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 एल-नीनो के संभावित प्रभाव के दृष्टिगत किसानों को धान की बोनी एवं रोपा फसल में समय पर खरपतवार प्रबंधन के संबंध में दी गई समसामयिक सलाह

राजनांदगांव। कृषि विज्ञान केन्द्र राजनांदगांव द्वारा खरीफ मौसम में एल-नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए किसानों को धान की बोनी एवं रोपा फसल में समय पर खरपतवार प्रबंधन के संबंध में आवश्यक समसामयिक सलाह दी गई है। कृषि विज्ञान केन्द्र राजनांदगांव की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. गुंजन झा ने बताया कि एल-नीनो के कारण वर्षा की अनियमितता एवं नमी की कमी की संभावना रहती है। जिससे खरपतवारों की बढ़वार तेज होती है और धान की उपज 30-40 प्रतिशत तक प्रभावित हो सकती है। ऐसी परिस्थितियों में अनुशंसित समय पर शाकनाशियों का प्रयोग, खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना, जल संरक्षण एवं समुचित जल प्रबंधन अपनाने से खरपतवारों का प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है तथा फसल की उपज एवं गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।
धान की बोनी फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए बोनी के 0-3 दिन बाद (प्री-इमर्जेन्स) पेंडीमेथालिन 30 ईसी 1000 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा पायराजोसल्फ्यूरॉन-एथिल 80 ग्राम प्रति हेक्टेयर एवं बोनी के 15-20 दिन बाद (पोस्ट-इमर्जेन्स) पिनोक्सुलम  37.5 ग्राम प्रति हेक्टेयर, ट्राइफ्लोक्सीसल्फ्यूरॉन + इथॉक्सीसल्फ्यूरॉन 90 ग्राम प्रति हेक्टेयर, संकरी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए सायहेलोफॉप-ब्यूटाइल 300-320 मिली प्रति हेक्टेयर, चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए फिनॉक्साप्रॉप-इथाइल 250 मिली प्रति हेक्टेयर उपयोग करें। बोनी के 20-25 दिन बाद बिसपाइरीबैक सोडियम 80-100 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा पिनोक्सुलम + सायहेलोफॉप-ब्यूटाइल 882 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा फ्लोरपायरॉक्सीफेन + पिनोक्सुलम 500 मिली प्रति हेक्टेयर, चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए 2,4-डी अमाइन साल्ट 344-517 मिली प्रति हेक्टेयर का उपयोग करें।
धान की रोपा फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए रोपाई के 0-3 दिन बाद (प्री-इमर्जेन्स) पेंडीमेथालिन 1000 मिली प्रति हेक्टेयर, प्रीटिलाक्लोर 600 मिली प्रति हेक्टेयर, पायराजोसल्फ्यूरॉन-एथिल 80 ग्राम प्रति हेक्टेयर, बेन्सल्फ्यूरॉन मिथाइल +प्रीटिलाक्लोर 4.0 किग्रा प्रति हेक्टेयर एवं रोपाई के 15-20 दिन बाद पिनोक्सुलम 37.5 ग्राम प्रति हेक्टेयर, ट्राइफ्लोक्सीसल्फ्यूरॉन + इथॉक्सीसल्फ्यूरॉन 90 ग्राम प्रति हेक्टेयर तथा रोपाई के 20-25 दिन बाद बिसपाइरीबैक सोडियम 80-100 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा पिनोक्सुलम +सायहेलोफॉप-ब्यूटाइल 882 मिली प्रति हेक्टेयर उपयोग करे।
शाकनाशी का छिड़काव खेत में पर्याप्त नमी होने पर करें। अनुशंसित मात्रा में 375-500 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर का उपयोग करें। छिड़काव के बाद 24-48 घंटे तक खेत का पानी बाहर न निकालें। आवश्यकता होने पर 20-25 दिन बाद हाथ से निराई भी करें। कृषि विज्ञान केन्द्र राजनांदगांव द्वारा किसानों से एल-नीनो की संभावित परिस्थितियों में वैज्ञानिक खरपतवार प्रबंधन अपनाकर धान की फसल को खरपतवारों से सुरक्षित रखने तथा अधिक उत्पादन एवं बेहतर गुणवत्ता प्राप्त करने की अपील की गई है।
 

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