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वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा पर अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस ने एक तथ्य पत्र (फैक्ट शीट) जारी किया है जिसमें कहा गया है कि अमेरिका और चीन व्यापार और निवेश पर बोर्ड स्थापित करने तथा निष्पक्ष और परस्पर सहयोग पर आधारित रणनीतिक स्थिरता वाले संबंध बनाने पर सहमत हुए हैं। रविवार को जारी किए गए तथ्य पत्र में कहा गया है कि चीन दुर्लभ पृथ्वी धातुओं और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों, जिनमें यट्रियम, स्कैंडियम, नियोडिमियम और इंडियम शामिल हैं, से संबंधित आपूर्ति श्रृंखला की कमी के बारे में अमेरिका की चिंताओं का समाधान करेगा। इसमें यह भी कहा गया कि ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग इस बात पर सहमत हुए कि ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का आह्वान किया गया और इस बात पर सहमति बनी कि किसी भी देश या संगठन को टोल वसूलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस तथ्य पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि ट्रंप इस वर्ष शी चिनफिंग का वाशिंगटन में स्वागत करेंगे, और दोनों देश इस वर्ष के अंत में जी20 और एपेक शिखर सम्मेलनों की मेजबानी में एक-दूसरे का समर्थन करेंगे। तथ्य पत्र में ताइवान का कोई उल्लेख किए बिना कहा गया कि "राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति शी ने उत्तर कोरिया को परमाणु मुक्त करने के अपने साझा लक्ष्य की पुष्टि की। शी के साथ वार्ता के बाद मीडिया साक्षात्कारों में ट्रंप ने ताइवान को अरबों डॉलर के संभावित हथियार विक्रय को चीन के साथ "समझौते का केंद्र" बताया, जिससे ताइवान में चिंताएं बढ़ गईं। इस ऐतिहासिक समझौते की आधारशिला के रूप में, ट्रंप और शी ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए दो नए संस्थानों की स्थापना पर सहमति जताई। ये संस्थान 'यूएस-चाइना बोर्ड ऑफ ट्रेड' और 'यूएस-चाइना बोर्ड ऑफ इन्वेस्टमेंट' हैं। इस तथ्य पत्र में यह भी बताया गया है कि चीन दुर्लभ धातुओं के उत्पादन और प्रसंस्करण उपकरण एवं प्रौद्योगिकी की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों या सीमाओं के संबंध में अमेरिका की चिंताओं का समाधान करेगा। इस तथ्य पत्र में कहा गया है, ''चीन ने चीनी एयरलाइंस के लिए अमेरिका निर्मित 200 बोइंग विमानों की प्रारंभिक खरीद को मंजूरी दे दी है।'' इसमें यह भी कहा गया है कि चीन की यह प्रतिबद्धता अमेरिका में उच्च वेतन और उच्च कौशल वाले विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करेगी।
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गोथेनबर्ग (स्वीडन) . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को स्वीडन पहुंचे, जहां वह व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों पर बातचीत करेंगे। गोथेनबर्ग हवाई अड्डे पर उतरने से पहले प्रधानमंत्री मोदी के विमान को स्वीडिश वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने सुरक्षा प्रदान की । हवाई अड्डे पर उनके स्वीडिश समकक्ष उल्फ क्रिस्टर्सन ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया, जो इस यात्रा के महत्व को दर्शाता है। मोदी स्वीडन की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों पर केंद्रित बातचीत करेंगे और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए सहयोग के नए अवसर तलाशेंगे, जो 2025 में 7.75 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। दोनों पक्ष हरित ऊर्जा की ओर बढ़ने, एआई, उभरती प्रौद्योगिकियों, स्टार्टअप, लचीली आपूर्ति शृंखलाओं, रक्षा, अंतरिक्ष, जलवायु कार्रवाई और दोनों देशों की जनता के स्तर पर संबंध जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करने पर चर्चा करेंगे। इससे पहले मोदी ने 2018 में पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए स्वीडन का दौरा किया था।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ''दोनों देशों के प्रधानमंत्री यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लायन के साथ यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री को भी संबोधित करेंगे, जो एक प्रमुख अखिल यूरोपीय व्यापारिक नेताओं का मंच है।'' यह मोदी की चार देशों की यूरोपीय यात्रा का दूसरा चरण है। वह नीदरलैंड की यात्रा कर चुके हैं और उनकी उपस्थिति में भारत और नीदरलैंड ने रक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इस सप्ताह के अंत में, वह नॉर्वे और इटली की भी यात्रा करेंगे। -
काठमांडू. नेपाल के पर्वतारोही कामी रीता शेरपा ने रविवार को दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी 'माउंट एवरेस्ट' को 32वीं बार फतह करके इतिहास रच दिया। शेरपा ने एवरेस्ट पर सबसे अधिक बार सफलता पूर्वक चढ़ाई करने का अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया।
पर्यटन विभाग के अनुसार, 56 वर्षीय अनुभवी पर्वतारोही रविवार पूर्वाह्न 10 बजकर 12 मिनट पर 8,849 मीटर ऊंचे शिखर पर पहुंचे। विभाग ने बताया कि शेरपा '14 पीक्स एक्सपेडिशन' द्वारा संचालित एक अभियान का नेतृत्व कर रहे थे।
काठमांडू पोस्ट की खबर के अनुसार, एवरेस्ट आधार शिविर स्थित पर्यटन विभाग के फील्ड कार्यालय ने सफलतापूर्वक चढ़ाई करने की पुष्टि की। पर्यटन विभाग ने शेरपा को बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि नेपाल के पर्वतारोहण क्षेत्र और देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा में महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती है। जनवरी 1970 में कोशी प्रांत के सोलुखुम्बु जिले के एक गांव में जन्मे कामी रीता ने 1992 में एक पेशेवर पर्वतारोही के रूप में अपना करियर शुरू किया। शेरपा ने पहली बार 1994 में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी। उन्होंने 27 मई, 2025 को एवरेस्ट पर 31वीं बार सफलतापूर्वक चढ़ाई की। रविवार को 'पर्वत रानी' नाम से मशहूर और माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वालीं नेपाल की प्रथम महिला ल्हाकपा शेरपा ने शिखर पर11वीं बार सफल चढ़ाई पूरी करके अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया। पर्यटन विभाग ने बताया कि ल्हाकपा रविवार सुबह साढ़े नौ बजे शिखर पर पहुंचीं। -
जल प्रबंधन में सहयोग की उम्मीद जताई
हेग. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ रविवार को प्रतिष्ठित अफस्लुइटडिज्क बांध का दौरा किया। भारत और नीदरलैंड के बीच जल प्रबंधन और जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे में गहन सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने के मद्देनजर ये दौरा हुआ है। मोदी ने दौरे के बाद सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ''जल प्रबंधन एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें नीदरलैंड ने अभूतपूर्व कार्य किया है। इससे पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय बहुत कुछ सीख सकता है।'' उन्होंने कहा, ''हम भारत में आधुनिक प्रौद्योगिकी लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसका उद्देश्य सिंचाई, बाढ़ सुरक्षा और अंतर्देशीय जलमार्ग नेटवर्क के विस्तार में सहायता करना है।'' विदेश मंत्रालय ने अफस्लुइटडिज्क बांध को ''उत्कृष्टता और नवाचार का प्रतीक'' बताते हुए जल प्रबंधन, बाढ़ सुरक्षा और मीठे पानी के भंडारण में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''इस दौरे ने गुजरात में कल्पसर परियोजना के लिए डच विशेषज्ञता के महत्व को रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य खंभात की खाड़ी के पास एक मीठे पानी का जलाशय और बांध बनाना है।'' मंत्रालय ने कहा, ''इस यात्रा ने जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, जल प्रौद्योगिकी और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भारत-नीदरलैंड सहयोग को और गहरा करने के अवसरों पर जोर दिया।'' -
द हेग. वैश्विक भू-राजनीति में बदलावों के बीच भारत और नीदरलैंड ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नीदरलैंड के उनके समकक्ष रॉब जेटेन के बीच हुई वार्ता के दौरान रक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। शनिवार शाम हुई बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने पश्चिम एशिया की स्थिति, विशेष रूप से क्षेत्र और व्यापक विश्व पर इसके गंभीर प्रभावों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की क्योंकि इसके कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार नेटवर्क में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। संयुक्त बयान के अनुसार, मोदी और जेटेन ने होर्मुज जलडमरूमध्य से स्वतंत्र नौवहन और वैश्विक वाणिज्यिक जहाजों के आवागमन का आह्वान किया। उन्होंने किसी भी तरह के ''प्रतिबंधात्मक'' कदमों का विरोध किया और इस संबंध में जारी पहलों के प्रति अपना समर्थन भी दोहराया। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इस संकरे जलमार्ग से 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमले के बाद से जहाजों का आवागमन बुरी तरह से बाधित है, जिसके परिणामस्वरूप जवाबी हमले भी हुए। दोनों नेताओं ने यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा की जो रूस के साथ जारी संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा घटनाक्रमों से प्रभावित है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों पर आधारित संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से यूक्रेन में व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति प्राप्त करने के प्रयासों का समर्थन जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। बयान के अनुसार, यूक्रेन के विषय पर दोनों पक्षों ने जारी युद्ध पर भी चिंता व्यक्त की जो ''अत्यधिक मानवीय पीड़ा का कारण बन रहा है और इसके वैश्विक परिणाम हैं''। मोदी ने रविवार को स्वीडन के लिए रवाना होते समय सोशल मीडिया पर किये गए पोस्ट में कहा, ''मेरी नीदरलैंड यात्रा ने भारत-नीदरलैंड संबंधों को नयी गति प्रदान की है।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने से लेकर जल संसाधन, सेमीकंडक्टर, नवाचार, रक्षा, स्थिरता और गतिशीलता में सहयोग का विस्तार करने तक, हमने भविष्य के लिए एक महत्वाकांक्षी खाका तैयार किया है।'' नीदरलैंड के प्रधानमंत्री जेटेन ने शिफोल हवाई अड्डे पर पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी को विदा किया। मोदी ने कहा, ''मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में भारत और नीदरलैंड के बीच मित्रता और भी मजबूत होती रहेगी।'' विदेश मंत्रालय ने एक अलग सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ''इस यात्रा के कई अहम परिणाम सामने आए, जिनमें रणनीतिक साझेदारी के लिए एक नए खाके की शुरुआत शामिल है, जो भारत-नीदरलैंड संबंधों को और प्रगाढ़ करेगा और प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग के रास्ते खोलेगा।'' संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की संक्षिप्त यात्रा के बाद मोदी शुक्रवार को हेग पहुंचे। यह दो दिवसीय दौरा यूरोप के चार देशों की यात्रा का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है। इस दौरे में वह नॉर्वे और इटली भी जाएंगे। मोदी-जेटेन वार्ता के बाद, भारत और नीदरलैंड ने व्यापार एवं निवेश, रक्षा और सुरक्षा तथा सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्वांटम कंप्यूटिंग सहित महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों में संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक ''रणनीतिक साझेदारी रूपरेखा'' की शुरुआत की। दोनों नेताओं ने ''हरित हाइड्रोजन के विकास पर भारत-नीदरलैंड रूपरेखा'' की भी शुरुआत की।
मोदी और जेटेन ने रक्षा उपकरणों, रक्षा प्रणालियों, कलपुर्जों और अन्य प्रमुख क्षमताओं का संयुक्त निर्माण सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त उद्यमों की स्थापना के माध्यम से एक रक्षा औद्योगिक रूपरेखा स्थापित करने की संभावनाओं का पता लगाने पर भी सहमति व्यक्त की। यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक गंतव्यों में से एक नीदरलैंड के साथ द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में 27.8 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। यह यूरोपीय देश 55.6 अरब अमेरिकी डॉलर के कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के साथ भारत का चौथा सबसे बड़ा निवेशक है। विश्वस्तरीय लॉजिस्टिक नेटवर्क वाला नीदरलैंड मुख्य रूप से रॉटरडैम बंदरगाह के माध्यम से भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोप का एक रणनीतिक प्रवेश द्वार भी है। वार्ता में दोनों पक्षों ने विज्ञान और नवाचार, सतत विकास, स्वास्थ्य, कृषि, जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा परिवर्तन, समुद्री विकास और लोगों के बीच आपसी संबंध में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच हुए समझौतों से सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, स्वास्थ्य, जल, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और संस्कृति सहित अन्य क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। मोदी-जेटेन की बैठक के बाद हुए एक महत्वपूर्ण समझौते में प्रवासन और आवागमन पर सहमति बनी जिससे उम्मीद है कि रोजगार और शिक्षा के लिए भारतीयों का यूरोपीय देश में आवागमन बढ़ेगा। संयुक्त बयान के अनुसार, भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श करते हुए दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान, नौवहन की स्वतंत्रता और ''दबाव एवं संघर्षों की स्थिति से3 रहित'' एक स्वतंत्र, खुले और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र का आह्वान किया। ये टिप्पणियां क्षेत्र में चीन के बढ़ते आक्रामक व्यवहार को लेकर वैश्विक स्तर पर बढ़ती चिंताओं की पृष्ठभूमि में आई हैं। निरंतर नवाचार के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के रणनीतिक महत्व को स्वीकार करते हुए दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने महत्वपूर्ण खनिजों की मूल्य शृंखला में सहयोग को मजबूत करने में अपनी पारस्परिक रुचि व्यक्त की, जिसमें खोज और मूल्य शृंखलाओं का एकीकरण शामिल है। चीन का वर्तमान में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला में एकाधिकार है। वह न केवल 15 से अधिक आवश्यक खनिजों के खनन को नियंत्रित करता है, बल्कि उनके परिष्करण, प्रसंस्करण और विनिर्माण पर भी उसका नियंत्रण है। संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने 'डच सेमीकंडक्टर कॉम्पिटेंस सेंटर' को भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन से जोड़ने की पहल का भी स्वागत किया जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र को समर्थन और मजबूत करना है। दोनों देशों के बीच समग्र व्यापार को बढ़ाने के संदर्भ में मोदी और जेटेन ने विशेष रूप से इस वर्ष की शुरुआत में हस्ताक्षरित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से उत्पन्न अवसरों के आलोक में आगे वृद्धि की अपार संभावनाओं पर जोर दिया। संयुक्त बयान में कहा गया है, ''दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि मुक्त व्यापार समझौता भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों में वृद्धि के समय दुनिया की दूसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा।'' बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तार तथा भारत की स्थायी सदस्यता के लिए नीदरलैंड द्वारा निरंतर समर्थन दिए जाने को लेकर जेटेन को धन्यवाद दिया। संयुक्त बयान के अनुसार, जेटेन ने अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की जिसमें 26 लोग मारे गए थे और सीमा पार आतंकवाद समेत सभी तरह के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को अपने देश का अटूट समर्थन जताया। बयान में कहा गया कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने सभी तरह के आतंकवाद की स्पष्ट रूप से निंदा की और आतंकवाद से निपटने के लिए 'कतई बर्दाश्त नहीं' की नीति के दृष्टिकोण का आह्वान किया तथा इस खतरे का मुकाबला करने में दोहरे मापदंडों को खारिज किया। मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री जेटेन के साथ वार्ता के दौरान अपने शुरुआती संबोधन में कहा, ''पिछले एक दशक में भारत-नीदरलैंड संबंधों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।'' प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत नीदरलैंड को अपने सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक मानता है क्योंकि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंध ''गहरे'' हैं। उन्होंने कहा, ''लोकतांत्रिक मूल्य, बाजार अर्थव्यवस्था और जिम्मेदार व्यवहार हमारी साझा सोच का हिस्सा हैं। जल, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में हमारा सहयोग हमारे लोगों के जीवन को बेहतर बना रहा है।'' मोदी ने भारत की आर्थिक वृद्धि पर भी प्रकाश डाला।
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि हर क्षेत्र में नीदरलैंड की विशेषज्ञता और भारत की ''गति एवं कौशल'' का समन्वय होना चाहिए। मोदी ने कहा, ''हमें नवाचार, निवेश, सतत विकास और रक्षा क्षेत्रों में अपने सहयोग को नयी ऊंचाई पर ले जाने की आवश्यकता है। इसी साझा दृष्टिकोण के तहत हम भारत-नीदरलैंड संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जा रहे हैं।'' भारत-नीदरलैंड के बीच शनिवार को हुई द्विपक्षीय वार्ता से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने जेटेन के साथ ऊर्जा, बंदरगाह, स्वास्थ्य, कृषि व्यापार और प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख डच कंपनियों के सीईओ से बातचीत की। मोदी ने नीदरलैंड की कंपनियों को भारत में, विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में अवसरों का पता लगाने के लिए आमंत्रित किया। -
हेग. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से मुलाकात की तथा पारस्परिक हित के मुद्दों पर चर्चा की। व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने के उद्देश्य से पांच देशों की अपनी यात्रा के दूसरे चरण के तहत मोदी शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात में संक्षिप्त ठहराव के बाद नीदरलैंड पहुंचे। इससे पहले दिन में, मोदी ने हेग में भारतीय समुदाय के लोगों की एक सभा को संबोधित किया, जहां उन्होंने भारत को ''अवसरों की भूमि'' बताया जो ''अभूतपूर्व परिवर्तन'' से गुजर रही है। प्रधानमंत्री मोदी की 15 से 17 मई तक की नीदरलैंड यात्रा इस यूरोपीय देश की उनकी दूसरी यात्रा है। अधिकारियों ने इस यात्रा को भारत-नीदरलैंड संबंधों में एक ''महत्वपूर्ण मोड़'' बताया है। इससे पहले उन्होंने 2017 में नीदरलैंड की यात्रा की थी।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि इस यात्रा में एक ''समृद्ध और ठोस एजेंडा'' शामिल है तथा इससे दोनों देशों के बीच निरंतर जुड़ाव के माध्यम से उभरी साझेदारी के रणनीतिक आयामों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। भारत और नीदरलैंड ने हाल के वर्षों में व्यापार, निवेश और जल, कृषि तथा स्वास्थ्य के प्राथमिकता वाले पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर अपने सहयोग का काफी विस्तार किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रौद्योगिकी, नवाचार, रक्षा, सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और समुद्री क्षेत्र सहित रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी में वृद्धि हुई है। शनिवार को बाद में, मोदी नीदरलैंड के अपने समकक्ष रॉब जेटेन से मुलाकात करेंगे। -
लंदन. ब्रिटेन के प्रमुख संग्रहालयों में से एक 'वेलकम कलेक्शन' ने दक्षिण एशिया के बाहर मौजूद जैन पांडुलिपियों के सबसे बड़े संग्रह को लौटाने की "ऐतिहासिक" पहल की शुक्रवार को घोषणा की। लंदन स्थित इस संग्रहालय में एक सदी से अधिक समय से रखी गई 2,000 से अधिक पांडुलिपियों की वापसी का फैसला यहां स्थित 'इंस्टीट्यूट ऑफ जैनोलॉजी' के साथ संवाद और सहयोग के बाद लिया गया है। पांडुलिपियों के इस संग्रह में 15वीं शताब्दी की चित्रित पांडुलिपियों से लेकर 19वीं शताब्दी के दुर्लभ ग्रंथ शामिल हैं। इनमें धर्म, साहित्य, चिकित्सा और संस्कृति से संबंधित सामग्री प्राकृत, संस्कृत, गुजराती, राजस्थानी और प्रारंभिक हिंदी लिपियों में उपलब्ध है। इनमें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के नैतिक सिद्धांतों का एक प्रारंभिक और प्रभावशाली उदाहरण भी शामिल है, जिनसे महात्मा गांधी ने प्रेरणा ली थी और उन्होंने इसे लोकप्रिय बनाया। यह दस्तावेज भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की बुनियाद की तीखी आलोचना करता है। अन्य पांडुलिपियों में जैन धर्मग्रंथ 'कल्पसूत्र' की 16वीं शताब्दी की एक ''दुर्लभ और भव्य चित्रों से सुसज्जित'' प्रति भी शामिल है। इसके अलावा 1688 की एक पतली, नाजुक और जर्जर कागजी पांडुलिपि भी संग्रह में है, जिसे प्रारंभिक हिंदी के पहले चिकित्सा ग्रंथ 'वैद्य मनोत्सव' (1592) की संभवतः सबसे पुरानी सुरक्षित प्रति माना जाता है। समझौते के तहत इस संग्रह को प्रारंभिक रूप से 'धर्मनाथ नेटवर्क इन जैन स्टडीज' के पास रखा जाएगा, जो बर्मिंघम विश्वविद्यालय में स्थित है। यहां शोधकर्ताओं और जैन समुदाय को इन पांडुलिपियों का अध्ययन, व्याख्या और अनुवाद करने की सुविधा मिलेगी। 'इंस्टीट्यूट ऑफ जैनोलॉजी' के प्रबंध न्यासी मेहुल संघराजका ने कहा, ''वेलकम कलेक्शन का इन 2,000 पवित्र पांडुलिपियों को लौटाने का साहसिक निर्णय ऐतिहासिक है और अन्य धार्मिक समुदायों के लिए भी एक आदर्श है।'' उन्होंने कहा, ''हम यह भी स्वीकार करते हैं कि भारत की स्वतंत्रता के बाद की उथल-पुथल में इनमें से कुछ पांडुलिपियां शायद सुरक्षित नहीं रह पातीं। इन ग्रंथों के प्रति वेलकम कलेक्शन द्वारा दिखाए गए सम्मान और संरक्षण के लिए हम आभारी हैं।'' संस्थान ने कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं को आधुनिक नजरिए से परखने के बजाय सहयोग के माध्यम से ऐसे रास्ते खोजने की जरूरत है, जिससे ''जैन अध्ययन और शोध को नयी दिशा मिले और समुदाय को अपनी सांस्कृतिक विरासत तक पहुंच प्राप्त हो सके।'' संस्थान ने कहा, ''हम भविष्य की पीढ़ियों के लिए इन धरोहरों को सुलभ बनाने के सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं।'' इस सप्ताह वेलकम ट्रस्ट, इंस्टीट्यूट ऑफ जैनोलॉजी और बर्मिंघम विश्वविद्यालय के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। बाद में विस्तृत कानूनी समझौता तैयार किया जाएगा।
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन की यात्रा से लौट आए और उन्होंने राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ हुई वार्ता को ''दो महान देशों के नेताओं की मुलाकात'' बताया। ट्रंप शुक्रवार शाम मैरीलैंड स्थित 'जॉइंट बेस एंड्रूज' पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि इस यात्रा के दौरान कई अहम व्यापारिक समझौते हुए, जिनमें बोइंग के 200 विमानों की चीन को बिक्री तथा भविष्य में 750 अतिरिक्त विमान खरीदने का वादा शामिल है। उन्होंने चीन द्वारा अमेरिकी कृषि क्षेत्र को समर्थन देने की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया। बृहस्पतिवार को शी चिनफिंग के साथ मुलाकात के बाद 'फॉक्स न्यूज' को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा, ''ये दो महान देश हैं। मैं इसे 'जी-2' कहता हूं। मुझे लगता है कि इतिहास में इसे एक बेहद अहम क्षण के रूप में याद किया जाएगा।'' 'द वाशिंगटन पोस्ट' ने अपनी खबर में कहा कि ट्रंप के इस बयान से चीन को वह दर्जा मिला, जिसकी राष्ट्रपति शी लंबे समय से अपेक्षा कर रहे थे यानी अमेरिका के समकक्ष एक महाशक्ति के रूप में पहचान। रिपोर्ट में कहा गया, ''दो दिनों तक चली बैठकों के दौरान सुनियोजित समारोह, भव्य स्वागत और दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली नेताओं के बीच मित्रता तथा पारस्परिक सम्मान के प्रदर्शन ने उस भू-राजनीतिक समीकरण को स्पष्ट रूप से सामने ला दिया, जिसकी चीन लंबे समय से इच्छा रखता रहा है और जिसका अमेरिका अब तक प्रतिरोध करता आया था।'' ट्रंप ने 'फॉक्स न्यूज' से बातचीत में यह भी कहा कि शी चिनफिंग के साथ अच्छे संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जब तक वह सत्ता में हैं, तब तक चीन संभवतः ताइवान के खिलाफ कोई आक्रामक कदम नहीं उठाएगा। ट्रंप ने कहा, ''यह ताइवान पर कब्जे का मामला नहीं है। वे (चीन) सिर्फ यह नहीं चाहता कि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र देश घोषित करे।'' उन्होंने कहा, ''जब तक मैं (सत्ता) में हूं, मुझे नहीं लगता कि वे कुछ करेंगे। लेकिन मेरे बाद वे ऐसा कर सकते हैं।'' ट्रंप ने कहा, ''मैं चाहता हूं कि चीन शांत रहे। हम युद्ध नहीं चाहते। अगर मौजूदा स्थिति बनी रहती है, तो मुझे लगता है कि चीन भी इससे संतुष्ट रहेगा।'' अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि उन्होंने शी चिनफिंग को सितंबर में वाशिंगटन आने का निमंत्रण दिया है।
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वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दंत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य परीक्षण के लिए इस महीने चिकित्सकों से मिलेंगे और पदभार संभालने के बाद वह चौथी बार जांच के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों से मिलेंगे। 'व्हाइट हाउस' ने इसे नियमित वार्षिक शारीरिक जांच बताया है। 'व्हाइट हाउस' ने सोमवार शाम एक बयान में कहा कि ट्रंप 26 मई को वाल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर में अपने चिकित्सकों से मिलेंगे। ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए सबसे अधिक उम्र के व्यक्ति हैं और अगले महीने वह 80 वर्ष के हो जाएंगे। राष्ट्रपति के स्वास्थ्य को लेकर चर्चाएं बनी रहती हैं। ट्रंप ने कहा कि उन्हें पिछले साल अपने हृदय और पेट की जांच करवाने के बाद इस बात का अफसोस हुआ कि इससे लोगों के मन में उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता पैदा हो गई थी। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन की उम्र संबंधी जटिलताओं और स्वास्थ्य समस्याओं के लिए अक्सर आलोचना करने वाले ट्रंप ने हाल ही में टिप्पणी की है कि बढ़ती उम्र के बावजूद वह अच्छा महसूस कर रहे हैं। ट्रंप ने सोमवार को कहा कि उन्हें 50 साल पहले जैसा महसूस होता था, वैसा ही अब भी महसूस होता है। 'ओवल ऑफिस' में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ''मुझे बिल्कुल वैसा ही महसूस होता है। मुझे नहीं पता कि ऐसा क्यों है। ऐसा इसलिए नहीं है कि मेरा खानपान उच्च गुणवत्ता का है।''
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो को 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए एक आदर्श टीम के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की। ट्रंप ने कानून प्रवर्तन से जुड़े दिग्गजों के लिए सोमवार शाम रोज़ गार्डन में रात्रि भोज आयोजित किया जहां उन्होंने लोगों से कहा "ये जे. डी. होंगे या कोई और होंगे मुझे नहीं पता।'' इसके बाद राष्ट्रपति ने अचानक एक अनौपचारिक मतदान कराया, जिससे वहां मौजूद लोग हंसने लगे। ट्रंप ने आगंतुकों से प्रश्न किया, ''कौन जे. डी. वेंस को पसंद करता है और कौन मार्को रुबियो को पसंद करता है?'' इस पर लोगों ने अपनी पसंद के उम्मीदवार के लिए तालियां बजाईं और उत्साह दर्शाया। ट्रंप ने कहा, ''यह एक अच्छा विचार लगता है''। उन्होंने
यह स्पष्ट भी किया कि वह दोनों में से किसी का भी प्रचार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ''वैसे, मेरा मानना है कि यह एक बेहतरीन टीम है, लेकिन ये छोटी-मोटी बातें हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि किसी भी परिस्थिति में आपको मेरा समर्थन प्राप्त है।'' राष्ट्रपति ने कहा, ''मुझे लगता है कि यह राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जैसा लग रहा है।'' ट्रंप, प्रशासन के अपने करीबी लोगों के बीच माहौल का जायजा लेने के लिए अक्सर वेंस-रुबियो का सवाल उठाते हैं। ओहायो से पहली बार सांसद बने वेंस को ट्रंप ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में उपराष्ट्रपति उम्मीदवार चुना था। रुबियो ने 2016 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी, लेकिन रिपब्लिकन प्राइमरी में ट्रंप से हारने के बाद उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया था। फ्लोरिडा से तीन बार सीनेटर रह चुके रुबियो ने 2025 में ट्रंप प्रशासन में विदेश मंत्री के रूप में पदभार संभाला था। - पेशावर.। पाकिस्तान के अशांत प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में एक पुलिस चौकी पर आत्मघाती हमले में कम से कम 15 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, यह घटना शनिवार को बन्नू जिले के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में हुई, जहां विस्फोटकों से भरे एक वाहन को पुलिस चौकी की ओर बढ़ते देख सुरक्षाकर्मियों ने उस पर गोलीबारी की। इसके बाद जोरदार विस्फोट हो गया। धमाके की चपेट में आकर आसपास के कई घरों की छत ढह गईं, पुलिस चौकी की इमारत पूरी तरह जमींदोज हो गई जिससे कई सुरक्षाकर्मी मलबे में दब गए। विस्फोट के तुरंत बाद उग्रवादियों के एक बड़े समूह ने पुलिस चौकी पर हमला कर दिया और उन्हें रोकने के लिए पुलिस की ओर से भी गोलीबारी की गई। बन्नू पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस हमले में 15 सुरक्षाकर्मी मारे गए और कई घायल हैं। हालांकि, हमले में कितने चरमपंथी मारे गए या कोई पकड़ा गया, इस बारे में अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री मोहम्मद सोहेल अफरीदी ने इस चरमपंथी हमले की कड़ी निंदा की और जान-माल के नुकसान पर गहरा दुख जताया। अफरीदी ने कहा कि ''आतंकवाद के विरुद्ध'' यह लड़ाई केवल खैबर पख्तूनख्वा की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की है। उन्होंने यह भी कहा कि बंद कमरों में लिए गए फैसलों और थोपी गई नीतियों ने देश को असुरक्षा के दल-दल में धकेल दिया है। उन्होंने कहा, ''हम अपने शहीदों की कुर्बानी को व्यर्थ नहीं जाने देंगे और आतंकवाद के इस अभिशाप को जड़ से मिटाने तक प्रयास जारी रखेंगे।'' पिछले सप्ताह इसी तरह की एक घटना में, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने खैबर पख्तूनख्वा के दक्षिण वजीरिस्तान क्षेत्र में एक जांच चौकी की ओर विस्फोटक से भरे वाहन में आ रहे एक संदिग्ध चरमपंथी को मार गिराया था। हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी संगठन ने नहीं ली है। हालांकि, इससे पहले पाकिस्तान सरकार इस क्षेत्र में हिंसा के लिए प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराती रही है.।
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वाशिंगटन. अमेरिका ने अपने राजनयिक कर्मियों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का हवाला देते हुए पाकिस्तान के पेशावर में स्थित अपने वाणिज्य दूतावास को चरणबद्ध तरीके से बंद करने की घोषणा की है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को एक बयान में कहा, ''अमेरिकी विदेश मंत्रालय पेशावर स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को चरणबद्ध तरीके से बंद करने की घोषणा कर रहा है। खैबर पख्तूनख्वा से राजनयिक संपर्क की जिम्मेदारी अब इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास को सौंप दी जाएगी।'' बयान में कहा गया है, ''यह निर्णय हमारे राजनयिक कर्मियों की सुरक्षा और संसाधनों के कुशल प्रबंधन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।'' इसमें यह भी कहा गया है कि पेशावर में प्रत्यक्ष उपस्थिति में बदलाव के बावजूद पाकिस्तान में अमेरिकी प्रशासन की नीतिगत प्राथमिकताएं कायम रहेंगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका खैबर पख्तूनख्वा के लोगों और अधिकारियों के साथ आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने, क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और अमेरिकी जनता के हितों को आगे बढ़ाने के लिए सार्थक रूप से बातचीत जारी रखेगा। प्रवक्ता ने कहा, ''विदेश विभाग पाकिस्तान में अमेरिकी दूतावास के माध्यम से इस्लामाबाद, कराची और लाहौर में अपने शेष राजनयिक पदों के जरिए अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।''
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बीजिंग. चीन के हुनान प्रांत के लियुयांग शहर में पटाखा कारखाने में विस्फोट में 21 लोग मारे गए और 61 अन्य घायल हो गए। चीन की सरकारी मीडिया ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सरकारी समाचार एजेंसी 'शिन्हुआ' के अनुसार, यह विस्फोट सोमवार शाम लगभग पांच बजे गुआंडू टाउनशिप में स्थित 'लियुयांग हुआशेंग फायरवर्क्स एंड मैन्युफैक्चरिंग एंड डिसप्ले कंपनी' में हुआ। विस्फोट के तुरंत बाद आपात एवं अग्निशमन दल को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। इस घटना में घायल हुए 61 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे अन्य देशों के पोतों को सुरक्षित निकालने में सोमवार से मदद करेगी। इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि इस प्रक्रिया में किसी भी तरह के हस्तक्षेप से सख्ती से निपटा जाएगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' का उद्देश्य उन विदेशी पोतों की मदद करना है जो पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम से किसी भी तरह जुड़े नहीं हैं। ट्रंप ने कहा कि इनमें से कई पोतों में भोजन, पेयजल और अन्य उन सभी आवश्यक चीजों की कमी हो रही है।
अमेरिका के राष्ट्रपति ने साथ ही कहा कि उनके प्रतिनिधियों की ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत जारी है जिससे ''सभी के लिए सकारात्मक'' परिणाम निकल सकता है। 'यूएस सेंट्रल कमांड' (सेंटकॉम) ने एक बयान में कहा, ''राष्ट्रपति के निर्देश पर शुरू किए गए इस अभियान के तहत उन वाणिज्यिक पोतों की मदद की जाएगी जो इस अहम अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग से स्वतंत्र रूप से गुजरना चाहते हैं। दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का एक-चौथाई हिस्सा और ईंधन एवं उर्वरक उत्पादों की बड़ी मात्रा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है।'' सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा, ''क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए इस रक्षात्मक अभियान में हमारा सहयोग जरूरी है। इसके साथ ही हम नौसैनिक नाकेबंदी भी बनाए हुए हैं।'' 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' में अमेरिका की सैन्य सहायता के तहत निर्देशित मिसाइल विध्वंसक पोत, जमीन एवं समुद्र से संचालित हो सकने वाले 100 से अधिक विमान और 15,000 सैन्यकर्मी शामिल होंगे। ओमान और ईरान के बीच स्थित संकरा समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य 28 फरवरी से बंद है। इसी दिन अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया था जिसके बाद युद्ध शुरू हुआ। ट्रंप ने कहा, ''पोतों की आवाजाही का मकसद केवल उन लोगों, कंपनियों और देशों को राहत देना है जिन्होंने कुछ गलत नहीं किया है। वे परिस्थितियों के शिकार हैं। यह अमेरिका, पश्चिम एशियाई देशों और खासकर ईरान की ओर से एक मानवीय पहल है।'' उन्होंने कहा, ''हमने इन देशों से कहा है कि हम उनके पोतों को इन प्रतिबंधित जलमार्गों से सुरक्षित बाहर निकालेंगे ताकि वे स्वतंत्र रूप से अपना कामकाज आगे बढ़ा सकें।'' ट्रंप ने कहा, ''अगर इस मानवीय प्रक्रिया में किसी भी तरह से हस्तक्षेप किया गया तो दुर्भाग्य से उससे सख्ती से निपटना पड़ेगा।'' अमेरिकी समाचार वेबसाइट 'एक्सियोस' ने खबर दी कि अमेरिका ने ईरानी अधिकारियों के नवीनतम प्रस्ताव के जवाब में युद्ध समाप्त करने के समझौते के लिए रविवार को एक और संशोधित मसौदा भेजा। -
वाशिंगटन. अमेरिका ने चीन स्थित एक कच्चे तेल टर्मिनल संचालक पर ईरानी संस्थाओं से पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करने पर प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिका ने चेतावनी भी दी है कि अगर किसी अन्य ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए तेहरान को कोई ''शुल्क'' दिया, तो उसे भी ऐसे ही परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने एक बयान में कहा, ''अमेरिका ईरान के अवैध तेल व्यापार को बाधित करने के लिए निर्णायक कार्रवाई कर रहा है। यह व्यापार ईरानी शासन की आय का मुख्य स्रोत है, जिससे आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता को वित्तीय मदद मिलती है।'' पिगॉट ने कहा कि मंत्रालय ने ईरानी पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार में शामिल कई संस्थाओं, एक व्यक्ति और एक पोत पर प्रतिबंध लगाए हैं। इस कार्रवाई के तहत चीन स्थित पेट्रोलियम टर्मिनल संचालक क्विंगदाओ हाइये ऑयल टर्मिनल कंपनी लिमिटेड को निशाना बनाया गया है। इस कंपनी ने करोड़ों बैरल प्रतिबंधित ईरानी कच्चे तेल का पिछले साल फरवरी से आयात किया है। अमेरिका ने चीनी नागरिक और क्विंगदाओ हाइये के अध्यक्ष शिंगचुन ली तथा दो पोत प्रबंधन कंपनियों-ब्रिटेन स्थित थ्राइविंग टाइम्स इंटरनेशनल और हांगकांग स्थित ऑनबोर्ड शिप मैनेजमेंट लिमिटेड-पर भी प्रतिबंध लगाए हैं।
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लंदन. मैडम तुसाद संग्रहालय ने इस सप्ताह अपने लंदन मुख्यालय में 'आइकॉन्स ऑफ इंडिया' नाम से एक उत्सव की शुरुआत की, जिसमें सिनेमा और क्रिकेट जगत की भारतीय हस्तियों के मोम के पुतलों को एक साथ प्रदर्शित किया गया। सीमित समय के लिए आयोजित यह प्रदर्शनी में भारतीय अभिनेताओं और क्रिकेटरों की मोम की 13 मूर्तियां प्रदर्शित की गई हैं। मई और जून के महीनों के लिए, इस क्षेत्र को भारतीय संस्कृति से प्रेरित एक जीवंत स्थान में रूपांतरित किया गया है, जहां आगंतुक अमिताभ बच्चन और सचिन तेंदुलकर सहित कुछ सबसे प्रतिष्ठित हस्तियों की मोम की मूर्तियों को करीब से देख सकते हैं। मैडम तुसाद लंदन संग्रहालय के महाप्रबंधक स्टीव ब्लैकबर्न ने कहा, ''बॉलीवुड की वैश्विक अपील बहुत बड़ी है और भारतीय सिनेमा और क्रिकेट के प्रति लंदन का प्यार हर साल और मजबूत होता जा रहा है।'' उन्होंने कहा कि 'आइकॉन्स ऑफ इंडिया' के साथ, प्रशंसकों को उनके पसंदीदा सितारों के और भी करीब लाया जा रहा है। ब्लैकबर्न ने कहा, ''हम मेहमानों को इस जादुई दुनिया में कदम रखने, अविस्मरणीय पलों को कैद करने और वैश्विक मनोरंजन और खेल जगत को आकार देने वाले दिग्गजों का जश्न मनाने के लिए आमंत्रित करते हुए रोमांचित हैं।'' ब्लैकबर्न ने इस प्रदर्शनी को 'वास्तव में एक वैश्विक उत्सव' करार दिया। उन्होंने ने बताया कि प्रदर्शनी के लिए कुछ मोम के पुतलों को मैडम तुसाद के अन्य संग्रहालयों से विशेष तौर पर लाया गया है, जिनमें बैंकॉक से लाई गई विराट कोहली की और न्यूयॉर्क से लाई गई ऐश्वर्या राय की मूर्ति शामिल हैं। 'आइकॉन्स ऑफ इंडिया' प्रदर्शनी में प्रशंसक दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह से लेकर प्रियंका चोपड़ा जोनास, ऋतिक रोशन, कैटरीना कैफ और माधुरी दीक्षित तक अपने पसंदीदा सितारों की मोम की प्रतिमा देख सकते हैं और उनके साथ तस्वीर खिंचवा सकते हैं। प्रदर्शनी के लिए रणबीर कपूर और तेलुगु सिनेमा की स्टार काजल अग्रवाल के मोम के पुतले क्रमश: न्यूयॉर्क और सिंगापुर के मैडम तुसाद संग्रहालय से यहां लाए गए हैं। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने इस प्रदर्शनी का समर्थन करते हुए इसे ''दोनों देशों के बीच साझा सांस्कृतिक जुड़ाव का एक जीवंत उत्सव'' करार दिया। लंदन स्थित मैडम तुसाद संग्रहालय लगभग 200 साल पुराना है। अब इसकी इकाइयां न्यूयॉर्क, शंघाई, एम्स्टर्डम और सिडनी सहित दुनिया के 24 स्थानों पर स्थापित की गई हैं।
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[5/2, 22:19] Prashant Bhaiya: अमेरिका ने ईरानी तेल आयात करने पर चीन स्थित कच्चे तेल टर्मिनल संचालक पर प्रतिबंध लगाए
वाशिंगटन. अमेरिका ने चीन स्थित एक कच्चे तेल टर्मिनल संचालक पर ईरानी संस्थाओं से पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करने पर प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिका ने चेतावनी भी दी है कि अगर किसी अन्य ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए तेहरान को कोई ''शुल्क'' दिया, तो उसे भी ऐसे ही परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने एक बयान में कहा, ''अमेरिका ईरान के अवैध तेल व्यापार को बाधित करने के लिए निर्णायक कार्रवाई कर रहा है। यह व्यापार ईरानी शासन की आय का मुख्य स्रोत है, जिससे आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता को वित्तीय मदद मिलती है।'' पिगॉट ने कहा कि मंत्रालय ने ईरानी पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार में शामिल कई संस्थाओं, एक व्यक्ति और एक पोत पर प्रतिबंध लगाए हैं। इस कार्रवाई के तहत चीन स्थित पेट्रोलियम टर्मिनल संचालक क्विंगदाओ हाइये ऑयल टर्मिनल कंपनी लिमिटेड को निशाना बनाया गया है। इस कंपनी ने करोड़ों बैरल प्रतिबंधित ईरानी कच्चे तेल का पिछले साल फरवरी से आयात किया है। अमेरिका ने चीनी नागरिक और क्विंगदाओ हाइये के अध्यक्ष शिंगचुन ली तथा दो पोत प्रबंधन कंपनियों-ब्रिटेन स्थित थ्राइविंग टाइम्स इंटरनेशनल और हांगकांग स्थित ऑनबोर्ड शिप मैनेजमेंट लिमिटेड-पर भी प्रतिबंध लगाए हैं।[5/2, 22:20] Prashant Bhaiya: एक्सिस बैंक ने अपनी पहली डिजिटल लॉकर-केंद्रित शाखा शुरू कीनयी दिल्ली. निजी क्षेत्र के बैंक एक्सिस बैंक ने शनिवार को यहां अपनी पहली डिजिटल लॉकर-केंद्रित शाखा का उद्घाटन किया। एक्सिस बैंक ने बयान में कहा कि यह शाखा सुरक्षित बैंकिंग को नए सिरे से परिभाषित करने की दिशा में एक कदम है। इसमें उन्नत स्वचालन, उच्च स्तरीय सुरक्षा और अत्याधुनिक लॉकर सेवाओं के माध्यम से ग्राहकों को बेहतर अनुभव देने पर जोर दिया गया है। इस शाखा का उद्घाटन वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने बैंक के प्रबंध निदेशक अमिताभ चौधरी और कार्यकारी निदेशक मुनीश शारदा की उपस्थिति में किया। बयान के अनुसार, भारत में सुरक्षित जमा लॉकर की उपलब्धता और मांग के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है, खासकर घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में। उद्योग के अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2030 तक देश में लगभग छह करोड़ संपन्न लोगों को बैंक लॉकर की आवश्यकता होगी, जबकि वर्तमान में केवल करीब 60 लाख लॉकर ही उपलब्ध हैं। यह अंतर बड़े शहरों में और अधिक स्पष्ट है, जहां शहरी आवास तेजी से 'गेटेड' रिहायशी परिसरों पर केंद्रित हो रहा है। एक्सिस बैंक की यह डिजिटल लॉकर-केंद्रित शाखा इसी बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने के लिए विकसित की गई है, जो प्रीमियम आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षित और स्वचालित लॉकर सेवाएं प्रदान करती है। बैंक ने कहा कि शाखा के डिजाइन और सेवा वितरण को नए सिरे से तैयार कर वह घनी शहरी आबादी वाले क्षेत्रों में अपनी भौतिक उपस्थिति को मजबूत कर रहा है और ग्राहकों को अधिक नियंत्रण, गोपनीयता और सुविधा प्रदान कर रहा है।[5/2, 22:22] Prashant Bhaiya: लंदन मैडम तुसाद संग्रहालय में 'आइकॉन्स ऑफ इंडिया' प्रदर्शनी की शुरुआत हुईलंदन. मैडम तुसाद संग्रहालय ने इस सप्ताह अपने लंदन मुख्यालय में 'आइकॉन्स ऑफ इंडिया' नाम से एक उत्सव की शुरुआत की, जिसमें सिनेमा और क्रिकेट जगत की भारतीय हस्तियों के मोम के पुतलों को एक साथ प्रदर्शित किया गया। सीमित समय के लिए आयोजित यह प्रदर्शनी में भारतीय अभिनेताओं और क्रिकेटरों की मोम की 13 मूर्तियां प्रदर्शित की गई हैं। मई और जून के महीनों के लिए, इस क्षेत्र को भारतीय संस्कृति से प्रेरित एक जीवंत स्थान में रूपांतरित किया गया है, जहां आगंतुक अमिताभ बच्चन और सचिन तेंदुलकर सहित कुछ सबसे प्रतिष्ठित हस्तियों की मोम की मूर्तियों को करीब से देख सकते हैं। मैडम तुसाद लंदन संग्रहालय के महाप्रबंधक स्टीव ब्लैकबर्न ने कहा, ''बॉलीवुड की वैश्विक अपील बहुत बड़ी है और भारतीय सिनेमा और क्रिकेट के प्रति लंदन का प्यार हर साल और मजबूत होता जा रहा है।'' उन्होंने कहा कि 'आइकॉन्स ऑफ इंडिया' के साथ, प्रशंसकों को उनके पसंदीदा सितारों के और भी करीब लाया जा रहा है। ब्लैकबर्न ने कहा, ''हम मेहमानों को इस जादुई दुनिया में कदम रखने, अविस्मरणीय पलों को कैद करने और वैश्विक मनोरंजन और खेल जगत को आकार देने वाले दिग्गजों का जश्न मनाने के लिए आमंत्रित करते हुए रोमांचित हैं।'' ब्लैकबर्न ने इस प्रदर्शनी को 'वास्तव में एक वैश्विक उत्सव' करार दिया। उन्होंने ने बताया कि प्रदर्शनी के लिए कुछ मोम के पुतलों को मैडम तुसाद के अन्य संग्रहालयों से विशेष तौर पर लाया गया है, जिनमें बैंकॉक से लाई गई विराट कोहली की और न्यूयॉर्क से लाई गई ऐश्वर्या राय की मूर्ति शामिल हैं। 'आइकॉन्स ऑफ इंडिया' प्रदर्शनी में प्रशंसक दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह से लेकर प्रियंका चोपड़ा जोनास, ऋतिक रोशन, कैटरीना कैफ और माधुरी दीक्षित तक अपने पसंदीदा सितारों की मोम की प्रतिमा देख सकते हैं और उनके साथ तस्वीर खिंचवा सकते हैं। प्रदर्शनी के लिए रणबीर कपूर और तेलुगु सिनेमा की स्टार काजल अग्रवाल के मोम के पुतले क्रमश: न्यूयॉर्क और सिंगापुर के मैडम तुसाद संग्रहालय से यहां लाए गए हैं। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने इस प्रदर्शनी का समर्थन करते हुए इसे ''दोनों देशों के बीच साझा सांस्कृतिक जुड़ाव का एक जीवंत उत्सव'' करार दिया। लंदन स्थित मैडम तुसाद संग्रहालय लगभग 200 साल पुराना है। अब इसकी इकाइयां न्यूयॉर्क, शंघाई, एम्स्टर्डम और सिडनी सहित दुनिया के 24 स्थानों पर स्थापित की गई हैं।[5/2, 22:23] Prashant Bhaiya: अंडमान निकोबार प्रशासन ने पानी के भीतर सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज फहराकर 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड' बनायाश्री विजय पुरम. अंडमान निकोबार प्रशासन ने शनिवार को राधानगर बीच पर पानी के भीतर दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज फहराकर नया 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड' बनाया। यह विशाल तिरंगा स्वराज द्वीप (हैवलॉक द्वीप) में समुद्र के भीतर एक जटिल और सटीक समन्वित अभियान के तहत फहराया गया, जिसमें कई एजेंसियों और प्रशिक्षित गोताखोरों ने भाग लिया। इस तिरंगे की लंबाई 60 मीटर है जबकि चौड़ाई 40 मीटर है। कार्यक्रम को देखने के लिए उपराज्यपाल डी के जोशी, मुख्य सचिव चंद्र भूषण कुमार और पुलिस महानिदेशक एचएस धालीवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। अंडमान निकोबार पुलिस, वन विभाग, भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के कर्मियों के साथ-साथ विभिन्न गोताखारी केंद्रों के गोताखोरों ने पानी के भीतर ध्वज फहराने के इस जटिल अभियान को सफल बनाने में सहयोग किया। सुबह 10:35 बजे, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के निर्णायक ऋषि नाथ ने औपचारिक रूप से इस उपलब्धि की पुष्टि की और जोशी को प्रमाणपत्र प्रदान किया। सभा को संबोधित करते हुए जोशी ने इस उपलब्धि को द्वीपों की विशिष्ट उपलब्धियों में एक महत्वपूर्ण क्षण बताते हुए इसमें शामिल लोगों के समन्वय और समर्पण की सराहना की। प्रशासन रविवार को स्वराज द्वीप के 'लाइटहाउस डाइव साइट' पर 'सबसे ऊंचा मानव पिरामिड' बनाने का एक और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का प्रयास करेगा, जिसमें उपराज्यपाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के शामिल होने की उम्मीद है। यह उपलब्धि अंडमान निकोबार द्वीप समूह को साहसिक पर्यटन, समुद्री गतिविधियों और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त आयोजनों के लिए एक उभरते गंतव्य के रूप में दर्शाती है।[5/2, 22:27] Prashant Bhaiya: सरकार ने रोहित जैन को आरबीआई का डिप्टी गवर्नर नियुक्त कियानयी दिल्ली. सरकार ने रोहित जैन को तीन साल के कार्यकाल के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया है। जैन, टी रबी शंकर का स्थान लेंगे, जिनका विस्तारित कार्यकाल शनिवार को समाप्त हो गया। सूत्रों ने सोमवार को बताया कि मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने तीन मई या उसके बाद पदभार ग्रहण करने की तारीख से तीन साल के लिए उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। रोहित जैन इस समय आरबीआई में कार्यकारी निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।आरबीआई अधिनियम, 1934 के अनुसार केंद्रीय बैंक में चार डिप्टी गवर्नर होने चाहिए। इनमें से दो आंतरिक रैंक से, एक वाणिज्यिक बैंकर और एक अर्थशास्त्री होना चाहिए जो मौद्रिक नीति विभाग का नेतृत्व करे। अन्य तीन डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे, पूनम गुप्ता और एस सी मुर्मू हैं। टी रबी शंकर को पहली बार सितंबर 2021 में तीन साल के लिए डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया गया था। उन्हें 2024 में और उसके बाद 2025 में एक-एक साल का विस्तार दिया गया था।[5/2, 22:51] Bhabhi: उप मुख्यमंत्री अरूण साव ने माँ बम्लेश्वरी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की-प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना कीराजनांदगांव । उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव ने माँ बम्लेश्वरी मंदिर डोंगरगढ़ पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव ने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान सांसद श्री संतोष पाण्डेय, महापौर श्री मधुसूदन यादव, समाज सेवी श्री कोमल सिंह राजपूत, नवनिर्वाचित अध्यक्ष राजगामी संपदा न्यास श्रीमती पूर्णिमा साहू, पूर्व विधायक श्री विनोद खांडेकर, माँ बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री मनोज अग्रवाल, मां बम्लेश्वरी ट्रस्ट समिति के उपाध्यक्ष श्री अनील गट्टानी सहित ट्रस्ट समिति के अन्य पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।[5/2, 22:55] Bhabhi: नीट-2026 परीक्षा का आयोजन 3 मई को- राजनांदगांव जिले में कुल 6 परीक्षा केंद्र में 1897 परीक्षार्थी होंगे शामिलराजनांदगांव । राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा नीट-2026 परीक्षा का आयोजन 3 मई 2026 को किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा परीक्षा के शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित संचालन के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। परीक्षा के लिए जिले में कुल 6 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहाँ 1897 अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित होंगे। सभी केंद्रों में ड्यूटी मजिस्ट्रेट्स की नियुक्ति की गई है तथा परीक्षा की निगरानी हेतु जिला प्रशासन द्वारा पर्यवेक्षक भी तैनात किए गए हैं। डीएससीसी सदस्यों द्वारा परीक्षा के दौरान निरंतर निरीक्षण और समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। परीक्षा दिवस पर सभी केंद्रों में अबाधित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। आपात सेवाएं-जैसे एंबुलेंस एवं फायर सर्विसेस व अलर्ट मोड पर रहेंगी। दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए व्हीलचेयर सहित सभी आवश्यक सुविधाएं भी केंद्रों पर उपलब्ध कराई गई है। परीक्षा की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सभी केंद्रों में पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। परीक्षा केन्द्र परिसर में अनधिकृत अधिकारी एवं बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा। अभ्यर्थियों के फ्रिस्किंग, रजिस्ट्रेशन, प्रवेश पत्र एवं बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया अधिकृत एजेंसियों द्वारा की जाएगी। सभी केंद्रों में मोबाइल जैमर भी स्थापित कर दिए गए हैं।जिला प्रशासन द्वारा अभ्यर्थियों से निर्धारित समय से पूर्व परीक्षा केंद्र पर पहुंचने, एडमिट कार्ड और आवश्यक पहचान दस्तावेज साथ रखने तथा परीक्षा नियमों का पूर्णत: पालन करने की अपील की गई है। कलेक्टर ने सभी संबंधित अधिकारियों को एनटीए के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। -
दुबई. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस्लामिक गणराज्य अपनी "परमाणु और मिसाइल क्षमताओं" को राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में संरक्षित रखेगा। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्धविराम को स्थायी बनाने के लिए व्यापक समझौते की कोशिश कर रहे हैं। सरकारी टेलीविजन पर पढ़े गए लिखित बयान में खामेनेई ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि फारस की खाड़ी में अमेरिकियों की जगह केवल "इसके पानी की तह में" है और क्षेत्र के इतिहास में "नया अध्याय" लिखा जा रहा है। इस बीच, अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी के कारण ईरान के तेल उद्योग पर दबाव बढ़ गया है, जिससे उसके तेल टैंकर समुद्र में नहीं जा पा रहे हैं। वहीं, ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के कारण जून आपूर्ति के लिए बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (कच्चा तेल) की कीमत बृहस्पतिवार के कारोबार में 126 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह जलडमरूमध्य वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के लगभग पांचवें हिस्से के व्यापार का प्रमुख मार्ग है। इन परिस्थितियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है और अमेरिका के लिए भी चुनौती खड़ी कर दी है। खामेनेई ने एक बयान में कहा, ''ईश्वर की मदद से फारस की खाड़ी क्षेत्र का भविष्य अमेरिका के बिना होगा। एक ऐसा भविष्य जो यहां के लोगों की प्रगति और समृद्धि के लिए होगा।'' उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी से जुड़े देशों का साझा भविष्य है और बाहरी शक्तियों का यहां कोई स्थान नहीं है। युद्धविराम के बीच बढ़ा तनाव---
युद्धविराम को लेकर संशय की स्थिति के बीच अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर टकराव जारी है। अमेरिकी नाकेबंदी का उद्देश्य ईरान की तेल बिक्री को रोकना है, जिससे उसकी आय प्रभावित हो सके। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिससे अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगियों पर दबाव बढ़ा है। ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता को टालने का प्रस्ताव भी दिया है। हालांकि, अमेरिका का कहना है कि वह ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना चाहता है। ईरान लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है, हालांकि उसने लगभग 60 प्रतिशत तक हथियार-स्तरीय यूरेनियम का संवर्धन किया है। मुजतबा खामेनेई ने बयान में कहा, ''देश के अंदर और बाहर रहने वाले नौ करोड़ गौरवान्वित और सम्मानित ईरानी, ईरान की पहचान पर आधारित सभी आध्यात्मिक, मानवीय, वैज्ञानिक, औद्योगिक और तकनीकी क्षमताओं को - नैनो तकनीक तथा जैव प्रौद्योगिकी से लेकर परमाणु और मिसाइल क्षमताओं तक- राष्ट्रीय संपत्ति मानते हैं। -
वाशिंगटन. ब्रिटेन के महाराजा चार्ल्स तृतीय ने अमेरिका की ब्रिटेन से स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ पर दोनों देशों के रिश्तों को ऐतिहासिक बताया और साथ ही नेताओं से 'आत्म-केंद्रित' न होने की अपील की। उन्होंने मंगलवार को अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन ने मिलकर ''मानव इतिहास के सबसे प्रभावशाली गठबंधनों में से एक'' का निर्माण किया है। चार्ल्स ने अपने संबोधन में अमेरिका-ब्रिटेन के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और लोकतांत्रिक संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन केवल पुरानी उपलब्धियों पर टिक नहीं सकता और इसे वर्तमान चुनौतियों के अनुसार मजबूत करना होगा। उन्होंने रूस के खिलाफ यूक्रेन के समर्थन में दृढ़ता दिखाने और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के गठबंधन को मजबूत बनाए रखने की जरूरत बतायी। जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भी उन्होंने अप्रत्यक्ष संदेश देते हुए कहा कि नेताओं को प्रकृति की रक्षा की साझा जिम्मेदारी पर विचार करना चाहिए। उन्होंने धार्मिक विविधता और अंतरधार्मिक संवाद की भी सराहना की। ब्रिटेन के महाराजा चार्ल्स अमेरिका की चार दिवसीय यात्रा पर हैं, जिसका उद्देश्य अमेरिकी स्वतंत्रता समारोह में शामिल होना और दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करना है। उनके साथ महारानी कैमिला भी हैं। इससे पहले उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय 'व्हाइट हाउस' में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप से मुलाकात की। ट्रंप ने बैठक को ''बेहद अच्छी'' बताते हुए चार्ल्स को ''शानदार व्यक्ति'' कहा।
कुछ ब्रिटिश टिप्पणीकारों ने महाराजा चार्ल्स के 20 मिनट के संबोधन को उनकी अपेक्षा से अधिक राजनीतिक बताया। चार्ल्स ब्रिटेन के दूसरे सम्राट हैं जिन्होंने अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। इससे पहले उनकी मां महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 1991 में ऐसा किया था। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया उनकी मां के समय की तुलना में अधिक अस्थिर और खतरनाक है। हाल में व्हाइट हाउस संवाददाता रात्रिभोज के दौरान ट्रंप पर कथित हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "हिंसा के ऐसे कृत्य कभी सफल नहीं होंगे।" -
वाशिंगटन. अमेरिकी मरीन सैनिकों ने अरब सागर में एक वाणिज्यिक जहाज पर धावा बोला क्योंकि उन्हें संदेह था कि जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका द्वारा लगाए गए नाकाबंदी का उल्लंघन कर ईरान जा रहा था। अमेरिकी सेंट्रल कमान ने कहा कि 'एम/वी ब्लू स्टार 3' नामक इस वाणिज्यिक जहाज की तलाशी ली गई और बाद में उसे छोड़ दिया गया क्योंकि यह पुष्टि हो गई कि वह किसी ईरानी बंदरगाह की ओर नहीं जा रहा था। सेंट्रल कमान ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा कि सुबह अरब सागर में अमेरिकी मरीन सैनिकों ने 'एम/वी ब्लू स्टार 3' नामक एक वाणिज्यिक जहाज पर धावा बोल कर कार्रवाई की। सेंट्रल कमान ने कहा कि सैनिकों ने जहाज की तलाशी लेने और इस बात की पुष्टि होने पर कि जहाज किसी ईरानी बंदरगाह पर नहीं रुकेगा, उसे जाने दिया। सेंट्रल कमान ने बताया कि नाकाबंदी का पालन सुनिश्चित करने के लिए 39 जहाजों का मार्ग बदला गया है।
ईरान के खिलाफ 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर जहाजों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ है और लंबे समय तक आर्थिक नुकसान की आशंका बढ़ गई है। इस नाकाबंदी के परिणामस्वरूप क्षेत्र के विभिन्न बंदरगाहों पर कई जहाज लंगर डाले हुए हैं।
सेंट्रल कमान ने कहा, ''ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी से पहले औसतन प्रतिदिन पांच जहाज ईरान के चाबहार बंदरगाह पर लंगर डाले रहते थे। वर्तमान में 20 से अधिक जहाज चाबहार में ही हैं क्योंकि अमेरिकी सेना ने नाकाबंदी के दौरान ईरान से आर्थिक व्यापार को रोक दिया है।'' समुद्री यातायात निगरानी वेबसाइट के अनुसार, 'एम/वी ब्लू स्टार 3' कोमोरोस के ध्वज के तहत चलने वाला एक कंटेनर जहाज है और यह ओमान के सोहार बंदरगाह की ओर जा रहा था। -
न्यूयॉर्क. अक्षय पात्र फाउंडेशन से प्रेरित एक वैश्विक खाद्य पहल ने अमेरिका में कॉलेज के विद्यार्थियों के बीच खाद्य असुरक्षा की चुनौती से निपटने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है और भारतीय-अमेरिकी प्रवासी समुदाय से अपना समर्थन देने का आह्वान किया है। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने 'वर्ल्ड फूड मूवमेंट' (डब्ल्यूएफएम) के सहयोग से सोमवार को यहां 'नो वन हंगरी' (कोई भूखा ना रहे) शीर्षक से एक विशेष कार्यक्रम किया। अमेरिका स्थित एक गैर-लाभकारी संगठन डब्ल्यूएफएम ने पिछले साल सितंबर में न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, बोस्टन और कैलिफोर्निया के सामुदायिक कॉलेजों में विद्यार्थियों को गर्म और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की पहल शुरू की थी, जिसका लक्ष्य 2030 तक पूरे अमेरिका में सालाना दस लाख थाली परोसना था। वाणिज्य दूतावास में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अक्षय पात्र फाउंडेशन और डब्ल्यूएफएम के सह-संस्थापक एवं वाइस चेयरमैन श्रीचंचलपति दास ने कहा कि अमेरिका में ऐसा नहीं होना चाहिए कि विभिन्न समुदायों के विद्यार्थियों को भोजन और शिक्षा के बीच चुनाव करने के लिए संघर्ष करना पड़े। दास ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अमेरिका में कॉलेज परिसरों में लगभग 41 प्रतिशत छात्र खाद्य असुरक्षा का सामना करते हैं। देश के 91 संस्थानों के 74,000 से अधिक छात्रों से जुटाए गए आंकड़े से यह भी पता चला कि संरचनात्मक रूप से वंचित समूहों में से आधे से अधिक छात्र कॉलेज परिसरों में भूखे रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा, ''यह सब देखकर, यह सब सुनकर, हमने विश्व खाद्य आंदोलन को एक चैरिटी के रूप में स्थापित किया ताकि मुख्य रूप से कॉलेज परिसरों और खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे कुछ समुदायों में खाद्य असुरक्षा को दूर किया जा सके।'' डब्ल्यूएफएम वर्तमान में न्यूयॉर्क शहर और न्यू जर्सी में तीन-तीन सामुदायिक कॉलेज, बोस्टन के उपनगरों में दो सामुदायिक कॉलेज, बे एरिया में सात सामुदायिक कॉलेज परिसरों को सेवाएं प्रदान करता है और वर्जीनिया में प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को लगभग 1800 थाली भोजन प्रदान करता है यानी कुल मिलाकर प्रति सप्ताह लगभग 3700 थाली। न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्यदूत विनय प्रधान ने कहा कि ये आंकड़े एक ''बहुत ही महत्वपूर्ण'' मुद्दे की ओर इशारा करते हैं। पूरे भारत में जरूरतमंद समुदायों की मदद के लिए अमेरिका में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के प्रयासों की सराहना करते हुए, प्रधान ने इस बात पर जोर दिया कि यह ''उचित'' है कि भारतीय मूल के अमेरिकी भी उन देशों के समुदायों की मदद करें जहां वे रहते हैं। इस महीने 'टाइम' पत्रिका द्वारा दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किये गए शेफ विकास खन्ना ने कहा कि भारत में ''भोजन उपासना, देखभाल और उपचार का एक रूप है'' और यह लोगों को एक दूसरे से जोड़ता है।
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय 'व्हाइट हाउस' की एक शीर्ष अधिकारी ने वार्षिक पत्रकार रात्रिभोज के दौरान शनिवार को हुई गोलीबारी की घटना के मद्देनजर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा की समीक्षा के लिए इस सप्ताह के अंत में 'यूएस सीक्रेट सर्विस' और गृह मंत्रालय (डीएचएस) की बैठक बुलाई है। 'व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन' (डब्ल्यूएचसीए) के रात्रिभोज स्थल 'वाशिंगटन हिल्टन' होटल में हुए हमले ने राष्ट्रपति पद के उत्तराधिकार क्रम को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है क्योंकि कार्यक्रम में मंत्रिमंडल के कई मंत्री मौजूद थे। ट्रंप को चार जुलाई को अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ से जुड़े कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होना है। इसके मद्देनजर 'व्हाइट हाउस' की 'चीफ ऑफ स्टाफ' सुसन वाइल्स ने 'सीक्रेट सर्विस' और डीएचएस नेतृत्व की बैठक बुलाई है जिसमें प्रोटोकॉल और अन्य प्रक्रियाओं पर चर्चा होगी। 'व्हाइट हाउस' की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि अधिकारियों ने 'व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन' के रात्रिभोज से पहले 'डेजिग्नेटेड सर्वाइवर' (आपात स्थिति में सरकार की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए नामित अधिकारी) और उत्तराधिकार क्रम पर चर्चा की थी। लेविट ने कहा, ''लेकिन उत्तराधिकार क्रम में शामिल मंत्रिमंडल के कई सदस्य विभिन्न निजी कारणों से कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए थे इसलिए कोई 'डेजिग्नेटेड सर्वाइवर' नामित करना जरूरी नहीं था क्योंकि कई सदस्य पहले से ही वहां मौजूद नहीं थे।'' उन्होंने कहा कि वाइल्स द्वारा बुलाई गई बैठक में इस बात पर ''चर्चा'' होगी कि क्या ट्रंप और उपराष्ट्रपति जे डी वेंस को एक ही सार्वजनिक कार्यक्रम में मौजूद रहना चाहिए। रात्रिभोज में ट्रंप, वेंस, प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष माइक जॉनसन, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ मौजूद थे। ये सभी राष्ट्रपति पद के उत्तराधिकार क्रम में शामिल हैं। रिपब्लिकन पार्टी के नेता एवं सांसद माइकल मैक्कॉल ने 'केबल न्यूज नेटवर्क' (सीएनएन) से कहा, ''मुझे लगता है कि सीक्रेट सर्विस को इस बात पर फिर से विचार करना चाहिए कि ऐसे किसी कार्यक्रम में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों को एक साथ मौजूद रहना चाहिए या नहीं।'' अमेरिकी संविधान एवं 1947 के राष्ट्रपति उत्तराधिकार अधिनियम में राष्ट्रपति पद के उत्तराधिकार क्रम का प्रावधान है। इसके तहत क्रम इस प्रकार है- उपराष्ट्रपति, प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष, सीनेट के अस्थायी अध्यक्ष, विदेश मंत्री, वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री, अटॉर्नी जनरल, गृह, कृषि, वाणिज्य, श्रम, स्वास्थ्य एवं मानव सेवा, आवास एवं शहरी विकास, परिवहन, ऊर्जा, शिक्षा, 'वेटर्न्स अफेयर्स' (सेवानिवृत्त सैन्य कर्मचारियों के मामलों से जुड़ा) विभागों के मंत्री आदि.
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नदजामेना (चाड)/ चाड के पूर्वी हिस्से में जल संसाधन को लेकर दो परिवारों के बीच हुए विवाद के हिंसक झड़पों में बदलने से कम से कम 42 लोगों की मौत हो गई। यह जानकारी देश के उप प्रधानमंत्री लिमाने महामत ने दी। महामत ने वादी फीरा प्रांत के इगोटे गांव के दौरे के दौरान बताया कि शनिवार को हुई इस घटना में 42 लोगों की मौत हुई और 10 अन्य घायल हुए। उन्होंने कहा कि घायलों को प्रांतीय स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि बदले की कार्रवाई का सिलसिला बड़े क्षेत्र में फैल गया था, जिसके बाद सेना को हस्तक्षेप करना पड़ा। उनके अनुसार, सेना की त्वरित कार्रवाई से स्थिति को काबू में कर लिया गया है और अब हालात नियंत्रण में हैं। उप प्रधानमंत्री ने गांव में पारंपरिक मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू करने और आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए न्यायिक कार्रवाई शुरू करने की घोषणा की। मध्य अफ्रीकी देश चाड में संसाधनों को लेकर अंतर-समुदायिक झड़पें आम हैं। पिछले वर्ष दक्षिण-पश्चिमी चाड में किसानों और पशुपालकों के बीच संघर्ष में 42 लोगों की मौत हो गई थी और कई घर जला दिए गए थे। महामत ने कहा कि सरकार सीमा क्षेत्र में अस्थिरता रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी।
चाड के पूर्वी प्रांत पिछले कई महीनों से सूडान में जारी युद्ध से भागकर आए शरणार्थियों को शरण दे रहे हैं, जिससे संसाधनों और सुरक्षा पर दबाव बढ़ गया है। फरवरी में चाड ने सीमा को "अगली सूचना तक" बंद कर दिया था, ताकि सूडान के संघर्ष का असर उसके क्षेत्र में फैलने से रोका जा सके।file photo
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वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि शनिवार रात 'व्हाइट हाउस करेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन' के रात्रिभोज के दौरान होटल के बॉलरूम के बाहर हुई गोलीबारी के बाद जब सुरक्षाकर्मी उन्हें बाहर ले जा रहे थे, तब वह खुद देखना चाहते थे कि आखिर क्या हो रहा है। सीबीएस के '60 मिनट्स' कार्यक्रम में एक साक्षात्कार में ट्रंप ने वाशिंगटन हिल्टन होटल में गोलीबारी के बाद फैली अफरातफरी का पूरा घटनाक्रम बताया। जब उनसे पूछा गया कि क्या गोलियों की आवाज सुनकर वह चिंतित थे, तो ट्रंप ने कहा, ''मैं घबराया नहीं था। मैं जिंदगी को समझता हूं। आजकल की दुनिया में कुछ भी हो सकता है।'' राष्ट्रपति ने कहा कि वह खुद घटनाक्रम को देखना चाहते थे, संभवतः इसी वजह से 'सीक्रेट सर्विस' के कर्मियों को उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने में समय लग गया। उन्होंने कहा, ''मैं देखना चाहता था कि क्या हो रहा है। मैं उनके (सीक्रेट सर्विस के) साथ सहयोग नहीं कर रहा था। मैं जानना चाहता था कि क्या चल रहा है। धीरे-धीरे जब बात समझ में आई, तो लगा कि यह बॉलरूम का शोर नहीं, कुछ और ही मामला है, और गंभीर है।'' ट्रंप ने घटना को याद करते हुए कहा, ''मैं एक सजग टीम के मजबूत घेरे में था, लेकिन सच कहूं तो मैंने उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं। मैं कहता रहा, ठहरो, एक मिनट ठहरो।'' उन्होंने कहा कि जब वह मंच से बाहर निकल रहे थे, तब सुरक्षाकर्मी बार-बार उनसे नीचे झुकने की गुजारिश कर रहे थे। ट्रंप ने कहा, ''मैं चलने लगा और उन्होंने कहा, कृपया नीचे झुकिए, कृपया फर्श की ओर झुकिए। तो मैं झुक गया और मेलानिया भी झुक गईं।'' साक्षात्कार के दौरान कुछ तीखे पल भी आए, जब ट्रंप से हमले से पहले संदिग्ध द्वारा अपने परिवार को भेजे गए एक संदेश में उनके बारे में लिखी बातों पर सवाल किया गया। ट्रंप ने कहा, ''मुझे पहले से पता था कि आप यह पढ़ेंगे, क्योंकि आप लोग ऐसे ही हैं।''
उन्होंने कहा, ''हां, उसने यह लिखा, लेकिन मैं बलात्कारी नहीं हूं। मैंने वह संदेश पढ़ा है, वह एक बीमार आदमी है। '60 मिनट्स' जैसे कार्यक्रम में ऐसी बातें पढ़ना शोभा नहीं देता, लेकिन चलिए साक्षात्कार जारी रखते हैं।'' जब साक्षात्कारकर्ता ने पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि हमलावर विशेष रूप से उन्हें निशाना बना रहा था, तो ट्रंप ने कहा, ''मैं कोई बच्चों का शोषण करने वाला व्यक्ति नहीं हूं…आप किसी दिमागी रूप से बीमार इंसान की बकवास पढ़ रहे हैं? मुझे ऐसी चीजों से जोड़ा जा रहा है, जिनका मुझसे कोई लेना-देना नहीं है। मुझे पूरी तरह बेदाग साबित किया जा चुका है।'' अंत में राष्ट्रपति ने 'व्हाइट हाउस करेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन' से अपील की कि वे अगले 30 दिन के भीतर यह रात्रिभोज दोबारा आयोजित करें। ट्रंप ने कहा, ''मैं नहीं चाहता कि यह रद्द हो। मुझे लगता है कि किसी कम अक्ल इंसान द्वारा इस तरह के आयोजन को रद्द करवा देना बेहद बुरी बात है।'' उन्होंने यह भी कहा, ''ऐसा नहीं है कि मैं वहां जाना चाहता हूं। मैं बहुत व्यस्त हूं। मुझे इसकी जरूरत नहीं।'' -
नई दिल्ली। ईरान की मुख्य सैन्य कमान ‘खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर’ ने कहा है कि अगर अमेरिका पश्चिम एशिया क्षेत्र में अपनी “नाकेबंदी, लूट और समुद्री दखल” जारी रखता है, तो वह इसका जवाब देगा। ईरानी मीडिया में जारी बयान में कहा गया कि अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नौसैनिक नाकेबंदी कर रखी है। इससे ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। साथ ही, पिछले कुछ दिनों में ईरान जा रहे जहाजों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि उसकी सेना पहले से ज्यादा मजबूत और तैयार है। वह देश की संप्रभुता, हितों और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है। बयान में यह भी कहा गया कि हालिया युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना ईरान की ताकत और हमले की क्षमता का कुछ हिस्सा देख चुकी है। ईरानी सेना ने कहा कि वह क्षेत्र में दुश्मनों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है। अगर अमेरिका और इजरायल फिर से कोई हमला करते हैं, तो ईरान उन्हें और ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए तैयार है।वहीं, सऊदी अरब से जुड़े समाचार चैनल ‘अल अरबिया’ ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि ईरान अमेरिका द्वारा तय की गई शर्तों पर बातचीत करने के लिए तैयार नहीं है। इसी बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शनिवार को पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने युद्ध खत्म करने से जुड़े अपने विचार साझा किए।अराघची शुक्रवार रात एक प्रतिनिधिमंडल के साथ पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे थे। वहां उन्होंने अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध विराम, युद्ध खत्म करने और क्षेत्र में शांति व स्थिरता बढ़ाने के लिए आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की। यह जानकारी अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ ने दी।ईरान ने 28 फरवरी से होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण और सख्त कर दिया था। उसने अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों के गुजरने पर रोक लगा दी थी। यह कदम इन दोनों देशों द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद उठाया गया था।करीब 40 दिनों तक चले संघर्ष के बाद 8 अप्रैल को ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध विराम हुआ। इसके बाद 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच लंबी बातचीत भी हुई, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। इसके बाद अमेरिका ने इस जलमार्ग पर अपनी नाकेबंदी लागू कर दी। बताया जा रहा था कि इस हफ्ते पाकिस्तान में एक और शांति वार्ता हो सकती है, लेकिन ईरान ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। ईरान का कहना है कि अमेरिका की लगातार नौसैनिक नाकेबंदी और उसकी “ज्यादा सख्त” शर्तें इसकी मुख्य वजह हैं।(











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