महतारी वंदन बना सहारा: पति को लकवा, अब घर की जिम्मेदारी संभाल रहीं नंदिनी
0- मजदूरी और दोना-पत्तल बनाकर चला रही घर, योजना के 1000 रुपये से मिल रही बड़ी राहत
रायपुर. जिंदगी कभी-कभी ऐसे मोड़ पर ला खड़ा करती है, जहां हिम्मत ही सबसे बड़ा सहारा बन जाती है। रायपुर स्थित पुरानी बस्ती की श्रीमती नंदिनी यदु की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। पति के अचानक लकवाग्रस्त हो जाने के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना।
नंदिनी बताती हैं कि उनके पति पहले एक निजी बैंक में गार्ड की नौकरी करते थे। परिवार की आय का यही मुख्य साधन था। लेकिन अचानक आए लकवे ने सब कुछ बदल दिया। पति काम करने की स्थिति में नहीं रहे और घर की आर्थिक स्थिति डगमगा गई।
ऐसे कठिन समय में नंदिनी ने घर की जिम्मेदारी संभालते हुए मजदूरी शुरू कर दी। वे घर निर्माण के कार्य में मजदूरी करती हैं और जब काम नहीं मिलता तो दोना-पत्तल बनाकर कुछ आमदनी जुटा लेती हैं। उनकी मेहनत से घर का खर्च तो चलने लगा, लेकिन पति के इलाज और दवाइयों का खर्च हमेशा चिंता बना रहता था।
नंदिनी कहती हैं कि महतारी वंदन योजना उनके लिए मुश्किल समय में सहारा बनकर आई है। योजना के तहत मिलने वाली प्रति माह 1000 रुपये की राशि से अब पति की दवाइयों और अन्य खर्चों में मदद मिल जाती है। नंदिनी के दो बच्चें है, तमाम कठिनाइयों के बीच भी नंदिनी अपने बच्चों की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं और हर दिन संघर्ष करते हुए परिवार को संभाल रही हैं।
वे भावुक होकर कहती हैं, “हजार रुपये भले ही किसी को कम लगें, लेकिन हमारे जैसे परिवार के लिए यह बड़ी राहत है। इससे हमें हर महीने थोड़ी आर्थिक सुरक्षा मिल जाती है।” नंदिनी ने बताया कि उनकी सास को भी इस योजना का लाभ मिल रहा है, जिससे वे अपनी दवाइयों का खर्च खुद उठा लेती हैं। इस तरह परिवार को हर महीने मिलने वाली राशि से मुश्किल समय में मजबूती मिल रही है। नंदिनी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि "विष्णु भैय्या की यह योजना गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।"









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