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- भुवनेश्वर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 20 जून को ओडिशा के मयूरभंज जिले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ससुराल - पहाड़पुर गांव - का दौरा करेंगे और कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। राष्ट्रपति मुर्मू के दिवंगत पति श्याम चरण मुर्मू के पैतृक गांव पहाड़पुर रायरंगपुर शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित है। ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रायरंगपुर में राज्य स्तरीय मुख्य समारोह का आयोजन किया जाएगा। मुर्मू का जन्म रायरंगपुर उपखंड के उपरबेड़ा गांव में हुआ था और उनका विवाह पहाड़पुर निवासी श्याम चरण मुर्मू से हुआ था। वर्ष 2022 में राष्ट्रपति का पद संभालने से पहले ही उनके पति और दो बेटों का निधन हो गया था।गांव में मुर्मू के पति और बेटों की याद में एक स्मारक बनाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, 20 जून को रायरंगपुर के डंडाबोश में एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ-साथ ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे। कार्यक्रम के दौरान कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा, नए बुनियादी ढांचा कार्यों की आधारशिला रखी जाएगी और गणमान्य व्यक्ति एक जनसभा को संबोधित करेंगे।
- नयी दिल्ली. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का निर्माण कर रही 'नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड' (एनएचएसआरसीएल) ट्रेनों के परिचालन के दौरान पैदा होने वाली तेज ध्वनि को नियंत्रित करने के लिए आठ पर्वतीय सुरंगों के दोनों सिरों पर कुल 16 वेंटिलेटेड हुड (हवादार संरचनाएं) बना रही है। अधिकारियों ने बताया कि यह तकनीक भारत में पहली बार इस्तेमाल की जा रही है, क्योंकि मौजूदा रेलवे सुरंगों में 'वेंटिलेटेड हुड' की जरूरत नहीं पड़ती। इसकी वजह यह है कि पारंपरिक ट्रेनें अपेक्षाकृत काफी कम गति से चलती हैं।बुलेट ट्रेन की अधिकतम गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। लगभग 500 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र से होकर गुजरता है और इसमें महाराष्ट्र में सात तथा गुजरात में एक, कुल आठ पर्वतीय सुरंगें शामिल हैं। परियोजना से जुड़े एक विशेषज्ञ ने बताया कि जब कोई तेज रफ्तार ट्रेन किसी सुरंग में प्रवेश करती है, तो वह अपने आगे बड़ी मात्रा में हवा को धकेलती है। यह ठीक उसी तरह होता है जैसे किसी सिलेंडर के भीतर पिस्टन आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा, ''हवा के इस अचानक दबाव से दबाव तरंगें (प्रेशर वेव्स) उत्पन्न होती हैं, जो पूरी सुरंग में आगे बढ़ती हैं। यदि इनका उचित प्रबंधन नहीं किया जाए, तो ट्रेन के सुरंग से बाहर निकलने पर ये तरंगें तेज गूंजती हुई आवाज पैदा कर सकती हैं।'' इसके लाभों का उल्लेख करते हुए इंजीनियरों ने बताया कि 'टनल हुड' खुले वातावरण और सुरंग के सीमित दायरे वाले हिस्से के बीच एक 'ट्रांजिशन ज़ोन' का काम करते हैं।
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भोपाल. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी सरकार के कामकाज के जरिए लोगों का विश्वास अर्जित किया है। प्रधान ने यहां संवाददाताओं से कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के शासनकाल में राजनीतिक अनिश्चितता का दौर था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में स्थिरता आई और जनता का विश्वास मजबूत हुआ। उन्होंने कहा, ''देश में कामकाज के प्रदर्शन की राजनीति केंद्र में आ गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सरकार के कामकाज के जरिए लोगों का विश्वास अर्जित किया है।'' भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने पिछले 12 वर्षों में महिलाओं, युवाओं, किसानों और गरीबों के कल्याण तथा सशक्तीकरण पर विशेष ध्यान दिया है। प्रधान ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में लोगों की आकांक्षाएं बहुत बढ़ गई हैं, लेकिन इन आकांक्षाओं को पूरा करने की प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार की क्षमता पर जनता का भरोसा भी उतना ही मजबूत है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में देश की बेटियों ने शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में नई ऊंचाइयां हासिल की हैं और इससे जुड़े कई वैश्विक संकेतक इस प्रगति को दर्शाते हैं। केंद्रीय मंत्री ने मोदी सरकार के कार्यकाल में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार, निर्यात में वृद्धि और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ''स्टार्टअप की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है और भारत ने प्रौद्योगिकी तथा नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।'' प्रधान ने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार और वर्तमान मोदी सरकार ने कुल 18 वर्षों में अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में बेहतर परिणाम दिए तथा भारत के विकास की मजबूत नींव रखी। उन्होंने कहा कि ''सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास'' के मंत्र और जनता के समर्थन के बल पर देश विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ रहा है।
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नयी दिल्ली. लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ अगले भारतीय थल सेनाध्यक्ष होंगे। रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी। थलसेना के आधुनिकीकरण में अपने योगदान और रणनीतिक योजना बनाने की क्षमता के लिए पहचाने जाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल सेठ फिलहाल थलसेना के उप प्रमुख हैं। वह 30 जून को जनरल द्विवेदी के सेवानिवृत्त होने पर पदभार संभालेंगे। लेफ्टिनेंट जनरल सेठ की नियुक्ति में सरकार ने वरिष्ठता के सिद्धांत का पालन किया है।
मंत्रालय ने कहा, "सरकार ने फिलहाल थलसेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को अगला थलसेना प्रमुख नियुक्त किया है और उनकी नियुक्ति 30 जून से प्रभावी होगी। " वरिष्ठ सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं और उन्हें दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कोर में शामिल किया गया। लगभग चार दशकों के अपने विशिष्ट सैन्य करियर के दौरान, उन्होंने परिचालन, रणनीतिक, क्षमता विकास और संस्थागत क्षेत्रों में व्यापक अनुभव प्राप्त किया है, जिससे भारतीय सेना की युद्ध क्षमता और दीर्घकालिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सेना के आधुनिकीकरण में उनके योगदान की व्यापक रूप से सराहना हुई है। उन्होंने सेना मुख्यालय के रणनीतिक योजना और क्षमता विकास विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार क्षमता विकास और दीर्घकालिक सैन्य संरचना संबंधी पहलों को आकार देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मंत्रालय के अनुसार उनके कमान में रेगिस्तानी क्षेत्र में एक बख्तरबंद रेजिमेंट, पश्चिमी मोर्चे पर एक बख्तरबंद ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में एक आतंकवाद-विरोधी बल शामिल हैं। मंत्रालय ने बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल के रूप में, उन्होंने सुदर्शन चक्र कोर की कमान संभाली, जो भारतीय सेना की प्रमुख 'स्ट्राइक फॉर्मेशन' में से एक है। मंत्रालय के अनुसार उन्होंने दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में कार्य किया हैं, जहां उन्होंने महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभियानों और औपचारिक जिम्मेदारियों की देखरेख की। मंत्रालय के बयान के अनुसार सेना कमांडर के पद पर पदोन्नत होने पर, उन्होंने दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान की कमान संभाली, जिससे उन्हें दो परिचालन सेना कमानों की कमान संभालने और ढाई वर्षों से अधिक समय तक महत्वपूर्ण मोर्चों पर रणनीतिक पर्यवेक्षण प्रदान करने का विशिष्ट गौरव प्राप्त हुआ। बयान में कहा गया है कि उन्होंने कई महत्वपूर्ण स्टाफ और रणनीतिक पदों पर कार्य किया है, जिनका परिचालन योजना, बल प्रबंधन और क्षमता विकास पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। मंत्रालय के अनुसार लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ एक कुशल सैन्य पेशेवर हैं, जिन्होंने पेशेवर सैन्य शिक्षा में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में शीर्ष स्थान प्राप्त किए हैं। बयान के मुताबिक वह उच्च कमान पाठ्यक्रम और राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के स्नातक हैं, और उन्होंने पेरिस में आयोजित प्रतिष्ठित कमांड एंड स्टाफ कोर्स में भी भाग लिया है। -
अयोध्या . अयोध्या में राम मंदिर निर्माण समिति के प्रमुख नृपेंद्र मिश्र ने शनिवार को कहा कि उनकी भूमिका सिर्फ निर्माण कार्य की देखरेख करने तक ही सीमित है। उन्होंने मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी और पैसों में गड़बड़ी के आरोपों पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। निर्माण समिति की बैठक में शामिल होने आये मिश्र ने कहा कि उनकी ज़िम्मेदारी सिर्फ़ निर्माण कार्यों की निगरानी करना है। उन्होंने बताया कि वह निर्माण से जुड़े कार्यों का जायज़ा लेने अयोध्या आए हैं। उन्होंने कहा कि बैठक में कई निर्माण परियोजनाओं पर चर्चा की जाएगी।
मंदिर में कथित दान घोटाले के बारे में पूछे जाने मिश्र ने कहा, ''मैं सिर्फ़ निर्माण कार्य देखता हूं, और कुछ नहीं।'' उन्होंने दान घोटाले से जुड़े सवालों पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। -
नयी दिल्ली. असम के जोरहाट में रूसी मूल के एएन-32 परिवहन विमान के शनिवार को दुर्घटनाग्रस्त होने से भारतीय वायुसेना के पांच कर्मियों की मौत हो गई। वायुसेना ने बताया कि विमान सुबह करीब 10 बजे एक नियमित उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
इसने एक बयान में कहा, ''जोरहाट में एएन-32 विमान दुर्घटना में पांच कर्मियों की मौत पर भारतीय वायुसेना गहरा दुख व्यक्त करती है।'' मृतक कर्मियों की पहचान स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीर वायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीर वायु दानिश आलम के रूप में हुई है। वायुसेना ने शोकसंतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि वह ''दुख की इस घड़ी में उनके साथ मजबूती से खड़ी है।'' -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को फ्रांस और स्लोवाकिया की एक सप्ताह की यात्रा पर रवाना हुए। इस दौरान वह जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और विभिन्न द्विपक्षीय तथा वैश्विक मुद्दों पर विश्व नेताओं के साथ चर्चा करेंगे। यात्रा पर रवाना होने से पहले मोदी ने एक वक्तव्य में कहा कि भारत की रणनीतिक दूरदृष्टि में फ्रांस का एक खास स्थान है, जबकि स्लोवाकिया की उनकी यात्रा एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है और यह दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों को और आगे बढ़ाएगी। यह 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस देश की पहली यात्रा होगी। मोदी ने कहा, ''भारत की रणनीतिक दूरदृष्टि में फ्रांस का खास स्थान है। इसी वर्ष राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत आए थे और हमने अपने संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया था।'' उन्होंने कहा, ''जब मैं नीस में राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात करूंगा, तब हम फरवरी के बाद हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे और सहयोग के अगले चरणों की रूपरेखा तय करेंगे। मैं परस्पर हितों के महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा के लिए उत्सकु हूं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि वह स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ ब्रातिस्लावा में चर्चा को लेकर उत्साहित हैं। मोदी ने कहा कि फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी, भारत के प्रति उसके साझेदार देशों के विश्वास और उसकी बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाती है। उन्होंने कहा, ''यह लगातार आठवां जी-7 शिखर सम्मेलन है, जिसमें भारत को आमंत्रित किया गया है। जी-7 में भारत केवल अपनी बात ही नहीं रखेगा, बल्कि 'ग्लोबल साउथ' की आकांक्षाओं को भी आवाज देगा।''
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गुवाहाटी. मशहूर गायक एवं संगीतकार जुबिन गर्ग ने दशकों तक अपनी खास गुनगुनाहट से अनगिनत प्रशंसकों को मंत्रमुग्ध किया, लेकिन इस गुनगुनाहट के पीछे असल में ध्वनि के गुणों से संबंधित विज्ञान है जो आवाज को मधुर और सुरीला बनाने के साथ भावपूर्ण बनाता है। यह दावा हैंडिक गर्ल्स कॉलेज के दो अनुसंधानकर्ताओं ने किया है। इनका कहना है कि जुबिन की गुनगुनाहट की सबसे बड़ी खासियत समय के साथ ध्वनि का उतार-चढ़ाव, पैटर्न और आवृत्ति का सटीक संतुलन था। दरअसल उनकी गुनगुनाहट की वैज्ञानिक आवृत्ति, संचरण बारम्बरता इतनी सटीक थी कि लोगों में जोश का संचार करके उन्हें भावनात्मक रूप से जोड़ती थी। ध्वनि की आवृत्ति, संचरण बारम्बरता जैसी विशेषताओं को संयुक्त रूप से 'ध्वानिक गुणधर्म' कहते हैं । ये विशेषताएं निर्धारित करती हैं कि ध्वनि तरंगें उनके भीतर कैसे व्यवहार करती हैं। भौतिक शास्त्र के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर किशोर दत्ता और ज्योत्स्ना सैकिया ने ''क्वांटिटेटिव एक्यूस्टिक प्रोफाइलिंग ऑफ जुबिन गर्ग्स हमिंग: टेम्पोरल पैटर्निंग एंड स्पेक्ट्रल बैलेंस'' (जुबिन गर्ग की गुनगुनाने का मात्रात्मक ध्वनिक प्रोफाइलिंग: समयगत परिपाटी और स्पेक्ट्रल संतुलन )शीर्षक से प्रकाशित अनुसंधानपत्र में जुबिन गर्ग की आवाज की खासियत को समझने की कोशिश की है। अनुसंधान पत्र में कहा गया, ''जुबिन गर्ग की गायन शैली अपनी विशिष्ट गुनगुनाहट के लिए जानी जाती है। उनकी गुनगुनाहट अक्सर एक ऐसे विशेष संगीतात्मक पहचान के रूप में कार्य करती है जो भाषाई सीमाओं से परे होती है। संवाददाताओं और श्रोताओं ने उनकी गुनगुनाहट को 'सुकून दायक', 'भावपूर्ण' और 'आकर्षक' बताया है।'' अनुसंधान पत्र के मुताबिक, ''लोगों को जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट इसलिए पसंद नहीं आती कि उसमें कोई शब्द या भाषा का अर्थ होता है, बल्कि इसलिए कि उनकी ध्वनि की बनावट, लय, संरचना और आवाज़ के भावपूर्ण ध्वानिक गुणधर्म श्रोताओं पर गहरा प्रभाव डालते हैं।'' इस अनुसंधानपत्र को 'जर्नल ऑफ वॉइस' पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। इसके मुताबिक गुनगुनाहट भारतीय लोकप्रिय संगीत की एक अनूठी और महत्वपूर्ण विशेषता है, जिसका अपना अलग स्थान और पहचान है। अनुसंधानकर्ताओं ने लिखा, ''जुबिन गर्ग की गुनगुनाने की शैली बहुत सहज, मधुर और भावनात्मक है। इसलिए यह समझने के लिए वैज्ञानिक रूप से अध्ययन करना जरूरी है कि उनकी आवाज और गुनगुनाहट में ऐसा क्या खास है जो लोगों को इतना आकर्षित करता है।'' अनुसंधान पत्र के मुताबिक, ''अनुसंधानकर्ताओं ने जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट का वैज्ञानिक विश्लेषण किया और यह समझने की कोशिश की कि उनकी आवाज के कौन-कौन से मापे जा सकने वाले गुण उनकी गुनगुनाहट को इतना अलग, पहचानने योग्य और आकर्षक बनाते हैं।'' अनुसंधान पत्र के मुताबिक अनुसंधानकर्ताओं ने जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट का वैज्ञानिक विश्लेषण करने के लिए आवाज के कई तकनीकी पहलुओं का आकलन किया जिनमें स्वर में होने वाले सूक्ष्म उतार-चढ़ाव, आवाज की तीव्रता में सूक्ष्म बदलाव, आवाज की स्पष्टता और उसमें शोर का स्तर, ध्वनि कितनी खुरदरी या मखमली है,ध्वनि की ऐसी विशेषताएं जो मानव श्रवण प्रणाली के अनुसार आवाज की पहचान करने में मदद करती हैं शामिल हैं। अनुसंधानकर्ताओं ने बताया, '' अध्ययन में पाया गया कि जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट का अपना एक अलग समयगत ढांचा और शैली है। साथ ही, उनकी गुनगुनाहट और उनके सामान्य गायन की आवाज़ की मूल सुर-आवृत्ति में स्पष्ट अंतर है। इसके अलावा, उनकी गुनगुनाहट में स्वर की सूक्ष्म स्थिरता अन्य गायकों की तुलना में अलग पाई गई, जो उनकी आवाज़ की विशिष्ट पहचान का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है।'' अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि अध्ययन के दौरान हमें जुबिन की आवाज की बनावट और ध्वनि-गुणों से जुड़े कई मापदंडों (एमएफसीसी) में उल्लेखनीय अंतर मिले। इससे पता चलता है कि जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट की ध्वनि-रचना कुछ मामलों में अन्य आवाज़ों से अलग है। साथ ही, उनकी गुनगुनाहट अपेक्षाकृत थोड़ी खुरदरी प्रतीत हुई, लेकिन इन अंतर को वैज्ञानिक रूप से निर्णायक नहीं माना गया।'' अनुसंधानकर्ताओं ने अपने अध्ययन के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचे की कि जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट के प्रति आकर्षण केवल श्रोताओं की धारणा की वजह से नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक रूप से मापे जा सकने वाले ध्वनि-गुणों के आधार पर भी विशिष्ट और अलग पहचान रखती है। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि वे अपने निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए लोगों से जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट को सुनाकर उनकी राय नहीं ली, बल्कि ध्वनि-विज्ञान और मनोध्वनिकी के पहले से स्थापित वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर निष्कर्ष निकाले। इन अध्ययनों में कुछ ध्वनिक गुण यह समझाने में मदद करते हैं कि किसी आवाज़ को लोग कितना मधुर, गर्माहट भरा और स्थिर महसूस करते हैं। अनुसंधानकर्ताओं ने अपने अनुसंधानपत्र में लिखा कि जुबिन गर्ग की गुनगुनाहट में लय, स्वर और ध्वनि-संरचना से जुड़े कुछ खास गुणों का ऐसा मेल है जिसे वैज्ञानिक रूप से मापा जा सकता है। यही गुण शायद उनकी गुनगुनाहट को गहराई और आकर्षण प्रदान करती है, जिसे श्रोता महसूस करते हैं। प्रख्यात गायक जुबिन गर्ग की पिछले साल 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। वह 'नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल' के चौथे संस्करण में शामिल होने के लिए पूर्वी एशिया के द्विपीय देश गए थे।
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने गृहिणियों को ''राष्ट्र निर्माता'' के रूप में मान्यता दिए जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि पत्नी द्वारा घर-परिवार की देखभाल से मिलने वाली सेवाओं की क्षति का मौद्रिक मूल्यांकन कम से कम 30,000 रुपये प्रतिमाह के आधार पर किया जाना चाहिए। मोटर वाहन अधिनियम से जुड़े मामलों पर व्यापक प्रभाव डालने वाले एक फैसले में न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने एक व्यक्ति को उसकी पत्नी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के कारण अतिरिक्त मुआवजा प्रदान करते हुए यह आदेश पारित किया। पीठ ने कहा, ''हमारा यह भी मत है कि गृहिणी व्यक्ति और राष्ट्र, दोनों के विकास में योगदान देती है। गृहिणी राष्ट्र का निर्माण करती है। इसलिए हमने इस संबंध में सिद्धांत निर्धारित किए हैं और गृहिणी को 'राष्ट्र निर्माता' मानते हुए उसकी घरेलू देखभाल संबंधी सेवाओं के नुकसान का मासिक मूल्य किसी भी स्थिति में न्यूनतम 30,000 रुपये निर्धारित किया है।'' मृत गृहिणियों के लिए मुआवजे का निर्धारण पहले प्रचलित न्यूनतम मजदूरी के आधार पर काल्पनिक आय तय करके किया जाता था, जिसमें उन्हें कुशल या अकुशल श्रमिकों के समान माना जाता था। शीर्ष अदालत ने कहा कि गृहिणी को परिवार के कमाने वाले सदस्यों पर निर्भर बताना विडंबनापूर्ण है, जबकि वास्तव में परिवार का संचालन काफी हद तक गृहिणी पर निर्भर करता है। पीठ ने कहा, ''हम उम्मीद करते हैं कि घर की महिला के योगदान को मान्यता देते हुए भविष्य में 'हाउसवाइफ' या 'होममेकर' (गृहिणी) के लिए 'राष्ट्र निर्माता' शब्द का प्रयोग किया जाएगा।'' अदालत ने कहा, ''वास्तव में कमाने वाले सदस्य पूरी तरह गृहिणी पर निर्भर होते हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश इस वास्तविकता को वह मान्यता नहीं मिलती जो उसे मिलनी चाहिए। विभिन्न क्षेत्रों में इस दिशा में कुछ हद तक प्रयास हुए हैं, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अभी लंबा रास्ता तय किया जाना बाकी है।'' शीर्ष अदालत ने कहा कि महिलाओं का बिना वेतन वाला देखभाल कार्य भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 15 से 17 प्रतिशत का योगदान देने का अनुमान है, फिर भी यह कार्य अवैतनिक ही बना हुआ है और इस कोई मान्यता नहीं मिलती। पीठ ने कहा, ''समाज में महिलाओं का योगदान केवल जैविक प्रजनन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे मानव पूंजी के निर्माण की भी प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं, जिस पर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के सपने सहित अन्य लक्ष्य आधारित हैं।'' अदालत ने कहा, ''सीधे शब्दों में कहें तो 'गृहिणियां' वास्तव में 'राष्ट्र निर्माता' हैं और उन्हें उसी रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।'' मोटर दुर्घटना मुआवजा दावों के मामलों में होने वाली देरी पर चिंता व्यक्त करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों का निपटारा एक वर्ष के भीतर किया जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से मोटर वाहन अधिनियम से संबंधित मामलों की प्रगति की निगरानी करने को कहा। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से कहा गया कि वे ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए जरूरी निर्देश दें जो बहुत लंबे समय से लंबित हैं और उन्हें अपील दायर करने की तारीख के अनुसार उचित पीठों के समक्ष सूचीबद्ध कराएं। उच्चतम न्यायालय का यह फैसला पंजाब से जुड़े एक मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले में आया, जिसमें 25 नवंबर 2001 को एक सड़क दुर्घटना में एक महिला की मृत्यु हो गई थी। मृतका के पति और उसके तीन बच्चों ने मुआवजे का अनुरोध करते हुए मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण का रुख किया था, जिसने उन्हें 2.42 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करने का आदेश दिया। मुआवजे की राशि से असंतोष जताते हुए शिकायतकर्ताओं ने राशि बढ़ाने का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया। उच्च न्यायालय ने मुआवजे की राशि बढ़ाकर 8.43 लाख रुपये कर दी और उस पर 7.5 प्रतिशत ब्याज देने का भी आदेश दिया। इसके बावजूद असंतोष जताते हुए याचिकाकर्ताओं ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया।
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नयी दिल्ली. तृणमूल कांग्रेस के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने बृहस्पतिवार को कहा कि मुश्किल समय में वह पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि जब वह एक कठिन दौर से गुजर रहे थे, तब ममता बनर्जी उनके साथ खड़ी रहीं थीं। आसनसोल लोकसभा सीट से सांसद सिन्हा ने ' एक न्यूज़ एजेंसी' को दिये एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि कुछ लोग मजबूरी, डर या प्रलोभन के कारण बनर्जी का साथ छोड़ सकते हैं, लेकिन उनका सैद्धांतिक रुख यह है कि वह न तो पार्टी को छोड़ेंगे और न ही उसके नेता को। सिन्हा ने कहा, ''मैं ममता बनर्जी का साथ उनके मुश्किल समय में नहीं छोड़ूंगा। जब मैं पटना में चुनाव हारने के बाद कठिन दौर से गुजर रहा था, तब वह मेरे साथ खड़ी थीं।'' उन्होंने कहा कि बनर्जी एक जुझारू नेता हैं। उन्होंने हाल में राज्य में हुए विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पास अभी भी पश्चिम बंगाल में मत हिस्सेदारी 41 प्रतिशत है। सिन्हा ने कहा, ''मैं उन लोगों का आभारी हूं जिन्होंने मुझे तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया, लेकिन मेरा सैद्धांतिक रुख यह है कि मुझे इस समय ममता बनर्जी के साथ खड़ा रहना चाहिए।'' विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के विधायक दल में फूट के साथ-साथ उसके ज्यादातर सांसदों ने भी बागी तेवर अपना लिये हैं।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि किसान देश की खाद्य सुरक्षा का आधार हैं और सरकार उनकी जिंदगी आसान बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। मोदी ने कहा कि पीएम-किसान सम्मान निधि और फसल बीमा योजना जैसी पहल किसानों की आय सुरक्षित कर रही है और खेती को मजबूत बना रही है, जबकि पीएम-कुसुम योजना आसानी से सौर ऊर्जा उपलब्ध कराती है, जिससे खेती का खर्च कम होता है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी बयान में उनके हवाले से कहा गया, ''हमारे किसान भाई-बहन देश की खाद्य सुरक्षा, पोषण और समृद्धि के आधार हैं और सरकार उनकी जिंदगी आसान बनाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है।'' प्रधानमंत्री ने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड किसानों, पशुपालकों और मछुआरों को आसानी से कम ब्याज पर ऋण दिलाने में बहुत फायदेमंद साबित हो रहा है, जबकि ''बीज से बाजार तक'' पहल फसलों के लिए सही दाम सुनिश्चित कर रही है। मोदी ने कहा कि किसानों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है, इसीलिए उन्हें खेती की आधुनिक सुविधाएं देने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि ड्रोन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और प्राकृतिक खाद से जुड़े अभियान किसानों को फसल की पैदावार बढ़ाने में सक्रिय रूप से मदद कर रहे हैं।
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भोपाल. मध्यप्रदेश में राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीनों उम्मीदवारों तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को निर्वाचन अधिकारी ने बृहस्पतिवार को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया। राज्यसभा के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा ने चुनाव परिणाम की घोषणा करते हुए कहा कि तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्वाचित हो गए हैं। भाजपा के तीनों उम्मीदवार यहां मध्यप्रदेश विधानसभा पहुंचे और निर्वाचन अधिकारी से जीत का प्रमाण पत्र हासिल किया। बाद में तीनों नेताओं ने मीडिया के समक्ष निर्वाचन प्रमाण पत्र प्रदर्शित किए। तीन विजयी उम्मीदवारों के साथ भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी और राज्य के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल भी थे। जीत के बाद भाजपा के तीनों नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात की। खंडेलवाल ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''मध्यप्रदेश से राज्यसभा हेतु निर्विरोध निर्वाचित हुए तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट से भोपाल स्थित निवास पर आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर उन्हें विजयश्री की आत्मीय बधाई दी।'' खंडेलवाल ने कहा, ''आप तीनों का संगठन के प्रति समर्पण, अथक परिश्रम तथा जनसेवा का व्यापक अनुभव निश्चित रूप से संसद के उच्च सदन में मध्यप्रदेश एवं राष्ट्रहित के विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगा। पूर्ण विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आप सभी विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तथा जनआकांक्षाओं को नयी ऊर्जा प्रदान करेंगे।'' उन्होंने तीनों नेताओं को सफल, प्रभावी एवं जनकल्याणकारी संसदीय कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं।
कांग्रेस ने राज्यसभा के इस चुनाव में मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन शपथपत्र में जानकारी छिपाने के आरोप में उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया था। कांग्रेस ने इस फैसले को अवैध बताते हुए आरोप लगाया था कि भाजपा ने पर्याप्त संख्या न होने के बावजूद तीसरी राज्यसभा सीट हासिल करने के लिए साजिश रची है। निर्वाचन अधिकारी शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया था कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद पाया गया कि नटराजन ने नामांकन के साथ जमा किए गए फॉर्म 26 में अदालत में की गई शिकायत का जिक्र नहीं करते हुए अधूरा हलफनामा दाखिल किया था। मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, भाजपा के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नटराजन ने अपने हलफनामे में तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज मामले का उल्लेख नहीं किया है। नटराजन ने निर्वाचन अधिकारी के इस फैसले को लेकर उच्चतम न्यायालय का रुख किया है, जहां शीर्ष अदालत ने कहा कि वह याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की एक अंशकालिक कार्यदिवस पीठ ने हालांकि यह भी सवाल उठाया कि चुनावी प्रक्रिया जारी रहने के बीच यह याचिका कैसे सुनवाई योग्य है। नटराजन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने पीठ से आग्रह किया कि उनके गैर सूचीबद्ध उल्लेख के अनुरोध पर इस आधार पर विचार किया जाए कि निर्वाचन अधिकारी ने एक कथित आपराधिक मामले के खुलासे में चूक का हवाला देकर उनके नामांकन पत्र को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत गलत तरीके से खारिज कर दिया है। सिंघवी ने दलील दी कि किसी उम्मीदवार को केवल उन्हीं आपराधिक मामलों का खुलासा करना होता है जिनमें कम से कम दो वर्ष की न्यूनतम सजा का प्रावधान हो, जबकि वर्तमान मामले में केवल समन जारी किए गए हैं। मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना था। ये तीनों सीटें भाजपा के जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त होने से खाली हुई हैं। इन तीनों का कार्यकाल 21 जून 2026 को खत्म हो रहा है। मध्यप्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 164 विधायक हैं, जिससे वह दो सीटें आराम से जीत रही थी जबकि संख्या बल के हिसाब से तीसरी सीट पर कांग्रेस की दावेदारी मजबूत थी। राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत के लिए 58 वोटों की जरूरत थी। ऐसे में भाजपा के तीसरे उम्मीदवार की जीत अतिरिक्त वोटों, क्रॉस-वोटिंग या विपक्षी सदस्यों के मतदान से दूर रहने पर निर्भर थी। हालांकि नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मतदान की नौबत ही नहीं आई। - नयी दिल्ली. केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बुधवार को कहा कि भारत में 102 गीगावाट-पी (जीडब्ल्यू पीक) से अधिक की जलक्षेत्र में लगने वाली सौर ऊर्जा क्षमता का आकलन किया गया है और इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार जल्द ही एक प्रतिबद्ध योजना शुरू करेगी। जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और देश वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख स्वच्छ ऊर्जा अगुवा के रूप में उभरा है। उन्होंने भारत की फ्लोटिंग यानी जल क्षेत्र में लगने वाली सौर क्षमता पर आधारित रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि देश की कुल सौर ऊर्जा क्षमता अब बढ़कर 3,445 गीगावाटपी हो गई है, जिसमें 102 गीगावाटपी से अधिक फ्लोटिंग सौर क्षमता शामिल है। मंत्री ने कहा कि जलाशय और अन्य जल निकाय अब फ्लोटिंग सौर परियोजनाओं के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के महत्वपूर्ण केंद्र बन रहे हैं। सरकार इस क्षमता का सतत और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए विशेष योजना तैयार कर रही है।इस अवसर पर जोशी ने लघु जलविद्युत विकास योजना के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी पेश किया किया। उन्होंने कहा कि इससे योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। यह 2017 के बाद लघु जलविद्युत क्षेत्र में पहला बड़ा नीतिगत हस्तक्षेप है। उन्होंने कहा कि पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना और पीएम-कुसुम योजना जैसे कार्यक्रमों के जरिये आम नागरिकों की स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भागीदारी बढ़ रही है तथा देशभर में नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने की गति तेज हुई है। जोशी के अनुसार, भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता 2014 के 81 गीगावाट से बढ़कर 288 गीगावाट हो गई है, जबकि सौर ऊर्जा क्षमता 2.8 गीगावाट से बढ़कर 155 गीगावाट तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि घरेलू सौर विनिर्माण क्षेत्र में भी तेजी से विस्तार हुआ है। देश की सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता 192 गीगावाट और सौर सेल विनिर्माण क्षमता 30 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान और मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज के बीच रक्षा प्रतिष्ठानों में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के चरण-2(ए) को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे अहमदाबाद के शहरी परिवर्तन को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि परियोजना से विशेष रूप से एयरपोर्ट तक पहुंच बेहतर होगी और लोगों को तेज, सुगम तथा सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के चरण-2(ए) को मंजूरी मिलने से कनेक्टिविटी में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि यह विस्तार यातायात के दबाव को कम करेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा और सतत शहरी विकास को बढ़ावा देगा।केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के चरण-2(ए) को मंजूरी दी थी। इस चरण के तहत करीब 6.032 किलोमीटर लंबे नए मेट्रो कॉरिडोर का विकास किया जाएगा। इसका उद्देश्य एयरपोर्ट तक निर्बाध कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना और उन प्रमुख आवासीय तथा व्यावसायिक क्षेत्रों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ना है, जहां वर्तमान में प्रभावी सार्वजनिक परिवहन सुविधा का अभाव है।इस कॉरिडोर में कुल पांच स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें चार एलिवेटेड और एक अंडरग्राउंड स्टेशन शामिल होगा। चरण-2(ए) के पूरा होने के बाद अहमदाबाद-गांधीनगर कॉरिडोर में सक्रिय मेट्रो नेटवर्क की कुल लंबाई 77.63 किलोमीटर हो जाएगी। इस चरण के तहत आश्रम रोड, कोटेश्वर प्राचीन मंदिर, साबरमती नदी, सरदार नगर और एयरपोर्ट स्टेशन विकसित किए जाएंगे।परियोजना की कुल लागत, जिसमें निर्माण अवधि के दौरान ब्याज (आईडीसी) भी शामिल है, 2,169.04 करोड़ रुपए आंकी गई है। यह विस्तार अहमदाबाद के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य प्रमुख आवासीय और वाणिज्यिक केंद्रों को अहमदाबाद-गांधीनगर मेट्रो कॉरिडोर से सुचारू रूप से जोड़ना है।सरकार के अनुसार, यह परियोजना 2029 में प्रस्तावित विश्व पुलिस खेलों और 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों के मद्देनजर क्षेत्र में खेल सुविधाओं के विकास को भी बढ़ावा दे सकती है। इसके अलावा, बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी से पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे निवासियों और आगंतुकों दोनों को लाभ मिलेगा।अहमदाबाद मेट्रो के चरण-2(ए) से निर्माण कार्य के चरम समय में लगभग 2,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं, परियोजना के संचालन और रखरखाव के दौरान करीब 500 लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। सरकार का मानना है कि यह परियोजना यातायात जाम कम करने, प्रदूषण घटाने और शहर में जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन कल्चरल सेंटर में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस वर्ष की बैठक का विषय ‘विकसित भारत 2047 के लिए समावेशी मानव विकास’ है। इसका उद्देश्य उम्र, क्षेत्र, लिंग और सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना प्रत्येक भारतीय के कल्याण और विकास को सुनिश्चित करना है।एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि गवर्निंग काउंसिल की बैठक में इस दृष्टि को साकार करने तथा इसे देश के प्रत्येक नागरिक के लिए ठोस और मापने योग्य परिणामों में बदलने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।अधिकारियों के अनुसार, बैठक में मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल ‘समावेशी मानव विकास ढांचे’ पर विचार-विमर्श करेंगे। यह ढांचा चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है, जिनमें बुनियादी मानव पूंजी और भविष्य के लिए तैयार कौशल; उत्पादक रोजगार, उद्यमिता और विकेंद्रीकृत विकास; स्वास्थ्य, पोषण और भलाई; और सभी के लिए समानता और सम्मान शामिल है।बैठक में उद्यमिता को बढ़ावा देने, कौशल विकास को मजबूत बनाने और देशभर में टिकाऊ रोजगार के अवसर सृजित करने के उपायों पर भी चर्चा होगी।विचार-विमर्श का एक प्रमुख उद्देश्य सामूहिक रूप से कार्यान्वयन का रोडमैप तैयार करना भी होगा। इसके लिए सुशासन, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई), समन्वय, पार्टनरशिप और डेटा-आधारित सिस्टम जैसे प्रमुख साधनों का उपयोग किया जाएगा। साथ ही, जवाबदेही और मापने योग्य प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक परिणामों की निगरानी हेतु एक व्यवस्थित तंत्र विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।बैठक में राज्यों के विकास दृष्टिकोण को समावेशी मानव विकास के राष्ट्रीय विजन के साथ जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि संतुलित और सतत विकास के लिए एकीकृत तथा सहयोगात्मक दृष्टिकोण को मजबूत किया जा सके।नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल 26 से 28 दिसंबर 2025 के बीच आयोजित मुख्य सचिवों के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन की सिफारिशों पर भी विचार करेगी।सम्मेलन में पांच प्रमुख विषयों पर सिफारिशें की गई थीं। इनमें प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा : नींव रखना; स्कूली शिक्षा: बिल्डिंग ब्लॉक्स; कौशल विकास: भविष्य के लिए तैयार कार्यबल; उच्च शिक्षा: ज्ञान अर्थव्यवस्था; और खेल और पाठ्येतर गतिविधियां: कक्षाओं से परे, शामिल हैं।बैठक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उप-राज्यपाल/प्रशासक, केंद्रीय मंत्री (पदेन सदस्य और विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में) और नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य और सीईओ शामिल होंगे।इस बीच, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में भाग लेने के लिए तीन दिवसीय दौरे पर बुधवार को नई दिल्ली पहुंचे। पिछले महीने पद संभालने के बाद राष्ट्रीय राजधानी का यह उनका दूसरा दौरा है। इस दौरे पर अहम राजनीतिक और प्रशासनिक बैठकों की उम्मीद है, इसलिए इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।उनके साथ उनके निजी सहयोगी जगदीश, विष्णु रेड्डी, राजकुमार, जगदीश अवस्थी, सहायक राजेंद्रन और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अन्य अधिकारी भी थे। विजय का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब तमिलनाडु की नई सरकार बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यक्रमों के लिए केंद्र से अधिक वित्तीय सहायता की मांग कर रही है।उधर, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि वह बैठक में सक्रिय रूप से भाग लेंगे और राज्य से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे। उन्होंने कहा, “हम बैठक में शामिल हो रहे हैं और मैं कर्नाटक के हितों से जुड़े मुद्दे रखूंगा। जिस दिन मैंने पद संभाला था, प्रधानमंत्री ने मुझे सहयोग का भरोसा दिलाया था। हम विकास के हित में मिलकर काम करेंगे।”
- नई दिल्ली। रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए भारतीय रेल देशभर में फायर सेफ्टी ऑडिट कराएगी। इसके तहत स्टेशनों पर मौजूद अग्नि सुरक्षा इंतजामों की जांच की जाएगी और जहां भी सुधार की जरूरत होगी, वहां जरूरी कदम उठाए जाएंगे, ताकि यात्रियों और रेलवे संपत्तियों की सुरक्षा को और बेहतर बनाया जा सके।इस ऑडिट के तहत स्टेशन भवनों, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, एयर कंडीशनिंग और वेंटिलेशन सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, फायर फाइटिंग सिस्टम, पानी की उपलब्धता, पंपिंग और स्प्रिंकलर सिस्टम समेत सभी महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रेलवे स्टेशन आग जैसी किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हों।ऑडिट के दौरान यह भी जांच की जाएगी कि स्टेशनों पर लागू सभी फायर सेफ्टी और सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। जहां भी कोई कमी पाई जाएगी, वहां सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम तुरंत उठाए जाएंगे। स्टेशनों की जांच के लिए विभिन्न विभागों की संयुक्त टीमें बनाई जाएंगी। आवश्यकता होने पर विशेषज्ञ एजेंसियों और राज्य फायर विभाग का सहयोग भी लिया जाएगा। जहां सुधार की जरूरत होगी, वहां प्राथमिकता के आधार पर जरूरी कदम उठाए जाएंगे, ताकि सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सके।भारतीय रेल लगातार रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है। फायर सेफ्टी ऑडिट की यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा मानकों को और सुदृढ़ किया जा सकेगा।
- नई दिल्ली। राजनीतिक सहयोगियों और संबंधित पक्षों की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर तमिलनाडु के हितों को सक्रिय रूप से रखने की मांग के बीच मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय आज गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में शामिल होंगे।राष्ट्रपति भवन परिसर के कल्चरल सेंटर में होने वाली इस बैठक में देश भर के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। इस दौरान विकास की प्राथमिकता, केंद्र-राज्य सहयोग और लंबी अवधि की नीतिगत पहलों पर चर्चा की जाएगी।राजनीतिक जानकारों और गठबंधन सहयोगियों ने मुख्यमंत्री विजय से आग्रह किया है कि वे इस मंच का इस्तेमाल तमिलनाडु के विकास से जुड़े मुद्दों को मजबूती से रखने और केंद्र सरकार के सामने राज्य की लंबित मांगों पर जोर देने के लिए करें।मुख्यमंत्री विजय बुधवार को एक प्राइवेट विमान से नई दिल्ली पहुंचे। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद राष्ट्रीय राजधानी में यह उनका दूसरा दौरा है। वे दोपहर में तमिलनाडु गवर्नमेंट हाउस पहुंचे, जहां वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया, इनमें राष्ट्रीय राजधानी में तैनात तमिलनाडु के प्रतिनिधि भी शामिल थे।नीति आयोग की बैठक से पहले मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय नेताओं के साथ कई अहम बैठकें कीं। बुधवार शाम उन्होंने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की और राज्य व देश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। इसके बाद उन्होंने उपराष्ट्रपति के आवास पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। इन मुलाकातों को संवैधानिक अधिकारियों और राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ संबंध मजबूत करने की विजय की कोशिशों के तौर पर देखा गया।मुख्यमंत्री ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी उनके आवास पर मुलाकात की। यह मुलाकात इसलिए अहम है क्योंकि तमिलनाडु में सत्ताधारी गठबंधन में कांग्रेस एक प्रमुख सहयोगी है। एक और अहम मुलाकात में विजय ने पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय में सीपीआई के महासचिव डी राजा से मुलाकात की और अपनी सरकार को वामपंथी दलों से मिले समर्थन के लिए उनका आभार जताया।
- नई दिल्ली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले दो दिनों में तमिलनाडु के 11 जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का अनुमान लगाया है। मौजूदा मौसम प्रणाली के कारण राज्य और पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेशों में कम से कम एक हफ़्ते तक व्यापक बारिश होने की उम्मीद है। क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के बीच से कर्नाटक के तटीय इलाकों तक फैला कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है, जो आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के अंदरूनी हिस्सों से होकर गुजर रहा है।इस सिस्टम का असर तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के मौसम पर पड़ने की उम्मीद है, जिससे कई इलाकों में लगातार बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने बताया कि गुरुवार और शुक्रवार को तिरुनेलवेली और कोयंबटूर जिलों के पहाड़ी और आसपास के इलाकों के साथ-साथ कन्याकुमारी, नीलगिरी, वेल्लोर, तिरुपत्तूर, कृष्णगिरि, धर्मपुरी, इरोड, सलेम और रानीपेट जिलों में तेज़ हवाओं के साथ भारी बारिश होने की संभावना है।अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों, खासकर पहाड़ी ढलानों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि रुक-रुक कर होने वाली भारी बारिश और तेज हवाओं से सामान्य जीवन और परिवहन पर असर पड़ सकता है। चेन्नई, तिरुवल्लुर, कांचीपुरम और चेंगलपट्टू सहित उत्तरी तटीय जिलों के लिए विभाग ने गुरुवार को गरज और बिजली के साथ मध्यम बारिश का अनुमान लगाया है। हालांकि, बड़े पैमाने पर बाढ़ आने की आशंका नहीं है, लेकिन अगर कम समय में तेज बारिश होती है, तो कुछ शहरी इलाकों में पानी जमा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।मौसम विभाग ने शुक्रवार को डिंडीगुल, तिरुवन्नामलाई, विल्लुपुरम, कल्लाकुरिची, थेनी, कुड्डालोर और मयिलादुथुराई जिलों में भारी बारिश का अनुमान भी जताया है। इन इलाकों में अच्छी-खासी बारिश होने की उम्मीद है क्योंकि नमी वाली हवाएं दक्षिण भारत के ऊपर बने मौसम सिस्टम को लगातार नमी पहुंचा रही हैं।मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मौजूदा स्थिति दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के उस सक्रिय चरण के अनुरूप है जो प्रायद्वीपीय भारत को प्रभावित कर रहा है। कम दबाव वाले क्षेत्र और अनुकूल हवा की स्थितियों के मेल से आने वाले दिनों में पूरे तमिलनाडु में बारिश जारी रहने की उम्मीद है। आईएमडी ने मछुआरों, किसानों और बारिश वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को सलाह दी है कि वे मौसम की आधिकारिक जानकारी पर नजर रखें और जरूरी सावधानी बरतें। आपदा प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी मौसम की बदलती स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं क्योंकि राज्य एक बार फिर बड़े पैमाने पर बारिश के दौर के लिए तैयार हो रहा है।
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नई दिल्ली। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को भारतीय लोकतंत्र की यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर मानते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। इसमें देश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बनने के लिए नरेंद्र मोदी की सराहना की गई। चुने हुए प्रधानमंत्री के तौर पर लगातार 4,399 दिनों की सेवा का रिकॉर्ड बनाकर, उन्होंने पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने 1952 से 1964 तक लगातार 4,398 दिनों तक सेवा की थी। प्रस्ताव में कहा गया है कि यह अवसर भारत की लोकतांत्रिक चेतना, जनता के भरोसे और जन-भागीदारी की शक्ति का प्रतीक है। यह ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प से प्रेरित नेता को जनता से मिले अभूतपूर्व समर्थन को दर्शाता है।
पीएम मोदी को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए प्रस्ताव में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि यह उपलब्धि उनके नेतृत्व में एनडीए सरकार के 12 साल पूरे होने के साथ मेल खाती है। इसमें यह भी बताया गया है कि प्रधानमंत्री सरकार के प्रमुख के तौर पर लगातार 25 साल की सेवा के ऐतिहासिक पड़ाव के करीब पहुंच रहे हैं। संवेदनशीलता, संयम, नेक इरादे और निर्णायक क्षमता वाले नेतृत्व पर गर्व करते हुए आधिकारिक दस्तावेज में इस बात पर जोर दिया गया है कि छह दशकों के बाद देश ने एनडीए सरकार को लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए जनादेश दिया है।प्रधानमंत्री के जीवन को सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति निरंतर समर्पण का प्रतीक बताते हुए दस्तावेज में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के प्रति प्रतिबद्ध प्रधान सेवक के रूप में 2014 में की गई उनकी घोषणा को याद किया गया है। यह मानते हुए कि गरीबों का कल्याण शासन के केंद्र में रहा है, दस्तावेज में बड़े पैमाने पर दी गई सुविधाओं का विवरण दिया गया है। इनमें पक्के घर, बिजली, स्वच्छ पानी और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (सीधे लाभ हस्तांतरण) शामिल हैं, साथ ही 80 करोड़ से अधिक नागरिकों के लिए मुफ्त राशन और 60 करोड़ से अधिक गरीब लोगों के लिए मुफ्त चिकित्सा उपचार की सुविधा भी दी गई है। प्रस्ताव में दर्ज है कि इन प्रयासों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रीय आत्मविश्वास को बढ़ाया और 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकलने में मदद की।प्रस्ताव में प्रमुख वर्गों के सशक्तिकरण का भी विवरण दिया गया है। यह युवा शक्ति पर उस फोकस को पहचानता है जिसने भारत को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम और ‘मिशन चंद्रयान’ के जरिए एक वैज्ञानिक शक्ति बनाया। ‘महिलाओं के नेतृत्व में विकास’ का एक नया अध्याय कई व्यापक नीतियों के जरिए बताया गया है, जिसमें धुएं-मुक्त रसोई और ‘लखपति दीदी’ अभियान से लेकर विधायी निकायों में महिलाओं के लिए ऐतिहासिक 33 प्रतिशत आरक्षण तक शामिल हैं। किसानों को ‘विकसित भारत’ का मुख्य आधार मानते हुए यह दस्तावेज पीएम किसान सम्मान निधि और पशुपालकों व मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड देने जैसी पहलों की तारीफ करता है, जिन्होंने कृषि निर्यात को 5 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े से आगे बढ़ाने में मदद की है।दशकों से लंबित सुधारों को लागू करने में ‘राष्ट्र प्रथम’ की निर्णायक भावना की तारीफ करते हुए यह प्रस्ताव अनुच्छेद 370 को हटाने, जीएसटी और ओआरओपी को लागू करने, सीएए कानून, भारतीय न्याय संहिता और लेबर कोड को एक साथ लाने जैसी अहम उपलब्धियों की सराहना करता है। यह दस्तावेज राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर देता है, जिसका सबूत आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई (जैसे सर्जिकल और क्रॉस-बॉर्डर एयर स्ट्राइक), ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और अन्यायपूर्ण सिंधु जल संधि को निलंबित करना है। नक्सलवाद को खत्म करने, पूर्वोत्तर में स्थायी शांति समझौतों पर हस्ताक्षर करने और बांग्लादेश के साथ सीमा विवाद को सुलझाने में भी सराहनीय प्रगति देखी गई है।यह प्रस्ताव रक्षा से लेकर एआई तक के क्षेत्रों में भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं में हुई प्रगति का श्रेय ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों से मिली गति को देता है। साथ ही, यह सफल जी-20 अध्यक्षता, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन व ‘मिशन लाइफ’ जैसी पहलों के जरिए भारत की मजबूत होती वैश्विक भूमिका को भी उजागर करता है। विकास और विरासत (‘विकास’ और ‘विरासत’) को साथ लेकर चलते हुए यह दस्तावेज नए संसद भवन और कर्तव्य पथ के प्रतीक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का जिक्र करता है, जो जन-भागीदारी की भावना से प्रेरित है और जिसने कोरोना महामारी जैसे वैश्विक संकटों का सफलतापूर्वक सामना किया।पिछले 12 वर्षों की राजनीतिक स्थिरता, गतिशील शासन और दूरदर्शी नीतियों ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना दिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपना गहरा आभार और भविष्य का संकल्प व्यक्त करने के लिए आधिकारिक तौर पर निम्नलिखित प्रस्ताव अपनाए। केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अपनाए गए औपचारिक प्रस्ताव कुछ इस प्रकार है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई और शुभकामनाएं देता है। गरीबों के कल्याण और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण के लिए उनके नेतृत्व में किए गए कार्यों के प्रति आभार व्यक्त करता है। प्रधानमंत्री की उन नीतियों की सराहना करता है, जिनकी बदौलत उनके नेतृत्व में भारत में 25 करोड़ से अधिक गरीब लोग गरीबी को मात देने में सफल हुए हैं। -
नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार के निरंतर सत्ता में रहते हुए ऐतिहासिक 12 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इसके साथ ही पीएम मोदी ने सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड भी बना लिया है। इस अवसर पर बुधवार को दिल्ली में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की बैठक बुलाई गई। इस बैठक में हिस्सा लेने एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी पहुंचे।
इस दौरान एक रोचक वीडियो भी सामने आया, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झालमुड़ी परोसते देखा गया। वीडियो में प्रधानमंत्री के साथ भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और दूसरे बड़े नेता भी नजर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर शेयर किया।प्रधानमंत्री ने वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “आज एनडीए की बैठक में साथी एनडीए नेताओं के साथ झालमुड़ी खाई।”दरअसल, बंगाल विधानसभा चुनाव में झालमुड़ी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा था। 19 अप्रैल को प्रधानमंत्री जब झारग्राम में चुनावी रैली को संबोधित करने गए थे तो अचानक झालमुड़ी की एक दुकान पर पहुंच गए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दुकानदार विक्रम शॉ से कहा था कि भाई झालमुड़ी खिलाओ। जब दुकानदार ने उनसे पूछा कि आप प्याज खाते हैं तो प्रधानमंत्री ने मजेदार पंच मारते हुए कहा कि हां, भाई प्याज खाते हैं, लेकिन दिमाग नहीं खाते। झालमुड़ी खाने के बाद पीएम मोदी ने दुकानदार को दस रुपए भी दिए थे।इस घटना के बाद झालमुड़ी सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगी थी। यहां तक कि बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान भी भाजपा और टीएमसी के नेताओं ने झालमुड़ी को लेकर खूब बयानबाजी की थी। जब पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे निकले तो प्रचंड जीत से उत्साहित भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे और आम लोगों को भी झालमुड़ी खिलाकर खुशियां मनाई थी।इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की तारीफ की। कैबिनेट सदस्यों ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री का सम्मान करते हुए खड़े होकर तालियां बजाकर उन्हें बधाई दी।प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को केंद्र सरकार के प्रमुख के तौर पर 12 साल पूरे किए। चुने हुए प्रधानमंत्री के तौर पर 4,399 दिनों के कार्यकाल के साथ उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रही हैं। इस वैश्विक मंदी के बावजूद, भारत ने 2025-26 में 7.7 प्रतिशत की उल्लेखनीय विकास दर हासिल की। 31 मार्च को समाप्त हुई पिछली तिमाही में भारत की विकास दर 7.8 प्रतिशत रही।
उन्होंने कहा कि पहले पूर्वोत्तर भारत में बम और बंदूक थमने का नाम नहीं लेते थे। हमने पूर्वोत्तर भारत में शांति भी लौटाई और स्थिरता भी लेकर आए। पहले भारत आतंकी हमलों के बाद चुपचाप दर्द सहता रहता था। हमने आतंकियों पर सर्जिकल स्ट्राइक और एयरस्ट्राइक की, और ऑपरेशन सिंदूर में भारत का सामर्थ्य दुनिया ने देखा। पूर्वोत्तर भारत में हिंसा चरम पर थी, लेकिन हमने इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल की है। पहले भारत चुपचाप आतंकवादी हमलों को सहन करता था। अब हमने आतंकवादियों के खिलाफ सटीक और हवाई हमले करके जवाब दिया है, जैसा कि ऑपरेशन सिंदूर में दिखाया गया है, जिससे भारत का संकल्प और शक्ति दुनिया के सामने प्रदर्शित हुई है।उन्होंने कहा कि दल से बड़ा देश है और जब नेशन फर्स्ट की भावना से काम होता है, तो कोई भी निर्णय कठिन नहीं होता। ऐसे फैसले, जिन्हें पहले असंभव समझा गया और जो देश के सुरक्षित भविष्य के लिए अनिवार्य थे, हमने बहुत ही सधे हुए तरीके से उन फैसलों को भी लिया। पहले की सरकारें अनुच्छेद 370 की बात करने से डरती थीं, हमने अनुच्छेद 370 हटाकर पूरे देश में संविधान को समान रूप से लागू किया।प्रधानमंत्री ने कहा कि हम मध्यम वर्ग के सामने आने वाली चुनौतियों और बेहतर भविष्य की उनकी आकांक्षाओं को समझते हैं। उनकी सहायता के लिए, 12 लाख रुपए प्रति वर्ष तक की आय अब कर मुक्त है। आज देश एक सरल और पारदर्शी कर प्रणाली से लाभान्वित हो रहा है। बेहतर बुनियादी ढांचे ने दैनिक जीवन को आसान बना दिया है, और पिछले 12 वर्षों में मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए नए अवसर सृजित हुए हैं।उन्होंने कहा कि राष्ट्र किसी भी राजनीतिक दल से बड़ा है, और जब हम ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना से काम करते हैं, तो कोई भी निर्णय कठिन नहीं होता। हमने उन निर्णयों पर साहसिक और विचारशील कदम उठाए हैं, जिन्हें कभी असंभव माना जाता था, लेकिन देश के सुरक्षित भविष्य के लिए आवश्यक थे। एनर्जी, मिनरल्स, चिप, बैटरी स्टोरेज, स्पेस, ड्रोन, डेटा सेंटर्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस… ऐसे हर सेक्टर, हर तकनीक एक दूसरे से जुड़ी हुई है। ये एक दूसरे की पूरक हैं। भारत इनके लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रह सकता क्योंकि ये भारत की आर्थिक और रणनीतिक, हर प्रकार की सुरक्षा से जुड़े विषय हैं। और तभी भारत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम पर इतना फोकस कर रहा है, तभी क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर मिशन मोड पर काम चल रहा है।उन्होंने कहा कि ये 12 वर्ष सरकार और समाज की सहभागिता का उत्सव मनाने वाले रहे हैं। बीते 12 वर्षों में मैंने देशवासियों से जो भी सहयोग मांगा, देश ने दिल खोलकर साथ दिया। मैंने स्वच्छता का आग्रह किया, तो पूरा देश निकल पड़ा। मैंने डिजिटल पेमेंट अपनाने का आह्वान किया, तो भारत रियल टाइम ट्रांजैक्शन में दुनिया में आगे निकल गया। मैंने कोरोना महामारी के दौरान एकजुटता और संयम का आग्रह किया, तो देश ने मिलकर उस महामारी का सामना किया। जनता ने कभी हमें निराश नहीं किया। आने वाले समय में भी हमें इसी जनविश्वास और जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ना है।उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में, हमने ऊर्जा सुरक्षा में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। लाल किले की प्राचीर से, मैंने महत्वाकांक्षी समुद्र मंथन मिशन की घोषणा की, जो हमारे राष्ट्र की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करता है। हाल के दिनों में, हमें तेल और गैस अन्वेषण के संबंध में उत्साहजनक समाचार प्राप्त हुए हैं, जो नई संभावनाओं से भरे भविष्य का संकेत देते हैं। यह आवश्यक है कि हम अपने सामने आने वाले प्रत्येक अवसर का लाभ उठाएं। अब, हमें 500 गीगावाट के लक्ष्य तक पहुंचने के अपने प्रयासों को तेज करना होगा। सौर ऊर्जा में प्रगति तेजी से हो रही है, लेकिन परमाणु ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हाल ही में, हमने विश्व को दिखाया कि भारत ने फास्ट ब्रीडर रिएक्टर प्रौद्योगिकी में प्रगति की है, जो एक मील का पत्थर है, जो हमें परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगा। - नयी दिल्ली.। केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में कृषि मंत्रालय का बजट लगभग पांच गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.4 लाख करोड़ रुपये हो गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर 'सार्वजनिक सेवा एक संकल्प' शीर्षक से जारी पुस्तिका में यह जानकारी दी गई। वित्त वर्ष 2013-14 में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का बजट 27,663 करोड़ रुपये था। पुस्तिका के मुताबिक, केंद्र सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके तहत 2014 से 2025 के दौरान करीब 3,000 जलवायु-प्रतिरोधी फसल किस्में विकसित की गईं। इसके अलावा, 26 करोड़ से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए गए जिससे किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग में मदद मिली। सरकार ने अपनी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' (पीएम-किसान) योजना के तहत अब तक 4.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसानों को हस्तांतरित की जा चुकी है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये तीन समान किस्तों में दिए जाते हैं। उर्वरक सब्सिडी पर सरकार के व्यय का उल्लेख करते हुए पुस्तिका में कहा गया है कि 2024-25 में यह बढ़कर 2.21 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि 2014-15 में यह 75,000 करोड़ रुपये था। यूरिया पर करीब 90 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। पुस्तिका के मुताबिक, इन प्रयासों की वजह से वित्त वर्ष 2024-25 में खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 3,577 लाख टन तक पहुंच गया। सरकार ने यह भी कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर पिछले 12 वर्षों में 26 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खरीद की गई, जिससे किसानों को बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिली है। केंद्र ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में कृषि निर्यात पांच लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो 2013-14 की तुलना में 37 प्रतिशत अधिक है। पुस्तिका के मुताबिक, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के दायरे में शामिल किसानों में 63 प्रतिशत अनुसूचित जाति/ जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) वर्ग से संबंधित हैं। जैविक खेती को बढ़ावा देने और रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) के तहत लगभग 19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया गया है। यह योजना 2015 में राष्ट्रीय टिकाऊ कृषि मिशन के तहत शुरू की गई थी। इसके अलावा, 25 लाख से अधिक छोटे एवं सीमांत किसानों ने 'सामाजिक सुरक्षा योजना पीएम किसान मानधन योजना' में पंजीकरण कराया है। डिजिटल कृषि मिशन के तहत अब तक किसानों के लगभग 11 करोड़ एग्रीस्टैक डिजिटल पहचान तैयार की जा चुकी हैं।
- नयी दिल्ली.। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर सराहा और उनके ''विकसित भारत'' के दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा, समावेशी विकास तथा सामाजिक न्याय के मामलों में उनके नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पारित प्रस्ताव में उन्हें चुने हुए प्रधानमंत्री के तौर पर जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने पर बधाई दी गई और भरोसा जताया गया कि मोदी के नेतृत्व में भारत ''आत्मनिर्भर, सुरक्षित और समृद्ध राष्ट्र के तौर पर नई ऊंचाई हासिल करता रहेगा''। कैबिनेट मंत्रियों ने मोदी के कार्यकाल के 4,399 दिन पूरे होने पर खड़े होकर करतल ध्वनि से उनका अभिवादन किया। सरकार के विकास के एजेंडे का जोरदार समर्थन करते हुए, कैबिनेट ने 2047 तक विकसित भारत बनाने की दिशा में मोदी के नेतृत्व को पूरा समर्थन दिया और जनसेवा के प्रति उनके अथक समर्पण की सराहना की। प्रस्ताव में ''समावेशी विकास और सामाजिक न्याय'' की दिशा में मोदी के प्रयासों की सराहना की गई और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने तथा भारत के हितों की रक्षा करने में उनके नेतृत्व की प्रशंसा की गई। कैबिनेट ने गरीबों के लिए कल्याणकारी कार्यक्रम चलाने और हाशिए पर मौजूद वर्गों को सशक्त बनाने का श्रेय भी प्रधानमंत्री मोदी को दिया तथा इस बात का उल्लेख किया कि उनके कार्यकाल में 25 करोड़ से ज्यादा लोगों ने गरीबी से मुक्ति पाई है। कैबिनेट के प्रस्ताव में पिछले 12 वर्षों में किए गए कई सुधारों और नीतिगत फैसलों का भी जिक्र किया गया, जिनमें अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को रद्द करना, जीएसटी लागू करना, 'वन रैंक, वन पेंशन', नए आपराधिक कानून और मैन्युफैक्चरिंग व आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाले उपाय शामिल हैं। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सरकार के कदमों, वामपंथी उग्रवाद से निपटने की कोशिशों, पूर्वोत्तर में शांति की पहल और जी20 जैसे मंचों के जरिए भारत की बढ़ती वैश्विक पहचान का भी जिक्र किया गया।
- लखनऊ।उत्तर प्रदेश के आम उत्पादक क्षेत्र मलीहाबाद में किसानों ने भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगाने के नेपाल के निर्णय पर चिंता जतायी है। उनका कहना है कि इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय आम की छवि प्रभावित हो सकती है। हालांकि, प्रदेश के कृषि विपणन, विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि इस प्रतिबंध का किसानों की आय पर मामूली असर होगा। मंत्री ने हालांकि उम्मीद जताई कि नेपाल अपने निर्णय पर पुनर्विचार करेगा। नेपाल ने अत्यधिक कीटनाशक और अपर्याप्त क्वरंटाइन सुविधाओं का हवाला देते हुए हाल ही में भारतीय आमों के आयात पर रोक लगा दी है। लखनऊ के पास मलीहाबाद को भारत के सर्वोत्तम आम उत्पादक क्षेत्रों में से एक के रूप में जाना जाता है। यह क्षेत्र दशहरी आम की किस्म के लिए प्रसिद्ध है जिसे विदेशी बाजारों को निर्यात किया जाता है। स्थानीय किसानों का कहना है कि यह निर्णय ऐसे समय में किया गया है जब किसान पहले ही अपने उत्पादों का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। किसान कलीम अहमद ने कहा कि इस प्रतिबंध का घरेलू बाजार पर भी असर पड़ सकता है।उन्होंने कहा, "जब भी आमों का निर्यात किया जाता है, किसान और सरकार दोनों लाभान्वित होते हैं। इस तरह के निर्णयों से किसानों के समक्ष दिक्कतें बढ़ जाती हैं।" एक अन्य किसान मोहम्मद इकरार ने कहा कि इस निर्णय से विदेश में भारतीय आमों की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। "हम अपने आम के बागानों की हमारे बच्चों की तरह देखभाल करते हैं, इसके बावजूद किसानों को उनकी मेहनत का सही पारिश्रमिक नहीं मिलता। निर्यात में किसी तरह की बाधा चिंता का कारण बन जाती है।" मंत्री ने कहा कि नेपाल एक संप्रभु राष्ट्र है और दो देशों के बीच व्यापार संबंधी मुद्दे केंद्र द्वारा देखे जाते हैं। "दुनिया के कई देश भारतीय आमों की प्रशंसा करते हैं। नेपाल ने ऐसा निर्णय क्यों किया, यह मेरी समझ से परे है।"
- नयी दिल्ली। सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल में कर सुधारों से लेकर डिजिटल पहल और कारोबारी सुगमता से लेकर तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनने जैसी उपलब्धियां बुधवार को रेखांकित की। मोदी देश में सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। उन्होंने इस क्रम में पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। केंद्र सरकार की तरफ से जारी एक पुस्तिका में कहा गया कि पिछले 12 वर्षों में आयकर बोझ में आई कमी सरकार की 'रामराज्य' की अवधारणा को दर्शाती है। इसमें कहा गया कि जीएसटी, चेहरा-रहित कर व्यवस्था और डिजिटल इंडिया जैसे सुधारों ने सार्वजनिक व्यवस्था में विश्वास को मजबूत किया है, जो भारत को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में मददगार होगा। पुस्तिका के अनुसार, करदाताओं के बढ़ते भरोसे ने सड़क, अस्पताल, बुनियादी ढांचे और अन्य विकास परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने का काम किया है। पुस्तिका के मुताबिक, "कर बोझ घटा है और लोगों का भरोसा बढ़ा है। इसका परिणाम यह है कि करदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है क्योंकि लोग देख रहे हैं कि उनका पैसा सड़कों, अस्पतालों और देश के भविष्य पर खर्च हो रहा है। यही सुशासन है और यही 'रामराज्य' का संदेश है।" इसके मुताबिक, भारत की वृद्धि यात्रा 'पांच नाजुक देशों' (फ्रेजाइल फाइव) से आगे बढ़कर 'सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था' तक पहुंच गई है। वर्ष 2013 में भारत को दुनिया की पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन निर्णायक सुधारों ने स्थिति को पूरी तरह बदल दिया। सरकार ने कहा कि महंगाई को नियंत्रित किया गया, जीएसटी लागू कर पूरे देश को एकीकृत बाजार बनाया गया तथा बैंकिंग सुधारों के जरिए गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में कमी आई है। पुस्तिका के अनुसार, भारत आज पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, जो केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि हर भारतीय के सपनों की उड़ान है। सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए जारी एक आधिकारिक दस्तावेज में कहा गया कि 2014 की तुलना में एक जीबी डेटा की कीमत 97 प्रतिशत घटकर लगभग 8-10 रुपये रह गई है, जबकि पहले यह 269 रुपये थी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की खपत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और लोगों के लिए नए अवसर खुले हैं। इस दस्तावेज के मुताबिक, पिछले 12 वर्षों में देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग चार गुना बढ़कर दिसंबर 2025 तक 103 करोड़ हो गई है, जबकि 2014 में यह लगभग 25 करोड़ थी। इस दौरान ब्रॉडबैंड कनेक्शन की संख्या छह करोड़ से करीब 17 गुना बढ़कर करीब 100 करोड़ हो गई है। 'सार्वजनिक सेवा एक संकल्प' शीर्षक वाली पुस्तिका में किसानों के कल्याण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को भी रेखांकित किया गया है। पुस्तिका के मुताबिक, पिछले 12 वर्षों में कृषि मंत्रालय का बजट पांच गुना बढ़कर चालू वित्त वर्ष में 1.4 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह कदम कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस पुस्तिका में कहा गया है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत अब तक किसानों को 4.3 लाख करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं। इस योजना में किसानों को सालाना 6,000 रुपये तीन समान किस्तों में दिए जाते हैं। उद्योग जगत ने सरकार की तरफ से उठाए गए सुधारात्मक कदमों और नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के परिवर्तनकारी नेतृत्व में भारत एक प्रभावशाली वैश्विक आवाज बनकर उभरा है। विभिन्न उद्योग मंडलों ने कारोबार में सुगमता बढ़ाने पर सरकार के जोर का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है तथा देश में अनुकूल कारोबारी माहौल बना है।






















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