एम्स को म्यूकरमाइकोसिस पर 'अरोड़ा-नागरकर क्लासिफिकेशन' का कॉपीराइट
- दुनियाभर में ब्लैक फंगस के उपचार और परिणाम में मिलेगी मदद
- कोविड-19 के दौरान एम्स ने 300 से अधिक रोगियों का किया था उपचार
रायपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान को म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) के उपचार प्रबंधन पर 'अरोड़ा-नागरकर वर्गीकरण' का कॉपीराइट प्रदान किया गया है। यह वर्गीकरण ब्लैक फंगस के बेहतर उपचार और इसके परिणामों में दुनियाभर के ईएनटी विशेषज्ञों के लिए गाइड का कार्य करेगा। इससे रोगियों को ब्लैक फंगस के प्रथम चरण में ही और अधिक बेहतर चिकित्सा प्रबंधन प्राप्त होने की उम्मीद है। एम्स में यह वर्गीकरण देश के किसी सरकारी संस्थान में सबसे अधिक 300 से ज्यादा रोगियों के ब्लैक फंगस उपचार के आधार पर किया गया।
यह वर्गीकरण ईएनटी विभाग के प्रो. रिपुदमन अरोड़ा, पूर्व निदेशक प्रो. (डॉ.) नितिन एम. नागरकर, डॉ. आकाश अग्रवाल, प्रो. रेनू राजगुरु, डॉ. नील प्रभा सहित अन्य चिकित्सकों के शोध पर आधारित है। प्रो. अरोड़ा ने बताया कि इस वर्गीकरण की मदद से ईएनटी चिकित्सक ब्लैक फंगस के प्रकार, उपचार और संभावित परिणामों के बारे में पूर्वानुमान लगा सकेंगे। इससे रोगियों के उपचार प्रबंधन और उनके शीघ्र ठीक होने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में रोगियों के डेटा से कई अनुसंधान के बाद यह कॉपीराइट प्राप्त किया गया है।
कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए म्यूकरमाइकोसिस के उपचार प्रबंधन में शामिल विभिन्न विभागों ईएनटी, न्यूरोसर्जरी, मैक्सीलोफेशियल सर्जरी, मेडिसिन, रेडियोडायग्नोसिस, आप्थलमोलॉजी सहित विभिन्न विभागों के चिकित्सकों को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि इन विभागों के संयुक्त प्रयासों से ही इतनी बड़ी संख्या में रोगियों को उपचार प्रदान किया गया।
विभागाध्यक्ष प्रो. रेनू राजगुरु ने कहा है कि एम्स के ईएनटी विभाग ने म्यूकरमाइकोसिस के इलाज से न सिर्फ रोगियों को राहत प्रदान की बल्कि 10 से अधिक शोधपत्र प्रकाशित कर इसके उपचार में अमूल्य योगदान प्रदान किया। इनकी मदद से दुनियाभर के चिकित्सकों को ब्लैक फंगस के इलाज में नई जानकारियां प्राप्त हो सकेंगी। ब्लैकफंगस के उपचार में प्रो. नागरकर, प्रो. अरोड़ा के साथ डॉ. रूपा मेहता, डॉ. सतीश सतपुते और डॉ. शर्मिष्ठा चक्रवर्ती का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।













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