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कई राज्यों में उच्च ऋण के कारण तनाव के संकेत देने वाले आरबीआई के लेख पर मिलीजुली प्रतिक्रिया

नयी दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कई राज्यों में वित्तीय तनाव पैदा करने पर चिंता व्यक्त की और सुधारात्मक कदम उठाने का आह्वान किया। इस संबंध में पांच सबसे अधिक कर्जदार राज्यों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। कुछ ने आकलन को गलत बताया और अन्य ने खर्च में कटौती के लिए आय में वृद्धि की ओर इशारा किया। डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा की अगुवाई में अर्थशास्त्रियों के एक दल द्वारा तैयार आरबीआई के लेख में बृहस्पतिवार को कहा गया था कि पांच सबसे अधिक कर्जदार राज्यों - पंजाब, राजस्थान, बिहार, केरल और पश्चिम बंगाल - में गैर-जरूरी चीजों पर खर्च में कटौती करने की जरूरत है। लेख के मुताबिक राज्य के वित्त कई तरह के अप्रत्याशित झटकों की चपेट में हैं, जो उनके वित्तीय परिणामों को बदल सकते हैं। जिससे उनके बजट के मुकाबले चूक हो सकती है। लेख में कहा गया कि पड़ोसी श्रीलंका में हालिया आर्थिक संकट सार्वजनिक ऋण स्थिरता के महत्व को रेखांकित करता है। भारत में राज्यों के बीच राजकोषीय स्थिति में तनाव के संकेत हैं। केरल के पूर्व वित्त मंत्री और सत्तारूढ़ माकपा के राज्य सचिवालय सदस्य टी एम थॉमस इसाक ने कहा कि राज्य अपने खर्च में कटौती नहीं कर सकता है और आरबीआई ने राज्यों के संबंध में तनाव की चेतावनी देते हुए एक अदूरदर्शी दृष्टिकोण रखा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री के सलाहकार संयम लोढ़ा ने कहा कि सभी राज्यों के कर्ज बढ़े हैं और तुलनात्मक आंकड़े उपलब्ध हैं। यहां तक ​​कि केंद्र का कर्ज भी काफी बढ़ गया है। राज्य को जीएसटी मुआवजे का भुगतान केंद्र द्वारा नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘नोटबंदी, जीएसटी या यहां तक ​​कि कोरोना काल में भी गलत फैसलों से केंद्र ने राज्यों को हुए नुकसान के लिए कोई प्रोत्साहन नहीं दिया है।'' अर्थशास्त्रियों ने कहा कि राज्य के कर्ज में वृद्धि मुख्य रूप से लोगों की आजीविका का समर्थन करने के लिए सामाजिक कल्याण के उपायों के कारण हुई। अर्थशास्त्री और आईएसआई के पूर्व प्रोफेसर अभिरूप सरकार ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल का कर्ज-एसजीडीपी अनुपात 2011-12 से गिर रहा है, जो आरबीआई के शोध पत्र के मुताबिक उस समय यह 45 फीसदी पर था और अब घटकर 35 प्रतिशत पर आ चुका है।

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