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- काठमांडू,। नेपाली सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों ने मंगलवार को एक संयुक्त अपील जारी कर प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए संकट का समाधान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री (के पी शर्मा ओली) का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है, इसलिए हम सभी से संयम बरतने और इस कठिन परिस्थिति में जान-माल को और नुकसान न होने देने की अपील करते हैं।'' उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से राजनीतिक बातचीत के जरिए समस्या का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की भी अपील की। संयुक्त बयान में कहा गया, ‘‘बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण समाधान ही व्यवस्था और स्थिरता बहाल करने का एकमात्र तरीका है।'' बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में नेपाली सेना प्रमुख अशोक राज सिगडेल, नेपाल सरकार के मुख्य सचिव ई. नारायण आर्यल, गृह सचिव गोकर्ण दावडी, सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के प्रमुख राजू आर्यल, पुलिस महानिरीक्षक चंद्र कुबेर खापुंग और राष्ट्रीय जांच विभाग के प्रमुख हुतराज थापा शामिल हैं। यह अपील ऐसे समय में की गई है, जब प्रदर्शनकारियों ने संसद, सिंह दरबार परिसर, उच्चतम न्यायालय, राजनीतिक दलों के कार्यालयों और वरिष्ठ नेताओं के आवास में आग लगा दी।काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी के मेयर बालेन शाह ने एक अलग बयान में सभी से शांति बनाए रखने का आग्रह किया। उनका यह बयान प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे की घोषणा के तुरंत बाद आया। उन्होंने सभी से सेना प्रमुख से बातचीत के लिए तैयार रहने को भी कहा, लेकिन जोर देकर कहा कि पहले संसद भंग होनी चाहिए। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘हमने शुरू से ही स्पष्ट कर दिया था -- यह पूरी तरह से ‘जेन ज़ी' का आंदोलन है। प्रिय ‘जेन-ज़ी', आपके उत्पीड़क का इस्तीफा पहले ही आ चुका है। अब, कृपया शांत रहें।'' आंदोलनकारी युवकों ने पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस प्रमुख शेर बहादुर देउबा के काठमांडू के पूर्व में बूढ़ा नीलकंठ स्थित घर को जला दिया। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें प्रदर्शनकारियों को देउबा और उनकी पत्नी एवं पूर्व विदेश मंत्री आरजू राणा को उनके आवास से बंधक बनाते हुए देखा जा सकता है। इस झड़प में उन्हें मामूली चोटें आई हैं। प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू स्थित पांच सितारा होटल हिल्टन में भी आग लगा दी। माना जाता है कि देउबा के बेटे जयबीर की इस होटल में बड़ी हिस्सेदारी है। उन्होंने ललितपुर के खुमालतार स्थित आरजू के स्वामित्व वाले उल्लेंस स्कूल में भी तोड़फोड़ की। स्थिति तनावपूर्ण है, क्योंकि प्रदर्शनकारियों को विभिन्न सरकारी कार्यालयों पर कब्जा करते और उनमें तोड़फोड़ करते देखा गया। सुरक्षाकर्मी लगभग तमाशबीन बन गए। अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में कम से कम 19 लोगों की मौत होने को लेकर ओली के इस्तीफे की मांग करते हुए सैकड़ों आंदोलनकारियों के उनके कार्यालय में घुसने के तुरंत बाद, मंगलवार को उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
- काठमांडू,। नेपाल में के. पी. शर्मा ओली ने 2024 में तीसरी बार सत्ता संभालते समय देश में राजनीतिक स्थिरता आने की उम्मीद जगाई थी लेकिन सोशल मीडिया पर पाबंदी और भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं के जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन के कारण प्रधानमंत्री पद से उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। विरोध प्रदर्शन के परिणामस्वरूप पुलिस गोलीबारी में कम से कम 19 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए हैं।ओली को चीन समर्थक रुख रखने के लिए जाना जाता है। उनके इस्तीफे ने नेपाल को एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता की ओर धकेल दिया है, जहां पिछले 17 वर्षों में 14 सरकारें रही हैं। अपने मित्र रहे पुष्प कमल दाहाल 'प्रचंड' का साथ छोड़ने और प्रतिद्वंद्वी से मित्र बने शेर बहादुर देउबा के साथ हाथ मिलाने के बाद जुलाई 2024 में ओली सत्ता में आए थे। देउबा प्रतिनिधि सभा में सबसे बड़ी पार्टी - नेपाली कांग्रेस - का नेतृत्व कर रहे थे।सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष ओली ने 'प्रचंड' को छोड़कर नेपाली कांग्रेस के साथ गठबंधन सरकार बनाने के अपनी पार्टी के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि देश में राजनीतिक स्थिरता और विकास बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है। ओली, जो किशोरावस्था में एक छात्र कार्यकर्ता के रूप में राजनीति में शामिल हुए और अब समाप्त हो चुकी राजशाही का विरोध करने के लिए 14 साल जेल में बिताए थे, अक्टूबर 2015 में पहली बार नेपाल के प्रधानमंत्री बने थे। उनके 11 महीने के कार्यकाल के दौरान, काठमांडू के नयी दिल्ली के साथ संबंध तनावपूर्ण रहे थे। उन्होंने नेपाल के आंतरिक मामलों में कथित हस्तक्षेप के लिए भारत की सार्वजनिक रूप से आलोचना की और नयी दिल्ली पर उनकी सरकार गिराने का आरोप लगाया। हालांकि, उन्होंने दूसरे कार्यकाल के लिए पदभार ग्रहण करने से पहले आर्थिक समृद्धि की राह पर आगे बढ़ने को लेकर भारत के साथ साझेदारी करने का वादा किया था। ओली फरवरी 2018 में दूसरी बार प्रधानमंत्री बने, जब सीपीएन (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) और 'प्रचंड' के नेतृत्व वाली सीपीएन (माओइस्ट सेंटर) के गठबंधन ने 2017 के चुनावों में प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल किया। उनकी जीत के बाद, मई 2018 में दोनों दलों का औपचारिक रूप से विलय हो गया।अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान, ओली ने दावा किया कि नेपाल के राजनीतिक मानचित्र को फिर से तैयार करने और उसमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तीन भारतीय क्षेत्रों (लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा) को उनकी सरकार द्वारा शामिल किये जाने के बाद, उन्हें अपदस्थ करने के प्रयास किये गए। बाईस फरवरी 1952 को पूर्वी नेपाल के तेरहथुम जिले में जन्मे ओली, मोहन प्रसाद और मधुमाया ओली की सबसे बड़ी संतान हैं। उनकी मां की चेचक से मृत्यु के बाद उनकी दादी ने उनका पालन-पोषण किया। उन्होंने नौवीं कक्षा में ही स्कूल छोड़ दिया और राजनीति में आ गए। हालांकि, बाद में उन्होंने जेल से मानविकी विषयों में इंटरमीडिएट की पढ़ाई की। उनकी पत्नी, रचना शाक्य, भी एक कम्युनिस्ट कार्यकर्ता हैं। ओली ने 1966 में राजा के प्रत्यक्ष शासन के तहत निरंकुश पंचायत प्रणाली के खिलाफ लड़ाई में शामिल होकर एक छात्र कार्यकर्ता के रूप में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया था। वह फरवरी 1970 में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हुए। पार्टी की सदस्यता लेने के तुरंत बाद भूमिगत हो गए। उसी वर्ष, उन्हें पंचायत सरकार ने पहली बार गिरफ़्तार किया। 1971 में, उन्होंने झापा विद्रोह का नेतृत्व संभाला, जिसकी शुरुआत जिले के जमींदारों का सिर कलम करके की गई थी। ओली नेपाल के उन गिने-चुने राजनीतिक नेताओं में से एक हैं जिन्होंने कई साल जेल में बिताए। वह 1973 से 1987 तक लगातार 14 साल जेल में रहे। जेल से रिहा होने के बाद, वह यूएमएल की केंद्रीय समिति के सदस्य बने और 1990 तक लुम्बिनी क्षेत्र के प्रभारी रहे। पंचायत शासन को गिराने वाले वर्ष 1990 के लोकतांत्रिक आंदोलन के बाद ओली ने देश में लोकप्रियता हासिल की।
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नई दिल्ली। Gen-Z के विरोध प्रदर्शनों के चलते बढ़ते दबाव और 19 लोगों की मौत के बाद, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मंगलवार दोपहर अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। उन्होंने देशभर में अपने शासन के ख़िलाफ़ तेज़ होते प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को इस्तीफ़ा पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने देश में “असामान्य स्थिति” का हवाला दिया।
ओली ने अपने इस्तीफ़ा पत्र में कहा कि उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 77(1) के तहत पद छोड़ा है ताकि मौजूदा संकट का संवैधानिक समाधान निकाला जा सके। ओली 14 जुलाई 2024 को प्रधानमंत्री बने थे, जो नेपाली कांग्रेस (संसद की सबसे बड़ी पार्टी) के साथ बनी सहमति के तहत हुआ था। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, काठमांडू के मेयर बालेन शाह को अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।सोमवार को 19 प्रदर्शनकारियों की मौत के बाद मंगलवार को प्रदर्शन और उग्र हो गए, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन में एक के बाद एक दरारें दिखने लगीं। विशेष रूप से नेपाली कांग्रेस से जुड़े कई मंत्रियों ने इस्तीफ़ा देकर सरकार पर और दबाव बनाया। सत्तारूढ़ नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन थापा और विश्वप्रकाश शर्मा ने पहले ही प्रधानमंत्री ओली से इस्तीफ़ा देने और आगे का रास्ता साफ़ करने का आग्रह किया था।थापा और शर्मा ने एक बयान में कहा कि सरकार गठन के समय नेपाली कांग्रेस और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के बीच हुआ सात सूत्रीय समझौता अब प्रासंगिक नहीं रह गया है।फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नेपाल की राजनीति अब किस दिशा में जाएगी, क्योंकि चौथी सबसे बड़ी पार्टी — राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी — के सभी सांसदों ने भी इस्तीफ़ा देकर अंतरिम सरकार की मांग की है।सोमवार को भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बैन के ख़िलाफ़ जवाबदेही की मांग को लेकर जनरेशन-ज़ेड द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में लोगों की मौत से ग़ुस्साए प्रदर्शनकारियों ने देशभर में नेताओं के घरों और सरकारी भवनों पर हमला शुरू कर दिया।मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू के बानेश्वर में संसद भवन में घुसकर उसमें आग लगा दी। सोमवार को भी वे इमारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर चुके थे, जिसके जवाब में पुलिस की सख़्त कार्रवाई हुई और कई लोगों की जान गई।प्रदर्शनकारी सिंह दरबार (नेपाल सरकार का मुख्य प्रशासनिक केंद्र) में भी घुस गए और मुख्य द्वार को आग के हवाले कर दिया।काठमांडू घाटी में स्थित सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) [CPN (UML)] और नेपाली कांग्रेस के मुख्यालयों को भी आग के हवाले कर दिया गया और तोड़फोड़ की गई।देश के कई हिस्सों में सरकारी दफ्तरों में भी तोड़फोड़ और आगज़नी की घटनाएं स्थानीय मीडिया द्वारा रिपोर्ट की गई हैं। प्रशासन के अनुसार, काठमांडू में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। स्थानीय प्रशासन द्वारा कर्फ्यू लगाए जाने के बावजूद घाटी के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन तेज़ होते जा रहे हैं।गृह मंत्री और कृषि मंत्री के बाद, स्वास्थ्य और जनसंख्या मंत्री प्रदीप पौडेल और युवा एवं खेल मंत्री तेजु लाल चौधरी ने भी Gen-Z प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग पर खेद जताते हुए अपने-अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया।प्रधानमंत्री ओली के बालाकोट (काठमांडू के भक्तपुर) स्थित आवास में आगज़नी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। प्रदर्शनकारियों ने सिंह दरबार में भी जबरन प्रवेश किया।ललितपुर जिला प्रशासन कार्यालय के मुख्य जिला अधिकारी सुमन घिमिरे ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री दाहाल के आवास को आग के हवाले कर दिया और वे अब सरकार के मंत्रियों के लिए निर्धारित आवासों के बाहर एकत्र हो रहे हैं।उन्होंने कहा, “जिले के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे हैं और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।”इसी तरह, भक्तपुर ज़िले के मुख्य जिला अधिकारी नमराज घिमिरे ने भी ज़िले में हालात तनावपूर्ण बने रहने की पुष्टि की।उन्होंने कहा, “हमने अब तक अत्यधिक संयम बरता है और प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आदेश नहीं दिए हैं।”स्थानीय मीडिया ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक के आवासों को जलाए जाने की खबरें भी दी हैं। -
न्यूयॉर्क/वाशिंगटन. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भारत का नाम लिए बिना कहा है कि रूस के साथ सौदा करने वाले देशों पर टैरिफ (शुल्क) लगाना ‘‘सही विचार'' है। जेलेंस्की ने रविवार को एबीसी न्यूज के ‘‘दिस वीक'' कार्यक्रम में प्रसारित एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मुझे लगता है कि उन देशों पर टैरिफ लगाने का विचार सही है जो रूस के साथ सौदे करना जारी रखे हुए हैं...मुझे लगता है कि यह सही विचार है।'' जेलेंस्की से पूछा गया था कि क्या उन्हें लगता है कि तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की तस्वीरें देखकर प्रतिबंध लगाने की उनकी योजना उल्टी पड़ गई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ दोगुना करके 50 प्रतिशत कर दिया है, जिसमें रूसी कच्चे तेल की भारत द्वारा खरीद पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। भारत ने अमेरिकी कार्रवाई को ‘‘अनुचित और अविवेकपूर्ण'' करार दिया है।
तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर पुतिन के साथ मोदी की बैठक से दो दिन पहले, जेलेंस्की ने 30 अगस्त को भारत के प्रधानमंत्री को फोन किया था। उन्होंने रूस के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक के लिए अपनी उत्सुकता जाहिर की और कहा कि युद्ध की समाप्ति तत्काल युद्धविराम से होनी चाहिए। फोन पर बातचीत के बाद, भारत द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत के ‘‘दृढ़ और एक समान रुख'' तथा शीघ्र शांति बहाल करने के प्रयासों के प्रति समर्थन को दोहराया। - नई दिल्ली। जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने आज रविवार को पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि हाल के लगातार चुनावी हार की जिम्मेदारी लेते हुए वे पद छोड़ रहे हैं। 68 वर्षीय इशिबा ने टेलीविजन पर प्रसारित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मैंने लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। मैंने महासचिव मोरियामा से कहा है कि वे अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया शुरू करें।”इशिबा ने पिछले साल अक्टूबर में प्रधानमंत्री पद संभाला था। तब से वे इस्तीफे की मांगों का सामना कर रहे थे, लेकिन अब पार्टी के भीतर दबाव बढ़ने के कारण उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने चेतावनी दी कि उनका इस्तीफा जापान को राजनीतिक खालीपन में डाल सकता है, जबकि देश अमेरिकी टैरिफ, बढ़ती महंगाई, चावल नीति सुधार और क्षेत्रीय तनाव जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है।यह फैसला हाल ही में हुए ऊपरी सदन (Upper House) के चुनावों में एलडीपी-कोमेटो गठबंधन की करारी हार के बाद आया है। इन चुनावों में गठबंधन को बहुमत गंवाना पड़ा, जिसे जापान टाइम्स ने बड़ी राजनीतिक हार बताया है। इससे पहले इशिबा ने शुक्रवार को यह कहा था कि वे आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज लागू करने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके बावजूद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का दबाव लगातार बढ़ता गया। उनका कहना था कि अगर इशिबा नेतृत्व चुनाव से पहले नहीं हटते तो पार्टी में और गहरी फूट पड़ सकती है।इमोशनल अंदाज में इशिबा ने कहा, “जापान ने व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर लिए हैं और अध्यक्ष ने कार्यकारी आदेश पर दस्तखत कर दिए हैं। हमने एक बड़ा पड़ाव पार कर लिया है। अब मैं यह जिम्मेदारी अगली पीढ़ी को सौंपना चाहता हूं।”एलडीपी अब आपातकालीन नेतृत्व चुनाव कराएगी। संभावित उत्तराधिकारियों में पार्टी की वरिष्ठ नेता साने ताकाइची शामिल हैं, जो बैंक ऑफ जापान की ब्याज दर बढ़ाने की नीति की आलोचक रही हैं। वहीं, कृषि मंत्री और जापानी राजनीति में तेजी से उभर रहे सितारे शिंजिरो कोइजुमी भी प्रमुख दावेदारों में हैं। गौरतलब है कि पिछले साल एलडीपी के अध्यक्ष पद के रन-ऑफ में इशिबा ने ताकाइची को मामूली अंतर से हराया था।-
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न्यूयॉर्क/वाशिंगटन. शुल्क और रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका और भारत के मध्य मौजूदा तनाव के बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच ‘विशेष संबंध' हैं और चिंता की कोई बात नहीं है बस “कभी-कभी कुछ ऐसे पल आ जाते हैं”। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अपने कार्यालय ‘ओवल ऑफिस' में शुक्रवार को कहा, ‘‘मैं हमेशा (नरेन्द्र) मोदी का दोस्त रहूंगा... वह शानदार प्रधानमंत्री हैं लेकिन मुझे इस समय उनके द्वारा किए जा रहे काम पसंद नहीं आ रहे हैं। लेकिन भारत और अमेरिका के बीच विशेष संबंध है, चिंता की कोई बात नहीं है। बस कभी-कभी कुछ ऐसे पल आ जाते हैं।'' राष्ट्रपति इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या वह भारत के साथ संबंधों को फिर से सुधारने के लिए तैयार हैं, क्योंकि दोनों देशों के बीच संबंध पिछले दो दशकों में संभवतः सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह इस बात से “बहुत निराश” हैं कि भारत रूस से ‘इतना ज्यादा' तेल खरीद रहा है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘मुझे इस बात से बहुत निराशा है कि भारत रूस से इतना तेल खरीदेगा और मैंने उन्हें यह बता दिया है। हमने भारत पर बहुत ज्यादा शुल्क लगाया है, 50 प्रतिशत शुल्क, बहुत ज्यादा शुल्क। मेरे (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी से बहुत अच्छे रिश्ते हैं, वह बहुत अच्छे हैं। वह कुछ महीने पहले यहां आए थे।'' ट्रंप से पूछा गया था कि क्या अमेरिका ने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है।
दरअसल ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल' पोस्ट में कहा था कि , ‘‘लगता है हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है। ईश्वर करे कि उनका भविष्य दीर्घकालिक और समृद्ध हो।'' ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के नेता शी चिनफिंग के साथ मोदी की एक पुरानी तस्वीर भी पोस्ट की थी। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप का सोशल मीडिया पोस्ट उस समय आया है जब कुछ ही दिन पहले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच गर्मजोशी भरे संबंधों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। भारत और अन्य देशों के साथ व्यापार वार्ता कैसी चल रही है, इस सवाल पर ट्रंप ने कहा, “वे बहुत अच्छी चल रही हैं। अन्य देश भी अच्छा कर रहे हैं। हम उन सभी के साथ अच्छा कर रहे हैं। हम यूरोपीय संघ से नाराज हैं क्योंकि सिर्फ गूगल के साथ ही नहीं, बल्कि हमारी सभी बड़ी कंपनियों के साथ जो हो रहा है, उससे हम नाराज हैं।” इस बीच, ट्रंप प्रशासन के व्यापार और विनिर्माण मामलों के वरिष्ठ सलाहकार पीटर नवारो ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि भारत के उच्चतम शुल्क से अमेरिकी नौकरियों पर असर पड़ रहा है। नवारो ने कहा, “भारत रूस से तेल सिर्फ मुनाफा कमाने के लिए खरीदता है। इस मुनाफे से रूस की संघर्ष क्षमता को ताकत मिलती है। यूक्रेनी और रूसी लोग मारे जा रहे हैं। अमेरिकी करदाता इसकी कीमत चुका रहे हैं। भारत सच्चाई का सामना नहीं कर सकता, बस बहानेबाजी करता है।” नेशनल इकनॉमिक काउंसिल के निदेशक और ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने भारत को लेकर एक गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप और उनकी व्यापारिक टीम इस बात से निराश हैं कि भारत रूस से तेल खरीद के माध्यम से रूस-यूक्रेन युद्ध को परोक्ष रूप से आर्थिक मदद पहुंचा रहा है। हैसेट ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, “मुझे लगता है कि व्यापार टीम और राष्ट्रपति इस बात से निराश हैं कि भारत रूस के यूक्रेन युद्ध को धन देना जारी रखे हुए है,यह एक कूटनीतिक मुद्दा है और उम्मीद है कि इसमें जल्द ही सकारात्मक प्रगति होगी। - लंदन। ब्रिटिश प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने कम कर भुगतान विवाद के कारण एंजेला रेनर के इस्तीफे के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल करते हुए विदेश मंत्री डेविड लैमी को शुक्रवार को उप प्रधानमंत्री नियुक्त किया।रेनर ने घर खरीद पर कर का कम भुगतान किये जाने के मामले में स्वतंत्र जांच के बाद शुक्रवार को उपप्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।लैमी (53) को उप प्रधानमंत्री के पद पर पदोन्नत किया गया है तथा उन्हें न्याय मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।फेरबदल के तहत, गृह मंत्री यवेट कूपर विदेश मंत्री के रूप में उनकी जगह लेंगी वहीं ब्रिटिश पाकिस्तानी शबाना महमूद को न्याय मंत्रालय की जगर गृह मंत्रालय का प्रभार दिया गया है।लेबर पार्टी की प्रभावशाली नेता रेनर ने अपना इस्तीफा सौंप दिया, क्योंकि जांच में यह निष्कर्ष निकला कि उन्होंने इंग्लैंड के दक्षिणी तट पर स्थित संपत्ति पर सही स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए विशेषज्ञ कर सलाह नहीं लेकर मंत्री आचार संहिता का उल्लंघन किया है।रेनर ने अपने मामले को मंत्रिस्तरीय मानकों पर स्वतंत्र सलाहकार लॉरी मैग्नस के पास भेजा था, जिन्होंने शुक्रवार को प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर को अपनी रिपोर्ट सौंपी।ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने वरिष्ठ मंत्री रेनर के इस्तीफे पर अफसोस जताया।स्टार्मर ने कहा, ‘‘व्यक्तिगत तौर पर, मुझे आपके सरकार से बाहर जाने पर बहुत दुख हो रहा है। आप कई वर्षों से एक भरोसेमंद सहयोगी और सच्ची मित्र रही हैं। राजनीति में आपकी उपलब्धियों के लिए मेरे मन में अपार सम्मान है।’’ब्रिटेन में संपत्ति की खरीद पर शुल्क लगाया जाता है तथा अधिक महंगे आवासों पर अधिक शुल्क देना पड़ता है। रिपोर्टों से पता चला है कि रेनर ने स्टाम्प शुल्क का भुगतान न करके 40,000 पाउंड बचाए।
- बीजिंग. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और चीन जैसी ‘‘सशक्त अर्थव्यवस्थाओं'' के खिलाफ उपनिवेशकालीन दौर की दबाव बनाने वाली रणनीति अपनाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की निंदा की है। पुतिन ने यह भी कहा है कि साझेदार देशों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। चीन की विजय परेड में भाग लेने यहां पहुंचे पुतिन ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत और चीन जैसे भारी जनसंख्या वाले शक्तिशाली देशों की अपनी घरेलू राजनीतिक प्रणाली और कानून हैं।पुतिन ने कहा, ‘‘जब कोई आपसे कहता है कि वह आपको सजा देगा, तो आपको यह सोचना चाहिए कि इन बड़े देशों के नेता, जिनका इतिहास भी कठिन दौरों से गुजरा है, कैसे प्रतिक्रिया देंगे।'' उन्होंने कहा कि इन देशों को लंबे समय तक उपनिवेशवादियों और उनकी संप्रभुता पर हमलों का सामना करना पड़ा है। पुतिन ने कहा, ‘‘आपको यह समझना चाहिए कि अगर इनमें से कोई एक भी कमजोरी दिखाता है, तो उसका राजनीतिक करियर खत्म हो सकता है और यही बात उनके व्यवहार को प्रभावित करती है।'' उन्होंने कहा, ‘‘उपनिवेश युग समाप्त हो चुका है। उन्हें यह समझना चाहिए कि वे अपने साझेदारों से बातचीत में अब उस भाषा का प्रयोग नहीं कर सकते।'' पुतिन ने ट्रंप पर आरोप लगाया कि उनमें इन देशों और उनके नेताओं के बारे में समझ की कमी है।गौरतलब है कि ट्रंप ने भारत को निशाना बनाते हुए रूस से तेल खरीदने पर 50 प्रतिशत शुल्क लगा दिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुरुआत में चीन पर 145 प्रतिशत शुल्क लगाया, लेकिन बाद में उसे कम करके एक अंतरिम समझौता किया, जिसके तहत चीनी सामानों पर शुल्क 145 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया, जबकि अमेरिकी सामानों पर चीन का शुल्क 125 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया गया।
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बीजिंग. चीन में बुधवार को आयोजित सैन्य परेड में हाइपरसोनिक, लेजर और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों सहित कुछ अत्याधुनिक साजो सामान का पहली बार प्रदर्शन किए जाने के साथ राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा कि उनके देश का कायाकल्प ‘‘निर्बाध जारी'' रहेगा। द्वितीय विश्व युद्ध में जापानी आक्रमण के विरुद्ध चीन की जीत की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित एक भव्य परेड को संबोधित करते हुए शी ने कहा, "चीन कभी भी किसी भी धौंस से नहीं डरता और हमेशा आगे बढ़ता रहता है।" उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ (शुल्क) धमकियों के संदर्भ में परोक्ष रूप यह बात कही। शी ने कहा, "इतिहास हमें सचेत करता है कि मानवता एक साथ उठती और गिरती है।" शी ने जन मुक्ति सेना (पीएलए) से राष्ट्रीय पुनरुद्धार के लिए रणनीतिक सहयोग प्रदान करने तथा विश्व शांति एवं विकास में अधिक योगदान देने का आह्वान किया। चीनी सेना ने पहली बार परेड में अपने कुछ सबसे उन्नत सैन्य उपकरणों का प्रदर्शन किया, जो दुनिया, विशेषकर अमेरिका के समक्ष शक्ति प्रदर्शन था। पीएलए की सर्वोच्च कमान केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के प्रमुख शी ने चीनी सेना से खुद को विश्व स्तरीय सुरक्षा बल बनाने और राष्ट्रीय संप्रभुता, एकता एवं क्षेत्रीय अखंडता की दृढ़ता से रक्षा करने को कहा। अमेरिका के बाद चीन दूसरा सबसे बड़ा रक्षा बजट वाला देश है। इस साल इसका वार्षिक रक्षा बजट 250 अरब अमेरिकी डॉलर का है। सैन्य साजो-सामान के अलावा परेड में चीन की कूटनीतिक शक्ति का भी प्रदर्शन हुआ, क्योंकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन सहित 26 विदेशी नेताओं ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। भारत के पड़ोसी देशों से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने परेड में भाग लिया। सूत्रों के अनुसार, चीन में भारत के राजदूत प्रदीप कुमार रावत इस कार्यक्रम में शामिल हुए। जापान और दक्षिण कोरिया के अलावा अमेरिका और यूरोपीय संघ के प्रमुखों ने परेड से दूरी बनाए रखी।
परेड में विदेशी नेताओं की उपस्थिति, जापान और चीन के बीच कूटनीतिक विवाद का विषय बन गई है, क्योंकि तोक्यो ने विश्व नेताओं से इसमें भाग न लेने का आग्रह किया था। चीन ने विश्व नेताओं से इस कार्यक्रम में शामिल न होने के अनुरोध को लेकर जापान के समक्ष कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया है। अपने भाषण में शी चिनफिंग ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के खिलाफ जीत आधुनिक समय में विदेशी आक्रमण के खिलाफ चीन की पहली पूर्ण विजय है। शी ने कहा कि यह जीत सत्तारूढ़ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के नेतृत्व में जापानी आक्रमण के खिलाफ एक राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चे के तहत हासिल की गयी थी। उन्होंने कहा कि चीनी लोगों ने युद्ध में अपार बलिदान देकर मानव सभ्यता के उद्धार और विश्व शांति की रक्षा में एक बड़ा योगदान दिया था। पुतिन और किम की मौजूदगी में उन्होंने कहा, ‘‘जब दुनिया भर के देश एक-दूसरे के साथ बराबरी का व्यवहार करेंगे, सद्भाव से रहेंगे और एक-दूसरे का सहयोग करेंगे, तभी साझा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है, युद्ध के मूल कारण को खत्म किया जा सकता है और ऐतिहासिक त्रासदियों को दोबारा होने से रोका जा सकता है।'' शी ने कहा, ‘‘आज मानवता को फिर से शांति या युद्ध, संवाद या टकराव, तथा लाभ या नुकसान के बीच चुनाव करना पड़ रहा है।'' बाद में एक स्वागत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि चीनी सरकार और लोग उन विदेशी सरकारों और अंतरराष्ट्रीय मित्रों को कभी नहीं भूलेंगे जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी आक्रमण के खिलाफ प्रतिरोध में चीनी लोगों का समर्थन और सहायता की थी। परेड में चीन ने पहली बार नयी हथियार प्रणालियों की एक श्रृंखला प्रदर्शित की, जिसमें नए प्रकार की डीएफ-5सी तरल-ईंधन वाली अंतरमहाद्वीपीय सामरिक परमाणु मिसाइलें शामिल थीं। सरकारी ‘ग्लोबल टाइम्स' अखबार ने बताया कि इस मिसाइल की अनुमानित सीमा 20,000 किलोमीटर से अधिक है तथा इसमें सटीक निशाना लगाने की क्षमता है। अखबार ने एक विशेषज्ञ के हवाले से बताया कि यह मिसाइल दुनिया के किसी भी हिस्से तक पहुंच सकती है।
परेड में जिन अन्य हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन किया गया, उनमें वाहन-आधारित लेजर रक्षा हथियार, चार प्रकार के विमानवाहक-आधारित जेट लड़ाकू विमान, समुद्र में गहरायी तक मार करने वाले ड्रोन, एच-6जे लंबी दूरी के बमवर्षक, हवाई पूर्व चेतावनी विमान, सेना और नौसेना के ड्रोन, 5000 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली डीएफ-26डी जहाज-रोधी बैलिस्टिक मिसाइलें, सीजे-1000 लंबी दूरी की हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें, वायु रक्षा प्रणालियां, एचक्यू-29 बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर, ‘कैरियर किलर' मिसाइलें, नया युद्धक टैंक टाइप 99बी और कई रॉकेट लॉन्चर शामिल हैं। -
न्यूयॉर्क/वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि उन्होंने रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर अभी शुरुआती दौर के प्रतिबंध लगाए हैं और संकेत दिया कि उन्होंने अब तक ‘‘चरण दो या चरण तीन'' के तहत प्रतिबंध नहीं लगाये हैं। पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नवरोकी के साथ ओवल ऑफिस में द्विपक्षीय बैठक में भाग लेते समय ट्रंप उस समय नाराज हो गये जब उनसे एक पोलिश पत्रकार ने पूछा कि उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रति निराशा और हताशा व्यक्त की थी, लेकिन इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की। ट्रंप ने पोलिश पत्रकार से कहा, ‘‘आपको कैसे पता कि कोई कार्रवाई नहीं हुई? चीन के बाद सबसे बड़े खरीदार भारत पर प्रतिबंध लगाना, क्या आप कहेंगे कि कोई कार्रवाई नहीं हुई? इससे रूस को सैकड़ों अरब डॉलर का नुकसान हुआ। आप इसे कोई कार्रवाई नहीं कहेंगे? और मैंने अब तक दूसरा या तीसरा चरण पूरा नहीं किया है।
लेकिन जब आप कहते हैं कि कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो मुझे लगता है कि आपको कोई नयी नौकरी ढूंढ लेनी चाहिए।'' ट्रंप ने कहा कि दो सप्ताह पहले उन्होंने कहा था, ‘‘अगर भारत तेल खरीदता है, तो भारत को बड़ी समस्याएं होंगी, और यही होता है। इसलिए, मुझे इसके बारे में मत बताइए।'' जब उनसे चीन की सैन्य परेड में पुतिन और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की उपस्थिति को लेकर सवाल किया गया और पूछा गया क्या वह मास्को पर द्वितीयक प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं, तो ट्रंप ने कहा, ‘‘मैंने भारत के संबंध में पहले ही ऐसा कर दिया है और हम अन्य चीजों के संबंध में भी ऐसा कर रहे हैं।'' ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ (शुल्क) लगाया है और भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया है, जिससे भारत पर लगाया गया कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो गया है और यह शुल्क 27 अगस्त से प्रभावी हो गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि वह किसानों, पशुपालकों, लघु उद्योगों के हितों से समझौता नहीं कर सकते। उन्होंने आगाह किया कि ‘‘हम पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन हम इसे सहन करेंगे। भारत ने अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ को ‘‘अनुचित'' बताया है। भारत ने कहा कि किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह, वह अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठायेगा। -
बीजिंग. चीन के नेता शी चिनफिंग ने एक ‘‘पुराने मित्र'' के रूप में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का स्वागत किया और दोनों नेताओं ने मंगलवार को कई बैठकें कीं। ये बैठकें ऐसे समय में हुईं जब दोनों देशों को अमेरिका से विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हाल के वर्षों में, खासकर 2022 की शुरुआत में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद से चीन और रूस के बीच संबंध और गहरे हुए हैं। पुतिन ने शी को ‘‘प्रिय मित्र'' कहकर संबोधित किया और कहा कि चीन के साथ रूस के संबंध ‘‘अभूतपूर्व रूप से उच्च स्तर पर'' हैं। शी और पुतिन ने औपचारिक बैठक के बाद झोंगनानहाई में अपने शीर्ष सहयोगियों के साथ चाय पर चर्चा की। यह चीन द्वारा इस रिश्ते को दिए जाने वाले महत्व को दर्शाता है। झोंगनानहाई परिसर चीन में सत्ता का केंद्र है और यहां उसके शीर्ष नेताओं के आवास एवं कार्यालय हैं।
वार्ता के बाद चीन ने घोषणा की कि वह इस महीने के अंत से रूसी यात्रियों को 30 दिन की वीजा-मुक्त यात्रा की सुविधा प्रदान करेगा। यह वार्ता चीनी शहर तियानजिन में दोनों नेताओं के शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के एक दिन बाद और द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में बीजिंग में आयोजित एक भव्य चीनी सैन्य परेड से एक दिन पहले हुई है। सोवियत संघ एशिया में युद्ध के अधिकतर समय तटस्थ रहा, लेकिन 1930 के दशक में आक्रमणकारी जापानी सेना के खिलाफ शुरुआती लड़ाई में उसने चीन की सहायता की। उसने द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम दिनों में जापान के खिलाफ युद्ध की घोषणा भी की और जापान के कब्जे वाले पूर्वोत्तर चीन में सेना भेजी। पुतिन ने कहा, ‘‘हम तब भी साथ थे, अब भी साथ हैं।''
चीन का कहना है कि वह यूक्रेन युद्ध में तटस्थ है लेकिन पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद व्यापार जारी रखकर उसने रूस को आर्थिक जीवनदान दिया। उसकी कुछ कंपनियों पर सैन्य उद्योग को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। रूस की ‘इंटरफैक्स' समाचार एजेंसी के अनुसार, गैजप्रोम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एलेक्सी मिलर ने बीजिंग में कहा कि चीन तक एक और प्राकृतिक गैस पाइपलाइन बनाने के लिए एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। दस सदस्यीय शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में शी और पुतिन के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी मौजूद थे। मोदी ने तियानजिन बैठक के दौरान दोनों नेताओं के साथ अलग-अलग वार्ता की। ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए भारी शुल्क और अमेरिका के रुख ने नयी दिल्ली को चीन और रूस के करीब ला दिया है। मोदी हालांकि चीन की सैन्य परेड में शामिल नहीं होंगे। शी चिनफिंग ने चीन को उन देशों के नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की अमेरिकी प्रभुत्व वाली व्यवस्था से वंचित महसूस करते हैं। पुतिन और शी ने अपनी वार्ता से पहले मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना के साथ त्रिपक्षीय बैठक की। घास के मैदानों और खनिज खदानों से संपन्न मंगोलिया चीन एवं रूस के बीच स्थित है। पुतिन ने अपने वक्तव्य की शुरुआत में कहा कि तीनों देश अच्छे पड़ोसी हैं और संबंधों को विकसित करने में उनकी साझा रुचि है। उन्होंने कहा, ‘‘हम तीनों देशों में बहुत कुछ समान है।'' पुतिन ने 2024 में मंगोलिया की आधिकारिक यात्रा की थी जहां मंगोलिया सरकार ने यूक्रेन पर आक्रमण से जुड़े कथित युद्ध अपराधों के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के वारंट पर पुतिन को गिरफ्तार किए जाने की अपीलों को नजरअंदाज कर दिया था। -
काहिरा. सूडान के पश्चिमी क्षेत्र दारफुर में विनाशकारी भूस्खलन ने एक गांव को तबाह कर दिया, जिसमें कम से कम 1,000 लोग मारे गए। यह अफ्रीकी देश के पिछले कुछ साल के इतिहास की सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में से एक है। इस क्षेत्र पर नियंत्रण रखने वाले एक विद्रोही समूह ने सोमवार देर रात यह जानकारी दी। सूडान लिबरेशन मूवमेंट-आर्मी ने एक बयान में कहा कि यह त्रासदी अगस्त के अंत में कई दिनों की भारी बारिश के बाद मध्य दारफुर के मर्राह पर्वतों में स्थित तरासिन गांव में रविवार को हुई। बयान में कहा गया, ‘‘प्रारंभिक जानकारी से पता चलता है कि गांव के सभी निवासियों की मौत हो गई है, जिनकी संख्या एक हजार से ज्यादा होने का अनुमान है। केवल एक व्यक्ति ही बचा है।'' समूह ने कहा कि गांव ‘‘पूरी तरह से जमींदोज हो गया है'', और शवों को निकालने में मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय सहायता समूहों से अपील की गई है।
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तियानजिन (चीन). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कहा कि भारत और रूस हमेशा कठिन परिस्थितियों में भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं। मोदी की पुतिन की मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत एवं अमेरिका के संबंध पिछले दो दशक के संभवतः सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। मोदी और पुतिन ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन के इतर बैठक की, जिसमें आर्थिक, वित्तीय और ऊर्जा क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। आधिकारिक वार्ता से पहले, दोनों नेताओं ने एससीओ शिखर सम्मेलन में अपने कार्यक्रम समाप्त करने के बाद एक ही कार में बैठक स्थल तक एक साथ यात्रा करते हुए 40 मिनट से अधिक समय तक अनौपचारिक बातचीत की। मोदी ने कहा कि भारत यूक्रेन में शांति स्थापित करने के लिए हाल ही में किए गए सभी प्रयासों का स्वागत करता है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन संघर्ष को यथाशीघ्र समाप्त करना मानवता का आह्वान है। प्रधानमंत्री मोदी ने टेलीविजन पर प्रसारित अपने वक्तव्य की शुरुआत में कहा, ‘‘हम यूक्रेन में चल रहे संघर्ष पर नियमित रूप से चर्चा करते रहे हैं। हम शांति स्थापित करने की दिशा में हाल में किए गए सभी प्रयासों का स्वागत करते हैं।" उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि सभी पक्ष रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ेंगे। इस संघर्ष को समाप्त करने और स्थायी शांति स्थापित करने का रास्ता अवश्य निकाला जाना चाहिए। यह संपूर्ण मानवता की आकांक्षा है।" समझा जाता है कि भारतीय पक्ष ने पुतिन को शनिवार को मोदी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के बीच हुई बातचीत के बारे में जानकारी दी। मोदी से बात करने के बाद, ज़ेलेंस्की ने कहा कि भारत यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए आवश्यक प्रयास करने और रूस को उपयुक्त संकेत देने के लिए तैयार है। पुतिन ने कहा कि रूस और भारत ने दशकों से "विशेष मैत्रीपूर्ण और विश्वास-आधारित" संबंध बनाए रखे हैं, और यह संबंधों के भविष्य के विकास की नींव है। उन्होंने कहा, "ये संबंध पूरी तरह से दलगत राजनीति से ऊपर हैं और इन्हें हमारे अधिकांश लोगों का समर्थन प्राप्त है।" भारत के बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन में संघर्ष को हल करने के लिए हाल में की गई पहल के प्रति अपना समर्थन दोहराया, तथा संघर्ष को शीघ्र समाप्त करने तथा "स्थायी शांति" की आवश्यकता पर बल दिया। मोदी-पुतिन वार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्ध समाप्त करने के प्रयासों के तहत रूस के राष्ट्रपति के साथ शिखर बैठक आयोजित करने के दो सप्ताह बाद हुई है। भारत पर अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि दोनों नेताओं ने वाहन में अनौपचारिक बातचीत के दौरान इस पर चर्चा की। ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को दोगुना कर 50 प्रतिशत कर दिए जाने के बाद भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में तनाव पैदा हो गया, जिसमें भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों द्वारा भारत की लगातार आलोचना से संबंधों में तनाव और बढ़ गया है। अपने संबोधन में, मोदी ने यह भी कहा कि भारत के 140 करोड़ लोग दिसंबर में भारत में रूसी नेता के स्वागत के लिए "उत्सुकता से प्रतीक्षा" कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "यह हमारी विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की गहराई और दायरे का प्रतिबिंब है। भारत और रूस हमेशा सबसे कठिन परिस्थितियों में भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं।" मोदी ने कहा, "हमारा घनिष्ठ सहयोग न केवल दोनों देशों के लोगों के लिए, बल्कि वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण है।" मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में पुतिन के साथ अपनी वार्ता को "शानदार" बताया और कहा कि उन्होंने व्यापार, उर्वरक, अंतरिक्ष, सुरक्षा और संस्कृति सहित सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा, ‘‘हमने यूक्रेन में संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान सहित क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम पर विचारों का आदान-प्रदान किया। हमारी विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनी हुई है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर अपनी और पुतिन की एक तस्वीर भी पोस्ट की, जिसमें वे एक कार में साथ-साथ यात्रा कर रहे हैं। मोदी ने कहा, ‘‘एससीओ शिखर सम्मेलन स्थल पर कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद राष्ट्रपति पुतिन और मैं द्विपक्षीय बैठक स्थल पर साथ-साथ पहुंचे। उनके साथ बातचीत हमेशा सार्थक होती है।'' भारत के बयान में कहा गया है कि मोदी और पुतिन ने आर्थिक, वित्तीय और ऊर्जा क्षेत्रों सहित द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की और इन क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर वृद्धि पर संतोष व्यक्त किया। इसमें कहा गया, "दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की।" अपने संबोधन में, पुतिन ने भारत-रूस संबंधों को 15 वर्षों के दौरान विशेष विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "यह विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि हमारे बहुआयामी रूसी-भारतीय संबंध इन सिद्धांतों पर सक्रिय रूप से विकसित होते रहेंगे।" पुतिन ने कहा, "हमने बहु-स्तरीय सहयोग स्थापित किया है। समग्र रूप से व्यापार और आर्थिक संबंध सकारात्मक माहौल प्रदर्शित कर रहे हैं। पर्यटन आदान-प्रदान बढ़ रहा है। हम अंतरराष्ट्रीय मंच-संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स, जी-20 और निश्चित रूप से शंघाई सहयोग संगठन में घनिष्ठ समन्वय के साथ काम कर रहे हैं।"
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तियानजिन (चीन). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में कहा कि पहलगाम में हुआ भयावह आतंकवादी हमला न केवल भारत के लिए एक झटका था बल्कि मानवता में विश्वास रखने वाले हर देश के लिए एक खुली चुनौती भी था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की उपस्थिति में मोदी ने यह भी जोर देकर कहा कि एससीओ को आतंकवाद पर ‘‘दोहरे मानदंडों'' को स्पष्ट रूप से और सर्वसम्मति से नकारना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘यह मानवता के प्रति हमारा कर्तव्य है।''
पाकिस्तान का नाम लिए बिना मोदी ने कहा कि यह सवाल उठना स्वाभाविक है: ‘‘क्या कुछ देशों द्वारा आतंकवाद का खुला समर्थन हमें स्वीकार्य हो सकता है?'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पिछले चार दशकों से आतंकवाद का दंश झेल रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘कई माताओं ने अपनी संतानें खो दीं और कई बच्चे अनाथ हो गए। हाल में हमने पहलगाम में आतंकवाद का एक बेहद घृणित रूप देखा।'' उन्होंने कहा, ‘‘यह हमला न केवल भारत की अंतरात्मा पर एक आघात था, बल्कि यह हर उस देश, हर उस व्यक्ति के लिए एक खुली चुनौती था जो मानवता में विश्वास रखता है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि एससीओ को आतंकवाद से निपटने के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें स्पष्ट रूप से और सर्वसम्मति से कहना होगा कि आतंकवाद पर कोई भी दोहरा मापदंड स्वीकार्य नहीं होगा। हमें आतंकवाद के सभी रूपों और रंगों का मिलकर विरोध करना चाहिए।'' मोदी ने पहलगाम हमले के बाद भारत के साथ खड़े होने वाले मित्र देशों के प्रति भी आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद किसी भी राष्ट्र की शांति, समृद्धि और स्थिरता के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि एससीओ का क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचा आतंकवाद से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रधानमंत्री ने ‘कनेक्टिविटी' (संपर्क) के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि संपर्क के हर प्रयास में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संप्रभुता को दरकिनार करने वाली ‘कनेक्टिविटी' विश्वास और अर्थ खो देती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एससीओ सदस्य देश वैश्विक संस्थाओं में सुधार के लिए आपसी सहयोग बढ़ा सकते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम सर्वसम्मति से संयुक्त राष्ट्र में सुधार का आह्वान कर सकते हैं।''
प्रधानमंत्री ने ‘ग्लोबल साउथ' के विकास को सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ' की आकांक्षाओं को पुराने ढांचों में सीमित रखना भावी पीढ़ियों के साथ घोर अन्याय है। ‘ग्लोबल साउथ' से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं। भारत की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए मोदी ने कहा कि देश ‘‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म'' (सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन) के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि चाहे कोविड-19 महामारी हो या वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, हमने हर चुनौती को अवसर में बदलने की कोशिश की है। -
न्यूयॉर्क/वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि भारत ने अब शुल्क में कटौती कर इसे नाममात्र करने की पेशकश की है, ''लेकिन अब इसमें देर हो चुकी है।'' उन्होंने कहा कि भारत अपना ज्यादातर तेल और सैन्य सामान रूस से खरीदता है और अमेरिका से बहुत कम खरीदता है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, ''बहुत कम लोग यह जानते हैं कि हम भारत के साथ बहुत थोड़ा व्यापार करते हैं, लेकिन वे हमारे साथ बहुत ज्यादा व्यापार करते हैं।'' उन्होंन कहा, ''भारत अपने सबसे बड़े ग्राहक अमेरिका को भारी मात्रा में सामान बेचता है, लेकिन हम उन्हें बहुत कम बेचते हैं। अब तक यह पूरी तरह से एकतरफा रिश्ता रहा है, और यह कई दशकों से चला आ रहा है।'' ट्रंप ने कहा कि इसका कारण यह है कि भारत ने अब तक हमसे इतने ज्यादा शुल्क वसूले हैं, किसी भी देश से ज़्यादा, कि हमारी कंपनियां भारत में सामान नहीं बेच पा रही हैं। उन्होंने कहा, ''भारत अपना ज्यादातर तेल और सैन्य उत्पाद रूस से खरीदता है, अमेरिका से बहुत कम। उन्होंने अब अपने शुल्क को पूरी तरह से कम करने की पेशकश की है, लेकिन अब देर हो चुकी है। उन्हें ऐसा सालों पहले कर देना चाहिए था। ये लोगों के सोचने के लिए बस कुछ साधारण तथ्य हैं।'' ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के मौके पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25 प्रतिशत जवाबी शुल्क और रूस से तेल खरीदने के कारण 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया है। इस तरह भारत पर लगाया गया कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो गया है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा हैं। भारत ने अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क को अनुचित बताया है।
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तियानजिन (चीन). शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का 25 वां शिखर सम्मेलन रविवार रात यहां चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा आयोजित एक विशाल भोज के साथ औपचारिक रूप से शुरू हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत अन्य नेता शामिल हुए। शी चिनफिंग ने अपनी पत्नी पेंग लियुआन के साथ चीन के बंदरगाह शहर तियानजिन में अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के स्वागत के लिए भोज का आयोजन किया। इस वर्ष का शिखर सम्मेलन 10 सदस्यीय समूह का सबसे बड़ा आयोजन है क्योंकि चीन ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस सहित 20 विदेशी नेताओं और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों को आमंत्रित किया है। शिखर बैठक सोमवार को एक विशेष रूप से नामित सम्मेलन केंद्र में आयोजित की जाएगी, जिसे 10 सदस्यीय समूह के नेता, आमंत्रित नेताओं के साथ, संबोधित करेंगे। शनिवार को शी चिनफिंग से मोदी की मुलाकात और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विभिन्न देशों पर नए शुल्क लगाए जाने की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण पर उत्सुकता से नजर रखी जाएगी। माना जा रहा है कि इस बैठक से संबंधों के लिए नया खाका तैयार होगा। स्वागत भोज पर अपने संबोधन में शी ने कहा कि एससीओ पर क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की रक्षा करने तथा बढ़ती अनिश्चितताओं और तेज परिवर्तन की दुनिया में विभिन्न देशों के विकास को बढ़ावा देने की बड़ी जिम्मेदारी है। शी ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी पक्षों के सम्मिलित प्रयासों से शिखर सम्मेलन पूर्णतः सफल होगा तथा एससीओ निश्चित रूप से और भी बड़ी भूमिका निभाएगा, सदस्य देशों के बीच एकता और सहयोग को बढ़ावा देने में अधिक योगदान देगा, ‘ग्लोबल साउथ' की ताकत को एकजुट करेगा तथा मानव सभ्यता की और अधिक प्रगति को बढ़ावा देगा। ‘ग्लोबल साउथ' का संदर्भ आर्थिक रूप से कमजोर देशों के समूह के लिए दिया जाता है।
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तियानजिन (चीन). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच रविवार को सार्थक बैठक हुई और दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर एक अहम सहमति बनी। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने यह जानकारी दी। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की खबर के अनुसार, सीपीसी केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य और शी के करीबी काई क्वी ने कहा कि चीन मित्रता बढ़ाने, पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग बढ़ाने, मतभेदों का उचित ढंग से समाधान करने और चीन-भारत संबंधों को दुरूस्त करने तथा इन्हें और प्रगाढ़ करने के लिए भारत के साथ काम करने को तैयार है। मोदी और शी की बैठक पर विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य काई के साथ भी बैठक की। प्रधानमंत्री ने द्विपक्षीय संबंधों के लिए अपने दृष्टिकोण को काई के साथ साझा किया तथा दोनों नेताओं के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए उनका समर्थन मांगा। काई ने द्विपक्षीय आदान-प्रदान बढ़ाने तथा दोनों नेताओं (मोदी और शी) के बीच बनी सहमति के अनुरूप संबंधों को और बेहतर बनाने की चीनी पक्ष की इच्छा दोहराई।
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तियानजिन (चीन). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को म्यांमा की सैन्य सरकार के प्रमुख वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग से कहा कि भारत को उम्मीद है कि म्यांमा में आगामी चुनाव निष्पक्ष और समावेशी तरीके से होंगे, जिसमें सभी पक्ष शामिल होंगे। मोदी ने तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर ह्लाइंग से मुलाकात की।
प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ जनरल से यह भी कहा कि भारत ‘‘म्यांमा नीत और म्यांमा के नेतृत्व वाली शांति प्रक्रिया'' का समर्थन करता है। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त की कि म्यांमा में आगामी चुनाव निष्पक्ष और समावेशी तरीके से होंगे।'' मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत म्यांमा के नेतृत्व वाली शांति प्रक्रिया का समर्थन करता है, जिसके लिए शांतिपूर्ण बातचीत और परामर्श ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है।'' मोदी ने यह भी कहा कि भारत अपनी 'पड़ोस पहले', 'एक्ट ईस्ट' और 'हिंद-प्रशांत' नीतियों के तहत म्यांमा के साथ संबंधों को महत्व देता है। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘ दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और विकास साझेदारी, रक्षा एवं सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और सीमा व्यापार के मुद्दों सहित द्विपक्षीय सहयोग के कई पहलुओं पर आगे बढ़ने के तरीकों पर चर्चा की।'' विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने प्रेस वार्ता में कहा कि सुरक्षा और सीमा मुद्दों पर भी चर्चा हुई। म्यांमा भारत के रणनीतिक महत्व के पड़ोसियों में से एक है और इसकी 1,640 किलोमीटर लंबी सीमा उग्रवाद प्रभावित नगालैंड और मणिपुर सहित कई पूर्वोत्तर राज्यों के साथ लगती है। - तियानजिन (चीन). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से कहा कि भारत आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर चीन के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को पुन: संयोजित करने के लिए व्यापक वार्ता की। मोदी ने टेलीविजन पर प्रसारित अपने वक्तव्य की शुरुआत में कहा कि 2.8 अरब लोगों का कल्याण भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय सहयोग से जुड़ा है। उत्तरी चीन के इस शहर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन के इतर दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन की शुल्क संबंधी नीति से पैदा हुई उथल पुथल की पृष्ठभूमि में हुई।मोदी दो देशों की अपनी यात्रा के दूसरे चरण में शनिवार शाम जापान से यहां पहुंचे। यह मई 2020 में शुरू हुए पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद मोदी की चीन की पहली यात्रा है। प्रधानमंत्री ने पिछले साल अक्टूबर में रूस के कजान में चीन के राष्ट्रपति के साथ वार्ता की थी जो भारत एवं चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में गतिरोध समाप्त करने के लिए एक समझौते पर पहुंचने के कुछ दिनों बाद हुई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष की (सीमा से सैनिकों की) वापसी प्रक्रिया के बाद सीमा पर शांति और स्थिरता है तथा दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें पुनः शुरू की जा रही हैं। प्रधानमंत्री ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के फिर से शुरू होने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सीमा प्रबंधन पर हमारे विशेष प्रतिनिधियों के बीच सहमति थी।भारत और चीन के बीच सीमा से संबंधित मुद्दों को सुलझाने के लिए 'सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों' का तंत्र है। मोदी ने कहा, ‘‘हम आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर अपने सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'' प्रधानमंत्री ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की चीन द्वारा सफलतापूर्वक अध्यक्षता किए जाने पर शी को बधाई भी दी। अभी इस बारे में जानकारी नहीं मिली है कि मोदी और शी के बीच बैठक में विशिष्ट रूप से क्या बातचीत हुई।तियानजिन की अपनी यात्रा से पहले मोदी ने कहा था कि विश्व आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए भारत और चीन का मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है। जापान के समाचार पत्र ‘द योमिउरी शिंबुन' के साथ एक साक्षात्कार में मोदी ने कहा था कि भारत और चीन के बीच स्थिर और सौहार्दपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों का क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति और समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। मोदी ने शुक्रवार को प्रकाशित साक्षात्कार में कहा, “विश्व अर्थव्यवस्था में मौजूदा अस्थिरता को देखते हुए, दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और चीन का विश्व आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है।” मोदी की चीन यात्रा चीनी विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा के एक पखवाड़े से भी कम समय बाद हो रही है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ वांग की व्यापक वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने ‘‘स्थिर, सहयोगात्मक और दूरदर्शी'' संबंधों के लिए कई कदम उठाए जाने की घोषणा की थी। इन कदमों में विवादित सीमा पर संयुक्त रूप से शांति बनाए रखना, सीमा पर व्यापार को फिर से खोलना और सीधी उड़ान सेवाओं को जल्द से जल्द फिर से शुरू करना शामिल था।
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नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि 31 अगस्त से चीन के तियानजिन में शुरू हो रहा शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन संगठन में नई ताकत का संचार करेगा।शिखर सम्मेलन और बीजिंग में चीन के स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेने के लिए चीन की अपनी यात्रा की पूर्व संध्या पर एक लिखित साक्षात्कार में पुतिन ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन समकालीन चुनौतियों और खतरों का सामना करने की एससीओ की क्षमता को मजबूत करेगा और साझा यूरेशियाई क्षेत्र में एकजुटता को मजबूत करेगा।
उन्होंने कहा, “यह सब एक अधिक न्यायसंगत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आकार देने में मदद करेगा।” पुतिन ने कहा, “एससीओ का आकर्षण इसके सरल लेकिन शक्तिशाली सिद्धांतों में निहित है। ये सिद्धांत संस्थापक दर्शन के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता, समान सहयोग के लिए खुलापन, किसी तीसरे पक्ष को निशाना न बनाना और प्रत्येक राष्ट्र की राष्ट्रीय विशेषताओं और विशिष्टता का सम्मान हैं।”उन्होंने कहा, “इन मूल्यों को अपनाते हुए, एससीओ एक अधिक न्यायसंगत, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आकार देने में योगदान देता है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित है और संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय समन्वयकारी भूमिका है।”रूसी राष्ट्रपति ने कहा, “इस वैश्विक दृष्टिकोण का एक प्रमुख तत्व यूरेशिया में समान और अविभाज्य सुरक्षा की एक संरचना का निर्माण है, जिसमें एससीओ सदस्य देशों के बीच घनिष्ठ समन्वय भी शामिल है।”एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि तियानजिन शिखर सम्मेलन एससीओ के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। रूस चीनी अध्यक्षता द्वारा घोषित प्राथमिकताओं का पूरा समर्थन करता है, जो एससीओ को मजबूत करने, सभी क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने और वैश्विक मंच पर संगठन की भूमिका को बढ़ाने पर केंद्रित हैं।पुतिन ने कहा, “मुझे विश्वास है कि हमारे संयुक्त प्रयासों से, हम एससीओ को नई गति प्रदान करेंगे और समय की मांग के अनुसार इसका आधुनिकीकरण करेंगे।”गौरतलब हो, चीन 2024-2025 तक एससीओ की अध्यक्षता करेगा। 2025 में, एससीओ शिखर सम्मेलन तियानजिन में आयोजित किया जाएगा। तियानजिन शिखर सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित होगा। -
संयुक्त राष्ट्र. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अमेरिका और उसके करीबी सहयोगी इजराइल की मांगों को स्वीकार करते हुए दक्षिणी लेबनान में लगभग पांच दशक बाद संयुक्त राष्ट्र शांति सेना को समाप्त करने के लिए बृहस्पतिवार को सर्वसम्मति से निर्णय लिया। दक्षिणी लेबनान से सेना को 2026 के अंत तक हटा लिया जाएगा।
‘लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल' (यूएनआईएफआईएल) का गठन 1978 में इजराइल के आक्रमण के बाद किया गया था। उसका उद्देश्य दक्षिणी लेबनान से इजराइली सैनिकों की वापसी की निगरानी करना था और 2006 में इज़राइल तथा उग्रवादी समूह हिज़्बुल्ला के बीच एक महीने तक चले युद्ध के बाद इसके मिशन का विस्तार किया गया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्वीकृत प्रस्ताव के तहत यूएनआईएफआईएल को 2026 के अंत तक समाप्त कर दिया जाएगा। लेबनान सरकार के परामर्श से 10,800 सैन्य और नागरिक कर्मियों तथा साजोसामान को हटाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी जो एक वर्ष के भीतर पूरी हो जाएगी। - बीजिंग. उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन अगले सप्ताह चीन की राजधानी बीजिंग में एक सैन्य परेड में भाग लेंगे। उत्तर कोरिया और चीन के सरकारी मीडिया ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। यह किम जोंग उन की दुर्लभ विदेश यात्रा मानी जा रही है क्योंकि वह आम तौर पर विदेश यात्रा नहीं करते हैं। चीन द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ पर सैन्य परेड का आयोजन कर रहा है।
- वाशिंगटन. अमेरिका की अर्थव्यवस्था में जून तिमाही में तेजी आई है। दूसरे अग्रिम अनुमान में आर्थिक वृद्धि दर अप्रैल-जून तिमाही में सालाना आधार पर 3.3 प्रतिशत रही। वाणिज्य विभाग ने बृहस्पतिवार को कहा कि 2025 की जनवरी-मार्च तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 0.5 प्रतिशत की गिरावट रहने के बाद जून तिमाही में 3.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है। विभाग ने शुरू में आर्थिक वृद्धि दर तीन प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था।मार्च तिमाही में जीडीपी में आई गिरावट तीन साल में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की पहली गिरावट थी। मुख्यतः आयात में वृद्धि के कारण ऐसा हुआ। इसका कारण कंपनियों ने ट्रंप के शुल्क के अमल में आने से पहले विदेशी सामान तेजी से आयात किए। वहीं दूसरी तिमाही में यह रुख उम्मीद के मुताबिक पलट गया। आयात में 29.8 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे अप्रैल-जून तिमाही में वृद्धि दर में तेजी आई। वाणिज्य विभाग ने कहा कि जून तिमाही में उपभोक्ता खर्च और निजी निवेश उसके पहले अनुमान से थोड़ा अधिक मजबूत रहे।
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न्यूयॉर्क/वाशिंगटन. ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका में विदेशी छात्रों और मीडियाकर्मियों के लिए वीजा की अवधि सीमित करने का प्रस्ताव रखा है। आंतरिक सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने बुधवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि यदि प्रस्तावित नियम को अंतिम रूप दिया जाता है तो विदेशी छात्रों समेत कुछ वीजा धारकों के अमेरिका में रहने की अवधि सीमित हो जाएगी। साल 1978 से, विदेशी छात्रों को ‘एफ' वीजा के तहत अनिर्दिष्ट अवधि के लिए अमेरिका में प्रवेश दिया जाता रहा है। डीएचएस ने कहा कि अन्य वीजा के विपरीत एफ वीजा धारकों को बिना किसी अतिरिक्त जांच-पड़ताल के अनिश्चित समय तक अमेरिका में रहने की अनुमति होती है। डीएचएस प्रवक्ता ने कहा, "लंबे समय से, पिछले प्रशासनों ने विदेशी छात्रों और अन्य वीजा धारकों को अमेरिका में लगभग अनिश्चितकाल तक रहने की अनुमति दी है, जिससे सुरक्षा जोखिम पैदा हुआ है, करदाताओं के पैसे की भारी हानि हुई है, और अमेरिकी नागरिकों को नुकसान हुआ है।" प्रवक्ता ने कहा, "यह नया प्रस्तावित नियम कुछ वीजा धारकों के अमेरिका में रहने की अवधि को सीमित कर इस दुरुपयोग को हमेशा के लिए समाप्त कर देगा।" विदेशी मीडिया कर्मी पांच साल के लिए जारी किए गए ‘आई' वीजा के तहत अमेरिका में काम कर सकते हैं, जिसे कई बार बढ़ाया जा सकता है। हालांकि नए नियम के तहत प्रारंभिक अवधि 240 दिन तक के लिए निर्धारित की जाएगी।
- न्यूयॉर्क. पॉप गायिका टेलर स्विफ्ट और फुटबॉल खिलाड़ी ट्रैविस केल्सी ने मंगलवार को घोषणा की कि उन्होंने सगाई कर ली है। इंस्टाग्राम पर पांच तस्वीरों वाली एक संयुक्त पोस्ट में, दोनों ने अपनी सगाई का खुलासा किया। स्विफ्ट और केल्सी दो साल से प्रेम संबंध में थे। यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों की सगाई कब और कहां हुई। केल्सी और स्विफ्ट के रिश्ते को हाल में जारी छह-भाग वाली ईएसपीएन डॉक्यूमेंट्री "द किंगडम" में प्रमुखता से दिखाया गया है।


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