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कपूरथला (पंजाब). पंजाब के सुल्तानपुर लोधी के एक बुजुर्ग दंपति ने दावा किया है कि नशे की वजह से उनके चार बेटों की मौत हो चुकी है, जबकि उनका पांचवां और आखिरी जीवित बेटा भी यकृत के गंभीर संक्रमण के कारण बिस्तर पर पड़ा है। पति-पत्नी ने मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री भगवंत मान से उसे बचाने की भावुक अपील की है।
मनजीत कौर ने बिस्तर पर पड़े अपने बेटे को पत्रकारों को दिखाते हुए कहा, ''मैं पांच बेटों की मां हूं। चार की मौत नशे की वजह से हो चुकी है।" उन्होंने हाथ जोड़कर कहा, "अगर यह भी मर गया, तो मैं इसके बच्चों को कहां ले जाऊंगी?"
प्रभावित परिवार के सदस्यों ने कहा कि सोनू (32) दो साल के बेटे और छह महीने की बेटी का पिता है एवं गंभीर यकृत संक्रमण से पीड़ित है। उन्होंने कहा कि वह बोलने या खाने में असमर्थ है। परिवार के एक सदस्य ने कहा, '' उसका यकृत पूरी तरह से खराब हो चुका है। वह कुछ भी नहीं खाता है।''
सोनू के पिता जोगिंदरपाल सिंह ने सरकार ने इस क्षेत्र को मादक पदार्थ की बुराई से निजात दिलाने की अपील की। सुल्तानपुर लोधी के पंडोरी मोहल्ले में कई महिलाएं इकट्ठा हुईं और उन्होंने राज्य सरकार से यहां आसानी से उपलब्ध 'चिट्टा' (एक तरह का नशा) के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने बताया कि इलाके के कई युवा इसके आदी हो चुके हैं। मनजीत कौर ने कहा, "मैं मुख्यमंत्री भगवंत मान से हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि हमारी मदद करें। हमारे पांचवें बेटे को बचाएं।" उन्होंने बताया कि परिवार ने अपने सबसे बड़े बेटे के इलाज पर सात लाख रुपये खर्च किए, लेकिन वह बच नहीं सका। उन्होंने कहा कि नशे की लत के कारण तीन महीने बाद, उनके दूसरे बेटे की भी मृत्यु हो गई और कुछ वर्षों बाद उनके दो अन्य बेटों की भी जान चल गयी। कौर ने आंखों में आंसू लिए कहा, ''हमारे इलाके से 'चिट्टा' (नशीली दवा) खत्म होनी चाहिए। पुलिस को उन जगहों की जांच करनी चाहिए जहां नशीली दवाएं बेची जाती हैं।'' वहां मौजूद एक अन्य महिला ने एक बुजुर्ग महिला की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनका बेटा भी नशे का आदी है। उसने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में कई युवाओं की नशे के कारण मौत हो चुकी है। -
चंदौली (उप्र) पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से खाना पकाने वाली गैस समेत ईंधन की चुनौतियों के बीच चंदौली जिले का एक गांव बायोगैस से आत्मनिर्भर बन गया है। यहां 125 से अधिक घरों के रसोईघर एलपीजी की लगभग आधी कीमत पर चल रहे हैं। वाराणसी के पास चंदौली जिले के अलीनगर क्षेत्र के नियमातबाद ब्लॉक के एकौनी गांव में स्थित इस पहल ने अपनी किफायती लागत और पर्यावरणीय लाभों के कारण ध्यान आकर्षित किया है। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाली पुणे की कंपनी के सहयोग से स्थापित बायोगैस संयंत्र, लगभग 500-600 लोगों की आबादी वाले इस गांव के लगभग 125 परिवारों को गैस की आपूर्ति करता है। वाराणसी जिले के रामनगर से तीन किमी की दूरी पर स्थित इस गांव के निवासी नागेन्द्र प्रताप सिंह पेशे से किसान हैं। उन्होंने बताया कि 1995 से उनकी गौशाला है, जिसमें करीब 200 गायें हैं। उन्होंने बताया कि बीटेक की पढ़ाई कर चुका उनका बेटा चन्द्रप्रकाश सिंह ने इस समस्या से निजात के लिए अनुसंधान किया और उसे पुणे की कंपनी का साथ मिला। इस कंपनी की मदद से उसने 2016 में अपनी गौशाला का उन्नयन किया, उसने इसे प्रौद्योगिकी के साथ जोड़ा। चन्द्रप्रकाश ने बताया कि कंपनी ने ही उनके यहां बायो गैस संयंत्र स्थापित किया, इस पर 85 लाख रुपये का खर्च आया। उन्होंने बताया कि कंपनी ने ही संयंत्र के लिए वित्त पोषण किया और तबसे यह संयंत्र निरंतर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन सुबह व शाम ढाई-ढाई घंटे बायो गैस की आपूर्ति दी जाती है। यह बायो गैस एलपीजी की तुलना में आधे दाम में पड़ रही है। पूरे महीने प्रयोग करने पर अधिकतम 400 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। चन्द्रप्रकाश ने बताया कि वर्तमान में अमेरिका-इजराइल व ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण ईंधन की कमी महसूस की जा रही है और चंदौली भी अछूता नहीं है। उन्होंने कहा कि यहां लगे बायोगैस संयंत्र की तरफ बाहरी गांवों के लोग भी आकर्षित हो रहे हैं। चन्द्रप्रकाश ने बताया कि उनके संयंत्र से हाल में करीब 25 और लोगों ने कनेक्शन लिया है।
पुणे की 'साफ एनर्जी कंपनी से जुड़े 'सस्टेन प्लस फाउंडेशन' के सह संस्थापक हर्षद कुलकर्णी ने बताया कि चन्द्रप्रकाश के पिता की ओर से 2022 में मुहैया कराई गई जमीन पर बायोगैस संयंत्र की स्थापना की गई। उन्होंने बताया कि इसकी एवज में कंपनी ने चन्द्रप्रकाश के परिवार को बायोगैस से दो-तीन कनेक्शन दिये, साथ ही उनके गौशाला के गोबर को रोजाना उठाकर संयंत्र तक पहुंचाने की जिम्मेदारी ली। कुलकर्णी के मुताबिक कंपनी ने इस संयंत्र में गांव के दो लोगों को रोजगार भी दिया है। उन्होंने यह बताया कि स्थापना के 10 साल बाद 2032 में यह संयंत्र चंद्रप्रकाश के पिता को पूरी तरह से सौंप दिया जाएगा। -
कोलकाता. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मालदा में एक भीड़ द्वारा न्यायिक अधिकारियों का घंटों तक घेराव किये जाने की घटना को लेकर रविवार को तृणमूल कांग्रेस पर तीखा निशाना साधा और इसे सत्ताधारी पार्टी की सरकार के "महाजंगलराज" का उदाहरण बताया। मोदी ने आरोप लगाया कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस बंगाल में कानून-व्यवस्था का ''जनाजा निकालने'' पर तुली हुई है। मोदी ने पिछले महीने चुनाव की घोषणा के बाद कूचबिहार जिले में अपनी पहली चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि पूरे देश ने देखा है कि मालदा में न्यायिक अधिकारियों को कैसे बंधक बनाया गया था और सवाल किया कि यह किस तरह की सरकार है जो न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और संवैधानिक प्रक्रियाओं को सुनिश्चित नहीं कर सकती! उन्होंने कहा, ''हम ऐसी सरकार से बंगाल की जनता की सुरक्षा की उम्मीद नहीं कर सकते।''
मोदी ने कहा, ''जब न्यायिक अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं तो आप तृणमूल शासन में आम लोगों की सुरक्षा की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? मालदा में जो हुआ वह तृणमूल के महाजंगलराज का एक उदाहरण है।'' ममता बनर्जी सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए मोदी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार किसी भी संवैधानिक संस्था को महत्व नहीं देती। प्रधानमंत्री ने कहा, ''क्रूर तृणमूल कांग्रेस प्रशासन के तहत बंगाल की पवित्र भूमि पर लोकतंत्र प्रतिदिन रक्तपात का शिकार हो रहा है।'' मोदी ने कहा कि यहां स्थिति इतनी खराब है कि उच्चतम न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ''कानून-व्यवस्था की हत्या करने'' पर तुली हुई है। ये टिप्पणियां मालदा जिले के कालियाचक-दो ब्लॉक विकास कार्यालय में तीन महिलाओं सहित सात न्यायिक अधिकारियों को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से कथित रूप से नाम हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों द्वारा कई घंटों तक घेराव किए जाने के कुछ दिनों बाद आई हैं। भाजपा ने मालदा की घटना को लेकर पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल पर अपना हमला तेज किया और आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार ने तुष्टीकरण की राजनीति और घुसपैठ के माध्यम से बंगाल के भविष्य और उसकी अस्मिता को खतरे में डाल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया, ''तृणमूल कांग्रेस शासन के तहत, बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में खतरनाक जनसांख्यिकीय परिवर्तन हुआ है। इन घुसपैठियों को तृणमूल कांग्रेस के सिंडिकेट से सीधा संरक्षण मिलता है, जिससे राज्य के लोगों का जीवन खतरे में पड़ जाता है।'' प्रधानमंत्री ने तृणमूल कांग्रेस पर घुसपैठियों को संरक्षण देने के लिए नागरिकता संशोधन अधिनियम और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का विरोध करने का भी आरोप लगाया। -
पुडुचेरी. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को केंद्र शासित प्रदेश के थिरुनालर में एक रोड शो किया और कहा कि नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए लोगों के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंध (राजग) के लिए भारी समर्थन की लहर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। नवीन ने पुडुचेरी से लगभग 140 किलोमीटर दूर थिरुनालर में करीब एक घंटे का रोड शो आयोजित किया और 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा: "आज के रोड शो के दौरान मिली ऊर्जा और जबरदस्त प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि पुडुचेरी ने विकास का मार्ग दृढ़ता से चुन लिया है। यह अविश्वसनीय समर्थन हमारे संकल्प को और मजबूत करता है। हम प्रगति की इस यात्रा को हर घर तक पहुंचाने और सभी के लिए एक उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" उन्होंने कहा, "थिरुनालर की सड़कों पर राजग के लिए जबरदस्त समर्थन की लहर है।"जीएनएस राजशेखरन, थिरुनालर विधानसभा क्षेत्र से एआईएनआरसी-भाजपा गठबंधन के उम्मीदवार हैं।
यहां पहुंचने पर पार्टी के नेताओं द्वारा नवीन का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जिनमें पुडुचेरी इकाई के भाजपा अध्यक्ष वी.पी. रामलिंगम और केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया शामिल थे। -
हैदराबाद. केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने शनिवार को कहा कि यदि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष जारी रहा, तो इसका असर भारत के अन्य देशों को होने वाले निर्यात पर भी पड़ेगा। 'चिंतन शिविर-फार्मा निर्यात वृद्धि' के अवसर पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में अग्रवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण पिछले महीने आयात और निर्यात दोनों पर निश्चित रूप से प्रभाव पड़ा, क्योंकि ऊर्जा भारतीय आयात बाजार का एक प्रमुख हिस्सा है। अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा, "पश्चिम एशिया भी एक महत्वपूर्ण बाजार है। हमारे निर्यात का लगभग 12-13 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र में जाता है। इसलिए, इस पर सीधा असर पड़ेगा। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो संभवतः दुनिया के अन्य हिस्सों में होने वाले हमारे निर्यात भी प्रभावित होंगे क्योंकि कुछ मूल्य श्रृंखलाएं फिर से सामान्य स्थिति में आ जाएंगी। हम इस बात से अवगत हैं।" एक सवाल का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि इस संकट का वास्तविक प्रभाव आने वाले कुछ हफ्तों में स्पष्ट हो सकेगा। उन्होंने कहा कि सरकार कोशिश कर रही है कि आपूर्ति श्रृंखला पर कम से कम असर पड़े, हालांकि आयात और निर्यात दोनों में कुछ कमी आ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही युद्ध समाप्त हो जाए, लेकिन इसका असर कुछ महीनों या वर्षों तक बना रह सकता है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन-सी आपूर्ति श्रृंखला या ढांचा प्रभावित हुआ है। अग्रवाल के अनुसार, इन चुनौतियों से निपटने के लिए उद्योग को आत्मनिर्भर बनना होगा। उन्होंने बताया कि दवा क्षेत्र पर भी कुछ असर पड़ा है, खासकर जरूरी कच्चे माल और रसायनों की आपूर्ति पर। उन्होंने कहा कि सरकार एलपीजी की सीमित उपलब्धता को प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में बांटने के लिए काम कर रही है और जरूरत पड़ने पर अन्य स्रोतों से आयात भी किया जा रहा है।
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मॉस्को. भारत ने उज्बेकिस्तान के विश्वविद्यालयों द्वारा संचालित चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने के इच्छुक अपने छात्रों को उक्त संस्थानों की साख की जांच करने की सलाह दी है। साथ ही एफएमजीएल नियमों के संभावित उल्लंघन को लेकर चिंता व्यक्त की है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) द्वारा विदेश में चिकित्सा की पढ़ाई करने वाले छात्रों को फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइंसेंशिएट्स (एफएमजीएल) प्रदान किया जाता है। ताशकंद स्थित भारतीय दूतावास ने छात्रों से आग्रह किया कि वे किसी भी व्यक्ति या एजेंट के बहकावे में न आएं और यह भी सुनिश्चित करें कि उज्बेकिस्तान के संस्थान अपनी क्षमता से अधिक छात्रों को प्रवेश नहीं दे रहk हो। उज्बेकिस्तान के चिकित्सा महाविद्यालयों में दाखिले को लेकर कई शिकायतें मिलने के बाद भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को छात्रों के लिए एक परामर्श जारी किया। भारतीय दूतावास के मुताबिक उज्बेकिस्तान में भारतीय समुदाय की अनुमानित संख्या 21,000 है, जिसमें देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत 16,300 छात्र शामिल हैं। दूतावास द्वारा जारी परामर्श में कहा गया है कि भारत और उज्बेकिस्तान के द्विपक्षीय संबंध मजबूत होने के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा के लिए उज्बेकिस्तान को चुनने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, और इस वृद्धि के साथ-साथ मध्य एशियाई देश में कई नए विश्वविद्यालय सामने आए हैं। इसमें कहा गया, ''दूतावास आपसे आग्रह करता है कि आप जिस विश्वविद्यालय में प्रवेश लेना चाहते हैं, उसकी साख के बारे में पूरी तरह से संतुष्ट हों, और यह भी सुनिश्चित करें कि विश्वविद्यालय अपनी क्षमता से अधिक छात्रों को प्रवेश न दे रहे हों।'' इसके अलावा, छात्रों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि उनकी डिग्री भारत में बतौर चिकित्सा पेशवर कार्य करने के लिए वैध है, जिसके लिए उनके विश्वविद्यालय (उज़्बेकिस्तान में) को भारत के राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग द्वारा जारी एफएमजीएल विनियमों का सख्ती से पालन करना होगा। परामर्श में कहा गया, '' इस मुद्दे पर आपको गुमराह करने वाले किसी भी व्यक्ति या एजेंट के झांसे में न आएं। कृपया सतर्क रहें और संदेह होने पर दूतावास से संपर्क करें।'' इस परामर्श में भारत में चिकित्सक का पेशा शुरू करने के वास्ते लाइसेंस प्राप्त करने के लिए छात्र की पात्रता हेतु आठ बिंदुओं की शर्तों की एक सूची जारी की गई है। इसमें कहा गया, ''उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि देश में चिकित्सा की डिग्री प्राप्त करने वाले सभी लोगों को घरेलू कानून के अनुसार देश में इलाज करने की अनुमति है।'' परामर्श में कहा गया है कि दूतावास को छात्रों से उनके शिक्षा सलाहकारों (ईसी) के संबंध में कई शिकायतें मिली हैं और उसने सभी ईसी से स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी प्रदान करने को कहा है। उज्बेकिस्तान में विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यालयों से संबंधित कई मुद्दों के बीच, दूतावास ने यह भी उल्लेख किया कि अधिकारी ताशकंद राजकीय आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय की एक शाखा का दौरा करेंगे, जहां ''छात्रों ने स्वयं विश्वविद्यालय द्वारा एफएमजीएल नियमों के उल्लंघन की शिकायत की है और गंभीर चिंता व्यक्त की है''।
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भुवनेश्वर. केंद्र सरकार ने पुरी में प्रस्तावित श्री जगन्नाथ अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा परियोजना के लिए वन मंजूरी के पहले चरण को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। यह हवाईअड्डा परियोजना वर्ष 2021 में ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक द्वारा प्रस्तावित की गई थी। इसके तहत निर्माण के लिए लगभग 27 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग की सशर्त अनुमति दी गई है। पुरी के जिला कलेक्टर दिव्यज्योति परिदा ने बताया कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा दी गई यह मंजूरी कुछ शर्तों के साथ है। इनमें वृक्षारोपण, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन शामिल है। उन्होंने कहा कि इन शर्तों को पूरा करने के बाद परियोजना को दूसरे चरण की मंजूरी मिल सकेगी, जिससे निर्माण कार्य की पूर्ण अनुमति मिल जाएगी। मंत्रालय ने इस संबंध में राज्य सरकार को पत्र के माध्यम से स्वीकृति दी है। इसके तहत पुरी वन प्रभाग की 27.887 हेक्टेयर वन भूमि को परियोजना के लिए उपयोग करने की अनुमति दी गई है।
- नासिक/नासिक के दिंडोरी तालुका में शुक्रवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जिसमें 9 लोगों की जान चली गई। जानकारी के मुताबिक, एक कार अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पानी से भरे कुएं में जा गिरी। हादसा इतना भीषण था कि कार में सवार सभी लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई।बताया जा रहा है कि सभी मृतक इंदोरे गांव के दरगुडे परिवार के सदस्य थे, जिनमें सुनील दरगुडे, उनकी पत्नी और बच्चे भी शामिल हैं। परिवार एक निजी कार्यक्रम (स्नेहसंमेलन) से लौट रहा था, तभी यह हादसा हुआ। कड़ी मशक्कत के बाद कुएं से कार और शवों को बाहर निकाला गया। फिलहाल सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। घटना के बाद मौके पर बचाव अभियान चलाया गया, जिसमें एनडीआरएफ की टीम भी पहुंची।क्यों हुआ ये हादसा?प्राथमिक जांच में सामने आया है कि ड्राइवर का कार से नियंत्रण छूटने के कारण यह दुर्घटना हुई। फिलहाल दिंडोरी पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। कार सड़क से फिसलकर सीधे पास के कुएं में जा गिरी. कुआं पानी से भरा हुआ था, जिसके कारण कार पूरी तरह उसमें डूब गई और अंदर बैठे लोग बाहर नहीं निकल सके।
- नई दिल्ली। भारतीय नौसेना में शुक्रवार को एक नवीनतम स्टील्थ युद्धपोत, ‘तारागिरी’ शामिल किया गया है। इस युद्धपोत को विशाखापत्तनम में 3 अप्रैल की दोपहर नौसेना में कमीशन किया गया। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद रहे। ‘तारागिरी’ नामक यह युद्धपोत सुपरसोनिक मिसाइलों से लैस है।ये मिसाइल सतह से सतह पर मार कर सकती हैं। इसमें मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और एक विशेष पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली भी है। अत्याधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली व घातक हथियारों से लैस यह युद्धपोत दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। यहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘तारागिरी’ को एक स्टेट ऑफ द आर्ट वॉरशिप करार दिया। उन्होंने कहा कि तारागिरी की कमीशनिंग, भारत की बढ़ती हुई सामुद्रिक शक्ति का प्रतीक है।उन्होंने कहा कि हमारी नौसेना भारत के मूल्यों और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। आईएनएस तारागिरी की कमीशनिंग , भारतीय नौसेना की ताकत में, मूल्यों में, तथा प्रतिबद्धता में और वृद्धि करेगी। गौरतलब है कि मानवीय मूल्यों के प्रति सजग भारतीय नौसेना आपदा के दौरान देश ही नहीं विदेशों में भी आपदा राहत के कार्य में शामिल होती है। नौसेना का यह नया युद्धपोत तारागिरी भी मानवीय संकट व आपदा के दौरान राहत पहुँचाने में बड़ी मदद कर सकता है।इसकी अनुकूल मिशन प्रोफाइल इसे उच्च-तीव्रता वाले युद्ध के साथ साथ मानवीय सहायता और आपदा राहत के लिए एक आदर्श समुद्री जहाज बनाती है। राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘तारागिरी’ हमारे राष्ट्रीय गौरव और सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जब यह जहाज समुद्र की लहरों को चीरते हुए आगे बढ़ेगा, तो यह पूरी दुनिया को यह संदेश देगा कि भारत की ताकत भारत के लोगों में है, उनकी मेहनत में है, उनकी क्षमता में है और उनके अटूट संकल्प में है।इस युद्धपोत का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा किया गया है। यह युद्धपोत अपने पूर्ववर्ती युद्धपोतों के डिजाइनों की तुलना में एक पीढ़ीगत विकास का प्रतिनिधित्व करता है। इसके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इस अवसर पर रक्षामंत्री ने मझगांव डॉक शिपयार्ड लिमिटेड और भारतीय नौसेना समेत सभी देशवासियों को बधाई दी।उन्होंने कहा कि मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड की भूमिका, इसमें बहुत महत्वपूर्ण रही है। दशकों से यह संस्थान, देश के लिए एडवांस नौसैनिक प्लेटफार्म तैयार कर रहा है। कुशल वर्कफोर्स, आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता ने, इसे एक विश्वसनीय नाम बना दिया है। गौरतलब है कि भारत में बड़े स्तर पर स्वदेशी रक्षा उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है। इसके चलते देश का रक्षा निर्यात भी बढ़ा है।रक्षा मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 62.66 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी दर्शाता है। हथियार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, गोला-बारूद, जहाज बनाने और अन्य सैन्य उपकरणों पर बड़ा खर्च किया गया। सेना, वायु सेना और नौसेना के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम हुआ, जैसे मल्टी रोल फाइटर विमान, लंबे समय तक उड़ान भरने वाले ड्रोन, नौसेना के खास जहाज और मिसाइल सिस्टम।
- नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राजनीतिक दलों ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस बीच भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने शांतिपूर्वक बंगाल चुनाव कराने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती की है। चुनाव आयोग के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मतगणना पूरी होने के बाद भी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की 500 कंपनियां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात रहेंगी। चुनाव के बाद भी सीएपीएफ की कंपनियां बंगाल में तैनात रहेंगी। यह तैनाती ईसीआई के अगले आदेश तक जारी रहेगी।बता दें कि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड तथा त्रिपुरा के आठ विधानसभा क्षेत्रों के लिए उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था। इसके तहत असम, केरल, पुडुचेरी, गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा में 9 अप्रैल तथा तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। वहीं, पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होगा।जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135बी के अनुसार, किसी भी व्यवसाय, व्यापार, औद्योगिक उपक्रम या किसी अन्य संस्था में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति, जिसे लोक सभा या राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के चुनाव या किसी संसदीय/विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव में मतदान का अधिकार प्राप्त है, उसे मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश प्रदान किया जाएगा।ऐसे सवैतनिक अवकाश के कारण किसी भी कर्मचारी के वेतन में कटौती नहीं की जाएगी। कोई भी नियोक्ता जो इन प्रावधानों का उल्लंघन करता है, उसे जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। सभी दैनिक वेतन भोगी और आकस्मिक मजदूरों को भी मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश का अधिकार होगा।आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे मतदाता (जिसमें आकस्मिक और दैनिक वेतन भोगी श्रमिक शामिल हैं) जो अपने निर्वाचन क्षेत्र के बाहर स्थित औद्योगिक या वाणिज्यिक संस्थानों में कार्यरत हैं, लेकिन मतदान होने वाले किसी निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत हैं, उन्हें भी मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश का लाभ मिलेगा, जिससे वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। आयोग ने सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों को निर्देश दिया है कि वे सभी संबंधित अधिकारियों को इन प्रावधानों के सख्त पालन के लिए आवश्यक निर्देश जारी करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी मतदाता अपने मताधिकार का स्वतंत्र और सुविधाजनक रूप से प्रयोग कर सकें।
- नई दिल्ली। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) के विस्तार में तेजी आई है। मार्च 2026 से अब तक 3.42 लाख नए पीएनजी कनेक्शन चालू किए जा चुके हैं, जबकि 3.7 लाख नए रजिस्ट्रेशन भी दर्ज किए गए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने राज्यों को घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए नए पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं।सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे घबराहट में ईंधन की खरीद या एलपीजी की अनावश्यक बुकिंग न करें। एलपीजी सिलेंडर बुक करने के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने और बिना जरूरत गैस एजेंसी पर न जाने की सलाह दी गई है। मंत्रालय ने घरों में पीएनजी, इंडक्शन और इलेक्ट्रिक कुकटॉप जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की है। साथ ही वर्तमान परिस्थितियों में ऊर्जा की बचत पर भी जोर दिया गया है।सरकार ने लोगों को अफवाहों से सावधान रहने और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करने की सलाह दी है। ईरान में चल रहे युद्ध के कारण आपूर्ति में आई चुनौतियों के बीच सरकार ने घरेलू एलपीजी और पीएनजी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को भी उच्च प्राथमिकता दी जा रही है।आपूर्ति और मांग दोनों पक्षों पर कई कदम उठाए गए हैं। इनमें रिफाइनरी उत्पादन बढ़ाना, शहरी क्षेत्रों में एलपीजी बुकिंग अंतराल 21 से बढ़ाकर 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तक करना शामिल है।एलपीजी की मांग को कम करने के लिए केरोसिन और कोयला जैसे वैकल्पिक ईंधन भी उपलब्ध कराए गए हैं। कोल इंडिया और सिंगरेनी कोलियरिज को राज्यों को अधिक कोयला आवंटित करने के निर्देश दिए गए हैं।सरकार ने राज्यों को स्थानीय जरूरत के अनुसार 5 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडरों के लक्षित वितरण पर विचार करने को कहा है। 23 मार्च से अब तक 5 लाख से अधिक छोटे सिलेंडर बेचे जा चुके हैं, जिनमें से 67,000 से अधिक गुरुवार को ही बिके। पेट्रोलियम सचिव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर ईंधन आपूर्ति की समीक्षा की और आवश्यक सेवाओं के लिए एलपीजी वितरण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। साथ ही जमाखोरी, डायवर्जन और गलत जानकारी पर कड़ी निगरानी रखने को कहा गया है।प्रवासी श्रमिकों को एलपीजी आपूर्ति में किसी तरह की बाधा की खबरों को खारिज करते हुए राज्यों ने कहा कि आपूर्ति पूरी तरह सामान्य और स्थिर है।
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नयी दिल्ली. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने बृहस्पतिवार को एक रिपोर्ट में कहा कि सार्वजनिक ऋण में वृद्धि के कारण 2024-25 के दौरान केंद्र सरकार की कुल देनदारियां बढ़ गई हैं। संसद में पेश की गई कैग की रिपोर्ट में कहा गया, ''2023-24 की तुलना में आंतरिक ऋण और बाहरी ऋण में क्रमशः 8.35 प्रतिशत और 9.83 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वित्त वर्ष 2024-25 के अंत में आंतरिक ऋण 1,59,25,949 करोड़ रुपये रहा। बाजार ऋण, जो इसका प्राथमिक हिस्सा है, कुल आंतरिक ऋण का 69.96 प्रतिशत था।'' रिपोर्ट के अनुसार, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के प्रतिशत के रूप में पूंजीगत व्यय 2023-24 के 2.78 प्रतिशत से मामूली रूप से घटकर 2024-25 में 2.70 प्रतिशत रह गया। कर्ज का पुनर्भुगतान भारत की संचित निधि से होने वाली सबसे बड़ी निकासी रही, जो 2024-25 के दौरान कुल निकासी का 62.57 प्रतिशत थी। रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले वर्ष की तुलना में राजस्व घाटा और राजकोषीय घाटा दोनों में गिरावट आई है, जो विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन का संकेत है। वित्त वर्ष 2024-25 में राजस्व घाटा जीडीपी का 1.78 प्रतिशत था। इसमें वित्त वर्ष 2023-24 की तुलना में 26.24 प्रतिशत की कमी आई है, जो राजस्व व्यय पर बेहतर नियंत्रण और राजस्व प्राप्तियों में स्थिर वृद्धि को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में राजकोषीय घाटा 4.62 प्रतिशत रहा, जिसमें इससे पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 8.27 प्रतिशत की कमी आई।
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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को निवासियों और प्रवासियों दोनों को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के प्रस्थान हॉल में विदेशी मुद्रा विनिमय काउंटर पर भारतीय रुपये के नोट बदलने की अनुमति दे दी। पहले, ऐसे विदेशी मुद्रा विनिमय काउंटर को केवल प्रवासियों से भारतीय रुपये खरीदने और उन्हें विदेशी मुद्रा बेचने की अनुमति थी। आरबीआई ने एक परिपत्र में कहा, ''समीक्षा के बाद, प्रवासियों के साथ निवासियों को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के प्रस्थान हॉल में आव्रजन या सीमा शुल्क डेस्क के आगे ड्यूटी-फ्री क्षेत्र या सुरक्षा क्षेत्र में स्थापित विदेशी मुद्रा विनिमय काउंटरों पर भारतीय रुपये के नोट बदलने की अनुमति देने का निर्णय किया गया है।''
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नयी दिल्ली. भारतीय वायु सेना के तेजस हल्के लड़ाकू विमान अगले सप्ताह से उड़ान भरने के लिए तैयार हैं। दो महीने पहले हवाई अड्डे पर एक विमान से जुड़ी दुर्घटना के बाद पूरे बेड़े को उड़ान से रोक दिया गया था। लड़ाकू विमानों के निर्माता हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) डी.के. सुनील ने बताया कि 34 तेजस विमानों का पूरा बेड़ा आठ अप्रैल से उड़ान भरने के लिए तैयार है, क्योंकि विमान के सॉफ्टवेयर में पाई गई खामी को दूर कर लिया गया है। उन्होंने बताया, ''सभी तेजस लड़ाकू विमान अगले बुधवार से फिर से उड़ान भरने के लिए तैयार हैं।'' फरवरी के पहले सप्ताह में एक तेजस विमान के रनवे से आगे निकल जाने के बाद इसके बेड़े को उड़ान से रोक दिया गया था। यह दुर्घटना एयरबेस पर हुई थी और संभवतः ब्रेक फेल होने के कारण हुई थी। इस घटना के बाद भारतीय वायु सेना ने विमानों की व्यापक जांच के आदेश भी दिए थे। भारतीय वायु सेना को तेजस मार्क 1ए संस्करण की आपूर्ति में देरी के बारे में सुनील ने कहा कि एचएएल दिसंबर तक 20 से अधिक लड़ाकू विमान तैयार कर लेगी और उनमें से छह की आपूर्ति जल्द ही की जा सकती है क्योंकि रडार, एवियोनिक्स और मिसाइल-फायरिंग सिस्टम के अंतिम परीक्षण वर्तमान में जारी हैं। लड़ाकू विमानों की आपूर्ति में देरी मुख्य रूप से जीई एयरोस्पेस द्वारा एफ-404 एयरो इंजनों की आपूर्ति के लिए कई समय सीमाओं को पूरा न कर पाने के कारण हो रही है। वायु सेना द्वारा लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन से संबंधित कुछ मुद्दों को उठाए जाने के बारे में पूछे जाने पर, एचएएल के सीएमडी ने कहा कि मई में एक परियोजना समीक्षा समिति द्वारा लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के लिए मंजूरी दिए जाने की संभावना है। रक्षा क्षेत्र की प्रमुख अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस ने एचएएल को लड़ाकू विमानों के पांच इंजन सौंपे हैं और छठा इंजन अगले कुछ दिनों में आपूर्ति किए जाने की उम्मीद है। यह भी पता चला है कि एचएएल ने तेजस हल्के लड़ाकू विमान मार्क 1ए के इंजनों की आपूर्ति में देरी के लिए जीई एविएशन पर एक प्रावधान के तहत जुर्माना लगाया है। अनुबंध के अनुसार जीई एयरोस्पेस पर जुर्माना लगाया जा रहा है। फरवरी 2021 में, रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के लिए 83 तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमान की खरीद के लिए एचएएल के साथ 48,000 करोड़ रुपये का समझौता किया था। l
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नयी दिल्ली. लड़कियों को शादी के नाम पर स्टांप पेपर या अनौपचारिक समझौतों के माध्यम से 'बेचे' जाने वाली 'नाता प्रथा' एक बार फिर जांच के दायरे में है। केंद्रीय सूचना आयोग ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सौंपी गई कार्रवाई रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है। सूचना आयुक्त पीआर रमेश ने हाल ही में जारी एक आदेश में कहा कि मंत्रालय को सूचना के अधिकार (आरटीआई) अनुरोध पर पुनर्विचार करना चाहिए और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के साथ साझा की गई कार्रवाई रिपोर्ट को उपलब्ध कराना चाहिए हालांकि छूट प्राप्त हिस्सों को हटा दिया जाए। केंद्रीय सूचना आयोग ने हालांकि अपीलकर्ता द्वारा मांगी गई अन्य जानकारी को अस्वीकार करने के फैसले को बरकरार रखा। अपीलकर्ता द्वारा मांगी गयी जानकारी में शिकायतकर्ताओं और उनके परिवारों के व्यक्तिगत विवरण शामिल हैं जो सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(जे) के तहत छूट प्राप्त हैं। आरटीआई आवेदन में मंत्रालय, राष्ट्रीय सूचना आयोग और राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश व गुजरात राज्यों के बीच हुए पत्राचार की प्रतियां तथा इस मामले पर की गई कार्रवाई रिपोर्ट जारी करने का अनुरोध किया गया था। केंद्रीय सूचना आयोग ने पाया कि व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा नहीं किया जा सकता लेकिन मानवाधिकार आयोग को सौंपी गई कार्रवाई रिपोर्ट जनहित का मामला है और इसे संशोधित रूप में साझा किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने छह जून, 2024 को जारी एक बयान में इस प्रथा को गंभीर बताते हुए इसे 'सामाजिक बुराई' करार दिया था। आयोग ने कहा था, "आयोग 'नाता प्रथा' को गंभीर मानता है, जिसके तहत कुछ समुदायों में लड़कियों को शादी के नाम पर स्टांप पेपर पर या किसी अन्य तरीके से बेचा जाता है। राजस्थान के कुछ हिस्सों और मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश व गुजरात के आसपास के इलाकों में इस प्रथा की कोई कानूनी मान्यता नहीं है।" आयोग ने इस प्रथा को 'अनैतिक' व 'दुराचारी' बताते हुए इसके उन्मूलन की मांग की थी।
इस प्रथा के महिलाओं और नाबालिग लड़कियों पर गंभीर परिणाम होते हैं।आयोग ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और संबंधित राज्यों को नोटिस जारी कर आठ सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। मंत्रालय ने मानवाधिकार को सूचित किया था कि यह प्रथा महिलाओं के लिए 'अपमानजनक' प्रतीत होती है और इसे समाप्त करने की आवश्यकता है। मानवाधिकार आयोग ने राजस्थान में एक नाबालिग लड़की के पिता द्वारा 'नाता प्रथा' के तहत ग्रामीणों की उपस्थिति में परिवारों के बीच हुए समझौते के माध्यम से 2.5 लाख रुपये में उसकी शादी कराने के मामले का भी हवाला दिया। शुरुआती तौर पर 60,000 रुपये का भुगतान किया गया था लेकिन शेष राशि समय पर नहीं चुकाई गई, जिसके बाद पिता लड़की को वापस ले आया और 32,000 रुपये में उसका 'नाता' (शादी) दूसरे आदमी से तय कर दिया। लड़की ने इस व्यवस्था का विरोध किया और पहले वाले आदमी के साथ रहने के लिए लौट गई।बाद में उसने अपने पिता द्वारा उत्पीड़न व धमकियों का आरोप लगाया और जून 2020 में आत्महत्या कर ली। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने फ्लाइट में कम से कम 60 प्रतिशत सीटें बिना अतिरिक्त शुल्क के देने के अपने पहले के आदेश को फिलहाल स्थगित कर दिया है, जो 20 अप्रैल से लागू होने वाला था। नागर विमानन मंत्रालय ने नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को भेजे गए एक पत्र में कहा कि इस फैसले की समीक्षा की गई है। यह समीक्षा फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस और अकासा एयर द्वारा उठाई गई चिंताओं के बाद की गई, जिसमें इस नियम के ऑपरेशनल और कमर्शियल असर को लेकर सवाल उठाए गए थे।
एयरलाइंस ने कहा था कि यह नियम किराया ढांचे को प्रभावित कर सकता है और मौजूदा डिरेगुलेटेड टैरिफ सिस्टम के अनुरूप नहीं है। सरकार ने कहा कि इन सभी पहलुओं को देखते हुए और मामले की विस्तृत समीक्षा होने तक 60 प्रतिशत सीटें मुफ्त देने का प्रावधान फिलहाल अगले आदेश तक लागू नहीं किया जाएगा। वर्तमान में, फ्लाइट की 20 प्रतिशत सीटें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के बुक की जा सकती हैं, जबकि बाकी सीटों के लिए यात्रियों को शुल्क देना पड़ता है।एयरलाइंस आमतौर पर सीट चयन के लिए 200 रुपए से लेकर 2,100 रुपए तक चार्ज करती हैं, जो सीट की लोकेशन और अतिरिक्त लेगरूम जैसी सुविधाओं पर निर्भर करता है। 18 मार्च को नागर विमानन मंत्रालय द्वारा जारी मूल निर्देश का उद्देश्य यात्रियों की बढ़ती शिकायतों को दूर करना था, खासकर सीट चयन जैसे सेवाओं पर ज्यादा शुल्क को लेकर।मंत्रालय ने डीजीसीए के जरिए नए दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिसमें एक ही पीएनआर पर यात्रा करने वाले यात्रियों को एक साथ बैठाने (अधिमानतः अगल-बगल की सीटों पर बैठाना) जैसे यात्री हित से जुड़े प्रावधान शामिल थे। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है और भारतीय हवाई अड्डों पर रोजाना 5 लाख से ज्यादा यात्री यात्रा करते हैं। मंत्रालय ने कहा कि वह यात्रियों की सुविधा, पारदर्शिता और विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। -
नयी दिल्ली. सरकार ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि केंद्र सरकार के सभी कर्मचारियों के लिए उनकी भूमिका या स्तर (लेवल) से संबंधित योग्यता-आधारित पाठ्यक्रम विशेष ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसका उल्लेख उनकी वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट में किया जाएगा। कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक सवाल के लिखित जवाब में उच्च सदन को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने योग्यता-आधारित क्षमता निर्माण दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें भूमिका-आधारित शिक्षा, निरंतर कौशल विकास और प्रशिक्षण को भूमिका की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। उन्होंने कहा, ''कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने सभी केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के लिए उनकी भूमिका/स्तर से संबंधित योग्यता-आधारित पाठ्यक्रम और उनके मंत्रालयों/विभागों/संगठनों या कैडर नियंत्रण प्राधिकरणों (सीसीए) द्वारा निर्धारित व्यापक मूल्यांकन को आईजीओटी (एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण) पोर्टल पर प्रतिवर्ष पूरा करना अनिवार्य कर दिया है, जिसका उल्लेख उनकी वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) में भी किया जाएगा।''
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नई दिल्ली। भारतीय मौसम विभाग के ताज़ा पूर्वानुमान के अनुसार दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में एक बार फिर मौसम का मिज़ाज तेजी से बदलने वाला है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पूरे सप्ताह आंधी, बारिश, बिजली गिरने और कहीं-कहीं ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, आज के दिन अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) 80 से 45 प्रतिशत के बीच रही। आज का पूर्वानुमान “थंडरस्टोर्म विथ रेन,” यानी गरज-चमक के साथ बारिश का है, हालांकि फिलहाल किसी तरह की औपचारिक चेतावनी जारी नहीं की गई है।4 अप्रैल को भी मौसम का यही रुख जारी रहेगा। अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम 20 डिग्री रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने विशेष रूप से दोपहर और शाम के समय के लिए अलर्ट जारी किया है। दोपहर में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, साथ ही बिजली चमकने और गरज के साथ बारिश होने की संभावना है। शाम के समय भी यही स्थिति बनी रहेगी, जिससे लोगों को सावधान रहने की सलाह दी गई है।5 अप्रैल को भी गरज-चमक के साथ बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। तापमान 31 डिग्री (अधिकतम) और 18 डिग्री (न्यूनतम) रहने की संभावना है, जबकि ह्यूमिडिटी 85 से 45 प्रतिशत के बीच रहेगी। 6 अप्रैल को मौसम में थोड़ी राहत देखने को मिलेगी। इस दिन आसमान आंशिक रूप से बादलों से घिरा रहेगा। तापमान 31 डिग्री/17 डिग्री रहने की संभावना है। इस दिन कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।7 अप्रैल को फिर से मौसम करवट लेगा और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। तापमान 33 डिग्री/18 डिग्री रहेगा। वहीं 8 अप्रैल को तापमान 31 डिग्री/17 डिग्री रहने की उम्मीद है।मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। इसका असर दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी पड़ेगा। मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि तेज आंधी और बिजली के दौरान खुले स्थानों से दूर रहें, पेड़ों के नीचे खड़े न हों और अनावश्यक यात्रा से बचें।× किसानों को भी फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी गई है। आने वाला सप्ताह एनसीआर के लिए मौसम के लिहाज से काफी उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है, जहां गर्मी के बीच बारिश और तेज हवाएं लोगों को राहत भी देंगी और सतर्क भी रखेंगी। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में कहा कि बिजली के प्रीपेड स्मार्ट मीटर वैकल्पिक व्यवस्था है और इसे अनिवार्य नहीं बनाया गया है। खट्टर ने प्रश्नकार में आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सदस्य हनुमान बेनीवाल के पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए यह बात कही। केंद्रीय मंत्री ने उपभोक्ताओं को प्रीपेड मीटर लगाने के लिए बाध्य किए जाने के कुछ सदस्यों के दावों को खारिज करते हुए कहा, ''प्रीपेड स्मार्ट मीटर वैकल्पिक व्यवस्था है और इसे अनिवार्य नहीं बनाया गया है।'' उन्होंने कहा, ''किसी प्रदेश में जबरन स्मार्ट मीटर लगाने का कोई समाचार नहीं। अगर कहीं से कोई शिकायत आती है तो संज्ञान लेंगे।'' ऊर्जा मंत्री ने यह भी कहा कि कई जगहों पर लोग सालों तक बिजली के बिल नहीं भरते, ऐसे में उन्हें बाध्य करने के लिए प्रीपेड मीटर लगाने पर ही बिजली आपूर्ति की जाती है ताकि उनके बिल लंबित नहीं रहें। उन्होंने कहा कि जहां-जहां प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं, वहां कंपनियों के घाटे खत्म हुए हैं और वे मुनाफे में आ गई हैं। मंत्री ने कहा कि निजी बिजली आपूर्ति कंपनियां व्यावसायिक होती हैं और वे कोई सेवा कार्य नहीं कर रहीं। उन्होंने कहा कि प्रीपेड मीटर लगाने से उपभोक्ताओं, राज्य और निजी कंपनियों, सभी को लाभ होता है। उन्होंने यह भी कहा, ''निजी बिजली कंपनियों के इतिहास में पहली बार पिछले साल सभी निजी कंपनियों ने कुल मिलाकर 2600 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया।'' उन्होंने गरीबों और दैनिक कमाई पर आश्रित रहने वाले लोगों को प्रीपेड मीटर रिचार्ज करने संबंधी कठिनाई होने संबंधी एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि पांच से दस दिन के छोटे रिचार्ज के विकल्प भी उपलब्ध हैं।
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नयी दिल्ली. भारत का वार्षिक रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में सालाना आधार पर 62 प्रतिशत से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया मंच पर जानकारी देते हुए कहा कि रक्षा निर्यात में यह ''बड़ी छलांग'' भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं पर बढ़ते वैश्विक भरोसे को दर्शाती है। देश रक्षा निर्यात में सफलता की शानदार कहानी लिख रहा है। उन्होंने कहा, '' वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह गत वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 62.66 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि है।'' रक्षा मंत्री ने कहा कि 14,802 करोड़ रुपये की इस बड़ी वृद्धि से भारत की स्वदेशी क्षमताओं और उन्नत विनिर्माण क्षमता पर वैश्विक विश्वास झलकता है। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) का योगदान 54.84 प्रतिशत और निजी उद्योग का योगदान 45.16 प्रतिशत रहा जो सहयोगात्मक एवं आत्मनिर्भर रक्षा परिवेश की ताकत को दर्शाता है। भारत का रक्षा निर्यात 2024-25 में 23,622 करोड़ रुपये और 2023-24 में 21,083 करोड़ रुपये रहा था।
- नई दिल्ली। नासा का आर्टेमिस II चंद्र मिशन अमेरिका के फ्लोरिडा से प्रक्षेपित हुआ। इसमें चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर 50 से अधिक वर्षों में पहली बार चंद्रमा के चारों ओर मानवयुक्त उड़ान भरी गई। स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट जिसके शीर्ष पर ओरियन अंतरिक्ष यान लगा था, बुधवार को शाम 6:35 बजे (ईस्टर्न टाइम) नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से प्रक्षेपित किया गया।यह आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत नासा का पहला मानवयुक्त मिशन है। चार सदस्यीय दल में नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच शामिल हैं। साथ ही कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन भी दल का हिस्सा हैं।लॉन्च काउंटडाउन को टी-10 मिनट के समय पर थोड़ी देर के लिए रोका गया था, जिसके बाद कुछ मिनटों में इसे फिर से शुरू कर दिया गया। आर्टेमिस II मिशन गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए आवश्यक कई क्षमताओं का प्रदर्शन करेगा। नासा के अनुसार, इसका उद्देश्य ओरियन के जीवन-समर्थन प्रणालियों को सत्यापित करना और अंतरिक्ष यात्रियों को आर्टेमिस III और आगामी चंद्र मिशनों की सफलता के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण संचालन का अभ्यास करने का अवसर देना है।दल चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से से लगभग 7,400 किलोमीटर आगे तक यात्रा करेगा और फिर पृथ्वी पर लौटेगा। यह मिशन अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से पहले से कहीं अधिक दूर और चंद्रमा के पहले से कहीं अधिक निकट ले जाएगा, जैसा कि पिछले आधे शताब्दी में कभी नहीं हुआ। पुनः प्रवेश (री-एंट्री) इस मिशन के सबसे चुनौतीपूर्ण चरणों में से एक होगा। ओरियन के पृथ्वी के वायुमंडल में लगभग 25,000 मील प्रति घंटे की गति से प्रवेश करने की उम्मीद है, जहां उसे लगभग 5,000 डिग्री तापमान का सामना करना पड़ेगा, इसके बाद यह प्रशांत महासागर में उतरेगा।मिशन के दौरान, अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष यान के प्रदर्शन का मूल्यांकन करेंगे, आपातकालीन प्रक्रियाओं का अभ्यास करेंगे और चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से की तस्वीरें लेंगे। यह दल कई ऐतिहासिक उपलब्धियों का भी प्रतिनिधित्व करता है। इस मिशन में पहली महिला, पहला अफ्रीकी-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और चंद्रमा की ओर यात्रा करने वाला पहला कनाडाई शामिल है। आर्टेमिस II को नासा की व्यापक योजना के शुरुआती कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानव उपस्थिति स्थापित करना और अंततः अंतरिक्ष यात्रियों को मंगल ग्रह तक भेजना है। आर्टेमिस कार्यक्रम अपोलो मिशनों के बाद शुरू किया गया है, जिनके तहत 1968 से 1972 के बीच 24 अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजा गया था, जिनमें से 12 ने उसकी सतह पर कदम रखा था। नासा इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए चंद्रमा पर एक दीर्घकालिक आधार (लूनर बेस) स्थापित करना चाहता है और इस दशक
- नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को 7, लोक कल्याण मार्ग पर सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की विशेष बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान विभिन्न मंत्रालयों द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की गई और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक में आम आदमी के लिए आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों की स्थिरता पर विशेष ध्यान दिया गया। सरकार ने एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति में विविधता लाने, ईंधन शुल्क में कटौती और बिजली क्षेत्र से जुड़े उपायों की समीक्षा की।सरकार ने स्पष्ट किया कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय बढ़ाया गया है और नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं।बैठक में कृषि क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। यूरिया उत्पादन को बनाए रखने और डीएपी/एनपीकेएस के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ समन्वय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि खरीफ और रबी सीजन में किसानों को किसी तरह की कमी का सामना न करना पड़े।ऊर्जा क्षेत्र में भी व्यापक तैयारियों की समीक्षा की गई। सरकार ने बताया कि कोयले का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और गर्मियों में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं। गैस आधारित बिजली संयंत्रों को राहत देने और कोयले की आपूर्ति बढ़ाने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।कृषि, नागर विमानन, शिपिंग, लॉजिस्टिक्स और एमएसएमई सेक्टर्स में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए भी रणनीति बनाई गई। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और अन्य आवश्यक आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने पर जोर दिया गया।होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, ताकि व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गलत जानकारी और अफवाहों को रोकने के लिए समय पर और सटीक सूचना जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया। केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर बेहतर समन्वय और रीयल-टाइम संचार के जरिए जन जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए।प्रधानमंत्री मोदी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे वैश्विक संकट के प्रभाव से नागरिकों को बचाने के लिए हर संभव कदम उठाएं और प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को कम करने के लिए सक्रिय रहें। ????
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हनुमान जी के जन्मोत्सव पर उन्हें नमन किया है। उन्होंने प्रार्थना की कि महाबली की कृपा से उनके सभी भक्तों में साहस और सकारात्मकता का संचार हो। प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “भगवान हनुमान जी भक्ति, शक्ति और अटूट समर्पण के अद्वितीय प्रतीक हैं। महाबली की कृपा से उनके सभी भक्तों में साहस और सकारात्मकता का संचार हो।”इस अवसर पर उन्होंने एक ‘संस्कृत सुभाषितम्’ भी शेयर किया। पीएम मोदी ने लिखा, “मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शिरसा नमामि॥” ‘संस्कृत सुभाषितम्’ में कहा गया है, “मैं श्रीराम के दूत हनुमानजी की शरण में शीश झुकाता हूं। वे मन के समान तीव्रगामी और वायु के समान वेगवान हैं। वे जितेंद्रिय, बुद्धिमानों में अग्रगण्य, पवन पुत्र और वानर सेना के नायक हैं।”एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने प्रयागराज के प्रसिद्ध लेटे हुए हनुमान जी के मंदिर में दर्शन करते हुए एक तस्वीर भी शेयर की। उन्होंने लिखा, “सभी देशवासियों को हनुमान जन्मोत्सव की अनंत शुभकामनाएं। यह पावन अवसर हर किसी के जीवन में नई ऊर्जा और स्फूर्ति लेकर आए। मेरी कामना है कि पवन पुत्र हनुमान जी सभी को बल, बुद्धि और विद्या का भरपूर आशीर्वाद दें, जिससे देश का सामर्थ्य और बढ़े। जय बजरंगबली।”केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “श्री हनुमान जन्मोत्सव के पावन पर्व की सभी श्रद्धालुओं और देशवासियों को मंगलमय शुभकामनाएं। प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त, बल, बुद्धि, विद्या के दाता, संकट मोचन श्री हनुमान जी की कृपा सभी पर बनी रहे। सबके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्यता का वास हो, सबका मंगल व कल्याण हो, यही प्रार्थना है।”उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हनुमान जी के जन्मोत्सव पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “बजरंग बली की कृपा आप सभी के जीवन में ज्ञान, भक्ति, अदम्य साहस, एकाग्रता, सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का संचार करें, यही कामना है।
- नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं के बीच केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर 30 जून 2026 तक पूरी कस्टम ड्यूटी छूट देने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह कदम अस्थायी और लक्षित राहत के तौर पर उठाया गया है, ताकि देश में जरूरी पेट्रोकेमिकल कच्चे माल की उपलब्धता बनी रहे, डाउनस्ट्रीम उद्योगों पर लागत का दबाव कम हो और सप्लाई स्थिर रह सके। सरकार के अनुसार, इस फैसले से प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल, केमिकल, ऑटो कंपोनेंट्स और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे अंतिम उत्पादों के उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकती है।इन उत्पादों पर मिलेगी छूटछूट वाले प्रमुख पेट्रोकेमिकल उत्पादों में एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यून, स्टाइरीन, डाइक्लोरोमीथेन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर, मेथनॉल, आइसोप्रोपिल अल्कोहल, मोनोएथिलीन ग्लाइकोल (एमईजी) और फिनोल शामिल हैं। इसके अलावा एसिटिक एसिड, विनाइल एसीटेट मोनोमर, प्योरिफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड (पीटीए), अमोनियम नाइट्रेट, एथिलीन के पॉलिमर, एपॉक्सी रेजिन, फॉर्मेल्डिहाइड, यूरिया फॉर्मेल्डिहाइड, मेलामाइन फॉर्मेल्डिहाइड और फिनोल फॉर्मेल्डिहाइड जैसे उत्पाद भी इस सूची में शामिल किए गए हैं।उद्देश्य बढ़ती माल ढुलाई लागत और युद्ध से जुड़े व्यापारिक जोखिमों का सामना कर रहे भारतीय निर्यातकों को समय पर राहत देना है, खासकर खाड़ी और पश्चिम एशिया के समुद्री मार्गों में आई बाधाओं को देखते हुए।सरकार ने बताया कि भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल, एटीएफ, एलपीजी और एलएनजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जिससे अल्पकालिक चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। साथ ही, देश विभिन्न वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं से ऊर्जा आपूर्ति बनाए हुए है।--
- नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आने वाले हफ्तों में ईरान के खिलाफ हमले और तेज करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ये सैन्य कार्रवाई अभी कुछ हफ्तों तक जारी रहेगी और अमेरिका जल्द ही और जोरदार हमले करेगा। देश के नाम संबोधन में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन को बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य में निवेश बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम अमेरिका और दुनिया को सुरक्षित बनाने के लिए उठाया गया है। ट्रंप ने कहा कि यह सैन्य अभियान एक महीने से ज्यादा समय से चल रहा है और अमेरिका ने पहले ही बड़े खतरे को खत्म कर दिया है। उनके अनुसार, “हम इस ऑपरेशन में 32 दिनों से हैं और अब कोई बड़ा खतरा नहीं बचा है।” अभियान की तेजी को दिखाने के लिए ट्रंप ने प्रथम विश्व युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध, कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध और इराक युद्ध का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन युद्धों के मुकाबले ईरान ऑपरेशन बेहद तेज और प्रभावी रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि लड़ाई के इतिहास में किसी दुश्मन को इतने कम समय में इतना बड़ा नुकसान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह सैन्य ताकत और रणनीतिक स्पष्टता का उदाहरण है।डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका उनके बिजली उत्पादन संयंत्रों पर बड़े पैमाने पर हमले कर सकता है। ट्रंप ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए यह जंग जरूरी है, हालांकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने पहले संकेत दिया था कि तेहरान की ऐसी मंशा नहीं है। अपने संबोधन के अंत में ट्रंप ने कहा कि यह लड़ाई लगभग खत्म हो चुकी है और अमेरिका अपने सभी लक्ष्यों को हासिल करने के करीब है।

















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