसकी तत्काल जानकारी नहीं मिल सकी लेकिन इस मुलाकात के बाद यह कयास लगाए जाने लगे कि शिअद एक बार फिर भाजपा के साथ गठबंधन कर सकता है। शिअद, राजग के सबसे पुराने सहयोगी दलों में से एक था और उसने दो दशक से अधिक समय तक इस गठबंधन का हिस्सा रहने के बाद 2020 में तीन कृषि कानूनों के विरोध में गठबंधन छोड़ दिया था। बाद में मोदी सरकार ने इन तीनों कृषि कानूनों को निरस्त कर दिया था। सुखबीर सिंह बादल की पत्नी और लोकसभा सांसद हरसिमरत कौर बादल भी केंद्र में मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुकी हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव अगले वर्ष की शुरुआत में प्रस्तावित हैं।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि देश का हथकरघा क्षेत्र रोजगार के व्यापक अवसर प्रदान करता है और ई-कॉमर्स मंचों के जरिए इसके उत्पादों की वैश्विक बाजारों में पहुंच को और बढ़ाया जा सकता है। मुर्मू ने '12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस' समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इस क्षेत्र से लगभग 35 लाख लोग जुड़े हुए हैं, जिनमें 25 लाख से अधिक महिलाएं हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि हथकरघा क्षेत्र देश के समावेशी विकास का एक मजबूत आधार बनेगा।
उन्होंने कहा, "हथकरघा क्षेत्र न केवल आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। डिजिटल मंचों और ई-कॉमर्स के माध्यम से भारतीय हथकरघा उत्पादों की वैश्विक पहचान को और मजबूत किया जा सकता है।" मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में विश्वास जताया कि सरकार और अन्य हितधारकों के सहयोग से यह क्षेत्र आने वाले समय में और सशक्त होगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर 'संत कबीर हथकरघा पुरस्कार' और 'राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार 2025' भी प्रदान किए। इन पुरस्कारों के जरिए उत्कृष्ट बुनकरों और कारीगरों के योगदान को सम्मानित किया जाता है। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने शुक्रवार को लोकसभा को बताया कि इस साल 31 मई तक, आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के कारण राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने 2,000 से ज़्यादा अस्पतालों को सूची से हटा दिया है और 1,200 अन्य को निलंबित कर दिया है। नड्डा ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि योजना के दिशानिर्देशों के उल्लंघन के लिए 29 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और 328.49 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। नड्डा ने कहा कि नियमों के उल्लंघन के कारण 2,359 अस्पतालों को सूची से हटाया गया है।
उन्होंने कहा कि इस योजना में धोखाधड़ी के मामले में 'कतई बर्दाश्त नहीं करने की' नीति अपनाई जाती है और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के तहत राष्ट्रीय धोखाधड़ी रोधी इकाई संदिग्ध दावों का पता लगाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग पर आधारित स्वचालित प्रणाली का इस्तेमाल करती है। उन्होंने कहा कि ये स्वचालित प्रणालियां दावा जमा होने के 24 घंटे के भीतर असामान्य दावा पैटर्न की पहचान करती हैं, जिनमें अनधिकृत बिलिंग, दोहरी प्रविष्टि, बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई प्रक्रियाओं और मरीज की पहचान का गलत इस्तेमाल शामिल है। मंत्री ने कहा कि संदिग्ध माने गए दावों की भुगतान से पहले जांच की जाती है और धोखाधड़ी वाले दावों का भुगतान नहीं किया जाता है, जिससे 31 जुलाई, 2026 तक 676.14 करोड़ रुपये की बचत हुई है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों को निलंबित करने और सूची से हटाने के अलावा, योजना के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ जुर्माना लगाने और प्राथमिकी दर्ज करने जैसी कार्रवाई भी की जाती हैं। आयुष्मान भारत योजना देश की आबादी के निचले 40 प्रतिशत हिस्से को द्वितीय और तृतीय स्तर के अस्पतालों में भर्ती कराने के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवरेज देती है। यह योजना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जा रही है, और कई राज्य इसे अपनी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के साथ जोड़ रहे हैं। नड्डा ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, पात्र लाभार्थियों के लिए 3.75 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए गए, अस्पताल में भर्ती होने के 2.74 करोड़ मामलों को मंज़ूरी दी गई और योजना के तहत 5,074 अस्पतालों को सूची में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को साल के दौरान 8,438.27 करोड़ रुपये जारी किए। उन्होंने यह भी बताया कि धन जारी करना मांग पर आधारित होता है और यह राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रस्तुत उपयोग प्रमाणपत्र और जरूरतों पर निर्भर करता है। एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए नड्डा ने कहा कि 31 जुलाई, 2026 तक पूरे देश में 95.99 करोड़ आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते (आभा) बनाए गए थे, जिनमें से 5.25 करोड़ खाते गुजरात में बनाए गए। उन्होंने कहा कि आभा, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का एक अहम घटक है। यह 14 अंकों की एक खास संख्या है, जो नागरिकों को स्वास्थ्य प्रणाली में अपने डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रूप से रखने और उनका प्रबंधन करने की सुविधा देता है। मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि आभा बनाने से जुड़े आंकड़े संसदीय क्षेत्र के हिसाब से नहीं रखे जाते। -
नई दिल्ली। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 शुक्रवार को लोकसभा में पारित हो गया है। इस विधेयक का उद्देश्य भुगतान में विलंब की समस्या को समाप्त करना और विवाद निपटारे की प्रक्रिया को आसान बनाना है। इसमें यह प्रावधान किया गया है कि सभी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को लघु एवं मध्यम उद्यमों से की गई खरीद के सभी बिलों का भुगतान व्यापार प्राप्य छूट प्रणाली के माध्यम से करना अनिवार्य होगा।
इस विधेयक को राज्यसभा से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।प्रस्तावित विधेयक में कहा गया कि अगर विवाद के मामले में मध्यस्थता विफल हो जाती है, तो मध्यस्थता खत्म होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर आर्बिट्रेशन के लिए रेफरेंस दिया जाना चाहिए। साथ ही, दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के 90 दिन में फैसला सुनाना जरूरी है। इसमें ये भी है कि अगर कोई मामला 6 महीने से ज्यादा लटका है तो आपूर्तिकर्ता (एमएसएमई) को तय रकम का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान तुरंत करना पड़ेगा।इससे पहले गुरुवार को लोकसभा ने विपक्ष के विरोध के बीच ‘कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस कानून का मकसद ‘भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में’ में संशोधन करना है।इस बिल में टैक्स से जुड़े ऐसे बदलावों का प्रस्ताव है जिनका मकसद निवेश को बढ़ावा देना, मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करना और टैक्स से जुड़ी निश्चितता प्रदान करना है। यह विधेयक ‘आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ की जगह लेगा।इसके अतिरिक्त, इस हफ्ते की शुरुआत में सरकार ने आधिकारिक बयान में कहा था कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) की सस्टेनेबल जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट (जेडईडी) सर्टिफिकेशन योजना के तहत अब तक करीब 9.49 लाख एमएसएमई पंजीकृत हो चुके हैं। केंद्र सरकार महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं के स्वामित्व वाले एमएसएमई को जेडईडी सर्टिफिकेशन पर 100 प्रतिशत सब्सिडी भी दे रही है। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने बृहस्पतिवार को कहा कि आयुर्वेद आज एक बड़े बदलाव के दौर में है, जहां भारत के समृद्ध पारंपरिक ज्ञान के साथ-साथ वैज्ञानिक प्रमाण, नवाचार और वैश्विक स्तर पर पहुंच को भी शामिल करना जरूरी है। उन्होंने यह बात दिल्ली में केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) की शासी निकाय की 27वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। जाधव ने इस बात पर जोर दिया कि सीसीआरएएस ने साक्ष्य-आधारित अनुसंधान में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने संस्थान से आह्वान किया कि वह आयुर्वेद को वैज्ञानिक रूप से और मजबूत, वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य और सुलभ बनाने की अपनी कोशिशों को और तेज करे। जाधव ने कहा कि आयुर्वेद के विकास के अगले चरण में प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और बाजार से जुड़ने पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवा शोधकर्ताओं और स्टार्टअप को आयुर्वेद को प्रयोगशाला से बाजार तक ले जाना चाहिए।
मंत्री ने नवाचार को बढ़ावा देने और भारत को वैश्विक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के तौर पर स्थापित करने के लिए 'युवा शोध निधि', 'आयुर्वेद स्टार्टअप उत्प्रेरक' और 'वैश्विक आयुर्वेद चुनौती' जैसी पहलों पर ध्यान देने का सुझाव भी दिया। उन्होंने शासी निकाय से आग्रह किया कि वे आयुर्वेद को एक आधुनिक, साक्ष्य-आधारित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में बदलने के लिए मिलकर काम करें। बैठक के दौरान, जाधव ने ऑनलाइन माध्यम से सीसीआरएएस-क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (आरएआरआई), पुणे में 'पशु गृह' और आरएआरआई, रानीखेत में कर्मचारी आवास परिसर का उद्घाटन किया। साथ ही आरएआरआई, नागपुर में 50 बिस्तरों वाले नए आयुर्वेद अस्पताल का भूमि पूजन भी किया।



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