- Home
- बिजनेस
- नई दिल्ली। 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित देशव्यापी बैंक हड़ताल के बीच भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने ग्राहकों को बड़ी राहत देते हुए घोषणा की है कि हड़ताल की अवधि के दौरान सभी एटीएम ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। बैंक का कहना है कि यह फैसला ग्राहकों को निर्बाध बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने और हड़ताल के संभावित प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक पोस्ट में एसबीआई ने कहा कि प्रस्तावित हड़ताल के दौरान भी ग्राहकों की बैंकिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए उसकी सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। इसी के तहत 28 सितंबर से 30 सितंबर 2026 के बीच ग्राहकों से किसी भी बैंक के एटीएम पर किए गए लेनदेन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।बैंक ने यह भी बताया कि ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उसकी सभी शाखाएं रविवार, 27 सितंबर को भी खुली रहेंगी। इसके अलावा यूपीआई, आईएमपीएस, आरटीजीएस और एनईएफटी जैसी ऑनलाइन भुगतान सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी, जिससे डिजिटल माध्यम से लेनदेन में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।सरकार ने भी आम लोगों की बैंकिंग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को रविवार को खुला रखने का निर्देश दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 27 सितंबर को सभी बैंक शाखाओं, कार्यालयों, एटीएम से जुड़ी शाखाओं और करेंसी चेस्ट को पूर्ण रूप से संचालित रखने की अनुमति दे दी है।वित्त मंत्रालय ने कहा है कि सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रविवार को सामान्य रूप से कार्य करेंगे। मंत्रालय के अनुसार, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) द्वारा 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल ऐसे समय रखी गई है, जब उससे पहले 26 और 27 सितंबर को सप्ताहांत की छुट्टियां भी हैं। ऐसे में यदि विशेष व्यवस्था नहीं की जाती, तो बैंकिंग गतिविधियां लगातार पांच दिनों तक प्रभावित हो सकती थीं।सरकार का कहना है कि आम नागरिकों की सुविधा और बैंकिंग सेवाओं की उपलब्धता उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी कारण सरकार और बैंक प्रबंधन ने यूनियनों से प्रस्तावित हड़ताल को स्थगित करने की अपील भी की है। साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं कि आवश्यक बैंकिंग सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रह सकें।
-
नयी दिल्ली. ई-कॉमर्स मंच मिंत्रा ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने त्योहारी मौसम और अपने 'बिग फैशन फेस्टिवल' से पहले 26,000 से अधिक अस्थायी रोजगार के अवसरों का सृजन किया है। यह संख्या पिछले साल की तुलना में दोगुने से अधिक है। कंपनी ने बयान में कहा कि इन अस्थायी नौकरियों में 350 से अधिक पद दिव्यांगजनों के लिए रखे गए हैं, जबकि उसके ऑर्डर पूर्ति केंद्रों में तैनात कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत होगी। त्योहारी भर्तियों में आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े काम, जैसे छंटाई, ग्रेडिंग और पैकिंग शामिल हैं। इसके अलावा 8,000 डिलिवरी साझेदार और 2,700 ग्राहक सेवा कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। मिंत्रा ने बताया कि इन कर्मचारियों की भर्ती ओडिशा, कर्नाटक, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड समेत कई राज्यों से की गई है। ये कर्मचारी बेंगलुरु, मुंबई, कोलकाता, बिलासपुर और बिनोला स्थित पांच ऑर्डर पूर्ति केंद्रों में काम करेंगे। कंपनी के मुताबिक, चुनिंदा स्थानों पर 24 से 48 घंटे में डिलिवरी देने वाली 'एम-एक्सप्रेस' सेवा के लिए भी इनकी तैनाती होगी। अतिरिक्त कर्मचारियों से त्योहारी अवधि में परिचालन और डिलिवरी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। मिंत्रा के मुख्य मानव संसाधन अधिकारी गोविंदराज एमके ने कहा, ''इस साल त्योहारों के मौसम में कार्यबल बढ़ाने के साथ कंपनी रोजगार और आय के अवसर पैदा करने के अलावा कर्मचारियों को सहयोग और प्रोत्साहन देने पर भी ध्यान दे रही है।''
-
कोलकाता. अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल को देश के अगले विकास चरण के लिए एक अहम इंजन के तौर पर उभरना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य की रणनीतिक स्थिति इसे 'विकसित भारत' के सपने को पूरा करने के लिए जरूरी बनाती है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार का ज्यादातर हिस्सा देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों से आया है, लेकिन विकास के अगले चरण में विकास के नए केंद्र बनने चाहिए। अदाणी ने यहां इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम में कहा, ''भारत के अगले ट्रिलियन (एक हजार अरब) डॉलर के विकास के लिए पूर्वी भारत का आगे बढ़ना जरूरी है। यहीं पर 'विकसित भारत' के सपने को पूरा करने के लिए बंगाल अहम हो जाता है।'' उन्होंने कहा कि पश्चिम में ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के खनिज और औद्योगिक क्षेत्र और बंगाल की खाड़ी के जरिये तेजी से बढ़ते दक्षिण-पूर्व एशियाई और हिंद-प्रशांत बाजारों तक पहुंच के कारण, देश में कोई दूसरी जगह इस राज्य के फायदों के मेल का मुकाबला नहीं कर सकती।
- नयी दिल्ली. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि जिला और राज्य स्तर पर मौजूदा तथा संभावित निर्यातकों की मदद के लिए करीब 1,000 लोगों को व्यापार से जुड़े विषयों पर क्षेत्रीय भाषाओं में प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कारोबार सुगमता और मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के अवसरों पर उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि हर स्थान पर प्रत्येक विभाग के अलग-अलग कार्यालय स्थापित करने के बजाय प्रमुख शहरों में एकीकृत वाणिज्य एवं उद्योग कार्यालय बनाने की योजना है। इन कार्यालयों के जरिये कारोबारियों को कई विभागों और एजेंसियों तक पहुंच के लिए एक साझा केंद्र उपलब्ध कराया जाएगा। वाणिज्य मंत्रालय ने बयान में कहा कि मंत्री ने जिला और राज्य स्तर पर निर्यातकों तथा संभावित निर्यातकों की सहायता के लिए क्षेत्रीय भाषाओं का ज्ञान रखने वाले करीब 1,000 प्रशिक्षित स्थानीय कर्मियों का नेटवर्क तैयार करने की घोषणा की है। मंत्रालय ने कहा, ''इन कर्मियों को प्रशिक्षण देने के बाद तैनात किया जाएगा, ताकि वे उद्योग मंडल और क्षेत्रीय संगठनों के माध्यम से कारोबारियों को मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध करा सकें।
-
मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को एक दिन की परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो नीलामी के जरिये 71,971 करोड़ रुपये की नकदी बैंकों से निकाली। बैंकों में भारी मात्रा में उपलब्ध अतिरिक्त नकदी के बीच यह कदम उठाया गया है। परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) आरबीआई का एक मौद्रिक नीति उपाय है, जिसका उपयोग बैंकों में मौजूद अतिरिक्त नकदी को एक निश्चित अवधि के लिए निकालने के लिए किया जाता है। इसमें ब्याज दर नीलामी के जरिये तय होती है। आधिकारिक बयान के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने 75,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले 71,971 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त कीं और पूरी राशि स्वीकार कर ली। बोली 5.24 प्रतिशत की कट-ऑफ यानी ब्याज और भारांश औसत दर पर स्वीकार की गईं। आरबीआई पिछले महीने से बैंकों में उपलब्ध अतिरिक्त नकदी को निकालने और एक दिन की मुद्रा बाजार दर को रेपो दर के अनुरूप रखने के लिए परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो नीलामी आयोजित कर रहा है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 21 सितंबर तक बैंकों में करीब 4.92 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी होने का अनुमान है। केंद्रीय बैंक ने खुले बाजार परिचालन के तहत 17 सितंबर को 50,000 करोड़ रुपये और 21 सितंबर को 25,000 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियां बेचीं। खुले बाजार परिचालन के तहत बैंकों और अन्य निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियां खरीदने के लिए आरबीआई को भुगतान करना पड़ता है। इससे बैंकों से रुपये की अतिरिक्त नकदी निकल जाती है। केंद्रीय बैंक ने मौजूदा नकदी स्थिति को संभालने के लिए तीन चरणों में कुल एक लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बेचने की घोषणा की थी। अंतिम चरण में 25,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री 28 सितंबर को होनी है।
बैंकों में अतिरिक्त नकदी की बड़ी मात्रा का एक कारण विदेशी मुद्रा प्रवासी (एफसीएनआर-बी) जमा में भारी वृद्धि है। इससे बैंकों में विदेशी मुद्रा आई, जबकि बाद में आरबीआई के साथ किए गए अदला-बदली सौदों से बैंकों को रुपये की नकदी मिली। इसके अलावा महीने के अंत में सरकार की ओर से वेतन और पेंशन समेत विभिन्न मदों में किए गए खर्च से भी बैंकों में नकदी बढ़ी। -
अहमदाबाद. वाघ बकरी टी ग्रुप के चेयरमैन पीयूषभाई देसाई का 15 सितंबर को निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। चाय कारोबार को गांधीवादी मूल्यों, परोपकार और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने वाले देसाई के निधन की जानकारी वाघ बकरी टी ग्रुप ने एक बयान में दी। ग्रुप की ओर से जारी शोक संदेश के अनुसार, देसाई छह दशक से अधिक समय से चाय कारोबार से जुड़े थे और उन्होंने वाघ बकरी को गुजरात से बाहर कई राज्यों में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ग्रुप ने कहा कि देसाई को चाय की गहरी समझ थी।
गुजरात विद्यापीठ के पूर्व कुलपति सुदर्शन अयंगर ने उन्हें ऐसे उद्यमी के रूप में याद किया, जिनके जीवन में महात्मा गांधी के आदर्शों की झलक मिलती थी। अयंगर के अनुसार, देसाई का गांधी से जुड़ाव उनके दादा के जरिये था, जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी से मुलाकात की थी। इस पारिवारिक संबंध के कारण गांधी के 'ट्रस्टीशिप' के विचार के अनुरूप लोगों की मदद करना और सादगी से जीवन जीना देसाई की प्राथमिकताओं में शामिल था। अयंगर ने वाघ बकरी नाम के पीछे देसाई द्वारा बताई गई व्याख्या को भी याद किया।
उनके अनुसार, देसाई कहा करते थे कि ऐसी जगह जहां बाघ और बकरी एक साथ पानी पी सकें, वह अहिंसक समाज का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ब्रांड प्रसिद्ध हुआ, लेकिन उसके पीछे अहिंसक समाज की अवधारणा थी, जिसके माध्यम से देसाई गांधी का संदेश आगे बढ़ा रहे थे। शोक संदेश के अनुसार, देसाई गुजरात विद्यापीठ से गहराई से जुड़े रहे और गांधीवादी विचारों से संबंधित पहल में योगदान देते रहे। अयंगर ने बताया कि देसाई 'अनुवाद फाउंडेशन' के संस्थापक निदेशक थे। यह संस्था गुजरात विद्यापीठ के तत्कालीन कुलाधिपति नारायण देसाई के साथ मिलकर स्थापित की गई थी। अयंगर भी इस फाउंडेशन के निदेशक रहे। इसके दो प्रमुख उद्देश्य महात्मा गांधी की शेष रचनाओं और महादेवभाई देसाई की डायरी का अनुवाद करना तथा अच्छी साहित्यिक और ज्ञानवर्धक सामग्री का एक भारतीय भाषा से दूसरी भारतीय भाषा में सीधे अनुवाद को बढ़ावा देना था, जिसमें अंग्रेजी या हिंदी को माध्यम न बनाया जाए। अयंगर के अनुसार, 2002 के गुजरात दंगों के दौरान देसाई कॉरपोरेट जगत की उन चुनिंदा आवाज में शामिल थे, जिन्होंने हिंसा के खिलाफ खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि देसाई ने चुनी काका और अन्य लोगों द्वारा आयोजित कोचरब आश्रम से गांधी आश्रम तक शांति मार्च में हिस्सा लिया था और वह हिंसा के पूरी तरह खिलाफ थे। अयंगर ने देसाई को याद करते हुए कहा कि उनका मानना था कि हिंसा पूरे समाज की विफलता है।
उन्होंने कहा कि देसाई सरकार की गलतियों की ओर भी इशारा करते थे, लेकिन अहिंसक तरीके से अपनी बात रखते थे। देसाई ने 2016 से 2020 तक ब्लाइंड पीपल्स एसोसिएशन (बीपीए) के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। संस्था के महासचिव भूषण पुनानी ने उन्हें महान इंसान और परोपकारी बताया। -
नयी दिल्ली. एनटीपीसी ने महाराष्ट्र के मौदा सुपर थर्मल पावर स्टेशन में 400 मेगावाट-घंटा क्षमता वाली बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) परियोजना के लिए जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स को दिया गया ठेका निरस्त कर दिया है। बिजली क्षेत्र की कंपनी ने शनिवार को बयान में कहा कि ठेकेदार अपनी संविदात्मक जिम्मेदारियां पूरी करने और परियोजना में अपेक्षित प्रगति हासिल करने में विफल रहा। एनटीपीसी ने कहा, "ठेकेदार की संविदात्मक जिम्मेदारियां पूरी करने और परियोजना में अपेक्षित प्रगति हासिल करने में विफलता के कारण 400 मेगावाट-घंटा बीईएसएस परियोजना के लिए जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स को दिया गया ठेका समाप्त कर दिया गया है।" परियोजना मार्च 2026 में दी गई थी और इसका कुल मूल्य 413.37 करोड़ रुपये था। यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बीईएसएस परियोजना थी और राष्ट्रीय ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप इसे 15 महीने में पूरा किया जाना था। लेकिन परियोजना की महत्वपूर्ण गतिविधियों में काफी देरी हुई। एनटीपीसी ने कहा कि उसने जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के लिए संविदात्मक नोटिस जारी किया था, लेकिन वह कदम उठाने में विफल रही। इसके बाद एनटीपीसी ने ठेका तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया और संविदात्मक प्रावधानों के तहत करीब 91 करोड़ रुपये की उपलब्ध प्रतिभूतियों को भुना लिया। एनटीपीसी विद्युत मंत्रालय के अधीन है और यह देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादन कंपनी है।
-
नयी दिल्ली. सरकार ने 16 सितंबर से शुरू हुए पखवाड़े के लिए पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले 'अप्रत्याशित लाभ कर' (विंडफॉल) में कटौती की है। डीजल के निर्यात पर सड़क एवं बुनियादी ढांचा उपकर समेत विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) की दर अब 25 रुपये से घटाकर 20 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। वहीं, विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर एसएईडी 19 रुपये से घटाकर 15 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क घटाकर 0.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पिछले पखवाड़े में 1.5 रुपये प्रति लीटर था। वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि शुल्क की नयी दरें 16 सितंबर से प्रभावी होंगी।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सरकार ने 27 मार्च को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर शुल्क लगाया था। इन शुल्क दरों में हर पखवाड़े संशोधन किया जाता है। पेट्रोल के निर्यात पर भी 16 मई से यह शुल्क लागू किया गया था। मंत्रालय ने यह भी कहा कि घरेलू खपत वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच घरेलू स्तर पर ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अप्रत्याशित लाभ कर लगाया गया था। -
मुंबई. देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो ने हाल में शिशु यात्रा और अकेले यात्रा करने वाले नाबालिगों समेत विभिन्न सहायक सेवाओं के शुल्क बढ़ा दिए हैं। सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। हालांकि, शुल्क में बदलाव पर इंडिगो की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं की गई है।
सूत्रों ने कहा कि इंडिगो की शिशु यात्रा, अकेले यात्रा करने वाले नाबालिगों और अतिरिक्त सामान समेत कई सेवाओं के शुल्क में संशोधन किया गया है। घरेलू उड़ानों में शिशु यात्रा का शुल्क बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया गया है, जो पहले 2,200 रुपये था। अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर यह शुल्क अलग-अलग है। तीन दिन से अधिक और दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को शिशु की श्रेणी में रखा जाता है।इंडिगो की वेबसाइट के अनुसार, अकेले यात्रा करने वाले नाबालिगों के लिए घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का शुल्क क्रमशः 5,999 रुपये और 12,999 रुपये है। हालांकि, इन सेवाओं के पुराने शुल्क का तत्काल पता नहीं चल सका। वेबसाइट के अनुसार, फास्ट-फॉरवर्ड सेवा का शुल्क 650 रुपये और यात्रा प्रमाणपत्र का शुल्क 300 रुपये है। एक सूत्र ने कहा कि परिचालन लागत बढ़ने, खासकर ईंधन की कीमतों में वृद्धि के बीच हाल के सप्ताहों में कुछ सहायक सेवाओं के शुल्क बढ़ाए गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में इंडिगो की घरेलू बाजार हिस्सेदारी 67.4 प्रतिशत थी। -
नयी दिल्ली. किसी व्यापारी के 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (एमडीआर) यानी शुल्क लगाना उस व्यवस्था में बदलाव है, जिसमें पिछले छह वर्षों से यूपीआई भुगतान मुफ्त रखने की लागत मुख्य रूप से बैंकों, भुगतान कंपनियों और सरकार के बजटीय प्रोत्साहन से उठाई जा रही थी। मंगलवार शाम जारी आधिकारिक बयान में 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत की दर से एमडीआर लगाए जाने की बात कही गई। हालांकि, यह शुल्क ग्राहक की जगह व्यापारी से वसूला जाएगा और दो व्यक्तियों के बीच होने वाले लेनदेन को इसमें शामिल नहीं किया गया है। इसके साथ जनवरी, 2020 से लागू शून्य एमडीआर व्यवस्था बदल गई।
पुरानी व्यवस्था का मकसद डिजिटल भुगतान को तेजी से बढ़ावा देना था। उस समय यह मॉडल समझ में आता था क्योंकि यूपीआई अभी विस्तार के दौर में था। लेकिन आज इसका पैमाना बिल्कुल बदल चुका है। अगस्त, 2026 में यूपीआई पर 2,451 करोड़ लेनदेन किए गए और उनका कुल मूल्य 29.9 लाख करोड़ रुपये रहा। इतने बड़े पैमाने पर भुगतान नेटवर्क को 24 घंटे चलाने, उसकी क्षमता बढ़ाने, साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने की लागत भी बढ़ी है। यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने के फैसले के पीछे यही आर्थिक वजह बताई जा रही है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने उद्योग जगत के अनुमानों का हवाला देते हुए कहा है कि यूपीआई को चलाने की सालाना लागत करीब 20,000 करोड़ रुपये है। इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार ने यूपीआई के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। ऐसे में सिर्फ सरकारी प्रोत्साहन के सहारे बढ़ते नेटवर्क की लागत उठाने का मॉडल लंबे समय तक पर्याप्त नहीं रह गया था।
हालांकि, सरकार ने एमडीआर को सभी भुगतानों पर लागू करने के बजाय बड़े कारोबारी लेनदेन तक सीमित रखा है। वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, 2,000 रुपये से अधिक के पी2एम (व्यक्तियों द्वारा दुकानदारों को भुगतान) लेनदेन कुल पी2एम संख्या का केवल करीब चार प्रतिशत है, लेकिन उनका हिस्सा कुल यूपीआई भुगतान मूल्य में करीब दो-तिहाई है। यह आंकड़ा बताता है कि इस नीति का निशाना रोजमर्रा के यूपीआई इस्तेमाल पर नहीं, बल्कि अपेक्षाकृत बड़े वाणिज्यिक भुगतानों पर है। नई व्यवस्था के तहत 5,000 रुपये के पी2एम भुगतान पर 20 रुपये और 50,000 रुपये पर 200 रुपये का एमडीआर लगेगा। यह 75,000 रुपये पर 300 रुपये तक पहुंच जाएगा और उसके बाद इसी स्तर पर स्थिर रहेगा। रेलवे, दूरसंचार, ईंधन और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर पांच रुपये का एकसमान शुल्क और पूंजी बाजार लेनदेन पर 0.02 प्रतिशत की दर रखी गई है। इस शुल्क व्यवस्था में छोटे व्यापारियों को अलग रखा गया है। क्यूआर कोड के जरिये महीने में एक लाख रुपये तक का यूपीआई भुगतान लेने वाले छोटे व्यापारी इस शुल्क से मुक्त रहेंगे। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में व्यापारियों के क्यूआर भुगतान भी मुफ्त रहेंगे। यानी जिस छोटे व्यापारी के लिए यूपीआई कम मूल्य वाले दैनिक लेनदेन का माध्यम है, उसकी मौजूदा व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। ग्राहकों पर यह शुल्क नहीं लगेगा। एमडीआर व्यापारी पर लगेगा और एनपीसीआई के मुताबिक इसका बोझ ग्राहक पर नहीं डाला जा सकता। फिर भी इसका अंतिम आर्थिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि व्यापारी इस लागत को अपने मार्जिन में समाहित करता है या अपनी कीमतों में किसी तरह समायोजित करता है। एमडीआर दरअसल यूपीआई उपयोगकर्ताओं पर शुल्क लगाने से ज्यादा यूपीआई से जुड़ी लागत का बोझ उठाने के तरीके में बदलाव है। सरकार ने छोटे और रोजमर्रा के भुगतान को मुफ्त रखते हुए बड़े वाणिज्यिक लेनदेन से नेटवर्क के रखरखाव की लागत का एक हिस्सा सीधे जुटाने की व्यवस्था की है। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोमवार को सोने की कीमत 500 रुपये टूटकर 1,55,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर में तेजी के बीच वैश्विक बाजारों में बिकवाली से सोने में गिरावट आई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना शुक्रवार को 1,55,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, इस गिरावट के रुख के उलट चांदी की कीमत 2,34,600 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर सहित) पर स्थिर रही। वैश्विक स्तर पर, हाजिर सोना 57.22 डॉलर या 1.3 प्रतिशत टूटकर 4,291.71 डॉलर प्रति औंस रह गया और चांदी की कीमत लगभग तीन प्रतिशत टूटकर 62.82 डॉलर रह गई। निवेश मंच मुडरेक्स के लीड क्वांट विश्लेषक अक्षत सिद्धांत ने कहा कि सोना टूटकर लगभग 4,300 डॉलर प्रति औंस और चांदी 64 डॉलर प्रति औंस रह गई, जो लगातार तीसरी साप्ताहिक गिरावट है क्योंकि निवेशकों ने फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी को ध्यान में रखा है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है, जिससे सोने और चांदी की मांग पर और दबाव पड़ा है।
-
नयी दिल्ली. सोयाबीन डीओसी के निर्यात की खेप में भारी गिरावट के कारण भारत का डी-आयल्ड केक या तेल रहित खल (डीओसी) निर्यात चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 13 प्रतिशत घटकर 9.57 लाख टन रह गया। उद्योग के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने बृहस्पतिवार को कहा कि जून, 2026 में डीओसी का निर्यात 31 प्रतिशत घटकर 2,17,757 टन रह गया, जबकि एक साल पहले यह 3,13,404 टन था। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में डीओसी का कुल निर्यात 9,57,224 टन रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 10,94,593 टन था। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सोयाबीन डीओसी का निर्यात 66 प्रतिशत घटकर 1,69,502 टन रह गया, जो एक साल पहले 4,93,439 टन था। एसईए ने बताया, ''दक्षिण अमेरिकी प्रतिस्पर्धियों (अर्जेंटीना और ब्राजील) से सस्ती आपूर्ति की तुलना में भारतीय सोयाबीन डीओसी को वैश्विक स्तर पर कीमतों के मामले में भारी नुकसान का सामना करना पड़ा, जिससे कुल निर्यात की मात्रा कम हो गई।'' एसोसिएशन ने निर्यात में गिरावट का कारण घरेलू स्तर पर ऊंची कीमतों और पशु आहार व पशुपालन क्षेत्र से स्थानीय मांग में तेजी को भी बताया। एसईए ने कहा, ''लाल सागर में जहाज की आवाजाही में लगातार रुकावट और माल ढुलाई के ऊंचे खर्चों का असर कुल कृषि निर्यात से होने वाली कमाई पर पड़ता रहा...।'' अप्रैल-जून, 2026 के दौरान, चीन, बांग्लादेश और वियतनाम भारतीय डीओसी के प्रमुख आयातक देश बनकर उभरे।
चीन ने अप्रैल-जून, 2026 के दौरान 3,13,384 टन डीओसी का आयात किया, जबकि एक साल पहले यह 1,87,361 टन था। बांग्लादेश ने 1,43,013 टन का आयात किया, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 1,26,351 टन था। -
नयी दिल्ली. भारत में नए दौर की अर्थव्यवस्था का राजस्व वित्त वर्ष 2030-31 तक तीन गुना होकर करीब 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। हालांकि, इस वृद्धि के बावजूद मुनाफे का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक ही सीमित रहने का अनुमान है। रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। नए दौर की अर्थव्यवस्था से आशय ऐसी अर्थव्यवस्था से है जो कृत्रिम मेधा (एआई), ज्ञान-आधारित पूंजी और डिजिटल नवाचार से संचालित होती है। रिपोर्ट के मुताबिक, नए दौर की घरेलू कंपनियों का संयुक्त राजस्व वित्त वर्ष 2021-22 के 33 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 100 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान है। इसके सालाना 25 प्रतिशत की दर से बढ़कर वित्त वर्ष 2030-31 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। रेडसीर ने कहा कि उपभोक्ता वस्तुएं, खुदरा और मनोरंजन जैसे उपभोग आधारित क्षेत्र इस विस्तार की आधारशिला बने रहेंगे। इनके सालाना 25 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2030-31 तक 150 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान है, जो कुल बाजार का करीब आधा हिस्सा होगा। वहीं, प्रौद्योगिकी, मीडिया एवं दूरसंचार, एआई और उन्नत विनिर्माण जैसे उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्र सालाना 26 प्रतिशत की दर से बढ़ सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों का सामूहिक मुनाफा वित्त वर्ष 2024-25 में पहली बार सकारात्मक होकर 1.4 अरब डॉलर रहा। हालांकि, मुनाफा कुछ क्षेत्रों में ही केंद्रित है। वित्त वर्ष 2024-25 के कुल लाभ में अकेले बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र का योगदान 140 प्रतिशत रहा। बीएफएसआई को हटाने पर बाकी सभी क्षेत्रों को मिलाकर भी घाटे की स्थिति रहती है। वित्त वर्ष 2030-31 तक 300 अरब डॉलर का राजस्व हासिल होने पर कुल मुनाफा 5-10 अरब डॉलर रह सकता है, जो दो-तीन प्रतिशत मार्जिन के बराबर होगा। इसकी तुलना में रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली (एफएमसीजी) सूचीबद्ध कंपनियों का मार्जिन 12-18 प्रतिशत और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवा कंपनियों का 20-25 प्रतिशत है। रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता वस्तुओं के नए ब्रांडों को बड़े पैमाने पर कारोबार खड़ा करने में लगने वाला समय भी कम हुआ है। सीधे ग्राहक को बिक्री (डी2सी) और त्वरित वाणिज्य के विस्तार से 100 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करने में लगने वाला समय 6.8 साल से घटकर 3.4 साल रह गया है। इसी तरह, 500 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करने का समय 7.9 साल से घटकर चार साल रह गया है। रेडसीर का अनुमान है कि 100 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व वाले नए दौर के उपभोक्ता ब्रांडों की संख्या वित्त वर्ष 2021-22 के करीब 90 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 230 और वित्त वर्ष 2030-31 तक करीब 500 हो सकती है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार 500 करोड़ रुपये से आगे बढ़ना अभी भी चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए मजबूत ऑफलाइन वितरण नेटवर्क, आधुनिक खुदरा कारोबार की क्षमता और पर्याप्त कार्यशील पूंजी की जरूरत होती है। पूंजी उपलब्धता के मोर्चे पर रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी बाजार से नए दौर की कंपनियों के लिए वित्तपोषण कैलेंडर वर्ष 2026 में सालाना 25 प्रतिशत बढ़कर 17 अरब डॉलर हो सकता है। वर्ष 2030 तक सार्वजनिक और निजी बाजार से इन कंपनियों के लिए सालाना 50 अरब डॉलर तक की पूंजी जुटाने का अनुमान है।
-
नयी दिल्ली. जिंदल सुप्रीम (इंडिया) लिमिटेड ने अपने 125 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) का मूल्य दायरा 88-93 रुपये प्रति शेयर तय किया है। सार्वजनिक घोषणा के अनुसार, आईपीओ बोली के लिए 16 सितंबर को खुलेगा और 18 सितंबर को बंद होगा। बड़े (एंकर) निवेशक 15 सितंबर को बोली लगा सकेंगे। आईपीओ 1.07 करोड़ नए शेयर और 26.86 लाख शेयर की बिक्री पेशकश (ओएफएस) का मिश्रण होगा। इस तरह कुल आईपीओ का आकार करीब 124.88 करोड़ रुपये बैठता है। नए शेयर से प्राप्त राशि का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और सामान्य कामकाज के लिए किया जाएगा।
कंपनी के शेयर को 23 सितंबर को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध किए जाने का प्रस्ताव है।
जिंदल सुप्रीम विभिन्न अवसंरचना और औद्योगिक उपयोगों के लिए स्टील पाइप तथा ट्यूब का विनिर्माण और आपूर्ति करती है। -
नयी दिल्ली. पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर करीब पांच रुपये और डीजल पर 23 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। विश्लेषकों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
कच्चे तेल की कीमत जुलाई के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। इससे पहले 23 जुलाई को इसकी कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर थी। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.5 प्रतिशत बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई है, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चा तेल करीब दो प्रतिशत बढ़कर 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। यह तेजी अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव तथा एक-दूसरे के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई के बाद आई है। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक और उपभोक्ता देश भारत पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है। विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश का डॉलर में होने वाला आयात खर्च बढ़ता है, जिससे व्यापार घाटे और रुपये पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा, अगर खुदरा स्तर पर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बदलाव नहीं किया जाता है, तो पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को इनकी बिक्री पर नुकसान उठाना पड़ता है। इक्रा लिमिटेड के कॉरपोरेट रेटिंग्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं सह-समूह प्रमुख प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण बुधवार को ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई और भारतीय कच्चे तेल की औसत कीमत करीब 109 डॉलर प्रति बैरल हो गई। फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तीन महीने से अधिक समय से कोई बदलाव नहीं हुआ है। आखिरी बार 25 मई को कीमतों में संशोधन किया गया था, जब पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ था। ब्रिकवर्क रेटिंग्स के शोध प्रमुख राजीव शरण ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण आई है, न कि मांग बढ़ने से। उन्होंने कहा कि महंगा कच्चा तेल विमानन, पेंट, टायर, रसायन, लॉजिस्टिक और उपभोक्ता सामान जैसे तेल पर निर्भर क्षेत्रों के मुनाफे पर दबाव डालेगा। -
नयी दिल्ली. टाटा बोइंग एयरोस्पेस लिमिटेड (टीबीएएल) ने हैदराबाद स्थित अपनी अत्याधुनिक सुविधा से एएच-64ई अपाचे लड़ाकू हेलिकॉप्टर के लिए 400वें ढांचे (फ्यूजलेज) का सफलतापूर्वक निर्माण पूरा कर लिया है। टीबीएएल ने आधिकारिक बयान में सोमवार को यह जानकारी दी। टीबीएएल, बोइंग और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) का संयुक्त उद्यम है।
टीबीएएल के बयान के अनुसार, इन ढांचों का निर्माण भारत में किया जाता है और दुनिया भर में आपूर्ति किए जाने वाले अपाचे हेलिकॉप्टर में लगाए जाते हैं। इनमें अमेरिकी सेना को आपूर्ति किए जाने वाले हेलीकॉप्टरों के साथ-साथ 2025 में भारतीय सेना को सौंपे गए छह अपाचे हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं। भारतीय वायुसेना के पास 22 एएच-64ई अपाचे हेलिकॉप्टर हैं।
बयान में कहा गया, "टीबीएएल ने हैदराबाद में 52,000 वर्ग मीटर के अपने संयंत्र से दुनिया के सबसे उन्नत और प्रमाणित लड़ाकू हेलिकॉप्टर एएच-64ई अपाचे के लिए 400वें ढांचे को सफलतापूर्वक तैयार कर लिया है।" वर्ष 2016 में स्थापित टीबीएएल में 750 से अधिक इंजीनियर और तकनीशियन कार्यरत हैं। ये कर्मचारी अपाचे हेलिकॉप्टर के लिए ढांचा बनाने के लिए उन्नत रोबोटिक्स, स्वचालन और एयरोस्पेस विनिर्माण तकनीकों का उपयोग करते हैं। कंपनी ने कहा कि करीब 1,300 अपाचे हेलिकॉप्टर 19 देशों में परिचालन में हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। - नयी दिल्ली. माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की 12 सितंबर को होने वाली बैठक अब सात अक्टूबर को होगी। यह बदलाव ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के कारण किया गया है। भारत 12 और 13 सितंबर को नयी दिल्ली में वार्षिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। सम्मेलन में पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक प्रभाव सहित कई महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा होने की उम्मीद है। ब्रिक्स में पहले ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को इसमें शामिल किया गया। इंडोनेशिया 2025 में ब्रिक्स का सदस्य बना। सूत्रों ने बताया कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को देखते हुए जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक अब सात अक्टूबर को होगी। इससे पहले पांच और छह अक्टूबर को अधिकारियों की बैठक होगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली और राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली परिषद की बैठक एक साल से अधिक समय बाद होगी। परिषद की 56वीं बैठक तीन-चार सितंबर, 2025 को हुई थी। उस बैठक में केंद्र और राज्यों ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों और श्रेणियों में बड़े बदलाव का फैसला किया था।
- नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की कीमतों में 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई है। संशोधित दरें शनिवार सुबह 6 बजे से प्रभावी हो गई हैं। यह वृद्धि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रमुख शहरी गैस वितरक इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) द्वारा घोषित की गई है। हालिया बढ़ोतरी के बाद, दिल्ली में सीएनजी की कीमत 83.09 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 86.98 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। संशोधित दरें नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम सहित कई पड़ोसी शहरों में भी लागू होंगी।नोएडा और गाजियाबाद में अब सीएनजी की कीमत 95.59 रुपये प्रति किलोग्राम होगी, जबकि गुरुग्राम में नई कीमत 92.01 रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई है। इस नवीनतम वृद्धि से सीएनजी पर अत्यधिक निर्भर वाहन चालकों और वाणिज्यिक वाहन संचालकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। ऑटो-रिक्शा, टैक्सी, ऐप-आधारित कैब सेवाएं और अन्य वाणिज्यिक परिवहन संचालकों को इस संशोधन के बाद ईंधन पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है। सीएनजी का उपयोग करने वाले निजी कार मालिकों को भी ईंधन पर अधिक खर्च करना पड़ेगा।हाल के महीनों में सीएनजी की कीमतों में लगातार वृद्धि के बाद यह ताजा बढ़ोतरी हुई है। मई 2026 में, आईजीएल ने दिल्ली में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की एक और वृद्धि की घोषणा की थी। यह संशोधन 26 मई से लागू होने वाली 1 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि के कुछ ही दिनों बाद किया गया था, क्योंकि सीएनजी की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं। सार्वजनिक क्षेत्र की गैस वितरण कंपनी आईजीएल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की कीमतें “काफी अधिक” बनी हुई हैं और बढ़ती लागत का असर तेजी से महसूस किया जा रहा है।कंपनी ने कहा कि सीएनजी की कीमतों में 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि आवश्यक थी ताकि इनपुट गैस की लागत में वृद्धि की आंशिक रूप से भरपाई की जा सके और उपभोक्ताओं को सीएनजी की निरंतर और विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। बार-बार हो रही मूल्य वृद्धि ने परिवहन संचालकों के बीच चिंताएं बढ़ा दी हैं, खासकर महानगरीय क्षेत्रों में जहां सीएनजी से चलने वाले वाहन सार्वजनिक और वाणिज्यिक परिवहन नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
-
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर के बाजारों में प्याज 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने के बाद केंद्र सरकार ने आम लोगों को बड़ी राहत दी है। सरकारी एजेंसियां अब रियायती दर पर प्याज उपलब्ध करा रही हैं। महज 35 रुपये प्रति किलो की कीमत पर यह सस्ता प्याज दिल्ली-एनसीआर के 13 स्थानों पर बिक रहा है। जल्द ही बिक्री केंद्रों की संख्या बढ़ाकर करीब 40 कर दी जाएगी।
बृहस्पतिवार को कृषि भवन परिसर में उपभोक्ता मामलों के विभाग की सचिव निधि खरे ने नेफेड और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ(एनसीसीएफ) की मोबाइल वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसी परिसर में लोगों को 35 रुपये किलो की दर से प्याज बेचा गया। पहले दिन करीब 400 किलो प्याज की बिक्री हुई। निधि खरे ने बताया कि देश में प्याज का उत्पादन और उपलब्धता पर्याप्त है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से कीमतों में उतार-चढ़ाव होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर अंकुश लगाने के कई कदम उठा रही है।दिल्ली में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने के लिए नासिक से चली पहली ‘कांदा एक्सप्रेस’ नई दिल्ली के आदर्श नगर रेलवे स्टेशन पहुंच गई है। इस ट्रेन के जरिए बड़ी मात्रा में प्याज भेजा गया है, जिसकी रियायती दर पर बिक्री की जाएगी। आने वाले दिनों में और ट्रेनें पहुंचने की उम्मीद है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के निर्देश पर मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत बनाए गए बफर स्टॉक से 840 टन प्याज दिल्ली भेजने का फैसला लिया गया है। इसमें करीब 450 टन प्याज पहली कांदा एक्सप्रेस के जरिए पहुंच चुका है। लासलगांव स्टेशन प्रबंधक प्रितेश दुबे ने बताया कि ट्रेन को जल्द से जल्द गंतव्य तक पहुंचाने का प्रयास किया गया, ताकि राजधानी के उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। सरकार का मानना है कि रियायती दर पर बिक्री और अतिरिक्त आपूर्ति से दिल्ली-एनसीआर में प्याज की कीमतें नियंत्रित होंगी। त्योहारी सीजन में आम उपभोक्ताओं को महंगे प्याज से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि भारत का इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बाजार वर्ष 2030 तक बढ़कर 20 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा और इससे पांच करोड़ रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। गडकरी ने 'सीआईआई-आईटीसी टिकाऊ विकास उत्कृष्टता केंद्र' की ओर से आयोजित एक सम्मेलन में कहा कि देश में फिलहाल 57 लाख बिजलीचालित वाहन पंजीकृत हैं और कुल वाहन बाजार में ईवी की पहुंच सात प्रतिशत है। उन्होंने कहा, ''भारत का ईवी बाजार वर्ष 2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये मूल्य का हो जाएगा। ऐसे में यह क्षेत्र 2030 तक पांच करोड़ रोजगार भी पैदा करेगा।'' गडकरी ने कहा कि भारत में हर साल एक लाख इलेक्ट्रिक बस की मांग है, लेकिन देश में सालाना केवल 50,000-60,000 ईवी बस का ही विनिर्माण हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले पांच साल में भारत के वाहन उद्योग को दुनिया में पहले स्थान पर पहुंचाना है। उन्होंने कहा, ''यह मुश्किल जरूर है, लेकिन असंभव नहीं है।'' सड़क परिवहन मंत्री ने कहा कि भारत में निर्मित वाहनों की गुणवत्ता अच्छी और लागत कम होने के कारण दुनिया की प्रमुख वाहन कंपनियां देश में मौजूद हैं। गडकरी ने कहा कि जब उन्होंने परिवहन मंत्री का पद संभाला था, तब भारतीय वाहन उद्योग का आकार 14 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर करीब 22 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसके मुकाबले अमेरिका का वाहन उद्योग 78 लाख करोड़ रुपये और चीन का 47 लाख करोड़ रुपये का है। उन्होंने कहा कि भारत जीवाश्म ईंधन के आयात पर 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है और इसके कारण प्रदूषण की समस्या भी पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि जैव ईंधन भविष्य का महत्वपूर्ण विकल्प है। गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य देश की लॉजिस्टिक लागत को घटाकर आठ प्रतिशत करना है।
उन्होंने आईआईटी चेन्नई, आईआईटी कानपुर और आईआईएम बेंगलुरु की हाल में आई रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि एक्सप्रेसवे और आर्थिक गलियारों के निर्माण से भारत की लॉजिस्टिक लागत 16 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह गई है। -
नयी दिल्ली. एनटीपीसी का 2037 तक 244 गीगावाट की परिचालन क्षमता विकसित करने और 16.86 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने का लक्ष्य है। कंपनी पूरी ऊर्जा मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। एनटीपीसी के चेयरमैन गुरदीप सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि अगला दशक कंपनी के इतिहास में वृद्धि के सबसे महत्वपूर्ण दौर में से एक होगा। अर्थव्यवस्था के विस्तार और जीवन स्तर में सुधार के साथ भारत की बिजली की जरूरत लगातार बढ़ती रहेगी। उन्होंने कंपनी की 50वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए कहा कि इसी के साथ बिजली व्यवस्था की संरचना में भी तेजी से बदलाव आएगा। सिंह ने कहा, ''हमने दीर्घकालिक क्षमता के अपने लक्ष्य बढ़ाए हैं और अब 2032 तक 149 गीगावाट उत्पादन क्षमता का लक्ष्य रखा है, जिसमें 60 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है। 2037 तक भंडारण क्षमता को छोड़कर 244 गीगावाट तक पहुंचने का हमारा लक्ष्य है।'' फिलहाल एनटीपीसी की क्षमता करीब 91 गीगावाट है।
चेयरमैन ने कहा कि कंपनी की वित्त वर्ष 2036-37 तक ताप, जलविद्युत एवं पंप स्टोरेज, नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी भंडारण, खनन तथा परमाणु ऊर्जा क्षेत्रों में कुल करीब 16.86 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय करने की भी योजना है। यह किसी भारतीय बिजली कंपनी द्वारा किए जाने वाले सबसे बड़े निवेश कार्यक्रमों में से एक होगा। उन्होंने कहा कि एनटीपीसी का बदलाव केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा। सिंह ने कहा कि कंपनी पूरी ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में अपनी क्षमताएं विकसित कर रही है।
परमाणु ऊर्जा के बारे में उन्होंने कहा कि यह एनटीपीसी की भविष्य की वृद्धि के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है। कंपनी परमाणु ऊर्जा मिशन के तहत 2047 तक सरकार के 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के महत्वाकांक्षी लक्ष्य में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करना चाहती है। राजस्थान में एनपीसीआईएल के साथ संयुक्त उद्यम में 2.8 गीगावाट की परमाणु ऊर्जा परियोजना विकसित कर रही एनटीपीसी अलग-अलग परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने की भी इच्छुक है। सिंह ने कहा, ''परमाणु परियोजनाओं एवं प्रौद्योगिकियों के लिए 13 राज्यों में 34 अतिरिक्त स्थानों को लेकर अध्ययन तथा चर्चा आगे बढ़ रही है।'' उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा विश्वसनीय, कम कार्बन उत्सर्जन वाली और चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराकर नवीकरणीय तथा ताप विद्युत, दोनों की पूरक होगी। चेयरमैन ने बताया कि एनटीपीसी की कोयला गैसीकरण आधारित कृत्रिम प्राकृतिक गैस परियोजना पर काम अच्छी तरह आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ''हम 5.75 लाख टन सालाना क्षमता वाली परियोजना पर भी अच्छी प्रगति कर रहे हैं। इसके स्थापित होने के बाद यह भारत में अपनी तरह का पहला संयंत्र होगा और सीधे तौर पर आयातित प्राकृतिक गैस का स्थान लेगा।'' एनटीपीसी समूह ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे अधिक 27,546 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है। समूह की कर पूर्व आय भी बढ़कर 60,564 करोड़ रुपये हो गई जबकि समूह का नेटवर्थ भी बढ़कर करीब 2.03 लाख करोड़ रुपये रहा। -
देखें क्या है कीमत...
चेन्नई. इंडिया यामाहा मोटर ने बृहस्पतिवार को अपनी सुपरस्पोर्ट मोटरसाइकिल श्रृंखला का विस्तार करते हुए नई 'वाईजेडएफ-आर2' को वैश्विक स्तर पर पेश किया। चेन्नई संयंत्र में निर्मित इस मोटरसाइकिल की कीमत 2.30 लाख रुपये रखी गई है।
कंपनी ने बताया कि इस मोटरसाइकिल में 200 सीसी का इंजन दिया गया है, जो 26.5 हॉर्सपावर की अधिकतम शक्ति और 19.1 एनएम का अधिकतम टॉर्क पैदा करता है। कंपनी ने इस महीने की शुरुआत में 10,000 रुपये की टोकन राशि के साथ इसकी बुकिंग शुरू की थी। यह राशि मोटरसाइकिल की अंतिम कीमत में समायोजित की जाएगी। यामाहा मोटर कंपनी लिमिटेड के कार्यपालक अधिकारी और यामाहा मोटर इंडिया समूह के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक हाजिमे आओटा ने संवाददाताओं से कहा कि 200 सीसी का इंजन किसी मौजूदा इंजन में बदलाव करके नहीं, बल्कि पूरी तरह नए सिरे से विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि 200 सीसी इंजन का चुनाव घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक बाजारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने कहा कि पहली नजर में 'वाईजेडएफ-आर2' और आर15 एक जैसी दिख सकती हैं, लेकिन दोनों की संरचना और निर्माण प्रक्रिया अलग है। उन्होंने दोनों मॉडल के बीच अंतर को आईफोन-4 से आईफोन-5 के विकास जैसा बताया।
आओटा के मुताबिक, नई मोटरसाइकिल को वैश्विक स्तर के कड़े उत्सर्जन और सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए विकसित किया गया है। इसे मुख्य रूप से जापान, यूरोप और ताइवान जैसे विकसित बाजारों में निर्यात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कंपनी को नई मोटरसाइकिल की बिक्री में घरेलू बाजार की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत और निर्यात की 30 प्रतिशत रहने की उम्मीद है कंपनी ने पूरे साल के लिए करीब 50,000 इकाइयों के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। सितंबर से दिसंबर के बीच शुरुआती चरण में 15,000 से 20,000 इकाइयों के उत्पादन की उम्मीद है। -
नयी दिल्ली. प्याज की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार बृहस्पतिवार से दिल्ली में बफर स्टॉक का प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर बेचेगी। देश के कई शहरों में प्याज का खुदरा भाव 55 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी बृहस्पतिवार को दिल्ली में रियायती दर पर प्याज की बिक्री की शुरुआत करेंगे। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। सरकार ने 2026 के लिए प्याज का 1.21 लाख टन का 'बफर स्टॉक' तैयार किया है। इसी भंडार से प्याज बाजार में उतारा जाएगा। इस खुदरा बिक्री का संचालन तीन एजेंसियां भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नाफेड), भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) और केंद्रीय भंडार करेंगी। एनसीसीएफ के प्रबंध निदेशक अनीस जोसेफ चंद्रा ने पीटीआई-भाषा को बताया, ''हम कल दिल्ली में बिक्री शुरू करेंगे और सप्ताहांत तक इसे एनसीआर क्षेत्र में भी शुरू कर दिया जाएगा।'' एनसीसीएफ के पास प्याज का करीब 62,000 टन बफर स्टॉक है। इसमें से महाराष्ट्र के नासिक से 400 टन प्याज रेल के जरिये दिल्ली भेजा जा रहा है। इसके लिए 'कांदा एक्सप्रेस' नाम से चलाई गई विशेष रेलगाड़ी के बृहस्पतिवार को दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है। एनसीसीएफ दिल्ली में केंद्रीय भंडार के 100 स्टोर के जरिये प्याज बेचेगा। इसके अलावा मदर डेयरी के करीब 300 बिक्री केंद्रों के जरिये प्याज बेचने को लेकर भी बातचीत चल रही है। एनसीसीएफ शुरुआत में 15 मोबाइल वैन के जरिये भी प्याज बेचेगा। इनकी संख्या शुक्रवार से बढ़ाकर 40 की जाएगी। चंद्रा ने कहा कि रेल के जरिये आने वाली प्याज की खेप का इस्तेमाल चंडीगढ़, लुधियाना, वाराणसी और अन्य शहरों में भी बिक्री के लिए किया जाएगा। नाफेड के पास 55,000 टन से कम प्याज का बफर स्टॉक है। वह भी दिल्ली के अलावा कोच्चि और गुवाहाटी समेत अन्य केंद्रों पर रियायती दर पर प्याज बेचेगा। पहली विशेष रेलगाड़ी 800 टन प्याज लेकर नासिक से दिल्ली के लिए रवाना हो चुकी है।
-
नयी दिल्ली. भारत के प्राथमिकता वाले 26 बाजारों में चावल का निर्यात 2025 के भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) के बाद के पांच महीनों में पिछले तीन वर्ष के औसत से अधिक रहा। इससे संकेत मिलता है कि स्थानीय खान-पान के अनुरूप भारतीय चावल की किस्मों को बढ़ावा देने की रणनीति से विदेशों में मांग के विविधीकरण में मदद मिल सकती है। भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ) द्वारा वाणिज्यिक आसूचना एवं सांख्यिकी महानिदेशालय के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच 26 बाजारों को मिलाकर चावल का निर्यात 23,476 करोड़ रुपये और 47.9 लाख टन रहा। इसमें बासमती और गैर-बासमती दोनों तरह के चावल शामिल हैं। निर्यात मूल्य पिछले तीन वर्ष में नवंबर-मार्च की इसी अवधि के औसत से 1.1 प्रतिशत अधिक रहा, जबकि इसकी मात्रा 5.6 प्रतिशत अधिक रही। इन 26 बाजारों में से 11 में मूल्य एवं मात्रा दोनों के लिहाज से सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की गई। ये नतीजे ऐसे समय आए हैं जब भारत घरेलू स्तर पर चावल की पर्याप्त उपलब्धता के बीच अपने निर्यात आधार को व्यापक बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में जोर अधिक चावल के लिए बाजार तलाशने के बजाय ऐसी विशिष्ट किस्मों की पहचान पर है जो उपयुक्तता, गुणवत्ता में निरंतरता और पकने के गुणों के आधार पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को निर्यात मूल्य में 65 प्रतिशत और मात्रा में 64 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बेल्जियम में क्रमश: 53.8 प्रतिशत और 44.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जर्मनी में निर्यात मूल्य 33.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि मात्रा 24.6 प्रतिशत बढ़ी। ब्रिटेन में निर्यात मूल्य 26.9 प्रतिशत और मात्रा 25.6 प्रतिशत बढ़ी। दक्षिण अफ्रीका में मूल्य 26 प्रतिशत, जबकि मात्रा 42.9 प्रतिशत बढ़ी। केन्या में दोनों में क्रमश: 22.3 प्रतिशत और 34.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। फ्रांस में निर्यात मूल्य 31.3 प्रतिशत और मात्रा 32.9 प्रतिशत बढ़ी। ब्रिटेन को निर्यात मूल्य में 26.9 प्रतिशत और मात्रा में 25.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मैक्सिको को निर्यात मूल्य 22.1 प्रतिशत और मात्रा 50.9 प्रतिशत बढ़ी। नीदरलैंड को निर्यात मूल्य 20.5 प्रतिशत और मात्रा 13.8 प्रतिशत बढ़ी, जबकि कनाडा को निर्यात मूल्य 10.2 प्रतिशत और मात्रा 9.1 प्रतिशत बढ़ी। सेनेगल को निर्यात मूल्य 5.3 प्रतिशत और मात्रा 29.9 प्रतिशत बढ़ी। व्यापार आंकड़े यह भी बताते हैं कि निर्यात वृद्धि का आकलन केवल मात्रा के आधार पर नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, मैक्सिको को चावल की खेप में 50.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि निर्यात मूल्य 22.1 प्रतिशत बढ़ा। केन्या और दक्षिण अफ्रीका में भी मात्रा की वृद्धि मूल्य की तुलना में काफी अधिक रही। यह विभिन्न बाजारों में कीमत, उत्पाद मिश्रण और मांग में अंतर को दर्शाता है। इससे उद्योग अधिक लक्षित रणनीति अपना रहा है। निर्यातक चावल को केवल एक जिंस के रूप में पेश करने के बजाय यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि भारतीय चावल की अलग-अलग किस्में संभावित बाजारों के उपभोक्ताओं के परिचित व्यंजनों में किस तरह बेहतर उपयोग की जा सकती हैं। इस रणनीति को 23 से 25 अक्टूबर को नयी दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) 2026 में आगे बढ़ाया जाएगा।
-
नई दिल्ली। 800 टन प्याज लेकर पहली ‘कांदा एक्सप्रेस’ बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेगी। यहां प्याज को 35 रुपये प्रति किलोग्राम की सब्सिडी वाली दर पर बेचा जाएगा। उपभोक्ता मामले सचिव निधि खरे ने मंगलवार को यह जानकारी दी। खरे ने सोशल मीडिया मंच पर बताया कि दिल्ली में प्याज की खुदरा बिक्री नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार की दुकानों के जरिए की जाएगी।उन्होंने बताया कि चार अन्य केंद्रों-चेन्नई, एर्नाकुलम, मदुरै और गुवाहाटी के लिए भी समर्पित रेलवे रेक के जरिए थोक प्याज भेजा जा रहा है। इन उपभोग केंद्रों के लिए भेजा जा रहा प्याज महाराष्ट्र के नासिक में रखे गए बफर स्टॉक का हिस्सा है। कीमतों में बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए इस स्टॉक को बाजार में उतारा जा रहा है।उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 24 अगस्त को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत सालाना आधार पर 59 प्रतिशत बढ़कर 43.53 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि एक साल पहले यह 27.37 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इसी तरह औसत थोक कीमत 68 प्रतिशत बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो एक साल पहले 21.23 रुपये प्रति किलोग्राम थी।प्रमुख शहरों में सोमवार को प्याज की खुदरा कीमत चेन्नई में 60 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जबकि एक साल पहले यह 33 रुपये थी। दिल्ली में कीमत 55 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जो एक साल पहले 35 रुपये थी। वहीं, कोलकाता में प्याज 53 रुपये प्रति किलोग्राम बिका।बड़े पैमाने पर प्याज की आवाजाही में लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से ‘कांदा एक्सप्रेस’ पहल 2024-25 में शुरू की गई थी और तब से इसका विस्तार किया गया है।
वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 12,000 टन बफर स्टॉक प्याज लेकर 14 रेलवे रेक पांच शहरों में भेजे गए थे। वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 86 रेक हो गई, जिनके जरिए देश के 16 प्रमुख शहरों में करीब 88,000 टन प्याज भेजा गया।प्याज का बफर स्टॉक केंद्र सरकार का रणनीतिक भंडार है, जिसे मुख्य रूप से आपूर्ति कम होने पर कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से बाजार को बचाने के लिए तैयार किया जाता है। सरकार मूल्य स्थिरीकरण कोष योजना के तहत विभिन्न उत्पादक राज्यों में प्याज का भंडार रखती है।सरकार ने 2026 के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक बनाए रखा है।सरकार के अनुसार, आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता पर्याप्त बनी रहने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2025-26 में प्याज का अनुमानित उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 307.67 लाख टन के लगभग बराबर है। प्याज की कीमतों में आमतौर पर अगस्त-सितंबर के दौरान मौसमी बढ़ोतरी देखी जाती है। इसके पीछे त्योहारी मांग, मौसम संबंधी व्यवधान, आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव और मांग के बदलते पैटर्न जैसे कारक प्रमुख हैं।


.jpeg)
.jpeg)




.jpeg)
.jpeg)


.jpeg)
.jpeg)













.jpg)