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 तालपुरीवासियों को एसटीपी की तेज बदबू से मिलेगी मुक्ति, बड़ी राशि मंजूर

 टी सहदेव
भिलाई नगर। तालपुरीवासियों को कॉलोनी में ही सथापित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की तेज बदबू से निजात मिलने के रास्ते की सारी अड़चनें दूर हो गई हैं। रिसाली नगर निगम आयुक्त द्वारा पिछले साल 28 अक्टूबर को भेजे गए एक पत्र के जवाब में प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने कॉलोनी के मलजल को बीएसपी के मौजूदा पंपिंग स्टेशन तक पहुंचाने की व्यवस्था के लिए 1 करोड़ 85 लाख 87 हजार रुपए की राशि स्वीकृत की। यह राशि 15 वें वित्त आयोग की मद से जुटाई जाएगी। संचालनालय के आदेश की सूचना रिसाली नगर निगम आयुक्त को इसी सोमवार को मिली।
 तालपुरीवासियों ने ली राहत की सांस 
कॉलोनीवासियों को जैसे ही यह खबर लगी, लोगों ने राहत की सांस ली। मालूम रहे कि रिहायशी इलाके में एसटीपी होने से वे लंबे अरसे से दुर्गंधमय वातावरण में जीने के लिए मजबूर हो गए थे। तालपुरीवासियों ने इस समस्या से मुक्ति पाने के लिए प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू से लेकर सांसद विजय बघेल और विधायक ललित चंद्राकर से गुहार लगाई थी, अब जाकर उनकी मेहनत रंग लाई। इतना अवश्य है कि बदबू से निजात मिलने में अभी वक्त लगेगा, क्योंकि निविदा प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है। यह प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही पाइप लाइन बिछाने की समय सीमा तय होगी।
इतना आसान नहीं था यह सफर 
उल्लेखनीय है कि बीएसपी ने दोनों ब्लॉकों के एसटीपी की पाइप लाइन को अपने सीवेज पाइप से जोड़ने हेतु 11 सितंबर 2020 को एनओसी दे दिया था। एनओसी दिलाने में एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुनील चौरसिया की खास भूमिका रही। इसके बावजूद इस दिशा में कोई प्रगति न होने से पार्षद सविता ढवस ने 8 फरवरी 2022 को आयुक्त  के सामने अपनी बात रखी तथा जनयाचिका के माध्यम से 17 फरवरी 2022 को शिकायत दर्ज कराई, जिसके जवाब में नगर निगम ने इस मद के लिए 2 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजने की बात कही। मामला आगे बढ़ता न देख पार्षद ने एक बार फिर 24 अप्रैल 2023 को कलेक्टोरेट में शिकायत की। इसके करीब दस महीने बाद निगम आयुक्त ने 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए उपलब्ध राशि में से 15 वें वित्त आयोग की मद से 1 करोड़ 95 लाख 16 हजार रुपए की राशि जारी करने का प्रस्ताव भेजा, लेकिन संचालनालय ने यह कहकर असहमति व्यक्त की कि प्रस्तावित कार्य 15 वें वित्त आयोग के टाइड ग्रांट (खास उद्देश्य) प्रावधान के अंतर्गत नहीं आते। प्रावधानों का हवाला देते हुए उसने आयुक्त को आयोग के दिशा-निर्देश के अनुरूप प्रस्ताव तैयार करने की सलाह अवश्य दी। आखिरकार पार्षद ने पिछले माह 23 तारीख को उप मुख्यमंत्री अरुण साव से एक पत्र के माध्यम से इस ज्वलंत समस्या के निराकरण के लिए उचित कार्यवाही करने की मांग की।
 

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