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नयी दिल्ली. सरकार की प्रमुख वित्तीय समावेशन योजना प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के 12 साल पूरे हो गए हैं और इसके तहत खोले गए बैंक खातों की संख्या 59 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। वित्त मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, इन खातों में कुल जमा राशि 3.17 लाख करोड़ रुपये हो गई है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 28 अगस्त, 2014 को पीएमजेडीवाई की शुरुआत की थी। योजना का उद्देश्य बैंक सुविधाओं से वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक बैंकिंग तथा वित्तीय सेवाएं पहुंचाना है। मंत्रालय के अनुसार, पीएमजेडीवाई के 78 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं, जबकि करीब 56 प्रतिशत खाते महिलाओं के नाम हैं। वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि 19 अगस्त, 2026 तक प्रति खाता औसत जमा राशि 5,356 रुपये थी। पिछले 12 वर्षों में प्रति खाता औसत जमा राशि 3.4 गुना बढ़ी है। मंत्रालय ने कहा कि औसत जमा राशि में वृद्धि खातों के बढ़ते इस्तेमाल और खाताधारकों में बचत की आदत विकसित होने का एक और संकेत है। योजना की वर्षगांठ पर वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि पीएमजेडीवाई की सफलता को केवल खोले गए खातों की संख्या के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि देश के बैंकिंग और वित्तीय परिदृश्य में आए बदलाव के संदर्भ में भी इसका आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएमजेडीवाई ने लाखों लोगों, विशेषकर समाज के वंचित वर्गों को बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराकर उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद की है। चौधरी ने कहा, ''खाते के स्वामित्व ने आम आदमी के लिए बीमा और पेंशन कवरेज हासिल करना संभव बनाया है। प्रत्येक राज्य और जिले में लगातार चलाए गए 'संतृप्ति' अभियान के माध्यम से हम बैंक खातों की लगभग सार्वभौमिक पहुंच की दिशा में आगे बढ़े हैं और जरूरतमंद लोगों तक बीमा तथा पेंशन योजनाओं की पहुंच लगातार बढ़ाई गई है।'' उन्होंने पीएमजेडीवाई को आम लोगों तक पहुंचाने और इसकी सफलता में योगदान देने के लिए देशभर में तैनात बैंकरों तथा बैंकिंग प्रतिनिधियों के प्रयासों की भी सराहना की। मंत्रालय ने कहा कि पीएमजेडीवाई को केंद्र में रखकर बनाई गई जन-धन, आधार और मोबाइल (जेएएम) त्रिमूर्ति वित्तीय सहायता के प्रत्यक्ष अंतरण के लिए एक ऐसा तंत्र साबित हुई है, जिसमें धन के दुरुपयोग की गुंजाइश बेहद कम है। मंत्रालय के अनुसार, जेएएम के जरिये सरकार ने वंचित वर्गों के बैंक खातों में कल्याणकारी योजनाओं के लाभ सीधे अंतरित किए हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका और भुगतान में होने वाली देरी को खत्म करने में मदद मिली है। पीएमजेडीवाई के तहत पात्र खाताधारकों को बिना न्यूनतम शेष राशि की अनिवार्यता और रखरखाव शुल्क के मूल बैंक खाता उपलब्ध कराया जाता है। इन खातों के साथ मुफ्त रुपे डेबिट कार्ड भी दिए जाते हैं, जिन पर दो लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कवर मिलता है। मंत्रालय ने कहा कि पीएमजेडीवाई खाताधारकों को 41.29 करोड़ रुपे कार्ड जारी किए जा चुके हैं और समय के साथ इन कार्ड की संख्या तथा उनका इस्तेमाल बढ़ा है। खाताधारक 10,000 रुपये तक की 'ओवरड्रॉफ्ट' सुविधा के भी पात्र हैं, जिससे आपात स्थिति में उन्हें वित्तीय सहायता मिलती है। मंत्रालय ने कहा कि खातों में दिखाई देने वाले बचत के रुझान के आधार पर खाताधारक अब ऋण, जिसमें मुद्रा ऋण भी शामिल है, हासिल करने के पात्र हैं। इससे लोगों को अपनी आय बढ़ाने और वित्तीय मजबूती हासिल करने में मदद मिल रही है। मंत्रालय के अनुसार, पीएमजेडीवाई खातों ने लाखों लोगों, विशेषकर असंगठित क्षेत्र के कामगारों तक बीमा और पेंशन की पहुंच बढ़ाने में भी मदद की है। -
कानपुर (उप्र) .कानपुर में बृहस्पतिवार को एक विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से उस पर सवार एक प्रशिक्षु पायलट समेत दो लोगों की मौत हो गयी। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने 'पीटीआई—भाषा' को बताया कि गंगा के किनारे नाथपुरवा गांव के पास इटली में बने 'टेक्नम' प्रशिक्षण विमान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से उस पर सवार गुजरात के निवासी प्रशिक्षक सचिन भाटिया और कर्नाटक के प्रशिक्षु पायलट अभिषेक पुजारी की मौत हो गय। लाल ने बताया कि 'गर्ग एविएशन' द्वारा संचालित इस विमान ने पूर्वाह्न करीब 11 बजकर 30 मिनट पर उड़ान भरी थी और लगभग 20 मिनट के बाद वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उन्होंने बताया कि भाटिया को करीब तीन हजार घंटे उड़ान भरने का अनुभव था।
लाल ने बताया कि इस घटना के बाद पुलिस और दमकल विभाग के कर्मचारी तुरंत मौके पर पहुंचे और इलाके की घेराबंदी कर जांच के लिए सुबूत सुरक्षित रखने के मकसद से मलबे को कब्जे में ले लिया। पुलिस आयुक्त ने बताया कि विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारणों का तुरंत पता नहीं चल सका है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि नागर उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) दुर्घटना का शिकार हुए विमान की उड़ने की क्षमता, रखरखाव के रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच करेगा। दुर्घटनास्थल के एक कथित वायरल वीडियो में विमान का मलबा आसपास बिखरा नजर आ रहा है और मलबे के बाहर एक सीट भी देखी गयी। सूत्रों के मुताबिक, यह विमान वर्ष 2023 से 'गर्ग एविएशन' के पास था और कंपनी का दावा है कि उसका सही तरीके से रखरखाव किया गया था। -
अमरेली (गुजरात) . केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि 2001 में नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से गुजरात में जल प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया तथा पिछले 25 वर्षों में राज्य में कभी भी सूखे जैसे हालात नहीं बने। शाह गुजरात के अमरेली जिले के दुधला गांव में डायमंड कारोबारी और पद्मश्री से सम्मानित सावजीभाई ढोलकिया के ट्रस्ट द्वारा विकसित 21 एकड़ की झील का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे। सन 1985, 1986 और 1987 के भीषण सूखे को याद करते हुए केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री ने आरोप लगाया कि उस समय की कांग्रेस सरकार के दौरान भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर फैला हुआ था, जिसमें सूखे के समय सरकारी राफलेश्वर मवेशी शिविर में हुआ भ्रष्टाचार भी शामिल था। शाह ने कहा, ''अगर हम बारिश की हर एक बूंद को बचाने और उसे जमीन में अवशोषित कर लिये जाने का तंत्र बना लें, तो हमारे देश और राज्य पर कभी भी सूखे का खतरा नहीं मंडराएगा। उस सूखे के दौरान कांग्रेस सरकार सत्ता में थी और राफलेश्वर घोटाले जैसे बड़े घोटाले हुए थे।
शाह ने कहा, ''तब हम छोटे थे। लोग सूखा राहत कार्यों में लगे थे, वे गड्ढे खोदते और उन्हें वापस भरते थे ताकि रोजाना मजदूरी कमा सकें। हमने सूखे से परेशान लोगों को 250 ग्राम सुखड़ी (एक मिठाई) और घरों से इकट्ठा की गई पुरानी चप्पलें बांटीं।'' उन्होंने राजकोट में एक बस अड्डे के पास लगे सार्वजनिक नल को जमीन में बने एक गड्ढे में नीचे किए जाने की घटना को याद किया, क्योंकि पानी का दबाव इतना कम था कि वह सतह तक भी नहीं पहुंच पा रहा था। शाह ने कहा, ''2001 में नरेन्द्रभाई के मुख्यमंत्री बनने से पहले ऐसी स्थिति थी।'' उन्होंने दावा किया कि मोदी की नीतियों ने सौराष्ट्र और उत्तरी गुजरात को सूखा-ग्रस्त इलाकों से पानी की बेहतर उपलब्धता वाले क्षेत्रों में बदल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में मोदी सरकार ने 2003 में एक ही साल में 1.5 लाख 'चेक डैम' बनाए और बाद में नर्मदा नहर नेटवर्क, सौनी योजना एवं सुजलाम-सुफलाम योजना जैसी परियोजनाओं के जरिए जल संरक्षण के प्रयासों को बढ़ाया। शाह ने कहा कि नर्मदा परियोजना की आधारशिला 1964 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी, लेकिन इसके गेट मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद खोले गए। केंद्रीय गृहमंत्री के अनुसार, मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सरकार ने 'जल शक्ति मंत्रालय' बनाकर जल प्रबंधन को संस्थागत महत्व दिया। उन्होंने कहा कि नर्मदा का पानी सौराष्ट्र, कच्छ और खावड़ा तक पहुंच चुका है, जबकि अतिरिक्त पानी को 'सौनी योजना' के तहत जलाशयों और नदियों में भेजा गया है। शाह ने कहा, ''जब मोदी मुख्यमंत्री बने , तब से 2026 तक गुजरात में एक बार भी सूखा नहीं पड़ा है। इस बार सब कह रहे थे कि अल-नीनो की वजह से सूखा पड़ सकता है। हालांकि कुछ गांवों में बारिश कम हुई, लेकिन मवेशियों को लेकर दक्षिण गुजरात की ओर पलायन करने की गंभीर स्थिति कभी नहीं बनी।'' उन्होंने कहा, ''आज गुजरात सचमुच सूखा-मुक्त है। झीलों की संख्या बढ़ी है, चेक डैम की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, कृषि क्षेत्र ने तरक्की की है, हरियाली बढ़ी है और इंद्र देवता की कृपा रही है। 2001 से 2026 तक, यानी 25 सालों में कहीं भी सूखा न पड़ना मोदी की योजना का ही सीधा परिणाम है। -
नयी दिल्ली. निर्वाचन आयोग ने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 'जेन अल्फा' और 'जेनरेशन जी' तक पहुंच बनाने के लिए नए सिरे से प्रयास शुरू किया है ताकि उन्हें जागरूक मतदाता बनाने के साथ भविष्य में लोगों को चुनावी प्रक्रिया के बारे में शिक्षित करने वाले अभियानों का नेतृत्व करने के लिए सक्षम बनाया जा सके। वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मे लोगों को 'जेन जी' और वर्ष 2013-2025 के बीच जन्मे बच्चों को 'जेन अल्फा' कहा जाता है। आयोग अपने नए अभियान के तहत देश की 4,123 विधानसभा सीटों में कक्षा 9 से 12 तक के स्कूली विद्यार्थियों तथा कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को लक्षित करेगा। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के अनुसार, 18 से 26 वर्ष आयु वर्ग में कुल 14.78 करोड़ लोग हैं, जिनमें 7.98 करोड़ पुरुष, 6.79 करोड़ महिलाएं और 9,000 तृतीय लिंग के लोग हैं। अधिकारियों ने बताया कि आयोग की योजना प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 10 के हिसाब से कुल 50,000 निर्वाचन साक्षरता क्लब (ईएलसी) स्थापित करने की है। इसके लिए 15 लाख स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों से संपर्क किया जाएगा। इसके अलावा 70,000 कॉलेजों और 1,400 विश्वविद्यालयों तक पहुंच बनाई जाएगी। व्यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं चुनावी भागीदारी (एसवीईईपी) कार्यक्रम के तहत 2018 में ईएलसी की स्थापना की गई थी। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक मूल्यों, चुनावी प्रक्रिया तथा निर्वाचन आयोग की भूमिका और कार्यप्रणाली से परिचित कराना है। हालांकि, तेजी से बदलते संचार तंत्र, डिजिटल मंचों पर बढ़ती निर्भरता तथा युवा मतदाताओं और जमीनी स्तर के हितधारकों के साथ निरंतर, व्यवस्थित और प्रत्यक्ष संवाद की जरूरत को देखते हुए ईएलसी 2.0 में इन क्लबों को डिजिटल रूप से सक्षम और लगातार सक्रिय रहने वाले मंच के रूप में नए सिरे से तैयार किया गया है।
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हैदराबाद. तेलंगाना के सूर्यापेट जिले में बुधवार सुबह एक निजी बस के ट्रक से टकराने से बस में सवार पांच महिलाओं समेत छह लोगों की मौत हो गई और कम से कम 12 अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, हादसा सुबह करीब सवा पांच बजे हैदराबाद-विजयवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोडाड मंडल के पास हुआ। प्रारंभिक जांच के अनुसार, निजी बस में 42 यात्री सवार थे और यह बस हैदराबाद से आंध्र प्रदेश के एलुरु जा रही थी। इसी दौरान बस ने आगे चल रहे ट्रक को टक्कर मार दी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ''हादसे में पांच महिलाओं समेत छह लोगों की मौत हो गई। कम से कम 12 अन्य घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।'' सूर्यापेट जिले के पुलिस अधीक्षक के. नरसिम्हा ने पत्रकारों को बताया कि ट्रक में औद्योगिक कार्यों में इस्तेमाल होने वाले भारी-भरकम पिलर लदे हुए थे। उन्होंने बताया कि जैसे ही बस ने ट्रक को टक्कर मारी तो पिलर को सुरक्षित रखने के लिए बांधी गई चेन टूट गई और पिलर बस के दाहिने हिस्से से जा टकराए। इसके कारण बस के आगे की सीटों पर बैठे यात्रियों की जान चली गई। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि घायलों में से दो की हालत गंभीर है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा के एक अस्पताल में ले जाया गया है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने हादसे में लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना जताई और मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने बताया कि हादसे की वजह बस की तेज रफ्तार होने की आशंका है। पुलिस ने बताया कि बस की टक्कर से पहले ही ट्रक के सड़क के डिवाइडर से टकराने की आशंका है। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है। -
नई दिल्ली। नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद केंद्र सरकार स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आपदा के संभावित प्रभाव को देखते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से बात की है। केंद्र ने सीमावर्ती इलाकों में स्थानीय प्रशासन और राहत-बचाव दलों के साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) को भी हाई अलर्ट पर रखा है। सरकार का कहना है कि नेपाल की ओर जलस्तर में कमी आ रही है और फिलहाल घबराने की कोई स्थिति नहीं है।
अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट कर नेपाल में आई बाढ़ की विभीषिका पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने इस आपदा में अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति उनकी संवेदनाएं हैं। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत सरकार नेपाल के साथ खड़ी है। गृह मंत्री ने नेपाल में आई आपदा के संभावित प्रभाव को लेकर बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से बात की। उन्होंने कहा कि जिन सीमावर्ती क्षेत्रों पर बाढ़ का असर पड़ सकता है, वहां स्थानीय प्रशासन और राहत-बचाव टीमों के साथ NDRF को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।केंद्रीय जल आयोग (CWC) की सलाह और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा के पास अचानक आई बाढ़ या ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के कारण नेपाल में भारतीय सीमा से करीब 160 किलोमीटर दूर फुरके खोला में त्रिशूली नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। इसका असर भारत में गंडक नदी के निचले इलाकों पर पड़ने की आशंका को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है।बिहार और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों ने भारत-नेपाल सीमा के पास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उन्हें जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के कदम उठाए हैं। दोनों राज्यों को सतर्क रहने और स्थिति पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है।गृह मंत्रालय के अधिकारी विदेश मंत्रालय (MEA), जल शक्ति मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं। CWC के अनुसार, नेपाल की ओर जलाशयों में जलस्तर कम हो रहा है और स्थिति नियंत्रण में है। सरकार ने कहा है कि फिलहाल घबराहट जैसी कोई स्थिति नहीं है।नेपाल के प्रभावित इलाकों में भारतीय पर्यटकों के लापता होने की खबरें भी सामने आई हैं। विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने बाढ़ प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। मदद के लिए दूतावास के हेल्पलाइन नंबर +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क किया जा सकता है। -
नई दिल्ली। नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद भारत ने राहत और बचाव अभियान में मदद के लिए बुधवार को 10 टन मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) सामग्री और जरूरी दवाएं भेजीं। प्राकृतिक आपदाओं में फर्स्ट रिस्पॉन्डर की अपनी भूमिका को आगे बढ़ाते हुए भारत ने राहत सामग्री के साथ मेडिकल सप्लाई भी भेजी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि इस त्रासदी में जान गंवाने वालों के परिजनों के प्रति भारत की संवेदनाएं हैं और इस कठिन समय में भारत नेपाल और उसके लोगों के साथ खड़ा है।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारतीय वायुसेना का सी-130जे विमान राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए रवाना हुआ। इसमें अस्थायी आश्रय सामग्री, कंबल, स्वच्छता किट, सोलर लैंप और जरूरी दवाएं शामिल हैं। इसका उद्देश्य बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल राहत उपलब्ध कराना है।भारतीय वायुसेना ने एक्स पर बताया कि नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद तत्काल एक सी-130जे विमान भेजा गया है, जिसमें 10 टन जरूरी राहत सामग्री और मेडिकल सप्लाई है। वायुसेना ने कहा कि सी-17 और सी-130 विमानों के जरिए आगे भी राहत सामग्री पहुंचाई जाएगी। इसके अलावा बचाव और लोगों को सुरक्षित निकालने के अभियानों के लिए हेलिकॉप्टर भी तैनात किए गए हैं।इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बात कर बाढ़ में हुई जनहानि पर शोक व्यक्त किया था। मोदी ने नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने का भरोसा दिया और कहा कि भारत के लोग इस कठिन घड़ी में नेपाल के अपने भाई-बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत राहत और बचाव कार्यों के लिए हर संभव सहायता देने को तैयार है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों की टीमें आपदा के बीच राहत और बचाव प्रयासों में समन्वय के साथ काम कर रही हैं।नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास ने कहा कि त्रासदी का दायरा बहुत बड़ा है और कई विदेशी नागरिकों सहित बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। दूतावास के मुताबिक, फिलहाल प्राथमिकता खोज एवं बचाव अभियान चलाकर लोगों की जान बचाने और प्रभावित लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने की है।बुधवार को नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद कई लोगों के मारे जाने की आशंका है। सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान लगातार जारी है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बात की और नेपाल में बाढ़ के कारण हुई जानमाल की हानि पर संवेदना व्यक्त की। मोदी ने कहा कि इस कठिन समय में भारत के लोग नेपाल में अपने भाई-बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि भारत नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि भारतीय दल बचाव और राहत प्रयासों में नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।पीएम नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बात की और नेपाल में बाढ़ के कारण हुई जानमाल की हानि पर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में भारत के लोग नेपाल में अपने भाई-बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के दल बचाव और राहत प्रयासों में निकटता से समन्वय कर रहे हैं। -
नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि निजी कंपनियों की कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और आयकर रिटर्न (आईटीआर) जैसे संवेदनशील डेटा तक पहुंच ''चिंताजनक'' है और केंद्र को ऐसे सुरक्षा उपाय बनाने पर विचार करना चाहिए ताकि ऐसी जानकारी का गलत दुरुपयोग न हो। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सोमवार को एक व्यावसायिक प्रौद्योगिकी तंत्र के पनपने पर चिंता जताई, जो कथित तौर पर भविष्य निधि और आयकर रिकॉर्ड में मौजूद संवेदनशील निजी जानकारी तक पहुंच बनाता है, उसे प्राप्त करता है और सत्यापित करता है। प्रधान न्यायाधीश ने इस मुद्दे पर पीयूष शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए सुझाव दिया कि केंद्र सरकार क्षेत्र विशेषज्ञों की मदद से इस मुद्दे से निपटने के लिए एक असरदार तरीका बनाए। जनहित याचिका में इस बात पर चिंता जताई गई थी कि निजी कंपनियां वैधानिक नियमों के तहत सरकारी अधिकारियों को दिए गए निजी आंकड़ों तक पहुंच बनाती हैं और उसका व्यावसायिक इस्तेमाल करती हैं। पीठ ने कहा कि यह मुद्दा असल में नीति के दायरे में आता है, लेकिन सरकारी अधिकारियों को कानून के तहत दी गई निजी जानकारी और उसके बाद उसके व्यावसायिक इस्तेमाल की संभावना वाले आंकड़ों तक निजी कंपनियों की पहुंच को ''चिंताजनक'' बताया। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता ने कहा कि उनकी अपनी जांच से पता चला है कि सिर्फ 'परमानेंट अकाउंट नंबर' (पैन) और 'यूनिवर्सल अकाउंट नंबर' (यूएएन) की जानकारी किसी निजी सत्यापन प्रणाली को देने से ही उनके रोजगार से संबंधित पूरी जानकारी उन पहचान सत्यापित करने वालों को मिल गई। जनहित याचिकाकर्ता के अनुसार, इस प्रक्रिया में न तो ओटीपी जनरेट हुआ, न ही साफ़ तौर पर सहमति ली गई और न ही कोई साफ़ तौर पर दिखने वाला अधिकृत पहचान सत्यापन हुआ। हालांकि, याचिकाकर्ता ने सरकारी एजेंसियों द्वारा डेटा लीक होने का कोई आरोप नहीं लगाया।
इसके बजाय, उन्होंने अलग-अलग कानूनों के तहत सरकारी अधिकारियों को दी गई निजी जानकारी की असुरक्षित स्थिति पर जोर दिया और दावा किया कि ऐसे डेटा तक बाद में निजी कंपनियां बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के पहुंच सकती हैं। याचिकाकर्ता ने कहा, ''ईपीएफओ और आयकर आंकड़ों को नियंत्रित करने के कानूनी ढांचे के बावजूद, एक उभरता हुआ और चिंताजनक पैटर्न दिख रहा है।'' इन दलीलों का संज्ञान लेते हुए पीठ ने सरकार से कहा कि वह ''निजी कंपनियों द्वारा व्यक्तिगत डेटा के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए। -
कानपुर (उप्र) .भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के पूर्व छात्र एवं इंडिगो के सह-संस्थापक राकेश गंगवाल ने संस्थान में 'गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी' के विकास के लिए 300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त योगदान देने की प्रतिबद्धता जताई है।
आईआईटी कानपुर की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, यह योगदान गंगवाल द्वारा 2022 में दिए गए 100 करोड़ रुपये के दान के बाद किया जा रहा है। उस योगदान से संस्थान में चिकित्सा विद्यालय स्थापित करने की योजना को गति मिली थी और नए योगदान के साथ स्कूल के लिए गंगवाल की कुल वित्तीय सहायता 400 करोड़ रुपये हो जाएगी। इस पहल के तहत गंगवाल अन्य सहयोगियों, पूर्व छात्रों और शुभचिंतकों से मिलने वाले योगदान के बराबर 300 करोड़ रुपये तक की राशि भी देंगे। इस राशि का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, चिकित्सकीय नवाचार और चिकित्सा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आईआईटी कानपुर के प्रयासों को व्यापक समर्थन देना है। स्कूल की विकास योजना में आईआईटी परिसर में 500 बिस्तर वाला सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल और प्रस्तावित 200 बिस्तर वाला कैंसर उपचार एवं अनुसंधान केंद्र भी शामिल है। इन सुविधाओं से चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सकीय अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी। साथ ही, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों को मिलकर काम करने का अवसर मिलेगा। आईआईटी कानपुर के निदेशक मणींद्र अग्रवाल ने कहा, "इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी और चिकित्सा के क्षेत्र में अंतर्विषयक अनुसंधान की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए आईआईटी कानपुर ने चिकित्सा विद्यालय स्थापित करने की पहल की थी। वर्ष 2022 में गंगवाल के 100 करोड़ रुपये के योगदान से इस योजना को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिली। उनका 300 करोड़ रुपये का यह अतिरिक्त योगदान इस सपने को जल्द साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।" गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के नवनियुक्त डीन अनिल के लालवानी ने कहा, "गंगवाल का यह ऐतिहासिक योगदान इस बात का प्रमाण है कि एक व्यक्ति भी बदलाव की बड़ी शुरुआत कर सकता है। चिकित्सा, प्रौद्योगिकी और नवाचार को समाज की सेवा के लिए एक साथ लाने की इस स्कूल की परिकल्पना का दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।" राकेश गंगवाल ने कहा, "इस अभिनव और अपनी तरह के पहले चिकित्सा संस्थान का हिस्सा बनना मेरे लिए सम्मान और गर्व की बात है। -
नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीक भारतीय रक्षा उद्योग को हस्तांतरित करने को मंजूरी दे दी है, ताकि देश में ही इनका उत्पादन किया जा सके। रक्षा मंत्रालय ने यह घोषणा करते हुए कहा कि यह कदम रक्षा क्षेत्र में घरेलू उद्योगों की अधिक भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में ''एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।'' मंत्रालय ने कहा, ''यह प्रावधान मिसाइल प्रणालियों के विकास से औद्योगिक उत्पादन तक सफलतापूर्वक पहुंचने में मदद करेगा। यह उन्नत रक्षा प्रणालियों के विकास और निर्माण में भारतीय उद्योग की क्षमताओं का लाभ उठाने के लिए डीआरडीओ के लगातार किए जा रहे प्रयासों को दर्शाता है।'' मंत्रालय ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य देश में विनिर्माण क्षमता बढ़ाना, रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करना और भारतीय एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों) तथा अन्य तकनीकी साझेदारों के लिए रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी के अवसर पैदा करना है।
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- मुख्यमंत्री ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए
अमरावती. महाराष्ट्र के अमरावती शहर में सोमवार तड़के एक सरकारी अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में आग लगने से तीन शिशुओं की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
अमरावती के पुलिस आयुक्त राकेश ओला ने बताया कि जिला महिला अस्पताल में हुई इस घटना के बाद 36 अन्य नवजात शिशुओं को सुरक्षित बचा लिया गया। उन्होंने कहा कि एनआईसीयू के उस हिस्से में रखे एक वेंटिलेटर में तड़के करीब सवा तीन बजे आग लग गई जिसमें समय से पहले जन्मे और गंभीर रूप से बीमार शिशु थे। घटना के बाद अस्पताल में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए और एनआईसीयू में भर्ती शिशुओं के अभिभावकों ने इस घटना के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। इस घटना में बाल-बाल बचे बच्चों में से एक के पिता ने बताया कि आग लगने के बाद अस्पताल के सुरक्षाकर्मी एवं नर्स तुरंत मौके पर पहुंचे और शिशुओं को बचाने में मदद की। महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री एवं अमरावती के पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि उन्होंने घटना की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने घायलों को सभी आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराए जाने का आश्वासन भी दिया। विपक्षी दलों के नेताओं ने इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने और राज्य के सभी अस्पतालों का अग्नि एवं विद्युत सुरक्षा ऑडिट कराए जाने की मांग की। ओला ने बताया कि एनआईसीयू के तीन हिस्से हैं। इनमें एक अस्पताल में जन्मे शिशुओं, दूसरा बाहर से आए शिशुओं और तीसरा अस्पताल से छुट्टी दिए जाने के लिए तैयार बच्चों की देखभाल के लिए है। उन्होंने बताया कि इन तीनों हिस्सों में कुल 39 शिशु भर्ती थे।उन्होंने बताया कि बाहर से लाए गए शिशुओं वाले हिस्से में रखे एक वेंटिलेटर में आग लग गई।
ओला ने बताया कि वहां मौजूद तीन शिशुओं की आग लगने के कारण मौत हो गई जबकि छह अन्य को बचा लिया गया। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि छह शिशुओं को एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
बावनकुले ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि ड्यूटी पर मौजूद अस्पताल के कर्मचारी आग लगते ही मौके पर पहुंचे और उन्होंने अन्य बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। मृत शिशुओं के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं, जबकि बचाए गए शिशुओं को अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया है। उन्होंने बताया कि जिला महिला अस्पताल की नयी इमारत में स्थित विशेष नवजात देखभाल इकाई में तड़के करीब चार बजे आग लगी। उन्होंने बताया कि इस इकाई में समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले और गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं का इलाज किया जा रहा था। बावनकुले ने बताया कि कुछ शिशुओं को आगे के इलाज के लिए 'डिवीजनल रेफरल सर्विसेज' अस्पताल में स्थानांतरित किया गया है। उन्होंने बताया कि वहां चार बच्चों का इलाज किया जा रहा है और इनमें से एक की हालत गंभीर बताई गई है। ओला ने बताया कि अग्निशमन विभाग के कर्मियों और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की विद्युत शाखा को इस घटना के बारे में सूचना दे दी गई है और वे आग लगने के कारणों का पता लगाएंगे। बावनकुले ने शिशुओं की मौत पर गहरा दुख जताते हुए उनके परिजनों को सरकार की ओर से हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, ''अमरावती में आज हुई घटना से मैं बेहद दुखी हूं। मेरा मन बहुत व्यथित है।''
मंत्री ने कहा, ''सरकार मृत बच्चों के परिजनों के साथ खड़ी है और सरकार एवं प्रशासन हरसंभव मदद मुहैया करा रहे हैं।'' बावनकुले ने कहा कि उन्होंने घटना के बारे में संबंधित अधिकारियों से बातचीत की है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के वरिष्ठ नेता एवं महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि राज्य सरकार को इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने राज्य के सभी अस्पतालों का तत्काल अग्नि एवं विद्युत सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की।
देशमुख ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''आज इन बच्चों के माता-पिता पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और दुख की इस घड़ी में हम सभी उनके साथ खड़े हैं।'' -
मांड्या (कर्नाटक). कर्नाटक के मांड्या में रविवार को एक भिखारिन की मौत के बाद उसकी झोपड़ी में नोटों की गड्डियां और सिक्कों से भरी बोरियां मिलीं जिन्हें देखकर पड़ोसी हैरान रह गए। करीब 70 वर्षीय नूरुन्निसा मांड्या के गुट्टालू लेआउट इलाके में एक छोटी सी झोपड़ी में अकेली रहती थी। वह शहर के लोगों से मिलने वाली भीख से अपना जीवनयापन करती थी। रविवार को उसकी मौत हो गई। इसके बाद बेंगलुरु में रहने वाले उसके दो भाई अंतिम संस्कार करने के लिए यहां पहुंचे। रस्म पूरी होने के बाद, उसके भाई पड़ोसियों के साथ उसके घर गए और उसका सामान देखा। उन्हें प्लास्टिक की बोरियों में 10 और 20 रुपये के नोटों की गड्डियां और बोरियों में सिक्के मिले। बाद में मिली हुई रकम को दोनों भाइयों के बीच बराबर बांट दिया गया।
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जयपुर। केरल की केजिया लिज मेजो को यहां आयोजित भव्य समारोह में मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 चुना गया है। अब वह नवंबर में प्यूर्टो रिको में होने वाली 75वीं मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। इस प्रतियोगिता का खिताबी मुकाबला 23 अगस्त को हुआ, जिसमें देशभर से प्रतिभाओं ने हिस्सा लिया।
विधि पाठ्यक्रम की 19 वर्षीय छात्रा और मॉडल मेजो ने मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 का प्रतिष्ठित खिताब जीता। तमिलनाडु की वैष्णवी गणेश को उपविजेता चुना गया जबकि गुजरात की अनुश्री सातवलेकर तीसरे स्थान पर रहीं। इस प्रतियोगिता में देशभर से चुनी गईं प्रतिभागियों ने अलग-अलग चरण में अपनी प्रतिभा, व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, संवाद कौशल और भारतीय संस्कृति की समझ का प्रदर्शन किया। मेजो ने कहा कि यह खिताब ''एक बड़ी जिम्मेदारी'' है।
उन्होंने कहा, ''यह खिताब मेरे लिए सिर्फ एक उपलब्धि नहीं है, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए बहुत गर्व और सम्मान की बात है। इस अवसर के जरिए मैं दुनिया के सामने भारत की विविधता, संस्कृति, प्रतिभा और नयी पीढ़ी की ताकत को दिखाना चाहती हूं।'' मिस यूनिवर्स इंडिया के प्रमुख निखिल आनंद ने कहा, ''मिस यूनिवर्स इंडिया का उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाली प्रतिभाशाली युवतियों को एक राष्ट्रीय मंच देना है, जहां वे दुनिया के सामने अपनी प्रतिभा, व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता दिखा सकें। इस वर्ष के आयोजन ने और भी बड़े व भव्य समारोह के जरिए इस उद्देश्य को हासिल करने में योगदान दिया। हम सहयोग और गर्मजोशी से किए गए स्वागत के लिए स्थानीय प्रशासन और जयपुर के लोगों का दिल से आभार व्यक्त करते हैं।'' -
रांची. छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले 'जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच' ने सोमवार को झारखंड के रामगढ़ जिले से भर्ती परीक्षाओं में सुधार के लिए अपना राज्यव्यापी अभियान शुरू किया, इस दौरान स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया। महतो ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने के बाद, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा के लुकैयाटांड से इस अभियान की शुरुआत की। नेमरा के निवासियों ने मंच द्वारा हेमंत सोरेन का पुतला जलाने की कथित योजना के विरोध में अभियान स्थल से लगभग तीन किलोमीटर दूर सड़क जाम कर दिया। महतो ने मंच के सदस्यों के साथ मिलकर शिबू सोरेन की प्रतिमा के पैर धोए और पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाज के तहत 'अक्षत' (पवित्र चावल) और मालाएं चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने 'शिबू सोरेन अमर रहें' के नारे भी लगाए।
महतो ने पत्रकारों से कहा, "दिशोम गुरु शिबू सोरेन का आशीर्वाद लेकर, हम आज से 'जेपीएससी-जेएसएससी भ्रष्टाचार-मुक्त भर्ती' अभियान शुरू कर रहे हैं। इसका मकसद निष्पक्ष, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त भर्ती व्यवस्था की मांग करना है। यह अभियान राज्य के सभी 24 जिलों में चलाया जाएगा, जिससे हमारी आवाज और मज़बूत होगी।" उन्होंने कहा कि यह अभियान भर्ती में होने वाले घोटालों की जांच, भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कार्रवाई, प्रश्नपत्र लीक करने वाले माफिया पर नकेल कसने और युवाओं को न्याय दिलाने की मांग करेगा। उन्होंने कहा कि अभियान शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक होगा।
महतो ने दावा किया कि राज्य भर के छात्र इस अभियान को लेकर उत्साहित और आशान्वित हैं; उनका मानना है कि इससे उन्हें न्याय मिलेगा और भर्ती परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता आएगी। प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर महतो ने कहा, "प्राथमिकी हमारी आवाज को दबा नहीं सकतीं और न ही हमारे आंदोलन को रोक सकती हैं। यह तब तक जारी रहेगा जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।" राज्य सरकार को उच्चतम न्यायालय के नोटिस के बारे में उन्होंने कहा, "यह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और सरकार उसी के अनुसार जवाब देगी।" इससे पहले, पारंपरिक हथियारों और लाठियों से लैस स्थानीय लोगों ने नेमरा गांव की ओर जाने वाली सड़क पर यातायात बाधित कर दिया। ग्रामीण बिरजू सोरेन ने कहा, "हमने महतो को नेमरा में प्रवेश करने से रोकने के लिए सड़क जाम की है। बिरजू सोरेन ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली थी कि महतो गांव में मुख्यमंत्री का पुतला जलाएंगे।
जब उन्हें बताया गया कि महतो भर्ती परीक्षाओं में सुधार की मांग को लेकर राज्यव्यापी अभियान शुरू करने आ रहे हैं, तो बिरजू सोरेन ने कहा, "महतो गांव के बाहर स्थित शिबू सोरेन की प्रतिमा के पास से अपना अभियान शुरू कर सकते हैं, लेकिन हम उन्हें गांव में प्रवेश नहीं करने देंगे।" महतो 25 जुलाई को रांची में शुरू हुए भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 26 दिन चले छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार ने 22 परीक्षाएं रद्द कर दी थीं और 2014 से राज्य लोक सेवा आयोग तथा एक 'आउटसोर्स एजेंसी' द्वारा आयोजित 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश दिए थे। हालांकि, उच्च न्यायालय ने 21 अगस्त को बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के जरिए भर्ती किए गए लोगों की नियुक्तियां रद्द करने वाली अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी थी। अदालत ने 20 अगस्त को 11वीं और 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षाओं को रद्द करने वाली अधिसूचनाओं तथा खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर भी रोक लगा दी थी। -
विशाखापत्तनम. केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने रविवार को यहां 'ब्रिक्स फ्रेंडशिप संडे ऑन साइकिल' कार्यक्रम की मेजबानी की। यह कार्यक्रम ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साथ-साथ सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। ब्रिक्स दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है। इसका नाम पांच शुरुआती सदस्य देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका )के अंग्रेजी नामों के पहले अक्षरों से बना है। मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 'फिट इंडिया' अभियान लगातार गति पकड़ रहा है और देशभर में युवा 18,000 से अधिक स्थानों पर 'संडे ऑन साइकिल' में भाग लेकर तंदुरुस्ती का संदेश दे रहे हैं। मांडविया ने संवाददाताओं से कहा, "साइकिल चलाना व्यायाम के सबसे अच्छे तरीकों में से एक है। साइकिल चलाना प्रदूषण और यातायात की समस्या का समाधान है। इससे ईंधन की भी बचत होती है, जिससे हमारे पैसे भी बचते हैं।" उन्होंने लोगों से विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए स्वस्थ और तंदुरुस्त (फिट) रहने का आग्रह किया तथा कहा कि व्यक्तिगत तंदुरुस्ती एक समृद्ध राष्ट्र के लिए आवश्यक स्वस्थ आधार तैयार करती है। मांडविया ने लोगों से प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए हर रविवार साइकिल चलाने और खुद को तंदुरुस्त रखने का आग्रह किया।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में कार्य कर रहीं निजी कंपनियों से अपने ईर्द-गिर्द अनुसंधान के लिए माहौल बनाने की अपील की ताकि दुनिया भर के लोग करियर बनाने के उद्देश्य से भारत आने के लिए प्रेरित हों। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने वाली 20 स्टार्टअप के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) और संस्थापकों के साथ बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के समक्ष भारत की लागत-प्रतिस्पर्धात्मकता को भी रेखांकित किया। प्रधानमंत्री और अंतरिक्ष स्टार्टअप के पदाधिकारियों एवं संस्थापकों के साथ संवाद की जानकारी रविवार को दी गई। इसके अनुसार मोदी ने रेखांकित किया कि देश के विशाल प्रतिभा आधार और जोखिम उठाने की अधिक क्षमता की वजह से भारत वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से मजबूत स्थिति बना पाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया अब भारतीय स्टार्टअप पर नजर रखे हुए हैं और वह जानना चाहती है कि इस क्षेत्र में कौन आगे है। उन्होंने कहा कि क्योंकि जब भी कोई बड़ी कामयाबी मिलती है, तो लोगों का ध्यान तुरंत उस ओर चला जाता है। एक सीईओ ने प्रधानमंत्री को बताया कि भारत में निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष उद्योग के द्वार खोले जाने के बाद से बहुत सकारात्मक रुझान देखने को मिले हैं और अमेरिका और यूरोप में रहने वाले कई भारतीय नागरिक अब देश वापस आकर काम करना चाहते हैं। इसके जवाब में मोदी ने कहा, ''हमें बहुत से लोगों से जुड़ने की जरूरत है। जो लोग विदेश गए थे, वे अब वापस आ रहे हैं। मेरा मानना है कि हमें ऐसा माहौल बनाना चाहिए जिससे दुनिया भर के लोगों को यह लगे कि अगर उन्हें अपना करियर बनाना है, तो उन्हें भारत जाना चाहिए।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया भर के ऐसे लोगों को यह महसूस होना चाहिए कि उन्हें भारत में किसी स्टार्टअप और भारत की किसी अंतरिक्ष एजेंसी से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा, ''मेरा पुख्ता विश्वास है कि आपकी वजह से हम चुंबक की तरह सभी मेधावियों को अपनी ओर आकर्षित कर सकते हैं, और यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी ताकत बन सकता है।'' प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष स्टार्टअप के उन सीईओ की तारीफ की जिन्होंने एक नए क्षेत्र में कदम रखने का साहस दिखाया। मोदी ने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने सरकार की बात पर भरोसा किया। उन्होंने कहा, ''मेरी हमेशा से यही राय रही है कि हम जो भी फैसला लें, उस पर अडिग रहें और बार-बार बदलाव करने से बचें। इससे खतरा लेने वाले लोगों को यह भरोसा रहता है कि अगर उनसे कोई गलती हो भी जाए और उससे कोई समस्या खड़ी हो, तो भी कोई उन्हें अकेला नहीं छोड़ेगा। हमारा उद्देश्य यही भरोसा कायम करना है।'' मोदी ने कहा कि लागत के मामले में भारत बहुत प्रतिस्पर्धी है और प्रतिभा को लेकर कोई सवाल ही नहीं है।
उन्होंने कहा,''हम लागत के मामले में बहुत प्रतिस्पर्धी हैं। प्रतिभा को लेकर कोई सवाल ही नहीं है, और हमारे लोगों में स्वाभाविक रूप से जोखिम उठाने की क्षमता अधिक होती है। इन्हीं वजहों से हम बहुत तेजी से अपनी जगह बना सकते हैं।'' कंपनियों के सीईओ ने कहा कि भारत की पहली अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी यूनिकॉर्न (यूनीकॉर्न का अभिप्राय एक अरब डॉलर से अधिक पूंजी आधार की कंपनी), स्काईरूट एयरोस्पेस ने सफलतापूर्वक भारत का पहला निजी रॉकेट कक्षा में भेजा और यह तो बस शुरुआत है। सीईओ ने कहा कि वे 2027 के मध्य तक हर महीने एक प्रक्षेपण का लक्ष्य रख काम कर रहे हैं।
उन्होंने निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोलने के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया और कहा कि अब तक हर महीने एक रॉकेट बनाने की क्षमता वाली फैक्ट्रियां बनाई गई हैं। सीईओ ने कहा कि यह तो बस शुरुआत है और सपना हर हफ्ते एक प्रक्षेपण करने का है, और आगे चलकर हर दिन कई प्रक्षेपण करने का है। मोदी ने जब सवाल किया कि क्या निवेशकों में भरोसा है, तो एक सीईओ ने कहा कि स्काईरूट के पहले प्रक्षेपण के बाद निवेशकों का भरोसा काफी बढ़ गया है। प्रधानमंत्री ने इसपर कहा, ''यह बहुत अच्छी बात है।'' उन्होंने साथ ही सवाल किया कि क्या यह रास्ता अंतरिक्ष स्टार्टअप के लिए फयदेमंद साबित हो रहा है? इस पर एक सीईओ ने कहा, ''यह बहुत फायदेमंद है।'' एक सीईओ ने कहा कि अगले 18 महीनों के लिए उनका दृष्टिकोण एक वैश्विकी जमीनी स्टेशन नेटवर्क बनाना है।
एक अन्य सीईओ ने कहा कि पहला प्रक्षेपण करने के बाद, कंपनी को गत महीने में आठ प्रक्षेपण ठेके मिले, जिनमें से अधिकतर अंतरराष्ट्रीय हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से शुक्रवार को जारी बयान के मुताबिक मोदी ने युवा अंतरिक्ष उद्यमियों को सरकार की ओर से पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया। पीएमओ के मुताबिक मोदी ने युवा अंतरिक्ष उद्यमियों से यह पता लगाने को कहा कि अंतिरक्ष प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल खेती, पशुपालन, डेरी, पर्यावरण और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने वाले दूसरे क्षेत्रों में कैसे किया जा सकता है। प्रधानमंत्री से संवाद के कार्यक्रम में स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस, पिक्सेल, ध्रुव स्पेस, गैलेक्सआई, पियरसाइट, बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस, दिगंतरा, सैटश्योर, सुहोरा टेक्नोलॉजीज, मनस्तु स्पेस, एस्ट्रोबेस, टेकमी2स्पेस, व्योमआईसी, कॉस्मोसर्व स्पेस, ऑर्बिटएड एयरोस्पेस, स्काईसर्व (हाइस्पेस), सेरेंडिपिटी स्पेस, वासर लैब्स और मिस्टईओ नामक स्टार्टअप के प्रतिनिधि शामिल थे। -
भुवनेश्वर. ओडिशा के पारादीप तट से करीब 230 समुद्री मील दूर बंगाल की खाड़ी में चालक दल के 24 सदस्यों को लेकर जा रहे पनामा के ध्वज वाले मालवाहक जहाज के शनिवार को डूबने के बाद भारतीय तटरक्षक बल और नौसेना की पूर्वी कमान ने लापता 22 सदस्यों की तलाश और बचाव अभियान तेज कर दिया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, 'एमवी ओशियन विनर' नामक जहाज पर 20 चीनी, तीन म्यांमा और एक बांग्लादेशी नागरिक सवार थे। दो सदस्यों को शनिवार को सुरक्षित बचा लिया गया था।
तटरक्षक बल के एक प्रवक्ता ने बताया कि समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (एमआरसीसी) ने आसपास मौजूद 'एमटी एएसोपोस' नामक एक वाणिज्यिक जहाज का मार्ग बदलकर उसे ''लापता जहाज या जीवनरक्षक नौकाओं की तलाश करने और सहायता पहुंचाने के लिए भेजा था और इस जहाज ने शनिवार रात करीब आठ बजे दो जीवनरक्षक नौकाओं से दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।'' तटरक्षक बल ने रविवार को 'एक्स' पर बताया कि बाकी सदस्यों की समुद्र में तलाश के लिए तीन जहाजों को तैनात किया गया है। नौसेना की पूर्वी कमान ने 'एक्स' पर कहा कि निगरानी गश्त पर निकले 'पी8आई' विमान को श्रीविजय पुरम में एमआरसीसी के समन्वय से खोज एवं बचाव अभियान के लिए तत्काल फिर से तैनात किया गया है। तटरक्षक बल के अनुसार, 'आईसीजी वरद' और 'आईसीजी अनमोल' को तलाश एवं बचाव अभियान में लगाया गया है। अभियान को और मजबूत करने के लिए श्रीविजय पुरम (पोर्ट ब्लेयर) से 'आईसीजी विजित' को भी इसमें शामिल किया गया है। अधिकारियों ने पहले बताया था कि 'एमवी ओशियन विनर' ओडिशा से लौह अयस्क लेकर जा रहा था। - नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के नवनियुक्त पदाधिकारियों से बातचीत की और कहा कि ऐसी बैठकें पार्टी को मजबूत बनाने के लिए नए विचारों तथा दृष्टिकोण पर केंद्रित होती हैं। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व वाली नयी टीम की घोषणा 17 अगस्त को की गई थी और टीम ने पहली बार पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के साथ बैठक की। बैठक में निवर्तमान राष्ट्रीय कार्यकारिणी के कुछ पदाधिकारी और कुछ राज्य इकाइयों के अध्यक्ष भी शामिल हुए। मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "संगठन की बैठकें पार्टी को मजबूत बनाने और लोगों के साथ जुड़ाव बढ़ाने के लिए नए विचारों व नजरिए पर केंद्रित होती हैं। पार्टी के साथियों और नयी संगठनात्मक टीम के साथ बहुत सार्थक बातचीत हुई।" बैठक में भाजपा के नवनियुक्त उपाध्यक्ष राम माधव और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब, महासचिव (संगठन) बी. एल. संतोष और कोषाध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी शामिल हुए। भाजपा ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि मोदी ने पार्टी की नवनियुक्त संगठनात्मक टीम से बातचीत की और पार्टी के संगठन को और मजबूत बनाने तथा लोगों के साथ जुड़ाव बढ़ाने के लिए अपने विचार और दृष्टिकोण साझा किया। नवीन के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय टीम में 65 पदाधिकारी हैं, जिनमें 51 नए चेहरे हैं।पार्टी सूत्रों के अनुसार, शनिवार को हुई राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों, जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जनता के बीच सरकार की योजनाओं को पहुंचाने पर चर्चा हुई।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को राज्यों से डिजिटल कृषि मिशन और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए तेजी से काम करने को कहा। उन्होंने जोर दिया कि योजनाओं का लाभ केवल सरकारी रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वह ''खेतों और किसानों की जेब तक दिखाई देना चाहिए।'' पूसा में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में चौहान ने कहा कि जिन राज्यों ने योजनाओं को गंभीरता से लागू किया है, उन्होंने अपने निर्धारित लक्ष्यों को 100 प्रतिशत से अधिक हासिल किया है, जबकि कुछ राज्य पीछे रह गए हैं। उन्होंने सभी राज्यों से तय समयसीमा के भीतर काम पूरा करने का आह्वान किया। मंत्री ने कहा कि किसान आईडी एक महत्वपूर्ण पारदर्शिता उपाय है, जिसके माध्यम से किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान किया जाता है। उन्होंने महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसान आईडी बनाने तथा इसके लिए शिविर आयोजित करने के लिए पहले ही धन जारी कर चुकी है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि एक महीने में किसान आईडी बनाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब शिविरों के लिए जारी धन का अन्य कार्यों में इस्तेमाल नहीं किया जाए। सम्मेलन में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, अब तक 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 10.41 करोड़ किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं। ये प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के 84.68 प्रतिशत लाभार्थियों और करीब 77 प्रतिशत कृषि भूमि को कवर करती हैं। चौहान ने डिजिटल भूमि रिकॉर्ड के संबंध में नक्शों के एकीकरण और आंकड़ों के सत्यापन को मिशन की ''रीढ़'' बताया। कृषि मंत्रालय ने बताया कि गांवों के नक्शों का भू-संदर्भीकरण 5.9 लाख गांवों में पूरा हो चुका है, जो चिन्हित गांवों का 93.05 प्रतिशत है। डिजिटल फसल सर्वेक्षण का दायरा वर्ष 2024-25 में 290 जिलों में था जो रबी सत्र 2025-26 तक बढ़ाकर 650 जिला कर दिया गया है। इसे खरीफ सत्र 2026-27 तक 692 जिला पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। चौहान ने दलहन क्षेत्र में कहा कि पिछले वर्ष कुछ क्षेत्रों में बढ़े रकबे और उत्पादन को पूरे देश में दोहराने की जरूरत है, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके। उन्होंने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ना किसानों के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए प्रसंस्करण, भंडारण और बाजार से जुड़ी सुविधाएं भी जरूरी हैं।
- विशाखापत्तनम. खेल मंत्रालय और भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) युवा मंत्रियों की बैठक शनिवार को यहां संपन्न हो गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने की। इसमें खेल राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे और युवा कार्य विभाग के सचिव सुनील पालीवाल भी मौजूद रहे। मंत्रिस्तरीय बैठक में ब्रिक्स युवा शिखर सम्मेलन और ब्रिक्स युवा परिषद की बैठक के निष्कर्षों को आगे बढ़ाते हुए चर्चा की गई। इन बैठकों से सामने आए सुझावों और विचारों ने मंत्रिस्तरीय विचार-विमर्श के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार किया। मांडविया ने प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वर्ष 2047 के लिए 'विजन डॉक्यूमेंट' तैयार किया है, जब देश अपनी स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ मनाएगा। प्रधानमंत्री ने बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले एक लाख युवा नेताओं को तैयार करने का आह्वान किया है, ताकि वे देश को इस विजन को साकार करने की दिशा में आगे ले जा सकें।'' मांडविया ने कहा, "इसी भावना के अनुरूप हमने कई पहल शुरू की हैं। हमने 'एमवाई भारत' को स्वयंसेवा, सीखने, नेतृत्व और नागरिक भागीदारी के लिए एकल मंच के रूप में स्थापित किया है। आज 2.5 करोड़ से अधिक युवा इस मंच पर पंजीकृत हैं और सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।" इस बैठक में ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देशों के युवा प्रतिनिधियों, युवा नेताओं, नीति-निर्माताओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक ने युवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान और सामूहिक प्रयास के लिए मंच उपलब्ध कराया। बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के युवा मामलों से जुड़े मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने युवा सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की। साथ ही नीतिगत विचारों का आदान-प्रदान किया गया और सतत एवं समावेशी विकास में युवाओं की भूमिका को मजबूत करने से जुड़ी प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई।
- नयी दिल्ली. वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने शनिवार को कहा कि भारतीय वायुसेना 'थिएटराइजेशन' के खिलाफ नहीं है और वह किसी भी नयी पहल के लिए वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दे रही है, ताकि मौजूदा ढांचे में न्यूनतम व्यवधान हो। कानपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एयर चीफ मार्शल ने मौजूदा व्यवस्था में ''बड़ा बदलाव'' नहीं करने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत की सैन्य क्षमता को और मजबूत करने के लिए किसी दूसरे देश की नकल करने के बजाय अपनी व्यवस्था और क्षमताओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए। सरकार ने सेना के तीनों अंगों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए 2019 में 'थिएटराइजेशन' की योजना की घोषणा की थी। हालांकि, इस दिशा में अब तक कोई खास प्रगति दिखाई नहीं दी है। थिएटराइजेशन मॉडल के तहत सरकार का उद्देश्य थलसेना, वायुसेना और नौसेना की क्षमताओं को एकीकृत करना तथा युद्ध और सैन्य अभियानों के दौरान उनके संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, ''मैं यहां अपने लोगों को आश्वस्त कर सकता हूं कि वायुसेना थिएटराइजेशन के खिलाफ नहीं है, जैसा कि मीडिया में इसे पेश किया जाता है।'' एयर चीफ मार्शल ने कहा, ''वायुसेना इस बात पर जोर देती रही है कि हम इसे वस्तुनिष्ठ तरीके से देखें। हमें यह देखना चाहिए कि हमारी व्यवस्था में क्या कमियां हैं, क्या चीजें सही नहीं हैं और उन्हें दुरुस्त करने की जरूरत है। हमें कहीं और से कोई व्यवस्था अपनाने के बजाय अपनी कमियों को दूर करना चाहिए।
- सिलीगुड़ी (प. बंगाल). केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को पश्चिम बंगाल और केंद्रीय बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में देश की पूर्वी सीमाओं पर सुरक्षा का जायजा लिया गया और मुख्य रूप से सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सिलीगुड़ी कॉरिडोर को 'चिकन नेक' भी कहा जाता है।उन्होंने बताया कि बैठक का मुख्य मकसद सीमा पर निगरानी बढ़ाना, केंद्रीय सुरक्षा बलों, खुफिया एजेंसियों और राज्य पुलिस एवं प्रशासन के बीच तालमेल बेहतर करना तथा 'ट्रायंगुलर सिक्योरिटी ग्रिड' बनाने के लिए एक रूपरेखा तैयार करना था। अधिकारियों ने बताया कि भारतीय मूल के व्यक्तियों (पीआईओ) की गतिविधियों, जनसांख्यिकीय परिवर्तन, अवैध घुसपैठ और सीमा से जुड़े मामलों पर भी चर्चा की गई। गृह मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में गृह मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, सेना, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) जैसे केंद्रीय और राज्य मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक भी शामिल हुए। बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में हुई बैठक के दौरान 'मल्टी एजेंसी सेंटर' (एमएसी) के तहत 'स्टैंडिंग फोकस ग्रुप ऑन सिलिगुड़ी कॉरिडोर' (एसएफजी-एससी) ने अब तक हुई प्रगति और कॉरिडोर की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए अपनी सिफारिशों पर प्रस्तुति दी। गृह मंत्री शाह के राज्य के दौरे के तीसरे और आखिरी दिन सिलीगुड़ी के पास सुकना में यह अहम चर्चा हुई।बयान में कहा गया है, "शाह ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर में जारी उन सभी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की स्थिति की भी समीक्षा की, जो इसकी सुरक्षा के लिए अहम हैं। उन्होंने पीआईओ गतिविधियों, जनसांख्यिकीय परिवर्तन, अवैध घुसपैठ और सीमा से जुड़े मामलों पर भी चर्चा की।" ये बैठक इसलिए भी अहम थी क्योंकि सिलीगुड़ी नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पास है और यहां से गुजरने वाला संकरा कॉरिडोर पूर्वोत्तर और देश के बाकी हिस्सों के बीच जमीन के रास्ते मुख्य संपर्क का काम करता है।
- श्रीनगर. भगवान शिव की पवित्र छड़ी 'छड़ी मुबारक' के शनिवार को पहलगाम रवाना होने के साथ ही वार्षिक अमरनाथ यात्रा के मुख्य धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गए हैं। पवित्र छड़ी को यहां दशनामी अखाड़ा भवन से वार्षिक तीर्थयात्रा से जुड़े विभिन्न अनुष्ठानों के लिए पहलगाम ले जाया जा रहा है। दक्षिण कश्मीर हिमालय में स्थित अमरनाथ गुफा की ओर रवाना होने से पहले शनिवार तड़के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 'छड़ी मुबारक' के संरक्षक महंत दीपेंद्र गिरि के नेतृत्व में साधुओं के एक समूह ने पूजा-अर्चना की। अमरनाथ यात्रा इस साल खराब मौसम और मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण नौ अगस्त को स्थगित कर दी गई थी, हालांकि इससे जुड़े धार्मिक अनुष्ठान जारी हैं। महंत दीपेंद्र गिरि ने बताया कि 28 अगस्त को 'श्रावण पूर्णिमा' के शुभ अवसर पर 'पूजन' और 'दर्शन' के लिए पवित्र छड़ी को अमरनाथ गुफा ले जाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पवित्र छड़ी शनिवार और रविवार को पहलगाम, 24 अगस्त को चंदनवाड़ी, 25 अगस्त को शेषनाग तथा 26 व 27 अगस्त को पंचतरणी में रुकेगी। इस वर्ष अमरनाथ यात्रा तीन जुलाई को शुरू हुई और अब तक 4.80 लाख से अधिक श्रद्धालु यह यात्रा कर चुके हैं। यात्रा का समापन 28 अगस्त को रक्षा बंधन के अवसर पर होगा।
- चेन्नई. तमिलनाडु में तिरुत्तनी के अरुलमिगु सुब्रमण्यस्वामी मंदिर में हाल में हुए 11 दिवसीय 'आदि' उत्सव के दौरान भक्तों की ओर से दिए गए चढ़ावे में भारी बढ़ोतरी देखी गई। इस अवधि में मंदिर को एक करोड़ रुपये से अधिक नकदी और बड़ी मात्रा में कीमती धातुएं प्राप्त हुईं। एक अधिकारी ने बताया कि मंदिर को दान पेटियों से कुल 1,05,54,389 रुपये नकद, 293 ग्राम सोना और 7,153 ग्राम चांदी प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि आदि कार्तिगई और नौका उत्सव के कारण चढ़ावे में यह बढ़ोतरी हुई। चढ़ावे में हुई इस अभूतपूर्व वृद्धि का कारण तमिलनाडु के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्यों से आने वाले हजारों तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ को माना जा रहा है। भगवान मुरुगन को समर्पित एक प्रतिष्ठित वार्षिक उत्सव 'आदि कार्तिगई ' और 'थेप्पा थिरुविझा' (नौका उत्सव) के शुभ अवसर के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई। यह त्योहार तब मनाया जाता है जब तमिल महीने 'आदि' (मध्य जुलाई से मध्य अगस्त) में कृत्तिका नक्षत्र का योग बनता है। हिंदू परंपरा के अनुसार, यह दिन भगवान मुरुगन की दिव्य उत्पत्ति के सम्मान में मनाया जाता है, जिनका जन्म के बाद छह कृत्तिका कन्याओं द्वारा पालन-पोषण किया गया था। चेन्नई से लगभग 93 किलोमीटर दूर तिरुवल्लूर जिले में स्थित तिरुत्तनी मंदिर राज्य का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जहां तिरुपति जाने वाले तीर्थयात्री अक्सर आते हैं। यह प्राचीन मंदिर भगवान मुरुगन का पांचवां निवास स्थान है।






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