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- सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल). दार्जिलिंग से भारतीय जनता पार्टी के सांसद राजू बिष्ट ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार ने गोरखा मुद्दे पर अंतिम समझौते का मसौदा तैयार करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत एक समिति गठित की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, गोरखा नेताओं और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच हुई अहम बैठक के बाद बिष्ट ने यह जानकारी दी। इस बैठक का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से जारी समस्याओं के ''स्थायी राजनीतिक समाधान'' के लिए आगे की रूपरेखा तय करना था। शाह के उत्तर बंगाल दौरे के तीसरे और अंतिम दिन दार्जिलिंग की पहाड़ियों की तलहटी में स्थित सुकना के एक होटल में यह बैठक हुई। इसमें मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, पर्वतीय क्षेत्र के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और अन्य हितधारक शामिल हुए। बिष्ट ने कहा, ''गृह मंत्रालय के तहत वार्ताकार पंकज कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। यह समिति आज हुए समझौते के अंतिम मसौदे को तैयार करने का काम करेगी।'' गृह मंत्रालय ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी और पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज कुमार सिंह को अक्टूबर 2025 में इस मुद्दे पर सरकार का आधिकारिक वार्ताकार नियुक्त किया था। उनकी भूमिका राजनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने और गोरखा समुदाय की काफी समय से लंबित मांगों का समाधान तलाशने पर केंद्रित है। बिष्ट ने कहा कि शनिवार की बैठक एक ऐतिहासिक दिन पर हुई है क्योंकि 1988 में इसी तारीख को गोरखा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। केंद्र, पश्चिम बंगाल सरकार और गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के बीच हुए इस समझौते के बाद दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल (डीजीएचसी) का गठन हुआ था। इससे पहले अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर हिंसक आंदोलन हुआ था। बिष्ट ने कहा, ''पर्वतीय समुदायों का संघर्ष चार दशक से अधिक पुराना है। इस दौरान पिछली वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस सरकारों ने पर्वतीय क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं को कुचला। हमारे करीब 2,000 लोगों ने जान गंवाई, 5,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए और महिलाओं को यातनाएं दी गईं तथा उनके साथ दुष्कर्म किया गया।'' उन्होंने कहा कि बैठक में विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों ने अपनी चिंताएं और अपेक्षाएं सामने रखीं तथा मुख्यमंत्री ने भी बताया कि वह पर्वतीय क्षेत्र के लोगों के मुद्दों का समाधान किस तरह करना चाहते हैं। बिष्ट ने कहा, ''सभी पक्षों की बात सुनने के बाद शाह ने बैठक का सार रखते हुए बताया कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे का स्थायी समाधान किस प्रकार किया जाएगा।'' बैठक में भाजपा के चुनावी वादे के अनुरूप संवैधानिक ढांचे के तहत दार्जिलिंग पहाड़ियों की समस्याओं का ''स्थायी राजनीतिक समाधान'' तलाशने पर चर्चा हुई। बैठक में शुभेंदु अधिकारी के अलावा गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) प्रमुख बिमल गुरुंग, पार्टी के वरिष्ठ नेता रोशन गिरि, जीएनएलएफ प्रमुख मान घीसिंग, राज्य सरकार के कई मंत्री, पर्वतीय क्षेत्र के भाजपा विधायक और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। पिछली राज्य सरकारों ने डीजीएचसी और गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) जैसी व्यवस्थाओं के जरिए इस मुद्दे के समाधान का प्रयास किया था, लेकिन इनसे क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति, आर्थिक समृद्धि और राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित नहीं हो सकी।
- तमिलनाडु सोना अंगूठी योजना...दो आभूषण कंपनियों को कार्यादेशचेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने नवजात शिशुओं के लिए 'थाई मामन स्वर्ण अंगूठी योजना' के तहत सोने की अंगूठियां खरीदने के वास्ते दो आभूषण कंपनियों को कार्यादेश जारी किया है। सरकार ने यह जानकारी दी। यह योजना पूर्व मुख्यमंत्री सी. एन. अन्नादुरई की जयंती के अवसर पर 15 सितंबर को शुरू की जाएगी।सरकार ने शुक्रवार देर रात बताया कि तमिलनाडु चिकित्सा सेवा निगम (टीएनएमएससी) ने जून से सितंबर तक के लाभार्थियों के लिए आवश्यक सोने की 1,28,499 अंगूठियों की आपूर्ति के वास्ते जॉय अलुक्कास और कल्याण ज्वैलर्स को 70:30 के अनुपात में कार्यादेश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना की घोषणा की थी। इसका लाभ सरकारी अस्पतालों में पैदा हुए शिशुओं को मिलेगा ताकि सरकारी चिकित्सा संस्थानों में प्रसव को प्रोत्साहित किया जा सके। सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया, ''एक ग्राम वजन की सोने की 4,41,667 अंगूठियां उपलब्ध कराने के शासकीय आदेश के बाद तमिलनाडु चिकित्सा सेवा निगम ने 14 जुलाई को निविदा जारी की थी। इसमें 11 कंपनियों ने हिस्सा लिया और 'टीएन टेंडर्स' पोर्टल के जरिए अपनी कीमतों का ब्योरा दिया।'' विज्ञप्ति के अनुसार, जॉय अलुक्कास ने एक ग्राम सोने की कीमत को छोड़कर प्रसंस्करण शुल्क, बीमा, परिवहन और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की मुहर लगाने सहित सभी अतिरिक्त शुल्क के लिए सबसे कम 0.01 रुपये की बोली लगाई। तमिलनाडु गैर-प्रकटीकरण समझौता अधिनियम और नियमों के तहत कल्याण ज्वैलर्स ने भी सबसे कम कीमत की बोली प्रस्तुत की। विज्ञप्ति में कहा गया कि योजना 15 सितंबर 2026 को शुरू की जानी है, इसलिए जून से चार महीने के दौरान लाभार्थियों को सोने की 1,28,499 अंगूठियां उपलब्ध कराने के लिए जॉय अलुक्कास और कल्याण ज्वैलर्स को 70:30 के अनुपात में कार्यादेश जारी किया गया है। सरकारी अस्पतालों में 22 जून 2026 से जन्म लेने वाले बच्चों को इस योजना का लाभ मिलेगा।
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नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ शनिवार को पहली बैठक की जिसमें चुनावी रणनीति और जमीनी स्तर पर जनसंपर्क को लेकर चर्चा की गई। पार्टी सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार, बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों, बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने और सरकार की योजनाओं एवं पहलों को जनता तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। उन्होंने बताया कि दिन में और बैठकें प्रस्तावित हैं, जिनमें भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और राज्य प्रभारी शामिल होंगे। भाजपा ने इस सप्ताह की शुरुआत में नितिन नवीन के नेतृत्व में नयी राष्ट्रीय टीम की घोषणा की थी। इसमें कुल 65 पदाधिकारी शामिल हैं, जिनमें 51 नए चेहरे हैं। नयी टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व पदाधिकारी राम माधव सहित 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को आठ राष्ट्रीय महासचिवों में से एक नियुक्त किया गया है। बी.एल. संतोष को राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) पद पर बरकरार रखा गया है, जबकि विनोद तावड़े और सुनील बंसल महासचिव पद पर हैं। भाजपा की नयी टीम में 12 महिलाएं और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े छह नेता शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। इससे पहले भी वह मई 2014 में नरेन्द्र मोदी सरकार के गठन से पहले इस पद पर रह चुके हैं। भाजपा ने अपने सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय को पद से हटाकर उनकी जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हास्के को नियुक्त किया है। वहीं, गुजरात के हेमांग जोशी को पार्टी युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने लोकसभा सांसद तेजस्वी सूर्या का स्थान लिया है। यह संगठनात्मक बदलाव वर्ष 2015 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के कार्यकाल में हुए बड़े फेरबदल के बाद एक दशक से अधिक समय में सबसे बड़ा बदलाव है। इस फेरबदल के बाद संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं। -
नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को देश में एच1एन1 इन्फ्लूएंजा की मौजूदा स्थिति और तैयारियों की समीक्षा की, जिसमें विशेष रूप से राष्ट्रीय राजधानी पर ध्यान केंद्रित किया गया।मीटिंग में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह और स्वास्थ्य अधिकारी शामिल थे। मीटिंग का उदेश्य इन्फ्लूएंजा और इससे होने वाली संभावित जटिलताओं से पीड़ित मरीजों के लिए तैयारियों और व्यवस्थाओं को मजबूत करना था। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के आंकड़ों के अनुसार, 12 अगस्त तक दिल्ली में एच1एन1 के लगभग 1,449 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले साल इसी अवधि में दर्ज किए गए 229 मामलों की तुलना में छह गुना से अधिक की वृद्धि है।उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एच1एन1 के अलावा दिल्ली में इस वर्ष इन्फ्लूएंजा बी (यामागाता) के 184 मामले दर्ज किए गए हैं। इससे पहले, दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि बढ़ते मामलों से निपटने के लिए सफदरजंग अस्पताल, राम मनोहर लोहिया अस्पताल और दिल्ली सरकार के अन्य अस्पतालों में विशेष वार्ड बनाए गए हैं।
पंकज कुमार सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में डॉक्टर मरीजों का उचित इलाज कर रहे हैं और हमने दवाइयों, बिस्तरों और वेंटिलेटर के मामले में पर्याप्त व्यवस्था की है। 2019 में, दिल्ली में एच1एन1 के 3,637 मामले और इससे संबंधित 31 मौतें दर्ज की गईं। एच1एन1 इन्फ्लूएंजा ‘ए’ वायरस का एक प्रकार है जो मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है।डॉक्टरों के अनुसार, एच1एन1 संक्रमण नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है, जिसके लक्षणों में आमतौर पर बुखार, खांसी, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, पसीना आना और ठंड लगना शामिल हैं। अधिकांश इन्फ्लूएंजा संक्रमण स्वतः ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ रोगियों में वायरल निमोनिया, द्वितीयक जीवाणु निमोनिया या पहले से मौजूद हृदय और फेफड़ों की स्थिति बिगड़ने जैसी जटिलताएं विकसित हो सकती हैं।डॉक्टर आमतौर पर इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षणों वाले लोगों को अपनी स्थिति पर नजर रखने और लक्षण गंभीर होने या लगातार बिगड़ने पर चिकित्सा सहायता लेने की सलाह देते हैं। सांस लेने में कठिनाई, लगातार सीने में दर्द, भ्रम, अत्यधिक कमजोरी या निर्जलीकरण ऐसे लक्षण हैं जिनके लिए तत्काल चिकित्सा जांच की आवश्यकता होती है।एक अलग घटनाक्रम में मंत्रालय ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव (नीति) की अध्यक्षता में आज पीएम-एबीएचआईएम और 15वें वित्त आयोग (15वें एफसी) स्वास्थ्य अनुदान पर एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई।बयान में कहा गया कि पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, दादरा एवं नगर हवेली, दमन एवं दीव, लक्षद्वीप, पुडुचेरी, केरल, जम्मू एवं कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। बयान में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से भौतिक और वित्तीय प्रगति में तेजी लाने तथा स्वीकृत स्वास्थ्य अवसंरचना और सुविधाओं के समय पर पूरा होने और संचालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी का कारण एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का इस्तेमाल करना बताना गलत है। आधिकारिक बयान में कहा गया कि एथेनॉल उत्पादन के लिए उपयोग हो रही चीनी का शेयर 2025-26 में कम होकर करीब 9 प्रतिशत हो गया है, जो कि 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत था।
साथ ही, कहा कि मौजूदा समय में देश में एथेनॉल के उत्पादन के लिए मक्के का उपयोग हो रहा है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने बताया कि चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी कई वजहों से हो रही है, जिनमें उम्मीद से कम घरेलू उत्पादन, त्योहारों के मौसम से पहले बढ़ी हुई मांग, मौसम की वजह से गन्ने की फसल को हुआ नुकसान, दुनिया भर में चीनी की सप्लाई में कमी और इंडस्ट्री के कुछ हिस्सों की तरफ से सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं।मौजूदा सीजन में चीनी का उत्पादन लगभग 306 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) रहने का अनुमान है, जबकि गन्ना उगाने वाले राज्यों का शुरुआती अनुमान लगभग 343 एलएमटी था। गन्ने में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ-साथ ज्यादा बारिश की वजह से जलभराव से भी उत्पादन पर असर पड़ा है।अनुमान से कम उत्पादन के बावजूद, अक्टूबर में नया क्रशिंग सीजन शुरू होने तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार ने बताया कि वर्तमान में चीनी की आपूर्ति में कमी एक ग्लोबल समस्या है और यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है।2026-27 के लिए दुनिया भर में चीनी की कमी का अनुमान लगभग 33 एलएमटी लगाया गया है। मौसम के हालात को लेकर चिंता ने भी ग्लोबल आउटलुक पर असर डाला है। नतीजतन, चीनी की इंटरनेशनल कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। 30 जून 2026 को ये 474 डॉलर प्रति टन थीं, जो 20 अगस्त 2026 को बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई हैं, जो कि दो महीने से भी कम समय में 16 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी को दिखाता है।मंत्रालय के मुताबिक, भारत में आम तौर पर हर साल लगभग 320-340 एलएमटी चीनी का उत्पादन होता है, जबकि देश में इसकी खपत लगभग 280-290 एलएमटी होती है। जब उत्पादन जरूरत से ज्यादा होता है, तो अतिरिक्त स्टॉक के कारण चीनी मिलों का पैसा फंस जाता है और गन्ना किसानों को भुगतान में देरी हो सकती है। अतिरिक्त चीनी का एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल करने से इस बुनियादी समस्या को हल करने में मदद मिली है और चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाकाइंडे हिचिलेमा को फिर से जाम्बिया का राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि भारत इस अफ्रीकी देश के साथ अपनी बहुआयामी साझेदारी को बहुत महत्व देता है। मोदी ने कहा कि वह हिचिलेमा के नेतृत्व में भारत-जाम्बिया संबंधों को और मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने को उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "हाकाइंडे हिचिलेमा को फिर से जाम्बिया का राष्ट्रपति चुने जाने पर हार्दिक बधाई। भारत, जाम्बिया के साथ अपनी बहुआयामी साझेदारी को बहुत महत्व देता है और मैं उनके नेतृत्व में हमारे संबंधों को और मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने को उत्साहित हूं।" हिचिलेमा को पांच साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति चुना गया है। उन्होंने जाम्बिया में हुए राष्ट्रपति चुनाव में कुल पड़े 50 लाख मतों में से 61.4 प्रतिशत हासिल कर जीत दर्ज की। जाम्बिया के निर्वाचन आयोग ने मंगलवार सुबह घोषणा की कि राष्ट्रपति हाकाइंडे हिचिलेमा पांच साल के दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से निर्वाचित हुए हैं।
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अयोध्या (उप्र) अयोध्या के संत और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व सदस्य शुक्रवार को राम मंदिर परिसर के चारों ओर करीब तीन किलोमीटर लंबी रामकोट की दैनिक परिक्रमा की पहली वर्षगांठ मनाएंगे। मंदिर के एक सूत्र ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। रामकोट की दैनिक परिक्रमा पिछले साल 21 अगस्त को शुरू हुई थी। तब से संतों का एक समूह रोजाना सुबह साढ़े पांच से साढ़े छह बजे के बीच नियमित रूप से इसकी परिक्रमा कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को इस अवसर पर भव्य आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। परिक्रमा के दौरान कई स्थानों पर संतों पर पुष्पवर्षा की जाएगी। राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने आयोजन की तैयारियों को लेकर बृहस्पतिवार शाम अयोध्या के संतों के साथ बैठक की। सूत्रों ने बताया कि बैठक में करीब 2,000 साधुओं के वार्षिकोत्सव परिक्रमा में शामिल होने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने भी अयोध्या के कई मंदिरों का दौरा कर संतों को आयोजन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। वर्षगांठ समारोह में अयोध्या के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में संतों और धार्मिक हस्तियों के शामिल होने का अनुमान है। भाषा सं जफर खारी
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चेन्नई. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि 'वंदे मातरम्' के केवल दो अंतरे गाने का पार्टी का फैसला 'राष्ट्र-विरोधी' है तथा इसका मकसद कानून की खुली अवहेलना कर ''वोट बैंक'' के लिए तुष्टीकरण करना है। शाह ने राष्ट्रगीत को पूरा गाने के बजाय केवल दो अंतरे गाने के कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के फैसले का उल्लेख करते हुए देश के विभाजन के इतिहास का जिक्र किया और कहा कि 'वंदे मातरम्' के टुकड़े करने के कारण देश को इसके परिणाम भुगतने पड़े। शाह ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, ''कांग्रेस कार्यसमिति ने 'वंदे मातरम्' के पूर्ण गान की जगह केवल दो अंतरे गाने का जो फैसला किया है, वह न केवल देश विरोधी है बल्कि संसद के बनाए कानून की खुली अवहेलना भी है।'' शाह ने 'एक्स' पर कहा, ''कांग्रेस ने ही 1937 में तुष्टीकरण के लिए 'वंदे मातरम्' के दो टुकड़े किए। वहीं से दो-राष्ट्र सिद्धांत को ताकत मिली और देश का विभाजन हुआ। '' उन्होंने कहा, ''वंदे मातरम्' के 150वें वर्ष पर (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी (के नेतृत्व वाली) सरकार ने यह ऐतिहासिक गलती सुधारी और पूर्ण गान को कानूनी स्वरूप दिया लेकिन राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस फिर उसी वोट बैंक के लिए तुष्टीकरण के रास्ते पर है।'' उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम्' के टुकड़े करने की गलती एक बार हो चुकी है और देश उसके परिणाम भुगत चुका है। उन्होंने कहा, ''देशवासियों से यह अपील है कि कांग्रेस के इस तुष्टीकरण के खिलाफ एकजुट होकर आवाज बुलंद करें।'' कांग्रेस की शीर्ष नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने बुधवार को अपने 1937 के प्रस्ताव को मानने का फ़ैसला किया। इसके तहत अब पार्टी के सभी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम्' के सिर्फ दो ही अंतरे गाये जायेंगे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस द्वारा अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाए जाने के फैसले को लेकर विपक्षी दल पर निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस वोट के लिए ''नयी मुस्लिम लीग'' बन गई है।
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नयी दिल्ली. कैंसर क्यों होता है? दिल्ली के इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के शोधकर्ता इस अहम सवाल का जवाब तलाशने की दिशा में एक कदम आगे बढ़े हैं। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर आधारित एक मंच तैयार किया है, जो डीएनए को हुए नुकसान को समझने और यह पता लगाने में मदद करता है कि कैंसर की शुरुआत किन कारणों से हुई। शोधकर्ताओं के मुताबिक, 'म्यूटएआईवर्स' जनरेटिव एआई पर आधारित अपनी तरह का पहला मंच है। उन्होंने बताया कि गुवाहाटी में सिर और गर्दन के कैंसर से पीड़ित 27 मरीजों पर परीक्षण के दौरान 'म्यूटएआईवर्स' ने तंबाकू के सेवन को बीमारी की जड़ के रूप में पहचाना। 'जनरेटिव एआई' एक ऐसी प्रौद्योगिकी है, जिसे बड़ी मात्रा में डेटा के आधार पर प्रशिक्षित किया जाता है। यह चित्र, ऑडियो और वीडियो समेत अन्य सामग्री तैयार कर सकता है तथा उपयोगकर्ता के प्राकृतिक भाषा में दिए गए निर्देशों का जवाब दे सकता है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने कहा कि एआई भले ही कैंसर के उभार को समझने के लिए अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध कराता है, लेकिन अपने मौजूदा स्वरूप में यह पक्के तौर पर साबित नहीं करता कि किसी खास चीज के संपर्क में आने से डीएनए को हुआ नुकसान ही कैंसर का कारण बना। शोध दल में गुवाहाटी स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (एनआईपीईआर) और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर)- इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) के शोधकर्ता भी शामिल थे। शोधकर्ताओं ने कहा कि उनका शोध केवल बीमारी की पहचान तक सीमित रहने के बजाय उसके कारणों पर ध्यान केंद्रित करता है और यह एक उपयोगी जांच उपकरण साबित हो सकता है। मुख्य शोधकर्ता और आईआईआईटी-दिल्ली के कंप्यूटेशनल बायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर गौरव आहूजा ने कहा, "कोई भी इस बात पर चर्चा नहीं करता कि कैंसर किस वजह से हुआ। आप किस चीज के संपर्क में आए? क्या आप प्रदूषण के संपर्क में थे? क्या आप दूषित पानी के संपर्क में थे? या फिर आप सिगरेट के धुएं के संपर्क में थे? इसकी जानकारी आपको कोई नहीं देता।" उन्होंने कहा कि हम जिस वातावरण में रहते हैं, वहां हम लगातार कई तरह के रसायनों के संपर्क में आते रहते हैं, जो डीएनए में बदलाव पैदा कर सकते हैं। आहूजा ने कहा, "मेरे विचार से यह शोध एक अहम सफलता है, क्योंकि लोग अब सिर्फ इस बात पर चर्चा नहीं कर रहे हैं कि किसी व्यक्ति को कैंसर हो गया, बल्कि इस बारे में भी बात कर रहे हैं कि पीड़ित व्यक्ति किन चीजों के संपर्क में आया था। इससे परिवार के अन्य सदस्यों को भी बचाने में मदद मिल सकती है, खासकर तब जब वे उस इलाके में रहते हों, जहां संबंधित चीज का असर या मौजूदगी ज्यादा हो।" यह शोध 'जर्नल ऑफ केमइंफॉर्मेटिक्स' में प्रकाशित किया गया है।
आहूजा ने बताया कि 'म्यूटएआईवर्स' मशीन-लर्निंग पर आधारित 'एडक्टलिंकर' नाम के एक 'बैकट्रैकिंग टूल' से लैस है। उन्होंने बताया कि कैंसर से जूझ मरीज के ट्यूमर में क्षतिग्रस्त डीएनए मिलने पर 'एडक्टलिंकर' "अपराधी तक पहुंचने के लिए सबूतों की कड़ी जोड़ने वाले जासूस की तरह काम करता है", जिससे हमें उस पर्यावरणीय रसायन 'जीनोटॉक्सिन' या 'कार्सिनोजन' का पता लगाने में मदद मिलती है, जो कैंसर का मूल कारण बना।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और कई अन्य पार्टी नेताओं ने बृहस्पतिवार को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। सोनिया गांधी, खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने 'वीर भूमि' पहुंचकर राजीव गांधी की समाधि पर पुष्प अर्पित किए। बाद में इन नेताओं ने संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में राजीव गांधी के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि।'' खरगे ने राजीव गांधी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने लाखों लोगों में उम्मीद जगाई और भारत को 21वीं सदी की संभावनाओं के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कांग्रेस अध्यक्ष ने 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि राजीव गांधी एक ''दूरदर्शी नेता'' थे और उनकी विरासत उन बड़े बदलावों में जीवित है, जिनका उन्होंने समर्थन किया तथा भारत के युवाओं, तकनीकी प्रगति और नए विचारों में उनके अटूट विश्वास में भी यह विरासत दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी को सबसे सार्थक श्रद्धांजलि भारत की सद्भाव और मेल-मिलाप की भावना को मजबूत करना तथा बौद्धिक स्वतंत्रता, नवाचार और युवाओं की आकांक्षाओं को बढ़ावा देना होगी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने पिता एवं पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर उन्हें याद करते हुए कहा कि उनके सपनों का भारत बनाने का संकल्प हमेशा उनका मार्गदर्शन करता रहेगा। राहुल गांधी ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''भारतीयों के बीच सद्भावना, हर दिल में करुणा और, हर नागरिक को न्याय और लोकतंत्र में समान अधिकार... पापा, आपकी ये सीख मेरी शक्ति है और आपकी यादें मेरी हिम्मत। आपके सपनों का भारत बनाने का संकल्प हमेशा मेरा मार्गदर्शन करता रहेगा।'' राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था। वह 40 वर्ष की उम्र में 31 अक्टूबर 1984 को देश के प्रधानमंत्री बने और दो दिसंबर 1989 तक इस पद पर रहे। तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में 21 मई 1991 को चुनावी सभा के दौरान आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गई थी। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने प्रशासन, शिक्षा, संचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में आधुनिकीकरण पर जोर दिया था। उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया था।
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नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस द्वारा अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाए जाने के फैसले को लेकर बृहस्पतिवार को विपक्षी दल पर निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस वोट के लिए ''नयी मुस्लिम लीग'' बन गई है। नवीन ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि भारत माता' की इस वंदना का अपमान उन हजारों लोगों का तिरस्कार है जिन्होंने इस गीत को अपनी चेतना में रखकर राष्ट्र के लिए बलिदान दिया था। कांग्रेस ने बुधवार को कहा था कि वह 'वंदे मातरम्' को लेकर 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और उस समय के अन्य प्रमुख नेताओं द्वारा किए गए फैसले का पूरी तरह पालन करेगी तथा इसी के अनुरूप पार्टी कार्यकर्ता राष्ट्रगीत के सिर्फ दो अंतरे ही गाएंगे। पार्टी की शीर्ष नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में इसे लेकर चर्चा हुई और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 1937 के सीडब्ल्यूसी के उस प्रस्ताव के कुछ अंश भी पढ़े जो महान नेताओं की मौजूदगी में पारित हुआ था और जिसमें वंदे मातरम् के दो अंतरों के गायन का निर्णय लिया गया था। नवीन ने कांग्रेस के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ''कांग्रेस ने अब अपने अपमान (वंदे मातरम् के प्रति) को एक प्रस्ताव की शक्ल दे दी है। उसकी कार्यसमिति ने तय किया है कि कांग्रेस के मंचों पर 'वंदे मातरम्' के केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे। उन्होंने कहा, ''कांग्रेस आज की नयी मुस्लिम लीग बन गई है।''
नवीन ने कहा, ''भारत माता' की इस पावन वंदना का अपमान उन हजारों बलिदानियों का तिरस्कार है, जिन्होंने इसी गीत को अपनी चेतना में रखकर राष्ट्र के लिए बलिदान दिया था।'' नवीन ने कांग्रेस कार्यालय में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम् के गायन को लेकर हुए विवाद की ओर परोक्ष रूप से इशारा करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले राष्ट्रगीत के प्रति यही अपमान ''एक व्यक्ति के आचरण'' में दिखाई दिया था, लेकिन कांग्रेस ने इसे ''संयोग'' बताकर खारिज कर दिया था। भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ''आज वही अपमान कांग्रेस की नीति बन गया है। उन्होंने कहा, ''यह केवल राजनीतिक बचाव नहीं, बल्कि उस वोट बैंक की भूख का प्रमाण है, जिसके लिए कांग्रेस ने राष्ट्र के स्वाभिमान को हर बार गिरवी रखा है।
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नयी दिल्ली. कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का बृहस्पतिवार को यहां सफदरजंग अस्पताल में निधन हो गया। सज्जन कुमार वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। अस्पताल के अनुसार, 84 वर्षीय कुमार को पुलिस पूर्वाह्न करीब 11 बजे जब अस्पताल लेकर पहुंची तो वह पूरी तरह होश में नहीं थे। अस्पताल ने एक बयान में बताया, ''सज्जन कुमार (84) को पुलिस पूर्वाह्न करीब 11 बजे वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल लेकर पहुंची। उन्हें तत्काल भर्ती किया गया और उपचार शुरू किए गए।'' बयान के मुताबिक, ''सभी आवश्यक चिकित्सा एवं जीवन रक्षक उपाय किए जाने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और दोपहर 12:30 बजे उनका निधन हो गया।'' अस्पताल ने बताया, ''वह (सज्जन कुमार) उच्च रक्तचाप और पार्किंसन रोग से पीड़ित थे तथा अतीत में कई बार अस्पताल में भर्ती हो चुके थे।'' वह तिहाड़ जेल में बंद थे। लोकसभा के तीन बार सदस्य रहे कुमार बाहरी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे और कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। वर्ष 2018 में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। वर्ष 1984 के दिल्ली सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद कुमार कई मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 17 दिसंबर, 2018 को दंगों के दौरान पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाए जाने से जुड़े मामले में कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। फरवरी 2025 में दिल्ली की एक अदालत ने दंगों के दौरान दो सिखों की हत्या से जुड़े एक अन्य मामले में भी पू्र्व सांसद को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
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नयी दिल्ली. महात्मा गांधी के अपने करीबी सहयोगी और स्वतंत्रता सेनानी आनंद टी. हिंगोरानी को लिखे गए 688 ऑटोग्राफ वाले विचारों (जिनमें सत्य, अहिंसा और सेवा जैसे विषय शामिल थे) के संग्रह को सैफ्रनआर्ट की नीलामी में 16.20 करोड़ रुपये में बेचा गया। यह नीलामी में बिके किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज के लिए एक विश्व रिकॉर्ड है। हिंगोरानी की पत्नी विद्या के निधन के बाद दो साल तक मार्गदर्शन, चिंतन और हौसला बढ़ाने वाले रोजाना हाथ से लिखे संदेशों को बाद में "अ थॉट फॉर द डे" नाम की किताब में संकलित किया गया। ये संदेश दोनों के बीच हुए पत्राचार के सबसे निजी और सुरक्षित बचे हुए दस्तावेजों में से एक हैं। खरीदार की पहचान का हालांकि खुलासा नहीं किया गया, लेकिन नीलामी घर ने कहा कि "खरीदार भारत का ही है और पांडुलिपि देश में ही रहेंगी"। "गांधी: फ्रॉम द कलेक्शन ऑफ आनंद टी. हिंगोरानी" नाम की नीलामी में गांधी से जुड़ी चिट्ठियों, पांडुलिपियों, तस्वीरों और निजी चीजों के 86 खंड शामिल थे। नीलाम करने वाली संस्था के अनुसार, इन पांडुलिपि में सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह (सांसारिक वस्तुओं या धन के प्रति मोह न रखना), निर्भयता, धार्मिक समानता, अस्पृश्यता निवारण, प्रार्थना, रामनाम, सेवा, श्रम, भूख, कर्तव्य, स्वराज, नैतिक जिम्मेदारी, मौन, अंतरात्मा की आवाज, अनासक्ति, आत्म-साक्षात्कार और ईश्वर की खोज जैसे विषयों पर चर्चा की गई है। यह संग्रह न सिर्फ अहम राजनीतिक घटनाओं को दर्ज करता है, बल्कि गांधीजी के जीवन के बेहद निजी पहलुओं को भी सामने लाता है। इसमें भारत की आजादी की लड़ाई के जन-नेता और उस निजी व्यक्ति—जो अपने सबसे करीबी लोगों को सलाह, सांत्वना, अनुशासन और स्नेह देते थे—दोनों की झलक मिलती है। सैफ्रनआर्ट के सहसंस्थापक दिनेश वाजीरानी ने एक बयान में कहा, " 'खंड 80' - यानी गांधीजी द्वारा हिंगोरानी के लिए लिखे गए विचारों की एक शृंखला - को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया इसके दुर्लभ और ऐतिहासिक महत्व को और पुख्ता करती है। ये विचार एक साथ मिलकर इस बात की अनूठी मिसाल पेश करते हैं कि गांधीजी ने उन सिद्धांतों को अपने जीवन में कैसे उतारा जिनका वे सार्वजनिक रूप से समर्थन करते थे; यही बात इसे उनके विचारों और कार्यों का एक बेहद बेशकीमती रिकॉर्ड बनाती है।" "मैसेज ऑन गॉड" (ईश्वर पर संदेश) - जिसमें ईश्वर और भगवद् गीता पर गांधी के विचारों से जुड़ी तीन संबंधित पांडुलिपियां और पत्र-व्यवहार शामिल हैं - 1.68 करोड़ रुपये में बिका। नीलामी में शामिल निजी चीजों में गांधी का 'पेटी चरखा' और सूत कातने के आध्यात्मिक अनुशासन पर लिखे दो पत्र शामिल थे, जिनकी कीमत 50-70 लाख रुपये आंकी गई थी। यह 1.02 करोड़ रुपये में बिका। गांधीजी की लिखते हुए एक हस्ताक्षरित तस्वीर 78 लाख रुपये में बिकी और आर्थिक स्वतंत्रता पर गांधीजी के पत्रों, टेलीग्राम और पोस्टकार्ड का एक सेट 57.60 लाख रुपये में बिका। हिंगोरानी परिवार ने पीढ़ियों से इस संग्रह को संभालकर रखा था। इसके जरिए हिंगोरानी के साथ गांधीजी के लंबे समय के रिश्ते को करीब से जानने का मौका मिलता है। दो दशकों से ज़्यादा समय में तैयार किए गए इस संग्रह में निजी पत्र-व्यवहार, हाथ से लिखे विचार, तस्वीरें और ऐसी चीज़ें शामिल हैं जो न सिर्फ़ भारत की आज़ादी की लड़ाई के अहम पलों को दिखाती हैं, बल्कि गांधी और हिंगोरानी के बीच दोस्ती, मार्गदर्शन और बेहद निजी बातचीत को भी सामने लाती हैं।
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नई दिल्ली। भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से ऐसे व्यापक रूप से प्रभावी एंटीवेनम विकसित करने पर काम कर रहा है, जो कई प्रजातियों के सांपों के काटने के इलाज में कारगर हो सके। इससे भारत में हर साल हजारों लोगों की जान लेने वाली सर्पदंश की समस्या से निपटने में मदद मिल सकती है।
IISc के अनुसार, भारत में हर साल अनुमानित 58,000 लोगों की मौत सांप के काटने से होती है। अलग-अलग सांपों और क्षेत्रों में पाए जाने वाले जहर की संरचना में काफी विविधता होने के कारण प्रभावी एंटीवेनम विकसित करना एक बड़ी वैज्ञानिक चुनौती है। संस्थान के मुताबिक, AI इस जटिल डेटा का पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी और बड़े पैमाने पर विश्लेषण करने में मदद कर सकता है।IISc के Centre for Ecological Sciences (CES) की Evolutionary Venomics Lab (EVL), Anthropic के AI for Science programme के माध्यम से Claude AI का इस्तेमाल कर रही है। शोधकर्ता जटिल जहर संबंधी डेटा को व्यवस्थित करने और ऐसे साझा विषैले लक्ष्यों की पहचान करने का प्रयास कर रहे हैं, जिन्हें अलग-अलग सांपों के जहर के खिलाफ व्यापक रूप से प्रभावी एंटीवेनम विकसित करने में इस्तेमाल किया जा सके।कई प्रजातियों के काटने में काम आ सकेगा एंटीवेनमशोध का प्रमुख उद्देश्य ऐसा एंटीवेनम विकसित करना है जो अलग-अलग प्रजातियों के सांपों के काटने के मामलों में प्रभावी हो। इससे अस्पतालों को बड़ी संख्या में अलग-अलग प्रकार के एंटीवेनम रखने की आवश्यकता कम हो सकती है।IISc ने कहा कि AI, विकासवादी जीव विज्ञान और ट्रांसलेशनल साइंस के मेल से सर्पदंश के उपचार की अगली पीढ़ी की चिकित्सा विकसित करने की संभावनाएं तलाशना महत्वपूर्ण है।EVL इससे पहले भी एंटीवेनम के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध कर चुकी है। प्रयोगशाला ने 2024 में सिंथेटिक एंटीवेनम विकसित किया था। इसके बाद 2025 में शोधकर्ताओं ने ‘वेनम मैप्स’ तैयार किए।रसेल वाइपर के जहर का तैयार किया ‘वेनम मैप’इन वेनम मैप्स में स्थानीय जलवायु परिस्थितियों का इस्तेमाल करके रसेल वाइपर के जहर की विशेषताओं का अनुमान लगाने का प्रयास किया गया है। रसेल वाइपर देश के विभिन्न हिस्सों में पाया जाने वाला बेहद खतरनाक सांप है और दुनिया में सर्पदंश से होने वाली मौतों और गंभीर चोटों के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है।शोधकर्ताओं के अनुसार, वेनम मैप्स चिकित्सकों को सर्पदंश के मरीजों के लिए अधिक उपयुक्त उपचार चुनने में मदद कर सकते हैं।इसके लिए रसेल वाइपर के जहर की संरचना, उसकी गतिविधि और विषाक्तता को सटीक रूप से समझना जरूरी है। शोधकर्ता यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि जैविक और अजैविक कारक इसके जहर की विशेषताओं को किस तरह प्रभावित करते हैं।सांप के जहर के विषैले प्रभाव उसमें मौजूद विभिन्न एंजाइमों की सांद्रता से जुड़े होते हैं। इनकी मात्रा और गतिविधि जलवायु तथा सांप के शिकार की उपलब्धता जैसे कारकों से प्रभावित हो सकती है।IISc के शोध के अनुसार, वेनम मैप्स ने पहली बार यह दिखाने में मदद की है कि तापमान, आर्द्रता और वर्षा जैसी जलवायु परिस्थितियां रसेल वाइपर के जहर के जैव-रासायनिक कार्यों को प्रभावित कर सकती हैं।AI आधारित यह शोध भविष्य में ऐसे एंटीवेनम के विकास का रास्ता खोल सकता है जो भारत में अलग-अलग क्षेत्रों और कई सांप प्रजातियों के सर्पदंश के उपचार में अधिक व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जा सकें। -
नई दिल्ली। दिल्ली में हरित और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए बुधवार को 200 नई इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाई गई। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से इन बसों को रवाना किया। इसके साथ ही राजधानी में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या 5,000 के पार पहुंच गई और कुल बस बेड़ा करीब 6,800 हो गया।
इस अवसर पर दिल्ली-करनाल अंतरराज्यीय ई-बस सेवा, लेडीज स्पेशल बस सेवा और डीटीसी के राजघाट डिपो-1 में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन का भी शुभारंभ किया गया। नई 200 इलेक्ट्रिक बसों में 88 बसें 12 मीटर और 112 बसें नौ मीटर की हैं। ये सभी लो-फ्लोर और वातानुकूलित बसें हैं। सरकार ने 2028-29 तक दिल्ली के कुल बस बेड़े को करीब 14,000 बसों तक बढ़ाने और डीटीसी की सभी बसों को इलेक्ट्रिक में बदलने का लक्ष्य रखा है।महिलाओं और छात्राओं के लिए शुरू की गई लेडीज स्पेशल बस सेवा में महिला पुलिसकर्मी और होमगार्ड मार्शल तैनात किए गए हैं। इन बसों का संचालन महिला कर्मचारियों द्वारा किया जाएगा। महिला सुरक्षा को लेकर 3 और 16 जून को हुई समीक्षा बैठकों में उपराज्यपाल ने विशेष बस सेवा शुरू करने के निर्देश दिए थे।बसों में लगे पैनिक बटन को दिल्ली पुलिस की 112 पीसीआर आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली से सीधे जोड़ा गया है। आपात स्थिति में बटन दबाने पर सूचना तेजी से 112 पीसीआर तक पहुंचेगी, जिससे तत्काल कार्रवाई संभव होगी। राजधानी में कुल 56 समर्पित महिला ई-बस सेवाएं शुरू की गई हैं। इनमें 15 अधिक मांग वाले मार्गों पर 30 लेडीज स्पेशल ट्रिप और 13 मार्गों पर विश्वविद्यालय छात्राओं के लिए 26 यू-स्पेशल ट्रिप शामिल हैं। ये सेवाएं सुबह और शाम के व्यस्त समय में संचालित होंगी।दिल्ली और करनाल के बीच पांच वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी। दोनों दिशाओं में रोजाना 10-10 फेरे निर्धारित किए गए हैं। कश्मीरी गेट से करनाल तक किराया करीब 212 रुपये रखा गया है। बसें सिंघु बॉर्डर, राय, बहालगढ़, मुरथल, गन्नौर, समालखा, पानीपत, घरौंडा और मधुबन से होकर गुजरेंगी।राजघाट डिपो-1 में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन भी शुरू किया गया। इसमें 240 किलोवाट क्षमता वाले चार चार्जर हैं, जिनसे इलेक्ट्रिक बसों के अलावा भारी वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक वाहनों और कारों को भी चार्ज किया जा सकेगा। इसके लिए 1,600 केवीए का कॉम्पैक्ट सब-स्टेशन स्थापित किया गया है।उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि ‘गति शक्ति’ के तहत बेहतर कनेक्टिविटी, हरित अर्थव्यवस्था और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना जरूरी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार प्रदूषण कम करने और दिल्लीवासियों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि सरकार 2028-29 तक बसों की संख्या करीब 14,000 करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि ठोस कदमों और बेहतर संचालन के चलते डीटीसी इस साल लाभ में आई है। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को भारतीय सूचना सेवा (आईआईएस) के अधिकारियों से कहा कि वे सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल केवल सूचना देने और लोगों से जुड़ने के लिए नहीं, बल्कि उनकी चिंताओं को सुनने, समझने और उनका समाधान करने के लिए भी करें। राष्ट्रपति ने कहा कि सोशल मीडिया ने नागरिकों के सूचना प्राप्त करने, उसे साझा करने और उस पर प्रतिक्रिया देने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है।
भारतीय सूचना सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से मिलने आए थे। राष्ट्रपति मुर्मू ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘आपको सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल केवल सूचना देने और लोगों से जुड़ने के लिए नहीं, बल्कि उनकी चिंताओं को सुनने, समझने और उनका जवाब देने के लिए भी करना चाहिए।’’उन्होंने कहा कि अधिकारी यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और पहलों की जानकारी लोगों तक स्पष्ट, सटीक और समय पर पहुंचे। राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘इसके साथ ही आपकी जिम्मेदारी लोगों की बात सुनने की भी है। आपको जनता की चिंताओं, उनकी आकांक्षाओं और सुझावों को समझने का प्रयास करना चाहिए। यह सुनिश्चित करना होगा कि जनसंचार प्रभावी और नागरिक केंद्रित हो।’’राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि तेजी से जटिल होते सूचना माहौल में अधिकारियों को तथ्यों और भ्रामक सूचनाओं के बीच अंतर करना होगा। उन्होंने कहा, ‘‘संकट के समय आपको जिम्मेदारी के साथ प्रतिक्रिया देनी चाहिए। आज के दौर में जब गलत सूचनाएं बहुत तेजी से फैलती हैं, तो यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नागरिकों को सही और प्रमाणिक जानकारी आसानी से और समय पर उपलब्ध हो।’’राष्ट्रपति ने नागरिकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि संचार माध्यमों को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि लोगों से सार्थक दोतरफा संवाद सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में, जहां सूचनाएं तुरंत फैलती हैं, संचार में हमेशा सटीकता, विश्वसनीयता और जनहित को ध्यान में रखा जाना चाहिए।उन्होंने अधिकारियों से नवीनतम तकनीकी साधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने को कहा। उन्होंने कहा कि नवाचार को नैतिक मूल्यों, मानवीय समझ और जवाबदेही को ध्यान में रखते हुए अपनाना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे में जब भारत 2047 की ओर बढ़ रहा है भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।उन्होंने कहा, ‘‘जानकारी रखने वाला नागरिक विकास और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी कर सकता है। मैं आपसे आग्रह करती हूं कि भारत की समृद्ध विविधता को ध्यान में रखते हुए संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ संवाद करें।’’राष्ट्रपति से भारतीय सांख्यिकी सेवा (आईएसएस) के प्रशिक्षु अधिकारियों ने भी मुलाकात की। राष्ट्रपति ने उन्हें (प्रशिक्षु आईएसएस को) संबोधित करते हुए कहा कि उनका काम अर्थव्यवस्था और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में तथ्यों पर आधारित नीतियां बनाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हमेशा याद रखें कि हर आंकड़े के पीछे वास्तविक लोग और उनका जीवन होता है। आपको आंकड़ों को नागरिकों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के लिए अधिक सुलभ बनाना चाहिए।’’राष्ट्रपति ने कहा कि विश्वसनीय आंकड़े बेहतर शासन की नींव होते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘आज के आंकड़ा आधारित दौर में प्रभावी सार्वजनिक नीतियां काफी हद तक सटीक, समय पर और विश्वसनीय आंकड़ों की उपलब्धता पर निर्भर करती हैं। भारतीय सांख्यिकी सेवा आधिकारिक आंकड़े तैयार करने, उनका विश्लेषण करने और उनकी व्याख्या करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ये आंकड़े हमारे करोड़ों नागरिकों के जीवन को प्रभावित करने वाले फैसलों का आधार बनते हैं।’’उन्होंने कहा कि देश की सांख्यिकी व्यवस्था डिजिटल तकनीक और आंकड़े जुटाने तथा उनके विश्लेषण के नए तरीकों के माध्यम से महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि मशीन लर्निंग और अन्य उभरती तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल से अधिक त्वरित और विस्तृत जानकारी तैयार करने के नए अवसर मिल रहे हैं।उन्होंने कहा, ‘‘इन बदलावों के साथ आप पर सांख्यिकीय निष्पक्षता, वस्तुनिष्ठता, गोपनीयता और पेशेवर उत्कृष्टता बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी भी आती है।’’ मुर्मू ने कहा कि भारतीय सूचना सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा दोनों का साझा उद्देश्य शासन की गुणवत्ता को मजबूत करना और देश के लोगों की सेवा करना है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रभावी संवाद और विश्वसनीय जानकारी जीवंत एवं उत्तरदायी लोकतंत्र के आवश्यक स्तंभ हैं।’’ राष्ट्रपति ने अधिकारियों से अपने फैसलों में विवेकपूर्ण, व्यवहार में संवेदनशील और ईमानदारी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रहने को कहा। उन्होंने कहा, ‘‘आपको मिली जिम्मेदारी के साथ लोगों की निष्पक्षता, विनम्रता और समर्पण के साथ सेवा करने की गहरी जिम्मेदारी जुड़ी है। आपका ज्ञान और कौशल महत्वपूर्ण होगा, लेकिन नागरिकों के प्रति आपका चरित्र, प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता ही अंततः आपके योगदान को परिभाषित करेगी।’’ -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने बुधवार को रेल मंत्रालय की लगभग 9,450 करोड़ रुपए की कुल लागत वाली चार परियोजनाओं को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि इससे आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
पीएम मोदी ने कहा कि कैबिनेट ने चार मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, जिससे भारतीय रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी और लाखों लोगों को फायदा होगा। इन प्रोजेक्ट्स के कई फायदे होंगे, जैसे- यात्री और माल ढुलाई को मजबूत करना, भीड़-भाड़ कम करना, लॉजिस्टिक्स की बेहतर क्षमता और बेहतर कनेक्टिविटी, व्यापार और पर्यटन।इन परियोजनाओं में खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन – 173 किमी (पश्चिम बंगाल और ओडिशा), भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन – 75 किमी (ओडिशा), गुम्मिडिपूंडी-गुडूर तीसरी और चौथी लाइन – 90 किमी (आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु), और कटक-पारादीप (बडाबन्धा) तीसरी और चौथी लाइन – 72 किमी (ओडिशा) शामिल है।बढ़ी हुई लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेल की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। इन बहु-ट्रैकिंग प्रस्तावों से परिचालन के सुव्यवस्थित होने और भीड़भाड़ में कमी आने की उम्मीद है। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री मोदी के नए भारत के विजन के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके लिए रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश राज्यों के 8 जिलों को कवर करने वाली ये 4 परियोजनाएं भारतीय रेल के वर्तमान नेटवर्क को लगभग 410 किलोमीटर तक बढ़ा देंगी। प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 6,448 गांवों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिनकी आबादी लगभग 60 लाख है।प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिसमें कुलडीहा वन्यजीव अभयारण्य, भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान, मां भद्रकाली मंदिर, मां धमराई मंदिर, पंचलिंगेश्वर मंदिर, तलसारी-उदयपुर और चांदीपुर समुद्र तट, पुलिकट झील, नेलपट्टू पक्षी अभयारण्य, भगवान वीरराघव पेरुमल मंदिर, गदा कुजंगा जगन्नाथ मंदिर, सरला मंदिर, धबलेश्वर मंदिर, ललितगिरि (बौद्ध स्थल) आदि शामिल हैं।प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा और इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल, अनाज आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। क्षमता वृद्धि कार्यों से प्रति वर्ष 76 मिलियन टन माल ढुलाई की अतिरिक्त क्षमता प्राप्त होगी। भारतीय रेल के पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम होने के कारण यह जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में सहायक होगी। साथ ही, यह तेल आयात (लगभग 13 करोड़ लीटर) को कम करेगी और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन (लगभग 65 करोड़ किलोग्राम) को घटाएगी, जो 2.60 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है। -
नयी दिल्ली/युवा पीढ़ी 'जेन-जी' तक अपनी पहुंच और पैठ बढ़ाने के एक बड़े प्रयास के तहत, नरेन्द्र मोदी सरकार प्रतिदिन एक केंद्रीय मंत्री को एक विश्वविद्यालय भेजने की योजना बना रही है। इस पहल का उद्देश्य युवाओं से सीधे संवाद करना, उनकी चिंताओं पर चर्चा करना और देश के समक्ष मौजूद विभिन्न मुद्दों पर उनके दृष्टिकोण को बेहतर ढंग से समझना है। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह पहल दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के अन्य हिस्सों में नीट पर्चा लीक मामले को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में सामने आई है। सूत्रों ने एक न्यूज़ एजेंसी को बताया कि 'एक दिन, एक विश्वविद्यालय' कार्यक्रम के तहत एक केंद्रीय मंत्री को एक विश्वविद्यालय का दौरा करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। मंत्री वहां छात्रों से बातचीत करेंगे, विभिन्न विषयों पर उनके विचार जानेंगे और खासतौर पर युवाओं तथा छात्रों के लिए चलाई जा रही सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देंगे। सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया को विश्वविद्यालयों और मंत्रियों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि इन दौरों को सुचारू रूप से आयोजित किया जा सके। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भी इस प्रस्तावित पहल पर चर्चा हुई। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अनुसार, देश में करीब 1,300 विश्वविद्यालय हैं। इनमें 57 केंद्रीय विश्वविद्यालय और 522 राज्य विश्वविद्यालय शामिल हैं, जबकि अन्य विश्वविद्यालय डीम्ड या निजी श्रेणी के हैं।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार को कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर पिछले दिनों हुए छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान किसी की जान नहीं गई, जबकि कांग्रेस सरकारों के समय पुलिस गोलीबारी में कई लोग मारे गए थे। अल्पसंख्यक और संसदीय मामलों के मंत्री रीजीजू रीजीजू ने कांग्रेस शासन के दौरान प्रशासन द्वारा बल प्रयोग की उन 11 घटनाओं का उल्लेख किया, जिनमें आम नागरिकों की मौत हुई थी। उन्होंने बताया कि 60 के दशक में मिजोरम में भारतीय नागरिकों पर बमबारी के लिए भारतीय वायु सेना का इस्तेमाल किया गया था, जबकि 1969 में तेलंगाना आंदोलन के दौरान पुलिस गोलीबारी में 369 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें अधिकतर छात्र थे। रीजीजू ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में वर्ष 1976 में आपातकाल के दौरान दिल्ली में तुर्कमान गेट को ध्वस्त करने और पुलिस गोलीबारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय हुई मौतों की वास्तविक संख्या को लेकर एक रहस्य बना रहा, जबकि पुलिस का दावा था कि छह लोगों की मौत हुई थी। उन्होंने दावा किया कि गोली चलाने का आदेश देने वाले पुलिस अधिकारी ने कहा था कि मरने वालों की संख्या 20 या उससे अधिक थी। रीजीजू ने कहा, ''सरकार के लिए नागरिकों की जान और सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान किसी की जान नहीं गई, जबकि कई अपराधियों ने इसका फायदा उठाने की कोशिश की थी।'' रीजीजू ने यह प्रतिक्रिया कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की उस टिप्पणी पर दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार के मंत्री कह रहे हैं कि 'दिल्ली पुलिस की तारीफ होनी चाहिए', जबकि संसद से केवल आधा किलोमीटर दूर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन चलाई गईं। राहुल गांधी ने कहा था, ''मैं खुद उन घायल बच्चों से मिला हूं। हज़ारों वीडियो देश ने देखे हैं। इस सरकार का मूल मंत्र ही असत्य और हिंसा है। पहले बच्चों पर लाठी चलाओ, फिर बोल दो कि कुछ हुआ ही नहीं।'' रीजीजू ने राहुल गांधी को दिये जवाब में कहा कि 18 अक्टूबर, 1976 को उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर में जबरन नसबंदी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने गोली चलाई थी। उन्होंने दावा किया कि कई ऐतिहासिक वृत्तांतों में बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की बात कही गई है, और कुछ स्रोतों के अनुसार मरने वालों की संख्या लगभग 50 थी। रीजीजू ने कहा कि 1972 में पंजाब के मोगा में सिनेमा टिकटों की कथित कालाबाजारी के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें छात्रों और राहगीरों समेत चार लोगों की मौत हो गई थी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 1973-74 में गुजरात में छात्रों के नेतृत्व वाले 'नव निर्माण आंदोलन' में 103 लोगों की मौत का जिक्र है, जिनमें से 88 मौतें पुलिस की गोलीबारी के कारण हुईं। उन्होंने कहा कि 1998 में मध्य प्रदेश में मुलताई किसान आंदोलन के दौरान पुलिस ने किसानों पर गोली चलाई थी। मंत्री के अनुसार शुरुआती खबरों में मरने वालों की संख्या 17 बताई गई थी, जबकि बाद की जानकारी के अनुसार मरने वाले किसानों की कुल संख्या 24 थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। रीजीजू ने कहा कि 2007 में आंध्र प्रदेश में मुदिगोंडा भूमि आंदोलन के दौरान खबरों के मुताबिक पुलिस की गोलीबारी में आठ लोगों की मौत हुई थी और 16 लोग घायल हुए थे। उन्होंने कहा कि 2010 में सोमपेटा (आंध्र प्रदेश) में पुलिस की गोलीबारी में दो मछुआरों की मौत हो गई थी, जबकि करीब 100 लोग घायल हो गए थे। मंत्री ने बताया कि 2011 में आंध्र प्रदेश में हुई काकरापल्ली गोलीबारी की घटना के बारे में मिली खबरों से ज्ञात होता है कि पुलिस की गोली से दो लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। उन्होंने कहा कि एक तथ्य अन्वेषण रिपोर्ट में बताया गया है कि 15 साल पहले दक्षिणी राज्य में रबर की गोलियों और असली गोलियों, दोनों का इस्तेमाल किया गया था। रीजीजू ने 2011 में महाराष्ट्र में जैतपुर परमाणु ऊर्जा परियोजना के विरोध के दौरान हुई गोलीबारी की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 18 अप्रैल 2011 को पुलिस की गोलीबारी में एक प्रदर्शनकारी, तबरेज सयेकर (जिन्हें तवरेज़ सेजकर भी बताया गया है) की मौत हो गई थी। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''कांग्रेस के शासनकाल में पुलिस गोलीबारी की कई और घटनाएं हुई थीं। ये घटनाएं उन बड़े विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों का सिलसिलेवार ब्योरा देती हैं, जिनमें कांग्रेस सरकारों के सत्ता में रहने के दौरान पुलिस गोलीबारी या पुलिस की कार्रवाई से मौतें हुईं। हमारी सरकार सभी आंदोलनों में अधिकतम संयम बरत रही है।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा की दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एंजियोप्लास्टी की गई और उनकी हालत स्थिर है। अस्पताल प्रशासन ने मंगलवार को यह जानकारी दी। नड्डा को बेचैनी महसूस होने के बाद 13 अगस्त को एम्स में भर्ती कराया गया था। उसी शाम उनकी कोरोनरी एंजियोग्राफी समेत कई जांचें की गई थीं। अस्पताल की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है, ''17 अगस्त 2026 को उनकी एंजियोप्लास्टी की गई। उनकी हालत स्थिर है और वह हृदय रोग विभाग में डॉक्टरों की निगरानी में हैं।''
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रांची. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने की घोषणा के बाद कम से कम 2,000 लोगों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। इन लोगों को डर है कि परीक्षा पास करने के बाद मिली उनकी सरकारी नौकरियां छिन सकती हैं। झारखंड सचिवालय के बाहर मंगलवार को धरने पर बैठे सफल अभ्यर्थियों में से एक ने कहा, ''हमें हमारा अपराध बताइए। हमें नौकरी से बाहर मत कीजिए।'' अभ्यर्थी निष्पक्ष रूप से अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग कर रहे हैं। परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों के लगातार विरोध के बीच झारखंड सरकार ने सोमवार रात झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तरीय (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा रद्द करने की घोषणा की। साथ ही, वर्ष 2014 से आउटसोर्स एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) द्वारा कराई गई सभी भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द करने का फैसला किया गया। यह फैसला परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में से एक था और इससे आंदोलन समाप्त होने की संभावना थी। लेकिन अब सरकार के सामने एक नई चिंता खड़ी हो गई है, क्योंकि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों को अपनी नौकरियां खोने का डर सता रहा है। ये अभ्यर्थी अब सरकारी कर्मचारी हैं। उनका कहना है कि वे कथित अनियमितताओं की जांच के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए। जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के साथ-साथ सफल अभ्यर्थी भी अब सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि सफल अभ्यर्थी कानूनी रास्ता अपना सकते हैं। वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रवक्ता मनोज पांडेय ने उनकी परेशानी को स्वीकार करते हुए कहा कि पार्टी उनके प्रति सहानुभूति रखती है। हालांकि, सरकार की ओर से यह आश्वासन कि नयी रिक्तियों के जरिए योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिलेंगे, इन अभ्यर्थियों की चिंता कम नहीं कर पाया। इनमें से कई अभ्यर्थी अब अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके हैं। कुछ ने भूख हड़ताल और आगे कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
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लखनऊ. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि भविष्य में चंद्रमा और अंतरिक्ष अभियानों के लिए 'डॉकिंग तकनीक' बेहद महत्वपूर्ण होगी। बेंगलूरु स्थित इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क के निदेशक एम. आर. राघवेंद्र ने लखनऊ में सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (सीएमएस) के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस समारोह को संबोधित किया। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की यात्रा करने वाले पहले भारतीय शुभांशु शुक्ला सिटी मॉन्टेसरी स्कूल के छात्र रहे हैं। राघवेंद्र ने इसरो के सफल स्पेस डॉकिंग प्रयोग का उल्लेख करते हुए कहा, ''डॉकिंग एक बहुत ही दिलचस्प प्रयोग है। हमने इसे किया है क्योंकि यह भविष्य में बहुत काम आ सकता है।'' उन्होंने कहा, ''अब हम चांद पर पहुंच चुके हैं। अब हम चांद से कुछ नमूने लाना चाहते हैं और ऐसा करने के लिए हमें 'डॉकिंग' की जरूरत होगी। एक ऑर्बिटर चांद की परिक्रमा करेगा और एक लैंडर नमूने एकत्र करने के बाद ऑर्बिटर के पास आएगा और उससे जुड़ेगा। इसके बाद नमूने धरती पर वापस लाए जाएंगे।'' राघवेंद्र ने कहा कि 'डॉकिंग' भारत के प्रस्तावित अंतरिक्ष स्टेशन 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' (बीएएस) के लिए भी जरूरी होगी। उन्होंने कहा, ''आप सभी ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बारे में सुना होगा। अब हमारे पास बीएएस भी होगा, जिसमें पांच मॉड्यूल होंगे और इनमें से प्रत्येक मॉड्यूल को 'डॉकिंग' की जरूरत होगी। इसलिए 'डॉकिंग' प्राथमिक मिशनों के लिए भी महत्वपूर्ण तकनीक है।'' राघवेंद्र ने चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के पीछे योजना और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के महत्व पर भी जोर दिया, जिसके तहत भारत ने चांद पर सफल 'सॉफ्ट लैंडिंग' की थी। उन्होंने मिशन में शामिल तकनीकी और संगठनात्मक प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा, ''हम चांद पर उतरने वाले चौथे देश थे। चांद पर उतरना सिर्फ एक घटना नहीं थी।'' चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर ने 23 अगस्त, 2023 को चांद की सतह पर सुरक्षित और 'सॉफ्ट लैंडिंग' की जिससे भारत ऐसा करने वाला चौथा देश और चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला पहला देश बन गया। भारत इस साल 23 अगस्त को अपना तीसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाएगा।इस जश्न के हिस्से के तौर पर इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड ने मंगलवार को लखनऊ में सीएमएस के सहयोग से एक दिन का कार्यक्रम आयोजित किया।
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नयी दिल्ली. ब्रिक्स समूह के पांच देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के 500 से अधिक राजदूत, राजनयिक, कारोबारी नेता, विद्वान, सांस्कृतिक हस्तियां, उद्यमी और निवेशक दो दिवसीय कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे, जिसमें इस बात पर चर्चा की जाएगी कि संस्कृति, ज्ञान प्रणालियां, विरासत और रचनात्मक अभिव्यक्ति किस तरह देशों के बीच सार्थक संबंध कायम कर सकती हैं। आयोजक एपी ग्लोबेल ने सोमवार शाम यहां एक कार्यक्रम में बताया कि ग्लोबल इम्पैक्ट फोरम (जीआईएफ) का दूसरा संस्करण पांच और छह सितंबर को मुंबई के द ताज महल पैलेस में आयोजित किया जाएगा। 'अंतरराष्ट्रीय सॉफ्ट पावर महोत्सव' के रूप में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न सत्र, संबोधन और कार्यशालाएं होंगी, जिनमें भाग लेने वाले देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव और साझा परंपराओं पर चर्चा की जाएगी। इस कार्यक्रम में आयुर्वेद और पारंपरिक चीनी चिकित्सा से लेकर कलयारीपट्टू और कुंग फू/ताई ची, शास्त्रीय नृत्य और कैपोएरा, टैगोर और टॉल्सटॉय, सिनेमा, संगीत, खेल और आदिवासी परंपराओं तक विभिन्न परंपराओं और विधाओं पर चर्चा होगी।
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नई दिल्ली। सरकार ने राष्ट्रीय परमिट व्यवस्था के तहत आने वाले बैटरी से चलने वाले, हाइड्रोजन ईंधन और प्राकृतिक गैस से चलने वाले वाणिज्यिक वाहनों की तय उम्र सीमा पांच साल बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से हाल में जारी अधिसूचना के अनुसार, यह प्रस्ताव राष्ट्रीय परमिट की प्रक्रिया को सरल बनाने और डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए किए गए मसौदा संशोधन का हिस्सा है।प्रस्तावित बदलाव के तहत राष्ट्रीय परमिट व्यवस्था वाले वाहनों के लिए मौजूदा 12 वर्ष और 15 वर्ष की उम्र सीमा को बैटरी, हाइड्रोजन और प्राकृतिक गैस से चलने वाले वाहनों के मामले में बढ़ाकर क्रमशः 17 वर्ष और 20 वर्ष किया जाएगा । हालांकि, उम्र सीमा में यह बढ़ोतरी सभी वाणिज्यिक वाहनों पर लागू नहीं होगी और केवल निर्धारित श्रेणी के वाहनों तक सीमित रहेगी।यह प्रस्ताव स्वच्छ ईंधन से चलने वाले वाणिज्यिक परिवहन को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों के बीच आया है।सरकार ने राष्ट्रीय परमिट धारकों को हर साल अनुमति का नवीनीकरण कराने के बजाय पांच साल तक की अनुमति लेने का विकल्प देने का भी प्रस्ताव रखा है। इसका शुल्क 16,500 रुपये सालाना ही रहेगा। इस तरह पांच साल की अनुमति के लिए कुल 82,500 रुपये देने होंगे।इसके अलावा, कागजी कार्रवाई कम करने के लिए वाहन संबंधी वाहन (VAHAN) आंकड़ा प्रणाली का इस्तेमाल करने का भी प्रस्ताव है।मसौदे में अस्थायी पंजीकरण के नियमों में बदलाव का भी प्रस्ताव रखा गया है।बिना बॉडी वाले वाहन के ढांचे को जारी होने की तारीख से छह महीने के लिए अस्थायी पंजीकरण दिया जाएगा। यदि छह महीने बाद भी बॉडी लगाने के लिए वाहन किसी कार्यशाला में है या वाहन मालिक के नियंत्रण से बाहर किसी अप्रत्याशित कारण से काम पूरा नहीं हो पाया है, तो पंजीकरण अधिकारी आवेदन और निर्धारित शुल्क के भुगतान पर इसकी अवधि एक बार में 30 दिन तक बढ़ा सकेगा।पूरी तरह तैयार वाहनों को संशोधित वाहन में बदलने या डीलर के स्थान से अलग राज्य में पंजीकरण कराने की स्थिति में अस्थायी पंजीकरण 45 दिनों के लिए मान्य होगा।इसके अलावा, प्रस्तावित संशोधनों में वाहन पंजीकरण और परमिट से जुड़े प्रपत्रों में कुछ अतिरिक्त जानकारी शामिल करने का भी प्रावधान है। मंत्रालय ने प्रस्तावित संशोधनों पर अधिसूचना सार्वजनिक किए जाने की तारीख से 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। -
उपराज्यपाल ने पहले जत्थे को रवाना किया
जम्मू. जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में स्थित प्राचीन बूढ़ा अमरनाथ मंदिर की वार्षिक यात्रा सोमवार को शुरू हुई। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने धार्मिक उत्साह और कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच जम्मू से श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को रवाना किया। अधिकारियों ने बताया कि सिन्हा ने पूजा-अर्चना करने के बाद सुबह करीब 6:30 बजे भगवती नगर यात्री निवास से श्रद्धालुओं के जत्थे को पुंछ के लिए रवाना किया। यह यात्रा करीब 230 किलोमीटर लंबी है। राजौरी के राजपुरा, मंडी तहसील स्थित बाबा बूढ़ा अमरनाथ मंदिर की 12 दिवसीय यात्रा 28 अगस्त तक चलेगी और रक्षाबंधन के दिन इसका समापन होगा। उपराज्यपाल ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, "आज पवित्र श्री बूढ़ा अमरनाथ जी यात्रा को रवाना करने का सौभाग्य मिला। यह दिव्य तीर्थयात्रा श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक परिवर्तन का अनुभव प्रदान करने वाली है।" उन्होंने कहा, "मैं भगवान शिव से प्रार्थना करता हूं कि देश के कोने-कोने से आने वाले सभी श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम, सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक हो। महादेव आपकी इस पवित्र यात्रा के हर कदम पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें। हर हर महादेव!" उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं के जत्थे पुलिस सुरक्षा घेरे में यात्रा करेंगे। जम्मू-राजौरी-पुंछ मार्ग पर अतिरिक्त केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती की गई है। अधिकारियों ने बताया कि राजौरी और पुंछ जिलों में बहुस्तरीय सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। वहीं, विशेष अभियान समूह (एसओजी) के जवान दशनामी अखाड़ा जैसे ठहरने वाले स्थानों समेत कई इलाकों में तलाशी और सत्यापन अभियान चला रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत जम्मू-राजौरी-पुंछ राजमार्ग पर भी सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। इसके अलावा, कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं।






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