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- नयी दिल्ली. मुंबई के बल्लेबाज सरफराज खान को 15 अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ शुरू होने वाली दो मैच की टेस्ट श्रृंखला के लिए चोटिल साई सुदर्शन की जगह भारतीय टीम में शामिल किया गया। बाएं हाथ के बल्लेबाज सुदर्शन को पिछले महीने भारत ए के दौरे के दौरान पैर के अंगूठे में चोट लगी थी। फिलहाल वह बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (सीओई) में चोट से उबर रहे हैं। बीसीसीआई ने बताया कि सुदर्शन की चोट में काफी सुधार हुआ है और मेडिकल टीम लगातार उनकी प्रगति पर निगरानी रखे है। बीसीसीआई ने बयान में कहा, ''पुरुष चयन समिति ने श्रीलंका के खिलाफ दो मैच की टेस्ट सीरीज के लिए साई सुदर्शन की जगह सरफराज खान को टीम में शामिल किया है। '' सरफराज 15 अगस्त से गॉल में शुरू होने वाले पहले टेस्ट से पहले कोलंबो में भारतीय टीम से जुड़ेंगे।अठाईस वर्षीय सरफराज ने भारत के लिए अब तक छह टेस्ट मैच खेले हैं। उनका आखिरी टेस्ट 2024 में मुंबई में न्यूजीलैंड के खिलाफ था। भारत की अपडेट हुई टीम :शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन, औकिब नबी और सरफराज खान।
- लंदन. भारतीय महिला गोल्फर दीक्षा डागर लंदन चैंपियनशिप के तीसरे दौर में एक ओवर 72 के कार्ड के साथ शीर्ष-20 में बनी हुई हैं जिससे उनकी 'लेडीज यूरोपीय टूर ऑर्डर ऑफ मेरिट' में आगे बढ़ने की उम्मीदें कायम हैं। दीक्षा ने पहले दो दौर में 75-70 का स्कोर किया था और वह संयुक्त 22वें स्थान पर थीं। तीसरे दौर में 72 के स्कोर के साथ संयुक्त 19वें स्थान पर पहुंच गईं। वहीं अदिति अशोक 71-73 के कार्ड खेलने के बाद संयुक्त 16वें स्थान पर थीं और 73 के कार्ड के साथ वह भी संयुक्त 19वें स्थान पर खिसक गईं। प्रणवी उर्स 71-72 के कार्ड से संयुक्त 12वें स्थान पर पहुंच गई थीं, लेकिन 20 लाख डॉलर इनामी राशि वाले इस टूर्नामेंट के तीसरे दिन 78 के कार्ड के कारण वह संयुक्त 38वें स्थान पर खिसक गईं।
- नयी दिल्ली . पुरूष हॉकी विश्व कप के पांच दशक से अधिक के सफर में भारत को एकमात्र सफलता 1975 में कुआलालम्पुर में मिली जब अजित पाल सिंह की कप्तानी वाली टीम ने पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था लेकिन उसके बाद से आठ बार की ओलंपिक चैम्पियन भारत पोडियम पर जगह बनाने में नाकाम रही है । टूर्नामेंट की सबसे कामयाब टीम पाकिस्तान रही है जिसने चार बार खिताब जीते जबकि नीदरलैंड, आस्ट्रेलिया और जर्मनी तीन तीन बार चैम्पियन रहे । बेल्जियम ने एक बार ट्रॉफी अपने नाम की । विश्व कप के अब तक के सफर का आकलन : 1971 बार्सीलोना :भारत और पाकिस्तान ने मिलकर मार्च 1969 में एफआईएच परिषद की बैठक में फुटबॉल की तर्ज पर हॉकी विश्व कप कराने का प्रस्ताव रखा जिसे अगले साल ब्रसेल्स में हुई बैठक में मंजूरी मिली । पाकिस्तान को मेजबानी दी गई लेकिन 1971 में दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव के चलते पहला विश्व कप स्पेन के बार्सीलोना में हुआ । पांच उपमहाद्वीपों की दस टीमों ने एफआईएच के आमंत्रण पर इसमें भाग लिया ।ओलंपिक की सबसे कामयाब टीम भारत पूल ए में फ्रांस, अर्जेंटीना, कीनिया और पश्चिम जर्मनी को हराकर शीर्ष पर रहा । सेमीफाइनल में पाकिस्तान ने भारत को 2 . 1 से हराया और फिर स्पेन को हराकर पहला विश्व कप जीता । भारत ने कीनिया को 2. 1 से हराकर कांस्य पदक जीता । 1973 एम्सटर्डम :एम्सटेलवीन के वेगनेर स्टेडियम पर खेले गए इस विश्व कप में मेजबान नीदरलैंड ने पेनल्टी शूटआउट में भारत को 4 . 2 से हराकर खिताब जीता । भारत पूल ए में पांच जीत और तीन ड्रॉ के साथ पश्चिम जर्मनी के बाद दूसरे स्थान पर रहा ।सेमीफाइनल में बी पी गोविंदा के गोल के दम पर भारत ने पाकिस्तान को हराया । फाइनल में अतिरिक्त समय तक मैच 2 . 2 से बराबर था लेकिन पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड ने भारत को हराया । 1975 कुआलालम्पुर :भारतीय हॉकी के विश्व कप इतिहास का सबसे सुनहरा अध्याय लिखा गया 15 मार्च 1975 को कुआलालम्पुर में जब फाइनल में अजित पाल सिंह की कप्तानी में भारत ने पाकिस्तान को 2 . 1 से हराया। फाइनल में पाकिस्तान ने बढत बना ली थी लेकिन सुरजीत सिंह ने 44वें और अशोक कुमार ने 51वें मिनट में गोल करके भारत को खिताब दिलाया । पूल चरण में शीर्ष पर रहे भारत ने सेमीफाइनल में मलेशिया को मात दी थी । तब तक सात ओलंपिक स्वर्ण जीत चुकी भारतीय टीम का यह पहला विश्व कप खिताब था । 1978 ब्यूनस आयर्स :गत चैम्पियन भारत बेहद निराशाजनक प्रदर्शन के बाद सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच सका और छठे स्थान पर रहा । पूल चरण में भारत ने छह में से तीन मैच जीते और दो गंवाये जिसमें पश्चिम जर्मनी से 7.0 से मिली हार शामिल थी । पाकिस्तान ने नीदरलैंड को 3 . 2 से हराकर खिताब जीता और आस्ट्रेलिया को कांस्य पदक मिला । 1982 मुंबई :अपने देश में पहली बार विश्व कप खेलते हुए भारत फिर अंतिम चार में नहीं पहुंच सका और पांचवें स्थान से ही संतोष करना पड़ा । पाकिस्तान ने अपराजेय रहकर वानखेड़े स्टेडियम पर फाइनल में पश्चिम जर्मनी को 3 . 1 से हराकर तीसरी बार खिताब जीता । भारत के राजिंदर सिंह सीनियर ने टूर्नामेंट में सर्वाधिक 12 गोल दागे थे । 1986 लंदन :इस विश्व कप में भारतीय टीम अब तक के सबसे खराब प्रदर्शन के बाद 12वें और आखिरी स्थान पर रही लेकिन इसी टीम के एक सितारे मोहम्मद शाहिद ने अपने जबर्दस्त खेल से दुनिया को चौंका दिया । ड्रिबलिंग के जादूगर शाहिद को टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया । आस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 2 . 1 से हराकर खिताब जीता जबकि पश्चिम जर्मनी तीसरे स्थान पर रहा । तीन बार का चैम्पियन पाकिस्तान 11वें स्थान पर रहा । 1990 लाहौर :राजनीतिक तनाव, मेजबान दर्शकों की आक्रामकता और सुरक्षा चिंताओं के बीच भारतीय टीम ने परगट सिंह की कप्तानी में लाहौर में विश्व कप खेला । भारत दसवें स्थान पर रहा लेकिन इतनी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आपा नहीं खोने के कारण एफआईएच 'फेयरप्ले' पुरस्कार भारतीय टीम को मिला । नीदरलैंड ने पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा ।1994 सिडनी:जूड फेलिक्स की कप्तानी में भारतीय टीम ने कृत्रिम टर्फ पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए पांचवां स्थान हासिल किया था । पाकिस्तान ने नीदरलैंड को पेनल्टी शूटआउट में 4 . 3 से हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा ।1998 यूट्रेक्ट :इस विश्व कप में पूरी तरह से यूरोपीय टीमों का दबदबा रहा । मेजबान नीदरलैंड ने स्पेन को हराकर तीसरा खिताब जीता जबकि जर्मनी तीसरे स्थान पर रहा । धनराज पिल्लै की कप्तानी वाली भारतीय टीम नीदरलैंड में परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाने में नाकाम रही और निराशाजनक नौवें स्थान पर रही । 2002 कुआलालम्पुर :पहली बार 16 टीमों की भागीदारी में हुए विश्व कप में जर्मनी ने आस्ट्रेलिया को हराकर पहली बार खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा । भारत नौ मैचों में तीन जीत, एक ड्रॉ और पांच हार के साथ दसवें स्थान पर रहा । 2006 मोंशेंग्लाबाख , जर्मनी :दिलीप टिर्की की कप्तानी में भारतीय टीम पूल चरण में एक भी मैच नहीं जीत सकी और एकमात्र ड्रॉ दक्षिण अफ्रीका से खेलने के बाद आखिरी स्थान पर रही । क्लासीफिकेशन मैच में राजपाल सिंह के एक गोल से दक्षिण अफ्रीका को हराने के बाद 12 टीमों में 11वें स्थान पर रही । जर्मनी ने आस्ट्रेलिया को हराकर लगातार दूसरा खिताब जीता जबकि स्पेन तीसरे स्थान पर रहा ।2010 दिल्ली :दिल्ली में हुए इस विश्व कप में खचाखच भरे मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम पर पूल चरण में पाकिस्तान को 4 . 1 से हराना ही मेजबान भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि रही । पूल चरण में चौथे स्थान पर रही भारतीय टीम सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सकी और आठवां स्थान हासिल किया । आस्ट्रेलिया ने जर्मनी को 2 . 1 से हराकर खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा ।2014 द हेग :पूल चरण में बेल्जियम, इंग्लैंड , आस्ट्रेलिया से करारी हार झेलने वाली भारतीय टीम नौवे स्थान पर रही । आकाशदीप सिंह ने टूर्नामेंट में पांच गोल किये । आस्ट्रेलिया ने नीदरलैंड को 6 . 1 से हराकर खिताब जीता और अर्जेंटीना तीसरे स्थान पर रहा ।2018 भुवनेश्वर :हॉकी के गढ ओडिशा में पहली बार हुए विश्व कप में भारत ने पूल चरण में बेल्जियम जैसे दिग्गज को ड्रॉ पर रोका और दक्षिण अफ्रीका तथा कनाडा को हराकर शीर्ष पर रहा । मनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली मेजबान टीम क्वार्टर फाइनल में नीदरलैंड से कड़े मुकाबले में 1 . 2 से हारकर छठे स्थान पर रही जो कई साल में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था । बेल्जियम ने पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड को हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा ।2023 भुवनेश्वर और राउरकेला :लगातार दूसरी बार अपनी मेजबानी में हुए विश्व कप में भारत पूल चरण में दूसरे स्थान पर रहा । क्रासओवर मैच में न्यूजीलैंड ने उसे पेनल्टी शूट आउट में हराया । हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में भारतीय टीम नौवे स्थान पर रही । जर्मनी ने बेल्जियम को शूटआउट में हराकर खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा ।
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यूजीन (अमेरिका) .बसंत कुमार मेघवाल विश्व एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप में ऊंची कूद में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं, जबकि शाहनवाज खान ने लंबी कूद में कांस्य पदक जीता, जिससे भारत के लिए यह दिन यादगार बन गया और प्रतियोगिता में उसके कुल पदकों की संख्या तीन पहुंच गई। राजस्थान के श्री गंगानगर जिले के सीमावर्ती शहर अनूपगढ़ के रहने वाले 19 वर्षीय मेघवाल ने शनिवार को चैंपियनशिप के चौथे दिन 2.21 मीटर की कूद लगाकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और रजत पदक जीता। अल्जीरिया के यूनेस अयाची ने स्वर्ण पदक, जबकि ग्रेट ब्रिटेन के ओटिस पूल ने कांस्य पदक हासिल किया। तीनों पदक विजेता केवल 2.21 मीटर की ऊंचाई तक कूद लगा सके और 2.24 मीटर की ऊंचाई पार करने में असफल रहे। ऐसी स्थिति में पिछली ऊंचाई को पार करने के प्रयासों की संख्या के आधार पर स्थानों का निर्धारण किया गया। अयाची ने अपने पहले प्रयास में ही 2.21 मीटर की ऊंचाई पार कर ली थी, जबकि मेघवाल और पूल ने क्रमशः अपने दूसरे और तीसरे प्रयास में यह ऊंचाई हासिल की थी। भारतीय नौसेना में कार्यरत मेघवाल के रजत पदक ने उन्हें विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप में ऊंची कूद में पदक जीतने वाला पहला भारतीय भी बना दिया। भारतीय महिला ऊंची कूद की पूर्व राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक सहाना कुमारी से प्रशिक्षण लेने वाले मेघवाल ने इस सत्र में अपने प्रदर्शन में 10 सेंटीमीटर का सुधार किया है। इससे पहले उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2.11 मीटर था। इसके बाद शाहनवाज ने पुरुषों की लंबी कूद में 7.84 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ कांस्य पदक जीतकर चैंपियनशिप में भारत के पदकों की संख्या को तीन तक पहुंचा दिया। इस 18 वर्षीय खिलाड़ी ने अपने तीसरे प्रयास में सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाई। उन्होंने क्रमश: 7.67 मीटर, 7.72 मीटर, 7.84 मीटर, 7.52 मीटर, 7.83 मीटर और 5.37 मीटर छलांग लगाई। फाइनल में पहुंचने वाले दूसरे भारतीय आरसी जिथिन अर्जुनान ने अपने पहले और चौथे प्रयास में 7.59 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर आठवां स्थान हासिल किया। इटली के डेनियल इन्जोली ने 7.97 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता, जबकि ऑस्ट्रेलिया के मेसन मैकग्रोडर ने 7.96 मीटर के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ रजत पदक हासिल किया। इससे पहले आशीष यादव ने प्रतियोगिता के तीसरे दिन पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में रजत पदक जीतकर भारत का खाता खोला था। यादव विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप में भाला फेंक में रजत पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं। उनसे पहले नीरज चोपड़ा ने यह उपलब्धि हासिल की थी। चोपड़ा ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह अभी 'केवल शुरुआत' है।
- आसन (कोरिया)। भारत की अश्मिता चालिहा ने रविवार को यहां कोरिया मास्टर्स सुपर 300 बैडमिंटन टूर्नामेंट के महिला एकल फाइनल में चीन की चौथी वरीयता प्राप्त हान कियान शी को हराकर अपना पहला बीडब्ल्यूएफ विश्व टूर खिताब हासिल जीता। असम की रहने वाली इस 26 वर्षीय खिलाड़ी ने पहला गेम गंवाने के बाद शानदार वापसी करते हुए विश्व में 35वें नंबर की खिलाड़ी हान को 53 मिनट तक चले मैच में 14-21, 21-14, 21-14 से हराया। चालिहा ने कहा, ''मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। यह अविश्वसनीय है लेकिन मैं इसे समझने की कोशिश कर रही हूं। इसने मेरी आगे और भी कुछ हासिल करने की भूख बढ़ा दी है।'' इस तरह से भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार दूसरे सप्ताह बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर का खिताब जीता। तन्वी शर्मा ने पिछले रविवार को ताइपे ओपन का खिताब अपने नाम किया था।भारतीय खिलाड़ी ने अच्छी शुरुआत की तथा पहले 3-0 और फिर 9-5 से बढ़त हासिल कर ली। लेकिन हान ने शानदार वापसी की और उन्होंने स्कोर 11-11 से बराबर कर दिया। चीनी शटलर ने अपनी लय हासिल करने के बाद लगातार अंक बनाए और मैच पर नियंत्रण बना दिया। इसके बाद उन्हें पहला गेम जीतने में किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। विश्व रैंकिंग में 50वें स्थान पर काबिज चालिहा ने दूसरे गेम में अधिक आत्मविश्वास के साथ आक्रामक खेल दिखाया और अपने स्मैश का अच्छा इस्तेमाल करते हुए हान पर दबाव बनाया। एक समय दोनों खिलाड़ी 6-6 से बराबरी पर थी। लेकिन इंटरवल तक भारतीय खिलाड़ी 11-8 से आगे हो गई। उन्होंने इसके बाद भी अपना दबदबा बनाए रखा। हान अंतर को कम करने के लिए संघर्ष करती रही। चालिहा ने 17-10 से बढ़त हासिल करने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा और मैच को निर्णायक गेम तक पहुंचा दिया। तीसरे गेम के शुरू में दोनों खिलाड़ियों ने एक दूसरे के सामने कड़ी चुनौती पेश की। चालिहा ने शुरू में 5-2 की बढ़त हासिल कर ली, लेकिन इंटरवल तक हान 11-9 से आगे थी। चालिहा ने संघर्ष जारी रखा और धीरे-धीरे मैच का रुख अपने पक्ष में मोड़ लिया। उन्होंने लगातार छह अंक बनाकर 15-11 से बढ़त हासिल कर ली। भारतीय खिलाड़ी ने एक क्रॉस-कोर्ट विनर से स्कोर 19-14 कर दिया। इसके बाद हान ने अपना रिटर्न शॉट बाहर मार दिया, जिससे चालिहा को चैंपियनशिप प्वाइंट मिल गया और फिर उन्होंने अपना पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब जीतने में देर नहीं लगाई। चालिहा ने कहा, ''पहले गेम में ड्रिफ्ट की वजह से थोड़ी मुश्किल हुई, इसलिए मैं इस पर नियंत्रण नहीं बना सकी लेकिन दूसरे गेम में दूसरी तरफ स्थिति बेहतर थी और ड्रिफ्ट कम थी, इसलिए मैं इसे नियंत्रित कर पाई। तीसरे गेम में 11 प्वाइंट के बाद, मैंने फिर से रणनीति बदली, इसलिए मैं बेहतर स्थिति में थी। मुझे खुशी है कि मैं यह कर पाई।'' चालिहा 2024 में कोरिया ओपन के दौरान चोटिल हो गई थी। उनके दाहिने घुटने में चोट लगी थी जिसके लिए उन्हें सर्जरी करानी पड़ी। उन्होंने अगले साल फरवरी में वापसी की और 14 प्रतियोगिताओं में भाग लिया। इस साल उन्होंने बीडब्ल्यूएफ टूर पर शानदार वापसी करते हुए चाइना मास्टर्स और मलेशिया मास्टर्स के क्वार्टर फाइनल और फिर मकाऊ ओपन के सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। चालिहा गुवाहाटी स्थित राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में पार्क ताए-सांग के मार्गदर्शन में अभ्यास करती है।
- बेंगलुरु। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) का पुरजोर तरीके से बचाव करते हुए इसके प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने रविवार को कहा कि खिलाड़ियों की चोट से उबरने की धीमी प्रक्रिया के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि क्रिकेटर कोई 'मशीन' नहीं हैं, जिनकी फिटनेस हर बार तय समयसीमा के भीतर लौट आए।लक्ष्मण ने यह भी स्पष्ट किया कि सीओई और टीम प्रबंधन के बीच बेहतरीन और निर्बाध समन्वय है।फिलहाल तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह, हरफनमौला हर्षित राणा, हार्दिक पांड्या, वॉशिंगटन सुंदर और शीर्ष क्रम के बल्लेबाज बी. साई सुदर्शन अपनी-अपनी चोटों से उबरने के लिए सीओई में हैं। लक्ष्मण ने सीओई में चुनिंदा मीडिया से बातचीत में कहा, ''सीओई सिर्फ चोट से उबरने और फिटनेस हासिल करने का केंद्र नहीं है। क्रिकेटरों को उत्कृष्टता हासिल करने में मदद करने के लिए इसकी भूमिका इससे कहीं बड़ी है। इसलिए हम चोटों के मामले में 'दोष' शब्द का इस्तेमाल करना पसंद नहीं करते। ऐसा करने पर किसी एक व्यक्ति को बलि का बकरा बनाया जाता है।" उन्होंने कहा, ''पुरुष और महिला, दोनों टीमों के सीओई, टीम प्रबंधन और 'एसएसएम स्टाफ' के बीच शानदार तालमेल है। इसलिए बिना रूकावट के संवाद लगातार होता रहता है।" लक्ष्मण ने कहा कि कड़े फिटनेस मानकों और मानव शरीर की प्रकृति को देखते हुए किसी खिलाड़ी का एक निश्चित समयसीमा में पूरी तरह फिट हो जाना हमेशा संभव नहीं होता। उन्होंने कहा, ''यह समझना बहुत जरूरी है कि दिशानिर्देश और समयसीमा हमारी अपेक्षाओं के आधार पर तय की जाती हैं। लेकिन यह मानव शरीर है, मशीन नहीं कि हर बार तय समयसीमा के भीतर ही रिकवरी हो जाए।'' उन्होंने बताया, '' खिलाड़ी की प्रगति की लगातार निगरानी की जाती है और उसके अनुसार प्रशिक्षण का भार बढ़ाया जाता है। चोट के उबरने से लेकर फिट घोषित होने और खिलाड़ी के सीओई छोड़ने तक यही प्रक्रिया जारी रहती है।''लक्ष्मण ने अपनी बात समझाने के लिए जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि चयनकर्ता सीओई से खिलाड़ियों की फिटनेस स्थिति की रिपोर्ट मांगते हैं। इसके बाद रिपोर्ट चयन समिति के अध्यक्ष और दोनों टीमों के मुख्य कोच और बीसीसीआई को भेजी जाती है। उन्होंने कहा, ''बुमराह और सुदर्शन के नाम के आगे हमेशा एक तारांकित निशान रहता है, जिसका अर्थ है 'फिटनेस के अधीन'। इसलिए श्रीलंका के खिलाफ टीम के लिए उनका चयन फिटनेस क्लीयरेंस मिलने की शर्त पर होना था।'' लक्ष्मण के मुताबिक, ''सीओई में खिलाड़ियों का आकलन कर उन्हें एक चरण से दूसरे चरण में आगे बढ़ाया जाता है। उनकी प्रगति धीमी होती है तो चयन समिति के अध्यक्ष और मुख्य कोच को इसकी जानकारी दी जाती है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और सभी संबंधित लोग समझते हैं कि खिलाड़ी अभी अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में हिस्सा लेने के लिए तैयार नहीं है।'' जब लक्ष्मण से पूछा गया कि बड़ी संख्या में खिलाड़ियों के लगातार चोटिल होने को लेकर क्या यह चिंता का विषय है, तो पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उन्होंने कहा कि चोट खेल करियर का हिस्सा है। उन्होंने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि यह चिंता का कारण है। लेकिन जब कोई खिलाड़ी शीर्ष स्तर पर खेलता है तो उससे अपना सर्वश्रेष्ठ देने की उम्मीद होती है। चोट किसी भी खिलाड़ी के करियर का हिस्सा है। अगर आप चोट से बचने के बारे में सोचते रहेंगे तो अपनी पूरी क्षमता के साथ नहीं खेल पाएंगे।'' उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि खिलाड़ियों की चोट को देखने का नजरिया बदलना चाहिए। उनके अनुसार, चोट को हमेशा नकारात्मक चीज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे खेल का स्वाभाविक हिस्सा समझना चाहिए। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने भी श्रृंखला से पहले टीम चयन की प्रक्रिया को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आम तौर पर टीम के रवाना होने से कम से कम तीन से चार सप्ताह पहले चयन बैठक होती है। सैकिया ने कहा, ''उस समय हमें खिलाड़ी की फिटनेस की वास्तविक स्थिति का पता नहीं होता। इसलिए उसके नाम के आगे 'फिटनेस के अधीन' का उल्लेख किया जाता है, क्योंकि वह खिलाड़ी उस समय चोट की उबरने की प्रक्रिया से जुड़े कार्यक्रम से गुजर रहा होता है।'' उन्होंने कहा कि अगर खिलाड़ी 21 या 28 दिनों की उस अवधि में फिट हो जाता है, तो उसे टीम में शामिल किया जा सकता है। इसीलिए ऐसे खिलाड़ी को सीधे तौर पर चयन से बाहर नहीं किया जाता है। सैकिया के अनुसार, ''टीम के यात्रा पर रवाना होने या मैच खेलने तक जरूरी फिटनेस हासिल करने के लिए खिलाड़ी के पास पर्याप्त समय रहता है। इस तरह अंतिम फैसला खिलाड़ी की वास्तविक फिटनेस स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाता है।''
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लेह. लद्दाख मैराथन की पुरस्कार राशि एक करोड़ रुपये कर दी गई है। आयोजकों ने शनिवार को यह घोषणा की। लद्दाख मैराथन 10 से 13 सितंबर तक आयोजित की जाएगी और इसमें लगभग 10000 धावकों के भाग लेने की संभावना है। आयोजकों ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा,, ''इस वर्ष इस प्रतियोगिता में भारत के 28 राज्यों और छह केंद्र शासित प्रदेशों के धावक भाग लेंगे। इसके अलावा दुनिया भर के धावक भी इसमें अपने-अपने देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।'' केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के प्रशासनिक सचिव संजीत रोड्रिग्स ने कहा, ''केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल ने पुरस्कार राशि को बढ़ाकर एक करोड़ रुपये करने का फैसला किया है जो इस प्रतियोगिता की वैश्विक प्रतिष्ठा को मजबूत करने, खेल पर्यटन को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों के लिए अधिक अवसर पैदा करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।'' इस प्रतियोगिता में फुल मैराथन, हाफ मैराथन, 11.2 किमी दौड़ और पांच किमी की दौड़ 'रन फॉर फन' के साथ-साथ दुनिया की दो सबसे चुनौतीपूर्ण लंबी दूरी की दौड़ 72 किमी खारदुंग ला चैलेंज और 122 किमी सिल्क रूट अल्ट्रा भी शामिल हैं।
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यूजीन. आशीष यादव ने विश्व एथलेटिक्स अंडर 20 चैम्पियनशिप में पुरूषों के भालाफेंक में रजत पदक जीतकर भारत का खाता खोला जबकि राष्ट्रीय सीनियर रिकॉर्डधारी पूजा सिंह ने महिलाओं की ऊंची कूद के फाइनल में जगह बना ली । यादव ने तीसरे दौर में 74 . 09 मीटर का थ्रो फेंककर रजत पदक हासिल किया । वहीं भारत के टी धरणीधरन 72 . 35 मीटर के थ्रो के साथ छठे स्थान पर रहे । यादव अपने सर्वश्रेष्ठ निजी प्रदर्शन से 40 सेमी पीछे रह गए । उन्होंने मार्च में पटियाला में इंडियन ओपन थ्रो प्रतिस्पर्धा में 74 . 49 मीटर का थ्रो फेंका था । 19 वर्ष के यादव दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा के बाद इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय बन गए । चोपड़ा ने 2016 में पोलैंड में 86 . 48 मीटर के विश्व जूनियर रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता था । यह रिकॉर्ड आज भी उनके नाम है । दक्षिण अफ्रीका के जान हेंड्रिक हेमैंस ने 80 . 50 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता । वहीं डोमिनिका के एडिसन जेम्स को कांस्य पदक मिला जिन्होंने 73 . 89 मीटर का थ्रो फेंका था । एक दिन पहले पुरूषों की 400 मीटर हीट के पहले दौर में अंडर 20 राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने वाले मोहम्मद अशफाक फाइनल में 46 . 20 सेकंड का समय निकालकर आठवें स्थान पर रहे । अमेरिका के जेडेन डेलोन ने 44 . 47 सेकंड के साथ स्वर्ण और उनके हमवतन किंसी विल्सन ने 44 . 62 मीटर के साथ रजत पदक जीता । दक्षिण अफ्रीका के लीन्डर्ट के को कांस्य पदक मिला । महिलाओं की ऊंची कूद में पूजा ने 1 . 79 मीटर के साथ फाइनल में जगह बनाई । दोनों क्वालीफिकेशन ग्रुप से 1.79 मीटर की बाधा पार करने वाले को फाइनल में जगह मिली । पुरूषों की लंबी कूद में शाहनवाज खान और जितिन अर्जुन ने फाइनल में जगह बना ली। शाहनवाज क्वालीफिकेशन ग्रुप ए में 7.79 मीटर की कूद के साथ चौथे और कुल पांचवें स्थान पर रहे जबकि जितिन 7 . 57 मीटर की कूद लगाकर 12वें स्थान पर रहे । महिलाओं की भालाफेंक स्पर्धा में पूनम अपने क्वालीफिकेशन ग्रुप में आठवें और कुल 13वें स्थान के साथ फाइनल में जगह नहीं बना सकी .
- नयी दिल्ली। आयुष शेट्टी के कोच सागर चोपड़ा का मानना है कि विश्व चैंपियनशिप के पहले दौर में जब यह युवा शटलर चीन के शी यु ची का सामना करेगा तो दबाव विश्व में नंबर एक खिलाड़ी पर होगा और इसलिए यह मैच भारतीय खिलाड़ी के पक्ष में जा सकता है। चोपड़ा का मानना है कि शी यु ची इस समय अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में नहीं है और आयुष को इसका फायदा मिल सकता है। शेट्टी ने इस साल की शुरुआत में बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में उपविजेता बनकर बड़े मंच पर अपनी पहचान बनाई और वह इस समय अच्छी लय में हैं। चोपड़ा ने कहा, ''अगर आप देखें तो यह शायद सबसे मुश्किल ड्रॉ में से एक है जो किसी को भी मिल सकता है। लेकिन शी यु ची के खिलाफ खेलने से आयुष के पास खोने के लिए कुछ नहीं है।'' उन्होंने कहा, ''दरअसल, वह भारत में और हमारे घरेलू मैदान पर खेल रहा है, इसलिए दबाव शी यु ची पर ही रहेगा। शी यु ची कुछ महीने पहले की तरह अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में नहीं दिख रहे हैं। वहीं आयुष हर टूर्नामेंट के साथ बेहतर होते जा रहे हैं। वह काफी अच्छा खेल रहे हैं।''
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नयी दिल्ली. दो बार के ओलंपिक पदक विजेता भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा यूबीएस एथलेटिक्स किड्स कप के सह-मालिक बन गए हैं। चोपड़ा पिछले दो सत्र से बच्चों से जुड़े इस कार्यक्रम के ब्रांड एंबेसडर के रूप में भी काम कर चुके हैं। यूबीएस एथलेटिक्स किड्स कप जमीनी स्तर की उन पहल में से एक है, जिसका उद्देश्य बच्चों को मनोरंजक, समावेशी और सुलभ प्रतियोगिताओं के माध्यम से खेलों से परिचित कराना है। इसने पांच शहरों के 2,500 से अधिक स्कूलों में 250,000 से अधिक बच्चों को इस पहल से जोड़ा है। चोपड़ा ने विज्ञप्ति में कहा, ''पिछले दो सत्र में मैंने देखा है कि यूबीएस एथलेटिक्स किड्स कप ने विभिन्न स्कूलों के बच्चों पर कितना प्रभाव डाला है। प्रत्येक बच्चे को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलना चाहिए। हमारा लक्ष्य दस लाख बच्चों तक पहुंचना और युवाओं को खेल के प्रति प्रेरित करना है।
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कोलंबो. भारतीय कप्तान शुभमन गिल शुक्रवार को यहां एसएलसी इलेवन के खिलाफ अभ्यास क्रिकेट मैच के पहले दिन मैदान पर नहीं उतरेंगे क्योंकि अभ्यास के दौरान उनकी दाहिनी उंगली में चोट लग गई है। गिल को बृहस्पतिवार को यहां अभ्यास सत्र के दौरान चोट लग गई थी। उनकी अनुपस्थिति में केएल राहुल टीम की कप्तानी कर रहे हैं। एसएलसी इलेवन ने इस तीन दिवसीय अभ्यास मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने एक्स पर पोस्ट किया, ''कप्तान शुभमन गिल की दाहिनी अनामिका उंगली में बृहस्पतिवार को भारत के अभ्यास सत्र के दौरान चोट लग गई। एहतियात के तौर पर वह एसएलसी इलेवन के खिलाफ अभ्यास मैच के पहले दिन मैदान पर नहीं उतरेंगे।'' बोर्ड ने कहा, ''बीसीसीआई की मेडिकल टीम उनकी स्थिति पर नजर रख रही है। गिल की अनुपस्थिति में केएल राहुल टीम की कप्तानी करेंगे।'' भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से गॉल में दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला का पहला मैच खेला जाएगा। दूसरा टेस्ट मैच 23 अगस्त से कोलंबो के इसी मैदान पर होगा।
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नई दिल्ली। हॉकी इंडिया ने शुक्रवार को एएचएफ जूनियर एशिया कप 2026 के लिए भारतीय पुरुष टीम का ऐलान कर दिया है। चीन के मोकी में 30 अगस्त से 13 सितंबर तक होने वाले इस टूर्नामेंट के लिए 18 खिलाड़ियों का चुनाव किया गया है, जबकि दो वैकल्पिक प्लेयर्स को भी टीम में रखा गया है। टीम की कमान अनमोल एक्का के हाथों में सौंपी गई है।
डिफेंडर अनमोल एक्का की कप्तानी वाली यह टीम अभी बेंगलुरु में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) सेंटर में नए कोच फ्रेडरिक सोयेज की देखरेख में ट्रेनिंग कर रही है। टूर्नामेंट की तैयारी के हिस्से के तौर पर टीम ने हाल ही में बेल्जियम का एक शानदार एक्सपोजर दौरा पूरा किया, जहां टीम की भिड़ंत मजबूत इंटरनेशनल टीमों से हुई थी। इस दौरे से खिलाड़ियों को मैच का कीमती अनुभव और अहम सीख मिली, जिससे टीम अपनी प्रगति का आकलन कर सकी, अपने कॉम्बिनेशन को बेहतर बना सकी और एएचएफ जूनियर एशिया कप से पहले अपनी तैयारियों को और मजबूत कर सकी।टीम बेंगलुरु में साई सेंटर पर मलेशियाई अंडर 21 टीम के साथ फ्रेंडली मैच खेलकर और भी ज्यादा प्रतिस्पर्धी अनुभव हासिल कर रही है। टीम के चयन पर बात करते हुए कोच सोयेज ने कहा, “हम जूनियर एशिया कप के लिए चुनी गई टीम के संतुलन और गहराई से खुश हैं। खिलाड़ियों ने पिछले कुछ महीनों में कड़ी मेहनत की है और प्रतिबद्धता, अनुशासन और सुधार की जबरदस्त इच्छाशक्ति दिखाई है। चयन लगातार अच्छे प्रदर्शन, रवैये और दबाव में हमारे गेम प्लान को लागू करने की क्षमता के आधार पर किया गया है।”एएचएफ जूनियर एशिया कप एशिया की प्रमुख जूनियर हॉकी प्रतियोगिताओं में से एक है, जो महाद्वीप की शीर्ष उभरती टीमों को एक बेहद प्रतिस्पर्धी माहौल में एक साथ लाती है। यह टूर्नामेंट भारत की युवा टीम को एशिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों के खिलाफ खुद को परखने और अपनी मजबूत छाप छोड़ने का मौका देगा।सोयेज ने आगे कहा, “यह एक बहुत ही प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट होगा और हम सभी टीमों का सम्मान करते हैं। हमारा ध्यान अपने स्ट्रक्चर पर कायम रहते हुए अनुशासित और अटैकिंग हॉकी खेलने पर होगा।” खिलाड़ियों के विकास में टूर्नामेंट के महत्व पर जोर देते हुए कोच ने कहा, “यह टूर्नामेंट खिलाड़ियों के विकास की दिशा में भी एक अहम कदम है, और हमें भरोसा है कि इस ग्रुप में जबरदस्त प्रदर्शन करने और देश का नाम रोशन करने की क्षमता है।”जूनियर एशिया कप के लिए भारतीय पुरुष टीम:गोलकीपर: विवेक लाकड़ा, कुणाल तेवतियाडिफेंडर: अनमोल एक्का (कप्तान), रोहित कुल्लू, चिराग, रविंदर, आशु मौर्य, संजीत टिर्की, सुखविंदरमिडफील्डर: अड्रोहित एक्का, हरपाल, जीतपाल, मनमीत सिंह रायफॉरवर्ड: अजीत यादव, प्रभदीप सिंह, गुरसेवक सिंह, आर्यन जेस, लोवेनूर सिंहवैकल्पिक खिलाड़ी: अर्जुन संतोष हरगुडे, रितिक लाकड़ा। -
नयी दिल्ली. फिटनेस से जुड़ी परेशानियों से करीब एक साल तक जूझने के बाद भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने कहा कि पिछले 10 महीने उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहे और उन्होंने ऐसे दौर का सामना किया, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी। दो बार के ओलंपिक पदक विजेता 28 साल के इस खिलाड़ी ने पिछले सप्ताह राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतकर अपने पदकों के संग्रह में एक और उपलब्धि जोड़ी। वह मुख्य रूप से जांघ की मांसपेशियों की चोट और कुछ अन्य शारीरिक परेशानियों से प्रभावित रहे थे। चोट के कारण नीरज का सत्र देर से शुरू हुआ, लेकिन उन्होंने ग्लास्गो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में 85.83 मीटर के सत्र के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ अपनी लय हासिल कर ली। नीरज ने मंगलवार को इंस्टाग्राम पर राष्ट्रमंडल खेलों के प्रदर्शन का वीडियो साझा करते हुए लिखा, ''कुछ भाले लंबी दूरी तय करते हैं और कुछ पल पूरी यात्रा का भार अपने साथ लेकर आते हैं। पिछले 10 महीने ने मेरी ऐसी परीक्षा ली, जिसकी मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी।'' उन्होंने कहा, ''कई चोटों से उबरना, अपने शरीर को दोबारा मजबूत बनाना, फिर से लय हासिल करना और उस समय धैर्य रखना जब मैं केवल प्रतियोगिता में उतरना चाहता था। मैं हर दिन अभ्यास कर रहा था, लेकिन यह भी नहीं पता था कि इस साल मुझे खेलने का मौका मिलेगा या नहीं।'' नीरज ने 2018 में ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में 86.47 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन चोट के कारण 2022 के सत्र में हिस्सा नहीं ले सके थे। पिछले साल सितंबर में विश्व चैंपियनशिप से ठीक पहले उन्हें कमर के निचले हिस्से में चोट लगी थी और राष्ट्रमंडल खेलों से पहले उन्होंने केवल एक प्रतियोगिता में भाग लिया था। ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में खराब मौसम के कारण मुश्किल परिस्थितियों के बीच नीरज को श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिराजे 89.75 मीटर के थ्रो के साथ पीछे छोड़ा। पथिराजे मौजूदा सत्र में सबसे अधिक दूरी तक भाला फेंकने वाले खिलाड़ी है। पूर्व विश्व चैंपियन नीरज ने अपनी वापसी में मदद करने वाले सहयोगी दल के प्रति आभार जताते हुए कहा, ''इस स्तर पर दोबारा प्रतिस्पर्धा करना अच्छा लग रहा है। यह सब कुछ अकेले संभव नहीं था। मैं उन लोगों का दिल से आभारी हूं, जिन्होंने हमेशा मेरा विश्वास बनाए रखा।" उन्होंने अपने फिजियो ईशान मारवाहा और कोच जय चौधरी का विशेष रूप से धन्यवाद किया। नीरज ने कहा, "ईशान जी चोट से उबरने के दौरान हर कदम पर मेरे साथ रहे और मुझे फिर से वह करने में मदद की, जिसे मैं सबसे ज्यादा पसंद करता हूं। मेरे कोच जय चौधरी उस समय से मेरे साथ हैं, जब मैंने पहली बार भाला उठाया था।" उन्होंने कहा, '' मेरा परिवार हर परिस्थिति में मेरे साथ मजबूती से खड़ा रहा। सत्र अभी जारी है और मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा हूं।
- नयी दिल्ली ।' राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय जूडोका अस्मिता डे ने कहा कि उन्हें शुरू से पूरा भरोसा था कि वह देश के लिए इतिहास रचेंगी और यही अटूट आत्मविश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ। अस्मिता ने मंगलवार को केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया के आवास पर आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेताओं के सम्मान समारोह के दौरान कहा, ''ग्लास्गो रवाना होने से पहले मेरे मन में सिर्फ एक ही लक्ष्य था कि मुझे स्वर्ण पदक जीतना है। मैं खुद से लगातार कहती रही कि मैं स्वर्ण पदक के साथ भारत लौटूंगी।'' अपने सफल अभियान पर अस्मिता ने कहा कि फाइनल मुकाबले में एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें लगा कि स्वर्ण पदक हाथ से निकल सकता है, लेकिन कोच यशपाल सोलंकी के उत्साहवर्धन ने उनका आत्मविश्वास लौटाया। उन्होंने कहा, ''फाइनल में मेरा मुकाबला कनाडा की खिलाड़ी से था। वह रैंकिंग में मुझ से थोड़ी नीचे है इसलिए मुकाबला बेहद कड़ा था। जब उसने मेरे खिलाफ अंक हासिल किया तो कुछ क्षण के लिए लगा कि शायद मैं हार जाऊंगी।'' अस्मिता ने बताया, '' मेरे कोच यशपाल सोलंकी लगातार कहते रहे कि यह स्वर्ण पदक हमारा है और मुझे हर हाल में जीतना है। उनके शब्दों से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा। मैंने अधिक आक्रामक खेल दिखाया, स्कोर बराबर किया और मुकाबला 'गोल्डन स्कोर' तक पहुंच गया। वहां मैंने पहला अंक हासिल कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।'' अपनी सफलता के सबसे बड़े कारण पर अस्मिता ने कहा कि जूडो जैसे तकनीकी खेल में शारीरिक क्षमता से अधिक मानसिक मजबूती निर्णायक भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा, ''हम सभी खिलाड़ी लगभग एक जैसी ट्रेनिंग करते हैं। मेरे भार वर्ग में भारत की कई खिलाड़ी समान स्तर का अभ्यास करती हैं। असली अंतर मानसिकता का होता है। प्रतियोगिता के दबाव को कौन बेहतर ढंग से संभालता है, किसमें अधिक आत्मविश्वास और खुद पर भरोसा होता है, यही सफलता तय करता है। शारीरिक रूप से दूसरे खिलाड़ी भी मेरे जितने मजबूत हो सकते हैं, लेकिन अंततः मजबूत मानसिकता ही जीत दिलाती है।''
- बेंगलुरु। शुभमन गिल की कप्तानी में भारतीय टीम श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैच की श्रृंखला के लिए मंगलवार को कोलंबो पहुंची लेकिन टीम में शीर्ष क्रम के बल्लेबाज बी साई सुदर्शन शामिल नहीं थे। सुदर्शन यहां भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) में मेडिकल स्टाफ की देखरेख में चोट से उबर रहे हैं। भारतीय टीम 15 अगस्त से शुरू होने वाले पहले टेस्ट के लिए गॉल जाने से पहले सात अगस्त से कोलंबो के नॉनडेस्क्रिप्ट्स क्रिकेट क्लब में तीन दिन का अभ्यास मैच खेलेगी। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया, ''सुदर्शन सीओई में ट्रेनिंग कर रहे हैं और पैर की अंगुली की चोट से उबरने की प्रक्रिया के दौरान एक घंटे से अधिक समय तक नेट पर बल्लेबाजी कर रहे हैं। उनके खेलने पर अंतिम फैसला लेने से पूर्व अगले तीन-चार दिन तक उनकी स्थिति की जांच जारी रहेगी।'' सुदर्शन को हाल ही में भारत ए के श्रीलंका दौरे के दौरान यह चोट लगी थी।सूत्र ने कहा, ''यह पक्का करना जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लौटने से पहले वह पूरी तरह फिट हो जाएं। हम ऐसी स्थिति नहीं चाहते जैसी (हर्षित) राणा के साथ हुई थी जो शीर्ष स्तर के क्रिकेट में लौटने के तुरंत बाद फिर से चोटिल हो गए थे।'' दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो में खेला जाएगा और मेडिकल स्टाफ को उम्मीद है कि सुदर्शन उस मैच के लिए टीम के साथ जुड़ सकेगा क्योंकि उन्होंने सीओई में नेट पर बल्लेबाजी शुरू कर दी है।
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नई दिल्ली। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने भारत दौरे के लिए ऑस्ट्रेलिया-ए महिला टीम की घोषणा कर दी है। अनुभवी तेज गेंदबाज डार्सी ब्राउन और टायला व्लामिंक टीम की अगुवाई करेंगी। यह दौरा 12 सितंबर से शुरू होगा।
तीन सप्ताह के इस दौरे में न्यू चंडीगढ़ में तीन टी20 मुकाबले, मोहाली में तीन एकदिवसीय मैच और धर्मशाला में एक चार दिवसीय मुकाबला खेला जाएगा।यह दौरा टायला व्लामिंक के लिए शीर्ष स्तर की क्रिकेट में वापसी का अवसर होगा। पिछले कुछ वर्षों में वह लगातार चोटों से जूझती रही हैं। वहीं, डार्सी ब्राउन दौरे के सीमित ओवरों के मुकाबलों में हिस्सा लेंगी।टीम की कप्तानी अलग-अलग प्रारूपों में अलग खिलाड़ियों को सौंपी गई है। तहलिया विल्सन मोहाली में खेले जाने वाले 50 ओवर के मैचों में टीम की कप्तानी करेंगी। निकोल फाल्टम टी20 टीम की कप्तान होंगी, जबकि रेचल ट्रेनामन चार दिवसीय मुकाबले में टीम का नेतृत्व करेंगी।व्लामिंक को 2024 टी20 विश्व कप के दौरान पहले ही मैच में फील्डिंग करते समय कंधे में गंभीर चोट लगी थी। लगातार चोटों के कारण अप्रैल में उनका क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का केंद्रीय अनुबंध भी समाप्त हो गया था।वहीं, डार्सी ब्राउन को 2024 टी20 विश्व कप के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम में जगह नहीं मिली थी। उनकी जगह लूसी हैमिल्टन को शामिल किया गया था।राष्ट्रीय चयनकर्ता शॉन फ्लेगलर ने कहा कि ब्राउन और व्लामिंक जैसी अनुभवी गेंदबाजों की मौजूदगी युवा खिलाड़ियों के लिए सीखने का बेहतरीन अवसर होगी। उन्होंने कहा कि भारतीय परिस्थितियों में खेलने का अनुभव खिलाड़ियों के अंतरराष्ट्रीय करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।ऑस्ट्रेलिया-ए टीम के मुख्य कोच गैवन ट्वाइनिंग होंगे। उनके साथ मिक डिलेनी और कैमरून बॉयस सहायक कोच की भूमिका निभाएंगे।भारत दौरे के लिए ऑस्ट्रेलिया-ए महिला टीम:डार्सी ब्राउन, मेटलन ब्राउन, निकोल फाल्टम, टेस फ्लिंटॉफ, सियाना जिंजर, चार्ली नॉट, अनिका लिरॉयड, केटी मैक, लिली मिल्स, फ्रेंकी निक्लिन, हेले सिल्वर-होल्म्स, रेचल ट्रेनामन, कोर्टनी वेब, तहलिया विल्सन और टायला व्लामिंक। -
नयी दिल्ली. जम्मू कश्मीर के तेज गेंदबाज औकिब नबी को चोटिल जसप्रीत बुमराह की जगह सोमवार को श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैच की श्रृंखला के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया। इस तरह से वह भारत की टेस्ट टीम में जगह बनाने वाले कश्मीर घाटी के पहले खिलाड़ी बन गए हैं।
बुमराह को फिटनेस के आधार पर टेस्ट टीम में शामिल किया गया था लेकिन वह इंग्लैंड के खिलाफ वनडे श्रृंखला के दौरान बाएं घुटने में लगी चोट से अभी तक पूरी तरह नहीं उबर पाने के कारण श्रीलंका दौरे से बाहर हो गए हैं। नबी को पहली बार सीनियर राष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया है।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने एक बयान में कहा, ''पुरुष चयन समिति ने बुमराह के स्थान पर औकिब नबी को टीम में शामिल किया है। जम्मू और कश्मीर के इस तेज गेंदबाज को पहली बार सीनियर राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है।'' कश्मीर के बारामूला के एक गांव के रहने 29 वर्षीय नबी जम्मू कश्मीर के तीसरे खिलाड़ी हैं जिन्हें भारत की सीनियर टीम में चुना गया है। उनसे पहले परवेज़ रसूल और उमरान मलिक को सीमित ओवरों के लिए सीनियर राष्ट्रीय टीम में चुना गया था। रसूल और मलिक सीमित ओवरों के प्रारूप में भारत के लिए खेल चुके हैं। नबी ने पिछले दो रणजी ट्रॉफी सत्र में कुल 104 विकेट लिए थे, जिनमें 2025-26 सत्र में लिए गए 60 विकेट भी शामिल हैं। उन्होंने जम्मू कश्मीर को पहली बार रणजी ट्रॉफी जिताने में अहम भूमिका निभाई थी। वह बल्लेबाजी में भी उपयोगी योगदान देने में सक्षम हैं। वह हाल ही में श्रीलंका दौरे पर गई भारत ए टीम का भी हिस्सा थे, जहां उन्होंने दो प्रथम श्रेणी मैचों में छह विकेट लिए थे। तेज गेंदबाज बुमराह को इस श्रृंखला से बाहर होना पड़ा क्योंकि उनके घुटने में सूजन ज्यादा गंभीर निकली। बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्पोर्ट्स साइंस टीम ने भारतीय टीम के आगामी व्यस्त कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए इस अनुभवी तेज गेंदबाज की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी में किसी तरह की जल्दबाजी दिखाने से परहेज किया। यह 32 वर्षीय तेज गेंदबाज चोट लगने के कारण पिछले महीने लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में नहीं खेल पाए थे। शीर्ष क्रम के बल्लेबाज बी साई सुदर्शन को भी श्रीलंका दौरे के लिए फिटनेस के आधार पर टीम ने चुना गया है क्योंकि वह अभी भी उस पैर की चोट से उबर रहे हैं। श्रीलंका में दो मैचों की टेस्ट श्रृंखला 15 अगस्त को गॉल में शुरू होगी।
श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला के लिए भारतीय टीम: शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), साई सुदर्शन, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रविंद्र जड़ेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन, औकिब नबी। -
नयी दिल्ली. भारत के शीर्ष तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह घुटने की चोट से पूरी तरह नहीं उबर पाने के कारण श्रीलंका के दो टेस्ट मैचों के दौरे से बाहर रह सकते हैं। जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को भारतीय सीनियर टीम में पहली बार शामिल किए जाने की पूरी संभावना है। नबी सीनियर राष्ट्रीय टीम में जगह पाने वाले जम्मू-कश्मीर के तीसरे खिलाड़ी होंगे। इससे पहले परवेज रसूल और उमरान मलिक को सीमित ओवरों की भारतीय टीम में बुलावा मिल चुका है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड के एक सूत्र ने पीटीआई से कहा, ''बुमराह फिट नहीं हैं और उनकी जगह आकिब नबी के नाम को मंजूरी दे दी गई है। '' आकिब ने पिछले दो रणजी ट्रॉफी सत्र में 100 से अधिक विकेट लिए हैं और जम्मू-कश्मीर के लाल गेंद के क्रिकेट में शानदार सफलता के सूत्रधार रहे हैं। वह निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी करने में भी सक्षम हैं। बुमराह के घुटने में सूजन शुरुआत में जितनी सामान्य लग रही थी उससे अधिक गंभीर प्रतीत हो रही है। ऐसे में बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की खेल विज्ञान टीम इस अनुभवी तेज गेंदबाज को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की कड़ी चुनौती में जल्दबाजी में उतारने के पक्ष में नहीं है क्योंकि आगे का कार्यक्रम काफी व्यस्त है। बीसीसीआई के एक सूत्र ने बताया, '' सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) का संचालन करने वाले धनंजय और तुलसी ने फैसला किया है कि बुमराह को जोखिम में नहीं डाला जा सकता। हालांकि शुरुआत में टीम प्रबंधन और चयन समिति को यह विश्वास दिलाया गया था कि बुमराह कम से कम दो टेस्ट मैच में से एक के लिए उपलब्ध रह सकते हैं। '' श्रीलंका के खिलाफ श्रृंखला की शुरुआत 15 अगस्त से गॉल में होगी।
इंग्लैंड के खिलाफ 32 वर्षीय बुमराह लॉर्ड्स में खेले गए तीसरे एकदिवसीय मैच में चोटिल होने के बाद नहीं खेल पाए थे। वह हाल ही में बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पहुंचे थे और उम्मीद थी कि दो सप्ताह बाद शुरू होने वाली श्रृंखला तक वह मैच के लिए फिट हो जाएंगे। हालांकि पता चला है कि बुमराह को अब भी कुछ परेशानी महसूस हो रही है। अगर वह 15 अगस्त या 23 अगस्त से शुरू होने वाले दूसरे टेस्ट से पहले फिट भी हो जाते हैं तो भी चिकित्सा टीम इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं है कि धीमी पिचों पर गेंदबाजी के अधिक बोझ को देखते हुए टेस्ट क्रिकेट उनके लिए सही प्रारूप होगा। टीम में बुमराह की जगह के लिए नबी को हालांकि विदर्भ के यश ठाकुर से चुनौती मिलती दिख रही है।
नितीश कुमार रेड्डी (पैर की मांसपेशियों में खिंचाव), हर्षित राणा (पैर की मांसपेशियों में खिंचाव) और वाशिंगटन सुंदर (पैर की मांसपेशियों में खिंचाव) पहले ही चोटों से जूझ रहे हैं। वाशिंगटन कम से कम पहले टेस्ट में नहीं खेल पाएंगे। बी साई सुदर्शन के मामले में वह फिलहाल सीओई में रोज़ाना करीब 75 मिनट तक नेट्स में बल्लेबाजी कर रहे हैं और हाल में श्रीलंका में भारत ए की श्रृंखला के दौरान लगी पैर की चोट से धीरे-धीरे उबर रहे हैं। अगले कुछ दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि वह श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला के लिए उपलब्ध रहेंगे या नहीं। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रमंडल खेल 2026 की पदक तालिका (रात 08:40 बजे तक) में भारत 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य सहित कुल 39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर है। भारत कुल पदकों की संख्या में मेजबान स्कॉटलैंड के साथ बराबरी पर है, लेकिन अधिक रजत पदकों के आधार पर वह आगे है। ऑस्ट्रेलिया 69 स्वर्ण, 43 रजत और 54 कांस्य सहित कुल 166 पदकों के साथ शीर्ष है। इंग्लैंड 29 स्वर्ण, 43 रजत और 36 कांस्य सहित 108 पदकों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि कनाडा 18 स्वर्ण, 20 रजत और 23 कांस्य पदकों के साथ तीसरे स्थान पर है। पदक तालिका में शीर्ष-10 देश इस प्रकार हैं:
स्थान देश स्वर्ण रजत कांस्य कुल पदक--
1 ऑस्ट्रेलिया 69 43 54 166
2 इंग्लैंड 29 43 36 108
3 कनाडा 18 20 23 61
4 भारत 13 17 9 39
5 स्कॉटलैंड 13 9 17 39
6 नाइजीरिया 10 7 7 24
7 जमैका 10 4 5 19
8 न्यूजीलैंड 9 13 10 32
9 वेल्स 8 10 12 30
10 मलेशिया 8 3 5 16 -
नयी दिल्ली. अंकुर भट्टाचार्जी ने रविवार को 22वीं राष्ट्रमंडल टेबल टेनिस चैंपियनशिप का पुरुष और यशस्विनी घोरपड़े ने महिला एकल खिताब अपने नाम किया। अंकुर ने जहां कड़े मुकाबले में जीत दर्ज की, वहीं यशस्विनी ने प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए खिताब पर कब्जा जमाया। पुरुष एकल फाइनल में अंकुर ने रोमांचक मुकाबले में पायस जैन को 4-3 (11-8, 9-11, 7-11, 11-8, 4-11, 11-4, 11-9) से हराकर खिताब जीता। निर्णायक गेम में पायस ने 7-4 की बढ़त बनाकर जीत की ओर कदम बढ़ा दिए थे, लेकिन अंकुर ने शानदार वापसी करते हुए स्कोर 8-8 से बराबर किया और फिर 10-9 की बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद पायस का रिटर्न बाहर जाने से अंकुर ने निर्णायक गेम 11-9 से जीतकर खिताब अपने नाम कर लिया। महिला एकल फाइनल में यशस्विनी ने एकतरफा अंदाज में श्रीजा अकुला को 4-1 (11-6, 11-1, 8-11, 11-7) से हराया। भारत ने इस चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगभग सभी स्वर्ण पदक अपने नाम किए। मेजबान टीम को एकमात्र निराशा पुरुष युगल वर्ग में मिली, जहां मलेशिया के शेन क्यू वोंग और जावेन चोंग की जोड़ी ने फाइनल में भारत के मानव ठक्कर और मनुष शाह को 11-9, 12-10, 11-7 से हराकर खिताब जीता। महिला युगल का फाइनल पूरी तरह भारतीय रहा, जिसमें श्रीजा अकुला और सिंड्रेला दास ने यशस्विनी घोरपड़े और दिव्यांशी भौमिक को 3-1 (11-8, 11-13, 11-8, 11-6) से हराकर खिताब जीता। मिश्रित युगल फाइनल में भारत के मानव ठक्कर और तनीषा कोटेचा ने शानदार वापसी करते हुए मलेशिया की ऐ जिन और रिचर्ड रुई की जोड़ी को 3-2 (11-8, 10-12, 10-12, 11-9, 11-5) से हराकर खिताब अपने नाम किया।
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नयी दिल्ली. स्टार भारोत्तोलक सेखोम मीराबाई चानू और लवप्रीत सिंह सहित राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय खिलाड़ियों के पहले दल का रविवार को यहां स्वदेश लौटने पर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सैकड़ों प्रशंसकों ने जोरदार स्वागत किया। ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई ने महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में राष्ट्रमंडल खेलों का लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीता। मीराबाई ने हवाई अड्डे पर पीटीआई से कहा, ''मणिपुर से होने के नाते मुझे इस बात पर बहुत गर्व है कि मैं अपने देश के लिए कुछ अच्छा कर सकी।'' पुरुषों के 109 किग्रा से अधिक वर्ग में एक किग्रा के मामूली अंतर से स्वर्ण पदक से चूककर रजत पदक जीतने वाले लवप्रीत सिंह ने कहा कि उनका अगला लक्ष्य जापान में होने वाले एशियाई खेल हैं। पंजाब के 28 वर्षीय लवप्रीत ने कहा, ''मैं भारतीय नौसेना, अपने कप्तान विजय कुमार और यहां स्वागत के लिए आए सभी लोगों का धन्यवाद करना चाहता हूं।'' उन्होंने कुल 388 किग्रा वजन उठाया जिसमें 'स्नैच' में राष्ट्रमंडल खेलों का रिकॉर्ड 176 किग्रा वजन भी शामिल है। लवप्रीत ने कहा, ''ऐसा हो जाता है (स्वर्ण से चूकना) लेकिन मैंने कड़ी मेहनत की और उसका परिणाम मिला। जब दो खिलाड़ी मुकाबला करते हैं तो एक को हारना पड़ता है। अब मैं एशियाई खेलों की अच्छी तैयारी करूंगा।'' भारतीय भारोत्तोलकों ने अपने अभियान का समापन एक स्वर्ण, छह रजत और एक कांस्य सहित कुल आठ पदक के साथ किया। महिलाओं के 58 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीतने वाली बिंदयारानी देवी सोरोखेबम ने कहा, ''जिस तरह सभी ने हमारा स्वागत किया है, उससे बहुत अच्छा लग रहा है। सभी का धन्यवाद, आपने घर जैसा अहसास कराया।'' उन्होंने कहा, ''आने वाली प्रतियोगिताओं के लिए मैं पहले से भी अधिक कड़ी मेहनत करूंगी।''
पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने वाले ऋषिकांत सिंह ने कहा कि अगली बार वह स्वर्ण पदक जीतने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा, ''भारत के लिए पदक जीतकर अच्छा लग रहा है। मैं अपने प्रदर्शन के बारे में पहले ही बात कर चुका हूं, लेकिन अगली बार और मजबूत वापसी करूंगा तथा बेहतर प्रदर्शन करूंगा।'' इम्फाल में जन्मे भारतीय सेना के भारोत्तोलक ऋषिकांत ने अपने गृह राज्य मणिपुर में शांति की अपील करते हुए कहा कि इससे राज्य से और अधिक प्रतिभाशाली खिलाड़ी निकलेंगे। उन्होंने कहा, ''मेरे लिए नौसेना और मैतेई दोनों समान हैं। मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि मणिपुर में शांति होनी चाहिए ताकि वहां से मुझसे भी बेहतर खिलाड़ी निकल सकें।'' भारतीय भारोत्तोलन टीम के मुख्य राष्ट्रीय कोच विजय शर्मा ने कहा, ''यहां जिस तरह हमारा स्वागत किया गया, उससे हमें बहुत गर्व महसूस हो रहा है। सभी लोग बहुत खुश हैं। मैं अपने खिलाड़ियों के प्रदर्शन से बेहद खुश हूं।'' उन्होंने कहा, ''कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां हम पीछे रह गए और हमें उन पर काम करने की जरूरत है ताकि अपने रजत पदक का रंग स्वर्ण में बदला जा सके। लेकिन खेलों में ऐसा होता है। कुल मिलाकर परिणाम अच्छे रहे हैं और हम खुश हैं।'' शर्मा ने मीराबाई चानू की लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतने के लिए जमकर प्रशंसा की।
उन्होंने कहा, ''मीराबाई एक असाधारण खिलाड़ी हैं। अपने अनुशासन के कारण वह इस तरह के परिणाम हासिल कर पाती हैं। हम एशियाई खेलों की तैयारी कर रहे हैं और मुझे लगता है कि वहां भी हम पदक जीतेंगे।'' महिलाओं के 69 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने वाली हरजिंदर कौर ने कहा कि उनका लक्ष्य अगले राष्ट्रमंडल खेलों में अपने रजत पदक को स्वर्ण में बदलना है। उन्होंने कहा, ''मेरा लक्ष्य अहमदाबाद में होने वाले अगले राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक को स्वर्ण पदक में बदलना है।'' पुरुषों के 65 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने वाले राजा मुथुपांडी ने कहा कि पोडियम पर जगह बनाना कई सर्जरी और लंबे संघर्ष के बाद वर्षों की मेहनत का परिणाम है। मुथुपांडी ने कहा, ''मैं 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में भी उतरा था लेकिन तब पदक नहीं जीत पाया। उस समय मुझे बहुत बुरा लगा था। इसके बाद मैंने इस पदक के लिए काफी मेहनत की।'' उन्होंने कहा, ''मैं स्वर्ण पदक जीतने की कोशिश कर रहा था लेकिन उस दिन मेरा प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा। फिर भी मुझे खुशी है कि मैंने पहली बार भारत के लिए पदक जीता।'' उन्होंने कहा, ''एक खिलाड़ी के तौर पर मेरी दो-तीन सर्जरी हुई हैं। हर सर्जरी के बाद मैंने और मेरे कोच ने वापसी की योजना बनाई और चरणबद्ध तरीके से काम किया। इतने संघर्ष के बाद वापसी करके पदक जीतने का अहसास बेहद खास होता है।'' मुथुपांडी ने कहा कि अब उनका पूरा ध्यान एशियाई खेलों और 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक पर है। उन्होंने कहा, ''एशियाई खेल आने वाले हैं और उसके बाद ओलंपिक है। ओलंपिक क्वालीफिकेशन की प्रक्रिया अक्टूबर से शुरू होगी। हम अपने कोच विजय शर्मा सर के साथ बैठकर पूरी योजना बनाएंगे और सभी क्वालीफिकेशन प्रतियोगिताओं तथा चरणों की तैयारी करेंगे।'' एक अन्य रजत पदक विजेता वल्लुरी अजय बाबू ने कहा कि कड़े मुकाबले के दबाव से निपटने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और अब उनका लक्ष्य लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना है। उन्होंने कहा, ''मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है। यह मेरे पहले राष्ट्रमंडल खेल थे और मेरे लिए शानदार अनुभव रहा। मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा। मैं स्वर्ण पदक से चूक गया, लेकिन कोई बात नहीं। मैं अच्छी तैयारी करूंगा और कड़ी मेहनत करूंगा।'' अजय बाबू ने कहा, ''मुकाबला केवल एक किग्रा के अंतर से तय हुआ, इसलिए दबाव था। लेकिन मैंने उस दबाव में भी अच्छा प्रदर्शन किया और मुझे अच्छा लगा। मैं यह पदक अपने कोच और अपने पिता को समर्पित करना चाहता हूं। मैं 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक और 2030 राष्ट्रमंडल खेलों के लिए क्वालीफाई करने का प्रयास करूंगा।'' महिलाओं के 86 किग्रा से अधिक वर्ग में पांचवें स्थान पर रहीं मार्टिना देवी ने अपने पहले राष्ट्रमंडल खेल अभियान को सीखने वाला अनुभव बताया। उन्होंने कहा, ''राष्ट्रमंडल खेल मेरे लिए सीखने का अच्छा अवसर रहे। मैं भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करूंगी। हवाई अड्डे पर जिस गर्मजोशी से हमारा स्वागत किया जा रहा है, उसे देखकर बहुत अच्छा लग रहा है।'' भारत फिलहाल पदक तालिका में 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य सहित कुल 39 पदक के साथ चौथे स्थान पर है। -
नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए 10वां दिन ऐतिहासिक रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने एक ही दिन में बॉक्सिंग के 10 मेडल समेत कुल 16 मेडल अपने नाम किए। इस शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत ने मेडल टैली में छह पायदान की लंबी छलांग लगाई और 13 गोल्ड, 17 सिल्वर तथा 9 ब्रॉन्ज मेडल के साथ चौथे स्थान पर पहुंच गया। भारत के कुल मेडल की संख्या अब 39 हो गई है।
मेडल टैली में ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर बना हुआ है। उसके खाते में 61 गोल्ड, 38 सिल्वर और 50 ब्रॉन्ज समेत कुल 149 मेडल हैं। इंग्लैंड 25 गोल्ड, 40 सिल्वर और 34 ब्रॉन्ज के साथ कुल 99 मेडल लेकर दूसरे स्थान पर है, जबकि कनाडा 18 गोल्ड समेत कुल 57 मेडल के साथ तीसरे नंबर पर काबिज है। भारत की शानदार छलांग का असर मेजबान स्कॉटलैंड की रैंकिंग पर भी पड़ा है। 12 गोल्ड, 8 सिल्वर और 17 ब्रॉन्ज समेत कुल 37 मेडल के साथ स्कॉटलैंड पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। नाइजीरिया 10 गोल्ड समेत कुल 21 मेडल के साथ छठे, वेल्स 8 गोल्ड, 10 सिल्वर और 12 ब्रॉन्ज समेत 30 मेडल के साथ सातवें स्थान पर है। न्यूजीलैंड 8 गोल्ड के साथ कुल 27 मेडल लेकर आठवें स्थान पर मौजूद है।10वें दिन भारतीय मुक्केबाजों ने सबसे दमदार प्रदर्शन किया। बॉक्सिंग में भारत ने कुल 10 मेडल जीते, जिनमें 7 गोल्ड शामिल रहे। पुरुष वर्ग में अंकुश पंघाल और सचिन सिवाच ने गोल्ड मेडल अपने नाम किए। महिला वर्ग में जैस्मिन लैम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस, अरुंधति चौधरी और प्रीति ने स्वर्ण पदक जीते। भारतीय बॉक्सरों के शानदार प्रदर्शन में तीन सिल्वर मेडल भी शामिल रहे। जदुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल ने अपनी-अपनी स्पर्धाओं में रजत पदक जीतकर भारत की मेडल संख्या में इजाफा किया।एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। पुरुषों की ट्रिपल जंप स्पर्धा में प्रवीण चित्रावेल ने सिल्वर मेडल जीता, जबकि सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने ब्रॉन्ज पदक अपने नाम किया। दोनों के प्रदर्शन से भारत की एथलेटिक्स में पदक संख्या को मजबूती मिली।शॉट पुट में भी भारत को दो पदक मिले। सोमन राणा ने गोल्ड मेडल जीतकर भारत की पदक तालिका में एक और स्वर्ण जोड़ा, जबकि शुभम जुयाल ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इस तरह 10वें दिन बॉक्सिंग के अलावा एथलेटिक्स में भी भारत का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा। 10वें दिन 16 मेडल जीतने के बाद भारत ने प्रतियोगिता में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज के साथ भारत के कुल 39 मेडल हो गए हैं। भारतीय खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने प्रतियोगिता के अंतिम चरण में देश की पदक उम्मीदों को और मजबूत कर दिया है। ( - बेंगलुरु. भारतीय टी20 टीम के उपकप्तान तिलक वर्मा आगामी दलीप ट्रॉफी में दक्षिण क्षेत्र की अगुआई करेंगे जबकि आंध्र के अनुभवी बल्लेबाज रिकी भुई को उपकप्तान बनाया गया है। भारतीय टीम से बाहर चल रहे करुण नायर को भी टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा उभरते हुए भारत 'ए' के बल्लेबाज एसके रशीद भी टीम का हिस्सा हैं। कर्नाटक के आर स्मरण और हैदराबाद के के हिमतेजा को भी टीम में जगह मिली है।भारत 'ए' के पूर्व विकेटकीपर एन जगदीशन भी टीम में शामिल हैं।दलीप ट्रॉफी के लिए दक्षिण क्षेत्र की टीम:तिलक वर्मा (कप्तान), रिकी भुई (उपकप्तान), अभिनव तेजराना, एसके रशीद, के हिमतेजा, आर स्मरण, एन जगदीशन, करुण नायर, टी त्यागराजन, श्रेयस गोपाल, के साई तेजा, टी विजय, वी कावेरीप्पा और अमन खान।
- नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मेंस जैवलिन थ्रो के बाद मेंस ट्रिपल जंप में भी भारत ने दो मेडल अपने नाम किए। शनिवार को स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में हुए फाइनल में नेशनल रिकॉर्ड होल्डर प्रवीण चित्रवेल ने 16.58 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग के साथ सिल्वर मेडल जीता, जबकि युवा एथलीट सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने 16.52 मीटर की सीजन की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में महज तीन सेंटीमीटर से मेडल से चूके प्रवीण ने इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए पोडियम फिनिश हासिल किया। जमैका के जॉर्डन स्कॉट ने 16.72 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग के साथ गोल्ड मेडल जीता और प्रवीण से 14 सेंटीमीटर आगे रहे। प्रवीण ने प्रतियोगिता की शुरुआत 16.05 मीटर की छलांग से की। उनका दूसरा प्रयास 15.64 मीटर का रहा, जबकि तीसरे प्रयास में उन्होंने 16.31 मीटर तक सुधार किया। चौथे प्रयास में 16.58 मीटर की अपनी सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर उन्होंने सिल्वर मेडल की स्थिति मजबूत की। उनका पांचवां प्रयास 16.40 मीटर का रहा, जबकि अंतिम प्रयास फाउल रहा।21 वर्षीय सेल्वा प्रभु ने भी प्रतियोगिता के दौरान लगातार सुधार किया।उन्होंने 15.87 मीटर से शुरुआत की और दूसरे प्रयास में 16.17 मीटर तक पहुंचे। तीसरे राउंड में उन्होंने 16.43 मीटर की छलांग लगाई। चौथे प्रयास में फाउल के बाद सेल्वा ने पांचवें राउंड में 16.52 मीटर की शानदार छलांग लगाकर ब्रॉन्ज मेडल पक्का किया। उनका अंतिम प्रयास 16.08 मीटर का रहा। इससे पहले शुक्रवार देर रात भारतीय समयानुसार मेंस जैवलिन थ्रो में भी भारत ने दो मेडल हासिल किए थे। नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर मेडल जीता, जबकि यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर के थ्रो के साथ ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था।प्रवीण ने 2018 में खेलो इंडिया स्कूल गेम्स में गोल्ड और उसी साल यूथ ओलंपिक गेम्स में ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपनी पहचान बनाई थी। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन किया। एशियन इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2023 में उन्होंने सिल्वर मेडल जीतने के साथ नेशनल इंडोर रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद 17.37 मीटर की छलांग के साथ भारतीय आउटडोर नेशनल रिकॉर्ड बेहतर किया और हांग्जो एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता। मदुरै में जन्मे सेल्वा प्रभु ने 2022 वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। 2023 में वह एशियन एथलेटिक्स एसोसिएशन के ‘बेस्ट एशियन अंडर-20 मेल एथलीट ऑफ द ईयर’ चुने जाने वाले पहले भारतीय बने। इसी दौरान उन्होंने 16.79 मीटर की छलांग के साथ भारतीय अंडर-20 रिकॉर्ड भी तोड़ा।इस साल की शुरुआत में सेल्वा ने 17.05 मीटर की अपनी पर्सनल बेस्ट छलांग के साथ 17 मीटर का अहम आंकड़ा पार किया था। अब कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल उनके तेजी से आगे बढ़ते अंतरराष्ट्रीय करियर में एक और अहम उपलब्धि बन गया है।
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ग्लास्गो/ भारतीय महिला मुक्केबाजों ने अपेक्षाओं पर खरे उतरते हुए पांच स्वर्ण पदक जीते जबकि पुरूष वर्ग में सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल ने खिताब अपने नाम किये जिसके दम पर भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों की मुक्केबाजी स्पर्धा में शनिवार को अपने अभियान का समापन अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ किया । मौजूदा विश्व चैम्पियन जैसमीन लंबोरिया (57 किलो) , प्रीति पवार (54 किलो), साक्षी चौधरी (51 किलो) , अरूंधति चौधरी (70 किलो) , प्रिया घंघास (60 किलो) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने वजन वर्गों में स्वर्ण पदक जीते । वहीं ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (75 किलो) को रजत पदक से संतोष करना पड़ा ।
पुरूष वर्ग में सचिन सिवाच (60 किलो) और अंकुश (70 किलो) ने स्वर्ण पदक जीते जबकि 55 किग्रा वर्ग में जादूमणि सिंह और 90 प्लस किलो स्पर्धा में नरेंदर बेरवाल ने रजत पदक जीता । इससे पहले भारत ने गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेल 2018 में मुक्केबाजी में तीन स्वर्ण समेत सात पदक जीते थे । 'भारत माता की जय' और 'इंडिया इंडिया' के नारों के बीच एसएसी एरेना में भारतीय मुक्केबाजों को घर जैसा समर्थन मिला । अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किग्रा वजन वर्ग के फाइनल में इंग्लैंड के दिमेजी शिट्टू को हराकर भारत को सातवां स्वर्ण पदक दिलाया। अंकुश ने शिट्टू के खिलाफ 4-1 के विभाजित फैसले से जीत दर्ज की। सचिन सिवाच ने इससे पहले पुरुषों के 60 किग्रा वजन वर्ग के रोमांचक फाइनल में नामीबिया के ट्रायागेन मॉर्निंग एनडेवेलो को हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह भारत का छठा स्वर्ण पदक रहा। सचिन ने शुरुआती दो राउंड में पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए जीत हासिल की। उन्होंने तीसरे और अंतिम राउंड में एनडेवेलो को 'स्टैंडिंग काउंट' के लिए मजबूर कर दिया जिसके बाद भारतीय मुक्केबाज ने 3-2 के विभाजित फैसले में जीत दर्ज की। हालांकि ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन को महिलाओं के 70 किलोवर्ग के फाइनल में आस्ट्रेलिया की एम्मा सू ग्रीनट्री से खंडित फैसले में 4 . 1 से मिली हार से रजत पदक से संतोष करना पड़ा। अरूंधति ने इंग्लैंड की शेंटेले रीड को महिलाओं के 70 किलोवर्ग के फाइनल में 5 . 0 से हराया । नरेंदर को पुरूषों के 90 प्लस किलो में इंग्लैंड के डामार थॉमस ने 5 . 0 से हराया ।
प्रीति ने महिलाओं के 54 किग्रा फाइनल में कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को एकतरफा मुकाबले में 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद मौजूदा विश्व चैंपियन जैसमीन ने भी महिलाओं के 57 किग्रा वर्ग में उत्तरी आयरलैंड की गत चैंपियन माइकेला वॉल्श को 5-0 के समान अंतर से मात देकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। साक्षी ने फिर महिलाओं के 51 किग्रा फाइनल में इंग्लैंड की रूबी वाइट को 5-0 से हराकर दिन में भारत को मुक्केबाजी का तीसरा स्वर्ण पदक दिलाया। प्रिया को महिलाओं के 60 किग्रा में कनाडा की मैरी बाथोल अल अहमदिएह से कड़ी चुनौती मिली लेकिन भारतीय मुक्केबाज ने 4-1 के विभाजित फैसले से पहला स्थान हासिल किया। इससे पहले भारत के दिन के तीसरे मुकाबले में जादूमणि सिंह को ऑस्ट्रेलिया के जाई डिक्सन के खिलाफ कड़े संघर्ष के बाद 0-5 से हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक मिला। लंबे कद के ऑस्ट्रेलियाई प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ शुरुआत में संघर्ष करने के बाद जादूमणि ने शानदार वापसी करते हुए पहला राउंड 3-2 से अपने नाम किया। डिक्सन ने हालांकि दूसरे राउंड में जोरदार वापसी की और सभी जज के सर्वसम्मत फैसले से 5-0 से जीत दर्ज की। ऑस्ट्रेलियाई मुक्केबाज ने इस बढ़त को बरकरार रखते हुए मुकाबला अपने नाम किया और भारत की स्वर्णिम लय को रोक दिया। महिलाओं के 57 किग्रा फाइनल में जैसमीन और वॉल्श के बीच पहला राउंड बेहद करीबी रहा, जिसमें दोनों मुक्केबाजों ने एक-दूसरे को कड़ी चुनौती दी। जैसमीन ने यह राउंड विभाजित फैसले से अपने नाम किया। उन्होंने दूसरे राउंड में शानदार पंच लगाए और सर्वसम्मत फैसले से जीत दर्ज की।
प्रीति ने स्वर्ण पदक मुकाबले में आक्रामक शुरुआत की। उन्होंने पहला राउंड सर्वसम्मत फैसले से जीता, जिसमें पांचों जज ने भारतीय मुक्केबाज के पक्ष में 10-8 का स्कोर दिया। बैंथमवेट वर्ग की विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर काबिज प्रीति ने दूसरे राउंड में भी अपना दबदबा कायम रखा और शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए दिन का पहला स्वर्ण पदक हासिल किया।





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