इसरो ने गगनयान की पैराशूट प्रणाली का महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया
नयी दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गगनयान के क्रू मॉड्यूल के मुख्य पैराशूट का एक महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। यह परीक्षण मंगलवार को मध्यप्रदेश के श्योपुर में हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास संस्थापन (एडीआरडीई) ड्रॉप जोन में किया गया। इसरो ने बुधवार को एक बयान में कहा, ''इस परीक्षण का मकसद पहले मानवरहित गगनयान जी1 मिशन के दौरान, ज़्यादा से ज़्यादा संभावित भार की स्थिति में मुख्य पैराशूट की मज़बूती और डिज़ाइन को परखना था।'' परीक्षण के दौरान एक मुख्य पैराशूट और 'डमी' भार से युक्त एक सिम्युलेटेड असेंबली को भारतीय वायु सेना के आईएल-76 विमान से 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से गिराया गया। अलग होने पर, एक ड्रोग पैराशूट खोला गया। इस तरह के पैराशूट क्रू मॉड्यूल को स्थिर करने और उसकी गति को काफी कम करने के लिए जाने जाते हैं। इसके बाद, मुख्य पैराशूट खोला गया, जिससे पेलोड की गति धीमी होकर सुरक्षित टर्मिनल गति पर आ गई। इसरो ने कहा, ''गगनयान मिशन के लिए महत्वपूर्ण मुख्य पैराशूट प्रणाली के प्रमाणीकरण के उद्देश्य से आयोजित एकीकृत मुख्य पैराशूट एयरड्रॉप परीक्षण (आईमैट) शृंखला का यह पांचवां परीक्षण था। आईमैट-05 के सफल परीक्षण से यह विश्वास बढ़ा है कि गगनयान के पहले मानव रहित मिशन (जी-1) में मुख्य पैराशूट प्रणाली प्रभावी ढंग से काम करेगी।'' गगनयान के क्रू मॉड्यूल में चार अलग-अलग तरह के 10 पैराशूट लगे हैं।
इस प्रणाली में दो एपेक्स कवर सेपरेशन पैराशूट होते हैं, जो नीचे उतर रहे यान से एपेक्स कवर को अलग करते हैं। यह एपेक्स कवर पुनः प्रवेश के दौरान उत्पन्न अत्यधिक गर्मी से पैराशूट कंपार्टमेंट की सुरक्षा करता है। इसके बाद दो ड्रोग पैराशूट और तीन पायलट पैराशूट होते हैं, जो स्वतंत्र रूप से तीन मुख्य पैराशूट को बाहर निकालने और तैनात करने का कार्य करते हैं।










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