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मुंबई. भारत में बीमा कराने वाले 80 प्रतिशत से अधिक व्यक्ति अपने स्वास्थ्य बीमा कवर की प्रभावशीलता के बारे में अनिश्चित रहते हैं। फ्यूचर जनरली इंडिया इंश्योरेंस ने एक सर्वेक्षण में यह बात कही। सर्वेक्षण में हेल्थ अनलिमिटेड ने पाया कि जब कोई दावा किया जाता है, तो हर तीन में से दो व्यक्ति असुरक्षित महसूस करते हैं और उन्हें अप्रत्याशित बिलों का सामना करना पड़ता है, जिससे उन्हें अपर्याप्त कवरेज मिलता है। सर्वेक्षण में कहा गया है, “दस में से नौ स्वास्थ्य बीमा पॉलिसीधारकों को लगता है कि बीमा राशि का पुनर्भरण एक प्रमुख लाभ है।” इसके तहत बीमा राशि खत्म होने के बाद भी बीमा लाभ मिलना जारी रहता है। फ्यूचर जनरली इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अनूप राव ने कहा कि यह बढ़ती चिंता व्यापक स्वास्थ्य सेवा समाधानों की आवश्यकता को उजागर करती है। राव ने कहा, “स्वास्थ्य बीमा होने के बावजूद, भारत में अधिकांश लोगों के लिए चिकित्सा उपचार की बढ़ती लागत चिंता का विषय है।” यह सर्वेक्षण 25 वर्ष से अधिक आयु के 800 बीमित व्यक्तियों के बीच किया गया था। इसमें दावा किया गया कि 2021 में अन्य एशियाई देशों के बीच भारत में चिकित्सा मुद्रास्फीति की दर सबसे अधिक थी।
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नयी दिल्ली. दुनिया भर के 15 से अधिक देशों के 20 ग्रैंडमास्टर्स सहित ढाई हजार से अधिक खिलाड़ी सात से 14 जून तक यहां होने वाले दिल्ली इंटरनेशनल ओपन ग्रैंडमास्टर्स शतरंज टूर्नामेंट के 21वें सत्र में तीन रेटिंग आधारित वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगे। अखिल भारतीय शतरंज महासंघ (एआईसीएफ) के तत्वावधान में दिल्ली शतरंज संघ द्वारा आयोजित इस टूर्नामेंट की कुल इनामी राशि रिकॉर्ड 1.21 करोड़ रुपये है। यह फिडे विश्व चैंपियनशिप सर्किट की एक प्रमुख प्रतियोगता है। श्रेणी ए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेटिंग हासिल करने वाले सभी खिलाड़ियों के लिए खुली है जिसकी इनामी राशि 51 लाख रुपये है। श्रेणी बी और सी क्रमशः 1900 और 1700 से कम रेटिंग वाले खिलाड़ियों के लिए है और प्रत्येक वर्ग की इनामी राशि 35 लाख रुपये है। सभी मैच स्विस सिस्टम प्रारूप के तहत फिडे नियमों के अनुसार खेले जाएंगे।
दिल्ली शतरंज संघ के अध्यक्ष भरत सिंह चौहान ने एक विज्ञप्ति में कहा, ‘‘पिछले दो दशक में दिल्ली ग्रैंडमास्टर ओपन ने ना केवल भारत में शतरंज की प्रगति के साथ तालमेल बनाए रखा है बल्कि इसे आगे बढ़ाने में भी मदद की है।'' उन्होंने कहा, ‘‘हमने खेल को हाशिये से मुख्यधारा में आते देखा है और यह टूर्नामेंट भागीदारी के पैमाने से लेकर प्रतिस्पर्धा की गहराई और इसे समर्थन देने वाले बुनियादी ढांचे तक, हर मायने में उस बदलाव को दर्शाता है। हर टूर्नामेंट के साथ हम देश में एक स्थायी, उच्च प्रदर्शन वाली शतरंज संस्कृति की नींव को मजबूत कर रहे हैं।'' श्रेणी ए के मुकाबलों में क्लासिकल टाइम कंट्रोल का इस्तेमाल किया जाएगा जिसमें शुरुआती 90 मिनट और हर चाल के बाद 30 सेकेंड का इजाफा होगा। शीर्ष तीन खिलाड़ियों को क्रमश: सात लाख, छह लाख और पांच लाख रुपये की इनामी राशि मिलेगी जबकि सभी शीर्ष दस खिलाड़ियों को एक लाख रुपये या उससे अधिक का पुरस्कार दिया जाएगा। श्रेणी ए में सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी और सर्वश्रेष्ठ विदेशी खिलाड़ी को एक लाख रुपये का विशेष पुरस्कार दिया जाएगा। -
श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि पड़ोसी देश में ऐसा कुछ भी नहीं है जो भारतीय सशस्त्र बलों की पहुंच से बाहर हो। सिन्हा ने यह टिप्पणी उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के तंगधार सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर तैनात सैन्य कर्मियों को संबोधित करते हुए की। उन्होंने कहा, ‘‘पूरी दुनिया ने भारतीय सशस्त्र बलों की बहादुरी देखी है और फिर दुश्मन ने संघर्षविराम के लिए पूरी दुनिया से गुहार लगानी शुरू कर दी। पाकिस्तान में ऐसा कुछ भी नहीं है जो भारतीय सेना की पहुंच से बाहर हो।'' उपराज्यपाल ने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा पर प्रकाश डाला और यह भी कहा कि दुश्मन कर्ज के दम पर मानवता को नष्ट कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा पड़ोसी कर्ज के दम पर मानवता को नष्ट करने पर तुला हुआ है। मुझे लगता है कि हमारे वीर सैनिकों द्वारा दिए गए जवाब से उन्हें सबक मिला होगा। मैं आपकी वीरता, पराक्रम और मां भारती के प्रति आपकी भक्ति को नमन करता हूं और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि जब भी ऐसा संकट आए, तो लोगों को पता चले कि हमारा देश आप जैसे वीरों के सुरक्षित हाथों में है।'' सिन्हा ने सेना और पुलिस कर्मियों के साथ जमीनी स्तर पर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि देश सतर्कता, समर्पण, बहादुरी और सर्वोच्च बलिदान के साथ जीवन की रक्षा करने और हमारी सीमाओं की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए सशस्त्र बलों का आभारी है। सिन्हा ने कहा, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे जवान दुश्मन के किसी भी दुस्साहस का डटकर सामना करेंगे।'' बाद में सिन्हा ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सेना और पुलिस अधिकारियों के साथ जमीनी स्तर पर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। तंगधार में हमारे बहादुर जवानों से बातचीत की। वे देश की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरे आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ डटे हुए हैं।'' सिन्हा ने तंगधार सेक्टर में सीमा क्षेत्र का दौरा किया और पाकिस्तान द्वारा भारी गोलाबारी से हुए नुकसान का आकलन किया। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने राजनीतिक और कूटनीतिक, दोनों तरह से भारत की सोच बदल दी है और पूरी दुनिया इसकी गवाह है। जम्मू कश्मीर के उधमपुर से लोकसभा सदस्य एवं केंद्रीय मंत्री सिंह ने यह भी कहा कि सिंधु जल संधि जल्दबाजी में की गई थी, क्योंकि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पाकिस्तान को खुश करना चाहते थे। कार्मिक राज्य मंत्री सिंह ने विजय के. सजावल द्वारा लिखी पुस्तक "कश्मीर क्रॉनिकल्स" का यहां कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में विमोचन करने के बाद कहा कि यह संधि दोनों देशों के लिए न्याय करने में असफल रही। उन्होंने कहा कि 2019 के पुलवामा हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक के पश्चात, भारत ने अपनी रक्षा रणनीतियों में बदलाव की शुरुआत की थी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बलों को परिस्थितियों के अनुसार तथा पेशेवर ज्ञान एवं विवेक के आधार पर कार्य करने की पूरी स्वतंत्रता दी थी। उन्होंने कहा कि यह 2014 से पहले की प्रथा के बिल्कुल विपरीत है, जब सेनाओं को केवल सीमित स्वतंत्रता थी और बड़े हमले के लिए उन्हें नयी दिल्ली से राजनीतिक मंजूरी का इंतजार करना पड़ता था। मंत्री ने कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा शुरू किया गया ऑपरेशन सिंदूर, अब तक की प्रचलित पद्धति में बदलाव का परिणाम है। सिंह ने कहा कि अब भारत का रक्षा विभाग सक्रिय रहेगा, न कि दुश्मन के हमले के बाद प्रतिक्रियात्मक।
सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने तीन स्तरों पर महत्वपूर्ण संदेश दिया है - घरेलू स्तर पर इसने देश के लोगों को यह विश्वास दिलाया है कि भारत अब वैश्विक गुरु की भूमिका निभाने के लिए तैयार है, पाकिस्तान को स्पष्ट रूप से संदेश दिया है कि आज का भारत अब 1965 या 1971 वाला भारत नहीं है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह जोरदार तरीके से संदेश दिया है कि भारत एक ताकत के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए अगला लक्ष्य 2047 का विकसित भारत होगा और भारत का अगला एजेंडा पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर को वापस लेना होगा, जो केवल मोदी के नेतृत्व में ही संभव है। इससे पहले, पुस्तक के लेखक ने एक कश्मीरी पंडित के रूप में अपने व्यक्तिगत अनुभव तथा पिछले कई वर्षों के दौरान जम्मू कश्मीर के प्रति अपने दृष्टिकोण के बारे में विस्तार से बात की। -
नयी दिल्ली. दिल्ली मास्टर प्लान 2041 जल्द ही लागू किया जाएगा और राष्ट्रीय राजधानी के 48 गांवों का शहरीकरण किया जाएगा। दिल्ली के लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश वर्मा ने शनिवार को यह जानकारी दी। मंत्री ने यह भी घोषणा की कि लाल डोरा श्रेणी में आने वाली संपत्तियों की पहली रजिस्ट्री पूरी तरह से निःशुल्क होगी। इस कदम से लंबे समय से लंबित संपत्ति विवादों का समाधान होने तथा लोगों को वित्तीय बोझ के बिना कानूनी स्वामित्व दस्तावेज प्राप्त करने में मदद मिलने की उम्मीद है। वर्मा के कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि मंत्री ने यह टिप्पणी दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के दौलतपुर गांव के दौरे के दौरान की। वर्मा ने संवाददाताओं से कहा, "लंबे समय से प्रतीक्षित मास्टर प्लान 2041 अपने अंतिम चरण में है और इसे बहुत जल्द लागू किया जाएगा। हमारा लक्ष्य सिर्फ नीतियां बनाना नहीं है, बल्कि उन्हें जवाबदेही के साथ पारदर्शी तरीके से जमीन पर लागू करना है।" उन्होंने कहा, "मास्टर प्लान 2041 दिल्ली के गांवों की सूरत बदल देगा और ग्रामीण आबादी को शहरी क्षेत्रों के बराबर सुविधाएं प्रदान करेगा।" मंत्री ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत दिल्ली के लगभग 48 गांवों का शहरीकरण किया जाएगा।
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पुरी. श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने शनिवार को श्रद्धालुओं से अपील की कि वे भगवान जगन्नाथ को अर्पित किए जाने वाले पवित्र प्रसाद 'महाप्रसाद' के प्रति सर्वोच्च सम्मान दिखाएं तथा 'डाइनिंग टेबल' पर इसे खाने से परहेज करें। यह अपील उन खबरों और सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों जिनमें पुरी के एक होटल में लोगों को डाइनिंग टेबल (भोजन की मेज) पर जूते पहनकर 'महाप्रसाद' खाते हुए देखा जा सकता है, के बाद की गई है। एसजेटीए ने इसे "श्री मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं के खिलाफ" करार दिया था। एसजेटीए ने कहा कि भगवान जगन्नाथ का 'महाप्रसाद' अत्यंत पवित्र है और इसे "अन्न ब्रह्म" माना जाता है। परंपरा के अनुसार भक्तों को कृतज्ञता के साथ फर्श पर बैठकर 'भोग' को ग्रहण करना चाहिए। प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया कि, "महाप्रसाद का अत्यधिक धार्मिक महत्व है और इसे अत्यंत श्रद्धा के साथ ग्रहण किया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा, "डाइनिंग टेबल पर इसे खाना ईश्वरीय प्रसाद के प्रति अनादर माना जाता है और इससे जुड़ी आध्यात्मिक परंपराओं के विपरीत है।" अपने परामर्श में एसजेटीए ने पुरी के होटलों, रेस्तरां और भोजनालयों से ऐसी प्रथाओं को हतोत्साहित करने तथा आगंतुकों को 'महाप्रसाद' ग्रहण करने के उचित तरीके के बारे में शिक्षित करने का भी आह्वान किया।
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गया जी .बिहार के गया जी जिले में शनिवार को कथित तौर पर जमीन विवाद को लेकर पिता-पुत्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। मृतकों की पहचान अशोक सिंह (65) और उनके बेटे कुणाल (32) के रूप में हुई है।
सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) (गया जी ग्रामीण) अनवर जावेद ने बताया, ‘‘यह घटना वजीरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत दखिनगांव इलाके में हुई, जब उसी इलाके के रहने वाले लोगों ने दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी।'' उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि हत्या का कारण जमीन विवाद हो सकता है। उन्होंने बताया कि शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। एएसपी ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है। -
इटावा.उत्तर प्रदेश में इटावा जिले के पछांयगांव थाना क्षेत्र में कथित तौर पर पत्नी से विवाद के चलते एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। थाना पछांयगांव के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) अलमा अहिरवार ने बताया कि ग्राम मडैय्या करीलगढ़ में शुक्रवार देर शाम पति-पत्नी के बीच घरेलू विवाद के कारण पति जितेन्द्र कुमार (38) ने घर के अंदर उस समय फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली जब उसकी पत्नी खाने-पीने का सामान लेने घर से बाहर गई हुई थी। दंपति के बच्चे भी घर के बाहर गांव में अन्य बच्चों के साथ खेल रहे थे। उन्होंने बताया कि घर लौटने पर पति को फांसी पर लटका देख पत्नी चीख पुकार करने लगी, तब गांव वाले एकत्र हो गए। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को पोस्टमार्टम के लिये भेजा। एसएचओ ने बताया कि जितेन्द्र शराब की लत होने के कारण आए दिन पत्नी से झगड़ा करता था क्योंकि पत्नी उसे शराब पीने से रोकती थी।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अपने से संबद्ध विद्यालयों को बच्चों के चीनी सेवन पर नजर रखने और उसे कम करने के लिए ‘शुगर बोर्ड' लगाने का निर्देश दिया है। यह जानकारी अधिकारियों ने दी। सीबीएसई ने उल्लेख किया है कि पिछले दशक में बच्चों में टाइप 2 मधुमेह के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो पहले मुख्य रूप से वयस्कों में देखा जाता था। बोर्ड ने स्कूल प्रधानाचार्यों को लिखे पत्र में कहा, ‘‘यह खतरनाक प्रवृत्ति मुख्य रूप से चीनी के अधिक सेवन के कारण है, जो अकसर स्कूल के वातावरण में मीठे स्नैक्स, पेय पदार्थ और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की आसानी से उपलब्धता के कारण होता है। चीनी के अत्यधिक सेवन से न केवल मधुमेह का खतरा बढ़ता है, बल्कि मोटापा, दांत की समस्याएं और अन्य चयापचय संबंधी विकार भी होते हैं, जो अंततः बच्चों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं।'' अध्ययनों से पता चलता है कि 4 से 10 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए दैनिक कैलोरी सेवन में चीनी का हिस्सा 13 प्रतिशत है, तथा 11 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए यह 15 प्रतिशत है, जो अनुशंसित 5 प्रतिशत की सीमा से काफी अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘इस अत्यधिक सेवन के लिए स्कूल में आसानी से उपलब्ध होने वाले मीठे स्नैक्स, पेय पदार्थ और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का अत्यधिक उपयोग जिम्मेदार है।'' यह निर्देश राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के कहने पर जारी किया गया। एनसीपीसीआर एक वैधानिक निकाय है, जिसका गठन बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने लिए किया गया था, खासकर उन बच्चों के जो सबसे कमजोर और हाशिए पर हैं। विद्यालयों को ‘शुगर बोर्ड' (चीनी पट्टिका) लगाने के लिए कहा गया है, जिस पर छात्रों को चीनी के अत्यधिक सेवन के जोखिमों के बारे में शिक्षित करने के लिए जानकारी प्रदर्शित की जाए। इसने कहा, ‘‘इस पट्टिका पर आवश्यक जानकारी प्रदान की जानी चाहिए, जिसमें अनुशंसित दैनिक चीनी का सेवन, आम तौर पर खाए जाने वाले खाद्य पदार्थ (जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स आदि जैसे अस्वास्थ्यकर भोजन) में चीनी की मात्रा, उच्च चीनी के सेवन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम और स्वस्थ आहार विकल्प शामिल हैं। यह छात्रों को सूचित भोजन विकल्पों के बारे में शिक्षित करेगा और छात्रों के बीच दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभों को बढ़ावा देगा।'' विद्यालयों को इस संबंध में जागरूकता सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित करने के लिए भी कहा गया है। बोर्ड ने कहा, ‘‘15 जुलाई से पहले विद्यालयों द्वारा एक संक्षिप्त रिपोर्ट और कुछ तस्वीरें अपलोड की जा सकती हैं।'
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देहरादून. उत्तराखंड सरकार ने चार धाम और आदि कैलाश यात्रा जैसे तीर्थस्थलों का अधिक व्यवस्थित ढंग से प्रबंधन करने के लिए एक परिषद के गठन का निर्णय किया है। एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय किया गया। मुख्यमंत्री के सचिव शैलेश बघौली ने कहा कि हर साल तीर्थयात्रियों की बढ़ती भीड़ के कारण विभिन्न हिमालयी मंदिरों की तीर्थयात्राओं के बेहतर प्रबंधन के लिए उत्तराखंड धर्मस्व और तीर्थाटन परिषद नामक एक अलग परिषद की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि परिषद का काम तीर्थयात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर ढांचागत सुविधाओं का निर्माण, सुदृढ़ीकरण और रखरखाव करना तथा मंदिरों तक उनकी यात्रा को अधिक आरामदायक, आसान, सुरक्षित और सुखद बनाना होगा। बघौली ने कहा कि परिषद के लिए अलग से बजटीय प्रावधान किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य में अब बेहतर सड़क और हवाई संपर्क उपलब्ध होने से हर साल अधिक से अधिक श्रद्धालु राज्य में आ रहे हैं। बघौली ने कहा, ‘‘हाल के वर्षों में चार धाम यात्रा, नंदा देवी राज जात यात्रा, पूर्णागिरि यात्रा और आदि कैलाश यात्रा के लिए राज्य में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इसलिए इनके प्रबंधन और व्यवस्थित संचालन के लिए एक अलग इकाई-उत्तराखंड धर्मस्व और तीर्थाटन परिषद बनाने का निर्णय लिया गया।'' पर्वतीय क्षेत्रों में रोपवे के तीव्र विकास के लिए राज्य निकाय का गठन तथा एकल महिलाओं के लिए स्वरोजगार योजना लागू करना कैबिनेट द्वारा लिए गए अन्य महत्वपूर्ण निर्णय थे। मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना का उद्देश्य निराश्रित, परित्यक्त या विधवा महिलाओं को उनके गांव या उनके निवास क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराना तथा उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करते हुए उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना तथा उनके जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार लाना है। एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में कैबिनेट ने उत्तराखंड पोल्ट्री विकास नीति-2025 को मंजूरी दी। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में प्रति वर्ष 15,444 लाख अंडों तथा 395 लाख किलोग्राम पोल्ट्री मीट की कमी है, जिसे देखते हुए राज्य में निवेश को बढ़ावा देने तथा कुक्कुट क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस नीति को मंजूरी दी गई है। -
नयी दिल्ली/ ‘ऑपरेशन सिंदूर' के बाद आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने का भारत का संदेश लेकर सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल विदेश जाएंगे, जिनमें से कुछ प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व सत्तारूढ दलों के नेता जबकि कुछ की अगुवाई विपक्षी दलों के नेता करेंगे। सरकार ने प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व करने के लिए जिन नेताओं का चयन किया है, उनमें सत्तारूढ़ दलों से भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद व बैजयंत पांडा, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे और जनता दल (यूनाइटेड) के नेता संजय झा, विपक्षी दलों में कांग्रेस के शशि थरूर, द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) की कनिमोई, राकांपा-एसपी की सुप्रिया सुले शामिल हैं। संसदीय कार्य मंत्रालय की ओर से शनिवार को जारी एक बयान में कहा गया, ‘‘सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल हर तरह के आतंकवाद का मुकाबला करने की भारत की राष्ट्रीय सहमति और दृढ़ दृष्टिकोण को सामने रखेंगे। वे आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने के देश के मजबूत संदेश को दुनिया के सामने लेकर जाएंगे।'' सरकार ने प्रतिनिधिमंडल के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के ऐसे नेताओं का सोच समझकर चयन किया है, जिन्हें मुखर माना जाता है। इन नेताओं में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के चार और विपक्षी ‘इंडिया' गठबंधन के तीन नेता शामिल हैं, जो सार्वजनिक जीवन में लंबे समय से सक्रिय रहने वाले वरिष्ठ सांसद हैं। विपक्ष ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए भयावह आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत के मामले पर सरकार की कार्रवाई का समर्थन किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री थरूर ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादियों के ठिकानों पर भारत के हमलों का बचाव और भारत-पाक संघर्ष पर सत्तारूढ़ गठबंधन के सख्त रुख का समर्थन किया है। संभावना है कि उन्हें अमेरिका जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व दिया जा सकता है। मंत्रालय के बयान में कहा गया कि प्रत्येक प्रतिनिधिमंडल में प्रतिष्ठित राजनयिक शामिल होंगे।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में भारत एकजुट है। सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही प्रमुख साझेदार देशों का दौरा करेंगे। वे आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने के हमारे साझा संदेश को लेकर जाएंगे।'' मंत्रालय के बयान को साझा करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘यह राजनीति से ऊपर, मतभेदों से परे राष्ट्रीय एकता का एक शक्तिशाली प्रतिबिंब है।'' बयान में कहा गया कि सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों की प्रस्तावित यात्राएं ‘ऑपरेशन सिंदूर' और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की निरंतर लड़ाई से संबंधित हैं। सूत्रों ने बताया कि प्रसाद के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और अल्जीरिया का दौरा करने की उम्मीद है, जबकि सुले की अगुवाई वाली सांसदों की टीम ओमान, केन्या, दक्षिण अफ्रीका और मिस्र की यात्रा करेगी। उन्होंने कहा कि झा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल के जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, मलेशिया और इंडोनेशिया (सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश) का दौरा करने की संभावना है। सूत्रों ने बताया कि छह-सात सांसदों वाला प्रत्येक प्रतिनिधिमंडल चार से पांच देशों का दौरा कर सकता है। अनुराग ठाकुर, अपराजिता सारंगी, मनीष तिवारी, असदुद्दीन ओवैसी, अमर सिंह, राजीव प्रताप रूडी, समिक भट्टाचार्य, बृजलाल, सरफराज अहमद, प्रियंका चतुर्वेदी, विक्रमजीत साहनी, सस्मित पात्रा और भुवनेश्वर कलिता समेत विभिन्न दलों के सांसद इन प्रतिनिधिमंडलों का हिस्सा होंगे। झा के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल में पूर्व विदेश मंत्री और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद को भी शामिल किया गया है। खुर्शीद सांसद नहीं हैं। सरकार ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुदीप बंदोपाध्याय को भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इनकार कर दिया। इस व्यापक कूटनीतिक प्रयास का उद्देश्य विभिन्न देशों में पहलगाम हमले पर भारत के रुख को रेखांकित करना है। थरूर ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि वह देश का दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के लिए पांच प्रमुख देशों में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए सरकार के निमंत्रण से ‘‘सम्मानित'' महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जब राष्ट्रीय हित की बात होगी और मेरी सेवाओं की आवश्यकता होगी, तो मैं पीछे नहीं रहूंगा। जय हिंद!'' शिंदे ने ‘एक्स' पर कहा, ‘‘हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दृढ़ता से बताएंगे कि भारत में आतंकवाद के लिए कोई स्थान नहीं है, और पाकिस्तान अपनी धरती पर आतंकवाद को पाल रहा है। जब राष्ट्रीय हित के मामलों की बात आती है, तो कोई मतभेद नहीं होता, केवल कर्तव्य होता है।'' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में किसी भी आतंकवादी कृत्य को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। इससे यह संकेत मिलता है कि यदि पाकिस्तान भारतीय क्षेत्र में आतंकवाद को बढ़ावा देना जारी रखता है तो भारत उसे निशाना बनाएगा। भारत ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान के साथ कई दिनों तक चले संघर्ष के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर' को केवल रोका गया है और अगली कार्रवाई पड़ोसी देश के आचरण पर निर्भर करेगी। -
नई दिल्ली। आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मई के अंत में सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल प्रमुख साझेदार देशों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों का दौरा करेंगे। यह कदम ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले के बाद भारत की सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ निरंतर लड़ाई को दर्शाता है। ये प्रतिनिधिमंडल भारत की एकजुटता और आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ दृढ़ संकल्प को दुनिया के सामने रखेंगे।
इन सात प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व सात सांसद करेंगे, जिनमें कांग्रेस से शशि थरूर, भाजपा से रविशंकर प्रसाद और बैजयंत पांडा, जदयू से संजय कुमार झा, द्रमुक से कनिमोझी करुणानिधि, राकांपा से सुप्रिया सुले और शिवसेना से एकनाथ शिंदे शामिल हैं। सरकार ने इन नेताओं को उनके प्रभावी और स्पष्ट प्रतिनिधित्व के लिए चुना है। इनमें से चार सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से हैं, जबकि तीन विपक्षी इंडिया गठबंधन से हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रत्येक प्रतिनिधिमंडल लगभग पांच देशों का दौरा करेगा। इन दौरों में प्रतिनिधिमंडलों के साथ अनुभवी राजनयिक भी होंगे, जो भारत के संदेश को और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में मदद करेंगे।संसदीय कार्य मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान में कहा, “ये सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भारत की राष्ट्रीय एकता और आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ दृढ़ रुख को दर्शाएंगे। वे दुनिया के सामने भारत के आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस का स्पष्ट संदेश लेकर जाएंगे।”संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “जब बात सबसे अहम होती है, भारत एकजुट होकर खड़ा होता है। सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही प्रमुख साझेदार देशों का दौरा करेंगे और हमारा साझा संदेश लेकर जाएंगे।”राकांपा सांसद सुप्रिया सुले ने इस जिम्मेदारी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय का आभार जताया। उन्होंने कहा, “मुझे वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का गौरव प्राप्त हुआ है।” यह कदम भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। -
नई दिल्ली। अब रोजगार, ट्रेनिंग, कोर्स और नजदीकी स्किल सेंटर्स से जुड़ी जानकारी लोगों को व्हाट्सऐप पर तुरंत मिल सकेगी। इसके लिए भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय (MSDE) ने मेटा के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत नया AI-पावर्ड टूल “स्किल इंडिया असिस्टेंट (SIA)” लॉन्च किया गया है। इस टूल को व्हाट्सऐप पर इस्तेमाल किया जा सकता है। लोग 8448684032 नंबर पर मैसेज भेजकर स्किल कोर्स, ट्रेनिंग सेंटर्स और नौकरी के मौकों के बारे में जानकारी ले सकते हैं। यह सेवा स्किल इंडिया डिजिटल हब पर भी उपलब्ध है। यह दुनिया में अपनी तरह की सबसे बड़ी और पहली पहल है, जिसमें ओपन-सोर्स AI को व्हाट्सऐप जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है।
केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने इस लॉन्च पर कहा कि यह टूल देश के हर नागरिक को सीखने और नौकरी की जानकारी पाने का नया और आसान तरीका देगा। AI और व्हाट्सऐप की मदद से लोग अब घर बैठे ही पर्सनल गाइडेंस ले सकेंगे, जिससे खासतौर पर गांव और दूरदराज के इलाकों के लोगों को बहुत फायदा मिलेगा। मेटा इंडिया के उपाध्यक्ष शिवनाथ ठुकराल ने कहा कि यह पहल दिखाती है कि ओपन-सोर्स टेक्नोलॉजी के जरिए समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्किल इंडिया असिस्टेंट भारत के डिजिटल और समावेशी विकास के विजन को मजबूती देगा।यह टूल फिलहाल हिंदी, अंग्रेजी और हिंग्लिश में उपलब्ध है। आने वाले समय में इसे अन्य भारतीय भाषाओं में भी शुरू किया जाएगा, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकें। खास बात यह है कि यह टूल लोगों के फीडबैक के आधार पर समय-समय पर अपडेट होता रहेगा, ताकि उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव मिल सके। सर्वम एआई द्वारा विकसित इस टूल का मकसद डिजिटल खाई को खत्म करना और देश के हर नागरिक को सही कौशल और नौकरी से जोड़ना है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत “दुनिया की स्किल कैपिटल” बनने की राह पर है, और यह टूल इस दिशा में बड़ा कदम है।- - -ऑपरेशन सिन्दूर, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, असूचना एजेंसियों की सटीक सूचना और हमारी तीनों सशस्त्र सेनाओं की अचूक मारक क्षमता का अद्वितीय प्रतीक-भारत को अपनी तीनों सशस्त्र सेनाओं, सीमा सुरक्षा बल और सभी सुरक्षा एजेंसियों पर गर्व है--छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा के Korragattalu Hills (KGH) में किये गए ऐतिहासिक नक्सल विरोधी ऑपरेशन्स हमारी सुरक्षा बलों के बेहतरीन समन्वय को दर्शाते हैं-नया MAC, जटिल और परस्पर रूप से जुड़ी मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सभी एजेंसियों के प्रयासों को synergise करेगा और एक निर्बाध तथा integrated platform प्रदान करेगा-नया नेटवर्क, आतंकवाद, उग्रवाद, संगठित अपराध और साइबर हमलों जैसे गंभीर खतरों से निपटने में देश के प्रयासों को मज़बूती प्रदान करेगानई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने शुक्रवार को नई दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक में नए Multi Agency Centre (MAC) का उदघाटन किया। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि ऑपरेशन सिन्दूर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, आसूचना एजेंसियों की सटीक सूचना और हमारी तीनों सशस्त्र सेनाओं की अचूक मारक क्षमता का अद्वितीय प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी तीनों सेनाओं, सीमा सुरक्षा बल और सभी सुरक्षा एजेंसियों पर गर्व है।हाल ही में, छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा के Korragattalu Hills (KGH) में केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPFs) द्वारा चलाए गए ऐतिहासिक नक्सल विरोधी ऑपरेशनों के बारे में केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ ये ऐतिहासिक अभियान हमारे सुरक्षाबलों के बेहतरीन समन्वय को दर्शाते हैं। श्री शाह ने कहा कि इसी प्रकार का समन्वय ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी देखने को मिला जिससे पता चलता है कि हमारी खुफिया एजेंसियों तथा तीनों सशस्त्र सेनाओं द्वारा कार्य को अंजाम देने की प्रक्रिया और सोच में काफी बेहतर समन्वय है।केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि नया MAC, जटिल और परस्पर रूप से जुड़ी मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सभी एजेंसियों के प्रयासों को synergise करेगा और एक निर्बाध तथा integrated platform प्रदान करेगा। उन्होंने आशा जताई कि नया नेटवर्क, आतंकवाद, उग्रवाद, संगठित अपराध और साइबर हमलों जैसे गंभीर खतरों से निपटने में देश के प्रयासों को मज़बूती प्रदान करेगा।श्री अमित शाह ने नए MAC नेटवर्क की प्रशंसा की और इसमें हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से जुड़े कार्यों को रिकॉर्ड समय में सफलतापूर्वक पूरा करने पर संतोष व्यक्त किया। इसमें AI/ML जैसे futuristic capabilities हैं ताकि MAC और GIS services की विशाल डाटाबेस क्षमता का उपयोग किया जा सके। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों के पास जो महत्वपूर्ण डाटाबेस एकाकीपन में काम कर रहे हैं, उन्हें भी इस प्लेटफ़ार्म पर जोड़ा जाना चाहिए जिससे नए MAC के पास उपलब्ध advanced data analytics का फायदा उठाया जा सके। श्री शाह ने कहा कि इससे MAC नेटवर्क पर generate की गई data analytics की गुणवत्ता और बेहतर होगी; trend analysis बिलकुल accurate होगा, hotspot की मैपिंग की जा सकेगी और timeline analysis भी हो सकेगा जो predictive और operational outcome प्रदान करेगा। नया MAC प्लैटफ़ार्म, terror ecosystem से लड़ने में बहुत दूरगामी साबित होगा जो संगठित अपराध से काफी गहराई से जुड़ा हुआ है।भारत के सबसे अग्रणी intelligence fusion centre के रूप में Multi Agency Centre (MAC), वर्ष 2001 से अस्तित्व में है और केन्द्रीय गृह मंत्री निरंतर MAC के तकनीकी उन्नयन का सक्रियता से मार्गदर्शन कर रहे हैं। आसूचना ब्यूरो (Intelligence Bureau) में स्थित नए MAC ने intelligence, security, law enforcement और जांच एजेंसियों को आपस में जोने का काम किया है। 500 करोड़ रुपए की लागत से तैयार नए MAC नेटवर्क में qualitative और quantitative, दोनों तरह के बदलाव किए गए हैं। नया MAC नेटवर्क देश के length और breadth में फैला है जिसमें देश के द्वीपीय हिस्से, उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र भी शामिल हैं। इसमें standalone secure network के साथ दूरदराज के क्षेत्रों के जिला SP तक last mile connectivity दी गई है।
- पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आज शुक्रवार को हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सबसे बड़ा निर्णय गया शहर का नाम बदलने को लेकर रहा। अब इस धार्मिक और ऐतिहासिक शहर को ‘गया जी’ के नाम से जाना जाएगा। कैबिनेट ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में शहीद हुए जवानों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की मंजूरी दी है। यह निर्णय सरकार की शहीदों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी को दर्शाता है। वहीं राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों को राहत देते हुए महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी की घोषणा भी की है, जिससे लाखों कर्मचारियों को आर्थिक फायदा होगा। प्रखंड और अंचल कार्यालयों की सफाई व्यवस्था अब जीविका दीदियों को सौंपी जाएगी। इससे न सिर्फ स्वच्छता व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा।कैबिनेट ने प्रशासनिक ढांचे के विस्तार के तहत छपरा जिले के सोनपुर को नगर परिषद और औरंगाबाद जिले के मदनपुर को नगर पंचायत का दर्जा दिया है। महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन हरियाली योजना’ की अवधि बढ़ा दी गई है। साथ ही, दरभंगा जिले की जलापूर्ति योजना के लिए 186 करोड़ रुपये और औरंगाबाद की योजना के लिए 72 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। बोधगया के लिए भी नई जल परियोजना को हरी झंडी मिली है और सोनपुर मेला क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा। वहीं राज्य के 900 ग्राम पंचायतों में नए पंचायत भवन बनाए जाएंगे ताकि प्रशासनिक कार्य बेहतर तरीके से हो सकें। शिक्षा क्षेत्र में, केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) के तहत बिहार के कई जिलों में नए विद्यालय खोलने का फैसला लिया गया है। राज्य सरकार 58,193 करोड़ रुपये का ऋण लेकर विकास कार्यों को गति देगी। सहकारिता विभाग के तहत 498 नए पदों को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा, मुख्य जांच आयुक्त कार्यालय में 125 पदों को भी मंजूरी दी गई है, जिससे जांच प्रक्रिया तेज होगी।इसके अलावा बिहार सरकार की नौकरियों में अब केवल बिहार के मूल निवासी बेंचमार्क दिव्यांगों को ही क्षैतिज आरक्षण का लाभ मिलेगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई ‘कैंसर केयर एंड रिसर्च सोसायटी’ बनाई जाएगी, जो कैंसर की रोकथाम, इलाज और अनुसंधान में काम करेगी। अनुपस्थित रहने के कारण पांच डॉक्टरों को सेवा से बर्खास्त किया गया है। राज्य के अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों में अब शिक्षा विभाग के शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति होगी। इसके साथ ही, भागलपुर, अररिया और गोपालगंज में नए अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय खोले जाएंगे। इसके साथ ही कैबिनेट ने पटना मेट्रो परियोजना को गति देने के लिए दो करोड़ 56लाख नौ हजार करोड़ रुपये के भुगतान की मंजूरी दी है। अब जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों से संबंधित आवेदन ग्राम पंचायत स्तर पर ही निपटाए जाएंगे, जिससे आम लोगों को सहूलियत मिलेगी। इसके अलावा, भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालय इमामगंज, समस्तीपुर और भोजपुर में भवनों का पुनर्निर्माण किया जाएगा, और उद्यान प्रशिक्षण निदेशालय के गैर-तकनीकी पदों की नियमावली में बदलाव किया गया है।-(
- पटना। बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग की ओर से भारत के चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने शुक्रवार को पटना में एक अहम बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में चुनाव की तैयारियों, कानून-व्यवस्था और मतदाता सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक में बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल, राज्य पुलिस के नोडल अधिकारी कुंदन कृष्णन, पटना के जिलाधिकारी चंद्रशेखर सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अवकाश कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। खास तौर पर पटना जिले की चुनाव तैयारियों पर फोकस किया गया।विवेक जोशी ने कहा कि बिहार में चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और सभी वर्गों की भागीदारी से होने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ज्यादा से ज्यादा लोगों, खासकर युवाओं और दिव्यांग मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। चुनाव आयोग ने चिंता जताई कि 18-19 साल के युवाओं की संख्या बिहार में करीब 64 लाख है, लेकिन अब तक केवल 8,08,857 युवा ही वोटर के रूप में पंजीकृत हुए हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।जोशी ने यह भी कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार का मतदान प्रतिशत केवल 56.28% रहा था, जो राष्ट्रीय औसत 66.10% से काफी कम है। इसलिए इस बार पंचायत स्तर तक जागरूकता बढ़ाकर मतदान प्रतिशत बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। बिहार में इस समय कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 7.80 करोड़ है। इनमें से 7,69,046 दिव्यांग मतदाता और 85 वर्ष से अधिक आयु वाले 5,91,347 बुजुर्ग मतदाता शामिल हैं। राज्य में कुल 77,895 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। चुनाव आयुक्त ने सभी केंद्रों पर दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं के लिए विशेष सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया।विवेक जोशी चुनावी तैयारियों का जायजा लेने के लिए पूर्वी चंपारण के मोतिहारी, पश्चिमी चंपारण के बेतिया, और वाल्मीकि नगर का दौरा भी करेंगे। रविवार को वह एसएसबी अधिकारियों से मिलेंगे और सोमवार को वैशाली में चुनाव व्यवस्था की जमीनी समीक्षा करेंगे। इस दौरे के जरिए चुनाव आयोग बिहार में पारदर्शी, शांतिपूर्ण और सभी की भागीदारी वाले चुनाव कराने के संकल्प को दोहरा रहा है।-
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नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और भारतीय सेना के शौर्य को सम्मान देने के लिए कोटा में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस यात्रा की शुरुआत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रामपुरा स्थित ऐतिहासिक पीपल पेड़ के पास भारत माता और शहीद जवानों को पुष्प अर्पित कर और तिरंगा लहराकर की। यह आयोजन “राष्ट्रीय सुरक्षा हेतु नागरिक कार्यक्रम” के अंतर्गत हुआ, जिसमें हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। इस रैली में जनप्रतिनिधि, सामाजिक संस्थाएं, युवा, महिलाएं और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।
इस अवसर पर ओम बिरला ने कहा कि यह सिर्फ एक रैली नहीं, बल्कि देश के गौरव, बलिदान और आत्मसम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “जब-जब तिरंगा लहराता है, तब-तब हमारी आत्मा और बलिदान की परंपरा भी लहराती है।” उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को सिर्फ एक सैन्य मिशन नहीं, बल्कि भारत की नारीशक्ति की रक्षा और सम्मान बताया। बिरला ने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, “अब भारत की बेटियों की ओर उठी हर नजर का जवाब सीमा पार से मिलेगा। भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन जब मातृभूमि पर खतरा आता है, तो भारत सुदर्शन भी उठा सकता है।”उन्होंने लोगों से अपील की कि हर नागरिक अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करे, यही सच्ची श्रद्धांजलि है उन वीरों के लिए जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। -
बेंगलुरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि उसने चंद्रयान-5/लूपेक्स (चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण) मिशन के लिए जापानी अंतरिक्ष एजेंसी जेएक्सए के साथ तीसरी आमने-सामने तकनीकी बैठक (टीआईएम-3) आयोजित की है। इसरो ने बताया कि चंद्रयान-5/लूपेक्स मिशन भारत के चंद्र अन्वेषण अभियान में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा, जिसमें 2040 तक भारतीय गगनयात्रियों (अंतरिक्ष यात्रियों) के चंद्रमा पर उतरने की परिकल्पना की गई है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक 13 से 14 मई को बेंगलुरु स्थित इसरो के मुख्यालय में आयोजित बैठक में इसरो, जेएक्सए और जापान की मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज (एमएचआई) के वरिष्ठ अधिकारियों, परियोजना अधिकारियों और तकनीकी टीम के सदस्यों ने हिस्सा लिया। इसरो के मुताबिक, चंद्रयान-1, चंद्रयान-2 (ऑर्बिटर-आधारित चंद्र अन्वेषण), चंद्रयान-3 (लैंडर-रोवर आधारित इन-सीटू अन्वेषण) और आगामी चंद्रयान-4 (भारत का पहला चंद्र नमूना वापसी मिशन) की विरासत पर निर्माण करते हुए, चंद्रयान-5/लूपेक्स मिशन चंद्र मिशनों की चंद्रयान श्रृंखला में पांचवां होगा। संगठन ने बताया कि इस मिशन को जेएक्सए के सहयोग से, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के स्थायी छाया क्षेत्र (पीएसआर) के आसपास के इलाकों में जल सहित चंद्रमा की अस्थिर सामग्रियों का अध्ययन करने के लिए अंजाम दिया जाएगा। इसरो के मुताबिक इस मिशन को जेक्सा द्वारा अपने एच3-24एल प्रक्षेपण यान के माध्यम से प्रक्षेपित किया जाएगा। यह मिशन अपने साथ भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा निर्मित चंद्र लैंडर जापान निर्मित चंद्र रोवर एमएचआई को ले जाएगा। यहां जारी एक बयान के मुताबिक चंद्र लैंडर के अलावा, इसरो की जिम्मेदारी मिशन के लिए कुछ वैज्ञानिक उपकरण विकसित करने की भी होगी। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि मिशन के लिए वैज्ञानिक उपकरण इसरो, जेएक्सए, ईएसए (यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी) और नासा (नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) द्वारा प्रदान किए जाएंगे, जो सभी चंद्र ध्रुवीय क्षेत्र में आरक्षित वाष्पशील पदार्थों के अन्वेषण और इन-सीटू विश्लेषण (इसका तात्पर्य पदार्थों, जीवों या घटनाओं के उनके प्राकृतिक, अप्रभावित वातावरण में अध्ययन से है) से विषयगत रूप से जुड़े हुए हैं। केंद्र सरकार ने चंद्रयान-5/लूपेक्स मिशन को हरी झंडी वित्तीय मंजूरी के रूप में 10 मार्च, 2025 को दी गई थी। बैठक के दौरान, इसरो के वैज्ञानिक सचिव एम गणेश पिल्लई ने अब तक की तकनीकी उपलब्धियों के लिए दोनों टीम को बधाई दी और मिशन के वैज्ञानिक और तकनीकी पहलुओं के लिए सहयोगात्मक प्रयास के महत्व पर जोर दिया।
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को मथुरा में श्री बांके बिहारी मंदिर गलियारे को विकसित करने की उत्तर प्रदेश सरकार की योजना का मार्ग प्रशस्त कर दिया और इससे श्रद्धालुओं को फायदा मिलेगा। न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की उस याचिका को स्वीकार कर लिया जिसमें कहा गया था कि श्री बांके बिहारी मंदिर की निधि का इस्तेमाल केवल मंदिर के आसपास पांच एकड़ भूमि खरीदने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बनाये गये निरुद्ध क्षेत्र (होल्डिंग एरिया) बनाने के लिए किया जाए। इसने कहा, ‘‘हम उत्तर प्रदेश राज्य को इस योजना को पूरी तरह से लागू करने की अनुमति देते हैं। बांके बिहारी जी ट्रस्ट के पास देवता/मंदिर के नाम पर सावधि जमा है...राज्य सरकार को प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के लिए सावधि जमा में पड़ी राशि का इस्तेमाल करने की अनुमति है।'' उच्चतम न्यायालय ने हालांकि कहा कि मंदिर और गलियारा बनाने के लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि देवता/ट्रस्ट के नाम पर होनी चाहिए। इस प्रक्रिया में, इसने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आठ नवंबर, 2023 के आदेश को संशोधित किया, जिसमें राज्य की महत्वाकांक्षी योजना को स्वीकार किया गया था, लेकिन राज्य को मंदिर की निधि का इस्तेमाल करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। पीठ ने कहा कि चूंकि न्यायालय ब्रज क्षेत्र में मंदिरों के प्रशासन और सुरक्षा के मुद्दे पर विचार कर रहा है, इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए मुद्दे पर शीघ्र निर्णय लेना जनहित में है। मंदिर के विकास के लिए राज्य द्वारा पेश प्रस्तावित योजना के तहत, अदालत ने कहा कि मंदिर के चारों ओर पांच एकड़ भूमि अधिग्रहित की जानी थी और उस पर पार्किंग स्थल, भक्तों के लिए आवास, शौचालय, सुरक्षा जांच चौकियां और अन्य सुविधाएं स्थापित कर उसे विकसित किया जाना है। उच्च न्यायालय ने 8 नवंबर, 2023 को अपने आदेश में कहा था कि मंदिर के आसपास की भूमि का अधिग्रहण और उसके परिणामस्वरूप विकास परियोजना तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को गलियारा विकसित करने में 500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी और उसने संबंधित भूमि खरीदने के लिए मंदिर की निधि का उपयोग करने का प्रस्ताव रखा था, जिसे उच्च न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने मथुरा में बांके बिहारी मंदिर की दयनीय स्थिति और उचित प्रशासन एवं सुविधाओं के अभाव की ओर ध्यान दिलाया। इसने कहा कि मंदिर केवल 1,200 वर्ग फुट के सीमित क्षेत्र में फैला हुआ है और यहां प्रतिदिन 50,000 श्रद्धालु आते हैं और यह संख्या सप्ताहांत में 1.5 से 2 लाख और त्योहारों के दौरान पांच लाख से अधिक होती है। सरकार ने कहा कि उत्तर प्रदेश ब्रज योजना एवं विकास बोर्ड अधिनियम, 2015 मथुरा जिले में ब्रज क्षेत्र विरासत के विकास, संरक्षण और रखरखाव के लिए लागू किया गया था। इसने कहा कि अधिनियम के तहत क्षेत्र के मंदिरों के प्रशासन के लिए आवश्यक विशेषज्ञता वाली एक परिषद गठित की गई है और तदनुसार इसकी सेवाओं का उपयोग इन मंदिरों के लिए प्रशासक नियुक्त करने के लिए किया जा सकता है। दूसरी ओर, पीठ ने कहा कि एक दीवानी मुकदमा 25 वर्षों से अधिक समय से लंबित है और केवल ‘कोर्ट रिसीवर' ही मामले को चला रहा है, जो दर्शाता है कि ‘‘कुप्रशासन'' ‘‘गहरा और व्यापक'' है। पीठ ने इसे ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण'' पाया कि ‘रिसीवर' नियुक्त करते समय अदालतों ने इस बात पर विचार नहीं किया कि मथुरा और वृंदावन वैष्णव संप्रदायों के लिए दो सबसे पवित्र स्थान हैं और इसलिए, ‘‘वैष्णव संप्रदायों के व्यक्तियों को ‘रिसीवर' के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए।''
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को स्मार्ट बंदरगाहों और बाजारों के माध्यम से मत्स्य पालन क्षेत्र के आधुनिकीकरण तथा पकड़ी गई मछलियों की ढुलाई और विपणन के लिए ड्रोन के उपयोग पर जोर दिया। गहरे समुद्र में मछली पकड़ने और समुद्री उत्पाद निर्यात पर ध्यान केंद्रित करते हुए मत्स्य पालन क्षेत्र की प्रगति और भविष्य की योजनाओं की समीक्षा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर करने के लिए कार्य करने की एक स्वस्थ प्रणाली की ओर बढ़ने की आवश्यकता है। एक बयान में कहा गया कि मोदी ने नागरिक उड्डयन अधिकारियों के परामर्श से उत्पादन केंद्रों से शहरों और कस्बों के नजदीकी बाजारों तक ताजी मछली की ढुलाई के लिए तकनीकी प्रोटोकॉल के अनुसार ड्रोन का उपयोग करने का भी आह्वान किया। मोदी ने उत्पाद के प्रसंस्करण और पैकेजिंग में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही बैठक में निजी क्षेत्र से निवेश को सुविधाजनक बनाने पर भी चर्चा की गई। मोदी ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मत्स्य पालन क्षेत्र को और मजबूत बनाने के तौर-तरीकों पर एक बैठक की अध्यक्षता की। हम इस क्षेत्र को बहुत महत्व देते हैं और इस क्षेत्र से संबंधित बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया गया है। हमारे मछुआरों के लिए ऋण के साथ-साथ बाजारों तक अधिक पहुंच सुनिश्चित की गई है।'' उन्होंने कहा कि बैठक में इस बात पर विचार-विमर्श किया गया कि निर्यात को कैसे बढ़ाया जाए तथा गहरे समुद्र में मछली पकड़ने पर अधिक ध्यान कैसे दिया जाए। मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेरी तथा पंचायती राज मंत्री ललन सिंह तथा प्रधानमंत्री कार्यालय एवं मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल थे। मोदी ने कहा कि ‘अमृत सरोवरों' में मछली उत्पादन से न केवल इन जलाशयों की स्थिति में सुधार होगा, बल्कि मछुआरों की आजीविका भी बढ़ेगी।
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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से अपील की है कि श्रीनगर से अतिरिक्त हज उड़ानों की व्यवस्था की जाए, ताकि हाल ही में उड़ानों में आई बाधाओं के कारण रुके हुए 1,895 हज यात्रियों को सऊदी अरब भेजा जा सके। इस संबंध में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म ‘एक्स’ लिखा, “मैंने भारत सरकार से आग्रह किया है कि श्रीनगर से अतिरिक्त हज उड़ानों की व्यवस्था की जाए ताकि हाल की उड़ान बाधाओं के कारण रुके 1,895 हज यात्रियों को भेजा जा सके।
हज यात्रियों की यात्रा को सुचारु और समय पर पूरा करना सरकार की प्राथमिकता है।” इससे पहले, 11 मई को श्रीनगर से हज के लिए जाने वाले पहले जत्थे के 178 तीर्थयात्रियों को उमर अब्दुल्ला ने शेख-उल-आलम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से विदा किया। इस मौके पर उन्होंने यात्रियों से क्षेत्र में शांति और समृद्धि की दुआ करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “आज मुझे श्रीनगर हवाई अड्डे से पहले जत्थे के 178 हज यात्रियों को भावभीनी विदाई देने का सम्मान मिला। उन्हें सुरक्षित और फलदायी यात्रा की शुभकामनाएं दीं और क्षेत्र की शांति व समृद्धि के लिए दुआ करने का निवेदन किया।”इस मौके पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी मौजूद रहे। जानकारी के अनुसार, कुल 3,372 हज यात्री (हुज्जाज कराम) 11 मई को श्रीनगर से रवाना हुए थे। हज यात्रियों की सहायता में लगे एक प्रतिनिधि ने बताया कि आखिरी उड़ान 15 मई को तय की गई थी। इस दौरान हज पर जा रहे यात्रियों ने अपने भाव साझा किए। हज यात्रियों का यह जत्था भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में स्थिति सामान्य होने के बाद रवाना हुआ, जिससे हवाई सेवाओं में सुधार आया और हज यात्रा फिर से सुचारु हुई। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से हज यात्रियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की है। -
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार को गुजरात के भुज पहुंचे। यहां वे भुज वायु सेना स्टेशन पर वायुसेना के योद्धाओं से बातचीत करेंगे। उनके साथ वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी भुज मौजूद रहे।
बताना चाहेंगे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का यह दौरा जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में बादामी बाग कैंट के दौरे के एक दिन बाद हुआ है, जहां उन्होंने भारतीय सेना के जवानों से मुलाकात की और उनसे बातचीत की।भुज में स्मृतिवन भूकंप स्मारक और संग्रहालय भी जाएंगे रक्षा मंत्रीरक्षा मंत्री भुज में स्मृतिवन भूकंप स्मारक और संग्रहालय भी जाएंगे। इससे पहले रक्षा मंत्री ने गुरुवार को श्रीनगर का दौरा किया था और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता पर सैनिकों को बधाई दी थी। राजनाथ सिंह ने श्रीनगर की अपनी यात्रा के दौरान आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ रुख पर रोशनी डाली, जो पाकिस्तान की बार-बार की परमाणु धमकियों से डरने से इनकार करने में स्पष्ट रही।‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने पाकिस्तान में छिपे आतंकी संगठनों और उनके आकाओं को दिया स्पष्ट संदेशबादामी बाग कैंट में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सैनिकों से पहली बार बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने पाकिस्तान में छिपे आतंकी संगठनों और उनके आकाओं को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वे कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हमारे बलों ने दुनिया को दिखा दिया है कि उनका निशाना सटीक और सटीक है और गिनती का काम दुश्मनों पर छोड़ दिया गया है।”पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को आईएईए की निगरानी में लिया जाना चाहिएउन्होंने कहा, “मैं दुनिया के सामने यह सवाल उठाता हूं: क्या ऐसे गैर जिम्मेदार और दुष्ट राष्ट्र के हाथों में परमाणु हथियार सुरक्षित हैं? पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में लिया जाना चाहिए।” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीमा पार पाकिस्तानी चौकियों और बंकरों को नष्ट करने वाले बहादुर सैनिकों का भी आभार व्यक्त किया, जिससे दुश्मन को स्पष्ट संदेश गया।रक्षा मंत्री ने पीएम मोदी के विचारों को दोहरायाउन्होंने कहा, “मैं आज यहां भारत के लोगों का संदेश लेकर आया हूं: ‘हमें अपने बलों पर गर्व है’।” सिंह ने फिर से जोर दिया कि सीमा पार से कोई भी अनुचित कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए, जो दोनों देशों के बीच बनी समझ का आधार है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों को दोहराया कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते और अगर बातचीत होगी भी तो वह सिर्फ आतंकवाद और पीओजेके पर होगी।रक्षा मंत्री ने पहलगाम में आतंकी हमले में मारे गए निर्दोष नागरिकों और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मातृभूमि की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को भी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने घायल सैनिकों के साहस की सराहना की और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। -
जयपुर. राजस्थान में कोटपूतली-बहरोड़ जिले में एक युवक ने अपनी मां के चांदी के कड़ों के लिए हंगामा किया और उसकी चिता तक पर लेट गया। इसके चलते महिला के अंतिम संस्कार में लगभग दो घंटे की देरी हुई। एक न्यूज़ एजेंसी के अनुसार पुलिस ने बताया कि यह हैरान करने वाली घटना तीन मई को विराटनगर इलाके के लीला का बास की ढाणी में हुई। घटना का वीडियो बृहस्पतिवार को सामने आया तब और लोगों को इसकी जानकारी मिली। हालांकि अभी तक इस मामले की पुलिस में शिकायत नहीं की गई है। ग्रामीणों के अनुसार दिवंगत छीतरमल रेगर की पत्नी भूरी देवी का तीन मई को निधन हो गया था। उनके सात बेटों में से छह गांव में एक साथ रहते हैं, जबकि पांचवां बेटा ओमप्रकाश अलग रहता है। ओमप्रकाश और उसके भाइयों के बीच कई सालों से संपत्ति का विवाद चल रहा था। ग्रामीणों के मुताबिक महिला के अंतिम संस्कार के लिए घर पर रस्में निभाने के बाद परिजनों ने भूरी देवी के चांदी के कड़े एवं अन्य आभूषण उतारकर सबसे बड़े बेटे गिरधारी को सौंप दिए। इसके बाद अर्थी शमशान घाट ले जायी गयी। ग्रामीणों का कहना है कि ओमप्रकाश ने भी मां की अर्थी को इसे कंधा दिया। लेकिन शमशान घाट में जाकर उसने हंगामा शुरू कर दिया और मां के चांदी के कड़े एवं अन्य आभूषणों की मांग की। यहां तक कि वह वहां बनाई गई चिता पर भी लेट गया। ग्रामीणों और परिवार के सदस्यों द्वारा समझाने के प्रयासों के बावजूद ओमप्रकाश ने करीब दो घंटे तक हंगामा किया। आखिरकार, आभूषण श्मशान घाट पर लाए गए और उसे सौंप दिए गए। इसके बाद ही ओमप्रकाश चिता पर से हटा और भूरी देवी का संस्कार किया जा सका।
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जयपुर. जयपुर के दुदू इलाके में बृहस्पतिवार को तीन युवतियों एवं एक युवक की तालाब में डूबकर मौत हो गयी। पुलिस ने यह जानकारी दी। उसने बताया कि यह हादसा एक युवती को बचाने के प्रयास में हुआ।
पुलिस के अनुसार यह यह दुखद घटना तब हुई जब बकरियां चराने गए कुछ लोग काकड़ियों की ढाणी गांव में एक खेत में बने तालाब के पास रुके और नहाने का फैसला किया। दूदू के थानाधिकारी राममिलन का कहना है कि 18 वर्षीय कमलेश देवी सबसे पहले पानी में उतरी। नहाते समय उसका पैर फिसल गया और वह डूबने लगी। उसे बचाने की कोशिश में विनोद कुमार (20), रामेश्वरी (18) और हेमा बावरिया (18) पानी में कूदे लेकिन वे भी डूब गए। किनारे पर मौजूद उनके दोस्तों ने परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों को इसकी सूचना दी। बाद में पुलिस को सूचित किया गया और स्थानीय निवासियों की मदद से बचाव अभियान शुरू किया गया। राममिलन ने बताया, ‘‘करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद चारों शव पानी से बरामद कर लिए गए।''पुलिस ने बताया कि मृतक एक ही गांव के रहने वाले थे और दिन में एक साथ बकरियां चराने गए थे। -
नयी दिल्ली. इजराइली रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक मेजर जनरल (आरईएस) अमीर बरम ने बृहस्पतिवार को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से बात की और ‘ऑपरेशन सिंदूर की सफलता' की सराहना की। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में यह जानकारी साझा की। उन्होंने भारत की ‘आतंकवाद के खिलाफ न्यायोचित लड़ाई' के प्रति इजराइल के पूर्ण समर्थन को व्यक्त किया। अधिकारियों ने कहा कि दोनों पक्षों ने ‘द्विपक्षीय' रक्षा संबंधों को गहरा करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की तथा रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने के लिए ‘भविष्य के प्रारूप' पर चर्चा की। पोस्ट में कहा गया, ‘‘इजराइल के रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक मेजर जनरल (आरईएस) अमीर बरम ने आज रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह से बात की तथा भारत की आतंकवाद के खिलाफ न्यायोचित लड़ाई के प्रति इजराइल के पूर्ण समर्थन को व्यक्त किया और ‘ऑपरेशन सिंदूर की सफलता की सराहना की।''












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