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नयी दिल्ली. माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह मई में 3.2 प्रतिशत बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। यह वृद्धि वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति में सुधार तथा आयात से मिलने वाले कर संग्रह में लगातार बढ़ोतरी के कारण हुई। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई। मई, 2025 में सकल जीएसटी संग्रह 1.88 लाख करोड़ रुपये रहा था।
घरेलू लेनदेन से मई के दौरान केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) संग्रह 37,397 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) 45,143 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) 51,990 करोड़ रुपये रहा। इस अवधि में कर योग्य वस्तुओं की आपूर्ति में 26.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो घरेलू मांग को दर्शाती है। वहीं सेवाओं के क्षेत्र में यह वृद्धि 22.2 प्रतिशत रही जो घरेलू खपत की मजबूती को दिखाती है। आयात से आईजीएसटी संग्रह 19.1 प्रतिशत बढ़कर मई में 59,654 करोड़ रुपये हो गया जो औद्योगिक क्षमता के विस्तार का संकेत है। जीएसटी 'रिफंड' 2.6 प्रतिशत बढ़कर 27,281 करोड़ रुपये हो गया।
'रिफंड' समायोजित करने के बाद, मई में शुद्ध जीएसटी राजस्व 3.3 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.67 लाख करोड़ रुपये रहा। इससे पहले अप्रैल में जीएसटी संग्रह 2.43 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था।
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों (अप्रैल और मई) में कुल मिलाकर जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 6.2 प्रतिशत बढ़कर 4.37 लाख करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2025-26 की समान अवधि में यह 4.11 लाख करोड़ रुपये था। सूत्रों ने कहा, '' सालाना आधार पर यह संचयी प्रदर्शन अच्छा है और समूचे वर्ष के लिए तय जीएसटी राजस्व लक्ष्य को हासिल करने के अनुरूप है।'' सरकार ने चालू वित्त वर्ष में जीएसटी से 10.19 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।
आंकड़ों पर कर संबंधी सलाह देने वाली प्राइस वाटरहाउस एंड कंपनी एलएलपी के साझेदार प्रतीक जैन ने कहा कि अप्रैल और मई, 2026 को मिलाकर संग्रह में तुलनीय आधार पर 8.8 प्रतिशत की मजबूत सालाना वृद्धि दिखती है। उन्होंने कहा कि सितंबर, 2025 से दरों में तेज कटौती और पिछले कुछ महीनों में भू-राजनीतिक व्यवधानों के बावजूद यह वृद्धि हुई है। साथ ही, वस्तुओं और सेवाओं के आयात तथा घरेलू खपत में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है जो अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। वैश्विक पेशेवर सेवा कंपनी केपीएमजी के अप्रत्यक्ष कर प्रमुख एवं साझेदार अभिषेक जैन ने कहा, '' आयात जीएसटी में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है, लेकिन यह रुपये में गिरावट के कारण भी हो सकती है। आधार अवधि में दूरसंचार के एकबारगी भुगतान को समायोजित करने पर घरेलू संग्रह मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप मध्यम वृद्धि दर्शाता है। '' पेशेवर सेवा कंपनी डेलॉयट इंडिया के साझेदार एवं अप्रत्यक्ष कर प्रमुख महेश जे. ने कहा कि मई में घरेलू प्रदर्शन अपेक्षाकृत नरम रहा, जिसे अप्रैल के मजबूत आधार के संदर्भ में देखना चाहिए। हालांकि, जीएसटी 2.0 के तहत दरों के युक्तिकरण और सरलीकरण के उपाय बिना राजस्व पर बड़ा असर डाले खपत एवं मांग को समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी जीएसटी परिषद की बैठक से उद्योग जगत को उम्मीद है कि कारोबार सुगमता बढ़ाने और कार्यशील पूंजी को और मुक्त करने के उपाय किए जाएंगे। -
नयी दिल्ली. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत और ओमान के बीच मुक्त व्यापार समझौता सोमवार से लागू हो गया है। गोयल ने कहा कि भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) वस्त्र, चमड़ा, प्लास्टिक, समुद्री उत्पाद, वाहन, खेल सामग्री और कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों के घरेलू निर्यातकों को लाभ पहुंचाएगा। इसका कारण उन्हें प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में ओमान के बाजार में तरजीही पहुंच प्राप्त होगी। मंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा, ''भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता आज (सोमवार) से प्रभावी हो रहा है।'' मुक्त व्यापार समझौते पर 18 दिसंबर, 2025 को मस्कट में हस्ताक्षर किए गए थे।
दोनों पक्षों द्वारा आंतरिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद, समझौता एक जून, 2026 से प्रभावी हो गया।
समझौते के लागू होने के उपलक्ष्य में, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई से कृषि और रत्न एवं आभूषण उत्पादों की लगभग 10 खेप तरजीही दरों के तहत खाड़ी देश को भेजी गईं। ओमान खाड़ी क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और अपने अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस बंदरगाह बुनियादी ढांचे के माध्यम से व्यापक जीसीसी (खाड़ी सहयोग परिषद) बाजार के लिए एक रणनीतिक प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है। भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में 11.18 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 10.61 अरब डॉलर था। -
नयी दिल्ली. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत और अमेरिका ने प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण के अधिकांश प्रावधानों को अंतिम रूप दे दिया है और अब बातचीत कुछ छोटे मुद्दों तक ही केंद्रित है। गोयल ने यहां संवाददाताओं से कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के लिए भारत में है। दोनों पक्षों के बीच दो से चार जून तक यह बातचीत होगी। दोनों देशों ने तीन फरवरी को इस व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए रूपरेखा तय होने की घोषणा की थी।
गोयल ने कहा, "लगभग सभी चीजें तय हो चुकी हैं। जैसा कि अमेरिकी राजदूत ने भी कहा है कि 99 प्रतिशत मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। अब केवल छोटे-छोटे बिंदुओं पर चर्चा चल रही है।" उन्होंने कहा कि समझौते को अंतिम रूप देते समय इस पर भी विचार किया जा रहा है कि अमेरिका में हुए कानूनी बदलावों को इसमें किस तरह से जगह दी जाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इन मुद्दों के सुलझने के बाद दोनों देश बीटीए के पहले चरण को अंतिम रूप देकर जल्द ही उस पर हस्ताक्षर करेंगे। गोयल ने कहा कि पहला चरण संपन्न होने के बाद एक अधिक व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में आगे की बातचीत शुरू की जाएगी। भारत और अमेरिका ने पिछले साल की शुरुआत में द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में प्रयास शुरू किए थे। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भारतीय उत्पादों पर जवाबी सीमा शुल्क लगाए जाने के बाद इसकी प्रगति बाधित हुई। -
नयी दिल्ली. होटल और रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाली वाणिज्यिक द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की कीमत 19 किलोग्राम के सिलेंडर पर सोमवार को 42 रुपये बढ़ा दी गई लेकिन घरों में इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। उद्योग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत 3,071.50 रुपये से बढ़ाकर 3,113.50 रुपये कर दी गई है। घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपये ही है और इसमें बदलाव नहीं किया गया है।
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नयी दिल्ली. अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने कहा है कि समूह ने अमेरिका में चल रही कानूनी चुनौतियों को पीछे छोड़ दिया है और अब वह ऊर्जा, परिवहन, लॉजिस्टिक तथा डिजिटल अवसंरचना क्षेत्रों में निवेश की रफ्तार बढ़ा रहा है। उनका कहना है कि कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित विकास से पैदा होने वाली मांग समूह के लिए नए अवसर लेकर आएगी। शेयरधारकों को लिखे अपने सालाना पत्र में अदाणी ने कहा कि पिछले वर्ष बढ़ी जांच-पड़ताल और चुनौतियों के बावजूद समूह विस्तार की अपनी रणनीति पर कायम रहा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कानूनी मामलों से जुड़े मामले अब पीछे छूट चुके हैं और समूह नए आत्मविश्वास के साथ विकास के अगले चरण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
अदाणी ने समूह की प्रमुख कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज के 24,930 करोड़ रुपये के राइट्स इश्यू को निवेशकों के भरोसे का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह ऐसे समय में सफल रहा जब समूह को कॉरपोरेट प्रशासन और नियामकीय मुद्दों को लेकर सवालों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, ऊर्जा सुरक्षा की नई चुनौतियों और प्रौद्योगिकी के बढ़ते महत्व के बावजूद अदाणी समूह भारत के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग रहा। समूह ने ऊर्जा, परिवहन, लॉजिस्टिक, यूटिलिटी और औद्योगिक विनिर्माण क्षेत्रों में अपनी परियोजनाओं को लगातार आगे बढ़ाया। अदाणी ने कहा कि समूह की पहचान चुनौतियों या आलोचनाओं से नहीं, बल्कि उनके प्रति उसकी प्रतिक्रिया और राष्ट्र निर्माण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता से होती है। अमेरिका में नवीकरणीय ऊर्जा कारोबार से जुड़े कथित रिश्वतखोरी मामलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ी बाधाएं अब समाप्त हो चुकी हैं। समूह पहले ही इन आरोपों से इनकार करता रहा है। भविष्य की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए अदाणी ने कहा कि समूह दो प्रमुख विकास कारकों—अवसंरचना और मेधा (इंटेलिजेंस)—पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उनका मानना है कि एआई के व्यापक उपयोग के लिए बिजली उत्पादन, पारेषण नेटवर्क, डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक अवसंरचना में भारी निवेश की आवश्यकता होगी।
उन्होंने कहा, "एआई के सोचने से पहले ऊर्जा का प्रवाह होना जरूरी है।" उनके अनुसार, भविष्य का प्रौद्योगिकी नेतृत्व केवल सॉफ्टवेयर से नहीं, बल्कि मजबूत भौतिक अवसंरचना से भी तय होगा।'' समूह ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है, जो उसके अब तक के सबसे बड़े वार्षिक पूंजीगत व्यय कार्यक्रमों में से एक है। यह निवेश नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली पारेषण, बंदरगाह, हवाई अड्डा, डेटा सेंटर और विनिर्माण गतिविधियों में किया गया। प्रमुख उपलब्धियों में अदाणी ग्रीन एनर्जी द्वारा 5.1 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ना शामिल है, जिससे उसकी कुल परिचालन क्षमता 19 गीगावाट से अधिक हो गई। वहीं अदाणी न्यू इंडस्ट्रीज ने पांच मेगावाट की हरित हाइड्रोजन पायलट परियोजना शुरू की है। अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस की पारेषण परियोजनाओं की ऑर्डर बुक बढ़कर 71,779 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है, जबकि अदाणी पावर 2032 तक उत्पादन क्षमता 42 गीगावाट तक ले जाने के लिए दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के विस्तार कार्यक्रम पर काम कर रही है। डिजिटल अवसंरचना के क्षेत्र में समूह ने 2030 तक दो गीगावाट क्षमता वाले डेटा सेंटर प्लेटफॉर्म के निर्माण की योजना बनाई है। इसके अलावा गूगल के साथ विशाखापत्तनम में बड़ी डेटा सेंटर परियोजना के लिए समझौता भी किया गया है। लॉजिस्टिक क्षेत्र में अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकनॉमिक जोन ने वर्ष के दौरान 50 करोड़ टन से अधिक कार्गो को संभाला। वहीं समूह के हवाई अड्डा कारोबार ने नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और गुवाहाटी हवाई अड्डे पर नए टर्मिनल को चालू किया। - नई दिल्ली। मेटा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोग के तरीके में बड़ा बदलाव करते हुए इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सऐप के लिए नए पेड सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च करने की तैयारी की है। इन योजनाओं के तहत उपयोगकर्ताओं को विशेष प्रीमियम फीचर्स उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनका लाभ सामान्य उपयोगकर्ताओं को नहीं मिलेगा।कंपनी ने अपने ऐप्स के “प्लस” संस्करण पेश किए हैं, जिनके जरिए भुगतान करने वाले उपयोगकर्ताओं को उन्नत टूल्स, अतिरिक्त कस्टमाइजेशन विकल्प और अधिक दृश्यता से जुड़े फीचर्स मिलेंगे।यह कदम विज्ञापन आधारित आय पर निर्भरता कम करते हुए मासिक सदस्यता के जरिए नए राजस्व स्रोत विकसित करने की मेटा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।इंस्टाग्राम प्लस और फेसबुक प्लस की कीमत 3.99 डॉलर प्रति माह (करीब 387 रुपये) रखी गई है, जबकि व्हाट्सऐप प्लस के लिए 2.99 डॉलर प्रति माह (करीब 290 रुपये) शुल्क तय किया गया है। हालांकि, भारत के लिए आधिकारिक कीमतों की अभी घोषणा नहीं की गई है।टेकक्रंच की रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टाग्राम प्लस उपयोगकर्ताओं को कई विशेष सुविधाएं मिलेंगी। इनमें यह देखने की सुविधा शामिल होगी कि उनकी स्टोरी को कितने लोगों ने दोबारा देखा। साथ ही, मौजूदा ‘क्लोज फ्रेंड्स’ विकल्प से आगे बढ़कर असीमित स्टोरी ऑडियंस सूची बनाने की सुविधा भी मिलेगी।प्रीमियम उपयोगकर्ता बिना दर्शक सूची में दिखाई दिए किसी की स्टोरी देख सकेंगे। इसके अलावा स्टोरी को 24 घंटे की मौजूदा समय सीमा से अधिक समय तक रखने और हर सप्ताह एक स्टोरी को अतिरिक्त दृश्यता के लिए प्रमुखता से प्रदर्शित करने की सुविधा भी मिलेगी।सब्सक्राइबर स्टोरी देखने वालों की सूची में खोज कर सकेंगे और प्रोफाइल तथा हाइलाइट्स पर सीधे पोस्ट साझा कर सकेंगे, बिना उन्हें फॉलोअर्स की मुख्य फीड में दिखाए।मेटा प्रीमियम उपयोगकर्ताओं के लिए कुछ अतिरिक्त डिजाइन और कस्टमाइजेशन फीचर्स भी ला रहा है। इंस्टाग्राम प्लस उपयोगकर्ताओं को एनिमेटेड “सुपर हार्ट” रिएक्शन, बायो के लिए विशेष फॉन्ट, कस्टम ऐप आइकन और प्रोफाइल पिन करने के अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे।फेसबुक प्लस में भी इसी तरह के प्रीमियम फीचर्स दिए जाने की उम्मीद है, जबकि व्हाट्सऐप प्लस का फोकस मैसेजिंग अनुभव को बेहतर बनाने पर रहेगा।व्हाट्सऐप प्लस उपयोगकर्ताओं को कस्टम चैट थीम, विशेष रिंगटोन, प्रीमियम स्टिकर्स, अतिरिक्त पिन की गई चैट और उन्नत सूची कस्टमाइजेशन फीचर्स उपलब्ध होंगे।इंस्टाग्राम पर साझा की गई जानकारी में मेटा की प्रोडक्ट प्रमुख नाओमी ग्लाइट ने संकेत दिया है कि भविष्य में सब्सक्राइबरों के लिए और भी नए फीचर्स जोड़े जाएंगे।मेटा ने स्पष्ट किया है कि ये सब्सक्रिप्शन उसकी मौजूदा मेटा वेरिफाइड सेवा से अलग हैं। मेटा वेरिफाइड के तहत पहचान सत्यापन, प्रतिरूपण से सुरक्षा और ग्राहक सहायता जैसी सेवाएं प्रदान की जाती हैं।कंपनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सेवाओं के क्षेत्र में भी अपने पेड ऑफर का विस्तार कर रही है। इसके तहत “मेटा वन” नामक नया सब्सक्रिप्शन इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिसमें एआई, कंटेंट क्रिएटर और व्यवसायों के लिए विशेष टूल्स शामिल होंगे।
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नयी दिल्ली. अग्रणी बीमा कंपनी एलआईसी के प्रमुख आर दुरईस्वामी ने कहा है कि पश्चिम एशिया संकट के लंबे समय तक बने रहने की स्थिति में देश के बीमा क्षेत्र की वृद्धि दर में कुछ नरमी आ सकती है, क्योंकि इससे लोगों की आय और बचत क्षमता प्रभावित हो सकती है। भारतीय जीवन बीमा निगम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक दुरईस्वामी ने कहा कि यदि पश्चिम एशिया संकट लंबा चलता है तो इसका शृंखलाबद्ध प्रभाव लोगों की आय, खर्च और बचत के रुझान पर पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि स्थिति जल्द सामान्य होगी। हालांकि दुरईस्वामी ने कहा कि यदि अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा इस संकट से प्रभावित होता है तो बीमा उद्योग भी इससे अछूता नहीं रह सकता है। लोगों की आय और बचत क्षमता पर असर पड़ने से बीमा क्षेत्र पर भी स्वाभाविक रूप से प्रभाव पड़ेगा। गौरतलब है कि 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों पर असर पड़ा है। इससे आर्थिक वृद्धि में सुस्ती और महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। एलआईसी में सरकार की हिस्सेदारी घटाने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर दुरईस्वामी ने कहा कि कंपनी इस तरह के कदमों के लिए पहले से तैयार है। उन्होंने कहा, "जब हमने अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की तैयारी शुरू की थी, तभी से हम आगे के ऐसे कदमों के लिए तैयार थे। इस पर अंतिम फैसला सरकार को लेना है।" एलआईसी प्रमुख ने कहा कि जैसे ही समय और हिस्सेदारी के स्तर पर निर्णय लिया जाएगा, एलआईसी सरकार के साथ मिलकर इसे सफल बनाने के लिए तैयार है। वर्ष 2022 में एलआईसी का आईपीओ आया था, जो उस समय आकार के लिहाज से देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम था। इसके जरिए सरकार ने 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर करीब 21,000 करोड़ रुपये जुटाए थे। उन्होंने कहा कि सूचीबद्ध कंपनियों के लिए निर्धारित मानकों के तहत न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने के लक्ष्य पर सरकार काम कर रही है, लेकिन मौजूदा बाजार अस्थिरता के कारण अगले सार्वजनिक पेशकश के लिए उचित समय का इंतजार किया जा रहा है। आईपीओ के बाद शेयरधारकों को लाभ देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि एलआईसी ने हाल में एक मौजूदा शेयर पर एक बोनस शेयर जारी किया और इसके बाद 67 प्रतिशत अधिक लाभांश देने की भी घोषणा की। एलआईसी के निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजों को अंतिम रूप देते समय 10 रुपये अंकित मूल्य वाले शेयर पर 10 रुपये के अंतिम लाभांश की सिफारिश की है। इसे शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन रखा गया है। एलआईसी ने हाल ही में जनवरी-मार्च तिमाही में 23 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 23,420 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो देश की किसी भी वित्तीय सेवा कंपनी का अब तक का उच्चतम स्तर है।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी में सीएनजी की कीमत में मंगलवार को दो रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई। यह दो सप्ताह से भी कम समय में चौथी बार है जब सीएनजी की कीमत बढ़ाई गई है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के अनुसार, सीएनजी की कीमत अब 83.09 रुपये प्रति किलोग्राम होगी। सीएनजी की कीमत में 15 मई के बाद से चौथी बार बढ़ोतरी की गई है और अब तक कुल चार रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए जा चुके हैं।
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नयी दिल्ली. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और सोने-चांदी पर आयात शुल्क में वृद्धि के चलते खुदरा मुद्रास्फीति जून तक बढ़कर करीब पांच प्रतिशत तक जा सकती है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ब्याज दरों में किसी भी बदलाव से पहले स्थिति का आकलन करने के लिए 'इंतजार और निगरानी' की नीति अपनाएगा। 15 मई से शुरू हुई 11 दिन की अवधि में पेट्रोल की कीमतों में 7.38 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 7.48 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। विश्लेषकों के अनुसार, ईंधन की कीमतों में यह वृद्धि परिवहन, भंडारण और आंशिक रूप से बिजली जैसे क्षेत्रों की लागत बढ़ाकर महंगाई पर सीधा असर डालेगी। इसके अलावा, सरकार ने 13 मई को सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। इस तरह कीमती धातुओं के गैर-जरूरी आयात पर अंकुश लगाने की कोशिश की गई है। ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डी.के. श्रीवास्तव ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में औसतन 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से खुदरा मुद्रास्फीति में करीब 0.75 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। मई, 2026 में खुदरा मुद्रास्फीति 4-4.5 प्रतिशत और जून में 4.5-5 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति में यह वृद्धि लागत पर आधारित होने से रेपो दर में बदलाव का असर सीमित हो सकता है। हालांकि, यदि मुद्रास्फीति पांच प्रतिशत से ऊपर जाती है और उसमें तेजी का रुझान दिखता है, तो केंद्रीय बैंक दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की निदेशक मेघा अरोड़ा ने कहा कि जून में खुदरा मुद्रास्फीति चार प्रतिशत से ऊपर जा सकती है, लेकिन आरबीआई के छह प्रतिशत के ऊपरी संतोषजनक स्तर के भीतर रहने की संभावना है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की पांच जून को होने वाली की बैठक में सभी प्रमुख नीतिगत दरों को यथावत रखते हुए 'तटस्थ रुख' बनाए रखा जा सकता है। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति अप्रैल में 42 महीने के उच्चस्तर 8.3 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति 3.48 प्रतिशत रही। बार्कलेज इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री आस्था गुडवानी ने कहा कि मौजूदा अनिश्चितताओं के बने रहने से परिवहन लागत और कच्चे माल की कीमतों के जरिये महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिससे वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। क्रिसिल की प्रमुख अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में औसत मुद्रास्फीति 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इक्रा रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि जून में महंगाई पर ईंधन मूल्य वृद्धि का व्यापक असर दिखेगा और दरों में संभावित बढ़ोतरी वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में हो सकती है।
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नयी दिल्ली. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सोमवार को एक बार फिर वृद्धि की गयी। पेट्रोल की कीमत 2.61 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल के दाम 2.71 रुपये प्रति लीटर बढ़ाये गये हैं। सरकारी तेल कंपनियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर डाले जाने के बीच पिछले दो सप्ताह से भी कम समय में यह चौथी बार है जब कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। ईंधन कीमतों में 15 मई से फिर संशोधन शुरू हुआ था। तब से अब तक पेट्रोल और डीजल के दाम कुल मिलाकर करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर बढ़ चुके हैं। उद्योग सूत्रों ने बताया कि दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 2.61 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर 102.12 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जो पहले 99.51 रुपये प्रति लीटर थी। डीजल के दाम 2.71 रुपये बढ़ाकर 95.20 रुपये प्रति लीटर कर दिए गए हैं, जो पहले 92.49 रुपये प्रति लीटर थे। यह वृद्धि वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये में कमजोरी के बीच की गई है। वैश्विक कच्चे तेल की कीमत बढ़ने और रुपये के कमजोर होने से तेल विपणन कंपनियों की आयात लागत पर दबाव बढ़ा है।
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नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) मार्च तिमाही में वित्तीय क्षेत्र की सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाली कंपनी बनकर उभरी है। तिमाही के दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ 23,420 करोड़ रुपये से अधिक रहा है। केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) में भी वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में एलआईसी ने लाभ के मामले में पहला स्थान बरकरार रखा। एलआईसी का मार्च, 2026 को समाप्त तिमाही में शुद्ध लाभ 23 प्रतिशत बढ़कर 23,420 करोड़ रुपये रहा है, जो एक साल पहले की समान अवधि में 19,013 करोड़ रुपये था। कंपनी ने पिछले सप्ताह अपने तिमाही नतीजों की घोषणा की थी। शेयर बाजारों के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चौथी तिमाही में देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का लाभ 19,684 करोड़ रुपये और निजी क्षेत्र के एचडीएफसी बैंक का लाभ 19,221 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान वार्षिक लाभ के मामले में एसबीआई ने एलआईसी को पीछे छोड़ दिया। एसबीआई का सालाना शुद्ध लाभ 80,032 करोड़ रुपये रहा, जबकि एलआईसी का लाभ 57,419 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसी तरह, एचडीएफसी बैंक का वार्षिक लाभ 74,670 करोड़ रुपये और आईसीआईसीआई बैंक का लाभ 50,147 करोड़ रुपये रहा है। अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने चौथी तिमाही में 11,378 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है। इसके बाद कोल इंडिया का लाभ 10,839 करोड़ रुपये रहा। वहीं, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) ने 8,598 करोड़ रुपये और एनटीपीसी ने 8,747 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का लाभ 4,546 करोड़ रुपये, आरईसी लिमिटेड का 3,375 करोड़ रुपये और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) का लाभ 1,680 करोड़ रुपये रहा। एलआईसी के शानदार नतीजों के एक दिन बाद 23 मई को बीएसई में उसका शेयर शुरुआती कारोबार में लगभग पांच प्रतिशत चढ़कर 839 रुपये पर पहुंच गया। एलआईसी के प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियां (एयूएम) 31 मार्च, 2026 तक बढ़कर 57,29,396 करोड़ रुपये हो गईं, जो एक साल पहले 54,52,297 करोड़ रुपये थीं। यह सालाना आधार पर पांच प्रतिशत की वृद्धि है। वर्ष के दौरान कंपनी की कुल प्रीमियम आय में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, समायोजित नेटवर्थ बढ़कर 1,69,605 करोड़ रुपये हो गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 1,20,258 करोड़ रुपये थी। पूरे कॉरपोरेट क्षेत्र की बात करें तो जनवरी-मार्च तिमाही में वोडाफोन आइडिया 51,970 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड लाभ के साथ सबसे अधिक तिमाही मुनाफा कमाने वाली कंपनी रही। करीब छह वर्षों में यह कंपनी का पहला तिमाही लाभ था, जो मुख्य रूप से वैधानिक देनदारियों में राहत मिलने से संभव हुआ। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज का स्थान रहा, जिसका शुद्ध लाभ 16,971 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 19,407 करोड़ रुपये की तुलना में कम है।
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नयी दिल्ली. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में शनिवार को एक बार फिर वृद्धि की गयी। पेट्रोल की कीमत 87 पैसे लीटर जबकि डीजल के दाम 91 पैसे प्रति लीटर बढ़ाये गये हैं। पिछले10 दिनों से भी कम समय में यह तीसरा मौका है जब ईंधन के दाम बढ़ाये गये हैं।
उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 87 पैसे बढ़कर 98.64 रुपये से 99.51 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं डीजल की कीमत 91 पैसे बढ़कर 91.58 रुपये से बढ़कर 92.49 रुपये हो गई है। पेट्रोल, डीजल के दाम में 15 मई के बाद से यह तीसरी बढ़ोतरी है। सरकारी तेल कंपनियों ने पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण बढ़ी ऊर्जा कीमतों का बोझ धीरे-धीरे उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर दिया है। पंद्रह मई को कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई थी। उसके बाद 19 मई को पेट्रोल और डीजल के दाम 90 पैसे लीटर बढ़ाये गये थे। कुल मिलाकर, ईंधन की कीमतों में लगभग 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। -
नयी दिल्ली. पार्ले प्रोडक्ट्स ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी का पैकेट उपहार में देने का वीडियो वायरल होने के बाद इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन बढ़ा दिया है। कंपनी के उपाध्यक्ष मयंक शाह ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। शाह ने इसे ब्रांड के इतिहास का सबसे बड़ा अभियान बताते हुए ' कहा कि अब कंपनी प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 'स्वदेशी ब्रांड' को मिले समर्थन को आगे बढ़ाते हुए मेलोडी की वैश्विक मौजूदगी मजबूत करने का प्रयास करेगी। फिलहाल यह उत्पाद 100 देशों में उपलब्ध है। उपभोक्ताओं और वितरकों की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "वितरकों से शुरुआती प्रतिक्रिया मिली है कि मांग बढ़ी है। अचानक मांग में उछाल देखने को मिल रहा है।" उन्होंने कहा कि फटाफट सामान की आपूर्ति करने वाले ई-कॉमर्स मंचों पर मेलोडी की खरीदारी में तुरंत बढ़ोतरी देखी गई है। ई-कॉमर्स मंचों से भी भारी मांग आई है और बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। शाह ने कहा कि फटाफट सामान की आपूर्ति करने वाले ई-कॉमर्स मंचों पर 'मेलोडी' शब्द की खोज में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह रुझान बुधवार सुबह से देखा जा रहा है। मेलोडी के उत्पादन में वृद्धि के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "कल से हमने उत्पादन बढ़ा दिया है... विदेशों से भी मांग बढ़ रही है।" प्रधानमंत्री मोदी द्वारा मेलोनी को मेलोडी उपहार में दिए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शाह ने कहा, "यह पार्ले परिवार के लिए बेहद गर्व का क्षण है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व नेताओं को मेलोडी उपहार में दे रहे हैं।" उन्होंने मोदी के इस कदम को वैश्विक मंच पर स्वदेशी ब्रांडों की क्षमता का मजबूत प्रमाण बताया।
शाह ने कहा, "पार्ले मेलोडी भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाला टॉफी ब्रांड है और आज यह 100 से अधिक देशों में उपलब्ध है... प्रधानमंत्री मोदी ने अपना काम कर दिया है, अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस ब्रांड को वैश्विक स्तर पर और बड़ा बनाएं।" उन्होंने कहा, "भारतीय ब्रांड को यह पहचान और दृश्यता देने के लिए हम प्रधानमंत्री के प्रति गहरा आभार व्यक्त करते हैं।" शाह ने कहा कि कंपनी इस घटनाक्रम का लाभ उठाते हुए मेलोडी ब्रांड का और अधिक प्रचार करेगी।
उन्होंने कहा, "हमने कल से ही डिजिटल माध्यमों पर प्रचार शुरू कर दिया है और आगे विभिन्न मीडिया मंचों पर भी इसका प्रचार किया जाएगा।" प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बुधवार को मेलोनी को मेलोडी टॉफी का पैकेट भेंट करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पार्ले प्रोडक्ट्स सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गई। -
वडोदरा. भारत के पूर्व क्रिकेटर और आईपीएल बायोलॉजिकल्स के ब्रांड एम्बैसडर युवराज सिंह ने पंजाब में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए किसानों से जैविक उत्पादों को अपनाने की बृहस्पतिवार को अपील की। कंपनी के तीसरे विनिर्माण संयंत्र के उद्घाटन के अवसर पर सिंह ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से राज्य की मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। युवराज ने कहा, "पंजाब में रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक इस्तेमाल हुआ है और इसका असर मिट्टी की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। मैं पंजाब के किसानों से जैविक उत्पादों की ओर रुख करने और कृषि भूमि को बचाने की अपील करता हूं।" पूर्व क्रिकेटर ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल कम करने और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने संबंधी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "किसान कड़ी मेहनत कर रहे हैं और इस दिशा में उन्हें प्रोत्साहित करने तथा समर्थन देने की जरूरत है।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बृहस्पतिवार को सोने की कीमत 600 रुपये बढ़कर 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो गईं और चांदी भी 2.71 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। भू-राजनीतिक तनाव के बीच कारोबारी कीमती धातुओं को लेकर सतर्क रूप से आशावादी बने रहे। स्थानीय बाजार के जानकारों के अनुसार, लगातार तीसरे सत्र में बढ़त जारी रखते हुए, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव 600 रुपये बढ़कर 1,65,500 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गया, जो बुधवार के बंद भाव 1,64,900 रुपये से अधिक है। इस कीमती धातु की कीमतों में पिछले तीन सत्रों में कुल 2,700 रुपये की बढ़त दर्ज की गई है।
कारोबारियों ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक स्तर पर महंगाई को लेकर चिंताओं ने अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में मजबूती के बावजूद, इस धातु की खरीद को समर्थन दिया। बाजार के जानकारों के अनुसार, चांदी की कीमतों में भी सुधार देखने को मिला, और इसकी कीमत 5,000 रुपये उछलकर 2,71,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। इसे सस्ते भाव पर खरीदारी और औद्योगिक मांग में सुधार के रुख से मदद मिली। विश्लेषकों ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी बाधाओं को लेकर चिंताओं ने कीमती धातुओं की मांग को लगातार बनाए रखा और रुपये में कमजोरी ने भी स्थानीय कीमतों को समर्थन दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गिरावट के बावजूद घरेलू सर्राफा कीमतें मजबूत बनी रहीं। हाजिर सोने का भाव मामूली रूप से गिरकर 4,534.54 डॉलर प्रति औंस रह गया, जबकि चांदी लगभग एक प्रतिशत फिसलकर 75.39 डॉलर प्रति औंस रह गई। -
नयी दिल्ली. देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया बढ़ती मुद्रास्फीति और लागत में बढ़ोतरी के कारण जून, 2026 से अपने विभिन्न मॉडल की कीमतों में 30,000 रुपये तक की बढ़ोतरी करेगी। कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि उसने अपने पूरे मॉडल पोर्टफोलियो में वाहनों की कीमतों में जून से 30,000 रुपये तक की वृद्धि करने का निर्णय लिया है। कंपनी ने कहा, ''पिछले कुछ महीनों से लागत में बढ़ोतरी के प्रभाव को कम करने के लिए कंपनी लागत कटौती उपायों के जरिये लगातार प्रयास कर रही है।" कंपनी ने कहा कि मुद्रास्फीति का दबाव अब ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है और प्रतिकूल लागत माहौल बना हुआ है। ऐसे में बढ़ी हुई लागत का एक हिस्सा बाजार पर डालना आवश्यक हो गया है, जबकि ग्राहकों पर इसका प्रभाव न्यूनतम रखने का प्रयास जारी रहेगा। मारुति सुजुकी इंडिया फिलहाल शुरुआती श्रेणी की मारुति सुजुकी एस-प्रेसो से लेकर प्रीमियम यूटिलिटी इनविक्टो बेचती है। इनकी शोरूम कीमत 3.49 लाख रुपये से 28.7 लाख रुपये के बीच है।
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नयी दिल्ली. दूरसंचार कंपनी एयरटेल के पोस्टपेड ग्राहकों को कंपनी की हाल ही में शुरू की गई 'प्रायोरिटी पोस्टपेड' सेवाओं का लाभ स्वतः मिलेगा। यह सेवा भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लगातार बेहतर स्पीड देने का वादा करती है। एयरटेल इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) शाश्वत शर्मा ने ग्राहकों को लिखे पत्र में कहा कि प्रीपेड ग्राहकों को इस सेवा का लाभ लेने के लिए अपनी सेवा को पोस्टपेड में अपग्रेड करना होगा। उन्होंने कहा, '' एयरटेल प्रायोरिटी पोस्टपेड सभी पोस्टपेड सेवा पर उपलब्ध है। यदि आप पहले से पोस्टपेड पर हैं तो आपको इसका स्वतः लाभ मिलेगा। यदि आप वर्तमान में प्रीपेड ग्राहक हैं तो आप एयरटेल ऐप पर जाकर अपनी मौजूदा सेवा को पोस्टपेड में अपग्रेड कर सकते हैं।'' भारती एयरटेल ने 19 मई को 'प्रायोरिटी पोस्टपेड 5जी' सेवा पेश की थी, ताकि भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भी अपने ग्राहकों को तेज एवं अधिक विश्वसनीय दूरसंचार सेवाएं दी जा सकें। इसके तहत उपयोगकर्ताओं के लिए नेटवर्क का एक समर्पित हिस्सा आवंटित किया गया है और उन्हें अन्य सेवा श्रेणियों से अलग रखा गया है। कंपनी ने 'प्रायोरिटी पोस्टपेड' सेवा शुरू करने के लिए 'नेटवर्क स्लाइसिंग' प्रौद्योगिकी का उपयोग किया है। यह 'स्लाइसिंग' प्रौद्योगिकी पोस्टपेड ग्राहकों को अन्य सेवाओं से अलग करेगी और एक तरह से उन्हें प्रीपेड ग्राहकों की बड़ी संख्या से अलग एक समर्पित तेज लाइन से सेवा उपलब्ध कराएगी। शर्मा ने कहा, '' आपमें से कई लोगों ने बताया है कि कभी-कभी भीड़भाड़ वाले बाजार, ट्रैफिक जाम या किसी कार्यक्रम में वीडियो कॉल करना, ईमेल डाउनलोड करना या फोटो अपलोड करना मुश्किल हो जाता है। यह एक समस्या है जिसे हम हल करना चाहते थे। इसी वजह से हमने 'एयरटेल प्रायोरिटी पोस्टपेड' शुरू किया है। इसे खास तौर पर भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भी आपको लगातार बेहतर अनुभव देने के लिए तैयार किया गया है।'' गौरतलब है कि वैश्विक दूरसंचार कंपनियों एरिक्सन और नोकिया ने 'प्रायोरिटी पोस्टपेड' के लिए नेटवर्क स्लाइसिंग प्रौद्योगिकी के उपयोग को भारत के मोबाइल सेवा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि बताया है। नोकिया का दावा है कि नेटवर्क स्लाइसिंग प्रौद्योगिकी वही उपलब्ध करा रहा है।
नोकिया के अध्यक्ष एवं सीईओ जस्टिन होटार्ड ने सोशल मीडिया पर लिखा, '' हमें गर्व है कि नोकिया की प्रौद्योगिकी इस क्षमता को संभव बना रही है। हमारी 5जी कोर और स्लाइसिंग क्षमताएं पहले से ही उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया में संचालकों को अलग-अलग संपर्क प्रदान कर रही हैं और अब भारत में भी उपलब्ध है। यह एयरटेल के साथ मोबाइल, फिक्स्ड और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में 20 से अधिक वर्षों की साझेदारी पर आधारित है।'' एरिक्सन के अध्यक्ष एवं सीईओ बोरजे एकहोम ने एक सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत डिजिटल क्षेत्र में अग्रणी बना हुआ है और पिछले एक दशक में ''डिजिटल इंडिया'' का सफल क्रियान्वयन मजबूत मोबाइल बुनियादी ढांचे पर आधारित रहा है। उन्होंने कहा, '' दुनिया के सबसे तेज 5जी विस्तारों में से एक के बाद भारत अब भी सबसे उन्नत डिजिटल देशों में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, जहां भारती एयरटेल ने अपने पोस्टपेड ग्राहकों के लिए अलग तरह की संपर्क (कनेक्टिविटी) सेवाएं शुरू की हैं।'' भारती एयरटेल अब अमेरिका, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड जैसे देशों के अग्रणी सेवा प्रदाताओं की श्रेणी में शामिल हो गया है जो उन्नत 5जी समाधानों के जरिये अलग तरह के ग्राहक अनुभव प्रदान कर रहे हैं। -
नयी दिल्ली. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मंगलवार को 90 पैसे प्रति लीटर की और वृद्धि की गयी। एक सप्ताह से भी कम समय में दूसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाये गये है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार इस वृद्धि के बाद राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल की कीमत अब 90.67 रुपये प्रति लीटर के मुकाबले 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गयी है। इससे पहले, शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल के दाम तीन रुपये प्रति लीटर बढ़ाये गये थे।
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब 87 पैसे बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल की कीमत 91 पैसे बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गयी है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 91 पैसे बढ़कर 107.59 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 94 पैसे बढ़कर 94.08 रुपये प्रति लीटर हो गयी है। कोलकाता में पेट्रोल की कीमत सबसे अधिक 96 पैसे बढ़कर 109.70 रुपये प्रति लीटर हो गयी। वहीं डीजल की कीमत 94 पैसे बढ़कर 96.07 रुपये प्रति लीटर हो गयी है। चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 82 पैसे बढ़कर 104.49 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल की कीमत 86 पैसे बढ़कर 96.11 रुपये प्रति लीटर हो गयी है। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतें 1,300 रुपये बढ़कर 1.64 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो गईं। यह बढ़ोतरी अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच विदेशी व्यापार में आई तेजी का नतीजा है। स्थानीय बाजार के जानकारों के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,300 रुपये बढ़कर 1,64,900 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गई, जो मंगलवार के बंद भाव 1,63,600 रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक है। सर्राफा कारोबारियों ने बताया कि अमेरिकी बॉन्ड के उच्च प्रतिफल तथा डॉलर मजबूत होने के बावजूद कीमती धातुओं में नई खरीदारी से सोने की घरेलू कीमतों को समर्थन मिला। हालांकि, चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे सत्र में गिरावट रही। चांदी की कीमत 5,000 रुपये टूटकर 2,66,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) रह गई। पिछले सत्र में चांदी की कीमत 2,71,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर रही थी। विश्लेषकों ने कहा कि कमजोर औद्योगिक मांग और हाल में कीमतों में आए भारी उतार-चढ़ाव के बाद लगातार मुनाफावसूली होने के कारण चांदी की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, हाजिर सोना मामूली बढ़त के साथ 4,483.54 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जबकि चांदी दो प्रतिशत से अधिक बढ़कर 75.42 डॉलर प्रति औंस हो गई। ब्रोकरेज फर्म कोटक नियो (पहले कोटक सिक्योरिटीज) ने कहा कि बुधवार को हाजिर सोने में तेजी देखी गई, क्योंकि हाल ही में बॉन्ड बाजार में हुई बिकवाली में नरमी आने के बाद कीमती धातुओं को कुछ समर्थन मिला। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल के ऊंचे स्तर और डॉलर की मजबूती ने कीमतों में उछाल को सीमित रखा। कंपनी ने कहा कि बाजार के प्रतिभागियों का ध्यान अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने में हो रही देरी पर केंद्रित रहा। इन घटनाक्रमों से वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति की चिंताओं और सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों को, लगातार बल मिल रहा है। मिराए एसेट शेयरखान में जिंस प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा, "निवेशक अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दर की दिशा और सर्राफा कीमतों पर निकट-अवधि में इसके असर के बारे में नई जानकारी हासिल करने के लिए अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक के ब्योरे का इंतजार कर रहे हैं।
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नयी दिल्ली. भारत ने सोमवार को कहा कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट से इतर भी रूस से तेल खरीदता रहा है और आगे भी व्यावसायिक व्यवहार्यता तथा ऊर्जा सुरक्षा जरूरतों के आधार पर खरीद जारी रखेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, "रूस पर अमेरिकी छूट के संबंध में मैं यह स्पष्ट करना चाहती हूं कि हम पहले भी रूस से तेल खरीदते रहे हैं... छूट से पहले भी, छूट के दौरान भी और अब भी खरीदते रहेंगे।" उन्होंने कहा कि भारत के कच्चे तेल खरीदने के फैसले मुख्य रूप से व्यावसायिक दृष्टिकोण और पर्याप्त आपूर्ति उपलब्धता पर आधारित होते हैं। शर्मा ने कहा, "हमारे लिए खरीदारी का आधार मूल रूप से व्यावसायिक समझ है।"
उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है और दीर्घकालिक समझौतों के तहत पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। रूसी समुद्री मार्ग से कच्चे तेल की बिक्री और वितरण की अनुमति देने वाली अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट 16 मई को समाप्त हो गई। यह दूसरी बार है जब अमेरिका ने राहत उपाय की अवधि बढ़ाने पर स्पष्टता दिए बिना उसे समाप्त होने दिया। अमेरिकी वित्त विभाग ने यह सामान्य लाइसेंस पहली बार मार्च के मध्य में जारी किया था और अप्रैल में इसका विस्तार किया गया था। इसका उद्देश्य ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़े दबाव को कम करना था। शर्मा ने कहा, "छूट हो या नहीं, इससे उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।"
वर्ष 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देशों के व्यापक प्रतिबंधों और पारंपरिक निर्यात बाजारों में व्यवधान के कारण रियायती रूसी कच्चा तेल भारत के आयात का प्रमुख हिस्सा बन गया था। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता भारत, कम कीमतों का लाभ उठाने के लिए रूस से तेल खरीद में तेजी से वृद्धि कर चुका है। इससे घरेलू रिफाइनरियों को वैश्विक ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी से निपटने में मदद मिली। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने फरवरी, 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद रूस पर व्यापक प्रतिबंध लगाए थे। हालांकि, रूसी तेल पर प्रत्यक्ष प्रतिबंध नहीं लगाया गया। -
नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड ने सोमवार को कहा कि उसकी स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 90 गीगावाट से अधिक हो गई है। यह उपलब्धि उसकी इकाई पीवीयूएनएल की 800 मेगावाट क्षमता वाली दूसरी इकाई के सफल परीक्षण संचालन के बाद हासिल हुई है। एनटीपीसी ने बयान में कहा कि इस उपलब्धि के साथ एनटीपीसी समूह की कुल स्थापित क्षमता देशभर में 90 गीगावाट से अधिक हो गई है। कंपनी ने कहा कि यह उपलब्धि भारत के लिए टिकाऊ और ऊर्जा-सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) परियोजना 800 मेगावाट की तीन इकाइयों वाली है। यह एनटीपीसी (74 प्रतिशत हिस्सेदारी) तथा झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (26 प्रतिशत हिस्सेदारी) के बीच एक संयुक्त उद्यम है। एनटीपीसी की वर्तमान में लगभग 32 गीगावाट क्षमता निर्माणाधीन है। कंपनी ने वर्ष 2032 तक अपनी कुल स्थापित क्षमता 149 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें 60 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा से हासिल करने की योजना है। नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के तहत कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में सौर, पवन और पंप भंडारण परियोजनाओं में 5,488 मेगावाट क्षमता जोड़ी है। एनटीपीसी का ऊर्जा पोर्टफोलियो तापीय, जल, सौर एवं पवन ऊर्जा परियोजनाओं में फैला है। इसके अलावा कंपनी ई-परिवहन, बैटरी भंडारण, पंप्ड हाइड्रो, अपशिष्ट से ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसे नए क्षेत्रों में भी विस्तार कर रही है।
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दिल्ली में 80 रुपये किलोग्राम के पार पहुंचे दाम
नयी दिल्ली. वाहन ईंधन के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली सीएनजी की कीमतों में रविवार को एक रुपये प्रति किलोग्राम की और बढ़ोतरी की गई। एक सप्ताह से भी कम समय में दूसरी बार कंप्रेस्ड नैचुरल गैस (सीएनजी) के दाम बढ़ाए गए हैं। देश की प्रमुख शहर गैस वितरण कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लि. (आईजीएल) ने सीएनजी की कीमतों में एक रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की घोषणा की है। नई दरें लागू होने के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सीएनजी की कीमत बढ़कर 80.09 रुपये प्रति किलो हो गई है। इससे पहले बृहस्पतिवार को कंपनी ने सीएनजी की कीमतों में दो रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की थी। इस तरह केवल कुछ दिन में सीएनजी कुल तीन रुपये महंगी हो गई है। कंपनी ने बयान में कहा कि संशोधित कीमतें 17 मई सुबह छह बजे से लागू कर दी गई हैं। यह बढ़ोतरी कंपनी के सभी भौगोलिक क्षेत्रों में प्रभावी होगी। हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई में इस्तेमाल होने वाली पाइप वाली गैस यानी पीएनजी की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। आईजीएल के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की लागत बढ़ने और अमेरिकी डॉलर की मजबूती का असर सीएनजी की लागत पर पड़ा है। इसी कारण कंपनी को खुदरा कीमतों में संशोधन करना पड़ा। कंपनी का कहना है कि कीमतों में यह बढ़ोतरी केवल बढ़ी हुई लागत के प्रभाव को आंशिक रूप से कम करने के लिए की गई है। हालांकि, कंपनी ने दावा किया है कि कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सीएनजी अभी भी पेट्रोल और डीजल की तुलना में सस्ता ईंधन है। मौजूदा दरों पर सीएनजी वाहनों का संचालन खर्च अन्य ईंधन के मुकाबले करीब 45 प्रतिशत तक कम पड़ता है। -
नयी दिल्ली. देश को 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते समय किसी एक देश या आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भरता से बचना होगा। एनटीपीसी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक गुरदीप सिंह ने आगाह करते हुए कहा कि भारत को परमाणु प्रौद्योगिकी और संसाधनों पर अपना नियंत्रण मजबूत रखना चाहिए। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) द्वारा आयोजित कार्यशाला के ब्योरे के मुताबिक, सिंह ने कहा कि शुरुआती चरण में यदि स्वदेशी विकल्प 5-10 प्रतिशत महंगे भी हों, तब भी देश को उन्हें प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि वैश्विक स्तर पर दिख रही आपूर्ति शृंखला संबंधी कमजोरियों से बचा जा सके। यह कार्यशाला पिछले महीने "शांति अधिनियम, 2025 : सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से भारत की 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा रूपरेखा को सक्षम बनाना" विषय पर आयोजित की गई थी। देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी के प्रमुख सिंह ने कहा कि केवल विधायी बदलाव पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि नियमों और दिशानिर्देशों को जल्द अंतिम रूप देना भी जरूरी है। उनका कहना था कि स्पष्ट कार्यान्वयन व्यवस्था के बिना नीतियों को वास्तविक निवेश में बदलना संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भारत को किसी एक देश या आपूर्तिकर्ता पर तकनीकी निर्भरता से बचना चाहिए और दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए घरेलू क्षमता निर्माण पर जोर देना चाहिए। एनटीपीसी प्रमुख ने बताया कि उनकी कंपनी वर्ष 2047 तक 30 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए कंपनी देश के 14 राज्यों में उपयुक्त स्थल की पहचान कर रही है। उन्होंने कहा कि एनटीपीसी जैसे बड़े बिजली उत्पादक के लिए बड़ी क्षमता वाले रिएक्टर अधिक उपयुक्त हैं। उनके अनुसार, स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) औद्योगिक इकाइयों की सीमित या अपनी जरूरतों के लिए बेहतर हो सकते हैं। एनटीपीसी की वेबसाइट के अनुसार, कंपनी की समूह स्तर पर कुल स्थापित क्षमता 89,805.30 मेगावाट है, जिसमें कोयला, गैस, जलविद्युत और सौर ऊर्जा परियोजनाएं शामिल हैं। 31 मार्च, 2026 तक भारत की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता में एनटीपीसी की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत रही, जबकि कुल बिजली उत्पादन में उसका योगदान 24 प्रतिशत था।
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नयी दिल्ली. दूरसंचार क्षेत्र के दिग्गज सुनील भारती मित्तल ने कहा है कि वह अगले दशक में भारती एयरटेल लिमिटेड की कमान नई पीढ़ी को सौंपने की योजना बना रहे हैं। साथ ही उनकी इच्छा प्रवर्तक कंपनी भारती टेलीकॉम में फिर से 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी हासिल करने की भी है। मित्तल और सिंगटेल समूह के स्वामित्व वाली भारती टेलीकॉम के पास वर्तमान में एयरटेल में 40.47 प्रतिशत हिस्सेदारी है। प्रवर्तक कंपनियां भारती टेलीकॉम, मित्तल परिवार की होल्डिंग कंपनी इंडियन कॉन्टिनेंट इन्वेस्टमेंट, सिंगटेल ग्रुप की कंपनी पास्टेल और अन्य मिलकर एयरटेल में 48.87 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं। भारती एयरटेल की जनवरी-मार्च तिमाही के नतीजों की घोषणा के दौरान मित्तल ने कहा, '' मुझे पता है कि एकदम सटीक भविष्यवाणी करना मुश्किल है लेकिन मेरी इच्छा है कि अगले दशक में जब मैं शेयरधारकों के रूप में अगली पीढ़ी को बागडोर सौंपने के मुकाम तक जाऊं तब तक भारती टेलीकॉम को 51 प्रतिशत या 50 प्रतिशत से थोड़ा अधिक की नियंत्रक शेयरधारिता हासिल कर लेनी चाहिए।'' उन्होंने कहा कि एयरटेल में भारती टेलीकॉम की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत बढ़ाने के लिए बड़ी पूंजी की आवश्यकता होगी, जो मौजूदा शेयर मूल्य एवं बाजार पूंजीकरण के आधार पर लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश के बराबर है। मित्तल ने कहा कि मूल विचार यह है कि नियंत्रण एवं प्रवर्तक शेयरधारिता एक ही कंपनी के माध्यम से होनी चाहिए। भारती टेलीकॉम ऐतिहासिक रूप से इस कंपनी की संस्थापक प्रवर्तक रही है और लंबे समय तक इसके पास 51 प्रतिशत नियंत्रक हिस्सेदारी रही है। उन्होंने कहा कि अगले तीन से चार वर्ष में प्रदर्शन के आधार पर एयरटेल में हिस्सेदारी बढ़ाई जा सकती है, जो शीर्ष प्रबंधन द्वारा संचालन एवं नकदी प्रवाह सृजन पर निर्भर करेगा। सिंगटेल के पास एयरटेल में करीब सात प्रतिशत प्रत्यक्ष हिस्सेदारी है।
मित्तल ने कहा कि सिंगटेल की हिस्सेदारी घटाने की प्रक्रिया जारी है और नई संरचना के बाद हिस्सेदारी अंतर कम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले तीन से चार वर्ष में 3.6 प्रतिशत की शेष हिस्सेदारी हासिल करने की योजना एयरटेल के प्रदर्शन, शेयर की पुनर्खरीद और लाभांश जैसे कारकों पर निर्भर करेगी। मित्तल का वर्तमान कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त होना था लेकिन इसे 30 सितंबर, 2031 तक पांच वर्ष के लिए फिर से बढ़ा गया है। एयरटेल ने जनवरी-मार्च तिमाही में 33.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 7,325 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जबकि वार्षिक राजस्व पहली बार दो लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। -
नयी दिल्ली. भारत ने चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर तक प्रतिबंध लगा दिया है। एक सरकारी अधिसूचना में यह जानकारी दी गयी है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा 13 मई को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि यह आदेश शुल्क दर कोटा योजना के तहत यूरोपीय संघ और अमेरिका को निर्यात की जाने वाली चीनी पर लागू नहीं होगा। यह आदेश अग्रिम प्राधिकरण योजना, सरकारों के बीच निर्यात और पहले से निर्यात प्रक्रिया में शामिल खेपों पर भी लागू नहीं होगा। डीजीएफटी ने कहा, ''चीनी (कच्ची चीनी, सफेद चीनी और परिष्कृत चीनी) की निर्यात नीति को 'प्रतिबंधित' श्रेणी से बदलकर 'निषिद्ध' श्रेणी में तत्काल प्रभाव से 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, कर दिया गया है।''



























